B.Ed SST Lesson Plans: Internship सामाजिक विज्ञान पाठ योजना कक्षा 6, 7, 8, 9, 10

B.Ed SST Lesson Plan Download PDF (1-30 Activities)

कक्षा 6-8 के लिए 18 तथा कक्षा 9-10 के लिए 12 (कुल 30) सम्पूर्ण दैनिक पाठ योजनाएं (निर्मितवाद उपागम आधारित)

B.Ed SST Lesson Plan

📝 B.Ed SST Lesson Plans – प्रस्तावना व निर्देश

यह पेज बी.एड (B.Ed), डी.एल.एड (D.El.Ed), और बीटीसी (BTC) प्रशिक्षणार्थियों के लिए उच्च गुणवत्ता युक्त और पूर्णतः तैयार B.Ed SST Lesson Plan (सामाजिक विज्ञान पाठ योजना) का सबसे मुख्य संग्रह है। अध्यापन अभ्यास के दौरान एक बेहतरीन B.Ed SST Lesson Plan तैयार करना अनिवार्य होता है, और हमारी यह मार्गदर्शिका इस कार्य को आपके लिए अत्यंत सरल बनाती है।

चाहे आपको इतिहास (History), भूगोल (Geography), या राजनीति विज्ञान (Civics / Political Science) के प्रकरणों पर एक प्रभावशाली B.Ed SST Lesson Plan तैयार करना हो, यहाँ दिए गए सभी 30 दैनिक पाठ योजनाएं आपको प्रस्तावना प्रश्न, शिक्षण सहायक सामग्री, सामान्य व विशिष्ट उद्देश्य, प्रस्तुतीकरण प्रारूप, श्यामपट्ट कार्य, और मूल्यांकन प्रश्नों की पूर्ण जानकारी प्रदान करते हैं।

📋 B.Ed सामाजिक विज्ञान (SST) पाठ योजना अनुक्रमणिका (Index)

नीचे सभी 30 पाठ योजनाओं की विस्तृत अनुक्रमणिका सूची दी गई है। किसी भी पाठ योजना का प्रकरण (Topic) देखने के लिए “विवरण देखें” बटन पर क्लिक करें।

योजना सं.कक्षाउपविषय (Sub)पाठ योजना प्रकरण (Topic)त्वरित लिंक
1Class 6भूगोलसौरमंडल में पृथ्वी विवरण देखें
2Class 6भूगोलग्लोब: अक्षांश एवं देशांतर विवरण देखें
3Class 6राजनीति विज्ञानविविधता की समझ विवरण देखें
4Class 6राजनीति विज्ञानसरकार क्या है? विवरण देखें
5Class 6इतिहासक्या, कब, कहाँ और कैसे? (इतिहास के स्रोत) विवरण देखें
6Class 6इतिहासआरंभिक मानव की खोज में (शिकारी-खाद्य संग्राहक) विवरण देखें
7Class 7भूगोलपर्यावरण (Environment) विवरण देखें
8Class 7भूगोलहमारी पृथ्वी के अंदर (Interior of the Earth) विवरण देखें
9Class 7राजनीति विज्ञानसमानता (Equality) विवरण देखें
10Class 7राजनीति विज्ञानस्वास्थ्य में सरकार की भूमिका विवरण देखें
11Class 7इतिहासहजारों वर्षों के दौरान हुए परिवर्तनों की पड़ताल विवरण देखें
12Class 7इतिहासनए राजा और उनके राज्य (चोल साम्राज्य) विवरण देखें
13Class 7हमारे अतीत-IIदिल्ली के सुल्तान विवरण देखें
14Class 7हमारे अतीत-IIमुग़ल साम्राज्य विवरण देखें
15Class 7सामाजिक एवं राजनीतिक जीवन-IIसमानता (Equality) विवरण देखें
16Class 7सामाजिक एवं राजनीतिक जीवन-IIराज्य शासन कैसे काम करता है विवरण देखें
17Class 7हमारा पर्यावरणपर्यावरण (Environment) विवरण देखें
18Class 7हमारा पर्यावरणहमारी बदलती पृथ्वी (भूकंप और ज्वालामुखी) विवरण देखें
19Class 9भारत और समकालीन विश्व-Iफ्रांसीसी क्रांति (The French Revolution) विवरण देखें
20Class 9भारत और समकालीन विश्व-Iयूरोप में समाजवाद एवं रूसी क्रांति विवरण देखें
21Class 9भारत और समकालीन विश्व-Iनात्सीवाद और हिटलर का उदय विवरण देखें
22Class 9भारत और समकालीन विश्व-Iवन्य समाज और उपनिवेशवाद विवरण देखें
23Class 9भारत और समकालीन विश्व-Iआधुनिक विश्व में चरवाहे विवरण देखें
24Class 9लोकतांत्रिक राजनीति-Iलोकतंत्र क्या? लोकतंत्र क्यों? विवरण देखें
25Class 9लोकतांत्रिक राजनीति-Iसंविधान निर्माण (Constitutional Design) विवरण देखें
26Class 9लोकतांत्रिक राजनीति-Iचुनावी राजनीति (Electoral Politics) विवरण देखें
27Class 9लोकतांत्रिक राजनीति-Iसंस्थाओं का कामकाज (कार्यपालिका, न्यायपालिका) विवरण देखें
28Class 9समकालीन भारत-Iभारत – आकार और स्थिति विवरण देखें
29Class 9समकालीन भारत-Iअपवाह (Drainage System) विवरण देखें
30Class 9समकालीन भारत-Iजलवायु (Climate) – मौसम व जलवायु में अंतर विवरण देखें

गतिविधि क्रमांक-11: 18 B.Ed SST Lesson Plan (प्रथम ब्लॉक शिक्षण अभ्यास)

B.Ed SST Lesson Plan (Plans 1 to 18) for Classes 6, 7 and 8

B.Ed SST Lesson Plan 1: पाठ योजना क्रमांक – 1

दिनांक: ………………..
कक्षा: 6
कालांश: ………………..
योजना प्रकार: B.Ed SST Lesson Plan
विषय: सामाजिक विज्ञान
उपविषय: भूगोल
प्रकरण: सौरमंडल में पृथ्वी
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में भौगोलिक तथ्यों के प्रति रुचि जाग्रत करना।
  2. प्रकृति एवं ब्रह्मांड की रचना के प्रति वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास करना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी सौरमंडल के ग्रहों और सूर्य का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी तारे और ग्रह के बीच अंतर स्पष्ट कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी विभिन्न खगोलीय पिंडों (चंद्रमा, सूर्य) का अपने दैनिक जीवन में महत्व समझ सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी सौरमंडल का नामांकित चित्र (चार्ट) बना सकेंगे।

3. शिक्षण सहायक सामग्री:

सौरमंडल का रंगीन चार्ट, ग्लोब, चॉक, डस्टर, लपेट फलक, संकेतक।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

व्याख्यान-प्रदर्शन विधि, प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी सूर्य, चंद्रमा और तारों को आसमान में देखते हैं तथा उनके बारे में सामान्य जानकारी रखते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँ
1.हम दिन के समय आसमान में क्या देखते हैं?सूर्य।
2.रात के समय आसमान में क्या दिखाई देता है?चंद्रमा और तारे।
3.सूर्य, चंद्रमा और इन तारों को सम्मिलित रूप से क्या कहा जाता है?खगोलीय पिंड।
4.सूर्य, आठ ग्रह, उपग्रह और अन्य खगोलीय पिंड मिलकर क्या बनाते हैं?(समस्यात्मक)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, आज हम भूगोल में ‘सौरमंडल में पृथ्वी’ पाठ के अंतर्गत सौरमंडल के ग्रहों और खगोलीय पिंडों का विस्तार से अध्ययन करेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
खगोलीय पिंड व तारेछात्राध्यापक कथन: सूर्य, चंद्रमा तथा वे सभी वस्तुएं जो रात के समय आसमान में चमकती हैं, खगोलीय पिंड कहलाती हैं। कुछ खगोलीय पिंड बड़े आकार वाले तथा गर्म होते हैं। ये गैसों से बने होते हैं। इनके पास अपनी ऊष्मा तथा प्रकाश होता है, जिसे वे बड़ी मात्रा में उत्सर्जित करते हैं। इन खगोलीय पिंडों को तारा कहते हैं। सूर्य भी एक तारा है।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे तथा मुख्य बिंदु कॉपी में लिखेंगे।खगोलीय पिंड: सूर्य, चंद्रमा व अन्य चमकती वस्तुएं।
तारा: अपना प्रकाश व ऊष्मा। सूर्य एक तारा है।
सौरमंडल (Solar System)चार्ट प्रदर्शन: छात्राध्यापक सौरमंडल का चार्ट दिखाएगा।
छात्राध्यापक कथन: सूर्य, आठ ग्रह, उपग्रह तथा कुछ अन्य खगोलीय पिंड (जैसे क्षुद्रग्रह एवं उल्कापिंड) मिलकर सौरमंडल का निर्माण करते हैं। उसे हम ‘सौर परिवार’ का नाम देते हैं, जिसका मुखिया सूर्य है।
छात्र चार्ट को देखेंगे तथा ग्रहों के नाम पढ़ेंगे।सौर परिवार: सूर्य + 8 ग्रह + उपग्रह + क्षुद्रग्रह।
मुखिया: सूर्य।
ग्रह और पृथ्वीछात्राध्यापक कथन: कुछ खगोलीय पिंडों में अपना प्रकाश एवं ऊष्मा नहीं होती है। वे तारों के प्रकाश से प्रकाशित होते हैं। ऐसे पिंड ‘ग्रह’ (Planet) कहलाते हैं। हमारी पृथ्वी जिस पर हम रहते हैं, एक ग्रह है। यह अपना संपूर्ण प्रकाश एवं ऊष्मा सूर्य से प्राप्त करती है। सूर्य से दूरी के हिसाब से पृथ्वी तीसरा ग्रह है।छात्र ग्रह और तारे में अंतर समझेंगे।ग्रह: अपना प्रकाश नहीं होता।
पृथ्वी: 8 ग्रहों में से एक (तीसरा ग्रह)।

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. सौरमंडल का मुखिया कौन है?
  2. ग्रह और तारे में क्या अंतर है?
  3. सूर्य से दूरी के क्रम में पृथ्वी का कौन-सा स्थान है?

10. गृहकार्य (Homework):

सौरमंडल का स्वच्छ एवं नामांकित चित्र बनाइए तथा सभी आठ ग्रहों के नाम सूर्य से दूरी के क्रम में लिखिए।

📌 नोट: यह B.Ed SST Lesson Plan दैनिक पाठ योजना पुस्तिका के लिए पूरी तरह से तैयार है।

B.Ed SST Lesson Plan 2: पाठ योजना क्रमांक – 2

दिनांक: ………………..
कक्षा: 6
कालांश: ………………..
योजना प्रकार: B.Ed SST Lesson Plan
विषय: सामाजिक विज्ञान
उपविषय: भूगोल
प्रकरण: ग्लोब: अक्षांश एवं देशांतर
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में पृथ्वी के स्वरूप को समझने की रुचि उत्पन्न करना।
  2. भौगोलिक उपकरणों (ग्लोब/मानचित्र) के उपयोग का कौशल विकसित करना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ग्लोब, अक्षांश और देशांतर रेखाओं की परिभाषाओं का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी भूमध्य रेखा (विषुवत वृत्त) और प्रधान याम्योत्तर के महत्व को समझ सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी ग्लोब पर विभिन्न महाद्वीपों और महासागरों की स्थिति का पता लगा सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी अक्षांश और देशांतर रेखाओं का चित्र बना सकेंगे।

3. शिक्षण सहायक सामग्री:

ग्लोब, विश्व का मानचित्र, चॉक, डस्टर, लपेट फलक।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रदर्शन विधि, व्याख्यान विधि, प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी पृथ्वी के आकार (गोल) और दिशाओं (उत्तर, दक्षिण, पूर्व, पश्चिम) के बारे में जानते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँ
1.हम किस ग्रह पर निवास करते हैं?पृथ्वी पर।
2.पृथ्वी का आकार कैसा है?गोल (गोलाकार)।
3.पूरी पृथ्वी को एक साथ कक्षा में देखने के लिए हम किस मॉडल का उपयोग करते हैं?ग्लोब का।
4.ग्लोब पर खींची गई आड़ी और खड़ी रेखाओं को क्या कहते हैं?(समस्यात्मक)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, आज हम ‘ग्लोब: अक्षांश एवं देशांतर’ के अंतर्गत पृथ्वी के मॉडल और उस पर खींची गई काल्पनिक रेखाओं का अध्ययन करेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
ग्लोब और विषुवत वृत्तप्रदर्शन: छात्राध्यापक ग्लोब दिखाएगा।
छात्राध्यापक कथन: ग्लोब पृथ्वी का लघु रूप में एक वास्तविक प्रतिरूप है। ग्लोब पर देशों, महाद्वीपों तथा महासागरों को उनके सही आकार में दिखाया जाता है। एक काल्पनिक रेखा जो ग्लोब को दो बराबर भागों में बांटती है, उसे ‘विषुवत वृत्त’ (Equator) या भूमध्य रेखा कहते हैं। पृथ्वी का आधा भाग ‘उत्तरी गोलार्ध’ और आधा ‘दक्षिणी गोलार्ध’ कहलाता है।
छात्र ग्लोब को देखेंगे और विषुवत वृत्त को पहचानेंगे।ग्लोब: पृथ्वी का वास्तविक मॉडल।
विषुवत वृत्त (0°): पृथ्वी को दो भागों में बांटता है।
अक्षांश (Latitude) रेखाएंछात्राध्यापक कथन: विषुवत वृत्त से ध्रुवों तक स्थित सभी समानांतर वृत्तों को अक्षांश (समानांतर) रेखाएं कहा जाता है। इन्हें अंश (डिग्री) में मापा जाता है। उत्तरी गोलार्ध में 23½° उत्तर को ‘कर्क रेखा’ और दक्षिणी गोलार्ध में 23½° दक्षिण को ‘मकर रेखा’ कहते हैं।छात्र कर्क और मकर रेखाओं के मान लिखेंगे।अक्षांश: आड़ी (क्षैतिज) काल्पनिक रेखाएं।
कर्क रेखा: 23½° उ.
मकर रेखा: 23½° द.
देशांतर (Longitude) रेखाएंछात्राध्यापक कथन: उत्तरी ध्रुव को दक्षिणी ध्रुव से जोड़ने वाली संदर्भ रेखाओं को ‘देशांतर रेखाएं’ (या याम्योत्तर) कहते हैं। इंग्लैंड के ग्रीनविच से गुजरने वाली रेखा को ‘प्रमुख याम्योत्तर’ (0° देशांतर) कहते हैं। देशांतर रेखाओं का उपयोग समय ज्ञात करने में किया जाता है।छात्र देशांतर और प्रमुख याम्योत्तर का महत्व समझेंगे।देशांतर: खड़ी (ऊर्ध्वाधर) रेखाएं।
प्रमुख याम्योत्तर: 0° (ग्रीनविच)।

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. ग्लोब किसे कहते हैं?
  2. विषुवत वृत्त पृथ्वी को किन दो गोलार्धों में बांटता है?
  3. कर्क रेखा का अक्षांशीय मान क्या है?

10. गृहकार्य (Homework):

पृथ्वी का एक गोलाकार चित्र बनाइए और उसमें विषुवत वृत्त, कर्क रेखा, मकर रेखा, उत्तरी ध्रुव और दक्षिणी ध्रुव को दर्शाइए।

📌 नोट: यह B.Ed SST Lesson Plan दैनिक पाठ योजना पुस्तिका के लिए पूरी तरह से तैयार है।

B.Ed SST Lesson Plan 3: पाठ योजना क्रमांक – 3

दिनांक: ………………..
कक्षा: 6
कालांश: ………………..
योजना प्रकार: B.Ed SST Lesson Plan
विषय: सामाजिक विज्ञान
उपविषय: राजनीति विज्ञान (नागरिक शास्त्र)
प्रकरण: विविधता की समझ
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में सामाजिक सद्भाव और सहिष्णुता की भावना विकसित करना।
  2. भारतीय समाज की विशेषताओं से अवगत कराना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘विविधता’ (Diversity) शब्द का अर्थ जान सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी भारत में पाई जाने वाली भाषाई और धार्मिक विविधताओं को समझ सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी अपने आस-पास के परिवेश में विविधता के उदाहरण खोज सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी ‘विविधता में एकता’ को दर्शाने वाली एक सूची तैयार कर सकेंगे।

3. शिक्षण सहायक सामग्री:

भारत के विभिन्न राज्यों की वेशभूषा व त्योहारों को दर्शाने वाला चार्ट, चॉक, डस्टर।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

व्याख्यान विधि, दृष्टांत (उदाहरण) विधि, प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी यह जानते हैं कि कक्षा में सभी बच्चे एक जैसे नहीं दिखते और अलग-अलग त्योहार मनाते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँ
1.क्या आपकी कक्षा के सभी बच्चों की शक्ल-सूरत एक जैसी है?नहीं, सबकी अलग-अलग है।
2.आप लोग घर पर कौन-कौन से त्योहार मनाते हैं?दिवाली, ईद, क्रिसमस, होली आदि।
3.क्या सभी लोग एक ही भाषा बोलते हैं?नहीं, कोई हिन्दी, कोई पंजाबी, कोई मारवाड़ी बोलता है।
4.रहन-सहन, खान-पान, भाषा और धर्म के इस अंतर को हम क्या कहते हैं?(समस्यात्मक)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, आज हम नागरिक शास्त्र में ‘विविधता की समझ’ पाठ के अंतर्गत भारत में मौजूद विविधता और ‘विविधता में एकता’ का अध्ययन करेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
विविधता का अर्थछात्राध्यापक कथन: जब लोग अलग-अलग धर्मों का पालन करते हैं, अलग-अलग भाषाएं बोलते हैं, उनके त्योहार, खान-पान, पहनावा और शारीरिक बनावट अलग होती है, तो इसी भिन्नता को ‘विविधता’ (Diversity) कहते हैं। विविधता हमारे जीवन को रोचक और रंगीन बनाती है।छात्र विविधता का अर्थ सुनेंगे व समझेंगे।विविधता: भाषा, धर्म, खान-पान, पहनावे में अंतर (भिन्नता)।
भारत में विविधताचार्ट प्रदर्शन: विभिन्न राज्यों की वेशभूषा दिखाना।
छात्राध्यापक कथन: भारत विविधताओं का देश है। यहाँ हर राज्य की अपनी अलग पहचान है। जैसे- पंजाब में भांगड़ा, गुजरात में गरबा; केरल में ओणम, तमिलनाडु में पोंगल। कोई चावल खाता है, तो कोई रोटी। इन सब के बावजूद हम सभी भारतवासी हैं।
छात्र भारत की विविधता के उदाहरणों पर ध्यान देंगे।भारत में विविधता:
अनेक धर्म, सैकड़ों भाषाएं, विविध त्योहार और वेशभूषा।
विविधता में एकताछात्राध्यापक कथन: भारत की विविधता ही उसकी ताकत है। जब अंग्रेजों का भारत पर राज़ था, तो विभिन्न धर्म, भाषा और क्षेत्र की महिलाओं और पुरुषों ने अंग्रेजों के खिलाफ मिलकर लड़ाई लड़ी थी। ‘विविधता में एकता’ का विचार हमारे प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने अपनी पुस्तक ‘भारत की खोज’ (Discovery of India) में दिया था।छात्र एकता के महत्व को समझेंगे।विविधता में एकता:
अनेक भिन्नताओं के बावजूद हम सब एक हैं (भारतीय)।

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. विविधता से क्या आशय है?
  2. भारत में कौन-कौन सी विविधताएं देखने को मिलती हैं? (कोई दो बताइए)
  3. ‘विविधता में एकता’ का विचार किसने दिया था?

