B.Ed Science Lesson Plans: B.Ed Internship विज्ञान पाठ योजना कक्षा 6, 7, 8, 9, 10

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कक्षा 6-8 के लिए 18 तथा कक्षा 9-10 के लिए 12 (कुल 30) सम्पूर्ण दैनिक पाठ योजनाएं (निर्मितवाद उपागम आधारित)

B.Ed Science Lesson Plan

📝 B.Ed Science Lesson Plans – प्रस्तावना व निर्देश

यह पेज बी.एड (B.Ed), डी.एल.एड (D.El.Ed), और बीटीसी (BTC) प्रशिक्षणार्थियों के लिए उच्च गुणवत्ता युक्त और पूर्णतः तैयार B.Ed Science Lesson Plan (विज्ञान पाठ योजना) का सबसे मुख्य संग्रह है। अध्यापन अभ्यास के दौरान एक बेहतरीन B.Ed Science Lesson Plan तैयार करना अनिवार्य होता है, और हमारी यह मार्गदर्शिका इस कार्य को आपके लिए अत्यंत सरल बनाती है।

चाहे आपको जीव विज्ञान (Biology), रसायन विज्ञान (Chemistry), या भौतिक विज्ञान (Physics) के प्रकरणों पर एक प्रभावशाली B.Ed Science Lesson Plan तैयार करना हो, यहाँ दिए गए सभी 30 दैनिक पाठ योजनाएं आपको प्रस्तावना प्रश्न, शिक्षण सहायक सामग्री, सामान्य व विशिष्ट उद्देश्य, प्रस्तुतीकरण प्रारूप, श्यामपट्ट कार्य, और मूल्यांकन प्रश्नों की पूर्ण जानकारी प्रदान करते हैं।

📋 B.Ed विज्ञान पाठ योजना अनुक्रमणिका (Index)

नीचे सभी 30 पाठ योजनाओं की विस्तृत अनुक्रमणिका सूची दी गई है। किसी भी पाठ योजना का प्रकरण (Topic) देखने के लिए “विवरण देखें” बटन पर क्लिक करें।

योजना सं.कक्षाउपविषय (Sub)पाठ योजना प्रकरण (Topic)त्वरित लिंक
1Class 6जीव विज्ञानभोजन के घटक (Components of Food) विवरण देखें
2Class 6रसायन विज्ञानवस्तुओं के समूह बनाना (Sorting Materials) विवरण देखें
3Class 6रसायन विज्ञानपदार्थों का पृथक्करण (Separation) विवरण देखें
4Class 6वनस्पति विज्ञानपौधों को जानिए (Know Plants) विवरण देखें
5Class 6जीव विज्ञानशरीर में गति (Body Movements) विवरण देखें
6Class 6जीव विज्ञान / पर्यावरणसजीव विशेषताएं एवं आवास विवरण देखें
7Class 7वनस्पति विज्ञानपादपों में पोषण (Nutrition in Plants) विवरण देखें
8Class 7जीव विज्ञानप्राणियों में पोषण (Nutrition in Animals) विवरण देखें
9Class 7भौतिक विज्ञानऊष्मा (Heat) विवरण देखें
10Class 7रसायन विज्ञानअम्ल, क्षारक और लवण (Acids, Bases & Salts) विवरण देखें
11Class 7भौतिक/रसायन विज्ञानभौतिक एवं रासायनिक परिवर्तन विवरण देखें
12Class 7जीव विज्ञानजीवों में श्वसन (Respiration in Organisms) विवरण देखें
13Class 8कृषि विज्ञानफसल उत्पादन एवं प्रबंध (Crop Management) विवरण देखें
14Class 8जीव विज्ञानसूक्ष्मजीव : मित्र एवं शत्रु विवरण देखें
15Class 8रसायन / पर्यावरणकोयला और पेट्रोलियम (Coal and Petroleum) विवरण देखें
16Class 8भौतिक/रसायनदहन और ज्वाला (Combustion & Flame) विवरण देखें
17Class 8भौतिक विज्ञानबल तथा दाब (Force and Pressure) विवरण देखें
18Class 8भौतिक विज्ञानध्वनि (Sound) विवरण देखें
19Class 9रसायन विज्ञानहमारे आस-पास के पदार्थ (Matter) विवरण देखें
20Class 9रसायन विज्ञानक्या हमारे आस-पास के पदार्थ शुद्ध हैं? विवरण देखें
21Class 9रसायन विज्ञानपरमाणु एवं अणु (Atoms and Molecules) विवरण देखें
22Class 9जीव विज्ञानजीवन की मौलिक इकाई (Fundamental Unit of Life) विवरण देखें
23Class 9जीव विज्ञानऊतक (Tissues) विवरण देखें
24Class 9भौतिक विज्ञानगति (Motion) विवरण देखें
25Class 10रसायन विज्ञानरासायनिक अभिक्रियाएं एवं समीकरण विवरण देखें
26Class 10रसायन विज्ञानधातु एवं अधातु (Metals & Non-metals) विवरण देखें
27Class 10जीव विज्ञानजैव प्रक्रम (Life Processes) – पोषण विवरण देखें
28Class 10जीव विज्ञाननियंत्रण एवं समन्वय (Control & Coord) विवरण देखें
29Class 10भौतिक विज्ञानप्रकाश – परावर्तन तथा अपवर्तन विवरण देखें
30Class 10भौतिक विज्ञानविद्युत (Electricity) विवरण देखें

