30+ D.El.Ed / BSTC Maths Lesson Plans (Class 1-5) PDF Download |  गणित पाठ योजना

30+ D.El.Ed / BSTC Maths Lesson Plan PDF (Class 3-5)
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30+ D.El.Ed / BSTC Maths Lesson Plans (गणित पाठ योजना) Class 3-5

प्राथमिक कक्षा 3 से 5 के लिए 30+ D.El.Ed / BSTC Maths Lesson Plans PDF Download Free (गणित) एकदम मुफ्त। Activity-based teaching approach for Primary classes.

D.El.Ed / BSTC Maths Lesson Plans - Ganit Path Yojana DElEd

D.El.Ed / BSTC Maths Lesson Plans PDF Download Free — अगर आप इंटरनेट पर deled maths lesson plan या ganit path yojana deled खोज रहे हैं, तो आप बिल्कुल सही जगह पर हैं। प्रारंभिक शिक्षा (Primary Education) में बच्चों को गणित (Mathematics) के बुनियादी नियमों से परिचित कराने के लिए ‘खेल विधि’ (Play-way method) सबसे उत्तम मानी जाती है। JBT, BTC, DIET और BSTC इंटर्नशिप के लिए हमने कक्षा 1 से 5 की NCERT (गणित का जादू) किताबों पर आधारित 30 अत्यंत प्रभावी maths lesson plan for deled (Mathematics Lesson Plans) तैयार की हैं।

यहाँ आपको गणित (Maths) के मुख्य विषयों— बुनियादी संख्या ज्ञान व संक्रियाएं, रेखागणित व मापन, और एडवांस प्राइमरी मैथ्स की 10-10 बेहतरीन पाठ योजनाएँ मिलेंगी। आप इन्हें सीधे अपनी इंटर्नशिप डायरी (Internship Diary) में उतार सकते हैं।

📑 D.El.Ed Ganit Lesson Plan Navigation

🅰️ बुनियादी संख्या ज्ञान व संक्रियाएं (10 टॉपिक्स)

🅱️ रेखागणित व मापन (10 टॉपिक्स)

Ⓒ एडवांस प्राइमरी मैथ्स (10 टॉपिक्स)

D.El.Ed Ganit Lesson Plan कैसे बनाएँ?

D.El.Ed (BTC) और BSTC की इंटर्नशिप डायरी के लिए ganit path yojana deled (Mathematics Lesson Plans) बनाना बहुत महत्वपूर्ण है। कक्षा 3, 4, और 5 के बच्चों के लिए deled maths lesson plan in hindi तैयार करते समय हमेशा ‘खेल विधि’ और ‘पूर्व ज्ञान’ का उपयोग करना चाहिए जिससे बच्चे आसानी से सीख सकें।

Best Ganit Path Yojana DElEd PDF

यहाँ दी गई सभी 30+ deled ganit lesson plan की सूची पूरी तरह से NCERT और SCERT (RBSE, UP DElEd) के नवीनतम पाठ्यक्रम पर आधारित है। आप इन maths lesson plan for deled को अपनी डायरी में उतार सकते हैं और इन्हें मुफ्त में PDF फॉर्मेट में डाउनलोड भी कर सकते हैं।

D.El.Ed Maths Lesson Plan 1: पाठ योजना क्रमांक – 1

योजना प्रकार: D.El.Ed Maths Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 1
कालांश: ………………..
विषय: गणित (Mathematics)
प्रकरण: खेल-खेल में गिनती (1 से 50 तक)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में गणित विषय के प्रति रुचि उत्पन्न करना।
  2. विद्यार्थियों में तार्किक एवं बौद्धिक क्षमता का विकास करना।
  3. विद्यार्थियों को दैनिक जीवन में गणित के महत्व से अवगत कराना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘खेल-खेल में गिनती (1 से 50 तक)’ का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे तथा इसके नियमों को जान सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘खेल-खेल में गिनती (1 से 50 तक)’ को समझ कर उसे अपने शब्दों में स्पष्ट कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी ‘खेल-खेल में गिनती (1 से 50 तक)’ से संबंधित ज्ञान का प्रयोग दैनिक जीवन की समस्याओं को सुलझाने में कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी ‘खेल-खेल में गिनती (1 से 50 तक)’ से संबंधित प्रश्नों को तेज़ी और शुद्धता से हल करने का कौशल प्राप्त कर सकेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी ‘खेल-खेल में गिनती (1 से 50 तक)’ से संबंधित समस्याओं और गणितीय पहेलियों को हल करने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में ‘खेल-खेल में गिनती (1 से 50 तक)’ और गणित विषय के प्रति सकारात्मक एवं तार्किक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

चॉक, डस्टर, लपेट फलक, संकेतक, ‘खेल-खेल में गिनती (1 से 50 तक)’ से संबंधित आकर्षक चार्ट, और मूर्त वस्तुएं (जैसे कंकड़, तीलियां, या ब्लॉक्स)।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

खेल विधि (Play-way Method), आगमन-निगमन विधि, और प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी संख्याओं और दैनिक जीवन के सामान्य हिसाब-किताब के बारे में सामान्य जानकारी रखते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.बच्चों, हम बाजार से सामान खरीदते समय दुकानदार को क्या देते हैं?पैसे / रुपये।
2.अगर आपने 10 रुपये का सामान लिया, तो दुकानदार आपको क्या देगा?सामान और बचे हुए पैसे।
3.दुकानदार बचे हुए पैसे कैसे निकालता है?जोड़ या घटाव करके / गिनकर।
4.संख्याओं को गिनने और हिसाब लगाने की इस प्रक्रिया को हम किस विषय में सीखते हैं?गणित में।
5.बच्चों, क्या आप ‘खेल-खेल में गिनती (1 से 50 तक)’ के बारे में विस्तार से जानते हैं?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, आज हम गणित विषय के अंतर्गत ‘खेल-खेल में गिनती (1 से 50 तक)’ के बारे में विस्तार से अध्ययन करेंगे और इसे मजेदार तरीके से सीखेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
विकासात्मक प्रश्नछात्राध्यापक ‘खेल-खेल में गिनती (1 से 50 तक)’ से संबंधित पूर्व ज्ञान को मुख्य पाठ से जोड़ने के लिए 2-3 सरल प्रश्न पूछेगा।छात्र अपनी समझ के अनुसार उत्तर देने का प्रयास करेंगे।मुख्य बिंदु
खेल-खेल में गिनती (1 से 50 तक) का स्पष्टीकरणछात्राध्यापक चार्ट व टीएलएम (TLM) की सहायता से ‘खेल-खेल में गिनती (1 से 50 तक)’ की अवधारणा को स्पष्ट करेगा।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे तथा महत्वपूर्ण बिंदुओं को समझेंगे।‘खेल-खेल में गिनती (1 से 50 तक)’ की परिभाषा
बोध प्रश्नपढ़ाए गए विषय की समझ जाँचने के लिए छात्राध्यापक छात्रों से बोध प्रश्न पूछेगा।छात्र पढ़ाए गए विषय के आधार पर सही उत्तर देंगे।सही उत्तर
खेल-खेल में गिनती (1 से 50 तक) के उदाहरणछात्राध्यापक श्यामपट्ट पर ‘खेल-खेल में गिनती (1 से 50 तक)’ से संबंधित कुछ उदाहरण और चित्र बनाकर हल करके दिखाएगा।छात्र उदाहरणों को अपनी अभ्यास पुस्तिका में उतारेंगे।हल किए गए उदाहरण
छात्र गतिविधि / सहभागिताछात्राध्यापक कक्षा को समूहों में बाँटकर ‘खेल-खेल में गिनती (1 से 50 तक)’ से संबंधित एक छोटी गतिविधि (Activity) करवाएगा।छात्र उत्साहपूर्वक गतिविधि में भाग लेंगे और सीखेंगे।गतिविधि का निष्कर्ष
श्यामपट्ट अभ्यास कार्यछात्राध्यापक छात्रों से कुछ प्रश्न पूछेगा और उन्हें श्यामपट्ट पर आकर हल करने के लिए आमंत्रित करेगा।छात्र निर्देशों का पालन करेंगे और श्यामपट्ट पर प्रश्नों को हल करेंगे।अभ्यास प्रश्न व हल

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. खेल-खेल में गिनती (1 से 50 तक) से आप क्या समझते हैं?
  2. खेल-खेल में गिनती (1 से 50 तक) का एक उदाहरण दीजिए।
  3. श्यामपट्ट पर दिए गए प्रश्न को हल करके दिखाइए।

10. गृहकार्य (Homework):

सभी छात्र अपनी अभ्यास पुस्तिका में खेल-खेल में गिनती (1 से 50 तक) से संबंधित 5 प्रश्न घर से हल करके लाएंगे।

Part of our 180+ free D.El.Ed / BSTC Maths Lesson Plans collection.

D.El.Ed Maths Lesson Plan 2: पाठ योजना क्रमांक – 2

योजना प्रकार: D.El.Ed Maths Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 3-4
कालांश: ………………..
विषय: गणित (Mathematics)
प्रकरण: संख्याओं का स्थानीय मान (Place Value)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में गणित विषय के प्रति रुचि उत्पन्न करना।
  2. विद्यार्थियों में तार्किक एवं बौद्धिक क्षमता का विकास करना।
  3. विद्यार्थियों को दैनिक जीवन में गणित के महत्व से अवगत कराना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘संख्याओं का स्थानीय मान (Place Value)’ का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे तथा इसके नियमों को जान सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘संख्याओं का स्थानीय मान (Place Value)’ को समझ कर उसे अपने शब्दों में स्पष्ट कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी ‘संख्याओं का स्थानीय मान (Place Value)’ से संबंधित ज्ञान का प्रयोग दैनिक जीवन की समस्याओं को सुलझाने में कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी ‘संख्याओं का स्थानीय मान (Place Value)’ से संबंधित प्रश्नों को तेज़ी और शुद्धता से हल करने का कौशल प्राप्त कर सकेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी ‘संख्याओं का स्थानीय मान (Place Value)’ से संबंधित समस्याओं और गणितीय पहेलियों को हल करने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में ‘संख्याओं का स्थानीय मान (Place Value)’ और गणित विषय के प्रति सकारात्मक एवं तार्किक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

चॉक, डस्टर, लपेट फलक, संकेतक, ‘संख्याओं का स्थानीय मान (Place Value)’ से संबंधित आकर्षक चार्ट, और मूर्त वस्तुएं (जैसे कंकड़, तीलियां, या ब्लॉक्स)।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

खेल विधि (Play-way Method), आगमन-निगमन विधि, और प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी संख्याओं और दैनिक जीवन के सामान्य हिसाब-किताब के बारे में सामान्य जानकारी रखते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.बच्चों, हम बाजार से सामान खरीदते समय दुकानदार को क्या देते हैं?पैसे / रुपये।
2.अगर आपने 10 रुपये का सामान लिया, तो दुकानदार आपको क्या देगा?सामान और बचे हुए पैसे।
3.दुकानदार बचे हुए पैसे कैसे निकालता है?जोड़ या घटाव करके / गिनकर।
4.संख्याओं को गिनने और हिसाब लगाने की इस प्रक्रिया को हम किस विषय में सीखते हैं?गणित में।
5.बच्चों, क्या आप ‘संख्याओं का स्थानीय मान (Place Value)’ के बारे में विस्तार से जानते हैं?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, आज हम गणित विषय के अंतर्गत ‘संख्याओं का स्थानीय मान (Place Value)’ के बारे में विस्तार से अध्ययन करेंगे और इसे मजेदार तरीके से सीखेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
विकासात्मक प्रश्नछात्राध्यापक ‘संख्याओं का स्थानीय मान (Place Value)’ से संबंधित पूर्व ज्ञान को मुख्य पाठ से जोड़ने के लिए 2-3 सरल प्रश्न पूछेगा।छात्र अपनी समझ के अनुसार उत्तर देने का प्रयास करेंगे।मुख्य बिंदु
संख्याओं का स्थानीय मान (Place Value) का स्पष्टीकरणछात्राध्यापक चार्ट व टीएलएम (TLM) की सहायता से ‘संख्याओं का स्थानीय मान (Place Value)’ की अवधारणा को स्पष्ट करेगा।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे तथा महत्वपूर्ण बिंदुओं को समझेंगे।‘संख्याओं का स्थानीय मान (Place Value)’ की परिभाषा
बोध प्रश्नपढ़ाए गए विषय की समझ जाँचने के लिए छात्राध्यापक छात्रों से बोध प्रश्न पूछेगा।छात्र पढ़ाए गए विषय के आधार पर सही उत्तर देंगे।सही उत्तर
संख्याओं का स्थानीय मान (Place Value) के उदाहरणछात्राध्यापक श्यामपट्ट पर ‘संख्याओं का स्थानीय मान (Place Value)’ से संबंधित कुछ उदाहरण और चित्र बनाकर हल करके दिखाएगा।छात्र उदाहरणों को अपनी अभ्यास पुस्तिका में उतारेंगे।हल किए गए उदाहरण
छात्र गतिविधि / सहभागिताछात्राध्यापक कक्षा को समूहों में बाँटकर ‘संख्याओं का स्थानीय मान (Place Value)’ से संबंधित एक छोटी गतिविधि (Activity) करवाएगा।छात्र उत्साहपूर्वक गतिविधि में भाग लेंगे और सीखेंगे।गतिविधि का निष्कर्ष
श्यामपट्ट अभ्यास कार्यछात्राध्यापक छात्रों से कुछ प्रश्न पूछेगा और उन्हें श्यामपट्ट पर आकर हल करने के लिए आमंत्रित करेगा।छात्र निर्देशों का पालन करेंगे और श्यामपट्ट पर प्रश्नों को हल करेंगे।अभ्यास प्रश्न व हल

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. संख्याओं का स्थानीय मान (Place Value) से आप क्या समझते हैं?
  2. संख्याओं का स्थानीय मान (Place Value) का एक उदाहरण दीजिए।
  3. श्यामपट्ट पर दिए गए प्रश्न को हल करके दिखाइए।

10. गृहकार्य (Homework):

सभी छात्र अपनी अभ्यास पुस्तिका में संख्याओं का स्थानीय मान (Place Value) से संबंधित 5 प्रश्न घर से हल करके लाएंगे।

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D.El.Ed Maths Lesson Plan 3: पाठ योजना क्रमांक – 3

योजना प्रकार: D.El.Ed Maths Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 1-2
कालांश: ………………..
विषय: गणित (Mathematics)
प्रकरण: एक अंक का साधारण जोड़ (Addition)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में गणित विषय के प्रति रुचि उत्पन्न करना।
  2. विद्यार्थियों में तार्किक एवं बौद्धिक क्षमता का विकास करना।
  3. विद्यार्थियों को दैनिक जीवन में गणित के महत्व से अवगत कराना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘एक अंक का साधारण जोड़ (Addition)’ का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे तथा इसके नियमों को जान सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘एक अंक का साधारण जोड़ (Addition)’ को समझ कर उसे अपने शब्दों में स्पष्ट कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी ‘एक अंक का साधारण जोड़ (Addition)’ से संबंधित ज्ञान का प्रयोग दैनिक जीवन की समस्याओं को सुलझाने में कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी ‘एक अंक का साधारण जोड़ (Addition)’ से संबंधित प्रश्नों को तेज़ी और शुद्धता से हल करने का कौशल प्राप्त कर सकेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी ‘एक अंक का साधारण जोड़ (Addition)’ से संबंधित समस्याओं और गणितीय पहेलियों को हल करने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में ‘एक अंक का साधारण जोड़ (Addition)’ और गणित विषय के प्रति सकारात्मक एवं तार्किक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

चॉक, डस्टर, लपेट फलक, संकेतक, ‘एक अंक का साधारण जोड़ (Addition)’ से संबंधित आकर्षक चार्ट, और मूर्त वस्तुएं (जैसे कंकड़, तीलियां, या ब्लॉक्स)।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

खेल विधि (Play-way Method), आगमन-निगमन विधि, और प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी संख्याओं और दैनिक जीवन के सामान्य हिसाब-किताब के बारे में सामान्य जानकारी रखते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.बच्चों, हम बाजार से सामान खरीदते समय दुकानदार को क्या देते हैं?पैसे / रुपये।
2.अगर आपने 10 रुपये का सामान लिया, तो दुकानदार आपको क्या देगा?सामान और बचे हुए पैसे।
3.दुकानदार बचे हुए पैसे कैसे निकालता है?जोड़ या घटाव करके / गिनकर।
4.संख्याओं को गिनने और हिसाब लगाने की इस प्रक्रिया को हम किस विषय में सीखते हैं?गणित में।
5.बच्चों, क्या आप ‘एक अंक का साधारण जोड़ (Addition)’ के बारे में विस्तार से जानते हैं?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, आज हम गणित विषय के अंतर्गत ‘एक अंक का साधारण जोड़ (Addition)’ के बारे में विस्तार से अध्ययन करेंगे और इसे मजेदार तरीके से सीखेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
विकासात्मक प्रश्नछात्राध्यापक ‘एक अंक का साधारण जोड़ (Addition)’ से संबंधित पूर्व ज्ञान को मुख्य पाठ से जोड़ने के लिए 2-3 सरल प्रश्न पूछेगा।छात्र अपनी समझ के अनुसार उत्तर देने का प्रयास करेंगे।मुख्य बिंदु
एक अंक का साधारण जोड़ (Addition) का स्पष्टीकरणछात्राध्यापक चार्ट व टीएलएम (TLM) की सहायता से ‘एक अंक का साधारण जोड़ (Addition)’ की अवधारणा को स्पष्ट करेगा।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे तथा महत्वपूर्ण बिंदुओं को समझेंगे।‘एक अंक का साधारण जोड़ (Addition)’ की परिभाषा
बोध प्रश्नपढ़ाए गए विषय की समझ जाँचने के लिए छात्राध्यापक छात्रों से बोध प्रश्न पूछेगा।छात्र पढ़ाए गए विषय के आधार पर सही उत्तर देंगे।सही उत्तर
एक अंक का साधारण जोड़ (Addition) के उदाहरणछात्राध्यापक श्यामपट्ट पर ‘एक अंक का साधारण जोड़ (Addition)’ से संबंधित कुछ उदाहरण और चित्र बनाकर हल करके दिखाएगा।छात्र उदाहरणों को अपनी अभ्यास पुस्तिका में उतारेंगे।हल किए गए उदाहरण
छात्र गतिविधि / सहभागिताछात्राध्यापक कक्षा को समूहों में बाँटकर ‘एक अंक का साधारण जोड़ (Addition)’ से संबंधित एक छोटी गतिविधि (Activity) करवाएगा।छात्र उत्साहपूर्वक गतिविधि में भाग लेंगे और सीखेंगे।गतिविधि का निष्कर्ष
श्यामपट्ट अभ्यास कार्यछात्राध्यापक छात्रों से कुछ प्रश्न पूछेगा और उन्हें श्यामपट्ट पर आकर हल करने के लिए आमंत्रित करेगा।छात्र निर्देशों का पालन करेंगे और श्यामपट्ट पर प्रश्नों को हल करेंगे।अभ्यास प्रश्न व हल

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. एक अंक का साधारण जोड़ (Addition) से आप क्या समझते हैं?
  2. एक अंक का साधारण जोड़ (Addition) का एक उदाहरण दीजिए।
  3. श्यामपट्ट पर दिए गए प्रश्न को हल करके दिखाइए।

10. गृहकार्य (Homework):

सभी छात्र अपनी अभ्यास पुस्तिका में एक अंक का साधारण जोड़ (Addition) से संबंधित 5 प्रश्न घर से हल करके लाएंगे।

Part of our 180+ free D.El.Ed / BSTC Maths Lesson Plans collection.

D.El.Ed Maths Lesson Plan 4: पाठ योजना क्रमांक – 4

योजना प्रकार: D.El.Ed Maths Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 2-3
कालांश: ………………..
विषय: गणित (Mathematics)
प्रकरण: दो अंकों का साधारण घटाव (Subtraction)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में गणित विषय के प्रति रुचि उत्पन्न करना।
  2. विद्यार्थियों में तार्किक एवं बौद्धिक क्षमता का विकास करना।
  3. विद्यार्थियों को दैनिक जीवन में गणित के महत्व से अवगत कराना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘दो अंकों का साधारण घटाव (Subtraction)’ का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे तथा इसके नियमों को जान सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘दो अंकों का साधारण घटाव (Subtraction)’ को समझ कर उसे अपने शब्दों में स्पष्ट कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी ‘दो अंकों का साधारण घटाव (Subtraction)’ से संबंधित ज्ञान का प्रयोग दैनिक जीवन की समस्याओं को सुलझाने में कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी ‘दो अंकों का साधारण घटाव (Subtraction)’ से संबंधित प्रश्नों को तेज़ी और शुद्धता से हल करने का कौशल प्राप्त कर सकेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी ‘दो अंकों का साधारण घटाव (Subtraction)’ से संबंधित समस्याओं और गणितीय पहेलियों को हल करने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में ‘दो अंकों का साधारण घटाव (Subtraction)’ और गणित विषय के प्रति सकारात्मक एवं तार्किक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

चॉक, डस्टर, लपेट फलक, संकेतक, ‘दो अंकों का साधारण घटाव (Subtraction)’ से संबंधित आकर्षक चार्ट, और मूर्त वस्तुएं (जैसे कंकड़, तीलियां, या ब्लॉक्स)।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

खेल विधि (Play-way Method), आगमन-निगमन विधि, और प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी संख्याओं और दैनिक जीवन के सामान्य हिसाब-किताब के बारे में सामान्य जानकारी रखते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.बच्चों, हम बाजार से सामान खरीदते समय दुकानदार को क्या देते हैं?पैसे / रुपये।
2.अगर आपने 10 रुपये का सामान लिया, तो दुकानदार आपको क्या देगा?सामान और बचे हुए पैसे।
3.दुकानदार बचे हुए पैसे कैसे निकालता है?जोड़ या घटाव करके / गिनकर।
4.संख्याओं को गिनने और हिसाब लगाने की इस प्रक्रिया को हम किस विषय में सीखते हैं?गणित में।
5.बच्चों, क्या आप ‘दो अंकों का साधारण घटाव (Subtraction)’ के बारे में विस्तार से जानते हैं?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, आज हम गणित विषय के अंतर्गत ‘दो अंकों का साधारण घटाव (Subtraction)’ के बारे में विस्तार से अध्ययन करेंगे और इसे मजेदार तरीके से सीखेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
विकासात्मक प्रश्नछात्राध्यापक ‘दो अंकों का साधारण घटाव (Subtraction)’ से संबंधित पूर्व ज्ञान को मुख्य पाठ से जोड़ने के लिए 2-3 सरल प्रश्न पूछेगा।छात्र अपनी समझ के अनुसार उत्तर देने का प्रयास करेंगे।मुख्य बिंदु
दो अंकों का साधारण घटाव (Subtraction) का स्पष्टीकरणछात्राध्यापक चार्ट व टीएलएम (TLM) की सहायता से ‘दो अंकों का साधारण घटाव (Subtraction)’ की अवधारणा को स्पष्ट करेगा।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे तथा महत्वपूर्ण बिंदुओं को समझेंगे।‘दो अंकों का साधारण घटाव (Subtraction)’ की परिभाषा
बोध प्रश्नपढ़ाए गए विषय की समझ जाँचने के लिए छात्राध्यापक छात्रों से बोध प्रश्न पूछेगा।छात्र पढ़ाए गए विषय के आधार पर सही उत्तर देंगे।सही उत्तर
दो अंकों का साधारण घटाव (Subtraction) के उदाहरणछात्राध्यापक श्यामपट्ट पर ‘दो अंकों का साधारण घटाव (Subtraction)’ से संबंधित कुछ उदाहरण और चित्र बनाकर हल करके दिखाएगा।छात्र उदाहरणों को अपनी अभ्यास पुस्तिका में उतारेंगे।हल किए गए उदाहरण
छात्र गतिविधि / सहभागिताछात्राध्यापक कक्षा को समूहों में बाँटकर ‘दो अंकों का साधारण घटाव (Subtraction)’ से संबंधित एक छोटी गतिविधि (Activity) करवाएगा।छात्र उत्साहपूर्वक गतिविधि में भाग लेंगे और सीखेंगे।गतिविधि का निष्कर्ष
श्यामपट्ट अभ्यास कार्यछात्राध्यापक छात्रों से कुछ प्रश्न पूछेगा और उन्हें श्यामपट्ट पर आकर हल करने के लिए आमंत्रित करेगा।छात्र निर्देशों का पालन करेंगे और श्यामपट्ट पर प्रश्नों को हल करेंगे।अभ्यास प्रश्न व हल

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. दो अंकों का साधारण घटाव (Subtraction) से आप क्या समझते हैं?
  2. दो अंकों का साधारण घटाव (Subtraction) का एक उदाहरण दीजिए।
  3. श्यामपट्ट पर दिए गए प्रश्न को हल करके दिखाइए।

10. गृहकार्य (Homework):

सभी छात्र अपनी अभ्यास पुस्तिका में दो अंकों का साधारण घटाव (Subtraction) से संबंधित 5 प्रश्न घर से हल करके लाएंगे।

Part of our 180+ free D.El.Ed / BSTC Maths Lesson Plans collection.

D.El.Ed Maths Lesson Plan 5: पाठ योजना क्रमांक – 5

योजना प्रकार: D.El.Ed Maths Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 3-4
कालांश: ………………..
विषय: गणित (Mathematics)
प्रकरण: हासिल वाला जोड़
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में गणित विषय के प्रति रुचि उत्पन्न करना।
  2. विद्यार्थियों में तार्किक एवं बौद्धिक क्षमता का विकास करना।
  3. विद्यार्थियों को दैनिक जीवन में गणित के महत्व से अवगत कराना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘हासिल वाला जोड़’ का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे तथा इसके नियमों को जान सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘हासिल वाला जोड़’ को समझ कर उसे अपने शब्दों में स्पष्ट कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी ‘हासिल वाला जोड़’ से संबंधित ज्ञान का प्रयोग दैनिक जीवन की समस्याओं को सुलझाने में कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी ‘हासिल वाला जोड़’ से संबंधित प्रश्नों को तेज़ी और शुद्धता से हल करने का कौशल प्राप्त कर सकेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी ‘हासिल वाला जोड़’ से संबंधित समस्याओं और गणितीय पहेलियों को हल करने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में ‘हासिल वाला जोड़’ और गणित विषय के प्रति सकारात्मक एवं तार्किक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

चॉक, डस्टर, लपेट फलक, संकेतक, ‘हासिल वाला जोड़’ से संबंधित आकर्षक चार्ट, और मूर्त वस्तुएं (जैसे कंकड़, तीलियां, या ब्लॉक्स)।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

खेल विधि (Play-way Method), आगमन-निगमन विधि, और प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी संख्याओं और दैनिक जीवन के सामान्य हिसाब-किताब के बारे में सामान्य जानकारी रखते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.बच्चों, हम बाजार से सामान खरीदते समय दुकानदार को क्या देते हैं?पैसे / रुपये।
2.अगर आपने 10 रुपये का सामान लिया, तो दुकानदार आपको क्या देगा?सामान और बचे हुए पैसे।
3.दुकानदार बचे हुए पैसे कैसे निकालता है?जोड़ या घटाव करके / गिनकर।
4.संख्याओं को गिनने और हिसाब लगाने की इस प्रक्रिया को हम किस विषय में सीखते हैं?गणित में।
5.बच्चों, क्या आप ‘हासिल वाला जोड़’ के बारे में विस्तार से जानते हैं?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, आज हम गणित विषय के अंतर्गत ‘हासिल वाला जोड़’ के बारे में विस्तार से अध्ययन करेंगे और इसे मजेदार तरीके से सीखेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
विकासात्मक प्रश्नछात्राध्यापक ‘हासिल वाला जोड़’ से संबंधित पूर्व ज्ञान को मुख्य पाठ से जोड़ने के लिए 2-3 सरल प्रश्न पूछेगा।छात्र अपनी समझ के अनुसार उत्तर देने का प्रयास करेंगे।मुख्य बिंदु
हासिल वाला जोड़ का स्पष्टीकरणछात्राध्यापक चार्ट व टीएलएम (TLM) की सहायता से ‘हासिल वाला जोड़’ की अवधारणा को स्पष्ट करेगा।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे तथा महत्वपूर्ण बिंदुओं को समझेंगे।‘हासिल वाला जोड़’ की परिभाषा
बोध प्रश्नपढ़ाए गए विषय की समझ जाँचने के लिए छात्राध्यापक छात्रों से बोध प्रश्न पूछेगा।छात्र पढ़ाए गए विषय के आधार पर सही उत्तर देंगे।सही उत्तर
हासिल वाला जोड़ के उदाहरणछात्राध्यापक श्यामपट्ट पर ‘हासिल वाला जोड़’ से संबंधित कुछ उदाहरण और चित्र बनाकर हल करके दिखाएगा।छात्र उदाहरणों को अपनी अभ्यास पुस्तिका में उतारेंगे।हल किए गए उदाहरण
छात्र गतिविधि / सहभागिताछात्राध्यापक कक्षा को समूहों में बाँटकर ‘हासिल वाला जोड़’ से संबंधित एक छोटी गतिविधि (Activity) करवाएगा।छात्र उत्साहपूर्वक गतिविधि में भाग लेंगे और सीखेंगे।गतिविधि का निष्कर्ष
श्यामपट्ट अभ्यास कार्यछात्राध्यापक छात्रों से कुछ प्रश्न पूछेगा और उन्हें श्यामपट्ट पर आकर हल करने के लिए आमंत्रित करेगा।छात्र निर्देशों का पालन करेंगे और श्यामपट्ट पर प्रश्नों को हल करेंगे।अभ्यास प्रश्न व हल

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. हासिल वाला जोड़ से आप क्या समझते हैं?
  2. हासिल वाला जोड़ का एक उदाहरण दीजिए।
  3. श्यामपट्ट पर दिए गए प्रश्न को हल करके दिखाइए।

10. गृहकार्य (Homework):

सभी छात्र अपनी अभ्यास पुस्तिका में हासिल वाला जोड़ से संबंधित 5 प्रश्न घर से हल करके लाएंगे।

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D.El.Ed Maths Lesson Plan 6: पाठ योजना क्रमांक – 6

योजना प्रकार: D.El.Ed Maths Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 3-4
कालांश: ………………..
विषय: गणित (Mathematics)
प्रकरण: उधार वाला घटाव (Borrow Subtraction)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में गणित विषय के प्रति रुचि उत्पन्न करना।
  2. विद्यार्थियों में तार्किक एवं बौद्धिक क्षमता का विकास करना।
  3. विद्यार्थियों को दैनिक जीवन में गणित के महत्व से अवगत कराना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘उधार वाला घटाव (Borrow Subtraction)’ का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे तथा इसके नियमों को जान सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘उधार वाला घटाव (Borrow Subtraction)’ को समझ कर उसे अपने शब्दों में स्पष्ट कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी ‘उधार वाला घटाव (Borrow Subtraction)’ से संबंधित ज्ञान का प्रयोग दैनिक जीवन की समस्याओं को सुलझाने में कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी ‘उधार वाला घटाव (Borrow Subtraction)’ से संबंधित प्रश्नों को तेज़ी और शुद्धता से हल करने का कौशल प्राप्त कर सकेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी ‘उधार वाला घटाव (Borrow Subtraction)’ से संबंधित समस्याओं और गणितीय पहेलियों को हल करने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में ‘उधार वाला घटाव (Borrow Subtraction)’ और गणित विषय के प्रति सकारात्मक एवं तार्किक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

चॉक, डस्टर, लपेट फलक, संकेतक, ‘उधार वाला घटाव (Borrow Subtraction)’ से संबंधित आकर्षक चार्ट, और मूर्त वस्तुएं (जैसे कंकड़, तीलियां, या ब्लॉक्स)।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

खेल विधि (Play-way Method), आगमन-निगमन विधि, और प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी संख्याओं और दैनिक जीवन के सामान्य हिसाब-किताब के बारे में सामान्य जानकारी रखते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.बच्चों, हम बाजार से सामान खरीदते समय दुकानदार को क्या देते हैं?पैसे / रुपये।
2.अगर आपने 10 रुपये का सामान लिया, तो दुकानदार आपको क्या देगा?सामान और बचे हुए पैसे।
3.दुकानदार बचे हुए पैसे कैसे निकालता है?जोड़ या घटाव करके / गिनकर।
4.संख्याओं को गिनने और हिसाब लगाने की इस प्रक्रिया को हम किस विषय में सीखते हैं?गणित में।
5.बच्चों, क्या आप ‘उधार वाला घटाव (Borrow Subtraction)’ के बारे में विस्तार से जानते हैं?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, आज हम गणित विषय के अंतर्गत ‘उधार वाला घटाव (Borrow Subtraction)’ के बारे में विस्तार से अध्ययन करेंगे और इसे मजेदार तरीके से सीखेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
विकासात्मक प्रश्नछात्राध्यापक ‘उधार वाला घटाव (Borrow Subtraction)’ से संबंधित पूर्व ज्ञान को मुख्य पाठ से जोड़ने के लिए 2-3 सरल प्रश्न पूछेगा।छात्र अपनी समझ के अनुसार उत्तर देने का प्रयास करेंगे।मुख्य बिंदु
उधार वाला घटाव (Borrow Subtraction) का स्पष्टीकरणछात्राध्यापक चार्ट व टीएलएम (TLM) की सहायता से ‘उधार वाला घटाव (Borrow Subtraction)’ की अवधारणा को स्पष्ट करेगा।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे तथा महत्वपूर्ण बिंदुओं को समझेंगे।‘उधार वाला घटाव (Borrow Subtraction)’ की परिभाषा
बोध प्रश्नपढ़ाए गए विषय की समझ जाँचने के लिए छात्राध्यापक छात्रों से बोध प्रश्न पूछेगा।छात्र पढ़ाए गए विषय के आधार पर सही उत्तर देंगे।सही उत्तर
उधार वाला घटाव (Borrow Subtraction) के उदाहरणछात्राध्यापक श्यामपट्ट पर ‘उधार वाला घटाव (Borrow Subtraction)’ से संबंधित कुछ उदाहरण और चित्र बनाकर हल करके दिखाएगा।छात्र उदाहरणों को अपनी अभ्यास पुस्तिका में उतारेंगे।हल किए गए उदाहरण
छात्र गतिविधि / सहभागिताछात्राध्यापक कक्षा को समूहों में बाँटकर ‘उधार वाला घटाव (Borrow Subtraction)’ से संबंधित एक छोटी गतिविधि (Activity) करवाएगा।छात्र उत्साहपूर्वक गतिविधि में भाग लेंगे और सीखेंगे।गतिविधि का निष्कर्ष
श्यामपट्ट अभ्यास कार्यछात्राध्यापक छात्रों से कुछ प्रश्न पूछेगा और उन्हें श्यामपट्ट पर आकर हल करने के लिए आमंत्रित करेगा।छात्र निर्देशों का पालन करेंगे और श्यामपट्ट पर प्रश्नों को हल करेंगे।अभ्यास प्रश्न व हल

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. उधार वाला घटाव (Borrow Subtraction) से आप क्या समझते हैं?
  2. उधार वाला घटाव (Borrow Subtraction) का एक उदाहरण दीजिए।
  3. श्यामपट्ट पर दिए गए प्रश्न को हल करके दिखाइए।

10. गृहकार्य (Homework):

सभी छात्र अपनी अभ्यास पुस्तिका में उधार वाला घटाव (Borrow Subtraction) से संबंधित 5 प्रश्न घर से हल करके लाएंगे।

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D.El.Ed Maths Lesson Plan 7: पाठ योजना क्रमांक – 7

योजना प्रकार: D.El.Ed Maths Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 2-3
कालांश: ………………..
विषय: गणित (Mathematics)
प्रकरण: गुणा (Multiplication) की बुनियादी अवधारणा
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में गणित विषय के प्रति रुचि उत्पन्न करना।
  2. विद्यार्थियों में तार्किक एवं बौद्धिक क्षमता का विकास करना।
  3. विद्यार्थियों को दैनिक जीवन में गणित के महत्व से अवगत कराना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘गुणा (Multiplication) की बुनियादी अवधारणा’ का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे तथा इसके नियमों को जान सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘गुणा (Multiplication) की बुनियादी अवधारणा’ को समझ कर उसे अपने शब्दों में स्पष्ट कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी ‘गुणा (Multiplication) की बुनियादी अवधारणा’ से संबंधित ज्ञान का प्रयोग दैनिक जीवन की समस्याओं को सुलझाने में कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी ‘गुणा (Multiplication) की बुनियादी अवधारणा’ से संबंधित प्रश्नों को तेज़ी और शुद्धता से हल करने का कौशल प्राप्त कर सकेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी ‘गुणा (Multiplication) की बुनियादी अवधारणा’ से संबंधित समस्याओं और गणितीय पहेलियों को हल करने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में ‘गुणा (Multiplication) की बुनियादी अवधारणा’ और गणित विषय के प्रति सकारात्मक एवं तार्किक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

चॉक, डस्टर, लपेट फलक, संकेतक, ‘गुणा (Multiplication) की बुनियादी अवधारणा’ से संबंधित आकर्षक चार्ट, और मूर्त वस्तुएं (जैसे कंकड़, तीलियां, या ब्लॉक्स)।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

खेल विधि (Play-way Method), आगमन-निगमन विधि, और प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी संख्याओं और दैनिक जीवन के सामान्य हिसाब-किताब के बारे में सामान्य जानकारी रखते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.बच्चों, हम बाजार से सामान खरीदते समय दुकानदार को क्या देते हैं?पैसे / रुपये।
2.अगर आपने 10 रुपये का सामान लिया, तो दुकानदार आपको क्या देगा?सामान और बचे हुए पैसे।
3.दुकानदार बचे हुए पैसे कैसे निकालता है?जोड़ या घटाव करके / गिनकर।
4.संख्याओं को गिनने और हिसाब लगाने की इस प्रक्रिया को हम किस विषय में सीखते हैं?गणित में।
5.बच्चों, क्या आप ‘गुणा (Multiplication) की बुनियादी अवधारणा’ के बारे में विस्तार से जानते हैं?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, आज हम गणित विषय के अंतर्गत ‘गुणा (Multiplication) की बुनियादी अवधारणा’ के बारे में विस्तार से अध्ययन करेंगे और इसे मजेदार तरीके से सीखेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
विकासात्मक प्रश्नछात्राध्यापक ‘गुणा (Multiplication) की बुनियादी अवधारणा’ से संबंधित पूर्व ज्ञान को मुख्य पाठ से जोड़ने के लिए 2-3 सरल प्रश्न पूछेगा।छात्र अपनी समझ के अनुसार उत्तर देने का प्रयास करेंगे।मुख्य बिंदु
गुणा (Multiplication) की बुनियादी अवधारणा का स्पष्टीकरणछात्राध्यापक चार्ट व टीएलएम (TLM) की सहायता से ‘गुणा (Multiplication) की बुनियादी अवधारणा’ की अवधारणा को स्पष्ट करेगा।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे तथा महत्वपूर्ण बिंदुओं को समझेंगे।‘गुणा (Multiplication) की बुनियादी अवधारणा’ की परिभाषा
बोध प्रश्नपढ़ाए गए विषय की समझ जाँचने के लिए छात्राध्यापक छात्रों से बोध प्रश्न पूछेगा।छात्र पढ़ाए गए विषय के आधार पर सही उत्तर देंगे।सही उत्तर
गुणा (Multiplication) की बुनियादी अवधारणा के उदाहरणछात्राध्यापक श्यामपट्ट पर ‘गुणा (Multiplication) की बुनियादी अवधारणा’ से संबंधित कुछ उदाहरण और चित्र बनाकर हल करके दिखाएगा।छात्र उदाहरणों को अपनी अभ्यास पुस्तिका में उतारेंगे।हल किए गए उदाहरण
छात्र गतिविधि / सहभागिताछात्राध्यापक कक्षा को समूहों में बाँटकर ‘गुणा (Multiplication) की बुनियादी अवधारणा’ से संबंधित एक छोटी गतिविधि (Activity) करवाएगा।छात्र उत्साहपूर्वक गतिविधि में भाग लेंगे और सीखेंगे।गतिविधि का निष्कर्ष
श्यामपट्ट अभ्यास कार्यछात्राध्यापक छात्रों से कुछ प्रश्न पूछेगा और उन्हें श्यामपट्ट पर आकर हल करने के लिए आमंत्रित करेगा।छात्र निर्देशों का पालन करेंगे और श्यामपट्ट पर प्रश्नों को हल करेंगे।अभ्यास प्रश्न व हल

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. गुणा (Multiplication) की बुनियादी अवधारणा से आप क्या समझते हैं?
  2. गुणा (Multiplication) की बुनियादी अवधारणा का एक उदाहरण दीजिए।
  3. श्यामपट्ट पर दिए गए प्रश्न को हल करके दिखाइए।

10. गृहकार्य (Homework):

सभी छात्र अपनी अभ्यास पुस्तिका में गुणा (Multiplication) की बुनियादी अवधारणा से संबंधित 5 प्रश्न घर से हल करके लाएंगे।

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D.El.Ed Maths Lesson Plan 8: पाठ योजना क्रमांक – 8

योजना प्रकार: D.El.Ed Maths Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 3-5
कालांश: ………………..
विषय: गणित (Mathematics)
प्रकरण: भाग (Division) करने का सरल तरीका
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में गणित विषय के प्रति रुचि उत्पन्न करना।
  2. विद्यार्थियों में तार्किक एवं बौद्धिक क्षमता का विकास करना।
  3. विद्यार्थियों को दैनिक जीवन में गणित के महत्व से अवगत कराना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘भाग (Division) करने का सरल तरीका’ का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे तथा इसके नियमों को जान सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘भाग (Division) करने का सरल तरीका’ को समझ कर उसे अपने शब्दों में स्पष्ट कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी ‘भाग (Division) करने का सरल तरीका’ से संबंधित ज्ञान का प्रयोग दैनिक जीवन की समस्याओं को सुलझाने में कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी ‘भाग (Division) करने का सरल तरीका’ से संबंधित प्रश्नों को तेज़ी और शुद्धता से हल करने का कौशल प्राप्त कर सकेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी ‘भाग (Division) करने का सरल तरीका’ से संबंधित समस्याओं और गणितीय पहेलियों को हल करने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में ‘भाग (Division) करने का सरल तरीका’ और गणित विषय के प्रति सकारात्मक एवं तार्किक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

चॉक, डस्टर, लपेट फलक, संकेतक, ‘भाग (Division) करने का सरल तरीका’ से संबंधित आकर्षक चार्ट, और मूर्त वस्तुएं (जैसे कंकड़, तीलियां, या ब्लॉक्स)।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

खेल विधि (Play-way Method), आगमन-निगमन विधि, और प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी संख्याओं और दैनिक जीवन के सामान्य हिसाब-किताब के बारे में सामान्य जानकारी रखते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.बच्चों, हम बाजार से सामान खरीदते समय दुकानदार को क्या देते हैं?पैसे / रुपये।
2.अगर आपने 10 रुपये का सामान लिया, तो दुकानदार आपको क्या देगा?सामान और बचे हुए पैसे।
3.दुकानदार बचे हुए पैसे कैसे निकालता है?जोड़ या घटाव करके / गिनकर।
4.संख्याओं को गिनने और हिसाब लगाने की इस प्रक्रिया को हम किस विषय में सीखते हैं?गणित में।
5.बच्चों, क्या आप ‘भाग (Division) करने का सरल तरीका’ के बारे में विस्तार से जानते हैं?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, आज हम गणित विषय के अंतर्गत ‘भाग (Division) करने का सरल तरीका’ के बारे में विस्तार से अध्ययन करेंगे और इसे मजेदार तरीके से सीखेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
विकासात्मक प्रश्नछात्राध्यापक ‘भाग (Division) करने का सरल तरीका’ से संबंधित पूर्व ज्ञान को मुख्य पाठ से जोड़ने के लिए 2-3 सरल प्रश्न पूछेगा।छात्र अपनी समझ के अनुसार उत्तर देने का प्रयास करेंगे।मुख्य बिंदु
भाग (Division) करने का सरल तरीका का स्पष्टीकरणछात्राध्यापक चार्ट व टीएलएम (TLM) की सहायता से ‘भाग (Division) करने का सरल तरीका’ की अवधारणा को स्पष्ट करेगा।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे तथा महत्वपूर्ण बिंदुओं को समझेंगे।‘भाग (Division) करने का सरल तरीका’ की परिभाषा
बोध प्रश्नपढ़ाए गए विषय की समझ जाँचने के लिए छात्राध्यापक छात्रों से बोध प्रश्न पूछेगा।छात्र पढ़ाए गए विषय के आधार पर सही उत्तर देंगे।सही उत्तर
भाग (Division) करने का सरल तरीका के उदाहरणछात्राध्यापक श्यामपट्ट पर ‘भाग (Division) करने का सरल तरीका’ से संबंधित कुछ उदाहरण और चित्र बनाकर हल करके दिखाएगा।छात्र उदाहरणों को अपनी अभ्यास पुस्तिका में उतारेंगे।हल किए गए उदाहरण
छात्र गतिविधि / सहभागिताछात्राध्यापक कक्षा को समूहों में बाँटकर ‘भाग (Division) करने का सरल तरीका’ से संबंधित एक छोटी गतिविधि (Activity) करवाएगा।छात्र उत्साहपूर्वक गतिविधि में भाग लेंगे और सीखेंगे।गतिविधि का निष्कर्ष
श्यामपट्ट अभ्यास कार्यछात्राध्यापक छात्रों से कुछ प्रश्न पूछेगा और उन्हें श्यामपट्ट पर आकर हल करने के लिए आमंत्रित करेगा।छात्र निर्देशों का पालन करेंगे और श्यामपट्ट पर प्रश्नों को हल करेंगे।अभ्यास प्रश्न व हल

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. भाग (Division) करने का सरल तरीका से आप क्या समझते हैं?
  2. भाग (Division) करने का सरल तरीका का एक उदाहरण दीजिए।
  3. श्यामपट्ट पर दिए गए प्रश्न को हल करके दिखाइए।

10. गृहकार्य (Homework):

सभी छात्र अपनी अभ्यास पुस्तिका में भाग (Division) करने का सरल तरीका से संबंधित 5 प्रश्न घर से हल करके लाएंगे।

Part of our 180+ free D.El.Ed / BSTC Maths Lesson Plans collection.