10. गृहकार्य (Homework):

अपने राज्य और भारत के किसी अन्य राज्य (जैसे केरल या असम) के बीच भोजन, त्योहार और कपड़ों के आधार पर अंतर बताते हुए एक सारणी बनाइए।

📌 नोट: यह B.Ed SST Lesson Plan दैनिक पाठ योजना पुस्तिका के लिए पूरी तरह से तैयार है।

B.Ed SST Lesson Plan 4: पाठ योजना क्रमांक – 4

दिनांक: ………………..
कक्षा: 6
कालांश: ………………..
योजना प्रकार: B.Ed SST Lesson Plan
विषय: सामाजिक विज्ञान
उपविषय: राजनीति विज्ञान (नागरिक शास्त्र)
प्रकरण: सरकार क्या है?
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में राजनीतिक चेतना और नागरिक कर्तव्यों का विकास करना।
  2. देश की शासन व्यवस्था को समझने की क्षमता विकसित करना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘सरकार’ (Government) शब्द की परिभाषा बता सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी सरकार के विभिन्न स्तरों (स्थानीय, राज्य, राष्ट्रीय) में अंतर स्पष्ट कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी दैनिक जीवन में सरकार द्वारा किए जाने वाले कार्यों (सड़क बनाना, अस्पताल) को पहचान सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी राजतंत्रीय और लोकतंत्रीय सरकार की तुलना कर सकेंगे।

3. शिक्षण सहायक सामग्री:

अखबार की कुछ कटिंग (जिसमें सरकार के कामों का ज़िक्र हो), चॉक, डस्टर।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

व्याख्यान विधि, चर्चा विधि, प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी समाचारों में प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, चुनाव और सरकार जैसे शब्द सुनते रहते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँ
1.हमारे गाँव या शहर में सड़कें और स्कूल कौन बनवाता है?सरपंच या सरकार।
2.देश में नियम और कानून कौन बनाता है?सरकार।
3.देश की रक्षा करने और फैसले लेने का काम किसका है?सरकार का।
4.वास्तव में यह ‘सरकार’ होती क्या है और इसके कितने स्तर होते हैं?(समस्यात्मक)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, आज हम नागरिक शास्त्र में ‘सरकार क्या है?’ पाठ के माध्यम से सरकार के कार्यों, स्तरों और प्रकारों का विस्तार से अध्ययन करेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
सरकार का अर्थ व कार्यछात्राध्यापक कथन: हर देश को विभिन्न निर्णय लेने एवं काम करने के लिए ‘सरकार’ की ज़रूरत होती है। सरकार देश के लिए कानून बनाती है, विवादों का निपटारा करती है (न्यायालय), गरीबों के लिए योजनाएं चलाती है, सीमा की सुरक्षा करती है और रेल-डाक जैसी सेवाएं प्रदान करती है।छात्र सरकार के कार्य सुनेंगे।सरकार के कार्य: कानून बनाना, सुरक्षा करना, जन-कल्याण (सड़क, बिजली, पानी)।
सरकार के स्तर (Levels)छात्राध्यापक कथन: भारत बहुत बड़ा देश है, इसलिए सरकार एक जगह से पूरा इंतज़ाम नहीं कर सकती। इसलिए सरकार तीन स्तरों पर काम करती है: 1. स्थानीय स्तर (गाँव या शहर/नगरपालिका), 2. राज्य स्तर (पूरे राज्य के लिए, जैसे- राजस्थान सरकार), 3. राष्ट्रीय स्तर (पूरे देश के लिए, केंद्र सरकार/दिल्ली)।छात्र तीनों स्तरों के नाम अपनी कॉपी में लिखेंगे।सरकार के 3 स्तर:
1. स्थानीय स्तर
2. राज्य स्तर
3. राष्ट्रीय (केंद्र) स्तर
सरकार के प्रकारछात्राध्यापक कथन: सरकार मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है: 1. राजतन्त्र (Monarchy): जहाँ राजा या रानी के पास फैसले लेने की शक्ति होती है। 2. लोकतन्त्र (Democracy): जहाँ लोग खुद अपने नेता (प्रतिनिधि) चुनते हैं (वोट देकर) और वो नेता सरकार बनाते हैं। भारत एक लोकतांत्रिक देश है।छात्र राजतन्त्र और लोकतन्त्र में अंतर समझेंगे।प्रकार:
राजतन्त्र: राजा का शासन।
लोकतन्त्र: जनता द्वारा चुनी गई सरकार।

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. सरकार के कोई दो महत्वपूर्ण कार्य बताइए।
  2. भारत में सरकार कितने स्तरों पर कार्य करती है?
  3. लोकतांत्रिक सरकार किसे कहते हैं?

10. गृहकार्य (Homework):

राजतंत्रीय सरकार और लोकतांत्रिक सरकार में क्या अंतर है? स्पष्ट कीजिए।

📌 नोट: यह B.Ed SST Lesson Plan दैनिक पाठ योजना पुस्तिका के लिए पूरी तरह से तैयार है।

B.Ed SST Lesson Plan 5: पाठ योजना क्रमांक – 5

दिनांक: ………………..
कक्षा: 6
कालांश: ………………..
योजना प्रकार: B.Ed SST Lesson Plan
विषय: सामाजिक विज्ञान
उपविषय: इतिहास
प्रकरण: क्या, कब, कहाँ और कैसे? (इतिहास के स्रोत)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में ऐतिहासिक घटनाओं के प्रति रुचि एवं जिज्ञासा उत्पन्न करना।
  2. अतीत को जानने के साधनों से अवगत कराना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी पांडुलिपि (Manuscript) और अभिलेख (Inscription) का अर्थ जान सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी इतिहासकार और पुरातत्वविद् के बीच अंतर को समझ सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी अतीत को जानने के लिए पुरातात्विक स्रोतों के महत्व को पहचान सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी इतिहास के विभिन्न स्रोतों की सूची तैयार कर सकेंगे।

3. शिक्षण सहायक सामग्री:

पांडुलिपि और अभिलेख के चित्र (या चार्ट), पुराने सिक्के या बर्तन के चित्र, चॉक, डस्टर।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

व्याख्यान विधि, दृष्टांत विधि, प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी जानते हैं कि जो समय बीत गया है उसे भूतकाल (अतीत) कहते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँ
1.कल क्या हुआ था, यह हम कैसे जान सकते हैं?अखबार पढ़कर, टीवी देखकर।
2.50 या 100 साल पहले क्या हुआ था, यह कैसे जानेंगे?किताबें पढ़कर या दादा-दादी से सुनकर।
3.लेकिन हज़ारों साल पहले लोग कैसे रहते थे, क्या खाते थे, यह कैसे जाना जाता है?इतिहास पढ़कर।
4.हज़ारों साल पुराने इतिहास को जानने के स्रोत (साधन) क्या-क्या हैं?(समस्यात्मक)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, आज हम इतिहास के पहले अध्याय ‘क्या, कब, कहाँ और कैसे?’ के अंतर्गत अतीत को जानने के स्रोतों का विस्तार से अध्ययन करेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
पांडुलिपियां (Manuscripts)छात्राध्यापक कथन: अतीत में पुस्तकें हाथ से लिखी जाती थीं, इसलिए इन्हें ‘पांडुलिपि’ कहा जाता है (लैटिन शब्द ‘मेन्यू’ का अर्थ है हाथ)। ये पांडुलिपियां ताड़पत्रों अथवा हिमालय क्षेत्र में उगने वाले भूर्ज नामक पेड़ की छाल से विशेष रूप से तैयार भोजपत्र पर लिखी जाती थीं।छात्र पांडुलिपि का अर्थ समझेंगे।पांडुलिपि: हाथ से लिखी गई पुस्तकें।
किस पर: ताड़पत्र या भोजपत्र पर।
अभिलेख (Inscriptions)चित्र प्रदर्शन: पत्थर पर लिखे अभिलेख का चित्र।
छात्राध्यापक कथन: जब शासक या राजा अपने आदेशों, जीतों या कार्यों को पत्थर या धातु जैसी कठोर सतहों पर उत्कीर्ण (खोदकर लिखना) करवाते थे, तो उन्हें अभिलेख कहते हैं। ये पांडुलिपियों से ज़्यादा सुरक्षित रहते हैं क्योंकि पत्थर आसानी से नष्ट नहीं होता।
छात्र चित्र देखकर अभिलेख को समझेंगे।अभिलेख: पत्थर या धातु जैसी कठोर सतहों पर उत्कीर्ण लेख।
पुरातत्वविद् (Archaeologists)छात्राध्यापक कथन: जो लोग अतीत में बनी और प्रयोग में लाई गई वस्तुओं (जैसे- इमारतें, पत्थर, औज़ार, हथियार, बर्तन, सिक्के) का अध्ययन करते हैं, उन्हें पुरातत्वविद् कहते हैं। वे खुदाई करके भी पुरानी चीज़ें निकालते हैं। इतिहासकार वे होते हैं जो इन स्रोतों का उपयोग करके इतिहास लिखते हैं।छात्र पुरातत्वविद् का कार्य सुनेंगे।पुरातत्वविद्: पुरानी वस्तुओं (बर्तन, औज़ार, सिक्के, इमारतें) का अध्ययन करने वाले।

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. पांडुलिपियां किस पर लिखी जाती थीं?
  2. अभिलेख और पांडुलिपि में क्या अंतर है?
  3. पुरातत्वविद् किसे कहते हैं?

10. गृहकार्य (Homework):

अतीत को जानने के प्रमुख स्रोतों के नाम लिखिए और बताइए कि पांडुलिपियों को सुरक्षित रखना कठिन क्यों था?

📌 नोट: यह B.Ed SST Lesson Plan दैनिक पाठ योजना पुस्तिका के लिए पूरी तरह से तैयार है।

B.Ed SST Lesson Plan 6: पाठ योजना क्रमांक – 6

दिनांक: ………………..
कक्षा: 6
कालांश: ………………..
योजना प्रकार: B.Ed SST Lesson Plan
विषय: सामाजिक विज्ञान
उपविषय: इतिहास
प्रकरण: आरंभिक मानव की खोज में (शिकारी-खाद्य संग्राहक)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में मानव सभ्यता के विकास के प्रति समझ विकसित करना।
  2. प्रारंभिक मानव के जीवन-संघर्ष से अवगत कराना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘आखेटक-खाद्य संग्राहक’ शब्द का अर्थ बता सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी आरंभिक मानव द्वारा उपयोग किए गए पत्थर के औज़ारों के महत्व को समझ सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी आग की खोज के बाद मानव जीवन में आए परिवर्तनों को बता सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी पुरापाषाण काल के औज़ारों का चित्र बना सकेंगे।

3. शिक्षण सहायक सामग्री:

पत्थर के औज़ारों का चित्र (चार्ट), गुफा-चित्रकला का चित्र, चॉक, डस्टर, लपेट फलक।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

कहानी-कथन विधि, चित्र प्रदर्शन, प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी यह जानते हैं कि पुराने समय में मनुष्य जंगलों में रहता था और जानवरों का शिकार करता था।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँ
1.हमें भूख लगने पर हम भोजन कहाँ से लाते हैं?रसोईघर से या बाज़ार से।
2.लाखों साल पहले जब बाज़ार नहीं थे, तब आदिमानव क्या खाता था?जानवरों का मांस, फल, जड़ें आदि।
3.आदिमानव जानवरों को कैसे मारता था?हथियारों (औज़ारों) से।
4.आरंभिक मानव के औज़ार किस चीज़ के बने होते थे और उनका जीवन कैसा था?(समस्यात्मक)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, आज हम इतिहास में ‘आरंभिक मानव की खोज में’ पाठ के अंतर्गत उनके भोजन, औज़ारों और रहन-सहन के बारे में जानेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
आखेटक-खाद्य संग्राहकछात्राध्यापक कथन: 20 लाख साल पहले जो लोग उपमहाद्वीप में रहा करते थे, उन्हें हम ‘आखेटक-खाद्य संग्राहक’ (Hunter-gatherers) कहते हैं। आखेटक का अर्थ है शिकारी, और संग्राहक का अर्थ है इकट्ठा करने वाला। वे भोजन के लिए जंगली जानवरों का शिकार करते थे, और पेड़-पौधों के फल-फूल, जड़ें इकट्ठा करते थे। वे भोजन की तलाश में एक जगह से दूसरी जगह घूमते रहते थे।छात्र आखेटक-खाद्य संग्राहक का अर्थ समझेंगे।आखेटक = शिकारी
संग्राहक = इकट्ठा करने वाला।
जीवन: घुमक्कड़ (खानाबदोश)।
पत्थर के औज़ार (पाषाण युग)चित्र प्रदर्शन: पत्थर के औज़ारों का चित्र।
छात्राध्यापक कथन: उन लोगों ने अपने काम के लिए पत्थरों, लकड़ियों और हड्डियों के औज़ार बनाए। पत्थर के औज़ार सबसे अच्छे थे। इनका उपयोग मांस काटने, पेड़ों की छाल छीलने, और जानवरों की खाल उतारने के लिए किया जाता था। क्योंकि इस समय पत्थर का महत्व था, इसलिए इसे पाषाण काल (Stone Age) कहा जाता है।
छात्र औज़ारों के चित्र देखेंगे और उपयोग जानेंगे।औज़ार: पत्थर, लकड़ी और हड्डी के।
उपयोग: मांस काटना, छाल छीलना।
आग की खोज और गुफाएंछात्राध्यापक कथन: कुरनूल गुफाओं में राख के अवशेष मिले हैं, जिसका अर्थ है कि आरंभिक लोग आग जलाना सीख गए थे। आग का इस्तेमाल प्रकाश के लिए, मांस भूनने के लिए और खतरनाक जानवरों को भगाने के लिए किया जाता था। वे बारिश और धूप से बचने के लिए प्राकृतिक गुफाओं में रहते थे (जैसे भीमबेटका की गुफाएं, मध्य प्रदेश)।छात्र आग के उपयोग को ध्यान से सुनेंगे।आग का उपयोग: प्रकाश, मांस भूनना, सुरक्षा।
आवास: प्राकृतिक गुफाएं (भीमबेटका)।

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. आरंभिक मानव को ‘आखेटक-खाद्य संग्राहक’ क्यों कहा जाता है?
  2. आरंभिक मानव के औज़ार मुख्यतः किस चीज़ के बने होते थे?
  3. आग की खोज से मानव को क्या-क्या लाभ हुए? (कोई दो लाभ)

10. गृहकार्य (Homework):

आखेटक-खाद्य संग्राहक समुदाय के लोग एक जगह से दूसरी जगह पर क्यों घूमते रहते थे? कोई तीन कारण लिखिए।

📌 नोट: यह B.Ed SST Lesson Plan दैनिक पाठ योजना पुस्तिका के लिए पूरी तरह से तैयार है।

B.Ed SST Lesson Plan 7: पाठ योजना क्रमांक – 7

दिनांक: ………………..
कक्षा: 7
कालांश: ………………..
योजना प्रकार: B.Ed SST Lesson Plan
विषय: सामाजिक विज्ञान
उपविषय: भूगोल
प्रकरण: पर्यावरण (Environment)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना।
  2. प्रकृति और मानव के बीच संबंधों की समझ विकसित करना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘पर्यावरण’ की परिभाषा और इसके घटकों (Components) का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी प्राकृतिक पर्यावरण और मानव निर्मित पर्यावरण के बीच अंतर कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी अपने आस-पास के पर्यावरण में हो रहे बदलावों (जैसे प्रदूषण) को पहचान सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी पर्यावरण के विभिन्न परिमंडलों (स्थलमंडल, जलमंडल, वायुमंडल) का चार्ट बना सकेंगे।

3. शिक्षण सहायक सामग्री:

पर्यावरण के घटकों को दर्शाने वाला चार्ट, चॉक, डस्टर, लपेट फलक।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

व्याख्यान विधि, चर्चा विधि, प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी अपने आस-पास मौजूद पेड़-पौधों, इमारतों, वाहनों और जीव-जंतुओं से परिचित हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँ
1.हम साँस लेने के लिए किसका उपयोग करते हैं?हवा (वायु) का।
2.प्यास लगने पर हम क्या पीते हैं?पानी (जल)।
3.हवा, पानी, पेड़-पौधे, ज़मीन, स्कूल—ये सब कहाँ मौजूद हैं?हमारे आस-पास।
4.हमारे आस-पास मौजूद इन सभी प्राकृतिक और मानव निर्मित चीज़ों को मिलाकर क्या कहते हैं?(समस्यात्मक / पर्यावरण)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, आज हम भूगोल में ‘पर्यावरण’ पाठ के अंतर्गत पर्यावरण के अर्थ और उसके विभिन्न घटकों के बारे में विस्तार से अध्ययन करेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
पर्यावरण का अर्थछात्राध्यापक कथन: किसी भी जीवित प्राणी के चारों ओर पाए जाने वाले लोग, स्थान, वस्तुएं एवं प्रकृति को ‘पर्यावरण’ (Environment) कहते हैं। यह प्राकृतिक और मानव-निर्मित परिघटनाओं का मिश्रण है। पर्यावरण हमारे जीवन का मूल आधार है। यह हमें साँस लेने के लिए हवा, पीने के लिए जल, खाने के लिए भोजन और रहने के लिए भूमि प्रदान करता है।छात्र पर्यावरण की परिभाषा समझेंगे और लिखेंगे।पर्यावरण: हमारे चारों ओर का आवरण।
यह प्राकृतिक और मानव-निर्मित का मिश्रण है।
पर्यावरण के घटक (Components)चार्ट प्रदर्शन: पर्यावरण के घटकों का चार्ट।
छात्राध्यापक कथन: पर्यावरण के मुख्य रूप से 3 घटक होते हैं: 1. प्राकृतिक (हवा, जल, भूमि, सजीव)। 2. मानव-निर्मित (इमारतें, पार्क, पुल, सड़क, उद्योग)। 3. मानव (व्यक्ति, परिवार, समुदाय, धर्म, शिक्षा)।
छात्र चार्ट देखकर घटकों को समझेंगे।घटक:
1. प्राकृतिक (जल, वायु)
2. मानव-निर्मित (सड़क, पुल)
3. मानव (परिवार, समाज)
प्राकृतिक पर्यावरण (परिमंडल)छात्राध्यापक कथन: प्राकृतिक पर्यावरण में मुख्य परिमंडल हैं: 1. स्थलमंडल (Lithosphere – पृथ्वी की ठोस ऊपरी परत), 2. जलमंडल (Hydrosphere – जल के क्षेत्र जैसे नदी, समुद्र), 3. वायुमंडल (Atmosphere – पृथ्वी को घेरने वाली वायु की पतली परत), 4. जैवमंडल (Biosphere – जहाँ स्थल, जल और वायु मिलकर जीवन को संभव बनाते हैं)।छात्र चारों परिमंडलों के नाम सुनेंगे।परिमंडल: स्थलमंडल, जलमंडल, वायुमंडल, जैवमंडल।

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. पर्यावरण किसे कहते हैं?
  2. पर्यावरण के मानव-निर्मित घटकों के दो उदाहरण दीजिए।
  3. जैवमंडल (Biosphere) से आप क्या समझते हैं?