गतिविधि क्रमांक-11: 18 B.Ed Science Lesson Plan (प्रथम ब्लॉक शिक्षण अभ्यास)

B.Ed Science Lesson Plan (Plans 1 to 18) for Classes 6, 7 and 8

B.Ed Science Lesson Plan 1: पाठ योजना क्रमांक – 1

दिनांक: ………………..
कक्षा: 6
कालांश: ………………..
योजना प्रकार: B.Ed Science Lesson Plan
विषय: विज्ञान
उपविषय: जीव विज्ञान
प्रकरण: भोजन के घटक (Components of Food)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में विज्ञान विषय के प्रति रुचि जाग्रत करना।
  2. विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास करना।
  3. विद्यार्थियों में तार्किक एवं निरीक्षण क्षमता का विकास करना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी भोजन के विभिन्न घटकों (कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, विटामिन आदि) का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी भोजन के विभिन्न घटकों के कार्यों और स्रोतों को समझ सकेंगे और उनमें अंतर कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी प्राप्त ज्ञान का उपयोग करके संतुलित आहार का चयन कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी विभिन्न खाद्य पदार्थों में मौजूद पोषक तत्वों की पहचान का चार्ट बना सकेंगे।

3. शिक्षण सहायक सामग्री:

चॉक, डस्टर, लपेट फलक, संकेतक, संतुलित आहार का चार्ट, विभिन्न खाद्य पदार्थों (दाल, चावल, फल) के चित्र।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

व्याख्यान-प्रदर्शन विधि, प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी भोजन और उसके सामान्य स्रोतों (पेड़-पौधों एवं जंतुओं) के बारे में सामान्य जानकारी रखते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँ
1.हमें काम करने के लिए ऊर्जा कहाँ से मिलती है?भोजन से।
2.हम भोजन में क्या-क्या खाते हैं?दाल, रोटी, चावल, सब्जी, फल आदि।
3.इन सभी खाद्य पदार्थों से हमारे शरीर को क्या मिलता है?पोषक तत्व।
4.भोजन के मुख्य पोषक तत्व (घटक) कौन-कौन से हैं?(समस्यात्मक)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, आज हम विज्ञान विषय के अंतर्गत ‘भोजन के घटक’ (पोषक तत्वों) के बारे में विस्तार से अध्ययन करेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
कार्बोहाइड्रेट और वसाविकासात्मक प्रश्न:
1. रोटी और चावल खाने से क्या मिलता है? (ऊर्जा)
2. कार्बोहाइड्रेट किसे कहते हैं? (निरुत्तर)
छात्राध्यापक कथन: कार्बोहाइड्रेट हमारे शरीर को मुख्य रूप से ऊर्जा प्रदान करते हैं। चावल, गेहूँ, आलू इसके मुख्य स्रोत हैं। वसा (Fats) से भी ऊर्जा मिलती है, बल्कि कार्बोहाइड्रेट से अधिक ऊर्जा मिलती है। तेल, घी, मक्खन वसा के स्रोत हैं।
छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे तथा मुख्य बिंदुओं को नोट करेंगे।कार्बोहाइड्रेट, वसा = ऊर्जा देने वाले भोजन।
स्रोत = गेहूँ, आलू, घी, तेल।
प्रोटीनविकासात्मक प्रश्न:
1. शरीर की वृद्धि के लिए क्या आवश्यक है? (निरुत्तर)
छात्राध्यापक कथन: शरीर की वृद्धि तथा स्वस्थ रहने के लिए प्रोटीन आवश्यक है। प्रोटीन युक्त भोजन को प्रायः ‘शरीर वर्धक भोजन’ कहते हैं। दालें, सोयाबीन, दूध, अंडा और माँस इसके मुख्य स्रोत हैं।
छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे।प्रोटीन = शरीर वर्धक भोजन।
स्रोत = दालें, सोयाबीन, दूध।
विटामिन और खनिज लवणविकासात्मक प्रश्न:
1. बीमारियों से बचने के लिए हमें क्या खाना चाहिए? (फल और हरी सब्जियां)
छात्राध्यापक कथन: विटामिन रोगों से हमारे शरीर की रक्षा करते हैं। हमारी आँख, हड्डियों और मसूड़ों को स्वस्थ रखते हैं। खनिज लवण शरीर के उचित विकास के लिए आवश्यक हैं। ताज़े फल, सब्जियाँ और दूध इनके स्रोत हैं।
छात्र ध्यान से सुनेंगे और चार्ट को देखेंगे।विटामिन = रोगों से रक्षा।
स्रोत = फल, हरी सब्जियाँ।