D.El.Ed Maths Lesson Plan 9: पाठ योजना क्रमांक – 9

योजना प्रकार: D.El.Ed Maths Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 3-4
कालांश: ………………..
विषय: गणित (Mathematics)
प्रकरण: सम और विषम संख्याएं (Even & Odd Numbers)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में गणित विषय के प्रति रुचि उत्पन्न करना।
  2. विद्यार्थियों में तार्किक एवं बौद्धिक क्षमता का विकास करना।
  3. विद्यार्थियों को दैनिक जीवन में गणित के महत्व से अवगत कराना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘सम और विषम संख्याएं (Even & Odd Numbers)’ का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे तथा इसके नियमों को जान सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘सम और विषम संख्याएं (Even & Odd Numbers)’ को समझ कर उसे अपने शब्दों में स्पष्ट कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी ‘सम और विषम संख्याएं (Even & Odd Numbers)’ से संबंधित ज्ञान का प्रयोग दैनिक जीवन की समस्याओं को सुलझाने में कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी ‘सम और विषम संख्याएं (Even & Odd Numbers)’ से संबंधित प्रश्नों को तेज़ी और शुद्धता से हल करने का कौशल प्राप्त कर सकेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी ‘सम और विषम संख्याएं (Even & Odd Numbers)’ से संबंधित समस्याओं और गणितीय पहेलियों को हल करने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में ‘सम और विषम संख्याएं (Even & Odd Numbers)’ और गणित विषय के प्रति सकारात्मक एवं तार्किक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

चॉक, डस्टर, लपेट फलक, संकेतक, ‘सम और विषम संख्याएं (Even & Odd Numbers)’ से संबंधित आकर्षक चार्ट, और मूर्त वस्तुएं (जैसे कंकड़, तीलियां, या ब्लॉक्स)।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

खेल विधि (Play-way Method), आगमन-निगमन विधि, और प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी संख्याओं और दैनिक जीवन के सामान्य हिसाब-किताब के बारे में सामान्य जानकारी रखते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.बच्चों, हम बाजार से सामान खरीदते समय दुकानदार को क्या देते हैं?पैसे / रुपये।
2.अगर आपने 10 रुपये का सामान लिया, तो दुकानदार आपको क्या देगा?सामान और बचे हुए पैसे।
3.दुकानदार बचे हुए पैसे कैसे निकालता है?जोड़ या घटाव करके / गिनकर।
4.संख्याओं को गिनने और हिसाब लगाने की इस प्रक्रिया को हम किस विषय में सीखते हैं?गणित में।
5.बच्चों, क्या आप ‘सम और विषम संख्याएं (Even & Odd Numbers)’ के बारे में विस्तार से जानते हैं?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, आज हम गणित विषय के अंतर्गत ‘सम और विषम संख्याएं (Even & Odd Numbers)’ के बारे में विस्तार से अध्ययन करेंगे और इसे मजेदार तरीके से सीखेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
विकासात्मक प्रश्नछात्राध्यापक ‘सम और विषम संख्याएं (Even & Odd Numbers)’ से संबंधित पूर्व ज्ञान को मुख्य पाठ से जोड़ने के लिए 2-3 सरल प्रश्न पूछेगा।छात्र अपनी समझ के अनुसार उत्तर देने का प्रयास करेंगे।मुख्य बिंदु
सम और विषम संख्याएं (Even & Odd Numbers) का स्पष्टीकरणछात्राध्यापक चार्ट व टीएलएम (TLM) की सहायता से ‘सम और विषम संख्याएं (Even & Odd Numbers)’ की अवधारणा को स्पष्ट करेगा।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे तथा महत्वपूर्ण बिंदुओं को समझेंगे।‘सम और विषम संख्याएं (Even & Odd Numbers)’ की परिभाषा
बोध प्रश्नपढ़ाए गए विषय की समझ जाँचने के लिए छात्राध्यापक छात्रों से बोध प्रश्न पूछेगा।छात्र पढ़ाए गए विषय के आधार पर सही उत्तर देंगे।सही उत्तर
सम और विषम संख्याएं (Even & Odd Numbers) के उदाहरणछात्राध्यापक श्यामपट्ट पर ‘सम और विषम संख्याएं (Even & Odd Numbers)’ से संबंधित कुछ उदाहरण और चित्र बनाकर हल करके दिखाएगा।छात्र उदाहरणों को अपनी अभ्यास पुस्तिका में उतारेंगे।हल किए गए उदाहरण
छात्र गतिविधि / सहभागिताछात्राध्यापक कक्षा को समूहों में बाँटकर ‘सम और विषम संख्याएं (Even & Odd Numbers)’ से संबंधित एक छोटी गतिविधि (Activity) करवाएगा।छात्र उत्साहपूर्वक गतिविधि में भाग लेंगे और सीखेंगे।गतिविधि का निष्कर्ष
श्यामपट्ट अभ्यास कार्यछात्राध्यापक छात्रों से कुछ प्रश्न पूछेगा और उन्हें श्यामपट्ट पर आकर हल करने के लिए आमंत्रित करेगा।छात्र निर्देशों का पालन करेंगे और श्यामपट्ट पर प्रश्नों को हल करेंगे।अभ्यास प्रश्न व हल

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. सम और विषम संख्याएं (Even & Odd Numbers) से आप क्या समझते हैं?
  2. सम और विषम संख्याएं (Even & Odd Numbers) का एक उदाहरण दीजिए।
  3. श्यामपट्ट पर दिए गए प्रश्न को हल करके दिखाइए।

10. गृहकार्य (Homework):

सभी छात्र अपनी अभ्यास पुस्तिका में सम और विषम संख्याएं (Even & Odd Numbers) से संबंधित 5 प्रश्न घर से हल करके लाएंगे।

Part of our 180+ free D.El.Ed / BSTC Maths Lesson Plans collection.

D.El.Ed Maths Lesson Plan 10: पाठ योजना क्रमांक – 10

योजना प्रकार: D.El.Ed Maths Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 5
कालांश: ………………..
विषय: गणित (Mathematics)
प्रकरण: भरोसा और अनुमान (संख्याओं का निकटन)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में गणित विषय के प्रति रुचि उत्पन्न करना।
  2. विद्यार्थियों में तार्किक एवं बौद्धिक क्षमता का विकास करना।
  3. विद्यार्थियों को दैनिक जीवन में गणित के महत्व से अवगत कराना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘भरोसा और अनुमान (संख्याओं का निकटन)’ का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे तथा इसके नियमों को जान सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘भरोसा और अनुमान (संख्याओं का निकटन)’ को समझ कर उसे अपने शब्दों में स्पष्ट कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी ‘भरोसा और अनुमान (संख्याओं का निकटन)’ से संबंधित ज्ञान का प्रयोग दैनिक जीवन की समस्याओं को सुलझाने में कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी ‘भरोसा और अनुमान (संख्याओं का निकटन)’ से संबंधित प्रश्नों को तेज़ी और शुद्धता से हल करने का कौशल प्राप्त कर सकेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी ‘भरोसा और अनुमान (संख्याओं का निकटन)’ से संबंधित समस्याओं और गणितीय पहेलियों को हल करने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में ‘भरोसा और अनुमान (संख्याओं का निकटन)’ और गणित विषय के प्रति सकारात्मक एवं तार्किक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

चॉक, डस्टर, लपेट फलक, संकेतक, ‘भरोसा और अनुमान (संख्याओं का निकटन)’ से संबंधित आकर्षक चार्ट, और मूर्त वस्तुएं (जैसे कंकड़, तीलियां, या ब्लॉक्स)।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

खेल विधि (Play-way Method), आगमन-निगमन विधि, और प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी संख्याओं और दैनिक जीवन के सामान्य हिसाब-किताब के बारे में सामान्य जानकारी रखते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.बच्चों, हम बाजार से सामान खरीदते समय दुकानदार को क्या देते हैं?पैसे / रुपये।
2.अगर आपने 10 रुपये का सामान लिया, तो दुकानदार आपको क्या देगा?सामान और बचे हुए पैसे।
3.दुकानदार बचे हुए पैसे कैसे निकालता है?जोड़ या घटाव करके / गिनकर।
4.संख्याओं को गिनने और हिसाब लगाने की इस प्रक्रिया को हम किस विषय में सीखते हैं?गणित में।
5.बच्चों, क्या आप ‘भरोसा और अनुमान (संख्याओं का निकटन)’ के बारे में विस्तार से जानते हैं?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, आज हम गणित विषय के अंतर्गत ‘भरोसा और अनुमान (संख्याओं का निकटन)’ के बारे में विस्तार से अध्ययन करेंगे और इसे मजेदार तरीके से सीखेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
विकासात्मक प्रश्नछात्राध्यापक ‘भरोसा और अनुमान (संख्याओं का निकटन)’ से संबंधित पूर्व ज्ञान को मुख्य पाठ से जोड़ने के लिए 2-3 सरल प्रश्न पूछेगा।छात्र अपनी समझ के अनुसार उत्तर देने का प्रयास करेंगे।मुख्य बिंदु
भरोसा और अनुमान (संख्याओं का निकटन) का स्पष्टीकरणछात्राध्यापक चार्ट व टीएलएम (TLM) की सहायता से ‘भरोसा और अनुमान (संख्याओं का निकटन)’ की अवधारणा को स्पष्ट करेगा।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे तथा महत्वपूर्ण बिंदुओं को समझेंगे।‘भरोसा और अनुमान (संख्याओं का निकटन)’ की परिभाषा
बोध प्रश्नपढ़ाए गए विषय की समझ जाँचने के लिए छात्राध्यापक छात्रों से बोध प्रश्न पूछेगा।छात्र पढ़ाए गए विषय के आधार पर सही उत्तर देंगे।सही उत्तर
भरोसा और अनुमान (संख्याओं का निकटन) के उदाहरणछात्राध्यापक श्यामपट्ट पर ‘भरोसा और अनुमान (संख्याओं का निकटन)’ से संबंधित कुछ उदाहरण और चित्र बनाकर हल करके दिखाएगा।छात्र उदाहरणों को अपनी अभ्यास पुस्तिका में उतारेंगे।हल किए गए उदाहरण
छात्र गतिविधि / सहभागिताछात्राध्यापक कक्षा को समूहों में बाँटकर ‘भरोसा और अनुमान (संख्याओं का निकटन)’ से संबंधित एक छोटी गतिविधि (Activity) करवाएगा।छात्र उत्साहपूर्वक गतिविधि में भाग लेंगे और सीखेंगे।गतिविधि का निष्कर्ष
श्यामपट्ट अभ्यास कार्यछात्राध्यापक छात्रों से कुछ प्रश्न पूछेगा और उन्हें श्यामपट्ट पर आकर हल करने के लिए आमंत्रित करेगा।छात्र निर्देशों का पालन करेंगे और श्यामपट्ट पर प्रश्नों को हल करेंगे।अभ्यास प्रश्न व हल

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. भरोसा और अनुमान (संख्याओं का निकटन) से आप क्या समझते हैं?
  2. भरोसा और अनुमान (संख्याओं का निकटन) का एक उदाहरण दीजिए।
  3. श्यामपट्ट पर दिए गए प्रश्न को हल करके दिखाइए।

10. गृहकार्य (Homework):

सभी छात्र अपनी अभ्यास पुस्तिका में भरोसा और अनुमान (संख्याओं का निकटन) से संबंधित 5 प्रश्न घर से हल करके लाएंगे।

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30+ D.El.Ed / BSTC Maths Lesson Plans (पर्यावरण अध्ययन पाठ योजना) Class 3-5

प्राथमिक कक्षा 3 से 5 के लिए 30+ D.El.Ed / BSTC Maths Lesson Plans PDF Download Free (पर्यावरण अध्ययन) एकदम मुफ्त। Activity-based teaching approach for Primary classes.

D.El.Ed / BSTC Maths Lesson Plans - Paryavaran Path Yojana DElEd

D.El.Ed / BSTC Maths Lesson Plans PDF Download Free — अगर आप इंटरनेट पर deled evs lesson plan या deled paryavaran adhyayan lesson plan खोज रहे हैं, तो आप बिल्कुल सही जगह पर हैं। प्रारंभिक शिक्षा (Primary Education) में बच्चों को पर्यावरण (Environment) से परिचित कराने के लिए ‘खेल विधि’ (Play-way method) सबसे उत्तम मानी जाती है। JBT, BTC, DIET और BSTC इंटर्नशिप के लिए हमने कक्षा 3 से 5 की NCERT किताबों पर आधारित 30 अत्यंत प्रभावी paryavaran path yojana deled (Environmental Studies Lesson Plans) तैयार की हैं।

यहाँ आपको EVS के मुख्य विषयों— हमारा परिवेश, प्रकृति एवं जीव-जंतु, और संसाधन एवं पर्यावरण संरक्षण की 10-10 बेहतरीन पाठ योजनाएँ मिलेंगी। आप इन्हें सीधे अपनी इंटर्नशिप डायरी (Internship Diary) में उतार सकते हैं।

📑 D.El.Ed Paryavaran Adhyayan Lesson Plan Navigation

🅰️ हमारा परिवेश और समाज (10 टॉपिक्स)

🅱️ प्रकृति, जीव-जंतु और वनस्पति (10 टॉपिक्स)

Ⓒ संसाधन और पर्यावरण संरक्षण (10 टॉपिक्स)

D.El.Ed Paryavaran Adhyayan Lesson Plan कैसे बनाएँ?

D.El.Ed (BTC) और BSTC की इंटर्नशिप डायरी के लिए paryavaran path yojana deled (Environmental Studies Lesson Plans) बनाना बहुत महत्वपूर्ण है। कक्षा 3, 4, और 5 के बच्चों के लिए deled evs lesson plan in hindi तैयार करते समय हमेशा ‘खेल विधि’ और ‘पूर्व ज्ञान’ का उपयोग करना चाहिए जिससे बच्चे आसानी से सीख सकें।

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यहाँ दी गई सभी 30+ deled paryavaran adhyayan lesson plan की सूची पूरी तरह से NCERT और SCERT (RBSE, UP DElEd) के नवीनतम पाठ्यक्रम पर आधारित है। आप इन evs lesson plan for deled को अपनी डायरी में उतार सकते हैं और इन्हें मुफ्त में PDF फॉर्मेट में डाउनलोड भी कर सकते हैं।

D.El.Ed EVS Lesson Plan 1: पाठ योजना क्रमांक – 1

योजना प्रकार: D.El.Ed EVS Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 3
कालांश: ………………..
विषय: गणित (Maths)
उपविषय: पर्यावरण (Environment)
प्रकरण: हमारा परिवार और रिश्ते
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. छात्रों में पर्यावरण के प्रति रुचि जाग्रत करना।
  2. छात्रों को उनके सामाजिक परिवेश से परिचित कराना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘हमारा परिवार और रिश्ते’ पाठ में आए नवीन तथ्यों का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे। विद्यार्थी प्रकरण के महत्व को समझ सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘हमारा परिवार और रिश्ते’ पाठ के विषय को समझकर अपने शब्दों में व्यक्त कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी पाठ से प्राप्त ज्ञान और समझ का अपने व्यावहारिक जीवन में उपयोग कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी उचित हाव-भाव के साथ पर्यावरण से संबंधित गतिविधियों को करने का कौशल प्राप्त करेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी पर्यावरण अध्ययन की अन्य रोचक पुस्तकों/कहानियों को पढ़ने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में प्रकृति, जानवरों और अपने आस-पास के परिवेश के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

चौक, डस्टर, लपेट श्यामपट्ट, एकल और संयुक्त परिवार को दर्शाता हुआ चार्ट।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रश्नोत्तर प्रविधि, स्पष्टीकरण विधि, और प्रदर्शन/गतिविधि आधारित विधि।

5. पूर्व ज्ञान:

छात्र अपने माता-पिता, भाई-बहन और दादा-दादी के बारे में सामान्य जानकारी रखते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.बच्चों, आप सब किसके साथ घर में रहते हैं?माता, पिता और भाई-बहन के साथ।
2.माता, पिता और बच्चों से मिलकर क्या बनता है?परिवार बनता है।
3.बच्चों, क्या आपको इसके बारे में और कुछ पता है?छात्र अपने विचार रखते हैं।
4.क्या यह हमारे आस-पास के पर्यावरण का हिस्सा है?हाँ, बिल्कुल।
5.परिवार कितने प्रकार के होते हैं?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

बच्चों, आज हम पर्यावरण अध्ययन विषय के अंतर्गत ‘हमारा परिवार और रिश्ते’ नामक पाठ का विस्तार से अध्ययन करेंगे।

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
परिवार का अर्थछात्राध्यापक स्पष्ट करेंगे कि जिन लोगों के साथ हम रहते हैं, वे सब हमारा परिवार कहलाते हैं। परिवार हमारी पहली पाठशाला होती है।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे।परिवार = साथ रहने वाले सदस्य
एकल परिवार (Nuclear Family)वह परिवार जिसमें केवल माता-पिता और उनके बच्चे रहते हैं, उसे एकल परिवार कहते हैं।छात्र मुख्य बिंदुओं को अपनी कॉपी में लिखेंगे।एकल परिवार: माता-पिता + बच्चे
संयुक्त परिवार (Joint Family)वह परिवार जिसमें दादा-दादी, चाचा-चाची, माता-पिता और बच्चे एक साथ रहते हैं, उसे संयुक्त परिवार कहते हैं।छात्र चार्ट को ध्यानपूर्वक देखेंगे और समझेंगे।संयुक्त परिवार: दादा-दादी + माता-पिता + अन्य
परिवार का महत्वपरिवार में हमें प्यार, सुरक्षा और संस्कार मिलते हैं। परिवार के सदस्य एक-दूसरे की मदद करते हैं।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे।महत्व: प्यार, सुरक्षा, संस्कार

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. परिवार किसे कहते हैं?
  2. एकल और संयुक्त परिवार में क्या अंतर है?
  3. परिवार में कौन-कौन लोग रहते हैं?

10. गृहकार्य (Homework):

सभी छात्र अपने परिवार के सदस्यों के नाम और उनसे अपने रिश्ते लिखकर लाएंगे।

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D.El.Ed EVS Lesson Plan 2: पाठ योजना क्रमांक – 2

योजना प्रकार: D.El.Ed EVS Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 3
कालांश: ………………..
विषय: गणित (Maths)
उपविषय: पर्यावरण (Environment)
प्रकरण: हमारे मददगार (Our Helpers)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. छात्रों में सामाजिक चेतना विकसित करना।
  2. विभिन्न व्यवसायों के प्रति सम्मान की भावना जगाना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘हमारे मददगार (Our Helpers)’ पाठ में आए नवीन तथ्यों का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे। विद्यार्थी प्रकरण के महत्व को समझ सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘हमारे मददगार (Our Helpers)’ पाठ के विषय को समझकर अपने शब्दों में व्यक्त कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी पाठ से प्राप्त ज्ञान और समझ का अपने व्यावहारिक जीवन में उपयोग कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी उचित हाव-भाव के साथ पर्यावरण से संबंधित गतिविधियों को करने का कौशल प्राप्त करेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी पर्यावरण अध्ययन की अन्य रोचक पुस्तकों/कहानियों को पढ़ने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में प्रकृति, जानवरों और अपने आस-पास के परिवेश के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

चौक, डस्टर, विभिन्न मददगारों (डॉक्टर, पुलिस, किसान) के चित्र या फ़्लैश कार्ड्स।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रश्नोत्तर प्रविधि, स्पष्टीकरण विधि, और प्रदर्शन/गतिविधि आधारित विधि।

5. पूर्व ज्ञान:

छात्र अपने आस-पास के लोगों जैसे डॉक्टर, पुलिस और दुकानदार को पहचानते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.बीमार होने पर हम किसके पास जाते हैं?डॉक्टर के पास।
2.अनाज कौन उगाता है?किसान।
3.बच्चों, क्या आपको इसके बारे में और कुछ पता है?छात्र अपने विचार रखते हैं।
4.क्या यह हमारे आस-पास के पर्यावरण का हिस्सा है?हाँ, बिल्कुल।
5.डॉक्टर, किसान, डाकिया ये सब हमारे लिए क्या हैं?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

बच्चों, आज हम ‘हमारे मददगार’ (Our Helpers) के बारे में विस्तार से जानेंगे जो हमारे दैनिक जीवन में हमारी सहायता करते हैं।

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
डॉक्टर और नर्सछात्राध्यापक बताएंगे कि डॉक्टर हमारी बीमारियों का इलाज करते हैं और नर्स मरीज़ों की देखभाल करती हैं।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे।डॉक्टर: इलाज करना
किसानकिसान खेतों में दिन-रात मेहनत करके हमारे लिए अन्न, फल और सब्जियां उगाते हैं।छात्र चित्र देखेंगे।किसान: अन्नदाता
डाकिया और पुलिसडाकिया हमारे पत्र और पार्सल लाता है। पुलिस हमारी सुरक्षा करती है और अपराध रोकती है।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे।डाकिया: पत्र लाना
पुलिस: सुरक्षा
मददगारों का सम्मानहमें समाज के सभी मददगारों का सम्मान करना चाहिए क्योंकि इनके बिना हमारा जीवन बहुत कठिन हो जाएगा।छात्र अपनी कॉपी में लिखेंगे।हमें सबका सम्मान करना चाहिए।

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. बीमार होने पर आप किसके पास जाते हैं?
  2. हमारे लिए अन्न कौन उगाता है?
  3. डाकिया क्या काम करता है?

10. गृहकार्य (Homework):

अपने आस-पास दिखने वाले 5 मददगारों के नाम और उनके काम लिखकर लाओ।

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D.El.Ed EVS Lesson Plan 3: पाठ योजना क्रमांक – 3

योजना प्रकार: D.El.Ed EVS Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 3-5
कालांश: ………………..
विषय: गणित (Maths)
उपविषय: पर्यावरण (Environment)
प्रकरण: यातायात के साधन और सुरक्षा
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. छात्रों को यातायात के नियमों से अवगत कराना।
  2. परिवहन के विभिन्न साधनों के बारे में जानकारी देना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘यातायात के साधन और सुरक्षा’ पाठ में आए नवीन तथ्यों का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे। विद्यार्थी प्रकरण के महत्व को समझ सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘यातायात के साधन और सुरक्षा’ पाठ के विषय को समझकर अपने शब्दों में व्यक्त कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी पाठ से प्राप्त ज्ञान और समझ का अपने व्यावहारिक जीवन में उपयोग कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी उचित हाव-भाव के साथ पर्यावरण से संबंधित गतिविधियों को करने का कौशल प्राप्त करेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी पर्यावरण अध्ययन की अन्य रोचक पुस्तकों/कहानियों को पढ़ने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में प्रकृति, जानवरों और अपने आस-पास के परिवेश के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

यातायात के साधनों (ट्रेन, हवाई जहाज, नाव) का चार्ट, ट्रैफिक लाइट का मॉडल।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रश्नोत्तर प्रविधि, स्पष्टीकरण विधि, और प्रदर्शन/गतिविधि आधारित विधि।

5. पूर्व ज्ञान:

छात्र बस, साइकिल और ट्रेन आदि में बैठे हैं तथा उन्हें पहचानते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.आप स्कूल कैसे आते हैं?बस, साइकिल या पैदल।
2.लंबी दूरी तय करने के लिए हम किसमें बैठते हैं?ट्रेन या हवाई जहाज में।
3.बच्चों, क्या आपको इसके बारे में और कुछ पता है?छात्र अपने विचार रखते हैं।
4.क्या यह हमारे आस-पास के पर्यावरण का हिस्सा है?हाँ, बिल्कुल।
5.इन सभी वाहनों को क्या कहते हैं?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

बच्चों, आज हम ‘यातायात के साधन और सड़क सुरक्षा के नियम’ विषय पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
थल यातायात (Land Transport)सड़क और पटरी पर चलने वाले वाहन थल यातायात कहलाते हैं, जैसे— बस, कार, साइकिल, ट्रेन।छात्र उदाहरणों को समझेंगे।थल: बस, कार, ट्रेन
जल और वायु यातायातपानी में चलने वाले (नाव, जहाज) जल यातायात और हवा में उड़ने वाले (हवाई जहाज, हेलीकॉप्टर) वायु यातायात कहलाते हैं।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे।जल: नाव, जहाज
वायु: हवाई जहाज
सड़क सुरक्षा के नियमसड़क हमेशा बाईं ओर चलनी चाहिए। सड़क पार करते समय जेब्रा क्रॉसिंग (Zebra Crossing) का प्रयोग करना चाहिए।छात्र मुख्य नियमों को नोट करेंगे।नियम: बाईं ओर चलें, जेब्रा क्रॉसिंग
ट्रैफिक लाइट का अर्थलाल बत्ती का अर्थ है रुकना, पीली का अर्थ है तैयार होना और हरी का अर्थ है चलना।छात्र ट्रैफिक लाइट मॉडल देखेंगे।लाल: रुको, पीली: तैयार, हरी: चलो

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. यातायात के तीन मुख्य प्रकार कौन-से हैं?
  2. लाल बत्ती हमें क्या संकेत देती है?
  3. सड़क पार करने के लिए किसका प्रयोग करना चाहिए?

10. गृहकार्य (Homework):

विभिन्न यातायात के साधनों के चित्र अपनी कॉपी में चिपकाकर लाएं।

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D.El.Ed EVS Lesson Plan 4: पाठ योजना क्रमांक – 4

योजना प्रकार: D.El.Ed EVS Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 3-4
कालांश: ………………..
विषय: गणित (Maths)
उपविषय: पर्यावरण (Environment)
प्रकरण: हमारे घर (कच्चा/पक्का घर)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. छात्रों को आवास (Shelter) की आवश्यकता समझाना।
  2. विभिन्न प्रकार के घरों से परिचित कराना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘हमारे घर (कच्चा/पक्का घर)’ पाठ में आए नवीन तथ्यों का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे। विद्यार्थी प्रकरण के महत्व को समझ सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘हमारे घर (कच्चा/पक्का घर)’ पाठ के विषय को समझकर अपने शब्दों में व्यक्त कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी पाठ से प्राप्त ज्ञान और समझ का अपने व्यावहारिक जीवन में उपयोग कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी उचित हाव-भाव के साथ पर्यावरण से संबंधित गतिविधियों को करने का कौशल प्राप्त करेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी पर्यावरण अध्ययन की अन्य रोचक पुस्तकों/कहानियों को पढ़ने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में प्रकृति, जानवरों और अपने आस-पास के परिवेश के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

कच्चे घर, पक्के घर, इग्लू और टेंट के चित्र या फ्लैश कार्ड।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रश्नोत्तर प्रविधि, स्पष्टीकरण विधि, और प्रदर्शन/गतिविधि आधारित विधि।

5. पूर्व ज्ञान:

छात्र यह जानते हैं कि हम सभी अपने घरों में रहते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.बारिश और सर्दी से बचने के लिए हम कहाँ रहते हैं?अपने घर में।
2.गांवों में झोपड़ियां किस चीज़ की बनी होती हैं?मिट्टी और घास-फूस की।
3.बच्चों, क्या आपको इसके बारे में और कुछ पता है?छात्र अपने विचार रखते हैं।
4.क्या यह हमारे आस-पास के पर्यावरण का हिस्सा है?हाँ, बिल्कुल।
5.घर कितने प्रकार के होते हैं?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

बच्चों, आज हम पर्यावरण अध्ययन के अंतर्गत विभिन्न प्रकार के ‘घरों’ के बारे में विस्तार से पढ़ेंगे।

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
घर की आवश्यकताघर हमें सर्दी, गर्मी, बारिश और जंगली जानवरों से बचाता है। यह हमें सुरक्षा प्रदान करता है।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे।घर हमें मौसम और जानवरों से बचाता है।
कच्चा घर (Kutcha House)मिट्टी, बांस, और घास-फूस से बने घर कच्चे घर कहलाते हैं। ये ज्यादातर गांवों में पाए जाते हैं।छात्र चित्र देखेंगे।कच्चा घर: मिट्टी, घास-फूस
पक्का घर (Pucca House)ईंट, सीमेंट, लोहे और पत्थर से बने घर पक्के घर कहलाते हैं। ये बहुत मजबूत होते हैं (जैसे शहर के मकान)।छात्र अपनी कॉपी में लिखेंगे।पक्का घर: ईंट, सीमेंट, लोहा
विशेष घर (इग्लू और टेंट)बर्फ से बने घर को इग्लू कहते हैं। कैंपिंग के दौरान लोग कपड़े या प्लास्टिक से बने टेंट में रहते हैं।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे।इग्लू: बर्फ का घर
टेंट: कपड़े का घर

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. कच्चा घर किन चीज़ों से बनता है?
  2. बर्फ से बने घर को क्या कहते हैं?
  3. हमें घर की आवश्यकता क्यों होती है?

10. गृहकार्य (Homework):

अपने सपनों के घर का चित्र बनाकर उसमें रंग भरें।

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D.El.Ed EVS Lesson Plan 5: पाठ योजना क्रमांक – 5

योजना प्रकार: D.El.Ed EVS Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 3
कालांश: ………………..
विषय: गणित (Maths)
उपविषय: पर्यावरण (Environment)
प्रकरण: हमारे त्योहार और उत्सव
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. छात्रों में सांस्कृतिक चेतना और भाईचारे की भावना विकसित करना।
  2. भारत के विविध त्योहारों से परिचित कराना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘हमारे त्योहार और उत्सव’ पाठ में आए नवीन तथ्यों का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे। विद्यार्थी प्रकरण के महत्व को समझ सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘हमारे त्योहार और उत्सव’ पाठ के विषय को समझकर अपने शब्दों में व्यक्त कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी पाठ से प्राप्त ज्ञान और समझ का अपने व्यावहारिक जीवन में उपयोग कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी उचित हाव-भाव के साथ पर्यावरण से संबंधित गतिविधियों को करने का कौशल प्राप्त करेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी पर्यावरण अध्ययन की अन्य रोचक पुस्तकों/कहानियों को पढ़ने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में प्रकृति, जानवरों और अपने आस-पास के परिवेश के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

विभिन्न त्योहारों को दर्शाते हुए चित्र (जैसे दीवाली, होली, ईद, क्रिसमस)।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रश्नोत्तर प्रविधि, स्पष्टीकरण विधि, और प्रदर्शन/गतिविधि आधारित विधि।

5. पूर्व ज्ञान:

छात्र दीवाली, होली जैसे त्योहारों के बारे में सामान्य जानकारी रखते हैं और उन्हें मनाते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.हम रंग किस दिन खेलते हैं?होली के दिन।
2.हम पटाखे किस दिन जलाते हैं?दीवाली के दिन।
3.बच्चों, क्या आपको इसके बारे में और कुछ पता है?छात्र अपने विचार रखते हैं।
4.क्या यह हमारे आस-पास के पर्यावरण का हिस्सा है?हाँ, बिल्कुल।
5.दीवाली, होली, ईद आदि को क्या कहा जाता है?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

बच्चों, आज हम भारत में मनाये जाने वाले विभिन्न ‘त्योहारों और उत्सवों’ के बारे में पढ़ेंगे।

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
त्योहारों का महत्वत्योहार खुशियों का अवसर होते हैं। ये लोगों को एक-दूसरे के करीब लाते हैं और प्रेम बढ़ाते हैं।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे।त्योहार प्रेम और खुशी लाते हैं।
धार्मिक त्योहारदीवाली, होली, दशहरा, ईद, गुरुपर्व और क्रिसमस धार्मिक त्योहार हैं, जिन्हें विभिन्न धर्मों के लोग मनाते हैं।छात्र चार्ट पर त्योहारों के चित्र देखेंगे।धार्मिक: होली, दीवाली, ईद, क्रिसमस
राष्ट्रीय त्योहारस्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त), गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) और गांधी जयंती (2 अक्टूबर) राष्ट्रीय त्योहार हैं।छात्र महत्वपूर्ण तिथियों को नोट करेंगे।राष्ट्रीय: 15 अगस्त, 26 जनवरी, 2 अक्टूबर
कैसे मनाते हैं?त्योहारों पर लोग नए कपड़े पहनते हैं, मिठाइयां बांटते हैं और एक-दूसरे को बधाइयां देते हैं।छात्र अपने अनुभव साझा करेंगे।हम मिठाइयां बांटते हैं।

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. किन्हीं दो राष्ट्रीय त्योहारों के नाम बताइए?
  2. रंगों का त्योहार किसे कहा जाता है?
  3. क्रिसमस कब मनाया जाता है?

10. गृहकार्य (Homework):

अपने सबसे पसंदीदा त्योहार पर 5 पंक्तियाँ लिखकर लाएं।

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D.El.Ed EVS Lesson Plan 6: पाठ योजना क्रमांक – 6

योजना प्रकार: D.El.Ed EVS Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 3-4
कालांश: ………………..
विषय: गणित (Maths)
उपविषय: पर्यावरण (Environment)
प्रकरण: कपड़ों की कहानी
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. छात्रों को वस्त्रों की आवश्यकता से अवगत कराना।
  2. विभिन्न मौसमों के अनुसार कपड़ों के प्रकार समझाना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘कपड़ों की कहानी’ पाठ में आए नवीन तथ्यों का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे। विद्यार्थी प्रकरण के महत्व को समझ सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘कपड़ों की कहानी’ पाठ के विषय को समझकर अपने शब्दों में व्यक्त कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी पाठ से प्राप्त ज्ञान और समझ का अपने व्यावहारिक जीवन में उपयोग कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी उचित हाव-भाव के साथ पर्यावरण से संबंधित गतिविधियों को करने का कौशल प्राप्त करेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी पर्यावरण अध्ययन की अन्य रोचक पुस्तकों/कहानियों को पढ़ने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में प्रकृति, जानवरों और अपने आस-पास के परिवेश के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

सूती, ऊनी और रेशमी कपड़ों के छोटे टुकड़े, कपास के पौधे का चित्र।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रश्नोत्तर प्रविधि, स्पष्टीकरण विधि, और प्रदर्शन/गतिविधि आधारित विधि।

5. पूर्व ज्ञान:

छात्र अलग-अलग मौसमों में अलग-अलग प्रकार के कपड़े पहनते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.गर्मियों में हमें कैसा लगता है?बहुत गर्मी लगती है।
2.सर्दियों में हम कैसे कपड़े पहनते हैं?गर्म और मोटे कपड़े (स्वेटर)।
3.बच्चों, क्या आपको इसके बारे में और कुछ पता है?छात्र अपने विचार रखते हैं।
4.क्या यह हमारे आस-पास के पर्यावरण का हिस्सा है?हाँ, बिल्कुल।
5.विभिन्न मौसमों में कपड़ों का चुनाव कैसे करते हैं?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

बच्चों, आज हम ‘कपड़ों की कहानी’ और ऋतुओं के अनुसार कपड़ों के प्रकार के बारे में पढ़ेंगे।

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
कपड़ों की आवश्यकताकपड़े हमें सर्दी, गर्मी, बारिश और कीड़े-मकोड़ों से बचाते हैं। ये हमारे शरीर को ढकते हैं।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे।कपड़े हमें मौसम से बचाते हैं।
गर्मियों के कपड़ेगर्मियों में हम सूती (Cotton) कपड़े पहनते हैं क्योंकि वे पसीना सोखते हैं और हमें ठंडा रखते हैं। कपास पौधों से मिलती है।छात्र सूती कपड़े को छूकर देखेंगे।गर्मी: सूती कपड़े (कपास से)
सर्दियों के कपड़ेसर्दियों में हम ऊनी (Woolen) कपड़े पहनते हैं जो हमें गर्म रखते हैं। ऊन हमें भेड़ से प्राप्त होती है।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे।सर्दी: ऊनी कपड़े (भेड़ से)
बारिश के कपड़ेबारिश से बचने के लिए हम रेनकोट और छाते का उपयोग करते हैं जो वाटरप्रूफ (Waterproof) सामग्री से बने होते हैं।छात्र अपनी कॉपी में लिखेंगे।बारिश: रेनकोट, छाता

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. सर्दियों में हम किस प्रकार के कपड़े पहनते हैं?
  2. सूती कपड़े हमें किससे प्राप्त होते हैं?
  3. बारिश में हम किसका उपयोग करते हैं?

10. गृहकार्य (Homework):

अपने घर में मौजूद 5 अलग-अलग प्रकार के कपड़ों के नाम लिखकर लाएं।

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D.El.Ed EVS Lesson Plan 7: पाठ योजना क्रमांक – 7

योजना प्रकार: D.El.Ed EVS Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 4-5
कालांश: ………………..
विषय: गणित (Maths)
उपविषय: पर्यावरण (Environment)
प्रकरण: कचरा प्रबंधन
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. छात्रों में पर्यावरण स्वच्छता के प्रति जागरूकता पैदा करना।
  2. कचरा निस्तारण का सही तरीका सिखाना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘कचरा प्रबंधन’ पाठ में आए नवीन तथ्यों का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे। विद्यार्थी प्रकरण के महत्व को समझ सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘कचरा प्रबंधन’ पाठ के विषय को समझकर अपने शब्दों में व्यक्त कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी पाठ से प्राप्त ज्ञान और समझ का अपने व्यावहारिक जीवन में उपयोग कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी उचित हाव-भाव के साथ पर्यावरण से संबंधित गतिविधियों को करने का कौशल प्राप्त करेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी पर्यावरण अध्ययन की अन्य रोचक पुस्तकों/कहानियों को पढ़ने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में प्रकृति, जानवरों और अपने आस-पास के परिवेश के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

हरा और नीला डस्टबिन (या चित्र), गीले और सूखे कचरे के उदाहरण।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रश्नोत्तर प्रविधि, स्पष्टीकरण विधि, और प्रदर्शन/गतिविधि आधारित विधि।

5. पूर्व ज्ञान:

छात्र जानते हैं कि घर का कूड़ा डस्टबिन में डाला जाता है।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.घर की सफाई करने के बाद हम कूड़ा कहाँ डालते हैं?कूड़ेदान (Dustbin) में।
2.अगर हम कूड़ा सड़क पर फेंकेंगे तो क्या होगा?गंदगी फैलेगी और बीमारियां होंगी।
3.बच्चों, क्या आपको इसके बारे में और कुछ पता है?छात्र अपने विचार रखते हैं।
4.क्या यह हमारे आस-पास के पर्यावरण का हिस्सा है?हाँ, बिल्कुल।
5.कूड़े (कचरे) का सही प्रबंधन कैसे करना चाहिए?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

बच्चों, आज हम पर्यावरण को साफ रखने के लिए ‘कचरा प्रबंधन’ (Waste Management) के बारे में जानेंगे।

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
कचरे के प्रकारकचरा मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है: गीला कचरा (जैव-निम्नीकरणीय) और सूखा कचरा।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे।कचरा: गीला और सूखा
गीला कचरा (Wet Waste)सब्जियों के छिलके, बचा हुआ खाना, और पत्ते गीला कचरा कहलाते हैं। इन्हें हरे डस्टबिन में डाला जाता है, जिससे खाद (Compost) बनती है।छात्र हरे डस्टबिन का चित्र देखेंगे।गीला कचरा = हरा डस्टबिन (खाद)
सूखा कचरा (Dry Waste)कागज, प्लास्टिक, कांच और धातु सूखा कचरा है। इन्हें नीले डस्टबिन में डाला जाता है।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे।सूखा कचरा = नीला डस्टबिन
रिड्यूस, रीयूज, रीसाइकिल (3 R’s)हमें कचरा कम करना चाहिए, पुरानी चीज़ों का फिर से उपयोग करना चाहिए, और प्लास्टिक/कागज को रीसाइकिल करना चाहिए।छात्र 3 R’s का अर्थ अपनी कॉपी में लिखेंगे।3 R’s: Reduce, Reuse, Recycle

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. गीला कचरा किस रंग के कूड़ेदान में डालते हैं?
  2. सूखे कचरे के दो उदाहरण दीजिए।
  3. गीले कचरे से क्या बनाया जा सकता है?