10. गृहकार्य (Homework):

अपने घर के आस-पास पाई जाने वाली किन्हीं 5 प्राकृतिक और 5 मानव-निर्मित चीज़ों की सूची बनाइए।

📌 नोट: यह B.Ed SST Lesson Plan दैनिक पाठ योजना पुस्तिका के लिए पूरी तरह से तैयार है।

B.Ed SST Lesson Plan 8: पाठ योजना क्रमांक – 8

दिनांक: ………………..
कक्षा: 7
कालांश: ………………..
योजना प्रकार: B.Ed SST Lesson Plan
विषय: सामाजिक विज्ञान
उपविषय: भूगोल
प्रकरण: हमारी पृथ्वी के अंदर (Interior of the Earth)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में पृथ्वी की आंतरिक संरचना को जानने की उत्सुकता पैदा करना।
  2. भौगोलिक परिवर्तनों के वैज्ञानिक कारणों को समझना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी पृथ्वी की तीन परतों (क्रस्ट, मेंटल, क्रोड) के नाम बता सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी शैल (Rock) और खनिज (Mineral) के बीच अंतर स्पष्ट कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी आग्नेय, अवसादी और कायांतरित शैलों के उदाहरणों (जैसे- संगमरमर) को पहचान सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी पृथ्वी की आंतरिक संरचना का नामांकित चित्र बना सकेंगे।

3. शिक्षण सहायक सामग्री:

एक उबला हुआ अंडा या प्याज (परतें समझाने हेतु), पृथ्वी की आंतरिक संरचना का चार्ट, चॉक, डस्टर।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रदर्शन विधि (दृष्टांत), व्याख्यान विधि, प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी जानते हैं कि हम पृथ्वी की सबसे ऊपरी सतह पर रहते हैं जहाँ मिट्टी और पत्थर पाए जाते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँ
1.हम सब किस ग्रह पर रहते हैं?पृथ्वी पर।
2.प्याज को छीलने पर उसमें क्या दिखाई देता है?परतें (Layers)।
3.क्या पृथ्वी के अंदर भी प्याज की तरह परतें होती हैं?(संभावित उत्तर) हाँ।
4.पृथ्वी के अंदर कौन-कौन सी परतें हैं और यह किससे बनी हैं?(समस्यात्मक)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, आज हम ‘हमारी पृथ्वी के अंदर’ पाठ के माध्यम से पृथ्वी की परतों और शैलों (चट्टानों) के बारे में अध्ययन करेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
पृथ्वी की परतेंप्रदर्शन: प्याज की परतें दिखाते हुए तुलना करना।
छात्राध्यापक कथन: पृथ्वी एक प्याज की तरह एक के ऊपर एक परतों से बनी है। सबसे ऊपरी ठोस परत को ‘पर्पटी’ (Crust) कहते हैं, यह सबसे पतली परत है। इसके नीचे ‘मेंटल’ (Mantle) है जो 2900 किमी गहराई तक है। सबसे अंदर की परत ‘क्रोड’ (Core) है जो निकल और लोहे (NiFe) से बनी है, यहाँ तापमान बहुत अधिक होता है।
छात्र परतों के नाम अपनी कॉपी में लिखेंगे।परतें:
1. पर्पटी (Crust)
2. मेंटल (Mantle)
3. क्रोड (Core) – NiFe.
शैल (Rocks)छात्राध्यापक कथन: पृथ्वी की पर्पटी बनाने वाले खनिज पदार्थ के किसी भी प्राकृतिक पिंड को शैल (चट्टान) कहते हैं। शैल मुख्य रूप से 3 प्रकार की होती हैं: 1. आग्नेय (Igneous) शैल – ये पिघले हुए मैग्मा के ठंडे होने से बनती हैं। इन्हें प्राथमिक शैल भी कहते हैं। 2. अवसादी (Sedimentary) शैल – ये कंकड़-पत्थर (अवसाद) के दबने से बनती हैं (जैसे- बलुआ पत्थर)।छात्र शैलों के प्रकार को समझेंगे।शैलों के प्रकार:
1. आग्नेय (मैग्मा से)
2. अवसादी (अवसादों से)
कायांतरित शैलछात्राध्यापक कथन: आग्नेय और अवसादी शैलें उच्च ताप और दाब के कारण कायांतरित (Metamorphic) शैलों में बदल जाती हैं। उदाहरण के लिए, चिकनी मिट्टी ‘स्लेट’ में और चूना पत्थर ‘संगमरमर’ में बदल जाता है। शैलों का उपयोग सड़क, घर और इमारतें बनाने में होता है (जैसे लाल किला बलुआ पत्थर से, ताज महल संगमरमर से)।छात्र कायांतरित शैल का उदाहरण सुनेंगे।3. कायांतरित शैल: उच्च ताप/दाब से बनती है।
चूना पत्थर → संगमरमर।

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. पृथ्वी की सबसे भीतरी (अंदर की) परत को क्या कहते हैं?
  2. प्राथमिक शैल किसे कहते हैं?
  3. ताजमहल किस प्रकार की शैल (चट्टान) से बना है?

10. गृहकार्य (Homework):

पृथ्वी की आंतरिक संरचना को दर्शाने वाला एक स्वच्छ और नामांकित चित्र बनाइए।

📌 नोट: यह B.Ed SST Lesson Plan दैनिक पाठ योजना पुस्तिका के लिए पूरी तरह से तैयार है।

B.Ed SST Lesson Plan 9: पाठ योजना क्रमांक – 9

दिनांक: ………………..
कक्षा: 7
कालांश: ………………..
योजना प्रकार: B.Ed SST Lesson Plan
विषय: सामाजिक विज्ञान
उपविषय: राजनीति विज्ञान (नागरिक शास्त्र)
प्रकरण: समानता (Equality)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति आस्था उत्पन्न करना।
  2. समाज में भेदभाव को मिटाने और समानता के महत्व को समझाना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार’ की परिभाषा बता सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी भारतीय संविधान में समानता के प्रावधानों को समझ सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी अपने आस-पास होने वाले असमानता (भेदभाव) के व्यवहार को पहचान सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी समानता पर एक स्लोगन या पोस्टर तैयार कर सकेंगे।

3. शिक्षण सहायक सामग्री:

मतदान केंद्र पर लगी लाइन का चित्र, संविधान की उद्देशिका (Preamble) का चार्ट, चॉक, डस्टर।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

कहानी-कथन विधि (ओमप्रकाश वाल्मीकि का उदाहरण), व्याख्यान विधि, प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी यह जानते हैं कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है जहाँ चुनाव होते हैं और वोट डाले जाते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँ
1.भारत में सरकार कौन चुनता है?जनता (लोग)।
2.जनता अपनी सरकार कैसे चुनती है?वोट (मत) देकर।
3.क्या वोट देने वाली लाइन में अमीर और गरीब अलग-अलग खड़े होते हैं?नहीं, सब एक ही लाइन में खड़े होते हैं।
4.एक ही लाइन में खड़े होना किस बात को दर्शाता है?(समस्यात्मक / समानता को)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, आज हम नागरिक शास्त्र में ‘समानता’ पाठ के अंतर्गत लोकतंत्र में समानता के महत्व और इसके विभिन्न रूपों का अध्ययन करेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
समानता और वयस्क मताधिकारछात्राध्यापक कथन: लोकतंत्र में समानता बहुत महत्वपूर्ण है। भारत में ‘सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार’ लागू है, जिसका अर्थ है कि 18 वर्ष या उससे अधिक आयु के सभी नागरिकों को वोट देने का समान अधिकार है, चाहे उनका धर्म, जाति, शिक्षा या अमीरी-गरीबी कुछ भी हो। यह राजनीतिक समानता को दर्शाता है।छात्र मताधिकार की आयु और अर्थ को समझेंगे।सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार: 18 वर्ष या अधिक आयु के सभी को वोट का समान अधिकार।
असमानता के अन्य रूपछात्राध्यापक कथन: वोट की समानता के बावजूद समाज में कई तरह की असमानताएं मौजूद हैं। जैसे- जाति व्यवस्था के आधार पर भेदभाव (ओमप्रकाश वाल्मीकि की कहानी—दलित होने के कारण स्कूल में झाड़ू लगवाना), धर्म के आधार पर भेदभाव (अंसारी दंपत्ति को मकान न मिलना)। जब किसी के साथ ऐसा होता है तो उसकी गरिमा (आत्मसम्मान) को ठेस पहुँचती है।छात्र भेदभाव की घटनाओं को ध्यानपूर्वक सुनेंगे।असमानता के कारण: जाति, धर्म, लिंग, अमीरी-गरीबी।
भेदभाव से गरिमा को ठेस पहुँचती है।
संविधान में समानताछात्राध्यापक कथन: भारतीय संविधान सभी व्यक्तियों को समान मानता है। कानून की नज़रों में हर व्यक्ति समान है। धर्म, जाति, लिंग या जन्म स्थान के आधार पर किसी से भेदभाव नहीं किया जा सकता। सरकार ने समानता लाने के लिए कानून बनाए हैं और कई योजनाएं चलाई हैं (जैसे स्कूलों में ‘मध्याह्न भोजन’ या Mid-day Meal योजना, जिससे सभी बच्चे साथ बैठकर खाना खाते हैं)।छात्र मिड-डे मील के फायदे समझेंगे।संविधान में समानता: कानून के समक्ष सब समान हैं।
योजना: मध्याह्न भोजन (Mid-day Meal)।

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार किसे कहते हैं?
  2. लोगों की गरिमा को ठेस कब पहुँचती है?
  3. मध्याह्न भोजन (Mid-day meal) योजना से समानता लाने में कैसे मदद मिली?

10. गृहकार्य (Homework):

भारतीय संविधान में समानता स्थापित करने के लिए कौन-कौन से प्रमुख प्रावधान किए गए हैं? संक्षेप में लिखिए।

📌 नोट: यह B.Ed SST Lesson Plan दैनिक पाठ योजना पुस्तिका के लिए पूरी तरह से तैयार है।

B.Ed SST Lesson Plan 10: पाठ योजना क्रमांक – 10

दिनांक: ………………..
कक्षा: 7
कालांश: ………………..
योजना प्रकार: B.Ed SST Lesson Plan
विषय: सामाजिक विज्ञान
उपविषय: राजनीति विज्ञान (नागरिक शास्त्र)
प्रकरण: स्वास्थ्य में सरकार की भूमिका
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों को लोक-कल्याणकारी राज्य के कर्तव्यों से अवगत कराना।
  2. स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता एवं जन-सुविधाओं की समझ विकसित करना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी स्वास्थ्य का व्यापक अर्थ (केवल बीमारी नहीं) बता सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी सार्वजनिक (सरकारी) और निजी (Private) स्वास्थ्य सेवाओं में अंतर कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी सरकारी अस्पतालों की समस्याओं और उनके महत्व को पहचान सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर चर्चा करने का कौशल प्राप्त करेंगे।

3. शिक्षण सहायक सामग्री:

सरकारी और निजी अस्पताल का चित्र, चॉक, डस्टर, लपेट फलक।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

व्याख्यान विधि, तुलनात्मक विधि, प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी बीमार होने पर डॉक्टर या अस्पताल जाने की सामान्य प्रक्रिया से भली-भाँति परिचित हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँ
1.जब हमें बुखार या चोट लगती है तो हम कहाँ जाते हैं?डॉक्टर के पास या अस्पताल।
2.गाँवों या शहरों में अस्पताल कौन बनवाता है?सरकार या प्राइवेट डॉक्टर।
3.जो अस्पताल सरकार चलाती है, उन्हें क्या कहते हैं?सरकारी अस्पताल (सार्वजनिक)।
4.नागरिकों को स्वास्थ्य सुविधाएं देना किसकी ज़िम्मेदारी है और स्वास्थ्य का अर्थ क्या है?(समस्यात्मक)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, आज हम नागरिक शास्त्र में ‘स्वास्थ्य में सरकार की भूमिका’ पाठ के अंतर्गत स्वास्थ्य सेवाओं के प्रकार और सरकार की ज़िम्मेदारी का अध्ययन करेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
स्वास्थ्य का अर्थछात्राध्यापक कथन: स्वास्थ्य का अर्थ सिर्फ बीमारियों या चोट से मुक्त रहना नहीं है। यदि लोगों को पीने के लिए साफ़ पानी, प्रदूषण-मुक्त वातावरण और भरपेट भोजन मिले, तो वे स्वस्थ रहेंगे। इसके विपरीत, गंदे पानी और कुपोषण से बीमारियां फैलती हैं। एक लोकतांत्रिक देश में सरकार का यह कर्तव्य है कि वह सभी को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराए।छात्र स्वास्थ्य का व्यापक अर्थ समझेंगे।स्वास्थ्य = बीमारी से आज़ादी + साफ पानी + अच्छा वातावरण + पोषण।
सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाएंछात्राध्यापक कथन: सार्वजनिक (सरकारी) स्वास्थ्य सेवाएं वे अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्र हैं जो सरकार द्वारा चलाए जाते हैं। ये शहरों से लेकर गाँवों तक फैले हैं। इनका मुख्य उद्देश्य बहुत कम कीमत पर या मुफ्त में अच्छी चिकित्सा देना है ताकि गरीब लोग भी इलाज करा सकें। टी.बी., मलेरिया, पोलियो जैसी बीमारियों को रोकना भी इनका काम है।छात्र सरकारी अस्पतालों के उद्देश्य को सुनेंगे।सार्वजनिक (सरकारी) सेवाएं: मुफ्त या कम खर्च में इलाज।
उद्देश्य: गरीबों तक पहुँच।
निजी स्वास्थ्य सेवाएंछात्राध्यापक कथन: निजी (Private) स्वास्थ्य सेवाएं वे हैं जो व्यक्ति या कंपनियों द्वारा चलाई जाती हैं (प्राइवेट अस्पताल, क्लिनिक, मेडिकल स्टोर)। यहाँ इलाज बहुत महँगा होता है, जो हर गरीब व्यक्ति नहीं उठा सकता। परंतु यहाँ सुविधाएं अच्छी होती हैं और भीड़ कम होती है। सरकार को चाहिए कि वह सार्वजनिक अस्पतालों को बेहतर बनाए।छात्र दोनों में तुलना (अंतर) को समझेंगे।निजी (Private) सेवाएं: महँगी लेकिन अधिक सुविधाएँ। सरकार का इन पर नियंत्रण नहीं होता।

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. स्वास्थ्य से आप क्या समझते हैं?
  2. सार्वजनिक (सरकारी) स्वास्थ्य सेवाओं का क्या महत्व है?
  3. सार्वजनिक और निजी स्वास्थ्य सेवाओं में एक मुख्य अंतर बताइए।

10. गृहकार्य (Homework):

आपके अनुसार सार्वजनिक (सरकारी) स्वास्थ्य सेवाओं (अस्पतालों) को बेहतर बनाने के लिए सरकार को क्या-क्या कदम उठाने चाहिए? दो सुझाव लिखिए।

📌 नोट: यह B.Ed SST Lesson Plan दैनिक पाठ योजना पुस्तिका के लिए पूरी तरह से तैयार है।

B.Ed SST Lesson Plan 11: पाठ योजना क्रमांक – 11

दिनांक: ………………..
कक्षा: 7
कालांश: ………………..
योजना प्रकार: B.Ed SST Lesson Plan
विषय: सामाजिक विज्ञान
उपविषय: इतिहास
प्रकरण: हजारों वर्षों के दौरान हुए परिवर्तनों की पड़ताल
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में ऐतिहासिक कालखंडों (विशेषकर मध्यकाल) की समझ विकसित करना।
  2. इतिहास के स्रोतों में समय के साथ हुए बदलावों से अवगत कराना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘मध्यकाल’ के समय (700 से 1750 ई.) का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी समय के साथ शब्दों के अर्थ और मानचित्रों में हुए बदलाव को समझ सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी पुराने इतिहास को जानने में अभिलेखागार (Archives) के महत्व को बता सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी पांडुलिपि प्रतिलिपिकरण (नकल करने) की कठिनाइयों पर चर्चा कर सकेंगे।

3. शिक्षण सहायक सामग्री:

अल-इदरीसी (1154 ई.) का पुराना मानचित्र और एक आधुनिक मानचित्र का चित्र, चॉक, डस्टर।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

व्याख्यान विधि, तुलनात्मक प्रदर्शन, प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी जानते हैं कि समय के साथ दुनिया में भाषा, रहन-सहन और तकनीक में बहुत बदलाव आते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँ
1.क्या सौ साल पहले लोग मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते थे?नहीं।
2.इसका मतलब समय के साथ चीज़ों में क्या होता है?बदलाव (परिवर्तन) होता है।
3.इसी तरह इतिहास में हज़ारों वर्षों में किन-किन चीज़ों में बदलाव हुआ?भाषा, सीमाएं, रहन-सहन।
4.इतिहासकार इन हज़ारों वर्षों (विशेषकर मध्यकाल) के बदलावों की पड़ताल कैसे करते हैं?(समस्यात्मक)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, आज हम इतिहास में ‘हजारों वर्षों के दौरान हुए परिवर्तनों की पड़ताल’ पाठ में 700 ई. से 1750 ई. (मध्यकाल) के बीच हुए बड़े बदलावों का अध्ययन करेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
मानचित्रों और शब्दों के अर्थ में बदलावप्रदर्शन: अल-इदरीसी का मानचित्र।
छात्राध्यापक कथन: अरब भूगोलवेत्ता अल-इदरीसी ने 1154 में जो दुनिया का नक़्शा बनाया, उसमें दक्षिण भारत वहाँ है जहाँ आज हम उत्तर भारत देखते हैं (यानी नक़्शा उल्टा है)। 600 साल बाद फ्रांसीसी मानचित्रकार ने आज जैसा नक़्शा बनाया। इसी तरह शब्दों के अर्थ भी बदलते हैं। ‘हिंदुस्तान’ शब्द का प्रयोग 13वीं सदी में मिन्हाज-ए-सिराज ने केवल पंजाब, हरियाणा और गंगा-यमुना के इलाके के लिए किया था, जबकि आज यह पूरे भारत के लिए है।
छात्र नक़्शे और शब्दों के बदलते अर्थ को समझेंगे।बदलाव: अल-इदरीसी का उल्टा मानचित्र।
शब्दों के अर्थ बदले (‘हिंदुस्तान’)।
इतिहासकार और उनके स्रोतछात्राध्यापक कथन: इस काल (700-1750 ई.) के इतिहास को जानने के लिए इतिहासकार सिक्के, शिलालेख, भवन निर्माण कला और लिखित सामग्री पर निर्भर करते हैं। इस समय कागज़ सस्ता हो गया, इसलिए धर्मग्रंथ, शासकों के वृत्तांत, संतों के उपदेश खूब लिखे गए। इन पांडुलिपियों को पुस्तकालयों और ‘अभिलेखागारों’ (Archives) में रखा जाता है।छात्र अभिलेखागार का अर्थ सुनेंगे।स्रोत: सिक्के, शिलालेख, लिखित ग्रंथ।
अभिलेखागार: जहाँ दस्तावेज़ रखे जाते हैं।
पांडुलिपियों की प्रतिलिपि (नकल)छात्राध्यापक कथन: उस समय छापेखाने (Printing Press) नहीं थे, इसलिए लिपिक या नकलनवीस हाथ से ही पांडुलिपियों की प्रतिलिपि बनाते थे। ऐसा करते समय वे छोटे-मोटे फेरबदल (अपनी समझ से शब्द या वाक्य) कर देते थे। सदियों तक नकल की नकल बनने से मूल ग्रंथ काफी बदल जाते थे, जो आज इतिहासकारों के लिए एक बड़ी चुनौती है।छात्र नकल करने की समस्या को समझेंगे।नकलनवीस: हाथ से नकल बनाने वाले।
समस्या: नकल करते समय गलतियां या बदलाव।

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. अल-इदरीसी कौन था और उसने मानचित्र कब बनाया?
  2. अभिलेखागार (Archives) किसे कहते हैं?
  3. पांडुलिपियों की प्रतिलिपि बनाने में इतिहासकारों को क्या कठिनाई आती है?

10. गृहकार्य (Homework):

अतीत में विदेशी किसे माना जाता था? स्पष्ट कीजिए। (संकेत: मध्यकाल में गाँव में आने वाला अनजान व्यक्ति विदेशी कहलाता था)।

📌 नोट: यह B.Ed SST Lesson Plan दैनिक पाठ योजना पुस्तिका के लिए पूरी तरह से तैयार है।

B.Ed SST Lesson Plan 12: पाठ योजना क्रमांक – 12

दिनांक: ………………..
कक्षा: 7
कालांश: ………………..
योजना प्रकार: B.Ed SST Lesson Plan
विषय: सामाजिक विज्ञान
उपविषय: इतिहास
प्रकरण: नए राजा और उनके राज्य (चोल साम्राज्य)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में प्राचीन और मध्यकालीन भारतीय राजवंशों के प्रति ज्ञान बढ़ाना।
  2. साम्राज्यों के उदय और प्रशासन प्रणाली को समझने की क्षमता विकसित करना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘सामंत’ और गुर्जर-प्रतिहार, राष्ट्रकूट तथा पाल राजवंशों के नाम जान सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी सामंतों से राजा बनने की प्रक्रिया (जैसे दंतिदुर्ग) को समझ सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी त्रिपक्षीय संघर्ष के कारण (कन्नौज पर नियंत्रण) को स्पष्ट कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी भारत के मानचित्र में चोल साम्राज्य की स्थिति अंकित कर सकेंगे।

3. शिक्षण सहायक सामग्री:

7वीं से 12वीं सदी के भारत का मानचित्र (राजवंशों को दर्शाने वाला), चॉक, डस्टर।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

व्याख्यान विधि, मानचित्र प्रदर्शन, प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी जानते हैं कि पुराने समय में भारत में कई छोटे-बड़े राजा शासन करते थे और आपस में युद्ध करते थे।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँ
1.पुराने समय में देश या राज्य पर कौन शासन करता था?राजा या सम्राट।
2.राजा की सेना और ज़मीन का प्रबंधन कौन करते थे?सेनापति या जमींदार/सामंत।
3.यदि राजा कमज़ोर हो जाए, तो क्या ये सामंत खुद राजा बन सकते थे?हाँ, विद्रोह करके।
4.7वीं शताब्दी के बाद ऐसे कौन-से नए राजवंश (जैसे चोल, राष्ट्रकूट) बने और कैसे?(समस्यात्मक)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, आज हम इतिहास में ‘नए राजा और उनके राज्य’ पाठ के अंतर्गत 7वीं सदी के बाद उभरे नए राजवंशों, सामंतों और चोल साम्राज्य का अध्ययन करेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
नए राजवंशों का उदय (सामंत)छात्राध्यापक कथन: 7वीं सदी आते-आते बड़े भूस्वामियों और योद्धा सरदारों को राजा ‘सामंत’ के रूप में मान्यता देते थे। वे राजा के लिए उपहार लाते थे। जब सामंत अधिक सत्ता और दौलत हासिल कर लेते थे, तो वे खुद को ‘महा-सामंत’ घोषित कर देते थे और कभी-कभी अपने राजा (स्वामी) को हटाकर खुद राजा बन जाते थे। (जैसे- दंतिदुर्ग नामक राष्ट्रकूट सामंत ने चालुक्य राजा को हराकर अपना राज्य स्थापित किया)।छात्र सामंत से राजा बनने की प्रक्रिया समझेंगे।सामंत: राजा के अधीन भूस्वामी या सेनापति।
शक्ति पाकर खुद राजा बन जाते थे (जैसे दंतिदुर्ग)।
धन के लिए युद्ध (त्रिपक्षीय संघर्ष)मानचित्र प्रदर्शन: कन्नौज की स्थिति दिखाना।
छात्राध्यापक कथन: शासक अपना नियंत्रण बढ़ाने के लिए दूसरे राज्यों पर हमला करते थे। गंगा घाटी में ‘कन्नौज’ नगर बहुत समृद्ध था। इस पर कब्ज़ा करने के लिए गुर्जर-प्रतिहार, राष्ट्रकूट और पाल वंशों के बीच सदियों तक लड़ाई चली। इतिहासकार इसे ‘त्रिपक्षीय संघर्ष’ (Three-party struggle) कहते हैं। शासक बड़े मंदिरों को लूटकर भी धन इकट्ठा करते थे (जैसे महमूद गज़नवी ने सोमनाथ को लूटा)।
छात्र त्रिपक्षीय संघर्ष के पक्षों के नाम लिखेंगे।त्रिपक्षीय संघर्ष: कन्नौज पर कब्ज़े के लिए।
पक्ष: गुर्जर-प्रतिहार, राष्ट्रकूट, पाल वंश।
चोल साम्राज्य और प्रशासनछात्राध्यापक कथन: दक्षिण भारत में चोल वंश बहुत शक्तिशाली था (राजराज प्रथम और राजेंद्र प्रथम)। उन्होंने नौसेना बनाई और श्रीलंका तक हमले किए। चोल साम्राज्य अपने भव्य मंदिरों (जैसे तंजावुर का राजराजेश्वर मंदिर) और कांस्य मूर्तियों के लिए प्रसिद्ध था। उनका प्रशासन बहुत व्यवस्थित था, जिसमें किसानों की बस्तियों को ‘उर’ और गाँवों के समूह को ‘नाडु’ कहा जाता था।छात्र चोल साम्राज्य की विशेषताएं सुनेंगे।चोल साम्राज्य: दक्षिण भारत।
प्रसिद्ध: भव्य मंदिर, कांस्य मूर्तियां।
उर = किसानों की बस्ती।

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. सामंत किसे कहा जाता था?
  2. त्रिपक्षीय संघर्ष किन तीन राजवंशों के बीच हुआ?
  3. चोल काल में किसानों की बस्तियों को क्या कहा जाता था?

10. गृहकार्य (Homework):

राष्ट्रकूट कैसे शक्तिशाली बने? दंतिदुर्ग के उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।

📌 नोट: यह B.Ed SST Lesson Plan दैनिक पाठ योजना पुस्तिका के लिए पूरी तरह से तैयार है।

B.Ed SST Lesson Plan 13: पाठ योजना क्रमांक – 13

दिनांक: ………………..
कक्षा: 7
कालांश: ………………..
योजना प्रकार: B.Ed SST Lesson Plan
विषय: सामाजिक विज्ञान (इतिहास)
उपविषय: हमारे अतीत-II
प्रकरण: दिल्ली के सुल्तान
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों को भारतीय इतिहास के मध्यकाल से अवगत कराना।
  2. ऐतिहासिक घटनाओं और शासकों के प्रति रुचि जाग्रत करना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी दिल्ली सल्तनत के प्रमुख वंशों का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी दिल्ली सुल्तानों के शासन और प्रशासन व्यवस्था को समझ सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी सल्तनत काल के ऐतिहासिक स्रोतों (जैसे तवारीख) के महत्व का उपयोग कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी भारत के मानचित्र पर दिल्ली सल्तनत के प्रमुख नगरों को दर्शा सकेंगे।

3. शिक्षण सहायक सामग्री:

भारत का ऐतिहासिक मानचित्र, कुतुबमीनार व अन्य इमारतों के चित्र, चॉक, डस्टर।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

व्याख्यान विधि, कहानी कथन विधि, प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी भारत की राजधानी दिल्ली और उसके ऐतिहासिक महत्व के बारे में सामान्य जानकारी रखते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँ
1.भारत की वर्तमान राजधानी कौनसी है?दिल्ली।
2.दिल्ली में स्थित किसी एक प्रसिद्ध ऐतिहासिक इमारत का नाम बताइए।कुतुबमीनार / लाल किला।
3.कुतुबमीनार का निर्माण किसने शुरू करवाया था?कुतुबुद्दीन ऐबक ने।
4.कुतुबुद्दीन ऐबक और उसके बाद के शासकों को क्या कहा जाता था, जिन्होंने दिल्ली पर शासन किया?(समस्यात्मक / दिल्ली के सुल्तान)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, 13वीं सदी के आरंभ में दिल्ली सल्तनत की स्थापना हुई, जिसने भारत के एक बड़े हिस्से पर शासन किया। आज हम ‘दिल्ली के सुल्तान’ पाठ के अंतर्गत उनके वंशों और प्रशासन का अध्ययन करेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
दिल्ली सल्तनत के वंशछात्राध्यापक कथन: 1206 ई. से 1526 ई. तक दिल्ली पर पांच प्रमुख वंशों ने शासन किया: (1) गुलाम वंश (कुतुबुद्दीन ऐबक, रजिया सुल्तान), (2) खल्जी वंश (अलाउद्दीन खल्जी), (3) तुगलक वंश (मुहम्मद बिन तुगलक), (4) सैयद वंश, और (5) लोदी वंश।छात्र वंशों के नाम अपनी अभ्यास पुस्तिका में लिखेंगे।5 वंश: गुलाम, खल्जी, तुगलक, सैयद, लोदी।
इतिहास जानने के स्रोत (तवारीख)छात्राध्यापक कथन: दिल्ली सुल्तानों का इतिहास हमें सिक्कों, अभिलेखों और स्थापत्य कला से मिलता है। लेकिन सबसे महत्वपूर्ण स्रोत फारसी भाषा में लिखे गए इतिहास हैं, जिन्हें ‘तवारीख’ कहा जाता था। इनके लेखक सचिव, प्रशासक, कवि और दरबारी होते थे।छात्र तवारीख का अर्थ समझेंगे।ऐतिहासिक स्रोत: तवारीख (फारसी में लिखित इतिहास)।
प्रशासन (इक्ता प्रणाली)छात्राध्यापक कथन: सुल्तानों ने अपने साम्राज्य को विभिन्न इलाकों (सूखों) में बांटा, जिन्हें ‘इक्ता’ कहा जाता था। इसके अधिकारी को इक्तादार या ‘मुक्ती’ कहते थे। इनका काम अपने इलाके में कानून व्यवस्था बनाए रखना और लगान वसूलना था।छात्र इक्ता और मुक्ती के कार्यों को समझेंगे।इक्ता = इलाका
मुक्ती = इक्ता का अधिकारी (लगान वसूलना)।

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. दिल्ली सल्तनत की स्थापना किस वर्ष मानी जाती है?
  2. ‘तवारीख’ किस भाषा में लिखे जाते थे?
  3. इक्ता के अधिकारी को क्या कहा जाता था?

10. गृहकार्य (Homework):

दिल्ली सल्तनत पर शासन करने वाले पांचों वंशों के नाम क्रमानुसार लिखिए।

📌 नोट: यह B.Ed SST Lesson Plan दैनिक पाठ योजना पुस्तिका के लिए पूरी तरह से तैयार है।

B.Ed SST Lesson Plan 14: पाठ योजना क्रमांक – 14

दिनांक: ………………..
कक्षा: 7
कालांश: ………………..
योजना प्रकार: B.Ed SST Lesson Plan
विषय: सामाजिक विज्ञान (इतिहास)
उपविषय: हमारे अतीत-II
प्रकरण: मुग़ल साम्राज्य
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में भारतीय इतिहास के मुग़ल काल की घटनाओं की समझ विकसित करना।
  2. सांस्कृतिक समन्वय (Cultural synthesis) के प्रति दृष्टिकोण उत्पन्न करना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी मुग़ल साम्राज्य के संस्थापक और प्रमुख शासकों का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी अकबर की नीतियों (सुलह-ए-कुल) और मनसबदारी प्रथा को समझ सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी मुग़ल काल के स्थापत्य (Architecture) को वर्तमान पर्यटन से जोड़ सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी कालरेखा (Timeline) पर मुग़ल शासकों का क्रम निर्धारित कर सकेंगे।

3. शिक्षण सहायक सामग्री:

मुग़ल शासकों का वंशवृक्ष (Family tree) चार्ट, ताजमहल और लाल किले का चित्र, चॉक, डस्टर।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

व्याख्यान-प्रदर्शन विधि, कहानी कथन विधि, प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी ताजमहल और लाल किले जैसी ऐतिहासिक इमारतों के बारे में जानते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँ
1.15 अगस्त को प्रधानमंत्री तिरंगा कहाँ फहराते हैं?दिल्ली के लाल किले पर।
2.आगरा का प्रसिद्ध मकबरा (अजूबा) कौनसा है?ताजमहल।
3.लाल किला और ताजमहल का निर्माण किस वंश के शासकों ने करवाया था?मुग़ल वंश के शासकों ने।
4.मुग़ल साम्राज्य की स्थापना भारत में कैसे और किसने की?(समस्यात्मक)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, 1526 में बाबर ने इब्राहिम लोदी को हराकर भारत में मुग़ल साम्राज्य की नींव रखी। आज हम ‘मुग़ल साम्राज्य’ और उसके प्रमुख शासकों, विशेषकर अकबर और उनकी नीतियों का अध्ययन करेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
मुग़ल साम्राज्य की स्थापनाछात्राध्यापक कथन: 1526 में पानीपत के प्रथम युद्ध में बाबर ने दिल्ली के सुल्तान इब्राहिम लोदी को हराया और मुग़ल साम्राज्य स्थापित किया। बाबर के बाद हुमायूँ, फिर अकबर, जहाँगीर, शाहजहाँ और औरंगज़ेब ने शासन किया। ये प्रमुख मुग़ल शासक माने जाते हैं।छात्र मुग़ल शासकों का क्रम सुनेंगे और कॉपी में लिखेंगे।संस्थापक: बाबर (1526 ई.)
शासक: बाबर → हुमायूँ → अकबर → जहाँगीर → शाहजहाँ → औरंगज़ेब।
अकबर और उसकी नीतियांछात्राध्यापक कथन: अकबर एक महान शासक था। उसने सभी धर्मों का सम्मान किया और ‘सुलह-ए-कुल’ (सार्वभौमिक शांति) की नीति अपनाई। उसने राजपूतों के साथ वैवाहिक संबंध स्थापित किए और प्रशासन को सुदृढ़ करने के लिए ‘मनसबदारी’ प्रथा लागू की।छात्र सुलह-ए-कुल का अर्थ समझेंगे।अकबर की नीति: ‘सुलह-ए-कुल’ (सार्वभौमिक शांति)।
प्रशासन: मनसबदारी प्रथा।
मनसबदार और जागीरदारछात्राध्यापक कथन: मुग़ल सेवा में आने वाले नौकरशाह ‘मनसबदार’ कहलाते थे। मनसब का अर्थ है कोई पद (Rank)। मनसबदारों को वेतन के रूप में जो ज़मीन या राजस्व मिलता था, उसे ‘जागीर’ कहा जाता था।छात्र मनसबदार और जागीर का अर्थ स्पष्ट करेंगे।मनसब = पद/रैंक
जागीर = वेतन के रूप में राजस्व।

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. पानीपत का प्रथम युद्ध कब और किसके बीच हुआ था?
  2. अकबर की ‘सुलह-ए-कुल’ नीति का क्या अर्थ था?
  3. मुग़ल काल में ‘मनसबदार’ किसे कहा जाता था?

10. गृहकार्य (Homework):

प्रमुख मुग़ल शासकों के नाम क्रमानुसार लिखिए और शाहजहाँ द्वारा बनवाई गई किन्हीं दो इमारतों के नाम बताइए।

📌 नोट: यह B.Ed SST Lesson Plan दैनिक पाठ योजना पुस्तिका के लिए पूरी तरह से तैयार है।

B.Ed SST Lesson Plan 15: पाठ योजना क्रमांक – 15

दिनांक: ………………..
कक्षा: 7
कालांश: ………………..
योजना प्रकार: B.Ed SST Lesson Plan
विषय: सामाजिक विज्ञान (राजनीति विज्ञान)
उपविषय: सामाजिक एवं राजनीतिक जीवन-II
प्रकरण: समानता (Equality)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में लोकतांत्रिक मूल्यों (Democratic values) का विकास करना।
  2. समाज में व्याप्त असमानताओं के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘समानता’ और ‘सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार’ की परिभाषा का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी भारतीय संविधान द्वारा प्रदत्त समानता के अधिकार को समझ सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी अपने आस-पास होने वाले भेदभाव (जाति, धर्म, लिंग के आधार पर) की पहचान कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी समानता को बढ़ावा देने के लिए उचित तर्क और विचार प्रस्तुत कर सकेंगे।

3. शिक्षण सहायक सामग्री:

मतदान केंद्र का दृश्य (चित्र), भारतीय संविधान की उद्देशिका (Preamble) का चार्ट, चॉक, डस्टर।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

कथा विधि (कांता की कहानी), विचार-विमर्श विधि, प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी चुनाव, वोट डालने की प्रक्रिया और गरीब-अमीर के बीच सामान्य अंतर को देखते व समझते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँ
1.हमारे देश में सरकार चुनने के लिए क्या होते हैं?चुनाव (Elections)।
2.चुनाव में वोट कौन डाल सकता है?18 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोग।
3.वोट डालने की लाइन में क्या अमीर और गरीब अलग-अलग खड़े होते हैं?नहीं, सब एक ही लाइन में खड़े होते हैं।
4.यह एक ही लाइन में खड़ा होना लोकतांत्रिक रूप से क्या दर्शाता है?(समस्यात्मक / समानता)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, लोकतंत्र का मूल आधार समानता है। वोट डालने की लाइन हमें समान बनाती है, लेकिन दैनिक जीवन में कई असमानताएं हैं। आज हम लोकतंत्र में ‘समानता’ और उसके महत्व का अध्ययन करेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
सार्वभौमिक वयस्क मताधिकारछात्राध्यापक कथन: एक लोकतांत्रिक देश में सभी वयस्कों (18 वर्ष या उससे अधिक) को मत (Vote) देने का अधिकार होता है, चाहे उनका धर्म, जाति, शिक्षा या आर्थिक स्थिति कुछ भी हो। इसे ‘सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार’ कहते हैं। यह राजनीतिक समानता का प्रतीक है।छात्र वयस्क मताधिकार की आयु और अर्थ को समझेंगे।सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार: 18+ वर्ष के सभी नागरिकों को समान वोट का अधिकार।
अन्य प्रकार की असमानताएंछात्राध्यापक कथन: (कांता और ओमप्रकाश वाल्मीकि की कहानी सुनाते हुए) राजनीतिक समानता के बावजूद समाज में जाति, धर्म, गरीबी और लिंग के आधार पर भेदभाव होता है। दलितों के साथ छुआछूत या स्कूलों में भेदभाव, मानवीय गरिमा (Dignity) को ठेस पहुँचाता है।छात्र कहानी के माध्यम से सामाजिक असमानता को समझेंगे।असमानता के आधार: जाति, धर्म, लिंग, आर्थिक स्थिति।
इससे गरिमा (Dignity) को ठेस पहुँचती है।
संविधान में समानताछात्राध्यापक कथन: भारतीय संविधान का अनुच्छेद 15 राज्य को किसी भी नागरिक के साथ धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या जन्म स्थान के आधार पर भेदभाव करने से रोकता है। सभी को सार्वजनिक स्थानों, कुओं, और दुकानों पर जाने का समान अधिकार है।छात्र संविधान में समानता के प्रावधानों को लिखेंगे।संविधान (अनुच्छेद 15): किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं किया जाएगा।

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार से आप क्या समझते हैं?
  2. समानता के बावजूद समाज में किन-किन आधारों पर भेदभाव देखने को मिलता है?
  3. भारतीय संविधान का कौन-सा अनुच्छेद भेदभाव को रोकता है?