10. गृहकार्य (Homework):

अपने घर में गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग करने का प्रयास करें।

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D.El.Ed EVS Lesson Plan 8: पाठ योजना क्रमांक – 8

योजना प्रकार: D.El.Ed EVS Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 3-4
कालांश: ………………..
विषय: गणित (Maths)
उपविषय: पर्यावरण (Environment)
प्रकरण: दिशाओं का ज्ञान और मानचित्र
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. छात्रों में भौगोलिक ज्ञान और दिशा ज्ञान विकसित करना।
  2. मानचित्र पढ़ने की प्रारंभिक समझ विकसित करना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘दिशाओं का ज्ञान और मानचित्र’ पाठ में आए नवीन तथ्यों का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे। विद्यार्थी प्रकरण के महत्व को समझ सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘दिशाओं का ज्ञान और मानचित्र’ पाठ के विषय को समझकर अपने शब्दों में व्यक्त कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी पाठ से प्राप्त ज्ञान और समझ का अपने व्यावहारिक जीवन में उपयोग कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी उचित हाव-भाव के साथ पर्यावरण से संबंधित गतिविधियों को करने का कौशल प्राप्त करेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी पर्यावरण अध्ययन की अन्य रोचक पुस्तकों/कहानियों को पढ़ने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में प्रकृति, जानवरों और अपने आस-पास के परिवेश के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

चौक, डस्टर, कंपास (Compass) का मॉडल, भारत का मानचित्र।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रश्नोत्तर प्रविधि, स्पष्टीकरण विधि, और प्रदर्शन/गतिविधि आधारित विधि।

5. पूर्व ज्ञान:

छात्र सूर्य के उगने और डूबने के बारे में जानते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.सुबह के समय सूरज किस तरफ से उगता है?पूरब (East) से।
2.शाम को सूरज कहाँ छिपता है?पश्चिम (West) में।
3.बच्चों, क्या आपको इसके बारे में और कुछ पता है?छात्र अपने विचार रखते हैं।
4.क्या यह हमारे आस-पास के पर्यावरण का हिस्सा है?हाँ, बिल्कुल।
5.कुल कितनी मुख्य दिशाएं होती हैं?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

बच्चों, आज हम मुख्य ‘दिशाओं और मानचित्र (Maps)’ के बारे में विस्तार से जानेंगे।

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
मुख्य दिशाएंमुख्य रूप से चार दिशाएं होती हैं: पूरब (East), पश्चिम (West), उत्तर (North), और दक्षिण (South)।छात्र दिशाओं के नाम दोहराएंगे।4 दिशाएं: पूरब, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण
दिशा कैसे पहचानें?सूरज पूरब में उगता है। यदि हम उगते सूरज की ओर मुंह करके खड़े हों, तो हमारे सामने पूरब, पीठ पीछे पश्चिम, बाएँ हाथ की ओर उत्तर और दाएँ हाथ की ओर दक्षिण होता है।छात्र खड़े होकर प्रैक्टिकल करेंगे।मुंह = पूरब, पीठ = पश्चिम
मानचित्र (Map)मानचित्र कागज पर बना हुआ किसी जगह का चित्र होता है, जो हमें उस जगह का रास्ता और दिशा बताता है।छात्र मानचित्र को ध्यान से देखेंगे।मानचित्र: कागज पर जगह का चित्र
मानचित्र में दिशाएंकिसी भी मानचित्र में ऊपर की ओर हमेशा उत्तर (North) दिशा और नीचे की ओर दक्षिण (South) दिशा होती है।छात्र अपनी कॉपी में लिखेंगे।मानचित्र में ऊपर = उत्तर

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. कुल कितनी मुख्य दिशाएं होती हैं?
  2. सूरज किस दिशा में छिपता है?
  3. मानचित्र में ऊपर की तरफ कौन-सी दिशा होती है?

10. गृहकार्य (Homework):

कागज पर चारों दिशाओं का चित्र बनाकर लाएं।

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D.El.Ed EVS Lesson Plan 9: पाठ योजना क्रमांक – 9

योजना प्रकार: D.El.Ed EVS Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 3
कालांश: ………………..
विषय: गणित (Maths)
उपविषय: पर्यावरण (Environment)
प्रकरण: सड़क संकेत और ट्रैफिक लाइट
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. छात्रों को सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक करना।
  2. यातायात नियमों के पालन की आदत डालना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘सड़क संकेत और ट्रैफिक लाइट’ पाठ में आए नवीन तथ्यों का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे। विद्यार्थी प्रकरण के महत्व को समझ सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘सड़क संकेत और ट्रैफिक लाइट’ पाठ के विषय को समझकर अपने शब्दों में व्यक्त कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी पाठ से प्राप्त ज्ञान और समझ का अपने व्यावहारिक जीवन में उपयोग कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी उचित हाव-भाव के साथ पर्यावरण से संबंधित गतिविधियों को करने का कौशल प्राप्त करेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी पर्यावरण अध्ययन की अन्य रोचक पुस्तकों/कहानियों को पढ़ने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में प्रकृति, जानवरों और अपने आस-पास के परिवेश के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

ट्रैफिक लाइट का मॉडल, विभिन्न सड़क संकेतों (U-turn, No Parking) के चित्र।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रश्नोत्तर प्रविधि, स्पष्टीकरण विधि, और प्रदर्शन/गतिविधि आधारित विधि।

5. पूर्व ज्ञान:

छात्रों ने सड़क पर लाल-पीली बत्तियां और गाड़ियां देखी हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.सड़क पर बहुत सारी गाड़ियां हों तो उन्हें कौन कंट्रोल करता है?ट्रैफिक पुलिस या ट्रैफिक लाइट।
2.ट्रैफिक लाइट में कितने रंग होते हैं?तीन रंग।
3.बच्चों, क्या आपको इसके बारे में और कुछ पता है?छात्र अपने विचार रखते हैं।
4.क्या यह हमारे आस-पास के पर्यावरण का हिस्सा है?हाँ, बिल्कुल।
5.इन रंगों का क्या अर्थ होता है?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

बच्चों, आज हम सड़क पर सुरक्षित चलने के लिए ‘सड़क संकेत और ट्रैफिक लाइट’ के बारे में जानेंगे।

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
ट्रैफिक लाइट (Traffic Light)सड़क चौराहों पर दुर्घटना से बचने के लिए ट्रैफिक लाइट लगाई जाती है। इसमें लाल, पीला और हरा रंग होता है।छात्र मॉडल को देखेंगे।ट्रैफिक लाइट: लाल, पीली, हरी
रंगों का अर्थलाल बत्ती = रुको (Stop), पीली बत्ती = चलने के लिए तैयार हो जाओ (Ready), हरी बत्ती = चलो (Go)।छात्र अपनी कॉपी में रंगों का अर्थ लिखेंगे।लाल=रुको, पीली=तैयार, हरी=चलो
जेब्रा क्रॉसिंग (Zebra Crossing)सड़क पर बनी सफेद और काली पट्टियों को जेब्रा क्रॉसिंग कहते हैं। पैदल चलने वालों को हमेशा यहीं से सड़क पार करनी चाहिए।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे।पैदल सड़क पार = जेब्रा क्रॉसिंग
अन्य सड़क संकेतसड़क के किनारे बोर्ड लगे होते हैं जैसे- हॉर्न न बजाएं, U-टर्न मना है (No U-Turn)। हमें इनका पालन करना चाहिए।छात्र सड़क संकेतों के चित्र देखेंगे।संकेतों का पालन करें।

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. लाल बत्ती का क्या अर्थ है?
  2. पैदल यात्रियों को सड़क कहाँ से पार करनी चाहिए?
  3. हरी बत्ती जलने पर हमें क्या करना चाहिए?

10. गृहकार्य (Homework):

ट्रैफिक लाइट का सुंदर चित्र बनाकर उसमें सही रंग भरें।

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D.El.Ed EVS Lesson Plan 10: पाठ योजना क्रमांक – 10

योजना प्रकार: D.El.Ed EVS Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 3-5
कालांश: ………………..
विषय: गणित (Maths)
उपविषय: पर्यावरण (Environment)
प्रकरण: हमारे राष्ट्रीय प्रतीक
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. छात्रों में देशभक्ति और राष्ट्रीय गौरव की भावना जाग्रत करना।
  2. भारत के राष्ट्रीय प्रतीकों का ज्ञान देना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘हमारे राष्ट्रीय प्रतीक’ पाठ में आए नवीन तथ्यों का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे। विद्यार्थी प्रकरण के महत्व को समझ सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘हमारे राष्ट्रीय प्रतीक’ पाठ के विषय को समझकर अपने शब्दों में व्यक्त कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी पाठ से प्राप्त ज्ञान और समझ का अपने व्यावहारिक जीवन में उपयोग कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी उचित हाव-भाव के साथ पर्यावरण से संबंधित गतिविधियों को करने का कौशल प्राप्त करेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी पर्यावरण अध्ययन की अन्य रोचक पुस्तकों/कहानियों को पढ़ने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में प्रकृति, जानवरों और अपने आस-पास के परिवेश के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

राष्ट्रीय ध्वज, मोर, बाघ, कमल और अशोक चक्र के चित्र।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रश्नोत्तर प्रविधि, स्पष्टीकरण विधि, और प्रदर्शन/गतिविधि आधारित विधि।

5. पूर्व ज्ञान:

छात्र 15 अगस्त और 26 जनवरी पर झंडा फहराते हुए देखते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.हम 15 अगस्त को क्या फहराते हैं?झंडा फहराते हैं।
2.हमारे देश के झंडे का क्या नाम है?तिरंगा।
3.बच्चों, क्या आपको इसके बारे में और कुछ पता है?छात्र अपने विचार रखते हैं।
4.क्या यह हमारे आस-पास के पर्यावरण का हिस्सा है?हाँ, बिल्कुल।
5.हमारे देश का राष्ट्रीय पक्षी और पशु कौन-सा है?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

बच्चों, आज हम अपने देश भारत के ‘राष्ट्रीय प्रतीकों’ (National Symbols) के बारे में विस्तार से जानेंगे।

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
राष्ट्रीय ध्वज (National Flag)हमारे राष्ट्रीय ध्वज का नाम ‘तिरंगा’ है। इसमें तीन रंग होते हैं: केसरिया (सबसे ऊपर), सफेद (बीच में) और हरा (सबसे नीचे)।छात्र तिरंगे का चित्र देखेंगे।ध्वज: तिरंगा (केसरिया, सफेद, हरा)
अशोक चक्रसफेद पट्टी के बीच में नीले रंग का एक चक्र होता है, जिसे अशोक चक्र कहते हैं। इसमें 24 तीलियां (Spokes) होती हैं।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे।अशोक चक्र = 24 तीलियां (नीला रंग)
राष्ट्रीय पशु और पक्षीहमारा राष्ट्रीय पशु ‘बाघ’ (Tiger) है जो बहादुरी का प्रतीक है। हमारा राष्ट्रीय पक्षी ‘मोर’ (Peacock) है।छात्र बाघ और मोर का चित्र देखेंगे।राष्ट्रीय पशु: बाघ, राष्ट्रीय पक्षी: मोर
राष्ट्रीय फूल और गानहमारा राष्ट्रीय फूल ‘कमल’ (Lotus) है। हमारा राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ है, जिसे रवींद्रनाथ टैगोर ने लिखा था।छात्र अपनी कॉपी में लिखेंगे।राष्ट्रीय फूल: कमल, राष्ट्रगान: जन गण मन

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. हमारे राष्ट्रीय ध्वज में कितने रंग होते हैं?
  2. अशोक चक्र में कितनी तीलियां होती हैं?
  3. भारत का राष्ट्रीय फूल कौन-सा है?

10. गृहकार्य (Homework):

तिरंगे झंडे का चित्र बनाकर उसमें सही रंग भरें।

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D.El.Ed EVS Lesson Plan 11: पाठ योजना क्रमांक – 11

योजना प्रकार: D.El.Ed EVS Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 3-4
कालांश: ………………..
विषय: गणित (Maths)
उपविषय: पर्यावरण (Environment)
प्रकरण: हमारे आस-पास के पेड़-पौधे
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. छात्रों में प्रकृति और वनस्पतियों के प्रति प्रेम जाग्रत करना।
  2. पेड़-पौधों के महत्व को समझाना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘हमारे आस-पास के पेड़-पौधे’ पाठ में आए नवीन तथ्यों का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे। विद्यार्थी प्रकरण के महत्व को समझ सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘हमारे आस-पास के पेड़-पौधे’ पाठ के विषय को समझकर अपने शब्दों में व्यक्त कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी पाठ से प्राप्त ज्ञान और समझ का अपने व्यावहारिक जीवन में उपयोग कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी उचित हाव-भाव के साथ पर्यावरण से संबंधित गतिविधियों को करने का कौशल प्राप्त करेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी पर्यावरण अध्ययन की अन्य रोचक पुस्तकों/कहानियों को पढ़ने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में प्रकृति, जानवरों और अपने आस-पास के परिवेश के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

एक छोटा गमला (जिसमें पौधा हो), पौधे के विभिन्न भागों को दर्शाता हुआ रंगीन चार्ट।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रश्नोत्तर प्रविधि, स्पष्टीकरण विधि, और प्रदर्शन/गतिविधि आधारित विधि।

5. पूर्व ज्ञान:

छात्रों ने अपने आस-पास पेड़-पौधे और फूल-पत्तियां देखी हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.हमें शुद्ध हवा कहाँ से मिलती है?पेड़-पौधों से।
2.पेड़ पर हरे रंग का क्या लगा होता है?पत्तियां।
3.बच्चों, क्या आपको इसके बारे में और कुछ पता है?छात्र अपने विचार रखते हैं।
4.क्या यह हमारे आस-पास के पर्यावरण का हिस्सा है?हाँ, बिल्कुल।
5.पौधे के और कौन-कौन से भाग होते हैं?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

बच्चों, आज हम पर्यावरण अध्ययन के अंतर्गत ‘पौधे के विभिन्न भागों’ (Parts of a Plant) के बारे में विस्तार से जानेंगे।

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
पौधे के भागछात्राध्यापक बताएंगे कि पौधे के मुख्य 5 भाग होते हैं: जड़, तना, पत्ती, फूल और फल।छात्र पौधे के भागों को दोहराएंगे।भाग: जड़, तना, पत्ती, फूल, फल
जड़ और तना (Root and Stem)जड़ मिट्टी के नीचे होती है जो पौधे को पानी देती है। तना पौधे को सीधा खड़ा रखता है और जड़ों से पानी पत्तियों तक पहुंचाता है।छात्र चित्र में जड़ और तना देखेंगे।जड़: पानी चूसना
तना: सहारा देना
पत्ती (Leaf)पत्तियां हरे रंग की होती हैं। ये पौधे के लिए भोजन बनाती हैं, इसलिए इन्हें पौधे का ‘रसोईघर’ (Kitchen) कहा जाता है।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे।पत्ती: पौधे का रसोईघर (भोजन बनाना)
फूल और फल (Flower and Fruit)फूल पौधे का सबसे सुंदर भाग है, जो बाद में फल बन जाता है। फलों के अंदर बीज होते हैं जिनसे नया पौधा बनता है।छात्र अपनी कॉपी में लिखेंगे।फूल से फल बनता है।

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. पौधे के किन्हीं तीन भागों के नाम बताइए।
  2. पौधे का रसोईघर किसे कहा जाता है?
  3. पौधे को सीधा खड़ा रखने में कौन मदद करता है?

10. गृहकार्य (Homework):

एक पौधे का सुंदर चित्र बनाकर उसके सभी भागों के नाम लिखकर लाएं।

Part of our 180+ free D.El.Ed / BSTC Maths Lesson Plans collection.

D.El.Ed EVS Lesson Plan 12: पाठ योजना क्रमांक – 12

योजना प्रकार: D.El.Ed EVS Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 4
कालांश: ………………..
विषय: गणित (Maths)
उपविषय: पर्यावरण (Environment)
प्रकरण: जड़ी-बूटियाँ, झाड़ियाँ और वृक्ष
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. छात्रों को वनस्पतियों की विविधता से अवगत कराना।
  2. पौधों के वर्गीकरण की समझ विकसित करना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘जड़ी-बूटियाँ, झाड़ियाँ और वृक्ष’ पाठ में आए नवीन तथ्यों का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे। विद्यार्थी प्रकरण के महत्व को समझ सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘जड़ी-बूटियाँ, झाड़ियाँ और वृक्ष’ पाठ के विषय को समझकर अपने शब्दों में व्यक्त कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी पाठ से प्राप्त ज्ञान और समझ का अपने व्यावहारिक जीवन में उपयोग कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी उचित हाव-भाव के साथ पर्यावरण से संबंधित गतिविधियों को करने का कौशल प्राप्त करेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी पर्यावरण अध्ययन की अन्य रोचक पुस्तकों/कहानियों को पढ़ने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में प्रकृति, जानवरों और अपने आस-पास के परिवेश के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

तुलसी का पौधा, गुलाब की टहनी, और किसी बड़े पेड़ (आम/पीपल) का चित्र।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रश्नोत्तर प्रविधि, स्पष्टीकरण विधि, और प्रदर्शन/गतिविधि आधारित विधि।

5. पूर्व ज्ञान:

छात्रों ने छोटे और बड़े दोनों तरह के पेड़-पौधे देखे हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.क्या सभी पेड़-पौधे एक ही आकार के होते हैं?नहीं, कुछ छोटे और कुछ बहुत बड़े होते हैं।
2.आम का पौधा कैसा होता है?बहुत बड़ा पेड़ होता है।
3.बच्चों, क्या आपको इसके बारे में और कुछ पता है?छात्र अपने विचार रखते हैं।
4.क्या यह हमारे आस-पास के पर्यावरण का हिस्सा है?हाँ, बिल्कुल।
5.तुलसी या गुलाब के पौधे को क्या कहते हैं?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

बच्चों, आज हम आकार और तने की मोटाई के आधार पर पौधों के प्रकार— ‘जड़ी-बूटियाँ, झाड़ियाँ और वृक्ष’ के बारे में जानेंगे।

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
जड़ी-बूटियाँ (Herbs)ये बहुत छोटे पौधे होते हैं। इनका तना बहुत कोमल और हरा होता है। उदाहरण: धनिया, पुदीना, तुलसी, पालक।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे और उदाहरण लिखेंगे।Herbs (शाक): छोटा और हरा तना (तुलसी)
झाड़ियाँ (Shrubs)ये मध्यम आकार के पौधे होते हैं। इनका तना लकड़ी का और कठोर होता है। इनमें ज़मीन के पास से कई शाखाएं निकलती हैं। उदाहरण: गुलाब, गुड़हल, नींबू।छात्र गुलाब की टहनी को देखेंगे।Shrubs (झाड़ी): लकड़ी का तना, मध्यम आकार (गुलाब)
वृक्ष (Trees)ये बहुत बड़े और ऊंचे होते हैं। इनका तना बहुत मोटा, मजबूत और भूरे रंग का होता है, जिसे ‘ट्रंक’ कहते हैं। उदाहरण: आम, नीम, पीपल, बरगद।छात्र चित्र देखेंगे और समझेंगे।Trees (वृक्ष): बहुत बड़े, मोटा तना (आम)
लताएं (Climbers)कुछ पौधों का तना इतना कमज़ोर होता है कि वे सीधे खड़े नहीं हो सकते, उन्हें सहारे की ज़रूरत होती है। जैसे- मनी प्लांट, अंगूर की बेल।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे।लताएं: सहारे से चढ़ने वाले पौधे

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. जड़ी-बूटी और झाड़ी में क्या अंतर है?
  2. किन्हीं दो वृक्षों के नाम बताइए।
  3. गुलाब किस प्रकार का पौधा है?

10. गृहकार्य (Homework):

अपने घर के आस-पास दिखने वाले 5 पौधों के नाम लिखकर उन्हें जड़ी-बूटी, झाड़ी या वृक्ष में वर्गीकृत करें।

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D.El.Ed EVS Lesson Plan 13: पाठ योजना क्रमांक – 13

योजना प्रकार: D.El.Ed EVS Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 3-4
कालांश: ………………..
विषय: गणित (Maths)
उपविषय: पर्यावरण (Environment)
प्रकरण: पशु-पक्षियों के आवास और घोंसले
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. छात्रों में जीव-जंतुओं के प्रति दयाभाव और प्रेम विकसित करना।
  2. जंतुओं के रहन-सहन की जानकारी देना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘पशु-पक्षियों के आवास और घोंसले’ पाठ में आए नवीन तथ्यों का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे। विद्यार्थी प्रकरण के महत्व को समझ सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘पशु-पक्षियों के आवास और घोंसले’ पाठ के विषय को समझकर अपने शब्दों में व्यक्त कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी पाठ से प्राप्त ज्ञान और समझ का अपने व्यावहारिक जीवन में उपयोग कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी उचित हाव-भाव के साथ पर्यावरण से संबंधित गतिविधियों को करने का कौशल प्राप्त करेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी पर्यावरण अध्ययन की अन्य रोचक पुस्तकों/कहानियों को पढ़ने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में प्रकृति, जानवरों और अपने आस-पास के परिवेश के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

विभिन्न पक्षियों के घोंसलों और जानवरों के घरों (गुफा, अस्तबल, बिल) के चित्र।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रश्नोत्तर प्रविधि, स्पष्टीकरण विधि, और प्रदर्शन/गतिविधि आधारित विधि।

5. पूर्व ज्ञान:

छात्र जानते हैं कि मनुष्य घर में रहता है और कुत्ता डॉग-हाउस में रहता है।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.हम लोग सर्दी, गर्मी और बारिश से बचने के लिए कहाँ रहते हैं?अपने घर में।
2.शेर जंगल में कहाँ रहता है?गुफा (Den) में।
3.बच्चों, क्या आपको इसके बारे में और कुछ पता है?छात्र अपने विचार रखते हैं।
4.क्या यह हमारे आस-पास के पर्यावरण का हिस्सा है?हाँ, बिल्कुल।
5.पक्षी अंडे देने के लिए क्या बनाते हैं?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

बच्चों, आज हम विभिन्न ‘पशु-पक्षियों के आवासों’ (Homes of Animals) और पक्षियों के घोंसलों के बारे में पढ़ेंगे।

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
पशुओं के आवासहर जानवर का एक अलग घर होता है। जैसे— शेर गुफा (Den) में, खरगोश और चूहा बिल (Burrow) में, भालू मांद में रहता है।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे।शेर = गुफा, खरगोश = बिल
पालतू जानवरों के घरहम पालतू जानवरों के लिए घर बनाते हैं। गाय-भैंस छप्पर (Shed) में, घोड़ा अस्तबल (Stable) में, और कुत्ता केनेल (Kennel) में रहता है।छात्र अपनी कॉपी में लिखेंगे।गाय = छप्पर, घोड़ा = अस्तबल
पक्षियों के घोंसले (Nests)पक्षी अंडे देने और अपने बच्चों की सुरक्षा के लिए पेड़ों पर घोंसला बनाते हैं। वे इसके लिए तिनके, रुई, बाल, और पत्तियों का प्रयोग करते हैं।छात्र चित्र में विभिन्न घोंसले देखेंगे।पक्षी अंडे देने के लिए घोंसला बनाते हैं।
विशेष पक्षियों के घोंसलेबया (Weaver Bird) बहुत सुंदर लालटेन जैसा घोंसला बुनती है। दर्जिन चिड़िया (Tailor Bird) पत्तियों को सील कर अपना घोंसला बनाती है।छात्र आश्चर्यचकित होकर सुनेंगे।बया = लालटेन जैसा घोंसला
दर्जिन चिड़िया = पत्ती सील कर

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. घोड़ा कहाँ रहता है?
  2. दर्जिन चिड़िया अपना घोंसला कैसे बनाती है?
  3. शेर के घर को क्या कहते हैं?

10. गृहकार्य (Homework):

किन्हीं 5 जानवरों और उनके घरों के नाम लिखकर लाएं।

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D.El.Ed EVS Lesson Plan 14: पाठ योजना क्रमांक – 14

योजना प्रकार: D.El.Ed EVS Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 3-4
कालांश: ………………..
विषय: गणित (Maths)
उपविषय: पर्यावरण (Environment)
प्रकरण: सजीव और निर्जीव वस्तुएं (Living & Non-living)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. छात्रों को प्रकृति में उपस्थित वस्तुओं का अवलोकन करना सिखाना।
  2. वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास करना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘सजीव और निर्जीव वस्तुएं (Living & Non-living)’ पाठ में आए नवीन तथ्यों का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे। विद्यार्थी प्रकरण के महत्व को समझ सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘सजीव और निर्जीव वस्तुएं (Living & Non-living)’ पाठ के विषय को समझकर अपने शब्दों में व्यक्त कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी पाठ से प्राप्त ज्ञान और समझ का अपने व्यावहारिक जीवन में उपयोग कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी उचित हाव-भाव के साथ पर्यावरण से संबंधित गतिविधियों को करने का कौशल प्राप्त करेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी पर्यावरण अध्ययन की अन्य रोचक पुस्तकों/कहानियों को पढ़ने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में प्रकृति, जानवरों और अपने आस-पास के परिवेश के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

एक जीवित पौधा, एक पत्थर, खिलौना और चार्ट पेपर।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रश्नोत्तर प्रविधि, स्पष्टीकरण विधि, और प्रदर्शन/गतिविधि आधारित विधि।

5. पूर्व ज्ञान:

छात्र मनुष्य, कुत्ते, कुर्सी और मेज़ को पहचानते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.क्या कुर्सी या मेज़ अपने आप चलकर दूसरी जगह जा सकते हैं?नहीं।
2.क्या कुत्ता या बिल्ली अपने आप चल सकते हैं?हाँ।
3.बच्चों, क्या आपको इसके बारे में और कुछ पता है?छात्र अपने विचार रखते हैं।
4.क्या यह हमारे आस-पास के पर्यावरण का हिस्सा है?हाँ, बिल्कुल।
5.कुर्सी और कुत्ते में क्या मुख्य अंतर है?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

बच्चों, आज हम अपने आस-पास पाई जाने वाली ‘सजीव और निर्जीव वस्तुओं’ के बारे में वैज्ञानिक अध्ययन करेंगे।

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
सजीव वस्तुएं (Living Things)जिन चीज़ों में जान होती है, उन्हें सजीव कहते हैं। उदाहरण: इंसान, जानवर, पेड़-पौधे, कीड़े-मकोड़े।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे।सजीव: जिनमें जान होती है (पेड़, इंसान)
सजीवों के लक्षणसजीव वस्तुएं सांस लेती हैं, भोजन खाती हैं, पानी पीती हैं, बड़ी होती हैं (Growth) और महसूस करती हैं।छात्र सजीवों के लक्षण नोट करेंगे।लक्षण: सांस लेना, भोजन, वृद्धि
निर्जीव वस्तुएं (Non-living Things)जिन चीज़ों में जान नहीं होती, उन्हें निर्जीव कहते हैं। उदाहरण: कुर्सी, मेज़, पत्थर, किताब, मोबाइल।छात्र कक्षा में मौजूद निर्जीव वस्तुओं के नाम बताएंगे।निर्जीव: जिनमें जान नहीं होती (किताब, मेज़)
पेड़-पौधे सजीव क्यों हैं?पेड़-पौधे चल नहीं सकते, लेकिन वे छोटे से बड़े होते हैं (वृद्धि), सांस लेते हैं और भोजन बनाते हैं, इसलिए वे सजीव हैं।छात्र शंका का समाधान करेंगे और सुनेंगे।पेड़-पौधे भी सजीव हैं (वे बढ़ते हैं)।

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. सजीव वस्तुओं के दो लक्षण बताइए।
  2. क्या पेड़-पौधे सजीव हैं या निर्जीव? क्यों?
  3. कक्षा में मौजूद किन्हीं तीन निर्जीव वस्तुओं के नाम बताइए।

10. गृहकार्य (Homework):

अपने घर से 5 सजीव और 5 निर्जीव वस्तुओं के नाम एक सूची में लिखकर लाएं।

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D.El.Ed EVS Lesson Plan 15: पाठ योजना क्रमांक – 15

योजना प्रकार: D.El.Ed EVS Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 4
कालांश: ………………..
विषय: गणित (Maths)
उपविषय: पर्यावरण (Environment)
प्रकरण: जानवरों के कान और खाल (पैटर्न)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. छात्रों को जंतुओं की शारीरिक विशेषताओं से परिचित कराना।
  2. जंतुओं के अवलोकन (Observation) की क्षमता का विकास करना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘जानवरों के कान और खाल (पैटर्न)’ पाठ में आए नवीन तथ्यों का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे। विद्यार्थी प्रकरण के महत्व को समझ सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘जानवरों के कान और खाल (पैटर्न)’ पाठ के विषय को समझकर अपने शब्दों में व्यक्त कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी पाठ से प्राप्त ज्ञान और समझ का अपने व्यावहारिक जीवन में उपयोग कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी उचित हाव-भाव के साथ पर्यावरण से संबंधित गतिविधियों को करने का कौशल प्राप्त करेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी पर्यावरण अध्ययन की अन्य रोचक पुस्तकों/कहानियों को पढ़ने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में प्रकृति, जानवरों और अपने आस-पास के परिवेश के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

हाथी, ज़ेब्रा, चीता, छिपकली और मगरमच्छ के चित्र।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रश्नोत्तर प्रविधि, स्पष्टीकरण विधि, और प्रदर्शन/गतिविधि आधारित विधि।

5. पूर्व ज्ञान:

छात्रों ने विभिन्न जानवरों को टीवी या चिड़ियाघर में देखा है।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.हाथी के कान कैसे होते हैं?बहुत बड़े, पंखे जैसे।
2.क्या आपने कभी छिपकली या सांप के कान देखे हैं?नहीं, दिखाई नहीं देते।
3.बच्चों, क्या आपको इसके बारे में और कुछ पता है?छात्र अपने विचार रखते हैं।
4.क्या यह हमारे आस-पास के पर्यावरण का हिस्सा है?हाँ, बिल्कुल।
5.जिन जानवरों के कान बाहर दिखाई देते हैं, वे बच्चे देते हैं या अंडे?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

बच्चों, आज हम जानवरों की एक बहुत ही रोचक विशेषता— ‘उनके कान और त्वचा के पैटर्न’ के बारे में जानेंगे।

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
जानवरों के कानकुछ जानवरों के कान बाहर दिखाई देते हैं (जैसे- हाथी, कुत्ता, गाय)। कुछ के कान बाहर दिखाई नहीं देते, उनके सिर के दोनों ओर छोटे छेद होते हैं (जैसे- पक्षी, छिपकली, मगरमच्छ)।छात्र जानवरों के कानों की तुलना करेंगे।बाहरी कान: हाथी, गाय
छेद वाले कान: पक्षी, छिपकली
त्वचा पर बाल और पैटर्नजानवरों की त्वचा पर अलग-अलग डिज़ाइन (पैटर्न) होते हैं। यह पैटर्न उनके शरीर पर मौजूद बालों के कारण होता है। जैसे— ज़ेब्रा की धारियां, चीते के धब्बे।छात्र चित्र में पैटर्न देखेंगे।पैटर्न = शरीर के बालों के कारण
बच्चे देने वाले जानवरजिन जानवरों के कान बाहर दिखाई देते हैं और शरीर पर बाल होते हैं, वे ‘बच्चे’ देते हैं (जैसे— कुत्ता, गाय, मनुष्य)।छात्र नियम को ध्यानपूर्वक सुनेंगे।बाहरी कान + बाल = बच्चे देते हैं
अंडे देने वाले जानवरजिन जानवरों के कान बाहर दिखाई नहीं देते और शरीर पर बाल नहीं होते (पंख या शल्क होते हैं), वे ‘अंडे’ देते हैं (जैसे— सांप, छिपकली, पक्षी)।छात्र अपनी कॉपी में लिखेंगे।बाहरी कान नहीं + बाल नहीं = अंडे देते हैं

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. हाथी के कान कैसे होते हैं?
  2. जिन जानवरों के कान बाहर दिखाई नहीं देते, वे क्या देते हैं?
  3. ज़ेब्रा के शरीर पर पैटर्न किसके कारण होता है?

10. गृहकार्य (Homework):

5 बच्चे देने वाले और 5 अंडे देने वाले जानवरों के नाम लिखकर लाएं।

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D.El.Ed EVS Lesson Plan 16: पाठ योजना क्रमांक – 16

योजना प्रकार: D.El.Ed EVS Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 5
कालांश: ………………..
विषय: गणित (Maths)
उपविषय: पर्यावरण (Environment)
प्रकरण: चखने से पचाने तक (पाचन तंत्र)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. छात्रों को मानव शरीर की जैविक प्रक्रियाओं से अवगत कराना।
  2. स्वस्थ खान-पान के प्रति जागरूकता पैदा करना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘चखने से पचाने तक (पाचन तंत्र)’ पाठ में आए नवीन तथ्यों का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे। विद्यार्थी प्रकरण के महत्व को समझ सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘चखने से पचाने तक (पाचन तंत्र)’ पाठ के विषय को समझकर अपने शब्दों में व्यक्त कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी पाठ से प्राप्त ज्ञान और समझ का अपने व्यावहारिक जीवन में उपयोग कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी उचित हाव-भाव के साथ पर्यावरण से संबंधित गतिविधियों को करने का कौशल प्राप्त करेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी पर्यावरण अध्ययन की अन्य रोचक पुस्तकों/कहानियों को पढ़ने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में प्रकृति, जानवरों और अपने आस-पास के परिवेश के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

जीभ के स्वाद-क्षेत्रों का चार्ट, मानव पाचन तंत्र का मॉडल या चित्र।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रश्नोत्तर प्रविधि, स्पष्टीकरण विधि, और प्रदर्शन/गतिविधि आधारित विधि।

5. पूर्व ज्ञान:

छात्र जानते हैं कि भोजन मुंह से खाया जाता है और पेट में जाता है।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.हमें भोजन का स्वाद कैसे पता चलता है?जीभ (Tongue) से।
2.मुंह में भोजन को कौन चबाता है?दांत चबाते हैं।
3.बच्चों, क्या आपको इसके बारे में और कुछ पता है?छात्र अपने विचार रखते हैं।
4.क्या यह हमारे आस-पास के पर्यावरण का हिस्सा है?हाँ, बिल्कुल।
5.चबाने के बाद भोजन पेट में जाकर कैसे पचता है?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

बच्चों, आज हम अपने शरीर के अंदर होने वाली एक बहुत ही महत्वपूर्ण क्रिया— ‘भोजन चखने से लेकर पेट में पचने तक’ की यात्रा के बारे में पढ़ेंगे।

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
जीभ और स्वादहमारी जीभ पर स्वाद-कलिकाएं (Taste buds) होती हैं। जीभ का अगला हिस्सा मीठा, किनारे खट्टा व नमकीन, और पिछला हिस्सा कड़वा स्वाद बताता है।छात्र जीभ का चार्ट देखेंगे।स्वाद: मीठा (आगे), कड़वा (पीछे)
मुंह में पाचनजब हम भोजन चबाते हैं, तो मुंह में ‘लार’ (Saliva) बनती है। लार भोजन को मुलायम और मीठा बनाती है। पाचन की शुरुआत मुंह से ही हो जाती है।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे।पाचन की शुरुआत मुंह से (लार)
भोजन नली और आमाशयचबाया हुआ भोजन ‘भोजन नली’ (Food pipe) से होता हुआ आमाशय (Stomach) में पहुंचता है। पेट में पाचक रस भोजन को मथकर एक पेस्ट बना देते हैं।छात्र पाचन तंत्र के चित्र को समझेंगे।पेट के पाचक रस भोजन पचाते हैं
छोटी और बड़ी आंतपेट से भोजन छोटी आंत (Small Intestine) में जाता है, जहाँ पोषक तत्व खून में मिल जाते हैं। बचा हुआ अपशिष्ट बड़ी आंत से शरीर के बाहर निकल जाता है।छात्र प्रक्रिया को अपनी कॉपी में लिखेंगे।छोटी आंत: पोषक तत्व सोखना

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. जीभ का कौन-सा हिस्सा मीठा स्वाद बताता है?
  2. भोजन के पाचन की शुरुआत शरीर के किस अंग से होती है?
  3. लार (Saliva) का क्या काम है?

10. गृहकार्य (Homework):

मानव पाचन तंत्र का सरल चित्र अपनी कॉपी में बनाकर लाएं।

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D.El.Ed EVS Lesson Plan 17: पाठ योजना क्रमांक – 17

योजना प्रकार: D.El.Ed EVS Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 5
कालांश: ………………..
विषय: गणित (Maths)
उपविषय: पर्यावरण (Environment)
प्रकरण: बीज, बीज, बीज (प्रजनन और प्रकीर्णन)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. छात्रों को कृषि और वनस्पतियों के विकास से जोड़ना।
  2. बीज से पौधे बनने की प्रक्रिया का ज्ञान देना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘बीज, बीज, बीज (प्रजनन और प्रकीर्णन)’ पाठ में आए नवीन तथ्यों का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे। विद्यार्थी प्रकरण के महत्व को समझ सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘बीज, बीज, बीज (प्रजनन और प्रकीर्णन)’ पाठ के विषय को समझकर अपने शब्दों में व्यक्त कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी पाठ से प्राप्त ज्ञान और समझ का अपने व्यावहारिक जीवन में उपयोग कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी उचित हाव-भाव के साथ पर्यावरण से संबंधित गतिविधियों को करने का कौशल प्राप्त करेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी पर्यावरण अध्ययन की अन्य रोचक पुस्तकों/कहानियों को पढ़ने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में प्रकृति, जानवरों और अपने आस-पास के परिवेश के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

चना या मूंग के अंकुरित बीज, रुई, पानी, और प्रकीर्णन दर्शाने वाला चार्ट।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रश्नोत्तर प्रविधि, स्पष्टीकरण विधि, और प्रदर्शन/गतिविधि आधारित विधि।

5. पूर्व ज्ञान:

छात्रों ने फलों के अंदर बीज देखे हैं (जैसे- सेब, पपीता, आम)।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.नया पौधा उगाने के लिए हम मिट्टी में क्या बोते हैं?बीज (Seed) बोते हैं।
2.क्या सभी बीज एक ही जगह गिरकर उगते हैं?नहीं, वे अलग-अलग जगह फैल जाते हैं।
3.बच्चों, क्या आपको इसके बारे में और कुछ पता है?छात्र अपने विचार रखते हैं।
4.क्या यह हमारे आस-पास के पर्यावरण का हिस्सा है?हाँ, बिल्कुल।
5.बीज एक जगह से दूसरी जगह कैसे पहुंचते हैं?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

बच्चों, आज हम बीजों के अंकुरण और बीजों के एक जगह से दूसरी जगह फैलने की प्रक्रिया (‘बीजों के प्रकीर्णन’) के बारे में जानेंगे।

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
बीज का अंकुरण (Germination)जब एक बीज को सही मात्रा में पानी, हवा और सूरज की गर्मी (तापमान) मिलती है, तो उसमें से एक छोटा पौधा निकलता है। इसे अंकुरण कहते हैं।छात्र अंकुरित मूंग/चने को देखेंगे।अंकुरण = पानी + हवा + गर्मी
हवा द्वारा प्रकीर्णनकुछ बीज बहुत हल्के और रोएंदार होते हैं (जैसे— मदार और कपास के बीज)। ये हवा में उड़कर दूर-दूर तक पहुंच जाते हैं।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे।हवा द्वारा: मदार, कपास
पानी और जानवरों द्वारा प्रकीर्णननारियल पानी में तैरकर दूसरी जगह पहुंचता है। गोखरू या कांटेदार बीज जानवरों के बालों में उलझकर दूर तक चले जाते हैं। पक्षी फल खाकर बीट के साथ बीज निकालते हैं।छात्र विभिन्न तरीकों को अपनी कॉपी में लिखेंगे।पानी द्वारा: नारियल
जानवरों द्वारा: गोखरू
फटने से प्रकीर्णनकुछ फल सूखकर ज़ोर से फटते हैं, जिससे उनके बीज दूर छिटक जाते हैं। जैसे— मटर, भिंडी और सोयाबीन की फलियां।छात्र आश्चर्यचकित होकर सुनेंगे।फटने से: मटर, सोयाबीन

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. बीज के अंकुरण के लिए कौन-सी तीन चीजें आवश्यक हैं?
  2. नारियल का बीज एक जगह से दूसरी जगह कैसे पहुंचता है?
  3. जानवरों के बालों में कैसे बीज चिपक जाते हैं?

10. गृहकार्य (Homework):

कुछ बीजों (चना, मूंग) को गीली रुई में रखकर उनके अंकुरण का घर पर अवलोकन करें।

Part of our 180+ free D.El.Ed / BSTC Maths Lesson Plans collection.

D.El.Ed EVS Lesson Plan 18: पाठ योजना क्रमांक – 18

योजना प्रकार: D.El.Ed EVS Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 5
कालांश: ………………..
विषय: गणित (Maths)
उपविषय: पर्यावरण (Environment)
प्रकरण: घटपर्णी पौधा (शिकारी पौधा)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. छात्रों में प्रकृति के प्रति वैज्ञानिक जिज्ञासा (Curiosity) पैदा करना।
  2. वनस्पतियों की विशेष अनुकूलन क्षमता से परिचित कराना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘घटपर्णी पौधा (शिकारी पौधा)’ पाठ में आए नवीन तथ्यों का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे। विद्यार्थी प्रकरण के महत्व को समझ सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘घटपर्णी पौधा (शिकारी पौधा)’ पाठ के विषय को समझकर अपने शब्दों में व्यक्त कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी पाठ से प्राप्त ज्ञान और समझ का अपने व्यावहारिक जीवन में उपयोग कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी उचित हाव-भाव के साथ पर्यावरण से संबंधित गतिविधियों को करने का कौशल प्राप्त करेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी पर्यावरण अध्ययन की अन्य रोचक पुस्तकों/कहानियों को पढ़ने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में प्रकृति, जानवरों और अपने आस-पास के परिवेश के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

घटपर्णी (Pitcher Plant) और वीनस फ्लाईट्रैप का रंगीन चित्र या वीडियो क्लिप।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रश्नोत्तर प्रविधि, स्पष्टीकरण विधि, और प्रदर्शन/गतिविधि आधारित विधि।

5. पूर्व ज्ञान:

छात्र जानते हैं कि जानवर दूसरे जीवों का शिकार करते हैं और पौधे मिट्टी से पानी लेते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.जानवरों का शिकार कौन करता है?शेर, चीता, मेंढक आदि।
2.क्या पौधे भी कीड़े-मकोड़ों का शिकार कर सकते हैं?शायद नहीं। (छात्र असमंजस में)
3.बच्चों, क्या आपको इसके बारे में और कुछ पता है?छात्र अपने विचार रखते हैं।
4.क्या यह हमारे आस-पास के पर्यावरण का हिस्सा है?हाँ, बिल्कुल।
5.कीड़े खाने वाले पौधों को क्या कहते हैं?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

बच्चों, आज हम कुछ ऐसे अजीब और अनोखे पौधों के बारे में जानेंगे जो कीड़े-मकोड़ों, चूहों और मेंढकों का शिकार करके उन्हें खा जाते हैं। इन्हें ‘शिकारी पौधे’ कहते हैं।

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
शिकारी पौधे (Insectivorous Plants)कुछ पौधे ऐसी मिट्टी में उगते हैं जहाँ नाइट्रोजन की कमी होती है। इस कमी को पूरा करने के लिए वे कीड़े-मकोड़ों का शिकार करते हैं।छात्र आश्चर्य से सुनेंगे।शिकारी पौधे = कीड़े खाने वाले (नाइट्रोजन के लिए)
घटपर्णी (Nepenthes/Pitcher Plant)घटपर्णी पौधे का आकार एक घड़े (Pitcher) जैसा होता है। इसके ऊपर एक पत्ती का ढक्कन लगा होता है। यह भारत के मेघालय, ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया में पाया जाता है।छात्र चित्र में घटपर्णी का घड़ा देखेंगे।घटपर्णी: घड़े के आकार का (मेघालय में)
शिकार का तरीकाघड़े के अंदर से एक खास मीठी खुशबू निकलती है जो कीड़ों को अपनी ओर खींचती है। कीड़ा जैसे ही घड़े के अंदर जाता है, वह फिसलकर फंस जाता है और ऊपर का ढक्कन बंद हो जाता है।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे।मीठी खुशबू से शिकार को फंसाना।
अन्य शिकारी पौधेवीनस फ्लाईट्रैप (Venus Flytrap) और सड्यू (Sundew) भी शिकारी पौधे हैं, जो कीड़ों को जकड़ कर खा जाते हैं।छात्र अन्य पौधों के नाम अपनी कॉपी में लिखेंगे।अन्य नाम: वीनस फ्लाईट्रैप

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. घटपर्णी पौधे का आकार कैसा होता है?
  2. भारत में घटपर्णी पौधा कहाँ पाया जाता है?
  3. शिकारी पौधे कीड़ों का शिकार क्यों करते हैं?

10. गृहकार्य (Homework):

घटपर्णी (Pitcher Plant) का सुंदर चित्र अपनी कॉपी में बनाकर लाएं।

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D.El.Ed EVS Lesson Plan 19: पाठ योजना क्रमांक – 19

योजना प्रकार: D.El.Ed EVS Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 4
कालांश: ………………..
विषय: गणित (Maths)
उपविषय: पर्यावरण (Environment)
प्रकरण: अनीता की मधुमक्खियाँ (मधुमक्खी पालन)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. छात्रों को कृषि आधारित कुटीर उद्योगों से परिचित कराना।
  2. मेहनत और स्वावलंबन (Self-reliance) की प्रेरणा देना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘अनीता की मधुमक्खियाँ (मधुमक्खी पालन)’ पाठ में आए नवीन तथ्यों का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे। विद्यार्थी प्रकरण के महत्व को समझ सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘अनीता की मधुमक्खियाँ (मधुमक्खी पालन)’ पाठ के विषय को समझकर अपने शब्दों में व्यक्त कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी पाठ से प्राप्त ज्ञान और समझ का अपने व्यावहारिक जीवन में उपयोग कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी उचित हाव-भाव के साथ पर्यावरण से संबंधित गतिविधियों को करने का कौशल प्राप्त करेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी पर्यावरण अध्ययन की अन्य रोचक पुस्तकों/कहानियों को पढ़ने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में प्रकृति, जानवरों और अपने आस-पास के परिवेश के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

मधुमक्खी के छत्ते का चित्र, शहद की एक छोटी बोतल, ‘अनीता’ की कहानी का चार्ट।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रश्नोत्तर प्रविधि, स्पष्टीकरण विधि, और प्रदर्शन/गतिविधि आधारित विधि।

5. पूर्व ज्ञान:

छात्रों ने मधुमक्खी, उसका छत्ता और शहद देखा है।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.फूलों का रस चूसकर शहद कौन बनाता है?मधुमक्खी।
2.शहद कहाँ इकट्ठा किया जाता है?मधुमक्खी के छत्ते (Hive) में।
3.बच्चों, क्या आपको इसके बारे में और कुछ पता है?छात्र अपने विचार रखते हैं।
4.क्या यह हमारे आस-पास के पर्यावरण का हिस्सा है?हाँ, बिल्कुल।
5.शहद प्राप्त करने के लिए मधुमक्खियों को पालने को क्या कहते हैं?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

बच्चों, आज हम बिहार की रहने वाली एक बहादुर लड़की ‘अनीता कुशवाहा’ की कहानी पढ़ेंगे और ‘मधुमक्खी पालन’ के बारे में जानेंगे।

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
अनीता की कहानीअनीता बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के बोचाहा गांव की रहने वाली है। उसने पढ़ाई के साथ-साथ मधुमक्खी पालन का काम शुरू किया और स्वावलंबी बनी।छात्र अनीता की संघर्ष की कहानी सुनेंगे।अनीता: बिहार (मुजफ्फरपुर)
मधुमक्खी पालन का सही समयअक्टूबर से दिसंबर का समय मधुमक्खियों के अंडे देने का समय होता है। इसलिए यही समय मधुमक्खी पालन शुरू करने के लिए सबसे अच्छा माना जाता है। लीची के फूल मधुमक्खियों को बहुत लुभाते हैं।छात्र महत्वपूर्ण बिंदुओं को नोट करेंगे।सही समय: अक्टूबर से दिसंबर
फूल: लीची
मधुमक्खियों के प्रकार और कार्यहर छत्ते में एक ‘रानी मक्खी’ होती है जो अंडे देती है। कुछ ‘नर मक्खी’ होते हैं। बाकी सभी ‘काम करने वाली मक्खियां’ (Worker bees) होती हैं, जो रस ढूंढती हैं और छत्ता बनाती हैं।छात्र छत्ते की व्यवस्था को समझेंगे।रानी मक्खी: अंडे देना
वर्कर मक्खी: रस लाना
मधुमक्खियों का नाच (Dance)जब किसी मक्खी को रस मिल जाता है, तो वह एक विशेष प्रकार का नाच करती है। इससे दूसरी मक्खियों को पता चल जाता है कि रस कहाँ है।छात्र आश्चर्य से सुनेंगे।रस मिलने पर विशेष नाच

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. मधुमक्खी पालन शुरू करने का सबसे अच्छा समय कौन-सा है?
  2. छत्ते में अंडे देने का काम कौन-सी मक्खी करती है?
  3. रस ढूंढने का काम कौन करता है?

10. गृहकार्य (Homework):

मधुमक्खी के छत्ते का चित्र बनाकर उसमें काम करने वाली मक्खियों के कार्य लिखिए।

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D.El.Ed EVS Lesson Plan 20: पाठ योजना क्रमांक – 20

योजना प्रकार: D.El.Ed EVS Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 4
कालांश: ………………..
विषय: गणित (Maths)
उपविषय: पर्यावरण (Environment)
प्रकरण: चलो चलें स्कूल (स्कूल जाने के साधन)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. छात्रों को भारत की भौगोलिक विविधता से अवगत कराना।
  2. शिक्षा के प्रति संघर्ष और लगन का महत्व समझाना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘चलो चलें स्कूल (स्कूल जाने के साधन)’ पाठ में आए नवीन तथ्यों का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे। विद्यार्थी प्रकरण के महत्व को समझ सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘चलो चलें स्कूल (स्कूल जाने के साधन)’ पाठ के विषय को समझकर अपने शब्दों में व्यक्त कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी पाठ से प्राप्त ज्ञान और समझ का अपने व्यावहारिक जीवन में उपयोग कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी उचित हाव-भाव के साथ पर्यावरण से संबंधित गतिविधियों को करने का कौशल प्राप्त करेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी पर्यावरण अध्ययन की अन्य रोचक पुस्तकों/कहानियों को पढ़ने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में प्रकृति, जानवरों और अपने आस-पास के परिवेश के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

भारत का मानचित्र, ट्रॉली (लद्दाख), वल्लम (केरल), और ऊंट-गाड़ी (राजस्थान) के चित्र।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रश्नोत्तर प्रविधि, स्पष्टीकरण विधि, और प्रदर्शन/गतिविधि आधारित विधि।

5. पूर्व ज्ञान:

छात्र अपने स्कूल बस, वैन, साइकिल या पैदल आते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.आप लोग अपने घर से स्कूल कैसे आते हैं?साइकिल, बस या पैदल।
2.क्या पहाड़ों या रेगिस्तान में भी बच्चे बस से स्कूल जा सकते हैं?नहीं, वहां बस नहीं चल सकती।
3.बच्चों, क्या आपको इसके बारे में और कुछ पता है?छात्र अपने विचार रखते हैं।
4.क्या यह हमारे आस-पास के पर्यावरण का हिस्सा है?हाँ, बिल्कुल।
5.पहाड़ी या बर्फ वाले इलाकों में बच्चे स्कूल कैसे पहुंचते हैं?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

बच्चों, आज हम जानेंगे कि भारत के अलग-अलग हिस्सों में भौगोलिक कठिनाइयों के बावजूद बच्चे किन साधनों का प्रयोग करके स्कूल पहुंचते हैं।

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
बांस और रस्सी का पुलअसम में बहुत बारिश होती है और पानी भर जाता है। इसलिए वहां के बच्चे बांस और रस्सी से बने अस्थाई पुल को पार करके स्कूल जाते हैं।छात्र असम की भौगोलिक स्थिति समझेंगे।असम: बांस और रस्सी का पुल
ट्रॉली और वल्लम (लकड़ी की नाव)लद्दाख में गहरी नदी पार करने के लिए लोहे की रस्सी पर लटकी लकड़ी की ‘ट्रॉली’ का प्रयोग होता है। केरल में बच्चे पानी पार करने के लिए लकड़ी की छोटी नाव, जिसे ‘वल्लम’ कहते हैं, का प्रयोग करते हैं।छात्र ट्रॉली और वल्लम के चित्र देखेंगे।लद्दाख: ट्रॉली
केरल: वल्लम (नाव)
रेगिस्तान और मैदानी इलाकेराजस्थान के रेतीले इलाकों में बच्चे ‘ऊंट-गाड़ी’ में बैठकर स्कूल जाते हैं। मैदानी इलाकों के गांव में बैलगाड़ी (Bullock cart) का प्रयोग किया जाता है।छात्र अपनी कॉपी में लिखेंगे।राजस्थान: ऊंट-गाड़ी
मैदान: बैलगाड़ी
बर्फ और पथरीले रास्तेउत्तर की पहाड़ियों में बच्चे बर्फ पर हाथ पकड़कर चलते हैं। उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में बच्चे उबड़-खाबड़ और पथरीले रास्तों को पार करके स्कूल जाते हैं।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे।उत्तराखंड: पथरीले रास्ते

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. केरल में बच्चे स्कूल जाने के लिए किस नाव का प्रयोग करते हैं?
  2. लद्दाख में नदी पार करने के लिए किसका प्रयोग होता है?
  3. ऊंट-गाड़ी का प्रयोग किस राज्य में किया जाता है?

10. गृहकार्य (Homework):

अपने राज्य के मानचित्र में उन रास्तों को दर्शाएं जिनसे आप स्कूल जाते हैं।

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D.El.Ed Maths Lesson Plan 11: पाठ योजना क्रमांक – 11

योजना प्रकार: D.El.Ed Maths Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 2-3
कालांश: ………………..
विषय: गणित (Mathematics)
प्रकरण: बुनियादी आकृतियाँ (वृत्त, वर्ग, त्रिभुज, आयत)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में गणित और ज्यामिति विषय के प्रति रुचि उत्पन्न करना।
  2. विद्यार्थियों में तार्किक एवं निरीक्षण क्षमता का विकास करना।
  3. विद्यार्थियों को दैनिक जीवन में मापन और आकृतियों के महत्व से अवगत कराना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘बुनियादी आकृतियाँ (वृत्त, वर्ग, त्रिभुज, आयत)’ का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे तथा इसकी परिभाषा को जान सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘बुनियादी आकृतियाँ (वृत्त, वर्ग, त्रिभुज, आयत)’ को समझ कर उसे अपने शब्दों में स्पष्ट कर सकेंगे और अंतर पहचान सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी ‘बुनियादी आकृतियाँ (वृत्त, वर्ग, त्रिभुज, आयत)’ से संबंधित ज्ञान का प्रयोग दैनिक जीवन की स्थितियों (मापने और पहचानने) में कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी ‘बुनियादी आकृतियाँ (वृत्त, वर्ग, त्रिभुज, आयत)’ से संबंधित प्रश्नों को हल करने और आकृतियाँ बनाने का कौशल प्राप्त कर सकेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी ‘बुनियादी आकृतियाँ (वृत्त, वर्ग, त्रिभुज, आयत)’ से संबंधित समस्याओं और गणितीय पहेलियों को हल करने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में ‘बुनियादी आकृतियाँ (वृत्त, वर्ग, त्रिभुज, आयत)’ और गणित विषय के प्रति सकारात्मक एवं तार्किक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

चॉक, डस्टर, लपेट फलक, संकेतक, ‘बुनियादी आकृतियाँ (वृत्त, वर्ग, त्रिभुज, आयत)’ से संबंधित आकर्षक चार्ट, चित्र, मापक यंत्र (स्केल, इंचीटेप) और मॉडल।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रदर्शन विधि (Demonstration Method), आगमन-निगमन विधि, और प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी अपने आस-पास की वस्तुओं के आकार और सामान्य मापन के बारे में थोड़ी बहुत जानकारी रखते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.बच्चों, हम घर में या स्कूल में अलग-अलग चीजें देखते हैं, जैसे किताब, गेंद आदि।हाँ, देखते हैं।
2.क्या इन सभी चीजों का आकार और रूप एक जैसा होता है?नहीं, सबका आकार अलग होता है।
3.इन अलग-अलग आकारों, रूपों और उनकी माप को हम गणित में क्या कहते हैं?आकृतियाँ या मापन।
4.आकृतियों और उन्हें मापने के तरीके को हम मुख्य रूप से किस विषय में पढ़ते हैं?गणित में।
5.बच्चों, क्या आप ‘बुनियादी आकृतियाँ (वृत्त, वर्ग, त्रिभुज, आयत)’ के बारे में विस्तार से जानते हैं?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, आज हम गणित विषय के अंतर्गत ‘बुनियादी आकृतियाँ (वृत्त, वर्ग, त्रिभुज, आयत)’ के बारे में विस्तार से अध्ययन करेंगे और इसे चार्ट के माध्यम से समझेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
विकासात्मक प्रश्नछात्राध्यापक ‘बुनियादी आकृतियाँ (वृत्त, वर्ग, त्रिभुज, आयत)’ से संबंधित पूर्व ज्ञान को मुख्य पाठ से जोड़ने के लिए 2-3 सरल प्रश्न पूछेगा।छात्र अपनी समझ के अनुसार उत्तर देने का प्रयास करेंगे।मुख्य बिंदु
बुनियादी आकृतियाँ (वृत्त, वर्ग, त्रिभुज, आयत) का स्पष्टीकरणछात्राध्यापक चार्ट व टीएलएम (TLM) की सहायता से ‘बुनियादी आकृतियाँ (वृत्त, वर्ग, त्रिभुज, आयत)’ की अवधारणा को स्पष्ट करेगा।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे तथा महत्वपूर्ण बिंदुओं को समझेंगे।‘बुनियादी आकृतियाँ (वृत्त, वर्ग, त्रिभुज, आयत)’ की परिभाषा
बोध प्रश्नपढ़ाए गए विषय की समझ जाँचने के लिए छात्राध्यापक छात्रों से बोध प्रश्न पूछेगा।छात्र पढ़ाए गए विषय के आधार पर सही उत्तर देंगे।सही उत्तर
बुनियादी आकृतियाँ (वृत्त, वर्ग, त्रिभुज, आयत) के उदाहरणछात्राध्यापक श्यामपट्ट पर ‘बुनियादी आकृतियाँ (वृत्त, वर्ग, त्रिभुज, आयत)’ से संबंधित कुछ उदाहरण और चित्र बनाकर हल करके दिखाएगा।छात्र उदाहरणों को अपनी अभ्यास पुस्तिका में उतारेंगे।हल किए गए उदाहरण
छात्र गतिविधि / सहभागिताछात्राध्यापक कक्षा को समूहों में बाँटकर ‘बुनियादी आकृतियाँ (वृत्त, वर्ग, त्रिभुज, आयत)’ से संबंधित एक छोटी गतिविधि (Activity) करवाएगा।छात्र उत्साहपूर्वक गतिविधि में भाग लेंगे और सीखेंगे।गतिविधि का निष्कर्ष
श्यामपट्ट अभ्यास कार्यछात्राध्यापक छात्रों से कुछ प्रश्न पूछेगा और उन्हें श्यामपट्ट पर आकर हल करने के लिए आमंत्रित करेगा।छात्र निर्देशों का पालन करेंगे और श्यामपट्ट पर प्रश्नों को हल करेंगे।अभ्यास प्रश्न व हल

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. बुनियादी आकृतियाँ (वृत्त, वर्ग, त्रिभुज, आयत) से आप क्या समझते हैं?
  2. बुनियादी आकृतियाँ (वृत्त, वर्ग, त्रिभुज, आयत) के किन्हीं दो प्रकारों या इकाइयों के नाम बताइए।
  3. श्यामपट्ट पर दिए गए चित्र/प्रश्न को हल करके दिखाइए।

10. गृहकार्य (Homework):

सभी छात्र अपनी अभ्यास पुस्तिका में बुनियादी आकृतियाँ (वृत्त, वर्ग, त्रिभुज, आयत) से संबंधित 5 प्रश्न हल करके और चित्र बनाकर लाएंगे।

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D.El.Ed Maths Lesson Plan 12: पाठ योजना क्रमांक – 12

योजना प्रकार: D.El.Ed Maths Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 4-5
कालांश: ………………..
विषय: गणित (Mathematics)
प्रकरण: त्रिविमीय आकृतियाँ (घन, घनाभ, गोला, बेलन)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में गणित और ज्यामिति विषय के प्रति रुचि उत्पन्न करना।
  2. विद्यार्थियों में तार्किक एवं निरीक्षण क्षमता का विकास करना।
  3. विद्यार्थियों को दैनिक जीवन में मापन और आकृतियों के महत्व से अवगत कराना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘त्रिविमीय आकृतियाँ (घन, घनाभ, गोला, बेलन)’ का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे तथा इसकी परिभाषा को जान सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘त्रिविमीय आकृतियाँ (घन, घनाभ, गोला, बेलन)’ को समझ कर उसे अपने शब्दों में स्पष्ट कर सकेंगे और अंतर पहचान सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी ‘त्रिविमीय आकृतियाँ (घन, घनाभ, गोला, बेलन)’ से संबंधित ज्ञान का प्रयोग दैनिक जीवन की स्थितियों (मापने और पहचानने) में कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी ‘त्रिविमीय आकृतियाँ (घन, घनाभ, गोला, बेलन)’ से संबंधित प्रश्नों को हल करने और आकृतियाँ बनाने का कौशल प्राप्त कर सकेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी ‘त्रिविमीय आकृतियाँ (घन, घनाभ, गोला, बेलन)’ से संबंधित समस्याओं और गणितीय पहेलियों को हल करने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में ‘त्रिविमीय आकृतियाँ (घन, घनाभ, गोला, बेलन)’ और गणित विषय के प्रति सकारात्मक एवं तार्किक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

चॉक, डस्टर, लपेट फलक, संकेतक, ‘त्रिविमीय आकृतियाँ (घन, घनाभ, गोला, बेलन)’ से संबंधित आकर्षक चार्ट, चित्र, मापक यंत्र (स्केल, इंचीटेप) और मॉडल।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रदर्शन विधि (Demonstration Method), आगमन-निगमन विधि, और प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी अपने आस-पास की वस्तुओं के आकार और सामान्य मापन के बारे में थोड़ी बहुत जानकारी रखते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.बच्चों, हम घर में या स्कूल में अलग-अलग चीजें देखते हैं, जैसे किताब, गेंद आदि।हाँ, देखते हैं।
2.क्या इन सभी चीजों का आकार और रूप एक जैसा होता है?नहीं, सबका आकार अलग होता है।
3.इन अलग-अलग आकारों, रूपों और उनकी माप को हम गणित में क्या कहते हैं?आकृतियाँ या मापन।
4.आकृतियों और उन्हें मापने के तरीके को हम मुख्य रूप से किस विषय में पढ़ते हैं?गणित में।
5.बच्चों, क्या आप ‘त्रिविमीय आकृतियाँ (घन, घनाभ, गोला, बेलन)’ के बारे में विस्तार से जानते हैं?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, आज हम गणित विषय के अंतर्गत ‘त्रिविमीय आकृतियाँ (घन, घनाभ, गोला, बेलन)’ के बारे में विस्तार से अध्ययन करेंगे और इसे चार्ट के माध्यम से समझेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
विकासात्मक प्रश्नछात्राध्यापक ‘त्रिविमीय आकृतियाँ (घन, घनाभ, गोला, बेलन)’ से संबंधित पूर्व ज्ञान को मुख्य पाठ से जोड़ने के लिए 2-3 सरल प्रश्न पूछेगा।छात्र अपनी समझ के अनुसार उत्तर देने का प्रयास करेंगे।मुख्य बिंदु
त्रिविमीय आकृतियाँ (घन, घनाभ, गोला, बेलन) का स्पष्टीकरणछात्राध्यापक चार्ट व टीएलएम (TLM) की सहायता से ‘त्रिविमीय आकृतियाँ (घन, घनाभ, गोला, बेलन)’ की अवधारणा को स्पष्ट करेगा।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे तथा महत्वपूर्ण बिंदुओं को समझेंगे।‘त्रिविमीय आकृतियाँ (घन, घनाभ, गोला, बेलन)’ की परिभाषा
बोध प्रश्नपढ़ाए गए विषय की समझ जाँचने के लिए छात्राध्यापक छात्रों से बोध प्रश्न पूछेगा।छात्र पढ़ाए गए विषय के आधार पर सही उत्तर देंगे।सही उत्तर
त्रिविमीय आकृतियाँ (घन, घनाभ, गोला, बेलन) के उदाहरणछात्राध्यापक श्यामपट्ट पर ‘त्रिविमीय आकृतियाँ (घन, घनाभ, गोला, बेलन)’ से संबंधित कुछ उदाहरण और चित्र बनाकर हल करके दिखाएगा।छात्र उदाहरणों को अपनी अभ्यास पुस्तिका में उतारेंगे।हल किए गए उदाहरण
छात्र गतिविधि / सहभागिताछात्राध्यापक कक्षा को समूहों में बाँटकर ‘त्रिविमीय आकृतियाँ (घन, घनाभ, गोला, बेलन)’ से संबंधित एक छोटी गतिविधि (Activity) करवाएगा।छात्र उत्साहपूर्वक गतिविधि में भाग लेंगे और सीखेंगे।गतिविधि का निष्कर्ष
श्यामपट्ट अभ्यास कार्यछात्राध्यापक छात्रों से कुछ प्रश्न पूछेगा और उन्हें श्यामपट्ट पर आकर हल करने के लिए आमंत्रित करेगा।छात्र निर्देशों का पालन करेंगे और श्यामपट्ट पर प्रश्नों को हल करेंगे।अभ्यास प्रश्न व हल

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. त्रिविमीय आकृतियाँ (घन, घनाभ, गोला, बेलन) से आप क्या समझते हैं?
  2. त्रिविमीय आकृतियाँ (घन, घनाभ, गोला, बेलन) के किन्हीं दो प्रकारों या इकाइयों के नाम बताइए।
  3. श्यामपट्ट पर दिए गए चित्र/प्रश्न को हल करके दिखाइए।

10. गृहकार्य (Homework):

सभी छात्र अपनी अभ्यास पुस्तिका में त्रिविमीय आकृतियाँ (घन, घनाभ, गोला, बेलन) से संबंधित 5 प्रश्न हल करके और चित्र बनाकर लाएंगे।

Part of our 180+ free D.El.Ed / BSTC Maths Lesson Plans collection.

D.El.Ed Maths Lesson Plan 13: पाठ योजना क्रमांक – 13

योजना प्रकार: D.El.Ed Maths Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 4
कालांश: ………………..
विषय: गणित (Mathematics)
प्रकरण: रेखा, रेखाखंड और किरण में अंतर
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में गणित और ज्यामिति विषय के प्रति रुचि उत्पन्न करना।
  2. विद्यार्थियों में तार्किक एवं निरीक्षण क्षमता का विकास करना।
  3. विद्यार्थियों को दैनिक जीवन में मापन और आकृतियों के महत्व से अवगत कराना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘रेखा, रेखाखंड और किरण में अंतर’ का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे तथा इसकी परिभाषा को जान सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘रेखा, रेखाखंड और किरण में अंतर’ को समझ कर उसे अपने शब्दों में स्पष्ट कर सकेंगे और अंतर पहचान सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी ‘रेखा, रेखाखंड और किरण में अंतर’ से संबंधित ज्ञान का प्रयोग दैनिक जीवन की स्थितियों (मापने और पहचानने) में कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी ‘रेखा, रेखाखंड और किरण में अंतर’ से संबंधित प्रश्नों को हल करने और आकृतियाँ बनाने का कौशल प्राप्त कर सकेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी ‘रेखा, रेखाखंड और किरण में अंतर’ से संबंधित समस्याओं और गणितीय पहेलियों को हल करने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में ‘रेखा, रेखाखंड और किरण में अंतर’ और गणित विषय के प्रति सकारात्मक एवं तार्किक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

चॉक, डस्टर, लपेट फलक, संकेतक, ‘रेखा, रेखाखंड और किरण में अंतर’ से संबंधित आकर्षक चार्ट, चित्र, मापक यंत्र (स्केल, इंचीटेप) और मॉडल।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रदर्शन विधि (Demonstration Method), आगमन-निगमन विधि, और प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी अपने आस-पास की वस्तुओं के आकार और सामान्य मापन के बारे में थोड़ी बहुत जानकारी रखते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.बच्चों, हम घर में या स्कूल में अलग-अलग चीजें देखते हैं, जैसे किताब, गेंद आदि।हाँ, देखते हैं।
2.क्या इन सभी चीजों का आकार और रूप एक जैसा होता है?नहीं, सबका आकार अलग होता है।
3.इन अलग-अलग आकारों, रूपों और उनकी माप को हम गणित में क्या कहते हैं?आकृतियाँ या मापन।
4.आकृतियों और उन्हें मापने के तरीके को हम मुख्य रूप से किस विषय में पढ़ते हैं?गणित में।
5.बच्चों, क्या आप ‘रेखा, रेखाखंड और किरण में अंतर’ के बारे में विस्तार से जानते हैं?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, आज हम गणित विषय के अंतर्गत ‘रेखा, रेखाखंड और किरण में अंतर’ के बारे में विस्तार से अध्ययन करेंगे और इसे चार्ट के माध्यम से समझेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
विकासात्मक प्रश्नछात्राध्यापक ‘रेखा, रेखाखंड और किरण में अंतर’ से संबंधित पूर्व ज्ञान को मुख्य पाठ से जोड़ने के लिए 2-3 सरल प्रश्न पूछेगा।छात्र अपनी समझ के अनुसार उत्तर देने का प्रयास करेंगे।मुख्य बिंदु
रेखा, रेखाखंड और किरण में अंतर का स्पष्टीकरणछात्राध्यापक चार्ट व टीएलएम (TLM) की सहायता से ‘रेखा, रेखाखंड और किरण में अंतर’ की अवधारणा को स्पष्ट करेगा।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे तथा महत्वपूर्ण बिंदुओं को समझेंगे।‘रेखा, रेखाखंड और किरण में अंतर’ की परिभाषा
बोध प्रश्नपढ़ाए गए विषय की समझ जाँचने के लिए छात्राध्यापक छात्रों से बोध प्रश्न पूछेगा।छात्र पढ़ाए गए विषय के आधार पर सही उत्तर देंगे।सही उत्तर
रेखा, रेखाखंड और किरण में अंतर के उदाहरणछात्राध्यापक श्यामपट्ट पर ‘रेखा, रेखाखंड और किरण में अंतर’ से संबंधित कुछ उदाहरण और चित्र बनाकर हल करके दिखाएगा।छात्र उदाहरणों को अपनी अभ्यास पुस्तिका में उतारेंगे।हल किए गए उदाहरण
छात्र गतिविधि / सहभागिताछात्राध्यापक कक्षा को समूहों में बाँटकर ‘रेखा, रेखाखंड और किरण में अंतर’ से संबंधित एक छोटी गतिविधि (Activity) करवाएगा।छात्र उत्साहपूर्वक गतिविधि में भाग लेंगे और सीखेंगे।गतिविधि का निष्कर्ष
श्यामपट्ट अभ्यास कार्यछात्राध्यापक छात्रों से कुछ प्रश्न पूछेगा और उन्हें श्यामपट्ट पर आकर हल करने के लिए आमंत्रित करेगा।छात्र निर्देशों का पालन करेंगे और श्यामपट्ट पर प्रश्नों को हल करेंगे।अभ्यास प्रश्न व हल

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. रेखा, रेखाखंड और किरण में अंतर से आप क्या समझते हैं?
  2. रेखा, रेखाखंड और किरण में अंतर के किन्हीं दो प्रकारों या इकाइयों के नाम बताइए।
  3. श्यामपट्ट पर दिए गए चित्र/प्रश्न को हल करके दिखाइए।

10. गृहकार्य (Homework):

सभी छात्र अपनी अभ्यास पुस्तिका में रेखा, रेखाखंड और किरण में अंतर से संबंधित 5 प्रश्न हल करके और चित्र बनाकर लाएंगे।

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D.El.Ed Maths Lesson Plan 14: पाठ योजना क्रमांक – 14

योजना प्रकार: D.El.Ed Maths Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 5
कालांश: ………………..
विषय: गणित (Mathematics)
प्रकरण: कोणों का परिचय (न्यूनकोण, समकोण, अधिककोण)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में गणित और ज्यामिति विषय के प्रति रुचि उत्पन्न करना।
  2. विद्यार्थियों में तार्किक एवं निरीक्षण क्षमता का विकास करना।
  3. विद्यार्थियों को दैनिक जीवन में मापन और आकृतियों के महत्व से अवगत कराना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘कोणों का परिचय (न्यूनकोण, समकोण, अधिककोण)’ का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे तथा इसकी परिभाषा को जान सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘कोणों का परिचय (न्यूनकोण, समकोण, अधिककोण)’ को समझ कर उसे अपने शब्दों में स्पष्ट कर सकेंगे और अंतर पहचान सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी ‘कोणों का परिचय (न्यूनकोण, समकोण, अधिककोण)’ से संबंधित ज्ञान का प्रयोग दैनिक जीवन की स्थितियों (मापने और पहचानने) में कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी ‘कोणों का परिचय (न्यूनकोण, समकोण, अधिककोण)’ से संबंधित प्रश्नों को हल करने और आकृतियाँ बनाने का कौशल प्राप्त कर सकेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी ‘कोणों का परिचय (न्यूनकोण, समकोण, अधिककोण)’ से संबंधित समस्याओं और गणितीय पहेलियों को हल करने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में ‘कोणों का परिचय (न्यूनकोण, समकोण, अधिककोण)’ और गणित विषय के प्रति सकारात्मक एवं तार्किक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

चॉक, डस्टर, लपेट फलक, संकेतक, ‘कोणों का परिचय (न्यूनकोण, समकोण, अधिककोण)’ से संबंधित आकर्षक चार्ट, चित्र, मापक यंत्र (स्केल, इंचीटेप) और मॉडल।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रदर्शन विधि (Demonstration Method), आगमन-निगमन विधि, और प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी अपने आस-पास की वस्तुओं के आकार और सामान्य मापन के बारे में थोड़ी बहुत जानकारी रखते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.बच्चों, हम घर में या स्कूल में अलग-अलग चीजें देखते हैं, जैसे किताब, गेंद आदि।हाँ, देखते हैं।
2.क्या इन सभी चीजों का आकार और रूप एक जैसा होता है?नहीं, सबका आकार अलग होता है।
3.इन अलग-अलग आकारों, रूपों और उनकी माप को हम गणित में क्या कहते हैं?आकृतियाँ या मापन।
4.आकृतियों और उन्हें मापने के तरीके को हम मुख्य रूप से किस विषय में पढ़ते हैं?गणित में।
5.बच्चों, क्या आप ‘कोणों का परिचय (न्यूनकोण, समकोण, अधिककोण)’ के बारे में विस्तार से जानते हैं?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, आज हम गणित विषय के अंतर्गत ‘कोणों का परिचय (न्यूनकोण, समकोण, अधिककोण)’ के बारे में विस्तार से अध्ययन करेंगे और इसे चार्ट के माध्यम से समझेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
विकासात्मक प्रश्नछात्राध्यापक ‘कोणों का परिचय (न्यूनकोण, समकोण, अधिककोण)’ से संबंधित पूर्व ज्ञान को मुख्य पाठ से जोड़ने के लिए 2-3 सरल प्रश्न पूछेगा।छात्र अपनी समझ के अनुसार उत्तर देने का प्रयास करेंगे।मुख्य बिंदु
कोणों का परिचय (न्यूनकोण, समकोण, अधिककोण) का स्पष्टीकरणछात्राध्यापक चार्ट व टीएलएम (TLM) की सहायता से ‘कोणों का परिचय (न्यूनकोण, समकोण, अधिककोण)’ की अवधारणा को स्पष्ट करेगा।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे तथा महत्वपूर्ण बिंदुओं को समझेंगे।‘कोणों का परिचय (न्यूनकोण, समकोण, अधिककोण)’ की परिभाषा
बोध प्रश्नपढ़ाए गए विषय की समझ जाँचने के लिए छात्राध्यापक छात्रों से बोध प्रश्न पूछेगा।छात्र पढ़ाए गए विषय के आधार पर सही उत्तर देंगे।सही उत्तर
कोणों का परिचय (न्यूनकोण, समकोण, अधिककोण) के उदाहरणछात्राध्यापक श्यामपट्ट पर ‘कोणों का परिचय (न्यूनकोण, समकोण, अधिककोण)’ से संबंधित कुछ उदाहरण और चित्र बनाकर हल करके दिखाएगा।छात्र उदाहरणों को अपनी अभ्यास पुस्तिका में उतारेंगे।हल किए गए उदाहरण
छात्र गतिविधि / सहभागिताछात्राध्यापक कक्षा को समूहों में बाँटकर ‘कोणों का परिचय (न्यूनकोण, समकोण, अधिककोण)’ से संबंधित एक छोटी गतिविधि (Activity) करवाएगा।छात्र उत्साहपूर्वक गतिविधि में भाग लेंगे और सीखेंगे।गतिविधि का निष्कर्ष
श्यामपट्ट अभ्यास कार्यछात्राध्यापक छात्रों से कुछ प्रश्न पूछेगा और उन्हें श्यामपट्ट पर आकर हल करने के लिए आमंत्रित करेगा।छात्र निर्देशों का पालन करेंगे और श्यामपट्ट पर प्रश्नों को हल करेंगे।अभ्यास प्रश्न व हल

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. कोणों का परिचय (न्यूनकोण, समकोण, अधिककोण) से आप क्या समझते हैं?
  2. कोणों का परिचय (न्यूनकोण, समकोण, अधिककोण) के किन्हीं दो प्रकारों या इकाइयों के नाम बताइए।
  3. श्यामपट्ट पर दिए गए चित्र/प्रश्न को हल करके दिखाइए।

10. गृहकार्य (Homework):

सभी छात्र अपनी अभ्यास पुस्तिका में कोणों का परिचय (न्यूनकोण, समकोण, अधिककोण) से संबंधित 5 प्रश्न हल करके और चित्र बनाकर लाएंगे।

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D.El.Ed Maths Lesson Plan 15: पाठ योजना क्रमांक – 15

योजना प्रकार: D.El.Ed Maths Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 3-4
कालांश: ………………..
विषय: गणित (Mathematics)
प्रकरण: लंबाई का मापन (सेंटीमीटर, मीटर और किलोमीटर)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में गणित और ज्यामिति विषय के प्रति रुचि उत्पन्न करना।
  2. विद्यार्थियों में तार्किक एवं निरीक्षण क्षमता का विकास करना।
  3. विद्यार्थियों को दैनिक जीवन में मापन और आकृतियों के महत्व से अवगत कराना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘लंबाई का मापन (सेंटीमीटर, मीटर और किलोमीटर)’ का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे तथा इसकी परिभाषा को जान सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘लंबाई का मापन (सेंटीमीटर, मीटर और किलोमीटर)’ को समझ कर उसे अपने शब्दों में स्पष्ट कर सकेंगे और अंतर पहचान सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी ‘लंबाई का मापन (सेंटीमीटर, मीटर और किलोमीटर)’ से संबंधित ज्ञान का प्रयोग दैनिक जीवन की स्थितियों (मापने और पहचानने) में कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी ‘लंबाई का मापन (सेंटीमीटर, मीटर और किलोमीटर)’ से संबंधित प्रश्नों को हल करने और आकृतियाँ बनाने का कौशल प्राप्त कर सकेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी ‘लंबाई का मापन (सेंटीमीटर, मीटर और किलोमीटर)’ से संबंधित समस्याओं और गणितीय पहेलियों को हल करने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में ‘लंबाई का मापन (सेंटीमीटर, मीटर और किलोमीटर)’ और गणित विषय के प्रति सकारात्मक एवं तार्किक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

चॉक, डस्टर, लपेट फलक, संकेतक, ‘लंबाई का मापन (सेंटीमीटर, मीटर और किलोमीटर)’ से संबंधित आकर्षक चार्ट, चित्र, मापक यंत्र (स्केल, इंचीटेप) और मॉडल।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रदर्शन विधि (Demonstration Method), आगमन-निगमन विधि, और प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी अपने आस-पास की वस्तुओं के आकार और सामान्य मापन के बारे में थोड़ी बहुत जानकारी रखते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.बच्चों, हम घर में या स्कूल में अलग-अलग चीजें देखते हैं, जैसे किताब, गेंद आदि।हाँ, देखते हैं।
2.क्या इन सभी चीजों का आकार और रूप एक जैसा होता है?नहीं, सबका आकार अलग होता है।
3.इन अलग-अलग आकारों, रूपों और उनकी माप को हम गणित में क्या कहते हैं?आकृतियाँ या मापन।
4.आकृतियों और उन्हें मापने के तरीके को हम मुख्य रूप से किस विषय में पढ़ते हैं?गणित में।
5.बच्चों, क्या आप ‘लंबाई का मापन (सेंटीमीटर, मीटर और किलोमीटर)’ के बारे में विस्तार से जानते हैं?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, आज हम गणित विषय के अंतर्गत ‘लंबाई का मापन (सेंटीमीटर, मीटर और किलोमीटर)’ के बारे में विस्तार से अध्ययन करेंगे और इसे चार्ट के माध्यम से समझेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
विकासात्मक प्रश्नछात्राध्यापक ‘लंबाई का मापन (सेंटीमीटर, मीटर और किलोमीटर)’ से संबंधित पूर्व ज्ञान को मुख्य पाठ से जोड़ने के लिए 2-3 सरल प्रश्न पूछेगा।छात्र अपनी समझ के अनुसार उत्तर देने का प्रयास करेंगे।मुख्य बिंदु
लंबाई का मापन (सेंटीमीटर, मीटर और किलोमीटर) का स्पष्टीकरणछात्राध्यापक चार्ट व टीएलएम (TLM) की सहायता से ‘लंबाई का मापन (सेंटीमीटर, मीटर और किलोमीटर)’ की अवधारणा को स्पष्ट करेगा।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे तथा महत्वपूर्ण बिंदुओं को समझेंगे।‘लंबाई का मापन (सेंटीमीटर, मीटर और किलोमीटर)’ की परिभाषा
बोध प्रश्नपढ़ाए गए विषय की समझ जाँचने के लिए छात्राध्यापक छात्रों से बोध प्रश्न पूछेगा।छात्र पढ़ाए गए विषय के आधार पर सही उत्तर देंगे।सही उत्तर
लंबाई का मापन (सेंटीमीटर, मीटर और किलोमीटर) के उदाहरणछात्राध्यापक श्यामपट्ट पर ‘लंबाई का मापन (सेंटीमीटर, मीटर और किलोमीटर)’ से संबंधित कुछ उदाहरण और चित्र बनाकर हल करके दिखाएगा।छात्र उदाहरणों को अपनी अभ्यास पुस्तिका में उतारेंगे।हल किए गए उदाहरण
छात्र गतिविधि / सहभागिताछात्राध्यापक कक्षा को समूहों में बाँटकर ‘लंबाई का मापन (सेंटीमीटर, मीटर और किलोमीटर)’ से संबंधित एक छोटी गतिविधि (Activity) करवाएगा।छात्र उत्साहपूर्वक गतिविधि में भाग लेंगे और सीखेंगे।गतिविधि का निष्कर्ष
श्यामपट्ट अभ्यास कार्यछात्राध्यापक छात्रों से कुछ प्रश्न पूछेगा और उन्हें श्यामपट्ट पर आकर हल करने के लिए आमंत्रित करेगा।छात्र निर्देशों का पालन करेंगे और श्यामपट्ट पर प्रश्नों को हल करेंगे।अभ्यास प्रश्न व हल

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. लंबाई का मापन (सेंटीमीटर, मीटर और किलोमीटर) से आप क्या समझते हैं?
  2. लंबाई का मापन (सेंटीमीटर, मीटर और किलोमीटर) के किन्हीं दो प्रकारों या इकाइयों के नाम बताइए।
  3. श्यामपट्ट पर दिए गए चित्र/प्रश्न को हल करके दिखाइए।

10. गृहकार्य (Homework):

सभी छात्र अपनी अभ्यास पुस्तिका में लंबाई का मापन (सेंटीमीटर, मीटर और किलोमीटर) से संबंधित 5 प्रश्न हल करके और चित्र बनाकर लाएंगे।

Part of our 180+ free D.El.Ed / BSTC Maths Lesson Plans collection.