10. गृहकार्य (Homework):

समानता स्थापित करने के लिए सरकार द्वारा चलाए जा रहे किन्हीं दो कार्यक्रमों (जैसे मिड-डे मील) के बारे में लिखिए।

📌 नोट: यह B.Ed SST Lesson Plan दैनिक पाठ योजना पुस्तिका के लिए पूरी तरह से तैयार है।

B.Ed SST Lesson Plan 16: पाठ योजना क्रमांक – 16

दिनांक: ………………..
कक्षा: 7
कालांश: ………………..
योजना प्रकार: B.Ed SST Lesson Plan
विषय: सामाजिक विज्ञान (राजनीति विज्ञान)
उपविषय: सामाजिक एवं राजनीतिक जीवन-II
प्रकरण: राज्य शासन कैसे काम करता है
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में राजनीतिक व्यवस्था और शासन के प्रति जागरूकता पैदा करना।
  2. लोकतांत्रिक प्रक्रिया में नागरिकों (मतदाताओं) की भूमिका को स्पष्ट करना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी विधायक (MLA), मुख्यमंत्री और राज्यपाल के कार्यों का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी विधानसभा (Legislative Assembly) की कार्यप्रणाली को समझ सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी समस्याओं के समाधान के लिए सरकार तक अपनी बात पहुँचाने के तरीकों को बता सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी भारत के राजनीतिक मानचित्र पर अपने राज्य को दर्शा सकेंगे।

3. शिक्षण सहायक सामग्री:

विधानसभा भवन का चित्र, राज्य के मानचित्र में निर्वाचन क्षेत्रों का विभाजन, चॉक, डस्टर।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

व्याख्यान विधि, चर्चा विधि, प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी चुनाव, वोटिंग और अपने क्षेत्र के किसी नेता (विधायक) के बारे में थोड़ी बहुत जानकारी रखते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँ
1.हम किस राज्य में रहते हैं?राजस्थान (या जो भी हो)।
2.राज्य के मुखिया (सरकार के प्रमुख) को क्या कहते हैं?मुख्यमंत्री।
3.चुनाव में हम जिसे वोट देकर जिताते हैं और विधानसभा में भेजते हैं, उसे क्या कहते हैं?विधायक (MLA)।
4.ये विधायक और मुख्यमंत्री मिलकर राज्य का शासन कैसे चलाते हैं?(समस्यात्मक)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, भारत में हर राज्य की अपनी एक सरकार होती है। आज हम ‘राज्य शासन कैसे काम करता है’ पाठ के माध्यम से विधायक, मुख्यमंत्री और विधानसभा की कार्यप्रणाली का अध्ययन करेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
विधायक (MLA) कौन होता है?छात्राध्यापक कथन: MLA का पूरा नाम ‘Member of Legislative Assembly’ (विधानसभा सदस्य) होता है। प्रत्येक राज्य को कई चुनाव क्षेत्रों (निर्वाचन क्षेत्रों) में बांटा जाता है। हर क्षेत्र से जनता वोट देकर एक प्रतिनिधि चुनती है, जो विधायक बनता है। विधायक जनता का प्रतिनिधित्व करते हैं।छात्र MLA का फुल फॉर्म और अर्थ समझेंगे।MLA = Member of Legislative Assembly (विधायक)।
जनता द्वारा निर्वाचित।
मुख्यमंत्री और मंत्रीछात्राध्यापक कथन: विधानसभा चुनाव के बाद जिस राजनीतिक दल के विधायकों की संख्या आधे से अधिक (बहुमत) होती है, वह ‘सत्तारूढ़ दल’ कहलाता है। इसके विधायक अपने नेता का चुनाव करते हैं, जो ‘मुख्यमंत्री’ बनता है। मुख्यमंत्री अन्य विधायकों में से ‘मंत्रियों’ (जैसे स्वास्थ्य मंत्री, शिक्षा मंत्री) को चुनता है।छात्र सरकार बनने की प्रक्रिया को ध्यान से सुनेंगे।बहुमत प्राप्त दल → सत्तारूढ़ दल।
नेता → मुख्यमंत्री।
विधानसभा में बहसछात्राध्यापक कथन: विधानसभा एक ऐसा स्थान है जहाँ सभी विधायक (सत्तारूढ़ और विपक्षी) एकत्र होकर राज्य की समस्याओं (जैसे पानी की कमी, बीमारियां) पर बहस करते हैं। मंत्री प्रश्नों का उत्तर देते हैं और सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदमों की जानकारी देते हैं।छात्र विधानसभा के कार्यों को अपनी कॉपी में लिखेंगे।विधानसभा: जहाँ विधायक जनसमस्याओं पर चर्चा और बहस करते हैं।

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. MLA का पूरा नाम (Full Form) क्या होता है?
  2. बहुमत (Majority) प्राप्त दल के नेता को क्या बनाया जाता है?
  3. विधानसभा में विपक्ष (Opposition) की क्या भूमिका होती है?

10. गृहकार्य (Homework):

आपके निर्वाचन क्षेत्र का नाम क्या है और वर्तमान में वहाँ से विधायक (MLA) कौन हैं? पता करके लिखिए।

📌 नोट: यह B.Ed SST Lesson Plan दैनिक पाठ योजना पुस्तिका के लिए पूरी तरह से तैयार है।

B.Ed SST Lesson Plan 17: पाठ योजना क्रमांक – 17

दिनांक: ………………..
कक्षा: 7
कालांश: ………………..
योजना प्रकार: B.Ed SST Lesson Plan
विषय: सामाजिक विज्ञान (भूगोल)
उपविषय: हमारा पर्यावरण
प्रकरण: पर्यावरण (Environment)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में प्रकृति और आस-पास के वातावरण के प्रति संवेदनशीलता विकसित करना।
  2. पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता और जिम्मेदारी की भावना पैदा करना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘पर्यावरण’ की परिभाषा और उसके घटकों (Components) का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी प्राकृतिक पर्यावरण और मानव निर्मित पर्यावरण के बीच अंतर स्पष्ट कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी पर्यावरण को प्रदूषित करने वाले कारकों की पहचान कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी अपने आस-पास के पर्यावरण का अवलोकन कर उसकी सूची तैयार कर सकेंगे।

3. शिक्षण सहायक सामग्री:

पर्यावरण के घटकों का चार्ट, प्राकृतिक और मानव निर्मित दृश्यों के चित्र, चॉक, डस्टर।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

अवलोकन-चर्चा विधि, व्याख्यान विधि, प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी पेड़-पौधे, जीव-जंतु, नदी, पहाड़ और इमारतों जैसी अपने आस-पास की चीजों को पहचानते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँ
1.जब आप स्कूल आते हैं, तो रास्ते में आपको क्या-क्या दिखाई देता है?पेड़, सड़क, गाड़ियां, घर, लोग।
2.इनमें से प्रकृति ने क्या बनाया है?पेड़, पहाड़, नदियां, मिट्टी।
3.और मनुष्यों ने क्या बनाया है?सड़क, इमारतें, गाड़ियां।
4.इन सभी प्राकृतिक और मानव निर्मित चीजों को मिलाकर जो हमारा आस-पास का आवरण बनता है, उसे क्या कहते हैं?(समस्यात्मक / पर्यावरण)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, हमारे आस-पास जो कुछ भी है—चाहे वह सजीव हो या निर्जीव, प्राकृतिक हो या मानव निर्मित—वह सब मिलकर हमारा पर्यावरण बनाता है। आज हम ‘पर्यावरण’ और उसके विभिन्न घटकों का अध्ययन करेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
पर्यावरण का अर्थछात्राध्यापक कथन: किसी भी जीवित प्राणी के चारों ओर पाए जाने वाले लोग, स्थान, वस्तुएं एवं प्रकृति को ‘पर्यावरण’ कहते हैं। पर्यावरण हमारे जीवन का मूल आधार है, यह हमें साँस लेने के लिए हवा, पीने के लिए जल और खाने के लिए भोजन प्रदान करता है।छात्र पर्यावरण की परिभाषा सुनेंगे और समझेंगे।पर्यावरण: हमारे चारों ओर का आवरण (लोग, स्थान, प्रकृति)।
पर्यावरण के घटकछात्राध्यापक कथन: पर्यावरण के तीन प्रमुख घटक हैं:
1. प्राकृतिक घटक (जल, वायु, स्थलमंडल और जीवमंडल)।
2. मानव निर्मित घटक (इमारतें, पार्क, पुल, सड़कें)।
3. मानव (व्यक्ति, परिवार, समाज, धर्म, शिक्षा)।
छात्र चार्ट देखकर पर्यावरण के घटकों को कॉपी में उतारेंगे।घटक:
1. प्राकृतिक
2. मानव निर्मित
3. मानव
प्राकृतिक पर्यावरण के परिमंडलछात्राध्यापक कथन: प्राकृतिक पर्यावरण के 4 परिमंडल होते हैं:
– स्थलमंडल (Lithosphere): पृथ्वी की ठोस पर्पटी।
– जलमंडल (Hydrosphere): सभी जल स्रोत।
– वायुमंडल (Atmosphere): पृथ्वी के चारों ओर हवा की परत।
– जैवमंडल (Biosphere): जहाँ तीनों मिलकर जीवन संभव बनाते हैं।
छात्र चारों परिमंडलों के नाम और उनके अर्थ समझेंगे।परिमंडल: स्थलमंडल, जलमंडल, वायुमंडल, और जैवमंडल।

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. पर्यावरण (Environment) किसे कहते हैं?
  2. मानव निर्मित पर्यावरण के कोई दो उदाहरण दीजिए।
  3. पृथ्वी की ठोस ऊपरी परत को क्या कहा जाता है?

10. गृहकार्य (Homework):

अपने घर के आस-पास पाई जाने वाली 5 प्राकृतिक और 5 मानव निर्मित वस्तुओं की सूची बनाइए।

📌 नोट: यह B.Ed SST Lesson Plan दैनिक पाठ योजना पुस्तिका के लिए पूरी तरह से तैयार है।

B.Ed SST Lesson Plan 18: पाठ योजना क्रमांक – 18

दिनांक: ………………..
कक्षा: 7
कालांश: ………………..
योजना प्रकार: B.Ed SST Lesson Plan
विषय: सामाजिक विज्ञान (भूगोल)
उपविषय: हमारा पर्यावरण
प्रकरण: हमारी बदलती पृथ्वी (भूकंप और ज्वालामुखी)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में पृथ्वी के आंतरिक और बाह्य बलों के प्रभाव को समझने की क्षमता विकसित करना।
  2. प्राकृतिक आपदाओं के प्रति वैज्ञानिक दृष्टिकोण और बचाव की जागरूकता पैदा करना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी स्थलमंडलीय प्लेटों (Lithospheric plates), भूकंप और ज्वालामुखी की परिभाषा का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी अंतर्जनित बल (Endogenic forces) और बहिर्जनित बल (Exogenic forces) में अंतर स्पष्ट कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी भूकंप आने पर बचाव के सुरक्षित स्थानों की पहचान कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी ज्वालामुखी के चित्र को नामांकित (उद्गम केंद्र, क्रेटर, लावा) कर सकेंगे।

3. शिक्षण सहायक सामग्री:

ज्वालामुखी का रंगीन चित्र/मॉडल, भूकंप की तरंगों को दर्शाता चार्ट, विश्व का मानचित्र, चॉक, डस्टर।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

व्याख्यान-प्रदर्शन विधि, कारण-प्रभाव चर्चा, प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी स्थलमंडल के बारे में जानते हैं और समाचारों में भूकंप या ज्वालामुखी के बारे में सुना है।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँ
1.हम किस ग्रह पर निवास करते हैं?पृथ्वी पर।
2.क्या पृथ्वी की सतह हमेशा एक जैसी (स्थिर) रहती है?नहीं, इसमें बदलाव होते रहते हैं।
3.जब अचानक पृथ्वी की सतह कांपने या हिलने लगती है, तो उसे क्या कहते हैं?भूकंप (Earthquake)।
4.पृथ्वी के हिलने (भूकंप) और पहाड़ों से आग (ज्वालामुखी) निकलने के पीछे पृथ्वी के भीतर कौनसे बल कार्य करते हैं?(समस्यात्मक)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, पृथ्वी के अंदर लगातार हलचल हो रही है। इस हलचल के कारण भूकंप और ज्वालामुखी जैसी घटनाएं होती हैं। आज हम ‘हमारी बदलती पृथ्वी’ पाठ में इन पृथ्वी की गतियों का अध्ययन करेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
पृथ्वी की गतियां (बल)छात्राध्यापक कथन: स्थलमंडल अनेक ‘प्लेटों’ में विभाजित है जो बहुत धीमी गति से घूमती रहती हैं। पृथ्वी की गतियों को दो बलों में बांटा जाता है:
1. अंतर्जनित बल (Endogenic force) – जो पृथ्वी के अंदर काम करते हैं (जैसे भूकंप, ज्वालामुखी)।
2. बहिर्जनित बल (Exogenic force) – जो सतह पर काम करते हैं (जैसे नदी, हवा)।
छात्र अंतर्जनित और बहिर्जनित बल के नाम और कार्य लिखेंगे।बल:
1. अंतर्जनित (अंदर) – भूकंप
2. बहिर्जनित (बाहर) – हवा, नदी।
ज्वालामुखी (Volcano)छात्राध्यापक कथन: (चित्र दिखाते हुए) ज्वालामुखी भू-पर्पटी (Crust) पर एक खुला छिद्र होता है जिससे पिघला हुआ पदार्थ (मैग्मा/लावा) अचानक बाहर निकलता है। जहाँ से लावा बाहर आता है, उसे ‘क्रेटर’ (Crater) कहते हैं।छात्र चित्र देखकर ज्वालामुखी की कार्यप्रणाली समझेंगे।ज्वालामुखी: पृथ्वी का छिद्र जहाँ से लावा (मैग्मा) बाहर निकलता है।
भूकंप (Earthquake)छात्राध्यापक कथन: जब स्थलमंडलीय प्लेटें आपस में टकराती या रगड़ खाती हैं, तो पृथ्वी की सतह पर कंपन होता है। इसे भूकंप कहते हैं। जिस स्थान से कंपन शुरू होता है उसे ‘उद्गम केंद्र’ (Focus) और सतह पर उसके ठीक ऊपर के स्थान को ‘अधिकेंद्र’ (Epicentre) कहते हैं। भूकंप की तीव्रता ‘रिक्टर स्केल’ पर मापी जाती है।छात्र उद्गम केंद्र और अधिकेंद्र का अंतर समझेंगे।भूकंप = कंपन
उद्गम केंद्र: जहाँ से कंपन शुरू होता है।
मापक यंत्र: सीस्मोग्राफ (रिक्टर स्केल)

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. अंतर्जनित बल (Endogenic forces) किसे कहते हैं?
  2. ज्वालामुखी के मुख (छिद्र) को किस नाम से जाना जाता है?
  3. भूकंप की तीव्रता मापने वाले पैमाने (Scale) का क्या नाम है?

10. गृहकार्य (Homework):

यदि आप विद्यालय में हैं और अचानक भूकंप आ जाए, तो आप अपने बचाव के लिए क्या-क्या उपाय करेंगे?

गतिविधि क्रमांक-12: द्वितीय ब्लॉक शिक्षण अभ्यास

कक्षा 9-10 के लिए 12 पाठ योजनाएं (Lesson Plans 19 to 30)

📌 नोट: यह B.Ed SST Lesson Plan दैनिक पाठ योजना पुस्तिका के लिए पूरी तरह से तैयार है।

गतिविधि क्रमांक-12: 12 B.Ed SST Lesson Plan (द्वितीय ब्लॉक शिक्षण अभ्यास)

B.Ed SST Lesson Plan (Plans 19 to 30) for Classes 9 and 10

B.Ed SST Lesson Plan 19: पाठ योजना क्रमांक – 19

दिनांक: ………………..
कक्षा: 9
कालांश: ………………..
योजना प्रकार: B.Ed SST Lesson Plan
विषय: सामाजिक विज्ञान (इतिहास)
उपविषय: भारत और समकालीन विश्व-I
प्रकरण: फ्रांसीसी क्रांति (The French Revolution)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में विश्व इतिहास की महत्वपूर्ण घटनाओं और उनके प्रभावों की समझ विकसित करना।
  2. स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व जैसे लोकतांत्रिक विचारों के प्रति आदर भाव पैदा करना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी फ्रांसीसी क्रांति का वर्ष (1789) और उस समय के राजा (लुई XVI) का नाम प्रत्यास्मरण कर सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी 18वीं सदी के फ्रांसीसी समाज के तीन ‘एस्टेट्स’ (Estates) की असमानताओं को समझ सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी फ्रांसीसी क्रांति के कारणों (आर्थिक संकट, सामाजिक भेदभाव) का विश्लेषण कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी विश्व के मानचित्र पर फ्रांस की स्थिति दर्शा सकेंगे।

3. शिक्षण सहायक सामग्री:

फ्रांसीसी समाज के तीन एस्टेट्स को दर्शाने वाला चार्ट, बास्तील के किले के पतन का चित्र, चॉक, डस्टर।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

कहानी कथन विधि, व्याख्यान-प्रदर्शन विधि, प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी राजतंत्र (राजा का शासन) और लोकतंत्र (जनता का शासन) के बीच का अंतर समझते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँ
1.जब राजा अपनी मनमर्जी से शासन चलाता है और जनता पर अत्याचार करता है, तो उसे क्या कहते हैं?निरंकुश राजतंत्र / तानाशाही।
2.अत्याचार से परेशान होकर जब जनता राजा के खिलाफ हिंसक आंदोलन करती है, तो उसे क्या कहते हैं?क्रांति (Revolution)।
3.यूरोप के किस देश में 1789 ई. में समानता और स्वतंत्रता के लिए सबसे बड़ी क्रांति हुई थी?फ्रांस में (फ्रांसीसी क्रांति)।
4.फ्रांसीसी क्रांति के क्या कारण थे और फ्रांसीसी समाज किस प्रकार बंटा हुआ था?(समस्यात्मक)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, 1789 की फ्रांसीसी क्रांति ने पूरी दुनिया को स्वतंत्रता, समानता और भाईचारे का विचार दिया। आज हम ‘फ्रांसीसी क्रांति’ के कारण और उस समय के फ्रांसीसी समाज के बारे में अध्ययन करेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
फ्रांसीसी समाज की संरचना (Three Estates)छात्राध्यापक कथन: 18वीं सदी में फ्रांसीसी समाज तीन वर्गों (एस्टेट्स) में बंटा था: 1. प्रथम एस्टेट (पादरी/Clergy), 2. द्वितीय एस्टेट (कुलीन वर्ग/Nobility), 3. तृतीय एस्टेट (किसान, मजदूर, व्यापारी, वकील)। सबसे बड़ा अन्याय यह था कि राज्य को सभी कर (Tax) केवल तृतीय एस्टेट को देने पड़ते थे, पहले दो वर्ग कर से मुक्त थे।छात्र तीनों एस्टेट्स के नाम और कर-व्यवस्था का भेदभाव समझेंगे।समाज 3 एस्टेट्स में: पादरी, कुलीन, और सामान्य जनता।
सभी टैक्स केवल तीसरे एस्टेट पर।
जीने का संघर्ष (आर्थिक कारण)छात्राध्यापक कथन: 1774 में लुई XVI फ्रांस का राजा बना। उस समय राजकोष खाली था। युद्धों के कारण कर्ज बढ़ गया था। फ्रांस की जनसंख्या तेजी से बढ़ी, जिससे पाव रोटी (Bread) की कीमतें आसमान छूने लगीं। गरीब जनता भुखमरी का शिकार हो गई। राजा ने टैक्स और बढ़ा दिए, जिससे जनता का गुस्सा भड़क गया।छात्र क्रांति के आर्थिक कारणों (भुखमरी, टैक्स) को कॉपी में नोट करेंगे।राजा: लुई XVI (1774)।
आर्थिक संकट: कर्ज, रोटी की कमी, टैक्स वृद्धि।
क्रांति की शुरुआत (बास्तील का पतन)छात्राध्यापक कथन: 14 जुलाई 1789 को, क्रुद्ध भीड़ ने पेरिस के ‘बास्तील’ (Bastille) किले (जेल) पर हमला कर दिया और उसे तोड़ दिया। बास्तील राजा की निरंकुश शक्ति का प्रतीक था। इस घटना के साथ ही फ्रांसीसी क्रांति की शुरुआत हो गई।छात्र बास्तील के पतन की तिथि और महत्व को समझेंगे।क्रांति की शुरुआत: 14 जुलाई 1789 (बास्तील किले का पतन)।

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. फ्रांसीसी क्रांति के समय फ्रांस का राजा कौन था?
  2. फ्रांसीसी समाज के किस ‘एस्टेट’ (वर्ग) को कर (Tax) देना पड़ता था?
  3. बास्तील के किले पर जनता ने कब हमला किया था?