D.El.Ed Maths Lesson Plan 16: पाठ योजना क्रमांक – 16

योजना प्रकार: D.El.Ed Maths Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 3-4
कालांश: ………………..
विषय: गणित (Mathematics)
प्रकरण: वजन/द्रव्यमान का मापन (ग्राम और किलोग्राम)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में गणित और ज्यामिति विषय के प्रति रुचि उत्पन्न करना।
  2. विद्यार्थियों में तार्किक एवं निरीक्षण क्षमता का विकास करना।
  3. विद्यार्थियों को दैनिक जीवन में मापन और आकृतियों के महत्व से अवगत कराना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘वजन/द्रव्यमान का मापन (ग्राम और किलोग्राम)’ का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे तथा इसकी परिभाषा को जान सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘वजन/द्रव्यमान का मापन (ग्राम और किलोग्राम)’ को समझ कर उसे अपने शब्दों में स्पष्ट कर सकेंगे और अंतर पहचान सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी ‘वजन/द्रव्यमान का मापन (ग्राम और किलोग्राम)’ से संबंधित ज्ञान का प्रयोग दैनिक जीवन की स्थितियों (मापने और पहचानने) में कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी ‘वजन/द्रव्यमान का मापन (ग्राम और किलोग्राम)’ से संबंधित प्रश्नों को हल करने और आकृतियाँ बनाने का कौशल प्राप्त कर सकेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी ‘वजन/द्रव्यमान का मापन (ग्राम और किलोग्राम)’ से संबंधित समस्याओं और गणितीय पहेलियों को हल करने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में ‘वजन/द्रव्यमान का मापन (ग्राम और किलोग्राम)’ और गणित विषय के प्रति सकारात्मक एवं तार्किक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

चॉक, डस्टर, लपेट फलक, संकेतक, ‘वजन/द्रव्यमान का मापन (ग्राम और किलोग्राम)’ से संबंधित आकर्षक चार्ट, चित्र, मापक यंत्र (स्केल, इंचीटेप) और मॉडल।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रदर्शन विधि (Demonstration Method), आगमन-निगमन विधि, और प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी अपने आस-पास की वस्तुओं के आकार और सामान्य मापन के बारे में थोड़ी बहुत जानकारी रखते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.बच्चों, हम घर में या स्कूल में अलग-अलग चीजें देखते हैं, जैसे किताब, गेंद आदि।हाँ, देखते हैं।
2.क्या इन सभी चीजों का आकार और रूप एक जैसा होता है?नहीं, सबका आकार अलग होता है।
3.इन अलग-अलग आकारों, रूपों और उनकी माप को हम गणित में क्या कहते हैं?आकृतियाँ या मापन।
4.आकृतियों और उन्हें मापने के तरीके को हम मुख्य रूप से किस विषय में पढ़ते हैं?गणित में।
5.बच्चों, क्या आप ‘वजन/द्रव्यमान का मापन (ग्राम और किलोग्राम)’ के बारे में विस्तार से जानते हैं?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, आज हम गणित विषय के अंतर्गत ‘वजन/द्रव्यमान का मापन (ग्राम और किलोग्राम)’ के बारे में विस्तार से अध्ययन करेंगे और इसे चार्ट के माध्यम से समझेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
विकासात्मक प्रश्नछात्राध्यापक ‘वजन/द्रव्यमान का मापन (ग्राम और किलोग्राम)’ से संबंधित पूर्व ज्ञान को मुख्य पाठ से जोड़ने के लिए 2-3 सरल प्रश्न पूछेगा।छात्र अपनी समझ के अनुसार उत्तर देने का प्रयास करेंगे।मुख्य बिंदु
वजन/द्रव्यमान का मापन (ग्राम और किलोग्राम) का स्पष्टीकरणछात्राध्यापक चार्ट व टीएलएम (TLM) की सहायता से ‘वजन/द्रव्यमान का मापन (ग्राम और किलोग्राम)’ की अवधारणा को स्पष्ट करेगा।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे तथा महत्वपूर्ण बिंदुओं को समझेंगे।‘वजन/द्रव्यमान का मापन (ग्राम और किलोग्राम)’ की परिभाषा
बोध प्रश्नपढ़ाए गए विषय की समझ जाँचने के लिए छात्राध्यापक छात्रों से बोध प्रश्न पूछेगा।छात्र पढ़ाए गए विषय के आधार पर सही उत्तर देंगे।सही उत्तर
वजन/द्रव्यमान का मापन (ग्राम और किलोग्राम) के उदाहरणछात्राध्यापक श्यामपट्ट पर ‘वजन/द्रव्यमान का मापन (ग्राम और किलोग्राम)’ से संबंधित कुछ उदाहरण और चित्र बनाकर हल करके दिखाएगा।छात्र उदाहरणों को अपनी अभ्यास पुस्तिका में उतारेंगे।हल किए गए उदाहरण
छात्र गतिविधि / सहभागिताछात्राध्यापक कक्षा को समूहों में बाँटकर ‘वजन/द्रव्यमान का मापन (ग्राम और किलोग्राम)’ से संबंधित एक छोटी गतिविधि (Activity) करवाएगा।छात्र उत्साहपूर्वक गतिविधि में भाग लेंगे और सीखेंगे।गतिविधि का निष्कर्ष
श्यामपट्ट अभ्यास कार्यछात्राध्यापक छात्रों से कुछ प्रश्न पूछेगा और उन्हें श्यामपट्ट पर आकर हल करने के लिए आमंत्रित करेगा।छात्र निर्देशों का पालन करेंगे और श्यामपट्ट पर प्रश्नों को हल करेंगे।अभ्यास प्रश्न व हल

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. वजन/द्रव्यमान का मापन (ग्राम और किलोग्राम) से आप क्या समझते हैं?
  2. वजन/द्रव्यमान का मापन (ग्राम और किलोग्राम) के किन्हीं दो प्रकारों या इकाइयों के नाम बताइए।
  3. श्यामपट्ट पर दिए गए चित्र/प्रश्न को हल करके दिखाइए।

10. गृहकार्य (Homework):

सभी छात्र अपनी अभ्यास पुस्तिका में वजन/द्रव्यमान का मापन (ग्राम और किलोग्राम) से संबंधित 5 प्रश्न हल करके और चित्र बनाकर लाएंगे।

Part of our 180+ free D.El.Ed / BSTC Maths Lesson Plans collection.

D.El.Ed Maths Lesson Plan 17: पाठ योजना क्रमांक – 17

योजना प्रकार: D.El.Ed Maths Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 4-5
कालांश: ………………..
विषय: गणित (Mathematics)
प्रकरण: धारिता/आयतन का मापन (लीटर और मिलीलीटर)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में गणित और ज्यामिति विषय के प्रति रुचि उत्पन्न करना।
  2. विद्यार्थियों में तार्किक एवं निरीक्षण क्षमता का विकास करना।
  3. विद्यार्थियों को दैनिक जीवन में मापन और आकृतियों के महत्व से अवगत कराना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘धारिता/आयतन का मापन (लीटर और मिलीलीटर)’ का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे तथा इसकी परिभाषा को जान सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘धारिता/आयतन का मापन (लीटर और मिलीलीटर)’ को समझ कर उसे अपने शब्दों में स्पष्ट कर सकेंगे और अंतर पहचान सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी ‘धारिता/आयतन का मापन (लीटर और मिलीलीटर)’ से संबंधित ज्ञान का प्रयोग दैनिक जीवन की स्थितियों (मापने और पहचानने) में कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी ‘धारिता/आयतन का मापन (लीटर और मिलीलीटर)’ से संबंधित प्रश्नों को हल करने और आकृतियाँ बनाने का कौशल प्राप्त कर सकेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी ‘धारिता/आयतन का मापन (लीटर और मिलीलीटर)’ से संबंधित समस्याओं और गणितीय पहेलियों को हल करने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में ‘धारिता/आयतन का मापन (लीटर और मिलीलीटर)’ और गणित विषय के प्रति सकारात्मक एवं तार्किक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

चॉक, डस्टर, लपेट फलक, संकेतक, ‘धारिता/आयतन का मापन (लीटर और मिलीलीटर)’ से संबंधित आकर्षक चार्ट, चित्र, मापक यंत्र (स्केल, इंचीटेप) और मॉडल।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रदर्शन विधि (Demonstration Method), आगमन-निगमन विधि, और प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी अपने आस-पास की वस्तुओं के आकार और सामान्य मापन के बारे में थोड़ी बहुत जानकारी रखते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.बच्चों, हम घर में या स्कूल में अलग-अलग चीजें देखते हैं, जैसे किताब, गेंद आदि।हाँ, देखते हैं।
2.क्या इन सभी चीजों का आकार और रूप एक जैसा होता है?नहीं, सबका आकार अलग होता है।
3.इन अलग-अलग आकारों, रूपों और उनकी माप को हम गणित में क्या कहते हैं?आकृतियाँ या मापन।
4.आकृतियों और उन्हें मापने के तरीके को हम मुख्य रूप से किस विषय में पढ़ते हैं?गणित में।
5.बच्चों, क्या आप ‘धारिता/आयतन का मापन (लीटर और मिलीलीटर)’ के बारे में विस्तार से जानते हैं?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, आज हम गणित विषय के अंतर्गत ‘धारिता/आयतन का मापन (लीटर और मिलीलीटर)’ के बारे में विस्तार से अध्ययन करेंगे और इसे चार्ट के माध्यम से समझेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
विकासात्मक प्रश्नछात्राध्यापक ‘धारिता/आयतन का मापन (लीटर और मिलीलीटर)’ से संबंधित पूर्व ज्ञान को मुख्य पाठ से जोड़ने के लिए 2-3 सरल प्रश्न पूछेगा।छात्र अपनी समझ के अनुसार उत्तर देने का प्रयास करेंगे।मुख्य बिंदु
धारिता/आयतन का मापन (लीटर और मिलीलीटर) का स्पष्टीकरणछात्राध्यापक चार्ट व टीएलएम (TLM) की सहायता से ‘धारिता/आयतन का मापन (लीटर और मिलीलीटर)’ की अवधारणा को स्पष्ट करेगा।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे तथा महत्वपूर्ण बिंदुओं को समझेंगे।‘धारिता/आयतन का मापन (लीटर और मिलीलीटर)’ की परिभाषा
बोध प्रश्नपढ़ाए गए विषय की समझ जाँचने के लिए छात्राध्यापक छात्रों से बोध प्रश्न पूछेगा।छात्र पढ़ाए गए विषय के आधार पर सही उत्तर देंगे।सही उत्तर
धारिता/आयतन का मापन (लीटर और मिलीलीटर) के उदाहरणछात्राध्यापक श्यामपट्ट पर ‘धारिता/आयतन का मापन (लीटर और मिलीलीटर)’ से संबंधित कुछ उदाहरण और चित्र बनाकर हल करके दिखाएगा।छात्र उदाहरणों को अपनी अभ्यास पुस्तिका में उतारेंगे।हल किए गए उदाहरण
छात्र गतिविधि / सहभागिताछात्राध्यापक कक्षा को समूहों में बाँटकर ‘धारिता/आयतन का मापन (लीटर और मिलीलीटर)’ से संबंधित एक छोटी गतिविधि (Activity) करवाएगा।छात्र उत्साहपूर्वक गतिविधि में भाग लेंगे और सीखेंगे।गतिविधि का निष्कर्ष
श्यामपट्ट अभ्यास कार्यछात्राध्यापक छात्रों से कुछ प्रश्न पूछेगा और उन्हें श्यामपट्ट पर आकर हल करने के लिए आमंत्रित करेगा।छात्र निर्देशों का पालन करेंगे और श्यामपट्ट पर प्रश्नों को हल करेंगे।अभ्यास प्रश्न व हल

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. धारिता/आयतन का मापन (लीटर और मिलीलीटर) से आप क्या समझते हैं?
  2. धारिता/आयतन का मापन (लीटर और मिलीलीटर) के किन्हीं दो प्रकारों या इकाइयों के नाम बताइए।
  3. श्यामपट्ट पर दिए गए चित्र/प्रश्न को हल करके दिखाइए।

10. गृहकार्य (Homework):

सभी छात्र अपनी अभ्यास पुस्तिका में धारिता/आयतन का मापन (लीटर और मिलीलीटर) से संबंधित 5 प्रश्न हल करके और चित्र बनाकर लाएंगे।

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D.El.Ed Maths Lesson Plan 18: पाठ योजना क्रमांक – 18

योजना प्रकार: D.El.Ed Maths Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 3-4
कालांश: ………………..
विषय: गणित (Mathematics)
प्रकरण: समय देखना (घड़ी का ज्ञान – घंटे और मिनट)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में गणित और ज्यामिति विषय के प्रति रुचि उत्पन्न करना।
  2. विद्यार्थियों में तार्किक एवं निरीक्षण क्षमता का विकास करना।
  3. विद्यार्थियों को दैनिक जीवन में मापन और आकृतियों के महत्व से अवगत कराना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘समय देखना (घड़ी का ज्ञान – घंटे और मिनट)’ का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे तथा इसकी परिभाषा को जान सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘समय देखना (घड़ी का ज्ञान – घंटे और मिनट)’ को समझ कर उसे अपने शब्दों में स्पष्ट कर सकेंगे और अंतर पहचान सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी ‘समय देखना (घड़ी का ज्ञान – घंटे और मिनट)’ से संबंधित ज्ञान का प्रयोग दैनिक जीवन की स्थितियों (मापने और पहचानने) में कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी ‘समय देखना (घड़ी का ज्ञान – घंटे और मिनट)’ से संबंधित प्रश्नों को हल करने और आकृतियाँ बनाने का कौशल प्राप्त कर सकेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी ‘समय देखना (घड़ी का ज्ञान – घंटे और मिनट)’ से संबंधित समस्याओं और गणितीय पहेलियों को हल करने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में ‘समय देखना (घड़ी का ज्ञान – घंटे और मिनट)’ और गणित विषय के प्रति सकारात्मक एवं तार्किक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

चॉक, डस्टर, लपेट फलक, संकेतक, ‘समय देखना (घड़ी का ज्ञान – घंटे और मिनट)’ से संबंधित आकर्षक चार्ट, चित्र, मापक यंत्र (स्केल, इंचीटेप) और मॉडल।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रदर्शन विधि (Demonstration Method), आगमन-निगमन विधि, और प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी अपने आस-पास की वस्तुओं के आकार और सामान्य मापन के बारे में थोड़ी बहुत जानकारी रखते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.बच्चों, हम घर में या स्कूल में अलग-अलग चीजें देखते हैं, जैसे किताब, गेंद आदि।हाँ, देखते हैं।
2.क्या इन सभी चीजों का आकार और रूप एक जैसा होता है?नहीं, सबका आकार अलग होता है।
3.इन अलग-अलग आकारों, रूपों और उनकी माप को हम गणित में क्या कहते हैं?आकृतियाँ या मापन।
4.आकृतियों और उन्हें मापने के तरीके को हम मुख्य रूप से किस विषय में पढ़ते हैं?गणित में।
5.बच्चों, क्या आप ‘समय देखना (घड़ी का ज्ञान – घंटे और मिनट)’ के बारे में विस्तार से जानते हैं?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, आज हम गणित विषय के अंतर्गत ‘समय देखना (घड़ी का ज्ञान – घंटे और मिनट)’ के बारे में विस्तार से अध्ययन करेंगे और इसे चार्ट के माध्यम से समझेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
विकासात्मक प्रश्नछात्राध्यापक ‘समय देखना (घड़ी का ज्ञान – घंटे और मिनट)’ से संबंधित पूर्व ज्ञान को मुख्य पाठ से जोड़ने के लिए 2-3 सरल प्रश्न पूछेगा।छात्र अपनी समझ के अनुसार उत्तर देने का प्रयास करेंगे।मुख्य बिंदु
समय देखना (घड़ी का ज्ञान – घंटे और मिनट) का स्पष्टीकरणछात्राध्यापक चार्ट व टीएलएम (TLM) की सहायता से ‘समय देखना (घड़ी का ज्ञान – घंटे और मिनट)’ की अवधारणा को स्पष्ट करेगा।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे तथा महत्वपूर्ण बिंदुओं को समझेंगे।‘समय देखना (घड़ी का ज्ञान – घंटे और मिनट)’ की परिभाषा
बोध प्रश्नपढ़ाए गए विषय की समझ जाँचने के लिए छात्राध्यापक छात्रों से बोध प्रश्न पूछेगा।छात्र पढ़ाए गए विषय के आधार पर सही उत्तर देंगे।सही उत्तर
समय देखना (घड़ी का ज्ञान – घंटे और मिनट) के उदाहरणछात्राध्यापक श्यामपट्ट पर ‘समय देखना (घड़ी का ज्ञान – घंटे और मिनट)’ से संबंधित कुछ उदाहरण और चित्र बनाकर हल करके दिखाएगा।छात्र उदाहरणों को अपनी अभ्यास पुस्तिका में उतारेंगे।हल किए गए उदाहरण
छात्र गतिविधि / सहभागिताछात्राध्यापक कक्षा को समूहों में बाँटकर ‘समय देखना (घड़ी का ज्ञान – घंटे और मिनट)’ से संबंधित एक छोटी गतिविधि (Activity) करवाएगा।छात्र उत्साहपूर्वक गतिविधि में भाग लेंगे और सीखेंगे।गतिविधि का निष्कर्ष
श्यामपट्ट अभ्यास कार्यछात्राध्यापक छात्रों से कुछ प्रश्न पूछेगा और उन्हें श्यामपट्ट पर आकर हल करने के लिए आमंत्रित करेगा।छात्र निर्देशों का पालन करेंगे और श्यामपट्ट पर प्रश्नों को हल करेंगे।अभ्यास प्रश्न व हल

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. समय देखना (घड़ी का ज्ञान – घंटे और मिनट) से आप क्या समझते हैं?
  2. समय देखना (घड़ी का ज्ञान – घंटे और मिनट) के किन्हीं दो प्रकारों या इकाइयों के नाम बताइए।
  3. श्यामपट्ट पर दिए गए चित्र/प्रश्न को हल करके दिखाइए।

10. गृहकार्य (Homework):

सभी छात्र अपनी अभ्यास पुस्तिका में समय देखना (घड़ी का ज्ञान – घंटे और मिनट) से संबंधित 5 प्रश्न हल करके और चित्र बनाकर लाएंगे।

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D.El.Ed Maths Lesson Plan 19: पाठ योजना क्रमांक – 19

योजना प्रकार: D.El.Ed Maths Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 2-3
कालांश: ………………..
विषय: गणित (Mathematics)
प्रकरण: कैलेंडर का ज्ञान (दिन, सप्ताह और महीने)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में गणित और ज्यामिति विषय के प्रति रुचि उत्पन्न करना।
  2. विद्यार्थियों में तार्किक एवं निरीक्षण क्षमता का विकास करना।
  3. विद्यार्थियों को दैनिक जीवन में मापन और आकृतियों के महत्व से अवगत कराना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘कैलेंडर का ज्ञान (दिन, सप्ताह और महीने)’ का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे तथा इसकी परिभाषा को जान सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘कैलेंडर का ज्ञान (दिन, सप्ताह और महीने)’ को समझ कर उसे अपने शब्दों में स्पष्ट कर सकेंगे और अंतर पहचान सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी ‘कैलेंडर का ज्ञान (दिन, सप्ताह और महीने)’ से संबंधित ज्ञान का प्रयोग दैनिक जीवन की स्थितियों (मापने और पहचानने) में कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी ‘कैलेंडर का ज्ञान (दिन, सप्ताह और महीने)’ से संबंधित प्रश्नों को हल करने और आकृतियाँ बनाने का कौशल प्राप्त कर सकेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी ‘कैलेंडर का ज्ञान (दिन, सप्ताह और महीने)’ से संबंधित समस्याओं और गणितीय पहेलियों को हल करने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में ‘कैलेंडर का ज्ञान (दिन, सप्ताह और महीने)’ और गणित विषय के प्रति सकारात्मक एवं तार्किक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

चॉक, डस्टर, लपेट फलक, संकेतक, ‘कैलेंडर का ज्ञान (दिन, सप्ताह और महीने)’ से संबंधित आकर्षक चार्ट, चित्र, मापक यंत्र (स्केल, इंचीटेप) और मॉडल।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रदर्शन विधि (Demonstration Method), आगमन-निगमन विधि, और प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी अपने आस-पास की वस्तुओं के आकार और सामान्य मापन के बारे में थोड़ी बहुत जानकारी रखते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.बच्चों, हम घर में या स्कूल में अलग-अलग चीजें देखते हैं, जैसे किताब, गेंद आदि।हाँ, देखते हैं।
2.क्या इन सभी चीजों का आकार और रूप एक जैसा होता है?नहीं, सबका आकार अलग होता है।
3.इन अलग-अलग आकारों, रूपों और उनकी माप को हम गणित में क्या कहते हैं?आकृतियाँ या मापन।
4.आकृतियों और उन्हें मापने के तरीके को हम मुख्य रूप से किस विषय में पढ़ते हैं?गणित में।
5.बच्चों, क्या आप ‘कैलेंडर का ज्ञान (दिन, सप्ताह और महीने)’ के बारे में विस्तार से जानते हैं?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, आज हम गणित विषय के अंतर्गत ‘कैलेंडर का ज्ञान (दिन, सप्ताह और महीने)’ के बारे में विस्तार से अध्ययन करेंगे और इसे चार्ट के माध्यम से समझेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
विकासात्मक प्रश्नछात्राध्यापक ‘कैलेंडर का ज्ञान (दिन, सप्ताह और महीने)’ से संबंधित पूर्व ज्ञान को मुख्य पाठ से जोड़ने के लिए 2-3 सरल प्रश्न पूछेगा।छात्र अपनी समझ के अनुसार उत्तर देने का प्रयास करेंगे।मुख्य बिंदु
कैलेंडर का ज्ञान (दिन, सप्ताह और महीने) का स्पष्टीकरणछात्राध्यापक चार्ट व टीएलएम (TLM) की सहायता से ‘कैलेंडर का ज्ञान (दिन, सप्ताह और महीने)’ की अवधारणा को स्पष्ट करेगा।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे तथा महत्वपूर्ण बिंदुओं को समझेंगे।‘कैलेंडर का ज्ञान (दिन, सप्ताह और महीने)’ की परिभाषा
बोध प्रश्नपढ़ाए गए विषय की समझ जाँचने के लिए छात्राध्यापक छात्रों से बोध प्रश्न पूछेगा।छात्र पढ़ाए गए विषय के आधार पर सही उत्तर देंगे।सही उत्तर
कैलेंडर का ज्ञान (दिन, सप्ताह और महीने) के उदाहरणछात्राध्यापक श्यामपट्ट पर ‘कैलेंडर का ज्ञान (दिन, सप्ताह और महीने)’ से संबंधित कुछ उदाहरण और चित्र बनाकर हल करके दिखाएगा।छात्र उदाहरणों को अपनी अभ्यास पुस्तिका में उतारेंगे।हल किए गए उदाहरण
छात्र गतिविधि / सहभागिताछात्राध्यापक कक्षा को समूहों में बाँटकर ‘कैलेंडर का ज्ञान (दिन, सप्ताह और महीने)’ से संबंधित एक छोटी गतिविधि (Activity) करवाएगा।छात्र उत्साहपूर्वक गतिविधि में भाग लेंगे और सीखेंगे।गतिविधि का निष्कर्ष
श्यामपट्ट अभ्यास कार्यछात्राध्यापक छात्रों से कुछ प्रश्न पूछेगा और उन्हें श्यामपट्ट पर आकर हल करने के लिए आमंत्रित करेगा।छात्र निर्देशों का पालन करेंगे और श्यामपट्ट पर प्रश्नों को हल करेंगे।अभ्यास प्रश्न व हल

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. कैलेंडर का ज्ञान (दिन, सप्ताह और महीने) से आप क्या समझते हैं?
  2. कैलेंडर का ज्ञान (दिन, सप्ताह और महीने) के किन्हीं दो प्रकारों या इकाइयों के नाम बताइए।
  3. श्यामपट्ट पर दिए गए चित्र/प्रश्न को हल करके दिखाइए।

10. गृहकार्य (Homework):

सभी छात्र अपनी अभ्यास पुस्तिका में कैलेंडर का ज्ञान (दिन, सप्ताह और महीने) से संबंधित 5 प्रश्न हल करके और चित्र बनाकर लाएंगे।

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D.El.Ed Maths Lesson Plan 20: पाठ योजना क्रमांक – 20

योजना प्रकार: D.El.Ed Maths Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 2-4
कालांश: ………………..
विषय: गणित (Mathematics)
प्रकरण: भारतीय मुद्रा (सिक्कों और नोटों का हिसाब)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में गणित और ज्यामिति विषय के प्रति रुचि उत्पन्न करना।
  2. विद्यार्थियों में तार्किक एवं निरीक्षण क्षमता का विकास करना।
  3. विद्यार्थियों को दैनिक जीवन में मापन और आकृतियों के महत्व से अवगत कराना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘भारतीय मुद्रा (सिक्कों और नोटों का हिसाब)’ का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे तथा इसकी परिभाषा को जान सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘भारतीय मुद्रा (सिक्कों और नोटों का हिसाब)’ को समझ कर उसे अपने शब्दों में स्पष्ट कर सकेंगे और अंतर पहचान सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी ‘भारतीय मुद्रा (सिक्कों और नोटों का हिसाब)’ से संबंधित ज्ञान का प्रयोग दैनिक जीवन की स्थितियों (मापने और पहचानने) में कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी ‘भारतीय मुद्रा (सिक्कों और नोटों का हिसाब)’ से संबंधित प्रश्नों को हल करने और आकृतियाँ बनाने का कौशल प्राप्त कर सकेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी ‘भारतीय मुद्रा (सिक्कों और नोटों का हिसाब)’ से संबंधित समस्याओं और गणितीय पहेलियों को हल करने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में ‘भारतीय मुद्रा (सिक्कों और नोटों का हिसाब)’ और गणित विषय के प्रति सकारात्मक एवं तार्किक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

चॉक, डस्टर, लपेट फलक, संकेतक, ‘भारतीय मुद्रा (सिक्कों और नोटों का हिसाब)’ से संबंधित आकर्षक चार्ट, चित्र, मापक यंत्र (स्केल, इंचीटेप) और मॉडल।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रदर्शन विधि (Demonstration Method), आगमन-निगमन विधि, और प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी अपने आस-पास की वस्तुओं के आकार और सामान्य मापन के बारे में थोड़ी बहुत जानकारी रखते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.बच्चों, हम घर में या स्कूल में अलग-अलग चीजें देखते हैं, जैसे किताब, गेंद आदि।हाँ, देखते हैं।
2.क्या इन सभी चीजों का आकार और रूप एक जैसा होता है?नहीं, सबका आकार अलग होता है।
3.इन अलग-अलग आकारों, रूपों और उनकी माप को हम गणित में क्या कहते हैं?आकृतियाँ या मापन।
4.आकृतियों और उन्हें मापने के तरीके को हम मुख्य रूप से किस विषय में पढ़ते हैं?गणित में।
5.बच्चों, क्या आप ‘भारतीय मुद्रा (सिक्कों और नोटों का हिसाब)’ के बारे में विस्तार से जानते हैं?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, आज हम गणित विषय के अंतर्गत ‘भारतीय मुद्रा (सिक्कों और नोटों का हिसाब)’ के बारे में विस्तार से अध्ययन करेंगे और इसे चार्ट के माध्यम से समझेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
विकासात्मक प्रश्नछात्राध्यापक ‘भारतीय मुद्रा (सिक्कों और नोटों का हिसाब)’ से संबंधित पूर्व ज्ञान को मुख्य पाठ से जोड़ने के लिए 2-3 सरल प्रश्न पूछेगा।छात्र अपनी समझ के अनुसार उत्तर देने का प्रयास करेंगे।मुख्य बिंदु
भारतीय मुद्रा (सिक्कों और नोटों का हिसाब) का स्पष्टीकरणछात्राध्यापक चार्ट व टीएलएम (TLM) की सहायता से ‘भारतीय मुद्रा (सिक्कों और नोटों का हिसाब)’ की अवधारणा को स्पष्ट करेगा।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे तथा महत्वपूर्ण बिंदुओं को समझेंगे।‘भारतीय मुद्रा (सिक्कों और नोटों का हिसाब)’ की परिभाषा
बोध प्रश्नपढ़ाए गए विषय की समझ जाँचने के लिए छात्राध्यापक छात्रों से बोध प्रश्न पूछेगा।छात्र पढ़ाए गए विषय के आधार पर सही उत्तर देंगे।सही उत्तर
भारतीय मुद्रा (सिक्कों और नोटों का हिसाब) के उदाहरणछात्राध्यापक श्यामपट्ट पर ‘भारतीय मुद्रा (सिक्कों और नोटों का हिसाब)’ से संबंधित कुछ उदाहरण और चित्र बनाकर हल करके दिखाएगा।छात्र उदाहरणों को अपनी अभ्यास पुस्तिका में उतारेंगे।हल किए गए उदाहरण
छात्र गतिविधि / सहभागिताछात्राध्यापक कक्षा को समूहों में बाँटकर ‘भारतीय मुद्रा (सिक्कों और नोटों का हिसाब)’ से संबंधित एक छोटी गतिविधि (Activity) करवाएगा।छात्र उत्साहपूर्वक गतिविधि में भाग लेंगे और सीखेंगे।गतिविधि का निष्कर्ष
श्यामपट्ट अभ्यास कार्यछात्राध्यापक छात्रों से कुछ प्रश्न पूछेगा और उन्हें श्यामपट्ट पर आकर हल करने के लिए आमंत्रित करेगा।छात्र निर्देशों का पालन करेंगे और श्यामपट्ट पर प्रश्नों को हल करेंगे।अभ्यास प्रश्न व हल

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. भारतीय मुद्रा (सिक्कों और नोटों का हिसाब) से आप क्या समझते हैं?
  2. भारतीय मुद्रा (सिक्कों और नोटों का हिसाब) के किन्हीं दो प्रकारों या इकाइयों के नाम बताइए।
  3. श्यामपट्ट पर दिए गए चित्र/प्रश्न को हल करके दिखाइए।

10. गृहकार्य (Homework):

सभी छात्र अपनी अभ्यास पुस्तिका में भारतीय मुद्रा (सिक्कों और नोटों का हिसाब) से संबंधित 5 प्रश्न हल करके और चित्र बनाकर लाएंगे।

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30+ D.El.Ed / BSTC Maths Lesson Plans (पर्यावरण अध्ययन पाठ योजना) Class 3-5

प्राथमिक कक्षा 3 से 5 के लिए 30+ D.El.Ed / BSTC Maths Lesson Plans PDF Download Free (पर्यावरण अध्ययन) एकदम मुफ्त। Activity-based teaching approach for Primary classes.

D.El.Ed / BSTC Maths Lesson Plans - Paryavaran Path Yojana DElEd

D.El.Ed / BSTC Maths Lesson Plans PDF Download Free — अगर आप इंटरनेट पर deled evs lesson plan या deled paryavaran adhyayan lesson plan खोज रहे हैं, तो आप बिल्कुल सही जगह पर हैं। प्रारंभिक शिक्षा (Primary Education) में बच्चों को पर्यावरण (Environment) से परिचित कराने के लिए ‘खेल विधि’ (Play-way method) सबसे उत्तम मानी जाती है। JBT, BTC, DIET और BSTC इंटर्नशिप के लिए हमने कक्षा 3 से 5 की NCERT किताबों पर आधारित 30 अत्यंत प्रभावी paryavaran path yojana deled (Environmental Studies Lesson Plans) तैयार की हैं।

यहाँ आपको EVS के मुख्य विषयों— हमारा परिवेश, प्रकृति एवं जीव-जंतु, और संसाधन एवं पर्यावरण संरक्षण की 10-10 बेहतरीन पाठ योजनाएँ मिलेंगी। आप इन्हें सीधे अपनी इंटर्नशिप डायरी (Internship Diary) में उतार सकते हैं।

📑 D.El.Ed Paryavaran Adhyayan Lesson Plan Navigation

🅰️ हमारा परिवेश और समाज (10 टॉपिक्स)

🅱️ प्रकृति, जीव-जंतु और वनस्पति (10 टॉपिक्स)

Ⓒ संसाधन और पर्यावरण संरक्षण (10 टॉपिक्स)

D.El.Ed Paryavaran Adhyayan Lesson Plan कैसे बनाएँ?

D.El.Ed (BTC) और BSTC की इंटर्नशिप डायरी के लिए paryavaran path yojana deled (Environmental Studies Lesson Plans) बनाना बहुत महत्वपूर्ण है। कक्षा 3, 4, और 5 के बच्चों के लिए deled evs lesson plan in hindi तैयार करते समय हमेशा ‘खेल विधि’ और ‘पूर्व ज्ञान’ का उपयोग करना चाहिए जिससे बच्चे आसानी से सीख सकें।

Best Paryavaran Path Yojana DElEd PDF

यहाँ दी गई सभी 30+ deled paryavaran adhyayan lesson plan की सूची पूरी तरह से NCERT और SCERT (RBSE, UP DElEd) के नवीनतम पाठ्यक्रम पर आधारित है। आप इन evs lesson plan for deled को अपनी डायरी में उतार सकते हैं और इन्हें मुफ्त में PDF फॉर्मेट में डाउनलोड भी कर सकते हैं।

D.El.Ed EVS Lesson Plan 1: पाठ योजना क्रमांक – 1

योजना प्रकार: D.El.Ed EVS Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 3
कालांश: ………………..
विषय: गणित (Maths)
उपविषय: पर्यावरण (Environment)
प्रकरण: हमारा परिवार और रिश्ते
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. छात्रों में पर्यावरण के प्रति रुचि जाग्रत करना।
  2. छात्रों को उनके सामाजिक परिवेश से परिचित कराना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘हमारा परिवार और रिश्ते’ पाठ में आए नवीन तथ्यों का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे। विद्यार्थी प्रकरण के महत्व को समझ सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘हमारा परिवार और रिश्ते’ पाठ के विषय को समझकर अपने शब्दों में व्यक्त कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी पाठ से प्राप्त ज्ञान और समझ का अपने व्यावहारिक जीवन में उपयोग कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी उचित हाव-भाव के साथ पर्यावरण से संबंधित गतिविधियों को करने का कौशल प्राप्त करेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी पर्यावरण अध्ययन की अन्य रोचक पुस्तकों/कहानियों को पढ़ने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में प्रकृति, जानवरों और अपने आस-पास के परिवेश के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

चौक, डस्टर, लपेट श्यामपट्ट, एकल और संयुक्त परिवार को दर्शाता हुआ चार्ट।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रश्नोत्तर प्रविधि, स्पष्टीकरण विधि, और प्रदर्शन/गतिविधि आधारित विधि।

5. पूर्व ज्ञान:

छात्र अपने माता-पिता, भाई-बहन और दादा-दादी के बारे में सामान्य जानकारी रखते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.बच्चों, आप सब किसके साथ घर में रहते हैं?माता, पिता और भाई-बहन के साथ।
2.माता, पिता और बच्चों से मिलकर क्या बनता है?परिवार बनता है।
3.बच्चों, क्या आपको इसके बारे में और कुछ पता है?छात्र अपने विचार रखते हैं।
4.क्या यह हमारे आस-पास के पर्यावरण का हिस्सा है?हाँ, बिल्कुल।
5.परिवार कितने प्रकार के होते हैं?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

बच्चों, आज हम पर्यावरण अध्ययन विषय के अंतर्गत ‘हमारा परिवार और रिश्ते’ नामक पाठ का विस्तार से अध्ययन करेंगे।

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
परिवार का अर्थछात्राध्यापक स्पष्ट करेंगे कि जिन लोगों के साथ हम रहते हैं, वे सब हमारा परिवार कहलाते हैं। परिवार हमारी पहली पाठशाला होती है।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे।परिवार = साथ रहने वाले सदस्य
एकल परिवार (Nuclear Family)वह परिवार जिसमें केवल माता-पिता और उनके बच्चे रहते हैं, उसे एकल परिवार कहते हैं।छात्र मुख्य बिंदुओं को अपनी कॉपी में लिखेंगे।एकल परिवार: माता-पिता + बच्चे
संयुक्त परिवार (Joint Family)वह परिवार जिसमें दादा-दादी, चाचा-चाची, माता-पिता और बच्चे एक साथ रहते हैं, उसे संयुक्त परिवार कहते हैं।छात्र चार्ट को ध्यानपूर्वक देखेंगे और समझेंगे।संयुक्त परिवार: दादा-दादी + माता-पिता + अन्य
परिवार का महत्वपरिवार में हमें प्यार, सुरक्षा और संस्कार मिलते हैं। परिवार के सदस्य एक-दूसरे की मदद करते हैं।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे।महत्व: प्यार, सुरक्षा, संस्कार

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. परिवार किसे कहते हैं?
  2. एकल और संयुक्त परिवार में क्या अंतर है?
  3. परिवार में कौन-कौन लोग रहते हैं?

10. गृहकार्य (Homework):

सभी छात्र अपने परिवार के सदस्यों के नाम और उनसे अपने रिश्ते लिखकर लाएंगे।

Part of our 180+ free D.El.Ed / BSTC Maths Lesson Plans collection.

D.El.Ed EVS Lesson Plan 2: पाठ योजना क्रमांक – 2

योजना प्रकार: D.El.Ed EVS Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 3
कालांश: ………………..
विषय: गणित (Maths)
उपविषय: पर्यावरण (Environment)
प्रकरण: हमारे मददगार (Our Helpers)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. छात्रों में सामाजिक चेतना विकसित करना।
  2. विभिन्न व्यवसायों के प्रति सम्मान की भावना जगाना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘हमारे मददगार (Our Helpers)’ पाठ में आए नवीन तथ्यों का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे। विद्यार्थी प्रकरण के महत्व को समझ सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘हमारे मददगार (Our Helpers)’ पाठ के विषय को समझकर अपने शब्दों में व्यक्त कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी पाठ से प्राप्त ज्ञान और समझ का अपने व्यावहारिक जीवन में उपयोग कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी उचित हाव-भाव के साथ पर्यावरण से संबंधित गतिविधियों को करने का कौशल प्राप्त करेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी पर्यावरण अध्ययन की अन्य रोचक पुस्तकों/कहानियों को पढ़ने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में प्रकृति, जानवरों और अपने आस-पास के परिवेश के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

चौक, डस्टर, विभिन्न मददगारों (डॉक्टर, पुलिस, किसान) के चित्र या फ़्लैश कार्ड्स।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रश्नोत्तर प्रविधि, स्पष्टीकरण विधि, और प्रदर्शन/गतिविधि आधारित विधि।

5. पूर्व ज्ञान:

छात्र अपने आस-पास के लोगों जैसे डॉक्टर, पुलिस और दुकानदार को पहचानते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.बीमार होने पर हम किसके पास जाते हैं?डॉक्टर के पास।
2.अनाज कौन उगाता है?किसान।
3.बच्चों, क्या आपको इसके बारे में और कुछ पता है?छात्र अपने विचार रखते हैं।
4.क्या यह हमारे आस-पास के पर्यावरण का हिस्सा है?हाँ, बिल्कुल।
5.डॉक्टर, किसान, डाकिया ये सब हमारे लिए क्या हैं?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

बच्चों, आज हम ‘हमारे मददगार’ (Our Helpers) के बारे में विस्तार से जानेंगे जो हमारे दैनिक जीवन में हमारी सहायता करते हैं।

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
डॉक्टर और नर्सछात्राध्यापक बताएंगे कि डॉक्टर हमारी बीमारियों का इलाज करते हैं और नर्स मरीज़ों की देखभाल करती हैं।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे।डॉक्टर: इलाज करना
किसानकिसान खेतों में दिन-रात मेहनत करके हमारे लिए अन्न, फल और सब्जियां उगाते हैं।छात्र चित्र देखेंगे।किसान: अन्नदाता
डाकिया और पुलिसडाकिया हमारे पत्र और पार्सल लाता है। पुलिस हमारी सुरक्षा करती है और अपराध रोकती है।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे।डाकिया: पत्र लाना
पुलिस: सुरक्षा
मददगारों का सम्मानहमें समाज के सभी मददगारों का सम्मान करना चाहिए क्योंकि इनके बिना हमारा जीवन बहुत कठिन हो जाएगा।छात्र अपनी कॉपी में लिखेंगे।हमें सबका सम्मान करना चाहिए।

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. बीमार होने पर आप किसके पास जाते हैं?
  2. हमारे लिए अन्न कौन उगाता है?
  3. डाकिया क्या काम करता है?

10. गृहकार्य (Homework):

अपने आस-पास दिखने वाले 5 मददगारों के नाम और उनके काम लिखकर लाओ।

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D.El.Ed EVS Lesson Plan 3: पाठ योजना क्रमांक – 3

योजना प्रकार: D.El.Ed EVS Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 3-5
कालांश: ………………..
विषय: गणित (Maths)
उपविषय: पर्यावरण (Environment)
प्रकरण: यातायात के साधन और सुरक्षा
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. छात्रों को यातायात के नियमों से अवगत कराना।
  2. परिवहन के विभिन्न साधनों के बारे में जानकारी देना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘यातायात के साधन और सुरक्षा’ पाठ में आए नवीन तथ्यों का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे। विद्यार्थी प्रकरण के महत्व को समझ सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘यातायात के साधन और सुरक्षा’ पाठ के विषय को समझकर अपने शब्दों में व्यक्त कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी पाठ से प्राप्त ज्ञान और समझ का अपने व्यावहारिक जीवन में उपयोग कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी उचित हाव-भाव के साथ पर्यावरण से संबंधित गतिविधियों को करने का कौशल प्राप्त करेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी पर्यावरण अध्ययन की अन्य रोचक पुस्तकों/कहानियों को पढ़ने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में प्रकृति, जानवरों और अपने आस-पास के परिवेश के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

यातायात के साधनों (ट्रेन, हवाई जहाज, नाव) का चार्ट, ट्रैफिक लाइट का मॉडल।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रश्नोत्तर प्रविधि, स्पष्टीकरण विधि, और प्रदर्शन/गतिविधि आधारित विधि।

5. पूर्व ज्ञान:

छात्र बस, साइकिल और ट्रेन आदि में बैठे हैं तथा उन्हें पहचानते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.आप स्कूल कैसे आते हैं?बस, साइकिल या पैदल।
2.लंबी दूरी तय करने के लिए हम किसमें बैठते हैं?ट्रेन या हवाई जहाज में।
3.बच्चों, क्या आपको इसके बारे में और कुछ पता है?छात्र अपने विचार रखते हैं।
4.क्या यह हमारे आस-पास के पर्यावरण का हिस्सा है?हाँ, बिल्कुल।
5.इन सभी वाहनों को क्या कहते हैं?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

बच्चों, आज हम ‘यातायात के साधन और सड़क सुरक्षा के नियम’ विषय पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
थल यातायात (Land Transport)सड़क और पटरी पर चलने वाले वाहन थल यातायात कहलाते हैं, जैसे— बस, कार, साइकिल, ट्रेन।छात्र उदाहरणों को समझेंगे।थल: बस, कार, ट्रेन
जल और वायु यातायातपानी में चलने वाले (नाव, जहाज) जल यातायात और हवा में उड़ने वाले (हवाई जहाज, हेलीकॉप्टर) वायु यातायात कहलाते हैं।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे।जल: नाव, जहाज
वायु: हवाई जहाज
सड़क सुरक्षा के नियमसड़क हमेशा बाईं ओर चलनी चाहिए। सड़क पार करते समय जेब्रा क्रॉसिंग (Zebra Crossing) का प्रयोग करना चाहिए।छात्र मुख्य नियमों को नोट करेंगे।नियम: बाईं ओर चलें, जेब्रा क्रॉसिंग
ट्रैफिक लाइट का अर्थलाल बत्ती का अर्थ है रुकना, पीली का अर्थ है तैयार होना और हरी का अर्थ है चलना।छात्र ट्रैफिक लाइट मॉडल देखेंगे।लाल: रुको, पीली: तैयार, हरी: चलो

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. यातायात के तीन मुख्य प्रकार कौन-से हैं?
  2. लाल बत्ती हमें क्या संकेत देती है?
  3. सड़क पार करने के लिए किसका प्रयोग करना चाहिए?

10. गृहकार्य (Homework):

विभिन्न यातायात के साधनों के चित्र अपनी कॉपी में चिपकाकर लाएं।

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D.El.Ed EVS Lesson Plan 4: पाठ योजना क्रमांक – 4

योजना प्रकार: D.El.Ed EVS Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 3-4
कालांश: ………………..
विषय: गणित (Maths)
उपविषय: पर्यावरण (Environment)
प्रकरण: हमारे घर (कच्चा/पक्का घर)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. छात्रों को आवास (Shelter) की आवश्यकता समझाना।
  2. विभिन्न प्रकार के घरों से परिचित कराना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘हमारे घर (कच्चा/पक्का घर)’ पाठ में आए नवीन तथ्यों का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे। विद्यार्थी प्रकरण के महत्व को समझ सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘हमारे घर (कच्चा/पक्का घर)’ पाठ के विषय को समझकर अपने शब्दों में व्यक्त कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी पाठ से प्राप्त ज्ञान और समझ का अपने व्यावहारिक जीवन में उपयोग कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी उचित हाव-भाव के साथ पर्यावरण से संबंधित गतिविधियों को करने का कौशल प्राप्त करेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी पर्यावरण अध्ययन की अन्य रोचक पुस्तकों/कहानियों को पढ़ने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में प्रकृति, जानवरों और अपने आस-पास के परिवेश के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

कच्चे घर, पक्के घर, इग्लू और टेंट के चित्र या फ्लैश कार्ड।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रश्नोत्तर प्रविधि, स्पष्टीकरण विधि, और प्रदर्शन/गतिविधि आधारित विधि।

5. पूर्व ज्ञान:

छात्र यह जानते हैं कि हम सभी अपने घरों में रहते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.बारिश और सर्दी से बचने के लिए हम कहाँ रहते हैं?अपने घर में।
2.गांवों में झोपड़ियां किस चीज़ की बनी होती हैं?मिट्टी और घास-फूस की।
3.बच्चों, क्या आपको इसके बारे में और कुछ पता है?छात्र अपने विचार रखते हैं।
4.क्या यह हमारे आस-पास के पर्यावरण का हिस्सा है?हाँ, बिल्कुल।
5.घर कितने प्रकार के होते हैं?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

बच्चों, आज हम पर्यावरण अध्ययन के अंतर्गत विभिन्न प्रकार के ‘घरों’ के बारे में विस्तार से पढ़ेंगे।

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
घर की आवश्यकताघर हमें सर्दी, गर्मी, बारिश और जंगली जानवरों से बचाता है। यह हमें सुरक्षा प्रदान करता है।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे।घर हमें मौसम और जानवरों से बचाता है।
कच्चा घर (Kutcha House)मिट्टी, बांस, और घास-फूस से बने घर कच्चे घर कहलाते हैं। ये ज्यादातर गांवों में पाए जाते हैं।छात्र चित्र देखेंगे।कच्चा घर: मिट्टी, घास-फूस
पक्का घर (Pucca House)ईंट, सीमेंट, लोहे और पत्थर से बने घर पक्के घर कहलाते हैं। ये बहुत मजबूत होते हैं (जैसे शहर के मकान)।छात्र अपनी कॉपी में लिखेंगे।पक्का घर: ईंट, सीमेंट, लोहा
विशेष घर (इग्लू और टेंट)बर्फ से बने घर को इग्लू कहते हैं। कैंपिंग के दौरान लोग कपड़े या प्लास्टिक से बने टेंट में रहते हैं।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे।इग्लू: बर्फ का घर
टेंट: कपड़े का घर

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. कच्चा घर किन चीज़ों से बनता है?
  2. बर्फ से बने घर को क्या कहते हैं?
  3. हमें घर की आवश्यकता क्यों होती है?

10. गृहकार्य (Homework):

अपने सपनों के घर का चित्र बनाकर उसमें रंग भरें।

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D.El.Ed EVS Lesson Plan 5: पाठ योजना क्रमांक – 5

योजना प्रकार: D.El.Ed EVS Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 3
कालांश: ………………..
विषय: गणित (Maths)
उपविषय: पर्यावरण (Environment)
प्रकरण: हमारे त्योहार और उत्सव
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. छात्रों में सांस्कृतिक चेतना और भाईचारे की भावना विकसित करना।
  2. भारत के विविध त्योहारों से परिचित कराना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘हमारे त्योहार और उत्सव’ पाठ में आए नवीन तथ्यों का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे। विद्यार्थी प्रकरण के महत्व को समझ सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘हमारे त्योहार और उत्सव’ पाठ के विषय को समझकर अपने शब्दों में व्यक्त कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी पाठ से प्राप्त ज्ञान और समझ का अपने व्यावहारिक जीवन में उपयोग कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी उचित हाव-भाव के साथ पर्यावरण से संबंधित गतिविधियों को करने का कौशल प्राप्त करेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी पर्यावरण अध्ययन की अन्य रोचक पुस्तकों/कहानियों को पढ़ने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में प्रकृति, जानवरों और अपने आस-पास के परिवेश के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

विभिन्न त्योहारों को दर्शाते हुए चित्र (जैसे दीवाली, होली, ईद, क्रिसमस)।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रश्नोत्तर प्रविधि, स्पष्टीकरण विधि, और प्रदर्शन/गतिविधि आधारित विधि।

5. पूर्व ज्ञान:

छात्र दीवाली, होली जैसे त्योहारों के बारे में सामान्य जानकारी रखते हैं और उन्हें मनाते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.हम रंग किस दिन खेलते हैं?होली के दिन।
2.हम पटाखे किस दिन जलाते हैं?दीवाली के दिन।
3.बच्चों, क्या आपको इसके बारे में और कुछ पता है?छात्र अपने विचार रखते हैं।
4.क्या यह हमारे आस-पास के पर्यावरण का हिस्सा है?हाँ, बिल्कुल।
5.दीवाली, होली, ईद आदि को क्या कहा जाता है?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

बच्चों, आज हम भारत में मनाये जाने वाले विभिन्न ‘त्योहारों और उत्सवों’ के बारे में पढ़ेंगे।

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
त्योहारों का महत्वत्योहार खुशियों का अवसर होते हैं। ये लोगों को एक-दूसरे के करीब लाते हैं और प्रेम बढ़ाते हैं।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे।त्योहार प्रेम और खुशी लाते हैं।
धार्मिक त्योहारदीवाली, होली, दशहरा, ईद, गुरुपर्व और क्रिसमस धार्मिक त्योहार हैं, जिन्हें विभिन्न धर्मों के लोग मनाते हैं।छात्र चार्ट पर त्योहारों के चित्र देखेंगे।धार्मिक: होली, दीवाली, ईद, क्रिसमस
राष्ट्रीय त्योहारस्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त), गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) और गांधी जयंती (2 अक्टूबर) राष्ट्रीय त्योहार हैं।छात्र महत्वपूर्ण तिथियों को नोट करेंगे।राष्ट्रीय: 15 अगस्त, 26 जनवरी, 2 अक्टूबर
कैसे मनाते हैं?त्योहारों पर लोग नए कपड़े पहनते हैं, मिठाइयां बांटते हैं और एक-दूसरे को बधाइयां देते हैं।छात्र अपने अनुभव साझा करेंगे।हम मिठाइयां बांटते हैं।

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. किन्हीं दो राष्ट्रीय त्योहारों के नाम बताइए?
  2. रंगों का त्योहार किसे कहा जाता है?
  3. क्रिसमस कब मनाया जाता है?

10. गृहकार्य (Homework):

अपने सबसे पसंदीदा त्योहार पर 5 पंक्तियाँ लिखकर लाएं।

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D.El.Ed EVS Lesson Plan 6: पाठ योजना क्रमांक – 6

योजना प्रकार: D.El.Ed EVS Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 3-4
कालांश: ………………..
विषय: गणित (Maths)
उपविषय: पर्यावरण (Environment)
प्रकरण: कपड़ों की कहानी
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. छात्रों को वस्त्रों की आवश्यकता से अवगत कराना।
  2. विभिन्न मौसमों के अनुसार कपड़ों के प्रकार समझाना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘कपड़ों की कहानी’ पाठ में आए नवीन तथ्यों का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे। विद्यार्थी प्रकरण के महत्व को समझ सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘कपड़ों की कहानी’ पाठ के विषय को समझकर अपने शब्दों में व्यक्त कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी पाठ से प्राप्त ज्ञान और समझ का अपने व्यावहारिक जीवन में उपयोग कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी उचित हाव-भाव के साथ पर्यावरण से संबंधित गतिविधियों को करने का कौशल प्राप्त करेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी पर्यावरण अध्ययन की अन्य रोचक पुस्तकों/कहानियों को पढ़ने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में प्रकृति, जानवरों और अपने आस-पास के परिवेश के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

सूती, ऊनी और रेशमी कपड़ों के छोटे टुकड़े, कपास के पौधे का चित्र।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रश्नोत्तर प्रविधि, स्पष्टीकरण विधि, और प्रदर्शन/गतिविधि आधारित विधि।

5. पूर्व ज्ञान:

छात्र अलग-अलग मौसमों में अलग-अलग प्रकार के कपड़े पहनते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.गर्मियों में हमें कैसा लगता है?बहुत गर्मी लगती है।
2.सर्दियों में हम कैसे कपड़े पहनते हैं?गर्म और मोटे कपड़े (स्वेटर)।
3.बच्चों, क्या आपको इसके बारे में और कुछ पता है?छात्र अपने विचार रखते हैं।
4.क्या यह हमारे आस-पास के पर्यावरण का हिस्सा है?हाँ, बिल्कुल।
5.विभिन्न मौसमों में कपड़ों का चुनाव कैसे करते हैं?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

बच्चों, आज हम ‘कपड़ों की कहानी’ और ऋतुओं के अनुसार कपड़ों के प्रकार के बारे में पढ़ेंगे।

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
कपड़ों की आवश्यकताकपड़े हमें सर्दी, गर्मी, बारिश और कीड़े-मकोड़ों से बचाते हैं। ये हमारे शरीर को ढकते हैं।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे।कपड़े हमें मौसम से बचाते हैं।
गर्मियों के कपड़ेगर्मियों में हम सूती (Cotton) कपड़े पहनते हैं क्योंकि वे पसीना सोखते हैं और हमें ठंडा रखते हैं। कपास पौधों से मिलती है।छात्र सूती कपड़े को छूकर देखेंगे।गर्मी: सूती कपड़े (कपास से)
सर्दियों के कपड़ेसर्दियों में हम ऊनी (Woolen) कपड़े पहनते हैं जो हमें गर्म रखते हैं। ऊन हमें भेड़ से प्राप्त होती है।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे।सर्दी: ऊनी कपड़े (भेड़ से)
बारिश के कपड़ेबारिश से बचने के लिए हम रेनकोट और छाते का उपयोग करते हैं जो वाटरप्रूफ (Waterproof) सामग्री से बने होते हैं।छात्र अपनी कॉपी में लिखेंगे।बारिश: रेनकोट, छाता

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. सर्दियों में हम किस प्रकार के कपड़े पहनते हैं?
  2. सूती कपड़े हमें किससे प्राप्त होते हैं?
  3. बारिश में हम किसका उपयोग करते हैं?

10. गृहकार्य (Homework):

अपने घर में मौजूद 5 अलग-अलग प्रकार के कपड़ों के नाम लिखकर लाएं।

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D.El.Ed EVS Lesson Plan 7: पाठ योजना क्रमांक – 7

योजना प्रकार: D.El.Ed EVS Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 4-5
कालांश: ………………..
विषय: गणित (Maths)
उपविषय: पर्यावरण (Environment)
प्रकरण: कचरा प्रबंधन
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. छात्रों में पर्यावरण स्वच्छता के प्रति जागरूकता पैदा करना।
  2. कचरा निस्तारण का सही तरीका सिखाना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘कचरा प्रबंधन’ पाठ में आए नवीन तथ्यों का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे। विद्यार्थी प्रकरण के महत्व को समझ सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘कचरा प्रबंधन’ पाठ के विषय को समझकर अपने शब्दों में व्यक्त कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी पाठ से प्राप्त ज्ञान और समझ का अपने व्यावहारिक जीवन में उपयोग कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी उचित हाव-भाव के साथ पर्यावरण से संबंधित गतिविधियों को करने का कौशल प्राप्त करेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी पर्यावरण अध्ययन की अन्य रोचक पुस्तकों/कहानियों को पढ़ने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में प्रकृति, जानवरों और अपने आस-पास के परिवेश के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

हरा और नीला डस्टबिन (या चित्र), गीले और सूखे कचरे के उदाहरण।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रश्नोत्तर प्रविधि, स्पष्टीकरण विधि, और प्रदर्शन/गतिविधि आधारित विधि।

5. पूर्व ज्ञान:

छात्र जानते हैं कि घर का कूड़ा डस्टबिन में डाला जाता है।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.घर की सफाई करने के बाद हम कूड़ा कहाँ डालते हैं?कूड़ेदान (Dustbin) में।
2.अगर हम कूड़ा सड़क पर फेंकेंगे तो क्या होगा?गंदगी फैलेगी और बीमारियां होंगी।
3.बच्चों, क्या आपको इसके बारे में और कुछ पता है?छात्र अपने विचार रखते हैं।
4.क्या यह हमारे आस-पास के पर्यावरण का हिस्सा है?हाँ, बिल्कुल।
5.कूड़े (कचरे) का सही प्रबंधन कैसे करना चाहिए?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

बच्चों, आज हम पर्यावरण को साफ रखने के लिए ‘कचरा प्रबंधन’ (Waste Management) के बारे में जानेंगे।

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
कचरे के प्रकारकचरा मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है: गीला कचरा (जैव-निम्नीकरणीय) और सूखा कचरा।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे।कचरा: गीला और सूखा
गीला कचरा (Wet Waste)सब्जियों के छिलके, बचा हुआ खाना, और पत्ते गीला कचरा कहलाते हैं। इन्हें हरे डस्टबिन में डाला जाता है, जिससे खाद (Compost) बनती है।छात्र हरे डस्टबिन का चित्र देखेंगे।गीला कचरा = हरा डस्टबिन (खाद)
सूखा कचरा (Dry Waste)कागज, प्लास्टिक, कांच और धातु सूखा कचरा है। इन्हें नीले डस्टबिन में डाला जाता है।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे।सूखा कचरा = नीला डस्टबिन
रिड्यूस, रीयूज, रीसाइकिल (3 R’s)हमें कचरा कम करना चाहिए, पुरानी चीज़ों का फिर से उपयोग करना चाहिए, और प्लास्टिक/कागज को रीसाइकिल करना चाहिए।छात्र 3 R’s का अर्थ अपनी कॉपी में लिखेंगे।3 R’s: Reduce, Reuse, Recycle

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. गीला कचरा किस रंग के कूड़ेदान में डालते हैं?
  2. सूखे कचरे के दो उदाहरण दीजिए।
  3. गीले कचरे से क्या बनाया जा सकता है?

10. गृहकार्य (Homework):

अपने घर में गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग करने का प्रयास करें।

Part of our 180+ free D.El.Ed / BSTC Maths Lesson Plans collection.

D.El.Ed EVS Lesson Plan 8: पाठ योजना क्रमांक – 8

योजना प्रकार: D.El.Ed EVS Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 3-4
कालांश: ………………..
विषय: गणित (Maths)
उपविषय: पर्यावरण (Environment)
प्रकरण: दिशाओं का ज्ञान और मानचित्र
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. छात्रों में भौगोलिक ज्ञान और दिशा ज्ञान विकसित करना।
  2. मानचित्र पढ़ने की प्रारंभिक समझ विकसित करना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘दिशाओं का ज्ञान और मानचित्र’ पाठ में आए नवीन तथ्यों का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे। विद्यार्थी प्रकरण के महत्व को समझ सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘दिशाओं का ज्ञान और मानचित्र’ पाठ के विषय को समझकर अपने शब्दों में व्यक्त कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी पाठ से प्राप्त ज्ञान और समझ का अपने व्यावहारिक जीवन में उपयोग कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी उचित हाव-भाव के साथ पर्यावरण से संबंधित गतिविधियों को करने का कौशल प्राप्त करेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी पर्यावरण अध्ययन की अन्य रोचक पुस्तकों/कहानियों को पढ़ने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में प्रकृति, जानवरों और अपने आस-पास के परिवेश के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

चौक, डस्टर, कंपास (Compass) का मॉडल, भारत का मानचित्र।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रश्नोत्तर प्रविधि, स्पष्टीकरण विधि, और प्रदर्शन/गतिविधि आधारित विधि।

5. पूर्व ज्ञान:

छात्र सूर्य के उगने और डूबने के बारे में जानते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.सुबह के समय सूरज किस तरफ से उगता है?पूरब (East) से।
2.शाम को सूरज कहाँ छिपता है?पश्चिम (West) में।
3.बच्चों, क्या आपको इसके बारे में और कुछ पता है?छात्र अपने विचार रखते हैं।
4.क्या यह हमारे आस-पास के पर्यावरण का हिस्सा है?हाँ, बिल्कुल।
5.कुल कितनी मुख्य दिशाएं होती हैं?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

बच्चों, आज हम मुख्य ‘दिशाओं और मानचित्र (Maps)’ के बारे में विस्तार से जानेंगे।

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
मुख्य दिशाएंमुख्य रूप से चार दिशाएं होती हैं: पूरब (East), पश्चिम (West), उत्तर (North), और दक्षिण (South)।छात्र दिशाओं के नाम दोहराएंगे।4 दिशाएं: पूरब, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण
दिशा कैसे पहचानें?सूरज पूरब में उगता है। यदि हम उगते सूरज की ओर मुंह करके खड़े हों, तो हमारे सामने पूरब, पीठ पीछे पश्चिम, बाएँ हाथ की ओर उत्तर और दाएँ हाथ की ओर दक्षिण होता है।छात्र खड़े होकर प्रैक्टिकल करेंगे।मुंह = पूरब, पीठ = पश्चिम
मानचित्र (Map)मानचित्र कागज पर बना हुआ किसी जगह का चित्र होता है, जो हमें उस जगह का रास्ता और दिशा बताता है।छात्र मानचित्र को ध्यान से देखेंगे।मानचित्र: कागज पर जगह का चित्र
मानचित्र में दिशाएंकिसी भी मानचित्र में ऊपर की ओर हमेशा उत्तर (North) दिशा और नीचे की ओर दक्षिण (South) दिशा होती है।छात्र अपनी कॉपी में लिखेंगे।मानचित्र में ऊपर = उत्तर

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. कुल कितनी मुख्य दिशाएं होती हैं?
  2. सूरज किस दिशा में छिपता है?
  3. मानचित्र में ऊपर की तरफ कौन-सी दिशा होती है?

10. गृहकार्य (Homework):

कागज पर चारों दिशाओं का चित्र बनाकर लाएं।

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D.El.Ed EVS Lesson Plan 9: पाठ योजना क्रमांक – 9

योजना प्रकार: D.El.Ed EVS Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 3
कालांश: ………………..
विषय: गणित (Maths)
उपविषय: पर्यावरण (Environment)
प्रकरण: सड़क संकेत और ट्रैफिक लाइट
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. छात्रों को सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक करना।
  2. यातायात नियमों के पालन की आदत डालना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘सड़क संकेत और ट्रैफिक लाइट’ पाठ में आए नवीन तथ्यों का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे। विद्यार्थी प्रकरण के महत्व को समझ सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘सड़क संकेत और ट्रैफिक लाइट’ पाठ के विषय को समझकर अपने शब्दों में व्यक्त कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी पाठ से प्राप्त ज्ञान और समझ का अपने व्यावहारिक जीवन में उपयोग कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी उचित हाव-भाव के साथ पर्यावरण से संबंधित गतिविधियों को करने का कौशल प्राप्त करेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी पर्यावरण अध्ययन की अन्य रोचक पुस्तकों/कहानियों को पढ़ने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में प्रकृति, जानवरों और अपने आस-पास के परिवेश के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

ट्रैफिक लाइट का मॉडल, विभिन्न सड़क संकेतों (U-turn, No Parking) के चित्र।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रश्नोत्तर प्रविधि, स्पष्टीकरण विधि, और प्रदर्शन/गतिविधि आधारित विधि।

5. पूर्व ज्ञान:

छात्रों ने सड़क पर लाल-पीली बत्तियां और गाड़ियां देखी हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.सड़क पर बहुत सारी गाड़ियां हों तो उन्हें कौन कंट्रोल करता है?ट्रैफिक पुलिस या ट्रैफिक लाइट।
2.ट्रैफिक लाइट में कितने रंग होते हैं?तीन रंग।
3.बच्चों, क्या आपको इसके बारे में और कुछ पता है?छात्र अपने विचार रखते हैं।
4.क्या यह हमारे आस-पास के पर्यावरण का हिस्सा है?हाँ, बिल्कुल।
5.इन रंगों का क्या अर्थ होता है?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

बच्चों, आज हम सड़क पर सुरक्षित चलने के लिए ‘सड़क संकेत और ट्रैफिक लाइट’ के बारे में जानेंगे।

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
ट्रैफिक लाइट (Traffic Light)सड़क चौराहों पर दुर्घटना से बचने के लिए ट्रैफिक लाइट लगाई जाती है। इसमें लाल, पीला और हरा रंग होता है।छात्र मॉडल को देखेंगे।ट्रैफिक लाइट: लाल, पीली, हरी
रंगों का अर्थलाल बत्ती = रुको (Stop), पीली बत्ती = चलने के लिए तैयार हो जाओ (Ready), हरी बत्ती = चलो (Go)।छात्र अपनी कॉपी में रंगों का अर्थ लिखेंगे।लाल=रुको, पीली=तैयार, हरी=चलो
जेब्रा क्रॉसिंग (Zebra Crossing)सड़क पर बनी सफेद और काली पट्टियों को जेब्रा क्रॉसिंग कहते हैं। पैदल चलने वालों को हमेशा यहीं से सड़क पार करनी चाहिए।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे।पैदल सड़क पार = जेब्रा क्रॉसिंग
अन्य सड़क संकेतसड़क के किनारे बोर्ड लगे होते हैं जैसे- हॉर्न न बजाएं, U-टर्न मना है (No U-Turn)। हमें इनका पालन करना चाहिए।छात्र सड़क संकेतों के चित्र देखेंगे।संकेतों का पालन करें।

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. लाल बत्ती का क्या अर्थ है?
  2. पैदल यात्रियों को सड़क कहाँ से पार करनी चाहिए?
  3. हरी बत्ती जलने पर हमें क्या करना चाहिए?

10. गृहकार्य (Homework):

ट्रैफिक लाइट का सुंदर चित्र बनाकर उसमें सही रंग भरें।

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D.El.Ed EVS Lesson Plan 10: पाठ योजना क्रमांक – 10

योजना प्रकार: D.El.Ed EVS Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 3-5
कालांश: ………………..
विषय: गणित (Maths)
उपविषय: पर्यावरण (Environment)
प्रकरण: हमारे राष्ट्रीय प्रतीक
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. छात्रों में देशभक्ति और राष्ट्रीय गौरव की भावना जाग्रत करना।
  2. भारत के राष्ट्रीय प्रतीकों का ज्ञान देना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘हमारे राष्ट्रीय प्रतीक’ पाठ में आए नवीन तथ्यों का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे। विद्यार्थी प्रकरण के महत्व को समझ सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘हमारे राष्ट्रीय प्रतीक’ पाठ के विषय को समझकर अपने शब्दों में व्यक्त कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी पाठ से प्राप्त ज्ञान और समझ का अपने व्यावहारिक जीवन में उपयोग कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी उचित हाव-भाव के साथ पर्यावरण से संबंधित गतिविधियों को करने का कौशल प्राप्त करेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी पर्यावरण अध्ययन की अन्य रोचक पुस्तकों/कहानियों को पढ़ने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में प्रकृति, जानवरों और अपने आस-पास के परिवेश के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

राष्ट्रीय ध्वज, मोर, बाघ, कमल और अशोक चक्र के चित्र।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रश्नोत्तर प्रविधि, स्पष्टीकरण विधि, और प्रदर्शन/गतिविधि आधारित विधि।

5. पूर्व ज्ञान:

छात्र 15 अगस्त और 26 जनवरी पर झंडा फहराते हुए देखते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.हम 15 अगस्त को क्या फहराते हैं?झंडा फहराते हैं।
2.हमारे देश के झंडे का क्या नाम है?तिरंगा।
3.बच्चों, क्या आपको इसके बारे में और कुछ पता है?छात्र अपने विचार रखते हैं।
4.क्या यह हमारे आस-पास के पर्यावरण का हिस्सा है?हाँ, बिल्कुल।
5.हमारे देश का राष्ट्रीय पक्षी और पशु कौन-सा है?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

बच्चों, आज हम अपने देश भारत के ‘राष्ट्रीय प्रतीकों’ (National Symbols) के बारे में विस्तार से जानेंगे।

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
राष्ट्रीय ध्वज (National Flag)हमारे राष्ट्रीय ध्वज का नाम ‘तिरंगा’ है। इसमें तीन रंग होते हैं: केसरिया (सबसे ऊपर), सफेद (बीच में) और हरा (सबसे नीचे)।छात्र तिरंगे का चित्र देखेंगे।ध्वज: तिरंगा (केसरिया, सफेद, हरा)
अशोक चक्रसफेद पट्टी के बीच में नीले रंग का एक चक्र होता है, जिसे अशोक चक्र कहते हैं। इसमें 24 तीलियां (Spokes) होती हैं।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे।अशोक चक्र = 24 तीलियां (नीला रंग)
राष्ट्रीय पशु और पक्षीहमारा राष्ट्रीय पशु ‘बाघ’ (Tiger) है जो बहादुरी का प्रतीक है। हमारा राष्ट्रीय पक्षी ‘मोर’ (Peacock) है।छात्र बाघ और मोर का चित्र देखेंगे।राष्ट्रीय पशु: बाघ, राष्ट्रीय पक्षी: मोर
राष्ट्रीय फूल और गानहमारा राष्ट्रीय फूल ‘कमल’ (Lotus) है। हमारा राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ है, जिसे रवींद्रनाथ टैगोर ने लिखा था।छात्र अपनी कॉपी में लिखेंगे।राष्ट्रीय फूल: कमल, राष्ट्रगान: जन गण मन

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. हमारे राष्ट्रीय ध्वज में कितने रंग होते हैं?
  2. अशोक चक्र में कितनी तीलियां होती हैं?
  3. भारत का राष्ट्रीय फूल कौन-सा है?

10. गृहकार्य (Homework):

तिरंगे झंडे का चित्र बनाकर उसमें सही रंग भरें।

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D.El.Ed EVS Lesson Plan 11: पाठ योजना क्रमांक – 11

योजना प्रकार: D.El.Ed EVS Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 3-4
कालांश: ………………..
विषय: गणित (Maths)
उपविषय: पर्यावरण (Environment)
प्रकरण: हमारे आस-पास के पेड़-पौधे
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. छात्रों में प्रकृति और वनस्पतियों के प्रति प्रेम जाग्रत करना।
  2. पेड़-पौधों के महत्व को समझाना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘हमारे आस-पास के पेड़-पौधे’ पाठ में आए नवीन तथ्यों का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे। विद्यार्थी प्रकरण के महत्व को समझ सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘हमारे आस-पास के पेड़-पौधे’ पाठ के विषय को समझकर अपने शब्दों में व्यक्त कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी पाठ से प्राप्त ज्ञान और समझ का अपने व्यावहारिक जीवन में उपयोग कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी उचित हाव-भाव के साथ पर्यावरण से संबंधित गतिविधियों को करने का कौशल प्राप्त करेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी पर्यावरण अध्ययन की अन्य रोचक पुस्तकों/कहानियों को पढ़ने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में प्रकृति, जानवरों और अपने आस-पास के परिवेश के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

एक छोटा गमला (जिसमें पौधा हो), पौधे के विभिन्न भागों को दर्शाता हुआ रंगीन चार्ट।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रश्नोत्तर प्रविधि, स्पष्टीकरण विधि, और प्रदर्शन/गतिविधि आधारित विधि।

5. पूर्व ज्ञान:

छात्रों ने अपने आस-पास पेड़-पौधे और फूल-पत्तियां देखी हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.हमें शुद्ध हवा कहाँ से मिलती है?पेड़-पौधों से।
2.पेड़ पर हरे रंग का क्या लगा होता है?पत्तियां।
3.बच्चों, क्या आपको इसके बारे में और कुछ पता है?छात्र अपने विचार रखते हैं।
4.क्या यह हमारे आस-पास के पर्यावरण का हिस्सा है?हाँ, बिल्कुल।
5.पौधे के और कौन-कौन से भाग होते हैं?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

बच्चों, आज हम पर्यावरण अध्ययन के अंतर्गत ‘पौधे के विभिन्न भागों’ (Parts of a Plant) के बारे में विस्तार से जानेंगे।

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
पौधे के भागछात्राध्यापक बताएंगे कि पौधे के मुख्य 5 भाग होते हैं: जड़, तना, पत्ती, फूल और फल।छात्र पौधे के भागों को दोहराएंगे।भाग: जड़, तना, पत्ती, फूल, फल
जड़ और तना (Root and Stem)जड़ मिट्टी के नीचे होती है जो पौधे को पानी देती है। तना पौधे को सीधा खड़ा रखता है और जड़ों से पानी पत्तियों तक पहुंचाता है।छात्र चित्र में जड़ और तना देखेंगे।जड़: पानी चूसना
तना: सहारा देना
पत्ती (Leaf)पत्तियां हरे रंग की होती हैं। ये पौधे के लिए भोजन बनाती हैं, इसलिए इन्हें पौधे का ‘रसोईघर’ (Kitchen) कहा जाता है।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे।पत्ती: पौधे का रसोईघर (भोजन बनाना)
फूल और फल (Flower and Fruit)फूल पौधे का सबसे सुंदर भाग है, जो बाद में फल बन जाता है। फलों के अंदर बीज होते हैं जिनसे नया पौधा बनता है।छात्र अपनी कॉपी में लिखेंगे।फूल से फल बनता है।

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. पौधे के किन्हीं तीन भागों के नाम बताइए।
  2. पौधे का रसोईघर किसे कहा जाता है?
  3. पौधे को सीधा खड़ा रखने में कौन मदद करता है?

10. गृहकार्य (Homework):

एक पौधे का सुंदर चित्र बनाकर उसके सभी भागों के नाम लिखकर लाएं।

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D.El.Ed EVS Lesson Plan 12: पाठ योजना क्रमांक – 12

योजना प्रकार: D.El.Ed EVS Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 4
कालांश: ………………..
विषय: गणित (Maths)
उपविषय: पर्यावरण (Environment)
प्रकरण: जड़ी-बूटियाँ, झाड़ियाँ और वृक्ष
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. छात्रों को वनस्पतियों की विविधता से अवगत कराना।
  2. पौधों के वर्गीकरण की समझ विकसित करना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘जड़ी-बूटियाँ, झाड़ियाँ और वृक्ष’ पाठ में आए नवीन तथ्यों का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे। विद्यार्थी प्रकरण के महत्व को समझ सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘जड़ी-बूटियाँ, झाड़ियाँ और वृक्ष’ पाठ के विषय को समझकर अपने शब्दों में व्यक्त कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी पाठ से प्राप्त ज्ञान और समझ का अपने व्यावहारिक जीवन में उपयोग कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी उचित हाव-भाव के साथ पर्यावरण से संबंधित गतिविधियों को करने का कौशल प्राप्त करेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी पर्यावरण अध्ययन की अन्य रोचक पुस्तकों/कहानियों को पढ़ने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में प्रकृति, जानवरों और अपने आस-पास के परिवेश के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

तुलसी का पौधा, गुलाब की टहनी, और किसी बड़े पेड़ (आम/पीपल) का चित्र।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रश्नोत्तर प्रविधि, स्पष्टीकरण विधि, और प्रदर्शन/गतिविधि आधारित विधि।

5. पूर्व ज्ञान:

छात्रों ने छोटे और बड़े दोनों तरह के पेड़-पौधे देखे हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.क्या सभी पेड़-पौधे एक ही आकार के होते हैं?नहीं, कुछ छोटे और कुछ बहुत बड़े होते हैं।
2.आम का पौधा कैसा होता है?बहुत बड़ा पेड़ होता है।
3.बच्चों, क्या आपको इसके बारे में और कुछ पता है?छात्र अपने विचार रखते हैं।
4.क्या यह हमारे आस-पास के पर्यावरण का हिस्सा है?हाँ, बिल्कुल।
5.तुलसी या गुलाब के पौधे को क्या कहते हैं?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

बच्चों, आज हम आकार और तने की मोटाई के आधार पर पौधों के प्रकार— ‘जड़ी-बूटियाँ, झाड़ियाँ और वृक्ष’ के बारे में जानेंगे।

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
जड़ी-बूटियाँ (Herbs)ये बहुत छोटे पौधे होते हैं। इनका तना बहुत कोमल और हरा होता है। उदाहरण: धनिया, पुदीना, तुलसी, पालक।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे और उदाहरण लिखेंगे।Herbs (शाक): छोटा और हरा तना (तुलसी)
झाड़ियाँ (Shrubs)ये मध्यम आकार के पौधे होते हैं। इनका तना लकड़ी का और कठोर होता है। इनमें ज़मीन के पास से कई शाखाएं निकलती हैं। उदाहरण: गुलाब, गुड़हल, नींबू।छात्र गुलाब की टहनी को देखेंगे।Shrubs (झाड़ी): लकड़ी का तना, मध्यम आकार (गुलाब)
वृक्ष (Trees)ये बहुत बड़े और ऊंचे होते हैं। इनका तना बहुत मोटा, मजबूत और भूरे रंग का होता है, जिसे ‘ट्रंक’ कहते हैं। उदाहरण: आम, नीम, पीपल, बरगद।छात्र चित्र देखेंगे और समझेंगे।Trees (वृक्ष): बहुत बड़े, मोटा तना (आम)
लताएं (Climbers)कुछ पौधों का तना इतना कमज़ोर होता है कि वे सीधे खड़े नहीं हो सकते, उन्हें सहारे की ज़रूरत होती है। जैसे- मनी प्लांट, अंगूर की बेल।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे।लताएं: सहारे से चढ़ने वाले पौधे

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. जड़ी-बूटी और झाड़ी में क्या अंतर है?
  2. किन्हीं दो वृक्षों के नाम बताइए।
  3. गुलाब किस प्रकार का पौधा है?

10. गृहकार्य (Homework):

अपने घर के आस-पास दिखने वाले 5 पौधों के नाम लिखकर उन्हें जड़ी-बूटी, झाड़ी या वृक्ष में वर्गीकृत करें।

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D.El.Ed EVS Lesson Plan 13: पाठ योजना क्रमांक – 13

योजना प्रकार: D.El.Ed EVS Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 3-4
कालांश: ………………..
विषय: गणित (Maths)
उपविषय: पर्यावरण (Environment)
प्रकरण: पशु-पक्षियों के आवास और घोंसले
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. छात्रों में जीव-जंतुओं के प्रति दयाभाव और प्रेम विकसित करना।
  2. जंतुओं के रहन-सहन की जानकारी देना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘पशु-पक्षियों के आवास और घोंसले’ पाठ में आए नवीन तथ्यों का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे। विद्यार्थी प्रकरण के महत्व को समझ सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘पशु-पक्षियों के आवास और घोंसले’ पाठ के विषय को समझकर अपने शब्दों में व्यक्त कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी पाठ से प्राप्त ज्ञान और समझ का अपने व्यावहारिक जीवन में उपयोग कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी उचित हाव-भाव के साथ पर्यावरण से संबंधित गतिविधियों को करने का कौशल प्राप्त करेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी पर्यावरण अध्ययन की अन्य रोचक पुस्तकों/कहानियों को पढ़ने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में प्रकृति, जानवरों और अपने आस-पास के परिवेश के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

विभिन्न पक्षियों के घोंसलों और जानवरों के घरों (गुफा, अस्तबल, बिल) के चित्र।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रश्नोत्तर प्रविधि, स्पष्टीकरण विधि, और प्रदर्शन/गतिविधि आधारित विधि।

5. पूर्व ज्ञान:

छात्र जानते हैं कि मनुष्य घर में रहता है और कुत्ता डॉग-हाउस में रहता है।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.हम लोग सर्दी, गर्मी और बारिश से बचने के लिए कहाँ रहते हैं?अपने घर में।
2.शेर जंगल में कहाँ रहता है?गुफा (Den) में।
3.बच्चों, क्या आपको इसके बारे में और कुछ पता है?छात्र अपने विचार रखते हैं।
4.क्या यह हमारे आस-पास के पर्यावरण का हिस्सा है?हाँ, बिल्कुल।
5.पक्षी अंडे देने के लिए क्या बनाते हैं?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

बच्चों, आज हम विभिन्न ‘पशु-पक्षियों के आवासों’ (Homes of Animals) और पक्षियों के घोंसलों के बारे में पढ़ेंगे।

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
पशुओं के आवासहर जानवर का एक अलग घर होता है। जैसे— शेर गुफा (Den) में, खरगोश और चूहा बिल (Burrow) में, भालू मांद में रहता है।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे।शेर = गुफा, खरगोश = बिल
पालतू जानवरों के घरहम पालतू जानवरों के लिए घर बनाते हैं। गाय-भैंस छप्पर (Shed) में, घोड़ा अस्तबल (Stable) में, और कुत्ता केनेल (Kennel) में रहता है।छात्र अपनी कॉपी में लिखेंगे।गाय = छप्पर, घोड़ा = अस्तबल
पक्षियों के घोंसले (Nests)पक्षी अंडे देने और अपने बच्चों की सुरक्षा के लिए पेड़ों पर घोंसला बनाते हैं। वे इसके लिए तिनके, रुई, बाल, और पत्तियों का प्रयोग करते हैं।छात्र चित्र में विभिन्न घोंसले देखेंगे।पक्षी अंडे देने के लिए घोंसला बनाते हैं।
विशेष पक्षियों के घोंसलेबया (Weaver Bird) बहुत सुंदर लालटेन जैसा घोंसला बुनती है। दर्जिन चिड़िया (Tailor Bird) पत्तियों को सील कर अपना घोंसला बनाती है।छात्र आश्चर्यचकित होकर सुनेंगे।बया = लालटेन जैसा घोंसला
दर्जिन चिड़िया = पत्ती सील कर

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. घोड़ा कहाँ रहता है?
  2. दर्जिन चिड़िया अपना घोंसला कैसे बनाती है?
  3. शेर के घर को क्या कहते हैं?

10. गृहकार्य (Homework):

किन्हीं 5 जानवरों और उनके घरों के नाम लिखकर लाएं।

Part of our 180+ free D.El.Ed / BSTC Maths Lesson Plans collection.

D.El.Ed EVS Lesson Plan 14: पाठ योजना क्रमांक – 14

योजना प्रकार: D.El.Ed EVS Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 3-4
कालांश: ………………..
विषय: गणित (Maths)
उपविषय: पर्यावरण (Environment)
प्रकरण: सजीव और निर्जीव वस्तुएं (Living & Non-living)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. छात्रों को प्रकृति में उपस्थित वस्तुओं का अवलोकन करना सिखाना।
  2. वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास करना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘सजीव और निर्जीव वस्तुएं (Living & Non-living)’ पाठ में आए नवीन तथ्यों का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे। विद्यार्थी प्रकरण के महत्व को समझ सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘सजीव और निर्जीव वस्तुएं (Living & Non-living)’ पाठ के विषय को समझकर अपने शब्दों में व्यक्त कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी पाठ से प्राप्त ज्ञान और समझ का अपने व्यावहारिक जीवन में उपयोग कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी उचित हाव-भाव के साथ पर्यावरण से संबंधित गतिविधियों को करने का कौशल प्राप्त करेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी पर्यावरण अध्ययन की अन्य रोचक पुस्तकों/कहानियों को पढ़ने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में प्रकृति, जानवरों और अपने आस-पास के परिवेश के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

एक जीवित पौधा, एक पत्थर, खिलौना और चार्ट पेपर।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रश्नोत्तर प्रविधि, स्पष्टीकरण विधि, और प्रदर्शन/गतिविधि आधारित विधि।

5. पूर्व ज्ञान:

छात्र मनुष्य, कुत्ते, कुर्सी और मेज़ को पहचानते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.क्या कुर्सी या मेज़ अपने आप चलकर दूसरी जगह जा सकते हैं?नहीं।
2.क्या कुत्ता या बिल्ली अपने आप चल सकते हैं?हाँ।
3.बच्चों, क्या आपको इसके बारे में और कुछ पता है?छात्र अपने विचार रखते हैं।
4.क्या यह हमारे आस-पास के पर्यावरण का हिस्सा है?हाँ, बिल्कुल।
5.कुर्सी और कुत्ते में क्या मुख्य अंतर है?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

बच्चों, आज हम अपने आस-पास पाई जाने वाली ‘सजीव और निर्जीव वस्तुओं’ के बारे में वैज्ञानिक अध्ययन करेंगे।

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
सजीव वस्तुएं (Living Things)जिन चीज़ों में जान होती है, उन्हें सजीव कहते हैं। उदाहरण: इंसान, जानवर, पेड़-पौधे, कीड़े-मकोड़े।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे।सजीव: जिनमें जान होती है (पेड़, इंसान)
सजीवों के लक्षणसजीव वस्तुएं सांस लेती हैं, भोजन खाती हैं, पानी पीती हैं, बड़ी होती हैं (Growth) और महसूस करती हैं।छात्र सजीवों के लक्षण नोट करेंगे।लक्षण: सांस लेना, भोजन, वृद्धि
निर्जीव वस्तुएं (Non-living Things)जिन चीज़ों में जान नहीं होती, उन्हें निर्जीव कहते हैं। उदाहरण: कुर्सी, मेज़, पत्थर, किताब, मोबाइल।छात्र कक्षा में मौजूद निर्जीव वस्तुओं के नाम बताएंगे।निर्जीव: जिनमें जान नहीं होती (किताब, मेज़)
पेड़-पौधे सजीव क्यों हैं?पेड़-पौधे चल नहीं सकते, लेकिन वे छोटे से बड़े होते हैं (वृद्धि), सांस लेते हैं और भोजन बनाते हैं, इसलिए वे सजीव हैं।छात्र शंका का समाधान करेंगे और सुनेंगे।पेड़-पौधे भी सजीव हैं (वे बढ़ते हैं)।

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. सजीव वस्तुओं के दो लक्षण बताइए।
  2. क्या पेड़-पौधे सजीव हैं या निर्जीव? क्यों?
  3. कक्षा में मौजूद किन्हीं तीन निर्जीव वस्तुओं के नाम बताइए।

10. गृहकार्य (Homework):

अपने घर से 5 सजीव और 5 निर्जीव वस्तुओं के नाम एक सूची में लिखकर लाएं।

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D.El.Ed EVS Lesson Plan 15: पाठ योजना क्रमांक – 15

योजना प्रकार: D.El.Ed EVS Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 4
कालांश: ………………..
विषय: गणित (Maths)
उपविषय: पर्यावरण (Environment)
प्रकरण: जानवरों के कान और खाल (पैटर्न)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. छात्रों को जंतुओं की शारीरिक विशेषताओं से परिचित कराना।
  2. जंतुओं के अवलोकन (Observation) की क्षमता का विकास करना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘जानवरों के कान और खाल (पैटर्न)’ पाठ में आए नवीन तथ्यों का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे। विद्यार्थी प्रकरण के महत्व को समझ सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘जानवरों के कान और खाल (पैटर्न)’ पाठ के विषय को समझकर अपने शब्दों में व्यक्त कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी पाठ से प्राप्त ज्ञान और समझ का अपने व्यावहारिक जीवन में उपयोग कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी उचित हाव-भाव के साथ पर्यावरण से संबंधित गतिविधियों को करने का कौशल प्राप्त करेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी पर्यावरण अध्ययन की अन्य रोचक पुस्तकों/कहानियों को पढ़ने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में प्रकृति, जानवरों और अपने आस-पास के परिवेश के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

हाथी, ज़ेब्रा, चीता, छिपकली और मगरमच्छ के चित्र।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रश्नोत्तर प्रविधि, स्पष्टीकरण विधि, और प्रदर्शन/गतिविधि आधारित विधि।

5. पूर्व ज्ञान:

छात्रों ने विभिन्न जानवरों को टीवी या चिड़ियाघर में देखा है।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.हाथी के कान कैसे होते हैं?बहुत बड़े, पंखे जैसे।
2.क्या आपने कभी छिपकली या सांप के कान देखे हैं?नहीं, दिखाई नहीं देते।
3.बच्चों, क्या आपको इसके बारे में और कुछ पता है?छात्र अपने विचार रखते हैं।
4.क्या यह हमारे आस-पास के पर्यावरण का हिस्सा है?हाँ, बिल्कुल।
5.जिन जानवरों के कान बाहर दिखाई देते हैं, वे बच्चे देते हैं या अंडे?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

बच्चों, आज हम जानवरों की एक बहुत ही रोचक विशेषता— ‘उनके कान और त्वचा के पैटर्न’ के बारे में जानेंगे।

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
जानवरों के कानकुछ जानवरों के कान बाहर दिखाई देते हैं (जैसे- हाथी, कुत्ता, गाय)। कुछ के कान बाहर दिखाई नहीं देते, उनके सिर के दोनों ओर छोटे छेद होते हैं (जैसे- पक्षी, छिपकली, मगरमच्छ)।छात्र जानवरों के कानों की तुलना करेंगे।बाहरी कान: हाथी, गाय
छेद वाले कान: पक्षी, छिपकली
त्वचा पर बाल और पैटर्नजानवरों की त्वचा पर अलग-अलग डिज़ाइन (पैटर्न) होते हैं। यह पैटर्न उनके शरीर पर मौजूद बालों के कारण होता है। जैसे— ज़ेब्रा की धारियां, चीते के धब्बे।छात्र चित्र में पैटर्न देखेंगे।पैटर्न = शरीर के बालों के कारण
बच्चे देने वाले जानवरजिन जानवरों के कान बाहर दिखाई देते हैं और शरीर पर बाल होते हैं, वे ‘बच्चे’ देते हैं (जैसे— कुत्ता, गाय, मनुष्य)।छात्र नियम को ध्यानपूर्वक सुनेंगे।बाहरी कान + बाल = बच्चे देते हैं
अंडे देने वाले जानवरजिन जानवरों के कान बाहर दिखाई नहीं देते और शरीर पर बाल नहीं होते (पंख या शल्क होते हैं), वे ‘अंडे’ देते हैं (जैसे— सांप, छिपकली, पक्षी)।छात्र अपनी कॉपी में लिखेंगे।बाहरी कान नहीं + बाल नहीं = अंडे देते हैं

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. हाथी के कान कैसे होते हैं?
  2. जिन जानवरों के कान बाहर दिखाई नहीं देते, वे क्या देते हैं?
  3. ज़ेब्रा के शरीर पर पैटर्न किसके कारण होता है?