10. गृहकार्य (Homework):

फ्रांसीसी क्रांति के किन्हीं तीन मुख्य कारणों का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।

📌 नोट: यह B.Ed SST Lesson Plan दैनिक पाठ योजना पुस्तिका के लिए पूरी तरह से तैयार है।

B.Ed SST Lesson Plan 20: पाठ योजना क्रमांक – 20

दिनांक: ………………..
कक्षा: 9
कालांश: ………………..
योजना प्रकार: B.Ed SST Lesson Plan
विषय: सामाजिक विज्ञान (इतिहास)
उपविषय: भारत और समकालीन विश्व-I
प्रकरण: यूरोप में समाजवाद एवं रूसी क्रांति
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में विश्व की राजनीतिक और आर्थिक विचारधाराओं की समझ विकसित करना।
  2. मजदूरों और कामगारों के संघर्ष के प्रति संवेदनशीलता पैदा करना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘पूंजीवाद’ (Capitalism) और ‘समाजवाद’ (Socialism) शब्दों का अर्थ बता सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी कार्ल मार्क्स के समाजवादी विचारों को समझ सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी 1917 की रूसी क्रांति के कारणों का विश्लेषण कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी बोल्शेविक (Bolsheviks) और मेंशेविक (Mensheviks) गुटों के बीच अंतर स्पष्ट कर सकेंगे।

3. शिक्षण सहायक सामग्री:

कार्ल मार्क्स और लेनिन का चित्र, रूस का मानचित्र, चॉक, डस्टर।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

व्याख्यान विधि, चर्चा विधि, प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी कारखानों, मजदूरों और फ्रांसीसी क्रांति के स्वतंत्रता के विचारों के बारे में सामान्य जानकारी रखते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँ
1.कारखानों (फैक्ट्रियों) में काम कौन करता है?मजदूर (श्रमिक)।
2.कारखानों से होने वाला मुनाफा (Profit) किसके पास जाता है?मालिकों (पूंजीपतियों) के पास।
3.जब सारा मुनाफा मालिक रखते हैं और मजदूरों को कम वेतन मिलता है, तो समाज में क्या बढ़ता है?अमीरी-गरीबी का अंतर (असमानता)।
4.एक ऐसी विचारधारा जो संपत्ति पर पूरे समाज का अधिकार मानती है, उसे क्या कहते हैं?(समस्यात्मक / समाजवाद)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, 19वीं सदी में यूरोप में निजी संपत्ति का विरोध करने वाली एक विचारधारा पनपी, जिसे समाजवाद कहते हैं। इसी विचारधारा ने रूस में एक बड़ी क्रांति को जन्म दिया। आज हम ‘यूरोप में समाजवाद एवं रूसी क्रांति’ का अध्ययन करेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
समाजवाद क्या है?छात्राध्यापक कथन: समाजवादी (Socialists) निजी संपत्ति के विरोधी थे। उनका मानना था कि संपत्ति पर किसी एक व्यक्ति का अधिकार नहीं होना चाहिए, बल्कि उत्पादन के साधनों पर पूरे समाज या राज्य का नियंत्रण होना चाहिए ताकि मुनाफा सभी में बंटे। कार्ल मार्क्स इस विचारधारा के प्रमुख विचारक थे।छात्र समाजवाद का अर्थ और कार्ल मार्क्स का नाम नोट करेंगे।समाजवाद: निजी संपत्ति का विरोध, सामूहिक नियंत्रण।
प्रमुख विचारक: कार्ल मार्क्स।
रूसी क्रांति की पृष्ठभूमिछात्राध्यापक कथन: 20वीं सदी की शुरुआत में रूस पर ज़ार निकोलस II का शासन था जो एक निरंकुश शासक था। रूस की अधिकांश जनता किसान थी और कारखानों में मजदूरों की हालत बहुत खराब थी। उन्हें लंबे समय तक काम करना पड़ता था और वेतन कम मिलता था, जिससे उनमें भारी असंतोष था।छात्र रूस की तत्कालीन सामाजिक स्थिति को समझेंगे।रूसी शासक: ज़ार निकोलस II (तानाशाह)।
किसानों और मजदूरों की दयनीय स्थिति।
अक्टूबर क्रांति (1917)छात्राध्यापक कथन: मजदूरों और समाजवादियों ने रूस में कई संगठन बनाए। व्लादिमीर लेनिन के नेतृत्व में ‘बोल्शेविक पार्टी’ ने अक्टूबर 1917 में सत्ता पर कब्जा कर लिया और रूस दुनिया का पहला समाजवादी (कम्युनिस्ट) देश बन गया। सभी बैंकों और उद्योगों का राष्ट्रीयकरण कर दिया गया।छात्र लेनिन और बोल्शेविक पार्टी की भूमिका को सुनेंगे।1917 की रूसी क्रांति:
नेता: लेनिन (बोल्शेविक पार्टी)।
रूस बना पहला समाजवादी देश।

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. समाजवादी विचारधारा के लोग किस चीज़ का विरोध करते थे?
  2. कार्ल मार्क्स कौन थे?
  3. 1917 की रूसी क्रांति (अक्टूबर क्रांति) का नेतृत्व किसने किया था?

10. गृहकार्य (Homework):

पूंजीवाद (Capitalism) और समाजवाद (Socialism) के बीच मुख्य अंतर क्या है? संक्षेप में लिखिए।

📌 नोट: यह B.Ed SST Lesson Plan दैनिक पाठ योजना पुस्तिका के लिए पूरी तरह से तैयार है।

B.Ed SST Lesson Plan 21: पाठ योजना क्रमांक – 21

दिनांक: ………………..
कक्षा: 9
कालांश: ………………..
योजना प्रकार: B.Ed SST Lesson Plan
विषय: सामाजिक विज्ञान (इतिहास)
उपविषय: भारत और समकालीन विश्व-I
प्रकरण: नात्सीवाद और हिटलर का उदय
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में तानाशाही और उग्र राष्ट्रवाद के दुष्परिणामों की समझ विकसित करना।
  2. मानवाधिकारों के महत्व और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व का मूल्य स्थापित करना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘वर्साय की संधि’ (Treaty of Versailles) और एडॉल्फ हिटलर के नाम का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी नात्सी (Nazi) विचारधारा और उसके नस्लीय भेदभाव को समझ सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी जर्मनी में हिटलर के उत्थान के कारणों (आर्थिक मंदी, वर्साय की संधि का अपमान) का विश्लेषण कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी यूरोप के मानचित्र पर जर्मनी की स्थिति और द्वितीय विश्व युद्ध के गुटों को दर्शा सकेंगे।

3. शिक्षण सहायक सामग्री:

हिटलर का चित्र, नाजी पार्टी का स्वास्तिक चिह्न, यूरोप का मानचित्र, चॉक, डस्टर।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

व्याख्यान विधि, विश्लेषणात्मक चर्चा, प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी प्रथम विश्व युद्ध और द्वितीय विश्व युद्ध के बारे में थोड़ी बहुत जानकारी रखते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँ
1.अब तक दुनिया में कितने विश्व युद्ध हो चुके हैं?दो विश्व युद्ध।
2.प्रथम विश्व युद्ध में किस देश की हार हुई थी, जिस पर भारी जुर्माना लगाया गया?जर्मनी की।
3.जर्मनी में इस हार का बदला लेने के लिए किस तानाशाह (Dictator) का उदय हुआ?एडॉल्फ हिटलर।
4.हिटलर की विचारधारा और उसकी पार्टी को किस नाम से जाना जाता था?(समस्यात्मक / नात्सीवाद)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, प्रथम विश्व युद्ध के बाद जर्मनी की हार और अपमान ने एक ऐसे तानाशाह को जन्म दिया जिसने पूरी दुनिया को द्वितीय विश्व युद्ध में धकेल दिया। आज हम ‘नात्सीवाद और हिटलर का उदय’ का विस्तार से अध्ययन करेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
वर्साय की संधि और जर्मनी की हालतछात्राध्यापक कथन: प्रथम विश्व युद्ध (1914-1918) में जर्मनी की हार के बाद उस पर ‘वर्साय की संधि’ थोपी गई। यह बहुत अपमानजनक संधि थी। जर्मनी को अपने कई इलाके खोने पड़े, सेना कम कर दी गई और उस पर भारी जुर्माना लगाया गया, जिससे जर्मनी में भयानक आर्थिक संकट और भुखमरी फैल गई।छात्र वर्साय की संधि के परिणामों को समझेंगे।वर्साय की संधि (1919): अपमानजनक और कठोर। जर्मनी पर भारी जुर्माना।
हिटलर का उदयछात्राध्यापक कथन: इस निराशा के माहौल में एडॉल्फ हिटलर ने ‘नात्सी (Nazi) पार्टी’ बनाई। उसने जर्मन लोगों से वादा किया कि वह वर्साय की संधि का अपमान मिटाएगा और जर्मनी को दुनिया की सबसे बड़ी शक्ति बनाएगा। हिटलर एक बेहतरीन वक्ता (Speaker) था। 1933 में वह जर्मनी का चांसलर (तानाशाह) बन गया।छात्र हिटलर के वादों और उत्थान के कारणों को कॉपी में लिखेंगे।हिटलर: नात्सी पार्टी का नेता, बेहतरीन वक्ता, 1933 में तानाशाह बना।
नात्सी विचारधारा (नस्लवाद)छात्राध्यापक कथन: नात्सी विचारधारा बहुत खतरनाक थी। हिटलर का मानना था कि जर्मन (आर्य नस्ल) दुनिया में सर्वश्रेष्ठ हैं और यहूदियों (Jews) को वे सबसे निचला मानते थे। नात्सियों ने लाखों यहूदियों को गैस चैंबरों (यातना शिविरों) में डालकर मार दिया। इसे होलोकॉस्ट (Holocaust) कहा जाता है।छात्र नात्सी नस्लवाद के क्रूर परिणामों को सुनेंगे।नात्सी विचारधारा: उग्र राष्ट्रवाद और नस्लवाद। यहूदियों का नरसंहार।

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. प्रथम विश्व युद्ध के बाद जर्मनी पर कौनसी संधि थोपी गई थी?
  2. हिटलर की राजनीतिक पार्टी का क्या नाम था?
  3. नात्सी विचारधारा के अनुसार किस नस्ल को सर्वश्रेष्ठ माना जाता था?

10. गृहकार्य (Homework):

हिटलर के उदय के लिए ‘वर्साय की संधि’ और ‘आर्थिक संकट’ किस प्रकार जिम्मेदार थे? संक्षेप में लिखिए।

📌 नोट: यह B.Ed SST Lesson Plan दैनिक पाठ योजना पुस्तिका के लिए पूरी तरह से तैयार है।

B.Ed SST Lesson Plan 22: पाठ योजना क्रमांक – 22

दिनांक: ………………..
कक्षा: 9
कालांश: ………………..
योजना प्रकार: B.Ed SST Lesson Plan
विषय: सामाजिक विज्ञान (इतिहास)
उपविषय: भारत और समकालीन विश्व-I
प्रकरण: वन्य समाज और उपनिवेशवाद
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में पर्यावरण और आदिवासी (वन्य) समाज के संबंधों की समझ विकसित करना।
  2. उपनिवेशवाद (Colonialism) के आर्थिक प्रभावों का आलोचनात्मक मूल्यांकन करने की क्षमता पैदा करना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘उपनिवेशवाद’ और ‘वैज्ञानिक वानिकी’ (Scientific Forestry) की परिभाषा का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी समझ सकेंगे कि अंग्रेजों ने जंगलों पर नियंत्रण क्यों किया।
अनुप्रयोगविद्यार्थी वन कानूनों के कारण आदिवासियों और घुमंतू किसानों के जीवन पर पड़े प्रभावों का विश्लेषण कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी बस्तर (छत्तीसगढ़) के वन विद्रोह के कारणों को सूचीबद्ध कर सकेंगे।

3. शिक्षण सहायक सामग्री:

जंगलों से मिलने वाले उत्पादों (लकड़ी, गोंद, जड़ी-बूटी) के चित्र, रेलवे स्लीपर का चित्र, भारत का मानचित्र, चॉक, डस्टर।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

व्याख्यान विधि, चर्चा विधि, प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी जंगल के महत्व और अंग्रेजों (ब्रिटिश शासन) के बारे में सामान्य जानकारी रखते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँ
1.जंगलों से हमें क्या-क्या मिलता है?लकड़ी, फल, गोंद, जड़ी-बूटियां।
2.जो लोग पूरी तरह से जंगलों में रहते हैं और उसी पर निर्भर हैं, उन्हें क्या कहते हैं?आदिवासी या वन्य समाज।
3.भारत पर 200 वर्षों तक किसने शासन (उपनिवेश) किया था?अंग्रेजों ने (ब्रिटिश सरकार)।
4.अंग्रेजों ने भारत के जंगलों पर नियंत्रण क्यों किया और इसका आदिवासियों पर क्या प्रभाव पड़ा?(समस्यात्मक)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, अंग्रेजों ने अपने स्वार्थ के लिए भारत के जंगलों पर कब्ज़ा किया, जिससे वनवासियों का जीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ। आज हम ‘वन्य समाज और उपनिवेशवाद’ पाठ का अध्ययन करेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
वनों का विनाश और अंग्रेजों की जरूरतेंछात्राध्यापक कथन: 19वीं सदी में अंग्रेजों को भारत में रेलवे लाइनें बिछाने के लिए पटरियों के नीचे लगाने वाले ‘स्लीपर’ (लकड़ी के तख्ते) और इंग्लैंड के जहाजों के लिए मजबूत लकड़ी (सागौन, साल) की जरूरत थी। चाय और कॉफी के बागान लगाने के लिए भी जंगलों को साफ किया गया।छात्र वनों की कटाई के कारणों को समझेंगे।कारण: रेलवे स्लीपर, जहाजों की लकड़ी, चाय/कॉफी के बागान।
वैज्ञानिक वानिकी और वन कानूनछात्राध्यापक कथन: अंग्रेजों ने जंगलों पर नियंत्रण के लिए 1865 में ‘वन अधिनियम’ लागू किया। उन्होंने ‘वैज्ञानिक वानिकी’ (Scientific Forestry) शुरू की, जिसमें प्राकृतिक जंगलों को काटकर केवल एक ही तरह के पेड़ (जैसे सागौन) सीधी लाइनों में लगाए गए। जंगलों को ‘आरक्षित’ कर दिया गया, जहाँ गाँव वालों का जाना मना था।छात्र वन कानून और वैज्ञानिक वानिकी का अर्थ लिखेंगे।वन कानून (1865): जंगल आरक्षित (Reserve) किए गए।
ग्रामीणों का प्रवेश बंद।
वन्य समाज पर प्रभाव (बस्तर विद्रोह)छात्राध्यापक कथन: वन कानूनों के कारण आदिवासियों से शिकार करने, लकड़ी बीनने और पशु चराने का अधिकार छिन गया। घुमंतू खेती (झूम कृषि) पर रोक लगा दी गई। इससे परेशान होकर 1910 में छत्तीसगढ़ के ‘बस्तर’ जिले के आदिवासियों ने गुंडा धूर के नेतृत्व में अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह कर दिया।छात्र आदिवासियों की समस्याओं और विद्रोह को समझेंगे।प्रभाव: झूम खेती और शिकार पर रोक।
बस्तर विद्रोह (1910) – नेता: गुंडा धूर।

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. अंग्रेजों को भारत के जंगलों से लकड़ी की आवश्यकता क्यों थी?
  2. ‘वैज्ञानिक वानिकी’ (Scientific Forestry) से आप क्या समझते हैं?
  3. बस्तर का वन विद्रोह कब और कहाँ हुआ था?

10. गृहकार्य (Homework):

वन कानूनों (Forest Acts) के कारण घुमंतू खेती (Shifting cultivation) करने वाले लोगों पर क्या प्रभाव पड़ा? संक्षेप में लिखिए।

📌 नोट: यह B.Ed SST Lesson Plan दैनिक पाठ योजना पुस्तिका के लिए पूरी तरह से तैयार है।

B.Ed SST Lesson Plan 23: पाठ योजना क्रमांक – 23

दिनांक: ………………..
कक्षा: 9
कालांश: ………………..
योजना प्रकार: B.Ed SST Lesson Plan
विषय: सामाजिक विज्ञान (इतिहास)
उपविषय: भारत और समकालीन विश्व-I
प्रकरण: आधुनिक विश्व में चरवाहे
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में घुमंतू (Nomadic) समुदायों की जीवनशैली और उनके संघर्षों की समझ विकसित करना।
  2. पारिस्थितिक संतुलन में चरवाहों की भूमिका का मूल्यांकन करना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी भारत के प्रमुख चरवाहा समुदायों (गुज्जर बकरवाल, गद्दी, राइका) के नाम प्रत्यास्मरण कर सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी चरवाहों के ऋतु-प्रवास (Seasonal movement) के कारणों को समझ सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी औपनिवेशिक कानूनों (चराई कर, वन अधिनियम) के कारण चरवाहों के जीवन पर पड़े प्रभावों का विश्लेषण कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी भारत के मानचित्र पर विभिन्न चरवाहा समुदायों के क्षेत्रों को दर्शा सकेंगे।

3. शिक्षण सहायक सामग्री:

पहाड़ों और मैदानों में भेड़-बकरियां चराते लोगों का चित्र, भारत का राजनीतिक मानचित्र, चॉक, डस्टर।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

व्याख्यान-प्रदर्शन विधि, कहानी कथन विधि, प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी भेड़, बकरी, ऊँट चराने वाले लोगों और सर्दी-गर्मी के मौसम के बारे में सामान्य जानकारी रखते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँ
1.गाँव में गाय, भैंस, भेड़, बकरियों को पालने वाले लोग उन्हें कहाँ चराने ले जाते हैं?मैदानों या जंगलों में।
2.जो लोग अपने पशुओं के साथ चारे और पानी की तलाश में एक जगह से दूसरी जगह घूमते रहते हैं, उन्हें क्या कहते हैं?घुमंतू या चरवाहे (Nomads)।
3.सर्दी के मौसम में पहाड़ों पर बर्फ गिरने पर चरवाहे क्या करते हैं?वे नीचे मैदानों में आ जाते हैं।
4.अंग्रेजों के राज (औपनिवेशिक काल) में इन चरवाहों के जीवन में क्या बदलाव आए?(समस्यात्मक)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, घुमंतू चरवाहे पर्यावरण के अनुकूल अपना जीवन जीते हैं। लेकिन औपनिवेशिक काल के कानूनों ने उनकी जिंदगी बदल दी। आज हम ‘आधुनिक विश्व में चरवाहे’ पाठ का अध्ययन करेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
भारत के प्रमुख चरवाहे और ऋतु-प्रवासछात्राध्यापक कथन: जम्मू-कश्मीर के ‘गुज्जर बकरवाल’ और हिमाचल के ‘गद्दी’ समुदाय सर्दियों में बर्फबारी के कारण निचले इलाकों (शिवालिक की पहाड़ियों) में आ जाते हैं और गर्मियों में वापस ऊंचे पहाड़ों (बुग्याल) पर चले जाते हैं। राजस्थान के रेगिस्तान में ‘राइका’ समुदाय ऊँट और भेड़ चराते हैं। महाराष्ट्र में ‘धंगर’ समुदाय रहता है।छात्र समुदायों और उनके क्षेत्रों के नाम कॉपी में लिखेंगे।जम्मू-कश्मीर: गुज्जर बकरवाल
हिमाचल: गद्दी
राजस्थान: राइका
महाराष्ट्र: धंगर
औपनिवेशिक शासन के कानूनछात्राध्यापक कथन: अंग्रेजों को चरवाहों की घुमंतू जिंदगी से नफरत थी। उन्होंने जंगलों को आरक्षित (Reserve) कर दिया, जिससे चरवाहे अपने पशुओं को जंगलों में नहीं ले जा सकते थे। बंजर ज़मीन को खेती के लिए दे दिया गया। 1871 में अंग्रेजों ने ‘अपराधी जनजाति अधिनियम’ (Criminal Tribes Act) पास किया, जिसमें घुमंतू लोगों को अपराधी घोषित कर दिया गया।छात्र कानूनों के नाम और उनके परिणामों को समझेंगे।कानून:
1. वन अधिनियम
2. अपराधी जनजाति अधिनियम (1871)।
चरवाहों के जीवन पर प्रभावछात्राध्यापक कथन: चरागाह कम होने से पशुओं के लिए चारा खत्म होने लगा। पशु मरने लगे। इसके अलावा अंग्रेजों ने पशुओं पर ‘चराई कर’ (Grazing Tax) लगा दिया। मजबूर होकर कई चरवाहों को अपने पशु बेचने पड़े और मजदूरी करनी पड़ी।छात्र चरवाहों की समस्याओं को ध्यान से सुनेंगे।प्रभाव: चरागाहों की कमी, चराई कर (Tax), पशुओं की मृत्यु।

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. राजस्थान के मरुस्थल में रहने वाले प्रमुख चरवाहा समुदाय का नाम क्या है?
  2. पहाड़ी क्षेत्रों के चरवाहे सर्दियों में मैदानों की ओर क्यों आ जाते हैं?
  3. अंग्रेजों द्वारा लगाए गए ‘अपराधी जनजाति अधिनियम’ का क्या प्रभाव पड़ा?