10. गृहकार्य (Homework):

5 बच्चे देने वाले और 5 अंडे देने वाले जानवरों के नाम लिखकर लाएं।

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D.El.Ed EVS Lesson Plan 16: पाठ योजना क्रमांक – 16

योजना प्रकार: D.El.Ed EVS Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 5
कालांश: ………………..
विषय: गणित (Maths)
उपविषय: पर्यावरण (Environment)
प्रकरण: चखने से पचाने तक (पाचन तंत्र)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. छात्रों को मानव शरीर की जैविक प्रक्रियाओं से अवगत कराना।
  2. स्वस्थ खान-पान के प्रति जागरूकता पैदा करना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘चखने से पचाने तक (पाचन तंत्र)’ पाठ में आए नवीन तथ्यों का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे। विद्यार्थी प्रकरण के महत्व को समझ सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘चखने से पचाने तक (पाचन तंत्र)’ पाठ के विषय को समझकर अपने शब्दों में व्यक्त कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी पाठ से प्राप्त ज्ञान और समझ का अपने व्यावहारिक जीवन में उपयोग कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी उचित हाव-भाव के साथ पर्यावरण से संबंधित गतिविधियों को करने का कौशल प्राप्त करेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी पर्यावरण अध्ययन की अन्य रोचक पुस्तकों/कहानियों को पढ़ने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में प्रकृति, जानवरों और अपने आस-पास के परिवेश के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

जीभ के स्वाद-क्षेत्रों का चार्ट, मानव पाचन तंत्र का मॉडल या चित्र।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रश्नोत्तर प्रविधि, स्पष्टीकरण विधि, और प्रदर्शन/गतिविधि आधारित विधि।

5. पूर्व ज्ञान:

छात्र जानते हैं कि भोजन मुंह से खाया जाता है और पेट में जाता है।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.हमें भोजन का स्वाद कैसे पता चलता है?जीभ (Tongue) से।
2.मुंह में भोजन को कौन चबाता है?दांत चबाते हैं।
3.बच्चों, क्या आपको इसके बारे में और कुछ पता है?छात्र अपने विचार रखते हैं।
4.क्या यह हमारे आस-पास के पर्यावरण का हिस्सा है?हाँ, बिल्कुल।
5.चबाने के बाद भोजन पेट में जाकर कैसे पचता है?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

बच्चों, आज हम अपने शरीर के अंदर होने वाली एक बहुत ही महत्वपूर्ण क्रिया— ‘भोजन चखने से लेकर पेट में पचने तक’ की यात्रा के बारे में पढ़ेंगे।

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
जीभ और स्वादहमारी जीभ पर स्वाद-कलिकाएं (Taste buds) होती हैं। जीभ का अगला हिस्सा मीठा, किनारे खट्टा व नमकीन, और पिछला हिस्सा कड़वा स्वाद बताता है।छात्र जीभ का चार्ट देखेंगे।स्वाद: मीठा (आगे), कड़वा (पीछे)
मुंह में पाचनजब हम भोजन चबाते हैं, तो मुंह में ‘लार’ (Saliva) बनती है। लार भोजन को मुलायम और मीठा बनाती है। पाचन की शुरुआत मुंह से ही हो जाती है।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे।पाचन की शुरुआत मुंह से (लार)
भोजन नली और आमाशयचबाया हुआ भोजन ‘भोजन नली’ (Food pipe) से होता हुआ आमाशय (Stomach) में पहुंचता है। पेट में पाचक रस भोजन को मथकर एक पेस्ट बना देते हैं।छात्र पाचन तंत्र के चित्र को समझेंगे।पेट के पाचक रस भोजन पचाते हैं
छोटी और बड़ी आंतपेट से भोजन छोटी आंत (Small Intestine) में जाता है, जहाँ पोषक तत्व खून में मिल जाते हैं। बचा हुआ अपशिष्ट बड़ी आंत से शरीर के बाहर निकल जाता है।छात्र प्रक्रिया को अपनी कॉपी में लिखेंगे।छोटी आंत: पोषक तत्व सोखना

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. जीभ का कौन-सा हिस्सा मीठा स्वाद बताता है?
  2. भोजन के पाचन की शुरुआत शरीर के किस अंग से होती है?
  3. लार (Saliva) का क्या काम है?

10. गृहकार्य (Homework):

मानव पाचन तंत्र का सरल चित्र अपनी कॉपी में बनाकर लाएं।

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D.El.Ed EVS Lesson Plan 17: पाठ योजना क्रमांक – 17

योजना प्रकार: D.El.Ed EVS Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 5
कालांश: ………………..
विषय: गणित (Maths)
उपविषय: पर्यावरण (Environment)
प्रकरण: बीज, बीज, बीज (प्रजनन और प्रकीर्णन)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. छात्रों को कृषि और वनस्पतियों के विकास से जोड़ना।
  2. बीज से पौधे बनने की प्रक्रिया का ज्ञान देना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘बीज, बीज, बीज (प्रजनन और प्रकीर्णन)’ पाठ में आए नवीन तथ्यों का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे। विद्यार्थी प्रकरण के महत्व को समझ सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘बीज, बीज, बीज (प्रजनन और प्रकीर्णन)’ पाठ के विषय को समझकर अपने शब्दों में व्यक्त कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी पाठ से प्राप्त ज्ञान और समझ का अपने व्यावहारिक जीवन में उपयोग कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी उचित हाव-भाव के साथ पर्यावरण से संबंधित गतिविधियों को करने का कौशल प्राप्त करेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी पर्यावरण अध्ययन की अन्य रोचक पुस्तकों/कहानियों को पढ़ने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में प्रकृति, जानवरों और अपने आस-पास के परिवेश के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

चना या मूंग के अंकुरित बीज, रुई, पानी, और प्रकीर्णन दर्शाने वाला चार्ट।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रश्नोत्तर प्रविधि, स्पष्टीकरण विधि, और प्रदर्शन/गतिविधि आधारित विधि।

5. पूर्व ज्ञान:

छात्रों ने फलों के अंदर बीज देखे हैं (जैसे- सेब, पपीता, आम)।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.नया पौधा उगाने के लिए हम मिट्टी में क्या बोते हैं?बीज (Seed) बोते हैं।
2.क्या सभी बीज एक ही जगह गिरकर उगते हैं?नहीं, वे अलग-अलग जगह फैल जाते हैं।
3.बच्चों, क्या आपको इसके बारे में और कुछ पता है?छात्र अपने विचार रखते हैं।
4.क्या यह हमारे आस-पास के पर्यावरण का हिस्सा है?हाँ, बिल्कुल।
5.बीज एक जगह से दूसरी जगह कैसे पहुंचते हैं?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

बच्चों, आज हम बीजों के अंकुरण और बीजों के एक जगह से दूसरी जगह फैलने की प्रक्रिया (‘बीजों के प्रकीर्णन’) के बारे में जानेंगे।

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
बीज का अंकुरण (Germination)जब एक बीज को सही मात्रा में पानी, हवा और सूरज की गर्मी (तापमान) मिलती है, तो उसमें से एक छोटा पौधा निकलता है। इसे अंकुरण कहते हैं।छात्र अंकुरित मूंग/चने को देखेंगे।अंकुरण = पानी + हवा + गर्मी
हवा द्वारा प्रकीर्णनकुछ बीज बहुत हल्के और रोएंदार होते हैं (जैसे— मदार और कपास के बीज)। ये हवा में उड़कर दूर-दूर तक पहुंच जाते हैं।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे।हवा द्वारा: मदार, कपास
पानी और जानवरों द्वारा प्रकीर्णननारियल पानी में तैरकर दूसरी जगह पहुंचता है। गोखरू या कांटेदार बीज जानवरों के बालों में उलझकर दूर तक चले जाते हैं। पक्षी फल खाकर बीट के साथ बीज निकालते हैं।छात्र विभिन्न तरीकों को अपनी कॉपी में लिखेंगे।पानी द्वारा: नारियल
जानवरों द्वारा: गोखरू
फटने से प्रकीर्णनकुछ फल सूखकर ज़ोर से फटते हैं, जिससे उनके बीज दूर छिटक जाते हैं। जैसे— मटर, भिंडी और सोयाबीन की फलियां।छात्र आश्चर्यचकित होकर सुनेंगे।फटने से: मटर, सोयाबीन

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. बीज के अंकुरण के लिए कौन-सी तीन चीजें आवश्यक हैं?
  2. नारियल का बीज एक जगह से दूसरी जगह कैसे पहुंचता है?
  3. जानवरों के बालों में कैसे बीज चिपक जाते हैं?

10. गृहकार्य (Homework):

कुछ बीजों (चना, मूंग) को गीली रुई में रखकर उनके अंकुरण का घर पर अवलोकन करें।

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D.El.Ed EVS Lesson Plan 18: पाठ योजना क्रमांक – 18

योजना प्रकार: D.El.Ed EVS Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 5
कालांश: ………………..
विषय: गणित (Maths)
उपविषय: पर्यावरण (Environment)
प्रकरण: घटपर्णी पौधा (शिकारी पौधा)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. छात्रों में प्रकृति के प्रति वैज्ञानिक जिज्ञासा (Curiosity) पैदा करना।
  2. वनस्पतियों की विशेष अनुकूलन क्षमता से परिचित कराना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘घटपर्णी पौधा (शिकारी पौधा)’ पाठ में आए नवीन तथ्यों का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे। विद्यार्थी प्रकरण के महत्व को समझ सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘घटपर्णी पौधा (शिकारी पौधा)’ पाठ के विषय को समझकर अपने शब्दों में व्यक्त कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी पाठ से प्राप्त ज्ञान और समझ का अपने व्यावहारिक जीवन में उपयोग कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी उचित हाव-भाव के साथ पर्यावरण से संबंधित गतिविधियों को करने का कौशल प्राप्त करेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी पर्यावरण अध्ययन की अन्य रोचक पुस्तकों/कहानियों को पढ़ने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में प्रकृति, जानवरों और अपने आस-पास के परिवेश के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

घटपर्णी (Pitcher Plant) और वीनस फ्लाईट्रैप का रंगीन चित्र या वीडियो क्लिप।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रश्नोत्तर प्रविधि, स्पष्टीकरण विधि, और प्रदर्शन/गतिविधि आधारित विधि।

5. पूर्व ज्ञान:

छात्र जानते हैं कि जानवर दूसरे जीवों का शिकार करते हैं और पौधे मिट्टी से पानी लेते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.जानवरों का शिकार कौन करता है?शेर, चीता, मेंढक आदि।
2.क्या पौधे भी कीड़े-मकोड़ों का शिकार कर सकते हैं?शायद नहीं। (छात्र असमंजस में)
3.बच्चों, क्या आपको इसके बारे में और कुछ पता है?छात्र अपने विचार रखते हैं।
4.क्या यह हमारे आस-पास के पर्यावरण का हिस्सा है?हाँ, बिल्कुल।
5.कीड़े खाने वाले पौधों को क्या कहते हैं?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

बच्चों, आज हम कुछ ऐसे अजीब और अनोखे पौधों के बारे में जानेंगे जो कीड़े-मकोड़ों, चूहों और मेंढकों का शिकार करके उन्हें खा जाते हैं। इन्हें ‘शिकारी पौधे’ कहते हैं।

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
शिकारी पौधे (Insectivorous Plants)कुछ पौधे ऐसी मिट्टी में उगते हैं जहाँ नाइट्रोजन की कमी होती है। इस कमी को पूरा करने के लिए वे कीड़े-मकोड़ों का शिकार करते हैं।छात्र आश्चर्य से सुनेंगे।शिकारी पौधे = कीड़े खाने वाले (नाइट्रोजन के लिए)
घटपर्णी (Nepenthes/Pitcher Plant)घटपर्णी पौधे का आकार एक घड़े (Pitcher) जैसा होता है। इसके ऊपर एक पत्ती का ढक्कन लगा होता है। यह भारत के मेघालय, ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया में पाया जाता है।छात्र चित्र में घटपर्णी का घड़ा देखेंगे।घटपर्णी: घड़े के आकार का (मेघालय में)
शिकार का तरीकाघड़े के अंदर से एक खास मीठी खुशबू निकलती है जो कीड़ों को अपनी ओर खींचती है। कीड़ा जैसे ही घड़े के अंदर जाता है, वह फिसलकर फंस जाता है और ऊपर का ढक्कन बंद हो जाता है।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे।मीठी खुशबू से शिकार को फंसाना।
अन्य शिकारी पौधेवीनस फ्लाईट्रैप (Venus Flytrap) और सड्यू (Sundew) भी शिकारी पौधे हैं, जो कीड़ों को जकड़ कर खा जाते हैं।छात्र अन्य पौधों के नाम अपनी कॉपी में लिखेंगे।अन्य नाम: वीनस फ्लाईट्रैप

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. घटपर्णी पौधे का आकार कैसा होता है?
  2. भारत में घटपर्णी पौधा कहाँ पाया जाता है?
  3. शिकारी पौधे कीड़ों का शिकार क्यों करते हैं?

10. गृहकार्य (Homework):

घटपर्णी (Pitcher Plant) का सुंदर चित्र अपनी कॉपी में बनाकर लाएं।

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D.El.Ed EVS Lesson Plan 19: पाठ योजना क्रमांक – 19

योजना प्रकार: D.El.Ed EVS Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 4
कालांश: ………………..
विषय: गणित (Maths)
उपविषय: पर्यावरण (Environment)
प्रकरण: अनीता की मधुमक्खियाँ (मधुमक्खी पालन)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. छात्रों को कृषि आधारित कुटीर उद्योगों से परिचित कराना।
  2. मेहनत और स्वावलंबन (Self-reliance) की प्रेरणा देना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘अनीता की मधुमक्खियाँ (मधुमक्खी पालन)’ पाठ में आए नवीन तथ्यों का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे। विद्यार्थी प्रकरण के महत्व को समझ सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘अनीता की मधुमक्खियाँ (मधुमक्खी पालन)’ पाठ के विषय को समझकर अपने शब्दों में व्यक्त कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी पाठ से प्राप्त ज्ञान और समझ का अपने व्यावहारिक जीवन में उपयोग कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी उचित हाव-भाव के साथ पर्यावरण से संबंधित गतिविधियों को करने का कौशल प्राप्त करेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी पर्यावरण अध्ययन की अन्य रोचक पुस्तकों/कहानियों को पढ़ने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में प्रकृति, जानवरों और अपने आस-पास के परिवेश के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

मधुमक्खी के छत्ते का चित्र, शहद की एक छोटी बोतल, ‘अनीता’ की कहानी का चार्ट।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रश्नोत्तर प्रविधि, स्पष्टीकरण विधि, और प्रदर्शन/गतिविधि आधारित विधि।

5. पूर्व ज्ञान:

छात्रों ने मधुमक्खी, उसका छत्ता और शहद देखा है।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.फूलों का रस चूसकर शहद कौन बनाता है?मधुमक्खी।
2.शहद कहाँ इकट्ठा किया जाता है?मधुमक्खी के छत्ते (Hive) में।
3.बच्चों, क्या आपको इसके बारे में और कुछ पता है?छात्र अपने विचार रखते हैं।
4.क्या यह हमारे आस-पास के पर्यावरण का हिस्सा है?हाँ, बिल्कुल।
5.शहद प्राप्त करने के लिए मधुमक्खियों को पालने को क्या कहते हैं?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

बच्चों, आज हम बिहार की रहने वाली एक बहादुर लड़की ‘अनीता कुशवाहा’ की कहानी पढ़ेंगे और ‘मधुमक्खी पालन’ के बारे में जानेंगे।

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
अनीता की कहानीअनीता बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के बोचाहा गांव की रहने वाली है। उसने पढ़ाई के साथ-साथ मधुमक्खी पालन का काम शुरू किया और स्वावलंबी बनी।छात्र अनीता की संघर्ष की कहानी सुनेंगे।अनीता: बिहार (मुजफ्फरपुर)
मधुमक्खी पालन का सही समयअक्टूबर से दिसंबर का समय मधुमक्खियों के अंडे देने का समय होता है। इसलिए यही समय मधुमक्खी पालन शुरू करने के लिए सबसे अच्छा माना जाता है। लीची के फूल मधुमक्खियों को बहुत लुभाते हैं।छात्र महत्वपूर्ण बिंदुओं को नोट करेंगे।सही समय: अक्टूबर से दिसंबर
फूल: लीची
मधुमक्खियों के प्रकार और कार्यहर छत्ते में एक ‘रानी मक्खी’ होती है जो अंडे देती है। कुछ ‘नर मक्खी’ होते हैं। बाकी सभी ‘काम करने वाली मक्खियां’ (Worker bees) होती हैं, जो रस ढूंढती हैं और छत्ता बनाती हैं।छात्र छत्ते की व्यवस्था को समझेंगे।रानी मक्खी: अंडे देना
वर्कर मक्खी: रस लाना
मधुमक्खियों का नाच (Dance)जब किसी मक्खी को रस मिल जाता है, तो वह एक विशेष प्रकार का नाच करती है। इससे दूसरी मक्खियों को पता चल जाता है कि रस कहाँ है।छात्र आश्चर्य से सुनेंगे।रस मिलने पर विशेष नाच

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. मधुमक्खी पालन शुरू करने का सबसे अच्छा समय कौन-सा है?
  2. छत्ते में अंडे देने का काम कौन-सी मक्खी करती है?
  3. रस ढूंढने का काम कौन करता है?

10. गृहकार्य (Homework):

मधुमक्खी के छत्ते का चित्र बनाकर उसमें काम करने वाली मक्खियों के कार्य लिखिए।

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D.El.Ed EVS Lesson Plan 20: पाठ योजना क्रमांक – 20

योजना प्रकार: D.El.Ed EVS Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 4
कालांश: ………………..
विषय: गणित (Maths)
उपविषय: पर्यावरण (Environment)
प्रकरण: चलो चलें स्कूल (स्कूल जाने के साधन)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. छात्रों को भारत की भौगोलिक विविधता से अवगत कराना।
  2. शिक्षा के प्रति संघर्ष और लगन का महत्व समझाना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘चलो चलें स्कूल (स्कूल जाने के साधन)’ पाठ में आए नवीन तथ्यों का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे। विद्यार्थी प्रकरण के महत्व को समझ सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘चलो चलें स्कूल (स्कूल जाने के साधन)’ पाठ के विषय को समझकर अपने शब्दों में व्यक्त कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी पाठ से प्राप्त ज्ञान और समझ का अपने व्यावहारिक जीवन में उपयोग कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी उचित हाव-भाव के साथ पर्यावरण से संबंधित गतिविधियों को करने का कौशल प्राप्त करेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी पर्यावरण अध्ययन की अन्य रोचक पुस्तकों/कहानियों को पढ़ने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में प्रकृति, जानवरों और अपने आस-पास के परिवेश के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

भारत का मानचित्र, ट्रॉली (लद्दाख), वल्लम (केरल), और ऊंट-गाड़ी (राजस्थान) के चित्र।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रश्नोत्तर प्रविधि, स्पष्टीकरण विधि, और प्रदर्शन/गतिविधि आधारित विधि।

5. पूर्व ज्ञान:

छात्र अपने स्कूल बस, वैन, साइकिल या पैदल आते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.आप लोग अपने घर से स्कूल कैसे आते हैं?साइकिल, बस या पैदल।
2.क्या पहाड़ों या रेगिस्तान में भी बच्चे बस से स्कूल जा सकते हैं?नहीं, वहां बस नहीं चल सकती।
3.बच्चों, क्या आपको इसके बारे में और कुछ पता है?छात्र अपने विचार रखते हैं।
4.क्या यह हमारे आस-पास के पर्यावरण का हिस्सा है?हाँ, बिल्कुल।
5.पहाड़ी या बर्फ वाले इलाकों में बच्चे स्कूल कैसे पहुंचते हैं?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

बच्चों, आज हम जानेंगे कि भारत के अलग-अलग हिस्सों में भौगोलिक कठिनाइयों के बावजूद बच्चे किन साधनों का प्रयोग करके स्कूल पहुंचते हैं।

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
बांस और रस्सी का पुलअसम में बहुत बारिश होती है और पानी भर जाता है। इसलिए वहां के बच्चे बांस और रस्सी से बने अस्थाई पुल को पार करके स्कूल जाते हैं।छात्र असम की भौगोलिक स्थिति समझेंगे।असम: बांस और रस्सी का पुल
ट्रॉली और वल्लम (लकड़ी की नाव)लद्दाख में गहरी नदी पार करने के लिए लोहे की रस्सी पर लटकी लकड़ी की ‘ट्रॉली’ का प्रयोग होता है। केरल में बच्चे पानी पार करने के लिए लकड़ी की छोटी नाव, जिसे ‘वल्लम’ कहते हैं, का प्रयोग करते हैं।छात्र ट्रॉली और वल्लम के चित्र देखेंगे।लद्दाख: ट्रॉली
केरल: वल्लम (नाव)
रेगिस्तान और मैदानी इलाकेराजस्थान के रेतीले इलाकों में बच्चे ‘ऊंट-गाड़ी’ में बैठकर स्कूल जाते हैं। मैदानी इलाकों के गांव में बैलगाड़ी (Bullock cart) का प्रयोग किया जाता है।छात्र अपनी कॉपी में लिखेंगे।राजस्थान: ऊंट-गाड़ी
मैदान: बैलगाड़ी
बर्फ और पथरीले रास्तेउत्तर की पहाड़ियों में बच्चे बर्फ पर हाथ पकड़कर चलते हैं। उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में बच्चे उबड़-खाबड़ और पथरीले रास्तों को पार करके स्कूल जाते हैं।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे।उत्तराखंड: पथरीले रास्ते

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. केरल में बच्चे स्कूल जाने के लिए किस नाव का प्रयोग करते हैं?
  2. लद्दाख में नदी पार करने के लिए किसका प्रयोग होता है?
  3. ऊंट-गाड़ी का प्रयोग किस राज्य में किया जाता है?

10. गृहकार्य (Homework):

अपने राज्य के मानचित्र में उन रास्तों को दर्शाएं जिनसे आप स्कूल जाते हैं।

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D.El.Ed Maths Lesson Plan 21: पाठ योजना क्रमांक – 21

योजना प्रकार: D.El.Ed Maths Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 4-5
कालांश: ………………..
विषय: गणित (Mathematics)
प्रकरण: भिन्न (Fractions) का प्रारंभिक ज्ञान
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में गणित की जटिल संक्रियाओं के प्रति समझ और रुचि उत्पन्न करना।
  2. विद्यार्थियों में तार्किक, विश्लेषणात्मक एवं बौद्धिक क्षमता का विकास करना।
  3. विद्यार्थियों को दैनिक जीवन में गणितीय नियमों के महत्व से अवगत कराना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘भिन्न (Fractions) का प्रारंभिक ज्ञान’ का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे तथा इसके नियमों को जान सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘भिन्न (Fractions) का प्रारंभिक ज्ञान’ को समझ कर उसे अपने शब्दों में स्पष्ट कर सकेंगे और सूत्रों को समझ सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी ‘भिन्न (Fractions) का प्रारंभिक ज्ञान’ से संबंधित ज्ञान का प्रयोग दैनिक जीवन की गणितीय समस्याओं को सुलझाने में कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी ‘भिन्न (Fractions) का प्रारंभिक ज्ञान’ से संबंधित प्रश्नों को तेज़ी और शुद्धता से हल करने का कौशल प्राप्त कर सकेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी ‘भिन्न (Fractions) का प्रारंभिक ज्ञान’ से संबंधित समस्याओं और गणितीय पहेलियों को हल करने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में ‘भिन्न (Fractions) का प्रारंभिक ज्ञान’ और गणित विषय के प्रति सकारात्मक एवं तार्किक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

चॉक, डस्टर, लपेट फलक, संकेतक, ‘भिन्न (Fractions) का प्रारंभिक ज्ञान’ से संबंधित आकर्षक चार्ट, आकृतियों के मॉडल, और फ़्लैश कार्ड्स।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

आगमन-निगमन विधि, समस्या समाधान विधि, और प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी जोड़, घटाव, गुणा और भाग जैसी सामान्य गणितीय संक्रियाओं के बारे में अच्छी जानकारी रखते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.बच्चों, जब आप अपने दोस्तों के साथ खेलते हैं, तो क्या आप चीजें बाँटते हैं?हाँ, बाँटते हैं।
2.अगर आपके पास एक सेब है और आपको इसे अपने दो दोस्तों में बराबर बाँटना है, तो क्या करेंगे?उसे आधा-आधा काटेंगे।
3.इस “आधे” हिस्से को या बाँटने की इस प्रक्रिया को हम गणित में किस रूप में लिखते हैं?भिन्न के रूप में / अलग-अलग रूप में।
4.इस तरह की जटिल संख्याओं और आकृतियों के माप का अध्ययन हम किस विषय में करते हैं?गणित में।
5.बच्चों, क्या आप ‘भिन्न (Fractions) का प्रारंभिक ज्ञान’ के बारे में विस्तार से जानते हैं?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, आज हम गणित विषय के अंतर्गत ‘भिन्न (Fractions) का प्रारंभिक ज्ञान’ के बारे में विस्तार से अध्ययन करेंगे और इसके नियमों को जानेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
विकासात्मक प्रश्नछात्राध्यापक ‘भिन्न (Fractions) का प्रारंभिक ज्ञान’ से संबंधित पूर्व ज्ञान को मुख्य पाठ से जोड़ने के लिए 2-3 सरल प्रश्न पूछेगा।छात्र अपनी समझ के अनुसार उत्तर देने का प्रयास करेंगे।मुख्य बिंदु
भिन्न (Fractions) का प्रारंभिक ज्ञान का स्पष्टीकरणछात्राध्यापक चार्ट व टीएलएम (TLM) की सहायता से ‘भिन्न (Fractions) का प्रारंभिक ज्ञान’ की अवधारणा को स्पष्ट करेगा।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे तथा महत्वपूर्ण बिंदुओं को समझेंगे।‘भिन्न (Fractions) का प्रारंभिक ज्ञान’ की परिभाषा
बोध प्रश्नपढ़ाए गए विषय की समझ जाँचने के लिए छात्राध्यापक छात्रों से बोध प्रश्न पूछेगा।छात्र पढ़ाए गए विषय के आधार पर सही उत्तर देंगे।सही उत्तर
भिन्न (Fractions) का प्रारंभिक ज्ञान के उदाहरणछात्राध्यापक श्यामपट्ट पर ‘भिन्न (Fractions) का प्रारंभिक ज्ञान’ से संबंधित कुछ उदाहरण और चित्र बनाकर हल करके दिखाएगा।छात्र उदाहरणों को अपनी अभ्यास पुस्तिका में उतारेंगे।हल किए गए उदाहरण
छात्र गतिविधि / सहभागिताछात्राध्यापक कक्षा को समूहों में बाँटकर ‘भिन्न (Fractions) का प्रारंभिक ज्ञान’ से संबंधित एक छोटी गतिविधि (Activity) करवाएगा।छात्र उत्साहपूर्वक गतिविधि में भाग लेंगे और सीखेंगे।गतिविधि का निष्कर्ष
श्यामपट्ट अभ्यास कार्यछात्राध्यापक छात्रों से कुछ प्रश्न पूछेगा और उन्हें श्यामपट्ट पर आकर हल करने के लिए आमंत्रित करेगा।छात्र निर्देशों का पालन करेंगे और श्यामपट्ट पर प्रश्नों को हल करेंगे।अभ्यास प्रश्न व हल

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. भिन्न (Fractions) का प्रारंभिक ज्ञान का मुख्य नियम या सूत्र क्या है?
  2. भिन्न (Fractions) का प्रारंभिक ज्ञान का एक उदाहरण दीजिए।
  3. श्यामपट्ट पर दिए गए प्रश्न को हल करके दिखाइए।

10. गृहकार्य (Homework):

सभी छात्र अपनी अभ्यास पुस्तिका में भिन्न (Fractions) का प्रारंभिक ज्ञान से संबंधित 5 प्रश्न घर से हल करके लाएंगे।

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D.El.Ed Maths Lesson Plan 22: पाठ योजना क्रमांक – 22

योजना प्रकार: D.El.Ed Maths Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 5
कालांश: ………………..
विषय: गणित (Mathematics)
प्रकरण: भिन्न का जोड़ और घटाव
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में गणित की जटिल संक्रियाओं के प्रति समझ और रुचि उत्पन्न करना।
  2. विद्यार्थियों में तार्किक, विश्लेषणात्मक एवं बौद्धिक क्षमता का विकास करना।
  3. विद्यार्थियों को दैनिक जीवन में गणितीय नियमों के महत्व से अवगत कराना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘भिन्न का जोड़ और घटाव’ का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे तथा इसके नियमों को जान सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘भिन्न का जोड़ और घटाव’ को समझ कर उसे अपने शब्दों में स्पष्ट कर सकेंगे और सूत्रों को समझ सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी ‘भिन्न का जोड़ और घटाव’ से संबंधित ज्ञान का प्रयोग दैनिक जीवन की गणितीय समस्याओं को सुलझाने में कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी ‘भिन्न का जोड़ और घटाव’ से संबंधित प्रश्नों को तेज़ी और शुद्धता से हल करने का कौशल प्राप्त कर सकेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी ‘भिन्न का जोड़ और घटाव’ से संबंधित समस्याओं और गणितीय पहेलियों को हल करने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में ‘भिन्न का जोड़ और घटाव’ और गणित विषय के प्रति सकारात्मक एवं तार्किक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

चॉक, डस्टर, लपेट फलक, संकेतक, ‘भिन्न का जोड़ और घटाव’ से संबंधित आकर्षक चार्ट, आकृतियों के मॉडल, और फ़्लैश कार्ड्स।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

आगमन-निगमन विधि, समस्या समाधान विधि, और प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी जोड़, घटाव, गुणा और भाग जैसी सामान्य गणितीय संक्रियाओं के बारे में अच्छी जानकारी रखते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.बच्चों, जब आप अपने दोस्तों के साथ खेलते हैं, तो क्या आप चीजें बाँटते हैं?हाँ, बाँटते हैं।
2.अगर आपके पास एक सेब है और आपको इसे अपने दो दोस्तों में बराबर बाँटना है, तो क्या करेंगे?उसे आधा-आधा काटेंगे।
3.इस “आधे” हिस्से को या बाँटने की इस प्रक्रिया को हम गणित में किस रूप में लिखते हैं?भिन्न के रूप में / अलग-अलग रूप में।
4.इस तरह की जटिल संख्याओं और आकृतियों के माप का अध्ययन हम किस विषय में करते हैं?गणित में।
5.बच्चों, क्या आप ‘भिन्न का जोड़ और घटाव’ के बारे में विस्तार से जानते हैं?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, आज हम गणित विषय के अंतर्गत ‘भिन्न का जोड़ और घटाव’ के बारे में विस्तार से अध्ययन करेंगे और इसके नियमों को जानेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
विकासात्मक प्रश्नछात्राध्यापक ‘भिन्न का जोड़ और घटाव’ से संबंधित पूर्व ज्ञान को मुख्य पाठ से जोड़ने के लिए 2-3 सरल प्रश्न पूछेगा।छात्र अपनी समझ के अनुसार उत्तर देने का प्रयास करेंगे।मुख्य बिंदु
भिन्न का जोड़ और घटाव का स्पष्टीकरणछात्राध्यापक चार्ट व टीएलएम (TLM) की सहायता से ‘भिन्न का जोड़ और घटाव’ की अवधारणा को स्पष्ट करेगा।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे तथा महत्वपूर्ण बिंदुओं को समझेंगे।‘भिन्न का जोड़ और घटाव’ की परिभाषा
बोध प्रश्नपढ़ाए गए विषय की समझ जाँचने के लिए छात्राध्यापक छात्रों से बोध प्रश्न पूछेगा।छात्र पढ़ाए गए विषय के आधार पर सही उत्तर देंगे।सही उत्तर
भिन्न का जोड़ और घटाव के उदाहरणछात्राध्यापक श्यामपट्ट पर ‘भिन्न का जोड़ और घटाव’ से संबंधित कुछ उदाहरण और चित्र बनाकर हल करके दिखाएगा।छात्र उदाहरणों को अपनी अभ्यास पुस्तिका में उतारेंगे।हल किए गए उदाहरण
छात्र गतिविधि / सहभागिताछात्राध्यापक कक्षा को समूहों में बाँटकर ‘भिन्न का जोड़ और घटाव’ से संबंधित एक छोटी गतिविधि (Activity) करवाएगा।छात्र उत्साहपूर्वक गतिविधि में भाग लेंगे और सीखेंगे।गतिविधि का निष्कर्ष
श्यामपट्ट अभ्यास कार्यछात्राध्यापक छात्रों से कुछ प्रश्न पूछेगा और उन्हें श्यामपट्ट पर आकर हल करने के लिए आमंत्रित करेगा।छात्र निर्देशों का पालन करेंगे और श्यामपट्ट पर प्रश्नों को हल करेंगे।अभ्यास प्रश्न व हल

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. भिन्न का जोड़ और घटाव का मुख्य नियम या सूत्र क्या है?
  2. भिन्न का जोड़ और घटाव का एक उदाहरण दीजिए।
  3. श्यामपट्ट पर दिए गए प्रश्न को हल करके दिखाइए।

10. गृहकार्य (Homework):

सभी छात्र अपनी अभ्यास पुस्तिका में भिन्न का जोड़ और घटाव से संबंधित 5 प्रश्न घर से हल करके लाएंगे।

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D.El.Ed Maths Lesson Plan 23: पाठ योजना क्रमांक – 23

योजना प्रकार: D.El.Ed Maths Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 5
कालांश: ………………..
विषय: गणित (Mathematics)
प्रकरण: दशमलव संख्याएं (Decimal Numbers)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में गणित की जटिल संक्रियाओं के प्रति समझ और रुचि उत्पन्न करना।
  2. विद्यार्थियों में तार्किक, विश्लेषणात्मक एवं बौद्धिक क्षमता का विकास करना।
  3. विद्यार्थियों को दैनिक जीवन में गणितीय नियमों के महत्व से अवगत कराना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘दशमलव संख्याएं (Decimal Numbers)’ का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे तथा इसके नियमों को जान सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘दशमलव संख्याएं (Decimal Numbers)’ को समझ कर उसे अपने शब्दों में स्पष्ट कर सकेंगे और सूत्रों को समझ सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी ‘दशमलव संख्याएं (Decimal Numbers)’ से संबंधित ज्ञान का प्रयोग दैनिक जीवन की गणितीय समस्याओं को सुलझाने में कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी ‘दशमलव संख्याएं (Decimal Numbers)’ से संबंधित प्रश्नों को तेज़ी और शुद्धता से हल करने का कौशल प्राप्त कर सकेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी ‘दशमलव संख्याएं (Decimal Numbers)’ से संबंधित समस्याओं और गणितीय पहेलियों को हल करने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में ‘दशमलव संख्याएं (Decimal Numbers)’ और गणित विषय के प्रति सकारात्मक एवं तार्किक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

चॉक, डस्टर, लपेट फलक, संकेतक, ‘दशमलव संख्याएं (Decimal Numbers)’ से संबंधित आकर्षक चार्ट, आकृतियों के मॉडल, और फ़्लैश कार्ड्स।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

आगमन-निगमन विधि, समस्या समाधान विधि, और प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी जोड़, घटाव, गुणा और भाग जैसी सामान्य गणितीय संक्रियाओं के बारे में अच्छी जानकारी रखते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.बच्चों, जब आप अपने दोस्तों के साथ खेलते हैं, तो क्या आप चीजें बाँटते हैं?हाँ, बाँटते हैं।
2.अगर आपके पास एक सेब है और आपको इसे अपने दो दोस्तों में बराबर बाँटना है, तो क्या करेंगे?उसे आधा-आधा काटेंगे।
3.इस “आधे” हिस्से को या बाँटने की इस प्रक्रिया को हम गणित में किस रूप में लिखते हैं?भिन्न के रूप में / अलग-अलग रूप में।
4.इस तरह की जटिल संख्याओं और आकृतियों के माप का अध्ययन हम किस विषय में करते हैं?गणित में।
5.बच्चों, क्या आप ‘दशमलव संख्याएं (Decimal Numbers)’ के बारे में विस्तार से जानते हैं?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, आज हम गणित विषय के अंतर्गत ‘दशमलव संख्याएं (Decimal Numbers)’ के बारे में विस्तार से अध्ययन करेंगे और इसके नियमों को जानेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
विकासात्मक प्रश्नछात्राध्यापक ‘दशमलव संख्याएं (Decimal Numbers)’ से संबंधित पूर्व ज्ञान को मुख्य पाठ से जोड़ने के लिए 2-3 सरल प्रश्न पूछेगा।छात्र अपनी समझ के अनुसार उत्तर देने का प्रयास करेंगे।मुख्य बिंदु
दशमलव संख्याएं (Decimal Numbers) का स्पष्टीकरणछात्राध्यापक चार्ट व टीएलएम (TLM) की सहायता से ‘दशमलव संख्याएं (Decimal Numbers)’ की अवधारणा को स्पष्ट करेगा।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे तथा महत्वपूर्ण बिंदुओं को समझेंगे।‘दशमलव संख्याएं (Decimal Numbers)’ की परिभाषा
बोध प्रश्नपढ़ाए गए विषय की समझ जाँचने के लिए छात्राध्यापक छात्रों से बोध प्रश्न पूछेगा।छात्र पढ़ाए गए विषय के आधार पर सही उत्तर देंगे।सही उत्तर
दशमलव संख्याएं (Decimal Numbers) के उदाहरणछात्राध्यापक श्यामपट्ट पर ‘दशमलव संख्याएं (Decimal Numbers)’ से संबंधित कुछ उदाहरण और चित्र बनाकर हल करके दिखाएगा।छात्र उदाहरणों को अपनी अभ्यास पुस्तिका में उतारेंगे।हल किए गए उदाहरण
छात्र गतिविधि / सहभागिताछात्राध्यापक कक्षा को समूहों में बाँटकर ‘दशमलव संख्याएं (Decimal Numbers)’ से संबंधित एक छोटी गतिविधि (Activity) करवाएगा।छात्र उत्साहपूर्वक गतिविधि में भाग लेंगे और सीखेंगे।गतिविधि का निष्कर्ष
श्यामपट्ट अभ्यास कार्यछात्राध्यापक छात्रों से कुछ प्रश्न पूछेगा और उन्हें श्यामपट्ट पर आकर हल करने के लिए आमंत्रित करेगा।छात्र निर्देशों का पालन करेंगे और श्यामपट्ट पर प्रश्नों को हल करेंगे।अभ्यास प्रश्न व हल

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. दशमलव संख्याएं (Decimal Numbers) का मुख्य नियम या सूत्र क्या है?
  2. दशमलव संख्याएं (Decimal Numbers) का एक उदाहरण दीजिए।
  3. श्यामपट्ट पर दिए गए प्रश्न को हल करके दिखाइए।

10. गृहकार्य (Homework):

सभी छात्र अपनी अभ्यास पुस्तिका में दशमलव संख्याएं (Decimal Numbers) से संबंधित 5 प्रश्न घर से हल करके लाएंगे।

Part of our 180+ free D.El.Ed / BSTC Maths Lesson Plans collection.

D.El.Ed Maths Lesson Plan 24: पाठ योजना क्रमांक – 24

योजना प्रकार: D.El.Ed Maths Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 4-5
कालांश: ………………..
विषय: गणित (Mathematics)
प्रकरण: आयत और वर्ग का परिमाप (Perimeter)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में गणित की जटिल संक्रियाओं के प्रति समझ और रुचि उत्पन्न करना।
  2. विद्यार्थियों में तार्किक, विश्लेषणात्मक एवं बौद्धिक क्षमता का विकास करना।
  3. विद्यार्थियों को दैनिक जीवन में गणितीय नियमों के महत्व से अवगत कराना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘आयत और वर्ग का परिमाप (Perimeter)’ का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे तथा इसके नियमों को जान सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘आयत और वर्ग का परिमाप (Perimeter)’ को समझ कर उसे अपने शब्दों में स्पष्ट कर सकेंगे और सूत्रों को समझ सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी ‘आयत और वर्ग का परिमाप (Perimeter)’ से संबंधित ज्ञान का प्रयोग दैनिक जीवन की गणितीय समस्याओं को सुलझाने में कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी ‘आयत और वर्ग का परिमाप (Perimeter)’ से संबंधित प्रश्नों को तेज़ी और शुद्धता से हल करने का कौशल प्राप्त कर सकेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी ‘आयत और वर्ग का परिमाप (Perimeter)’ से संबंधित समस्याओं और गणितीय पहेलियों को हल करने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में ‘आयत और वर्ग का परिमाप (Perimeter)’ और गणित विषय के प्रति सकारात्मक एवं तार्किक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

चॉक, डस्टर, लपेट फलक, संकेतक, ‘आयत और वर्ग का परिमाप (Perimeter)’ से संबंधित आकर्षक चार्ट, आकृतियों के मॉडल, और फ़्लैश कार्ड्स।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

आगमन-निगमन विधि, समस्या समाधान विधि, और प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी जोड़, घटाव, गुणा और भाग जैसी सामान्य गणितीय संक्रियाओं के बारे में अच्छी जानकारी रखते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.बच्चों, जब आप अपने दोस्तों के साथ खेलते हैं, तो क्या आप चीजें बाँटते हैं?हाँ, बाँटते हैं।
2.अगर आपके पास एक सेब है और आपको इसे अपने दो दोस्तों में बराबर बाँटना है, तो क्या करेंगे?उसे आधा-आधा काटेंगे।
3.इस “आधे” हिस्से को या बाँटने की इस प्रक्रिया को हम गणित में किस रूप में लिखते हैं?भिन्न के रूप में / अलग-अलग रूप में।
4.इस तरह की जटिल संख्याओं और आकृतियों के माप का अध्ययन हम किस विषय में करते हैं?गणित में।
5.बच्चों, क्या आप ‘आयत और वर्ग का परिमाप (Perimeter)’ के बारे में विस्तार से जानते हैं?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, आज हम गणित विषय के अंतर्गत ‘आयत और वर्ग का परिमाप (Perimeter)’ के बारे में विस्तार से अध्ययन करेंगे और इसके नियमों को जानेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
विकासात्मक प्रश्नछात्राध्यापक ‘आयत और वर्ग का परिमाप (Perimeter)’ से संबंधित पूर्व ज्ञान को मुख्य पाठ से जोड़ने के लिए 2-3 सरल प्रश्न पूछेगा।छात्र अपनी समझ के अनुसार उत्तर देने का प्रयास करेंगे।मुख्य बिंदु
आयत और वर्ग का परिमाप (Perimeter) का स्पष्टीकरणछात्राध्यापक चार्ट व टीएलएम (TLM) की सहायता से ‘आयत और वर्ग का परिमाप (Perimeter)’ की अवधारणा को स्पष्ट करेगा।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे तथा महत्वपूर्ण बिंदुओं को समझेंगे।‘आयत और वर्ग का परिमाप (Perimeter)’ की परिभाषा
बोध प्रश्नपढ़ाए गए विषय की समझ जाँचने के लिए छात्राध्यापक छात्रों से बोध प्रश्न पूछेगा।छात्र पढ़ाए गए विषय के आधार पर सही उत्तर देंगे।सही उत्तर
आयत और वर्ग का परिमाप (Perimeter) के उदाहरणछात्राध्यापक श्यामपट्ट पर ‘आयत और वर्ग का परिमाप (Perimeter)’ से संबंधित कुछ उदाहरण और चित्र बनाकर हल करके दिखाएगा।छात्र उदाहरणों को अपनी अभ्यास पुस्तिका में उतारेंगे।हल किए गए उदाहरण
छात्र गतिविधि / सहभागिताछात्राध्यापक कक्षा को समूहों में बाँटकर ‘आयत और वर्ग का परिमाप (Perimeter)’ से संबंधित एक छोटी गतिविधि (Activity) करवाएगा।छात्र उत्साहपूर्वक गतिविधि में भाग लेंगे और सीखेंगे।गतिविधि का निष्कर्ष
श्यामपट्ट अभ्यास कार्यछात्राध्यापक छात्रों से कुछ प्रश्न पूछेगा और उन्हें श्यामपट्ट पर आकर हल करने के लिए आमंत्रित करेगा।छात्र निर्देशों का पालन करेंगे और श्यामपट्ट पर प्रश्नों को हल करेंगे।अभ्यास प्रश्न व हल

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. आयत और वर्ग का परिमाप (Perimeter) का मुख्य नियम या सूत्र क्या है?
  2. आयत और वर्ग का परिमाप (Perimeter) का एक उदाहरण दीजिए।
  3. श्यामपट्ट पर दिए गए प्रश्न को हल करके दिखाइए।

10. गृहकार्य (Homework):

सभी छात्र अपनी अभ्यास पुस्तिका में आयत और वर्ग का परिमाप (Perimeter) से संबंधित 5 प्रश्न घर से हल करके लाएंगे।

Part of our 180+ free D.El.Ed / BSTC Maths Lesson Plans collection.

D.El.Ed Maths Lesson Plan 25: पाठ योजना क्रमांक – 25

योजना प्रकार: D.El.Ed Maths Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 5
कालांश: ………………..
विषय: गणित (Mathematics)
प्रकरण: आयत और वर्ग का क्षेत्रफल (Area)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में गणित की जटिल संक्रियाओं के प्रति समझ और रुचि उत्पन्न करना।
  2. विद्यार्थियों में तार्किक, विश्लेषणात्मक एवं बौद्धिक क्षमता का विकास करना।
  3. विद्यार्थियों को दैनिक जीवन में गणितीय नियमों के महत्व से अवगत कराना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘आयत और वर्ग का क्षेत्रफल (Area)’ का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे तथा इसके नियमों को जान सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘आयत और वर्ग का क्षेत्रफल (Area)’ को समझ कर उसे अपने शब्दों में स्पष्ट कर सकेंगे और सूत्रों को समझ सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी ‘आयत और वर्ग का क्षेत्रफल (Area)’ से संबंधित ज्ञान का प्रयोग दैनिक जीवन की गणितीय समस्याओं को सुलझाने में कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी ‘आयत और वर्ग का क्षेत्रफल (Area)’ से संबंधित प्रश्नों को तेज़ी और शुद्धता से हल करने का कौशल प्राप्त कर सकेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी ‘आयत और वर्ग का क्षेत्रफल (Area)’ से संबंधित समस्याओं और गणितीय पहेलियों को हल करने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में ‘आयत और वर्ग का क्षेत्रफल (Area)’ और गणित विषय के प्रति सकारात्मक एवं तार्किक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

चॉक, डस्टर, लपेट फलक, संकेतक, ‘आयत और वर्ग का क्षेत्रफल (Area)’ से संबंधित आकर्षक चार्ट, आकृतियों के मॉडल, और फ़्लैश कार्ड्स।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

आगमन-निगमन विधि, समस्या समाधान विधि, और प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी जोड़, घटाव, गुणा और भाग जैसी सामान्य गणितीय संक्रियाओं के बारे में अच्छी जानकारी रखते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.बच्चों, जब आप अपने दोस्तों के साथ खेलते हैं, तो क्या आप चीजें बाँटते हैं?हाँ, बाँटते हैं।
2.अगर आपके पास एक सेब है और आपको इसे अपने दो दोस्तों में बराबर बाँटना है, तो क्या करेंगे?उसे आधा-आधा काटेंगे।
3.इस “आधे” हिस्से को या बाँटने की इस प्रक्रिया को हम गणित में किस रूप में लिखते हैं?भिन्न के रूप में / अलग-अलग रूप में।
4.इस तरह की जटिल संख्याओं और आकृतियों के माप का अध्ययन हम किस विषय में करते हैं?गणित में।
5.बच्चों, क्या आप ‘आयत और वर्ग का क्षेत्रफल (Area)’ के बारे में विस्तार से जानते हैं?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, आज हम गणित विषय के अंतर्गत ‘आयत और वर्ग का क्षेत्रफल (Area)’ के बारे में विस्तार से अध्ययन करेंगे और इसके नियमों को जानेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
विकासात्मक प्रश्नछात्राध्यापक ‘आयत और वर्ग का क्षेत्रफल (Area)’ से संबंधित पूर्व ज्ञान को मुख्य पाठ से जोड़ने के लिए 2-3 सरल प्रश्न पूछेगा।छात्र अपनी समझ के अनुसार उत्तर देने का प्रयास करेंगे।मुख्य बिंदु
आयत और वर्ग का क्षेत्रफल (Area) का स्पष्टीकरणछात्राध्यापक चार्ट व टीएलएम (TLM) की सहायता से ‘आयत और वर्ग का क्षेत्रफल (Area)’ की अवधारणा को स्पष्ट करेगा।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे तथा महत्वपूर्ण बिंदुओं को समझेंगे।‘आयत और वर्ग का क्षेत्रफल (Area)’ की परिभाषा
बोध प्रश्नपढ़ाए गए विषय की समझ जाँचने के लिए छात्राध्यापक छात्रों से बोध प्रश्न पूछेगा।छात्र पढ़ाए गए विषय के आधार पर सही उत्तर देंगे।सही उत्तर
आयत और वर्ग का क्षेत्रफल (Area) के उदाहरणछात्राध्यापक श्यामपट्ट पर ‘आयत और वर्ग का क्षेत्रफल (Area)’ से संबंधित कुछ उदाहरण और चित्र बनाकर हल करके दिखाएगा।छात्र उदाहरणों को अपनी अभ्यास पुस्तिका में उतारेंगे।हल किए गए उदाहरण
छात्र गतिविधि / सहभागिताछात्राध्यापक कक्षा को समूहों में बाँटकर ‘आयत और वर्ग का क्षेत्रफल (Area)’ से संबंधित एक छोटी गतिविधि (Activity) करवाएगा।छात्र उत्साहपूर्वक गतिविधि में भाग लेंगे और सीखेंगे।गतिविधि का निष्कर्ष
श्यामपट्ट अभ्यास कार्यछात्राध्यापक छात्रों से कुछ प्रश्न पूछेगा और उन्हें श्यामपट्ट पर आकर हल करने के लिए आमंत्रित करेगा।छात्र निर्देशों का पालन करेंगे और श्यामपट्ट पर प्रश्नों को हल करेंगे।अभ्यास प्रश्न व हल

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. आयत और वर्ग का क्षेत्रफल (Area) का मुख्य नियम या सूत्र क्या है?
  2. आयत और वर्ग का क्षेत्रफल (Area) का एक उदाहरण दीजिए।
  3. श्यामपट्ट पर दिए गए प्रश्न को हल करके दिखाइए।

10. गृहकार्य (Homework):

सभी छात्र अपनी अभ्यास पुस्तिका में आयत और वर्ग का क्षेत्रफल (Area) से संबंधित 5 प्रश्न घर से हल करके लाएंगे।

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D.El.Ed Maths Lesson Plan 26: पाठ योजना क्रमांक – 26

योजना प्रकार: D.El.Ed Maths Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 2-4
कालांश: ………………..
विषय: गणित (Mathematics)
प्रकरण: पैटर्न की पहचान (Number & Shape Patterns)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में गणित की जटिल संक्रियाओं के प्रति समझ और रुचि उत्पन्न करना।
  2. विद्यार्थियों में तार्किक, विश्लेषणात्मक एवं बौद्धिक क्षमता का विकास करना।
  3. विद्यार्थियों को दैनिक जीवन में गणितीय नियमों के महत्व से अवगत कराना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘पैटर्न की पहचान (Number & Shape Patterns)’ का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे तथा इसके नियमों को जान सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘पैटर्न की पहचान (Number & Shape Patterns)’ को समझ कर उसे अपने शब्दों में स्पष्ट कर सकेंगे और सूत्रों को समझ सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी ‘पैटर्न की पहचान (Number & Shape Patterns)’ से संबंधित ज्ञान का प्रयोग दैनिक जीवन की गणितीय समस्याओं को सुलझाने में कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी ‘पैटर्न की पहचान (Number & Shape Patterns)’ से संबंधित प्रश्नों को तेज़ी और शुद्धता से हल करने का कौशल प्राप्त कर सकेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी ‘पैटर्न की पहचान (Number & Shape Patterns)’ से संबंधित समस्याओं और गणितीय पहेलियों को हल करने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में ‘पैटर्न की पहचान (Number & Shape Patterns)’ और गणित विषय के प्रति सकारात्मक एवं तार्किक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

चॉक, डस्टर, लपेट फलक, संकेतक, ‘पैटर्न की पहचान (Number & Shape Patterns)’ से संबंधित आकर्षक चार्ट, आकृतियों के मॉडल, और फ़्लैश कार्ड्स।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

आगमन-निगमन विधि, समस्या समाधान विधि, और प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी जोड़, घटाव, गुणा और भाग जैसी सामान्य गणितीय संक्रियाओं के बारे में अच्छी जानकारी रखते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.बच्चों, जब आप अपने दोस्तों के साथ खेलते हैं, तो क्या आप चीजें बाँटते हैं?हाँ, बाँटते हैं।
2.अगर आपके पास एक सेब है और आपको इसे अपने दो दोस्तों में बराबर बाँटना है, तो क्या करेंगे?उसे आधा-आधा काटेंगे।
3.इस “आधे” हिस्से को या बाँटने की इस प्रक्रिया को हम गणित में किस रूप में लिखते हैं?भिन्न के रूप में / अलग-अलग रूप में।
4.इस तरह की जटिल संख्याओं और आकृतियों के माप का अध्ययन हम किस विषय में करते हैं?गणित में।
5.बच्चों, क्या आप ‘पैटर्न की पहचान (Number & Shape Patterns)’ के बारे में विस्तार से जानते हैं?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, आज हम गणित विषय के अंतर्गत ‘पैटर्न की पहचान (Number & Shape Patterns)’ के बारे में विस्तार से अध्ययन करेंगे और इसके नियमों को जानेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
विकासात्मक प्रश्नछात्राध्यापक ‘पैटर्न की पहचान (Number & Shape Patterns)’ से संबंधित पूर्व ज्ञान को मुख्य पाठ से जोड़ने के लिए 2-3 सरल प्रश्न पूछेगा।छात्र अपनी समझ के अनुसार उत्तर देने का प्रयास करेंगे।मुख्य बिंदु
पैटर्न की पहचान (Number & Shape Patterns) का स्पष्टीकरणछात्राध्यापक चार्ट व टीएलएम (TLM) की सहायता से ‘पैटर्न की पहचान (Number & Shape Patterns)’ की अवधारणा को स्पष्ट करेगा।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे तथा महत्वपूर्ण बिंदुओं को समझेंगे।‘पैटर्न की पहचान (Number & Shape Patterns)’ की परिभाषा
बोध प्रश्नपढ़ाए गए विषय की समझ जाँचने के लिए छात्राध्यापक छात्रों से बोध प्रश्न पूछेगा।छात्र पढ़ाए गए विषय के आधार पर सही उत्तर देंगे।सही उत्तर
पैटर्न की पहचान (Number & Shape Patterns) के उदाहरणछात्राध्यापक श्यामपट्ट पर ‘पैटर्न की पहचान (Number & Shape Patterns)’ से संबंधित कुछ उदाहरण और चित्र बनाकर हल करके दिखाएगा।छात्र उदाहरणों को अपनी अभ्यास पुस्तिका में उतारेंगे।हल किए गए उदाहरण
छात्र गतिविधि / सहभागिताछात्राध्यापक कक्षा को समूहों में बाँटकर ‘पैटर्न की पहचान (Number & Shape Patterns)’ से संबंधित एक छोटी गतिविधि (Activity) करवाएगा।छात्र उत्साहपूर्वक गतिविधि में भाग लेंगे और सीखेंगे।गतिविधि का निष्कर्ष
श्यामपट्ट अभ्यास कार्यछात्राध्यापक छात्रों से कुछ प्रश्न पूछेगा और उन्हें श्यामपट्ट पर आकर हल करने के लिए आमंत्रित करेगा।छात्र निर्देशों का पालन करेंगे और श्यामपट्ट पर प्रश्नों को हल करेंगे।अभ्यास प्रश्न व हल

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. पैटर्न की पहचान (Number & Shape Patterns) का मुख्य नियम या सूत्र क्या है?
  2. पैटर्न की पहचान (Number & Shape Patterns) का एक उदाहरण दीजिए।
  3. श्यामपट्ट पर दिए गए प्रश्न को हल करके दिखाइए।

10. गृहकार्य (Homework):

सभी छात्र अपनी अभ्यास पुस्तिका में पैटर्न की पहचान (Number & Shape Patterns) से संबंधित 5 प्रश्न घर से हल करके लाएंगे।

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D.El.Ed Maths Lesson Plan 27: पाठ योजना क्रमांक – 27

योजना प्रकार: D.El.Ed Maths Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 5
कालांश: ………………..
विषय: गणित (Mathematics)
प्रकरण: गुणज और गुणनखंड (Factors & Multiples)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में गणित की जटिल संक्रियाओं के प्रति समझ और रुचि उत्पन्न करना।
  2. विद्यार्थियों में तार्किक, विश्लेषणात्मक एवं बौद्धिक क्षमता का विकास करना।
  3. विद्यार्थियों को दैनिक जीवन में गणितीय नियमों के महत्व से अवगत कराना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘गुणज और गुणनखंड (Factors & Multiples)’ का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे तथा इसके नियमों को जान सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘गुणज और गुणनखंड (Factors & Multiples)’ को समझ कर उसे अपने शब्दों में स्पष्ट कर सकेंगे और सूत्रों को समझ सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी ‘गुणज और गुणनखंड (Factors & Multiples)’ से संबंधित ज्ञान का प्रयोग दैनिक जीवन की गणितीय समस्याओं को सुलझाने में कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी ‘गुणज और गुणनखंड (Factors & Multiples)’ से संबंधित प्रश्नों को तेज़ी और शुद्धता से हल करने का कौशल प्राप्त कर सकेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी ‘गुणज और गुणनखंड (Factors & Multiples)’ से संबंधित समस्याओं और गणितीय पहेलियों को हल करने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में ‘गुणज और गुणनखंड (Factors & Multiples)’ और गणित विषय के प्रति सकारात्मक एवं तार्किक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

चॉक, डस्टर, लपेट फलक, संकेतक, ‘गुणज और गुणनखंड (Factors & Multiples)’ से संबंधित आकर्षक चार्ट, आकृतियों के मॉडल, और फ़्लैश कार्ड्स।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

आगमन-निगमन विधि, समस्या समाधान विधि, और प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी जोड़, घटाव, गुणा और भाग जैसी सामान्य गणितीय संक्रियाओं के बारे में अच्छी जानकारी रखते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.बच्चों, जब आप अपने दोस्तों के साथ खेलते हैं, तो क्या आप चीजें बाँटते हैं?हाँ, बाँटते हैं।
2.अगर आपके पास एक सेब है और आपको इसे अपने दो दोस्तों में बराबर बाँटना है, तो क्या करेंगे?उसे आधा-आधा काटेंगे।
3.इस “आधे” हिस्से को या बाँटने की इस प्रक्रिया को हम गणित में किस रूप में लिखते हैं?भिन्न के रूप में / अलग-अलग रूप में।
4.इस तरह की जटिल संख्याओं और आकृतियों के माप का अध्ययन हम किस विषय में करते हैं?गणित में।
5.बच्चों, क्या आप ‘गुणज और गुणनखंड (Factors & Multiples)’ के बारे में विस्तार से जानते हैं?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, आज हम गणित विषय के अंतर्गत ‘गुणज और गुणनखंड (Factors & Multiples)’ के बारे में विस्तार से अध्ययन करेंगे और इसके नियमों को जानेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
विकासात्मक प्रश्नछात्राध्यापक ‘गुणज और गुणनखंड (Factors & Multiples)’ से संबंधित पूर्व ज्ञान को मुख्य पाठ से जोड़ने के लिए 2-3 सरल प्रश्न पूछेगा।छात्र अपनी समझ के अनुसार उत्तर देने का प्रयास करेंगे।मुख्य बिंदु
गुणज और गुणनखंड (Factors & Multiples) का स्पष्टीकरणछात्राध्यापक चार्ट व टीएलएम (TLM) की सहायता से ‘गुणज और गुणनखंड (Factors & Multiples)’ की अवधारणा को स्पष्ट करेगा।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे तथा महत्वपूर्ण बिंदुओं को समझेंगे।‘गुणज और गुणनखंड (Factors & Multiples)’ की परिभाषा
बोध प्रश्नपढ़ाए गए विषय की समझ जाँचने के लिए छात्राध्यापक छात्रों से बोध प्रश्न पूछेगा।छात्र पढ़ाए गए विषय के आधार पर सही उत्तर देंगे।सही उत्तर
गुणज और गुणनखंड (Factors & Multiples) के उदाहरणछात्राध्यापक श्यामपट्ट पर ‘गुणज और गुणनखंड (Factors & Multiples)’ से संबंधित कुछ उदाहरण और चित्र बनाकर हल करके दिखाएगा।छात्र उदाहरणों को अपनी अभ्यास पुस्तिका में उतारेंगे।हल किए गए उदाहरण
छात्र गतिविधि / सहभागिताछात्राध्यापक कक्षा को समूहों में बाँटकर ‘गुणज और गुणनखंड (Factors & Multiples)’ से संबंधित एक छोटी गतिविधि (Activity) करवाएगा।छात्र उत्साहपूर्वक गतिविधि में भाग लेंगे और सीखेंगे।गतिविधि का निष्कर्ष
श्यामपट्ट अभ्यास कार्यछात्राध्यापक छात्रों से कुछ प्रश्न पूछेगा और उन्हें श्यामपट्ट पर आकर हल करने के लिए आमंत्रित करेगा।छात्र निर्देशों का पालन करेंगे और श्यामपट्ट पर प्रश्नों को हल करेंगे।अभ्यास प्रश्न व हल

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. गुणज और गुणनखंड (Factors & Multiples) का मुख्य नियम या सूत्र क्या है?
  2. गुणज और गुणनखंड (Factors & Multiples) का एक उदाहरण दीजिए।
  3. श्यामपट्ट पर दिए गए प्रश्न को हल करके दिखाइए।

10. गृहकार्य (Homework):

सभी छात्र अपनी अभ्यास पुस्तिका में गुणज और गुणनखंड (Factors & Multiples) से संबंधित 5 प्रश्न घर से हल करके लाएंगे।

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D.El.Ed Maths Lesson Plan 28: पाठ योजना क्रमांक – 28

योजना प्रकार: D.El.Ed Maths Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 3-5
कालांश: ………………..
विषय: गणित (Mathematics)
प्रकरण: स्मार्ट चार्ट (डेटा हैंडलिंग / चित्रआलेख)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में गणित की जटिल संक्रियाओं के प्रति समझ और रुचि उत्पन्न करना।
  2. विद्यार्थियों में तार्किक, विश्लेषणात्मक एवं बौद्धिक क्षमता का विकास करना।
  3. विद्यार्थियों को दैनिक जीवन में गणितीय नियमों के महत्व से अवगत कराना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘स्मार्ट चार्ट (डेटा हैंडलिंग / चित्रआलेख)’ का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे तथा इसके नियमों को जान सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘स्मार्ट चार्ट (डेटा हैंडलिंग / चित्रआलेख)’ को समझ कर उसे अपने शब्दों में स्पष्ट कर सकेंगे और सूत्रों को समझ सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी ‘स्मार्ट चार्ट (डेटा हैंडलिंग / चित्रआलेख)’ से संबंधित ज्ञान का प्रयोग दैनिक जीवन की गणितीय समस्याओं को सुलझाने में कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी ‘स्मार्ट चार्ट (डेटा हैंडलिंग / चित्रआलेख)’ से संबंधित प्रश्नों को तेज़ी और शुद्धता से हल करने का कौशल प्राप्त कर सकेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी ‘स्मार्ट चार्ट (डेटा हैंडलिंग / चित्रआलेख)’ से संबंधित समस्याओं और गणितीय पहेलियों को हल करने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में ‘स्मार्ट चार्ट (डेटा हैंडलिंग / चित्रआलेख)’ और गणित विषय के प्रति सकारात्मक एवं तार्किक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

चॉक, डस्टर, लपेट फलक, संकेतक, ‘स्मार्ट चार्ट (डेटा हैंडलिंग / चित्रआलेख)’ से संबंधित आकर्षक चार्ट, आकृतियों के मॉडल, और फ़्लैश कार्ड्स।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

आगमन-निगमन विधि, समस्या समाधान विधि, और प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी जोड़, घटाव, गुणा और भाग जैसी सामान्य गणितीय संक्रियाओं के बारे में अच्छी जानकारी रखते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.बच्चों, जब आप अपने दोस्तों के साथ खेलते हैं, तो क्या आप चीजें बाँटते हैं?हाँ, बाँटते हैं।
2.अगर आपके पास एक सेब है और आपको इसे अपने दो दोस्तों में बराबर बाँटना है, तो क्या करेंगे?उसे आधा-आधा काटेंगे।
3.इस “आधे” हिस्से को या बाँटने की इस प्रक्रिया को हम गणित में किस रूप में लिखते हैं?भिन्न के रूप में / अलग-अलग रूप में।
4.इस तरह की जटिल संख्याओं और आकृतियों के माप का अध्ययन हम किस विषय में करते हैं?गणित में।
5.बच्चों, क्या आप ‘स्मार्ट चार्ट (डेटा हैंडलिंग / चित्रआलेख)’ के बारे में विस्तार से जानते हैं?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, आज हम गणित विषय के अंतर्गत ‘स्मार्ट चार्ट (डेटा हैंडलिंग / चित्रआलेख)’ के बारे में विस्तार से अध्ययन करेंगे और इसके नियमों को जानेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
विकासात्मक प्रश्नछात्राध्यापक ‘स्मार्ट चार्ट (डेटा हैंडलिंग / चित्रआलेख)’ से संबंधित पूर्व ज्ञान को मुख्य पाठ से जोड़ने के लिए 2-3 सरल प्रश्न पूछेगा।छात्र अपनी समझ के अनुसार उत्तर देने का प्रयास करेंगे।मुख्य बिंदु
स्मार्ट चार्ट (डेटा हैंडलिंग / चित्रआलेख) का स्पष्टीकरणछात्राध्यापक चार्ट व टीएलएम (TLM) की सहायता से ‘स्मार्ट चार्ट (डेटा हैंडलिंग / चित्रआलेख)’ की अवधारणा को स्पष्ट करेगा।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे तथा महत्वपूर्ण बिंदुओं को समझेंगे।‘स्मार्ट चार्ट (डेटा हैंडलिंग / चित्रआलेख)’ की परिभाषा
बोध प्रश्नपढ़ाए गए विषय की समझ जाँचने के लिए छात्राध्यापक छात्रों से बोध प्रश्न पूछेगा।छात्र पढ़ाए गए विषय के आधार पर सही उत्तर देंगे।सही उत्तर
स्मार्ट चार्ट (डेटा हैंडलिंग / चित्रआलेख) के उदाहरणछात्राध्यापक श्यामपट्ट पर ‘स्मार्ट चार्ट (डेटा हैंडलिंग / चित्रआलेख)’ से संबंधित कुछ उदाहरण और चित्र बनाकर हल करके दिखाएगा।छात्र उदाहरणों को अपनी अभ्यास पुस्तिका में उतारेंगे।हल किए गए उदाहरण
छात्र गतिविधि / सहभागिताछात्राध्यापक कक्षा को समूहों में बाँटकर ‘स्मार्ट चार्ट (डेटा हैंडलिंग / चित्रआलेख)’ से संबंधित एक छोटी गतिविधि (Activity) करवाएगा।छात्र उत्साहपूर्वक गतिविधि में भाग लेंगे और सीखेंगे।गतिविधि का निष्कर्ष
श्यामपट्ट अभ्यास कार्यछात्राध्यापक छात्रों से कुछ प्रश्न पूछेगा और उन्हें श्यामपट्ट पर आकर हल करने के लिए आमंत्रित करेगा।छात्र निर्देशों का पालन करेंगे और श्यामपट्ट पर प्रश्नों को हल करेंगे।अभ्यास प्रश्न व हल

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. स्मार्ट चार्ट (डेटा हैंडलिंग / चित्रआलेख) का मुख्य नियम या सूत्र क्या है?
  2. स्मार्ट चार्ट (डेटा हैंडलिंग / चित्रआलेख) का एक उदाहरण दीजिए।
  3. श्यामपट्ट पर दिए गए प्रश्न को हल करके दिखाइए।

10. गृहकार्य (Homework):

सभी छात्र अपनी अभ्यास पुस्तिका में स्मार्ट चार्ट (डेटा हैंडलिंग / चित्रआलेख) से संबंधित 5 प्रश्न घर से हल करके लाएंगे।

Part of our 180+ free D.El.Ed / BSTC Maths Lesson Plans collection.

D.El.Ed Maths Lesson Plan 29: पाठ योजना क्रमांक – 29

योजना प्रकार: D.El.Ed Maths Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 5
कालांश: ………………..
विषय: गणित (Mathematics)
प्रकरण: भागों और पूरे का संबंध (तुल्य भिन्न)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में गणित की जटिल संक्रियाओं के प्रति समझ और रुचि उत्पन्न करना।
  2. विद्यार्थियों में तार्किक, विश्लेषणात्मक एवं बौद्धिक क्षमता का विकास करना।
  3. विद्यार्थियों को दैनिक जीवन में गणितीय नियमों के महत्व से अवगत कराना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘भागों और पूरे का संबंध (तुल्य भिन्न)’ का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे तथा इसके नियमों को जान सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘भागों और पूरे का संबंध (तुल्य भिन्न)’ को समझ कर उसे अपने शब्दों में स्पष्ट कर सकेंगे और सूत्रों को समझ सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी ‘भागों और पूरे का संबंध (तुल्य भिन्न)’ से संबंधित ज्ञान का प्रयोग दैनिक जीवन की गणितीय समस्याओं को सुलझाने में कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी ‘भागों और पूरे का संबंध (तुल्य भिन्न)’ से संबंधित प्रश्नों को तेज़ी और शुद्धता से हल करने का कौशल प्राप्त कर सकेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी ‘भागों और पूरे का संबंध (तुल्य भिन्न)’ से संबंधित समस्याओं और गणितीय पहेलियों को हल करने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में ‘भागों और पूरे का संबंध (तुल्य भिन्न)’ और गणित विषय के प्रति सकारात्मक एवं तार्किक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

चॉक, डस्टर, लपेट फलक, संकेतक, ‘भागों और पूरे का संबंध (तुल्य भिन्न)’ से संबंधित आकर्षक चार्ट, आकृतियों के मॉडल, और फ़्लैश कार्ड्स।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

आगमन-निगमन विधि, समस्या समाधान विधि, और प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी जोड़, घटाव, गुणा और भाग जैसी सामान्य गणितीय संक्रियाओं के बारे में अच्छी जानकारी रखते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.बच्चों, जब आप अपने दोस्तों के साथ खेलते हैं, तो क्या आप चीजें बाँटते हैं?हाँ, बाँटते हैं।
2.अगर आपके पास एक सेब है और आपको इसे अपने दो दोस्तों में बराबर बाँटना है, तो क्या करेंगे?उसे आधा-आधा काटेंगे।
3.इस “आधे” हिस्से को या बाँटने की इस प्रक्रिया को हम गणित में किस रूप में लिखते हैं?भिन्न के रूप में / अलग-अलग रूप में।
4.इस तरह की जटिल संख्याओं और आकृतियों के माप का अध्ययन हम किस विषय में करते हैं?गणित में।
5.बच्चों, क्या आप ‘भागों और पूरे का संबंध (तुल्य भिन्न)’ के बारे में विस्तार से जानते हैं?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, आज हम गणित विषय के अंतर्गत ‘भागों और पूरे का संबंध (तुल्य भिन्न)’ के बारे में विस्तार से अध्ययन करेंगे और इसके नियमों को जानेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
विकासात्मक प्रश्नछात्राध्यापक ‘भागों और पूरे का संबंध (तुल्य भिन्न)’ से संबंधित पूर्व ज्ञान को मुख्य पाठ से जोड़ने के लिए 2-3 सरल प्रश्न पूछेगा।छात्र अपनी समझ के अनुसार उत्तर देने का प्रयास करेंगे।मुख्य बिंदु
भागों और पूरे का संबंध (तुल्य भिन्न) का स्पष्टीकरणछात्राध्यापक चार्ट व टीएलएम (TLM) की सहायता से ‘भागों और पूरे का संबंध (तुल्य भिन्न)’ की अवधारणा को स्पष्ट करेगा।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे तथा महत्वपूर्ण बिंदुओं को समझेंगे।‘भागों और पूरे का संबंध (तुल्य भिन्न)’ की परिभाषा
बोध प्रश्नपढ़ाए गए विषय की समझ जाँचने के लिए छात्राध्यापक छात्रों से बोध प्रश्न पूछेगा।छात्र पढ़ाए गए विषय के आधार पर सही उत्तर देंगे।सही उत्तर
भागों और पूरे का संबंध (तुल्य भिन्न) के उदाहरणछात्राध्यापक श्यामपट्ट पर ‘भागों और पूरे का संबंध (तुल्य भिन्न)’ से संबंधित कुछ उदाहरण और चित्र बनाकर हल करके दिखाएगा।छात्र उदाहरणों को अपनी अभ्यास पुस्तिका में उतारेंगे।हल किए गए उदाहरण
छात्र गतिविधि / सहभागिताछात्राध्यापक कक्षा को समूहों में बाँटकर ‘भागों और पूरे का संबंध (तुल्य भिन्न)’ से संबंधित एक छोटी गतिविधि (Activity) करवाएगा।छात्र उत्साहपूर्वक गतिविधि में भाग लेंगे और सीखेंगे।गतिविधि का निष्कर्ष
श्यामपट्ट अभ्यास कार्यछात्राध्यापक छात्रों से कुछ प्रश्न पूछेगा और उन्हें श्यामपट्ट पर आकर हल करने के लिए आमंत्रित करेगा।छात्र निर्देशों का पालन करेंगे और श्यामपट्ट पर प्रश्नों को हल करेंगे।अभ्यास प्रश्न व हल

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. भागों और पूरे का संबंध (तुल्य भिन्न) का मुख्य नियम या सूत्र क्या है?
  2. भागों और पूरे का संबंध (तुल्य भिन्न) का एक उदाहरण दीजिए।
  3. श्यामपट्ट पर दिए गए प्रश्न को हल करके दिखाइए।

10. गृहकार्य (Homework):

सभी छात्र अपनी अभ्यास पुस्तिका में भागों और पूरे का संबंध (तुल्य भिन्न) से संबंधित 5 प्रश्न घर से हल करके लाएंगे।

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D.El.Ed Maths Lesson Plan 30: पाठ योजना क्रमांक – 30

योजना प्रकार: D.El.Ed Maths Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 4-5
कालांश: ………………..
विषय: गणित (Mathematics)
प्रकरण: गणितीय पहेलियाँ और दिमागी कसरत
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में गणित की जटिल संक्रियाओं के प्रति समझ और रुचि उत्पन्न करना।
  2. विद्यार्थियों में तार्किक, विश्लेषणात्मक एवं बौद्धिक क्षमता का विकास करना।
  3. विद्यार्थियों को दैनिक जीवन में गणितीय नियमों के महत्व से अवगत कराना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘गणितीय पहेलियाँ और दिमागी कसरत’ का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे तथा इसके नियमों को जान सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘गणितीय पहेलियाँ और दिमागी कसरत’ को समझ कर उसे अपने शब्दों में स्पष्ट कर सकेंगे और सूत्रों को समझ सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी ‘गणितीय पहेलियाँ और दिमागी कसरत’ से संबंधित ज्ञान का प्रयोग दैनिक जीवन की गणितीय समस्याओं को सुलझाने में कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी ‘गणितीय पहेलियाँ और दिमागी कसरत’ से संबंधित प्रश्नों को तेज़ी और शुद्धता से हल करने का कौशल प्राप्त कर सकेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी ‘गणितीय पहेलियाँ और दिमागी कसरत’ से संबंधित समस्याओं और गणितीय पहेलियों को हल करने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में ‘गणितीय पहेलियाँ और दिमागी कसरत’ और गणित विषय के प्रति सकारात्मक एवं तार्किक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

चॉक, डस्टर, लपेट फलक, संकेतक, ‘गणितीय पहेलियाँ और दिमागी कसरत’ से संबंधित आकर्षक चार्ट, आकृतियों के मॉडल, और फ़्लैश कार्ड्स।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

आगमन-निगमन विधि, समस्या समाधान विधि, और प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी जोड़, घटाव, गुणा और भाग जैसी सामान्य गणितीय संक्रियाओं के बारे में अच्छी जानकारी रखते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.बच्चों, जब आप अपने दोस्तों के साथ खेलते हैं, तो क्या आप चीजें बाँटते हैं?हाँ, बाँटते हैं।
2.अगर आपके पास एक सेब है और आपको इसे अपने दो दोस्तों में बराबर बाँटना है, तो क्या करेंगे?उसे आधा-आधा काटेंगे।
3.इस “आधे” हिस्से को या बाँटने की इस प्रक्रिया को हम गणित में किस रूप में लिखते हैं?भिन्न के रूप में / अलग-अलग रूप में।
4.इस तरह की जटिल संख्याओं और आकृतियों के माप का अध्ययन हम किस विषय में करते हैं?गणित में।
5.बच्चों, क्या आप ‘गणितीय पहेलियाँ और दिमागी कसरत’ के बारे में विस्तार से जानते हैं?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, आज हम गणित विषय के अंतर्गत ‘गणितीय पहेलियाँ और दिमागी कसरत’ के बारे में विस्तार से अध्ययन करेंगे और इसके नियमों को जानेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
विकासात्मक प्रश्नछात्राध्यापक ‘गणितीय पहेलियाँ और दिमागी कसरत’ से संबंधित पूर्व ज्ञान को मुख्य पाठ से जोड़ने के लिए 2-3 सरल प्रश्न पूछेगा।छात्र अपनी समझ के अनुसार उत्तर देने का प्रयास करेंगे।मुख्य बिंदु
गणितीय पहेलियाँ और दिमागी कसरत का स्पष्टीकरणछात्राध्यापक चार्ट व टीएलएम (TLM) की सहायता से ‘गणितीय पहेलियाँ और दिमागी कसरत’ की अवधारणा को स्पष्ट करेगा।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे तथा महत्वपूर्ण बिंदुओं को समझेंगे।‘गणितीय पहेलियाँ और दिमागी कसरत’ की परिभाषा
बोध प्रश्नपढ़ाए गए विषय की समझ जाँचने के लिए छात्राध्यापक छात्रों से बोध प्रश्न पूछेगा।छात्र पढ़ाए गए विषय के आधार पर सही उत्तर देंगे।सही उत्तर
गणितीय पहेलियाँ और दिमागी कसरत के उदाहरणछात्राध्यापक श्यामपट्ट पर ‘गणितीय पहेलियाँ और दिमागी कसरत’ से संबंधित कुछ उदाहरण और चित्र बनाकर हल करके दिखाएगा।छात्र उदाहरणों को अपनी अभ्यास पुस्तिका में उतारेंगे।हल किए गए उदाहरण
छात्र गतिविधि / सहभागिताछात्राध्यापक कक्षा को समूहों में बाँटकर ‘गणितीय पहेलियाँ और दिमागी कसरत’ से संबंधित एक छोटी गतिविधि (Activity) करवाएगा।छात्र उत्साहपूर्वक गतिविधि में भाग लेंगे और सीखेंगे।गतिविधि का निष्कर्ष
श्यामपट्ट अभ्यास कार्यछात्राध्यापक छात्रों से कुछ प्रश्न पूछेगा और उन्हें श्यामपट्ट पर आकर हल करने के लिए आमंत्रित करेगा।छात्र निर्देशों का पालन करेंगे और श्यामपट्ट पर प्रश्नों को हल करेंगे।अभ्यास प्रश्न व हल

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. गणितीय पहेलियाँ और दिमागी कसरत का मुख्य नियम या सूत्र क्या है?
  2. गणितीय पहेलियाँ और दिमागी कसरत का एक उदाहरण दीजिए।
  3. श्यामपट्ट पर दिए गए प्रश्न को हल करके दिखाइए।

10. गृहकार्य (Homework):

सभी छात्र अपनी अभ्यास पुस्तिका में गणितीय पहेलियाँ और दिमागी कसरत से संबंधित 5 प्रश्न घर से हल करके लाएंगे।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. D.El.Ed / BSTC के लिए गणित (Maths) लेसन प्लान कैसे बनाएं?

Ans: D.El.Ed/BSTC के लिए गणित पाठ योजना बनाते समय ‘हर्बर्ट की पंचपदीय प्रणाली’ (Herbartian Approach) का पालन करें। इसमें प्रस्तावना प्रश्न, उद्देश्य कथन, प्रस्तुतीकरण, पुनरावृत्ति और गृहकार्य शामिल होते हैं। गणित में सबसे महत्वपूर्ण भाग ‘गतिविधि’ (Activity) और ‘प्रयोग’ (Experiments) होता है।

Q2. क्या ये Maths लेसन प्लान्स (कक्षा 3 से 5) NCERT पाठ्यक्रम पर आधारित हैं?

Ans: जी हाँ, हमारे द्वारा उपलब्ध कराए गए सभी 30 Maths लेसन प्लान्स पूरी तरह से नवीनतम NCERT (गणित का जादू / Math Magic) और SCERT (RBSE, UPBTC) पाठ्यक्रम पर आधारित हैं। इन्हें DIET के मानकों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।

Q3. गणित लेसन प्लान में प्रस्तावना प्रश्न (Introductory Questions) कैसे होने चाहिए?

Ans: गणित में प्रस्तावना प्रश्न हमेशा बच्चों के दैनिक जीवन और उनके ‘पूर्व ज्ञान’ (Previous Knowledge) से जुड़े होने चाहिए। अंतिम प्रश्न हमेशा समस्यात्मक (Problematic) होना चाहिए, जो सीधे आज के प्रकरण (Topic) से जुड़ता हो।

Q4. मैं कक्षा 1 और 2 के Maths लेसन प्लान्स कहाँ से प्राप्त कर सकता हूँ?

Ans: NCERT पाठ्यक्रम के अनुसार कक्षा 1 और 2 में गणित (Maths) की कोई अलग किताब नहीं होती है। बच्चों को गणित का ज्ञान भाषा (हिंदी/अंग्रेजी) और गणित के माध्यम से ही दिया जाता है। इसलिए Maths के लेसन प्लान्स कक्षा 3 से शुरू होते हैं।

Q5. How many Maths lesson plans are required for the D.El.Ed internship?

Ans: Usually, during the D.El.Ed / BSTC school internship, a student-teacher has to prepare 10 to 15 daily lesson plans specifically for Mathematics (Maths), along with other subjects like Hindi, Maths, and English.

Q6. Are these Maths lesson plans suitable for UP BTC and Haryana JBT?

Ans: Yes, absolutely! These Class 1 to 5 Maths lesson plans are based on the common primary syllabus and the Herbartian approach, making them 100% suitable for UP BTC, Haryana JBT, Rajasthan BSTC, and all other state D.El.Ed courses.

Q7. Where can I find D.El.Ed / BSTC Maths Lesson Plans PDF Download Free?

Ans: You can get the D.El.Ed / BSTC Maths Lesson Plans PDF Download Free directly from our website. We have provided dedicated PDF download buttons in every lesson plan section above.

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