10. गृहकार्य (Homework):

औपनिवेशिक सरकार ने चरागाहों को खेती की ज़मीन में बदलने का फैसला क्यों किया? इसके दो कारण लिखिए।

📌 नोट: यह B.Ed SST Lesson Plan दैनिक पाठ योजना पुस्तिका के लिए पूरी तरह से तैयार है।

B.Ed SST Lesson Plan 24: पाठ योजना क्रमांक – 24

दिनांक: ………………..
कक्षा: 9
कालांश: ………………..
योजना प्रकार: B.Ed SST Lesson Plan
विषय: सामाजिक विज्ञान (राजनीति विज्ञान)
उपविषय: लोकतांत्रिक राजनीति-I
प्रकरण: लोकतंत्र क्या? लोकतंत्र क्यों?
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में राजनीतिक प्रणालियों (Political systems) की समझ विकसित करना।
  2. लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति आदर भाव पैदा करना और एक जागरूक नागरिक बनाना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘लोकतंत्र’ (Democracy) की अब्राहम लिंकन द्वारा दी गई परिभाषा का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी लोकतंत्र और राजतंत्र/तानाशाही के बीच अंतर स्पष्ट कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी लोकतंत्र की विशेषताओं (स्वतंत्र चुनाव, कानून का राज) को पहचान कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी लोकतंत्र के पक्ष और विपक्ष में तर्क प्रस्तुत कर सकेंगे।

3. शिक्षण सहायक सामग्री:

मतदान करते हुए लोगों का चित्र, विश्व के मानचित्र में कुछ लोकतांत्रिक देशों को दर्शाना, चॉक, डस्टर।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

वाद-विवाद (Debate) विधि, व्याख्यान विधि, प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी भारत में होने वाले चुनावों और सरकार चुनने की प्रक्रिया के बारे में सामान्य जानकारी रखते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँ
1.पुराने समय में देशों पर किसका शासन होता था?राजाओं या महाराजाओं का (राजतंत्र)।
2.क्या राजा को जनता वोट देकर चुनती थी?नहीं।
3.वर्तमान में भारत की सरकार को कौन चुनता है?भारत की जनता (वोट डालकर)।
4.जनता द्वारा चुनी गई सरकार वाली शासन व्यवस्था को क्या कहते हैं और इसके क्या फायदे हैं?(समस्यात्मक / लोकतंत्र)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, ऐसी शासन व्यवस्था जिसमें शासकों का चुनाव जनता करती है, लोकतंत्र कहलाती है। आज हम ‘लोकतंत्र क्या है? और हमें लोकतंत्र क्यों चाहिए?’ का विस्तार से अध्ययन करेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
लोकतंत्र का अर्थ व परिभाषाछात्राध्यापक कथन: लोकतंत्र (Democracy) यूनानी शब्द ‘डेमोक्रेसिया’ से बना है (डेमोस=लोग, क्रेसिया=शासन)। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन ने कहा था: “लोकतंत्र जनता का, जनता के लिए, और जनता द्वारा शासन है।”छात्र लिंकन की परिभाषा को कॉपी में नोट करेंगे।लोकतंत्र (Democracy): जनता का, जनता के लिए, जनता द्वारा शासन।
लोकतंत्र की विशेषताएंछात्राध्यापक कथन: एक सच्चे लोकतंत्र की विशेषताएं हैं: 1. प्रमुख फैसले जनता द्वारा चुने गए नेताओं के हाथ में हों। 2. स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव हों (जैसे भारत का चुनाव आयोग)। 3. सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार (एक व्यक्ति, एक वोट, एक मोल)। 4. कानून का राज और अधिकारों का सम्मान।छात्र विशेषताओं को समझेंगे और बिंदुवार लिखेंगे।विशेषताएं:
1. स्वतंत्र/निष्पक्ष चुनाव।
2. एक व्यक्ति-एक वोट-एक मोल।
3. कानून का शासन।
लोकतंत्र क्यों? (पक्ष में तर्क)छात्राध्यापक कथन: लोकतंत्र सबसे अच्छी सरकार है क्योंकि: यह अधिक जवाबदेह (Accountable) होती है। इसमें परामर्श और चर्चा से निर्णय लिए जाते हैं जिससे गलतियों की संभावना कम होती है। यह नागरिकों का सम्मान बढ़ाती है क्योंकि सब बराबर हैं। इसमें अपनी गलती सुधारने का अवसर मिलता है (चुनाव द्वारा)।छात्र लोकतंत्र के लाभों को समझेंगे।लोकतंत्र के लाभ: अधिक जवाबदेह, निर्णय में सुधार, नागरिकों का सम्मान।

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. अब्राहम लिंकन द्वारा दी गई लोकतंत्र की परिभाषा बताइए।
  2. ‘एक व्यक्ति, एक वोट, एक मोल’ से क्या तात्पर्य है?
  3. लोकतंत्र में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव का क्या महत्व है?

10. गृहकार्य (Homework):

तानाशाही (Dictatorship) और लोकतंत्र (Democracy) में कोई तीन मुख्य अंतर स्पष्ट कीजिए।

📌 नोट: यह B.Ed SST Lesson Plan दैनिक पाठ योजना पुस्तिका के लिए पूरी तरह से तैयार है।

B.Ed SST Lesson Plan 25: पाठ योजना क्रमांक – 25

दिनांक: ………………..
कक्षा: 9
कालांश: ………………..
योजना प्रकार: B.Ed SST Lesson Plan
विषय: सामाजिक विज्ञान (राजनीति विज्ञान)
उपविषय: लोकतांत्रिक राजनीति-I
प्रकरण: संविधान निर्माण (Constitutional Design)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में देश के सर्वोच्च कानून (संविधान) के प्रति आदर और सम्मान का भाव पैदा करना।
  2. संविधान निर्माण की ऐतिहासिक प्रक्रिया से अवगत कराना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘संविधान’ (Constitution) की परिभाषा और संविधान सभा के अध्यक्ष (डॉ. राजेन्द्र प्रसाद) का नाम प्रत्यास्मरण कर सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी प्रारूप समिति (Drafting Committee) और डॉ. बी.आर. अंबेडकर के योगदान को समझ सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी भारतीय संविधान की प्रस्तावना (Preamble) में दिए गए मूल्यों (न्याय, स्वतंत्रता, समानता) का अर्थ बता सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी संविधान निर्माण के समय-क्रम (Timeline) को समझ सकेंगे (26 नवंबर 1949 और 26 जनवरी 1950 का अंतर)।

3. शिक्षण सहायक सामग्री:

भारतीय संविधान की उद्देशिका (Preamble) का बड़ा चार्ट, डॉ. बी.आर. अंबेडकर और डॉ. राजेन्द्र प्रसाद के चित्र, चॉक, डस्टर।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

व्याख्यान विधि, वाचन विधि (उद्देशिका का), प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी 15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस) और 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस) के महत्व को जानते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँ
1.हमारा देश भारत कब आज़ाद हुआ था?15 अगस्त 1947 को।
2.हम 26 जनवरी को कौन-सा राष्ट्रीय पर्व मनाते हैं?गणतंत्र दिवस (Republic Day)।
3.26 जनवरी 1950 को ऐसा क्या हुआ था जिसके कारण हम गणतंत्र दिवस मनाते हैं?हमारे देश का संविधान लागू हुआ था।
4.यह संविधान क्या है और इसे किसने और कैसे बनाया?(समस्यात्मक)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, किसी देश को सुचारू रूप से चलाने के लिए कुछ बुनियादी नियमों की आवश्यकता होती है, जिनका संग्रह संविधान कहलाता है। आज हम भारतीय ‘संविधान निर्माण’ की प्रक्रिया का अध्ययन करेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
संविधान क्या है?छात्राध्यापक कथन: संविधान लिखित नियमों की एक ऐसी किताब है, जिसे किसी देश में रहने वाले सभी लोग सामूहिक रूप से मानते हैं। यह सर्वोच्च कानून है। यह तय करता है कि सरकार कैसे बनेगी, उसकी क्या शक्तियां होंगी और नागरिकों के क्या अधिकार होंगे।छात्र संविधान की परिभाषा समझेंगे और कॉपी में लिखेंगे।संविधान: देश का सर्वोच्च कानून (बुनियादी नियमों का लिखित संग्रह)।
संविधान सभाछात्राध्यापक कथन: भारत का संविधान एक ‘संविधान सभा’ (Constituent Assembly) ने बनाया, जिसमें 299 सदस्य थे। इसके अध्यक्ष डॉ. राजेन्द्र प्रसाद थे। संविधान का ड्राफ्ट (मसौदा) तैयार करने वाली ‘प्रारूप समिति’ के अध्यक्ष डॉ. बी.आर. अंबेडकर थे। इसे बनने में 2 वर्ष, 11 महीने और 18 दिन का समय लगा।छात्र महत्वपूर्ण नाम और समय-सीमा नोट करेंगे।सभा के अध्यक्ष: डॉ. राजेन्द्र प्रसाद
प्रारूप समिति अध्यक्ष: डॉ. बी.आर. अंबेडकर
समय: 2 वर्ष 11 माह 18 दिन।
प्रस्तावना और लागू होनाछात्राध्यापक कथन: संविधान 26 नवंबर 1949 को बनकर तैयार (अंगीकृत) हो गया था, लेकिन इसे 26 जनवरी 1950 को लागू किया गया। संविधान की शुरुआत एक ‘प्रस्तावना’ (उद्देशिका) से होती है जो इसके मूल दर्शन को बताती है, जैसे हम भारत के लोग… संपूर्ण प्रभुत्व-संपन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य।छात्र उद्देशिका का वाचन करेंगे और तिथियों का अंतर समझेंगे।अंगीकृत: 26 नवं. 1949
लागू: 26 जन. 1950
प्रस्तावना: संविधान की आत्मा।

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. संविधान सभा की प्रारूप समिति के अध्यक्ष कौन थे?
  2. भारत का संविधान बनने में कुल कितना समय लगा?
  3. संविधान को 26 नवंबर 1949 को अंगीकृत करने के बाद 26 जनवरी 1950 को ही क्यों लागू किया गया? (संक्षिप्त चर्चा)

10. गृहकार्य (Homework):

अपनी पाठ्यपुस्तक से भारतीय संविधान की ‘प्रस्तावना’ (Preamble) अपनी कॉपी में सुंदर अक्षरों में लिखिए और उसमें दिए गए किन्हीं दो शब्दों का अर्थ लिखिए।

📌 नोट: यह B.Ed SST Lesson Plan दैनिक पाठ योजना पुस्तिका के लिए पूरी तरह से तैयार है।

B.Ed SST Lesson Plan 26: पाठ योजना क्रमांक – 26

दिनांक: ………………..
कक्षा: 9
कालांश: ………………..
योजना प्रकार: B.Ed SST Lesson Plan
विषय: सामाजिक विज्ञान (राजनीति विज्ञान)
उपविषय: लोकतांत्रिक राजनीति-I
प्रकरण: चुनावी राजनीति (Electoral Politics)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों को लोकतांत्रिक देश में चुनाव प्रक्रिया से परिचित कराना।
  2. मतदान के अधिकार के प्रति जागरूकता और जिम्मेदारी की भावना पैदा करना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘निर्वाचन क्षेत्र’ (Constituency), ‘मतदाता सूची’ (Voter List) और ‘चुनाव आयोग’ (Election Commission) का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी चुनाव अभियान (Election Campaign) और आचार संहिता (Model Code of Conduct) को समझ सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी चुनाव की पूरी प्रक्रिया (नामांकन से लेकर परिणाम तक) का क्रमानुसार वर्णन कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी भारत में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने वाली संस्था (चुनाव आयोग) की शक्तियों को पहचान सकेंगे।

3. शिक्षण सहायक सामग्री:

वोटर आईडी कार्ड (नमूना), EVM (Electronic Voting Machine) का चित्र, चुनावी रैली का चित्र, चॉक, डस्टर।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

व्याख्यान विधि, चरण-दर-चरण विश्लेषण विधि, प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थियों ने अपने गाँव/शहर में चुनाव प्रचार (रैलियां, लाउडस्पीकर) और मतदान केंद्र देखे हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँ
1.लोकतंत्र में जनता अपना शासक कैसे चुनती है?वोट (मत) देकर।
2.वोट देने के लिए आपकी उम्र कम से कम कितनी होनी चाहिए?18 वर्ष।
3.वोट देने के लिए आपके पास कौन-सा कार्ड होना जरूरी है?वोटर आईडी कार्ड (पहचान पत्र)।
4.यह पूरी चुनाव प्रक्रिया (नामांकन, प्रचार, वोटिंग, परिणाम) कैसे काम करती है?(समस्यात्मक)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, चुनाव लोकतंत्र का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। आज हम ‘चुनावी राजनीति’ पाठ में यह जानेंगे कि भारत में चुनाव किस प्रक्रिया द्वारा संपन्न कराए जाते हैं।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
निर्वाचन क्षेत्र और मतदाता सूचीछात्राध्यापक कथन: चुनाव के उद्देश्य से पूरे देश को कई हिस्सों में बांटा जाता है, जिन्हें ‘निर्वाचन क्षेत्र’ (Constituency) कहते हैं (जैसे लोकसभा के लिए 543 क्षेत्र)। हर क्षेत्र से एक प्रतिनिधि चुना जाता है। मतदान से पहले उन सभी लोगों की एक सूची बनाई जाती है जो वोट दे सकते हैं, इसे ‘मतदाता सूची’ (Voter List) कहते हैं।छात्र निर्वाचन क्षेत्र और मतदाता सूची का अर्थ समझेंगे।निर्वाचन क्षेत्र = चुनाव का इलाका (लोकसभा में 543)।
मतदाता सूची = वोटरों की लिस्ट।
उम्मीदवारों का नामांकन और प्रचारछात्राध्यापक कथन: जो व्यक्ति चुनाव लड़ना चाहता है, उसे ‘नामांकन पत्र’ (Nomination) भरना होता है। इसके बाद राजनीतिक दल चुनाव प्रचार (Campaign) करते हैं। चुनाव से कुछ दिन पहले ‘आचार संहिता’ लागू हो जाती है, जिसमें कोई भी नेता सरकारी पैसे का इस्तेमाल नहीं कर सकता या धर्म के नाम पर वोट नहीं मांग सकता।छात्र नामांकन और आचार संहिता के नियमों को जानेंगे।उम्मीदवारों का नामांकन।
आचार संहिता: निष्पक्ष चुनाव के नियम।
मतदान, मतगणना और चुनाव आयोगछात्राध्यापक कथन: चुनाव के दिन लोग EVM (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) पर बटन दबाकर वोट डालते हैं। फिर एक निश्चित दिन मतगणना (Counting) होती है। जिसे सबसे ज्यादा वोट मिलते हैं, वह जीतता है। यह सारा काम एक स्वतंत्र संस्था कराती है, जिसे ‘चुनाव आयोग’ (Election Commission) कहते हैं।छात्र EVM का नाम और चुनाव आयोग की भूमिका समझेंगे।EVM: Electronic Voting Machine.
चुनाव आयोग: स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराता है।

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. लोकसभा चुनाव के लिए देश को कितने निर्वाचन क्षेत्रों में बांटा गया है?
  2. EVM का पूरा नाम (Full Form) क्या है?
  3. भारत में चुनाव कराने की जिम्मेदारी किस स्वतंत्र संस्था की है?

10. गृहकार्य (Homework):

एक चुनाव प्रक्रिया के विभिन्न चरणों (मतदाता सूची से लेकर मतगणना तक) को क्रमानुसार अपनी कॉपी में लिखिए।

📌 नोट: यह B.Ed SST Lesson Plan दैनिक पाठ योजना पुस्तिका के लिए पूरी तरह से तैयार है।

B.Ed SST Lesson Plan 27: पाठ योजना क्रमांक – 27

दिनांक: ………………..
कक्षा: 9
कालांश: ………………..
योजना प्रकार: B.Ed SST Lesson Plan
विषय: सामाजिक विज्ञान (राजनीति विज्ञान)
उपविषय: लोकतांत्रिक राजनीति-I
प्रकरण: संस्थाओं का कामकाज (विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में सरकार के तीनों अंगों के कार्यों और शक्तियों की समझ विकसित करना।
  2. लोकतांत्रिक संस्थाओं के बीच संतुलन (Checks and Balances) के महत्व को स्पष्ट करना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी संसद (संसद के दोनों सदनों), कार्यपालिका और सर्वोच्च न्यायालय का नाम प्रत्यास्मरण कर सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी राजनीतिक कार्यपालिका (मंत्री) और स्थायी कार्यपालिका (सिविल सेवक/अधिकारी) में अंतर स्पष्ट कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी यह विश्लेषित कर सकेंगे कि किसी कानून को बनाने और लागू करने में कौन-कौन सी संस्थाएं शामिल होती हैं।
कौशलविद्यार्थी न्यायपालिका की स्वतंत्रता के महत्व का मूल्यांकन कर सकेंगे।

3. शिक्षण सहायक सामग्री:

संसद भवन, राष्ट्रपति भवन और सुप्रीम कोर्ट के चित्र, सरकार के तीन अंगों का रेखाचित्र (Flowchart), चॉक, डस्टर।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

व्याख्यान विधि, विश्लेषणात्मक चर्चा, प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और कोर्ट (अदालत) के नामों से सामान्य रूप से परिचित हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँ
1.देश के लिए कानून कौन बनाता है?सरकार / नेता।
2.दिल्ली में वह कौनसी जगह है जहाँ सभी सांसद बैठकर कानून पर चर्चा करते हैं?संसद भवन (Parliament)।
3.यदि कोई व्यक्ति कानून तोड़ता है, तो उसे सज़ा कौन देता है?अदालत (न्यायालय/पुलिस)।
4.लोकतंत्र में कानून बनाने, उसे लागू करने और विवाद सुलझाने के लिए कौन-कौन सी प्रमुख ‘संस्थाएं’ काम करती हैं?(समस्यात्मक)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, लोकतंत्र केवल चुनाव नहीं है, बल्कि यह संस्थाओं के माध्यम से काम करता है। आज हम ‘संस्थाओं का कामकाज’ पाठ के अंतर्गत सरकार के तीन अंगों—विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका—का अध्ययन करेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
विधायिका (संसद)छात्राध्यापक कथन: विधायिका का काम है देश के लिए कानून बनाना। भारत की राष्ट्रीय विधायिका को ‘संसद’ कहते हैं। इसके दो सदन होते हैं: 1. लोकसभा (निचला सदन, जिसे जनता सीधे चुनती है), 2. राज्यसभा (ऊपरी सदन)। संसद नए कानून बनाती है और पुराने कानूनों में संशोधन करती है।छात्र संसद के दोनों सदनों के नाम और कार्य लिखेंगे।विधायिका = संसद (कानून बनाना)।
दो सदन: लोकसभा, राज्यसभा।
कार्यपालिका (Executive)छात्राध्यापक कथन: संसद द्वारा बनाए गए कानूनों को लागू करने वाली संस्था ‘कार्यपालिका’ है। इसके दो हिस्से हैं:
1. राजनीतिक कार्यपालिका: प्रधानमंत्री और उनके मंत्री (जो जनता द्वारा कुछ समय के लिए चुने जाते हैं)।
2. स्थायी कार्यपालिका: IAS, IPS जैसे अधिकारी (सिविल सर्वेंट), जो लंबे समय तक काम करते हैं।
छात्र राजनीतिक और स्थायी कार्यपालिका का अंतर समझेंगे।कार्यपालिका = कानून लागू करना।
1. राजनीतिक (मंत्री)
2. स्थायी (अधिकारी/IAS)
न्यायपालिका (Judiciary)छात्राध्यापक कथन: देश की सभी अदालतों को मिलाकर न्यायपालिका कहते हैं। सबसे ऊपर ‘सर्वोच्च न्यायालय’ (Supreme Court) है। न्यायपालिका सरकार (विधायिका और कार्यपालिका) से स्वतंत्र होती है। इसका काम विवादों को सुलझाना, संविधान की रक्षा करना और नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करना है।छात्र न्यायपालिका की स्वतंत्रता का महत्व समझेंगे।न्यायपालिका = विवाद सुलझाना, संविधान की रक्षा।
सबसे ऊपर: सुप्रीम कोर्ट।

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. संसद के दो सदनों के नाम बताइए।
  2. राजनीतिक कार्यपालिका और स्थायी कार्यपालिका में क्या अंतर है?
  3. देश का सबसे बड़ा न्यायालय (Court) कौनसा है?

10. गृहकार्य (Homework):

सरकार के तीन अंगों (विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका) के नाम लिखकर उनके मुख्य कार्यों को एक वाक्य में स्पष्ट कीजिए।

📌 नोट: यह B.Ed SST Lesson Plan दैनिक पाठ योजना पुस्तिका के लिए पूरी तरह से तैयार है।

B.Ed SST Lesson Plan 28: पाठ योजना क्रमांक – 28

दिनांक: ………………..
कक्षा: 9
कालांश: ………………..
योजना प्रकार: B.Ed SST Lesson Plan
विषय: सामाजिक विज्ञान (भूगोल)
उपविषय: समकालीन भारत-I
प्रकरण: भारत – आकार और स्थिति
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में विश्व के संदर्भ में भारत की भौगोलिक स्थिति की समझ विकसित करना।
  2. मानचित्र अध्ययन कौशल (Map reading skills) का विकास करना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी भारत के अक्षांशीय (Latitudinal) और देशांतरीय (Longitudinal) विस्तार का मान बता सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी कर्क रेखा (Tropic of Cancer) का भारत की जलवायु पर प्रभाव और मानक याम्योत्तर (Standard Meridian) की आवश्यकता को समझ सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी विश्व के मानचित्र में भारत को उत्तरी एवं पूर्वी गोलार्ध में पहचान सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी भारत के मानचित्र पर कर्क रेखा और मानक समय रेखा को दर्शा सकेंगे।

3. शिक्षण सहायक सामग्री:

ग्लोब, विश्व का मानचित्र, भारत का भौतिक मानचित्र, चॉक, डस्टर।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

मानचित्र-प्रदर्शन विधि, व्याख्यान विधि, प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी अक्षांश और देशांतर रेखाओं के बारे में और भारत के महाद्वीप (एशिया) के बारे में जानते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँ
1.हम किस महाद्वीप में रहते हैं?एशिया महाद्वीप में।
2.विश्व को कितने गोलार्धों (Hemispheres) में बांटा गया है (भूमध्य रेखा के आधार पर)?उत्तरी और दक्षिणी गोलार्ध।
3.(ग्लोब दिखाते हुए) भारत किस गोलार्ध में स्थित है?उत्तरी गोलार्ध में।
4.विश्व मानचित्र पर भारत का कुल क्षेत्रफल और इसका अक्षांशीय/देशांतरीय विस्तार कितना है?(समस्यात्मक)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, हमारा देश भारत विश्व की प्राचीन संस्कृतियों में से एक है और भौगोलिक दृष्टि से इसका बहुत महत्व है। आज हम ‘भारत: आकार और स्थिति’ का विस्तार से अध्ययन करेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
भारत की स्थिति (अक्षांश व देशांतर)छात्राध्यापक कथन: भारत पूरी तरह से उत्तरी गोलार्ध में स्थित है। इसका मुख्य भू-भाग 8°4′ उ. से 37°6′ उ. अक्षांश तथा 68°7′ पू. से 97°25′ पू. देशांतर तक फैला है। कर्क रेखा (23°30′ उ.) देश को लगभग दो बराबर भागों में बांटती है।छात्र मानचित्र में इन रेखाओं को देखेंगे और अक्षांश/देशांतर का मान लिखेंगे।अक्षांश: 8°4′ N से 37°6′ N
देशांतर: 68°7′ E से 97°25′ E
कर्क रेखा (23°30′ N)।
आकार (क्षेत्रफल)छात्राध्यापक कथन: भारत का कुल क्षेत्रफल 32.8 लाख वर्ग किलोमीटर है, जो विश्व के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का 2.4% है। आकार की दृष्टि से भारत विश्व का 7वां सबसे बड़ा देश है। भारत की स्थलीय सीमा लगभग 15,200 किमी और समुद्री तट रेखा 7,516.6 किमी है।छात्र क्षेत्रफल और विश्व में स्थान को नोट करेंगे।क्षेत्रफल: 32.8 लाख वर्ग किमी।
विश्व का 7वां सबसे बड़ा देश।
मानक समय (Standard Time)छात्राध्यापक कथन: गुजरात और अरुणाचल प्रदेश के स्थानीय समय में लगभग 2 घंटे का अंतर है। इसलिए, पूरे देश में एक ही समय रखने के लिए 82°30′ पूर्व देशांतर को भारत की ‘मानक याम्योत्तर’ (Standard Meridian) माना गया है, जो उत्तर प्रदेश के मिर्ज़ापुर से गुजरती है।छात्र मानक समय रेखा का महत्व समझेंगे और मान याद करेंगे।मानक याम्योत्तर (IST): 82°30′ पूर्व (मिर्ज़ापुर, UP से)।

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. भारत का अक्षांशीय विस्तार (Latitudinal extent) बताइए।
  2. कर्क रेखा (Tropic of Cancer) भारत को कितने भागों में बांटती है?
  3. भारत की मानक समय रेखा (Standard Meridian) कितने डिग्री देशांतर से मानी गई है?

10. गृहकार्य (Homework):

भारत के मानचित्र पर कर्क रेखा दर्शाइए और उन राज्यों के नाम लिखिए जिनसे होकर यह रेखा गुजरती है।

📌 नोट: यह B.Ed SST Lesson Plan दैनिक पाठ योजना पुस्तिका के लिए पूरी तरह से तैयार है।

B.Ed SST Lesson Plan 29: पाठ योजना क्रमांक – 29

दिनांक: ………………..
कक्षा: 9
कालांश: ………………..
योजना प्रकार: B.Ed SST Lesson Plan
विषय: सामाजिक विज्ञान (भूगोल)
उपविषय: समकालीन भारत-I
प्रकरण: अपवाह (Drainage System)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में भारत के जल संसाधनों और नदी तंत्रों की समझ विकसित करना।
  2. जल संरक्षण और नदियों को प्रदूषण से बचाने के प्रति जागरूकता पैदा करना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘अपवाह तंत्र’, ‘जल विभाजक’ (Water divide) और ‘अपवाह द्रोणी’ (Drainage basin) की परिभाषा का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी हिमालय की नदियों (जैसे गंगा) और प्रायद्वीपीय नदियों (जैसे गोदावरी) के बीच अंतर स्पष्ट कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी नदियों के आर्थिक और कृषि संबंधी महत्व को बता सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी भारत के मानचित्र पर गंगा, सिंधु, ब्रह्मपुत्र और नर्मदा नदी को दर्शा सकेंगे।

3. शिक्षण सहायक सामग्री:

भारत का नदी मानचित्र (River Map), हिमालय और दक्षिण भारत की नदियों को दर्शाने वाला चार्ट, चॉक, डस्टर।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

मानचित्र-प्रदर्शन विधि, तुलनात्मक अध्ययन विधि, प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी आस-पास की नदियों और हिमालय पर्वत से निकलने वाली गंगा नदी के बारे में जानते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँ
1.पहाड़ों से बर्फ पिघलने या बारिश होने पर पानी कहाँ बहकर जाता है?नदियों में।
2.भारत की सबसे पवित्र और लंबी नदी किसे माना जाता है?गंगा नदी को।
3.नदी और उसकी सहायक नदियों द्वारा जो पूरा इलाका सींचा जाता है, उसे क्या कहते हैं?नदी बेसिन या द्रोणी।
4.एक क्षेत्र के नदी तंत्र (River system) को भूगोल की भाषा में क्या कहा जाता है?(समस्यात्मक / अपवाह)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, ‘अपवाह’ शब्द एक क्षेत्र के नदी तंत्र की व्याख्या करता है। आज हम ‘अपवाह’ पाठ के अंतर्गत भारत की प्रमुख नदियों—हिमालय की नदियां और प्रायद्वीपीय नदियों—का अध्ययन करेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
अपवाह और जल विभाजकछात्राध्यापक कथन: एक नदी तंत्र द्वारा जिस क्षेत्र का जल बहाकर लाया जाता है, उसे ‘अपवाह द्रोणी’ (Drainage basin) कहते हैं। कोई ऊँचा क्षेत्र (जैसे पर्वत या उच्च भूमि) जब दो पड़ोसी अपवाह द्रोणियों को अलग करता है, तो उसे ‘जल विभाजक’ (Water divide) कहते हैं (जैसे अम्बाला सिंधु और गंगा के बीच)।छात्र अपवाह और जल विभाजक का अर्थ समझेंगे।अपवाह = नदी तंत्र।
जल विभाजक = दो नदी तंत्रों को बांटने वाला ऊँचा स्थान।
हिमालय की नदियांछात्राध्यापक कथन: हिमालय की प्रमुख नदियां हैं—सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र। ये नदियां ‘बारहमासी’ (Perennial) होती हैं क्योंकि इन्हें बारिश के साथ-साथ ग्लेशियर पिघलने से साल भर पानी मिलता है। ये लंबी होती हैं और गहरे गॉर्ज बनाती हैं।छात्र हिमालय की नदियों के नाम और उनकी बारहमासी प्रकृति को जानेंगे।हिमालय की नदियां: सिंधु, गंगा, ब्रह्मपुत्र (बारहमासी)।
प्रायद्वीपीय नदियां (दक्षिण भारत)छात्राध्यापक कथन: दक्षिण भारत की नदियां (जैसे नर्मदा, तापी, गोदावरी, कृष्णा, कावेरी) मौसमी (Seasonal) होती हैं। इनका पानी सिर्फ बारिश पर निर्भर करता है। गोदावरी सबसे बड़ी प्रायद्वीपीय नदी है, जिसे ‘दक्षिण गंगा’ भी कहा जाता है।छात्र दक्षिण की नदियों के नाम और अंतर को समझेंगे।प्रायद्वीपीय नदियां: नर्मदा, गोदावरी, कृष्णा (मौसमी)।

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. ‘जल विभाजक’ (Water divide) किसे कहते हैं?
  2. हिमालय की नदियां बारहमासी (साल भर बहने वाली) क्यों होती हैं?
  3. दक्षिण भारत की सबसे लंबी नदी कौनसी है, जिसे ‘दक्षिण गंगा’ कहा जाता है?

10. गृहकार्य (Homework):

हिमालय की नदियों और प्रायद्वीपीय (दक्षिण भारत की) नदियों के बीच कोई तीन मुख्य अंतर लिखिए।

📌 नोट: यह B.Ed SST Lesson Plan दैनिक पाठ योजना पुस्तिका के लिए पूरी तरह से तैयार है।

B.Ed SST Lesson Plan 30: पाठ योजना क्रमांक – 30

दिनांक: ………………..
कक्षा: 9
कालांश: ………………..
योजना प्रकार: B.Ed SST Lesson Plan
विषय: सामाजिक विज्ञान (भूगोल)
उपविषय: समकालीन भारत-I
प्रकरण: जलवायु (Climate) – मौसम व जलवायु में अंतर
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में वायुमंडलीय दशाओं और उनके प्रभावों को समझने की वैज्ञानिक सोच विकसित करना।
  2. भारत की जलवायु विविधता (Diversity) के प्रति समझ पैदा करना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘मौसम’ (Weather) और ‘जलवायु’ (Climate) की परिभाषा का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी मौसम और जलवायु के बीच के सूक्ष्म अंतर को स्पष्ट कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी जलवायु को प्रभावित करने वाले कारकों (अक्षांश, ऊँचाई, समुद्र से दूरी) का विश्लेषण कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी तापमान और वर्षा के आंकड़ों (ग्राफ) को पढ़कर निष्कर्ष निकाल सकेंगे।

3. शिक्षण सहायक सामग्री:

भारत का जलवायु (वर्षा और तापमान) मानचित्र, ग्लोब, मौसम की जानकारी देने वाला समाचार पत्र की कटिंग, चॉक, डस्टर।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

व्याख्यान-प्रदर्शन विधि, तुलनात्मक विधि, प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी गर्मी, सर्दी, बारिश (मानसून) जैसे मौसमों का अनुभव करते हैं और समाचारों में ‘मौसम पूर्वानुमान’ देखते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँ
1.आज बाहर धूप निकली है या बादल हैं?(छात्रों का उत्तर – धूप/बादल)।
2.टीवी या अखबार में जो दिन-प्रतिदिन की जानकारी (तापमान, बारिश) आती है, उसे क्या कहते हैं?मौसम की जानकारी।
3.यदि हम कहें कि राजस्थान हमेशा गर्म रहता है और कश्मीर ठंडा रहता है, तो यह वहां का क्या कहलाता है?जलवायु।
4.मौसम और जलवायु में मुख्य रूप से क्या अंतर है?(समस्यात्मक)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, हम अक्सर मौसम और जलवायु शब्दों का एक ही अर्थ में प्रयोग कर लेते हैं, लेकिन भूगोल में इनमें अंतर है। आज हम ‘जलवायु’ पाठ में मौसम व जलवायु का अर्थ तथा जलवायु को प्रभावित करने वाले कारकों का अध्ययन करेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
मौसम और जलवायु का अर्थछात्राध्यापक कथन: ‘मौसम’ (Weather) किसी एक स्थान की अल्पकालिक (short-term) वायुमंडलीय दशा है। यह दिन में कई बार बदल सकता है (जैसे सुबह धूप, शाम को बारिश)। ‘जलवायु’ (Climate) एक विशाल क्षेत्र में लंबी अवधि (30 वर्ष से अधिक) के मौसम की अवस्थाओं का कुल योग है। भारत की जलवायु ‘मानसूनी’ है।छात्र मौसम (अल्पावधि) और जलवायु (दीर्घावधि) का अंतर समझेंगे।मौसम: अल्पकालिक (दिन-प्रतिदिन का बदलाव)।
जलवायु: दीर्घकालिक (30+ वर्ष का औसत)।
जलवायु के तत्वछात्राध्यापक कथन: मौसम और जलवायु दोनों के तत्व (Elements) एक ही होते हैं: तापमान (Temperature), वायुमंडलीय दाब (Air pressure), पवन (Wind), आर्द्रता (Humidity) और वर्षण (Precipitation/बारिश)।छात्र जलवायु के प्रमुख तत्वों के नाम कॉपी में लिखेंगे।तत्व: तापमान, दाब, पवन, आर्द्रता, वर्षा।
जलवायु नियंत्रण के कारकछात्राध्यापक कथन: किसी स्थान की जलवायु 6 मुख्य कारकों पर निर्भर करती है: 1. अक्षांश (भूमध्य रेखा से दूरी), 2. ऊँचाई (पहाड़ ठंडे होते हैं), 3. वायुदाब एवं पवन, 4. समुद्र से दूरी (समुद्र के पास सम जलवायु), 5. महासागरीय धाराएं, 6. उच्चावच (Relief)।छात्र जलवायु को प्रभावित करने वाले कारकों को समझेंगे।कारक: अक्षांश, ऊँचाई, समुद्र से दूरी, उच्चावच।

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. मौसम (Weather) से आप क्या समझते हैं?
  2. भारत की जलवायु को किस प्रकार की जलवायु कहा जाता है?
  3. पहाड़ी इलाके (जैसे शिमला) मैदानी इलाकों की तुलना में ठंडे क्यों होते हैं?

10. गृहकार्य (Homework):

मौसम और जलवायु के बीच तीन प्रमुख अंतर लिखिए और बताइए कि किसी स्थान की ‘समुद्र से दूरी’ वहां की जलवायु को कैसे प्रभावित करती है?

📌 नोट: यह B.Ed SST Lesson Plan दैनिक पाठ योजना पुस्तिका के लिए पूरी तरह से तैयार है।

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📝 सारांश: B.Ed SST Lesson Plan का महत्व

एक उत्कृष्ट B.Ed SST Lesson Plan न केवल शिक्षण को सुनियोजित बनाता है बल्कि कक्षा में विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने का सबसे प्रभावी साधन है। इतिहास, भूगोल और राजनीति शास्त्र के विभिन्न प्रकरणों पर आधारित यह विस्तृत B.Ed SST Lesson Plan अनुक्रमणिका हमारे भावी शिक्षकों को बिना किसी संकोच के कक्षा संचालन करने में अत्यंत सहायता प्रदान करेगी।