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. ऊर्जा देने वाले पोषक तत्व कौन-कौन से हैं?
  2. प्रोटीन के दो मुख्य स्रोत बताइए।
  3. हमारे शरीर को रोगों से कौन बचाता है?
  4. रिक्त स्थान भरें: शरीर वर्धक भोजन …….. को कहते हैं। (प्रोटीन/वसा)

10. गृहकार्य (Homework):

संतुलित आहार किसे कहते हैं? अपने प्रतिदिन के भोजन की सूची बनाकर उसमें उपस्थित पोषक तत्वों के नाम लिखिए।

📌 नोट: यह B.Ed Science Lesson Plan दैनिक पाठ योजना पुस्तिका के लिए पूरी तरह से तैयार है।

B.Ed Science Lesson Plan 2: पाठ योजना क्रमांक – 2

दिनांक: ………………..
कक्षा: 6
कालांश: ………………..
योजना प्रकार: B.Ed Science Lesson Plan
विषय: विज्ञान
उपविषय: रसायन विज्ञान
प्रकरण: वस्तुओं के समूह बनाना (Sorting Materials into Groups)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में विज्ञान विषय के प्रति रुचि उत्पन्न करना।
  2. विद्यार्थियों में वर्गीकरण और अवलोकन कौशल का विकास करना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी वस्तुओं के विभिन्न गुणों (दिखावट, कठोरता, विलेयता आदि) को जान सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी पारदर्शी, अपारदर्शी और पारभासी वस्तुओं के बीच अंतर समझ सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी दैनिक जीवन की वस्तुओं को उनके गुणों के आधार पर वर्गीकृत कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी वस्तुओं के समूह बनाने की सारणी तैयार कर सकेंगे।

3. शिक्षण सहायक सामग्री:

काँच का गिलास, लकड़ी का टुकड़ा, पानी, चीनी, तेल, टॉर्च, चॉक।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रदर्शन विधि, प्रश्नोत्तर प्रविधि, व्याख्यान विधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी अपने आस-पास पाई जाने वाली विभिन्न वस्तुओं (कुर्सी, पानी, काँच) के बारे में जानते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँ
1.कक्षा में आपको कौन-कौन सी वस्तुएं दिखाई दे रही हैं?टेबल, कुर्सी, चॉक, डस्टर आदि।
2.टेबल और कुर्सी किस पदार्थ से बनी हैं?लकड़ी या प्लास्टिक से।
3.खिड़की में क्या लगा होता है जिसके आर-पार हम देख सकते हैं?काँच।
4.वस्तुओं को उनके गुणों के आधार पर अलग-अलग समूहों में कैसे बांटते हैं?(समस्यात्मक)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, आज हम वस्तुओं के विभिन्न गुणों के आधार पर ‘वस्तुओं के समूह बनाना’ सीखेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
दिखावट और कठोरताविकासात्मक प्रश्न: लोहा कैसा होता है? (कठोर)।
छात्राध्यापक कथन: कुछ वस्तुएं दिखने में चमकीली (द्युतिवान) होती हैं जैसे धातुएँ (लोहा, तांबा, सोना)। कुछ वस्तुएं कठोर होती हैं जिन्हें आसानी से दबाया नहीं जा सकता, जबकि कुछ कोमल होती हैं जैसे स्पंज या रुई।
छात्र सुनेंगे और धातुओं के नाम लिखेंगे।गुण: दिखावट (चमक), कठोरता (कठोर/कोमल)।
विलेय (Soluble) और अविलेय (Insoluble)प्रदर्शन: पानी में चीनी और रेत घोलकर दिखाना。
छात्राध्यापक कथन: जो पदार्थ पानी में पूरी तरह घुल जाते हैं, उन्हें विलेय कहते हैं (जैसे- नमक, चीनी)। जो नहीं घुलते, वे अविलेय कहलाते हैं (जैसे- रेत, लकड़ी का बुरादा)।
छात्र प्रयोग को ध्यानपूर्वक देखेंगे और निष्कर्ष समझेंगे।विलेय = जो जल में घुल जाएं।
अविलेय = जो जल में न घुलें।
पारदर्शी, अपारदर्शी और पारभासीविकासात्मक प्रश्न: क्या हम दीवार के आर-पार देख सकते हैं? (नहीं)।
छात्राध्यापक कथन: जिन पदार्थों के आर-पार देखा जा सके (जैसे काँच, जल) पारदर्शी हैं। जिनके आर-पार न देखा जा सके (लकड़ी, धातु) अपारदर्शी हैं। और जिनसे धुंधला दिखाई दे (तेल लगा कागज) पारभासी हैं।
छात्र पारदर्शी और अपारदर्शी के उदाहरण देंगे।पारदर्शी = आर-पार दिखे।
अपारदर्शी = आर-पार न दिखे।
पारभासी = धुंधला दिखे।

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. विलेय और अविलेय पदार्थ में क्या अंतर है?
  2. पारदर्शी पदार्थ के दो उदाहरण दीजिए।
  3. लकड़ी अपारदर्शी है या पारदर्शी?

10. गृहकार्य (Homework):

अपने घर में पाई जाने वाली 10 वस्तुओं की सूची बनाइए और उन्हें पारदर्शी, अपारदर्शी और पारभासी में वर्गीकृत कीजिए।

📌 नोट: यह B.Ed Science Lesson Plan दैनिक पाठ योजना पुस्तिका के लिए पूरी तरह से तैयार है।

B.Ed Science Lesson Plan 3: पाठ योजना क्रमांक – 3

दिनांक: ………………..
कक्षा: 6
कालांश: ………………..
योजना प्रकार: B.Ed Science Lesson Plan
विषय: विज्ञान
उपविषय: रसायन विज्ञान
प्रकरण: पदार्थों का पृथक्करण (Separation of Substances)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और निरीक्षण क्षमता का विकास करना।
  2. विद्यार्थियों को दैनिक जीवन में विज्ञान के उपयोग से परिचित कराना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी पृथक्करण की विभिन्न विधियों (हस्त चयन, थ्रेशिंग, निष्पावन, चालन) को जान सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी यह समझ सकेंगे कि पदार्थों को अलग करने की आवश्यकता क्यों होती है।
अनुप्रयोगविद्यार्थी घर पर अनाज या दालों को साफ करने में उचित विधि का प्रयोग कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी चालन और निस्यंदन (छानना) का प्रायोगिक कार्य कर सकेंगे।

3. शिक्षण सहायक सामग्री:

गेहूँ/दाल के दाने जिनमें कंकड़ हों, छन्नी, पानी, रेत, फिल्टर पेपर, चॉक, डस्टर।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रदर्शन विधि, व्याख्यान विधि, प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी घर में अपनी माता जी को चावल या दाल से कंकड़ निकालते हुए तथा चाय छानते हुए देखते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँ
1.चाय बनने के बाद हम उसे कप में डालने से पहले क्या करते हैं?छलनी से छानते हैं।
2.हम चाय को क्यों छानते हैं?चायपत्ती को अलग करने के लिए।
3.चावल या दाल पकाने से पहले उसमें से कंकड़ कैसे निकालते हैं?हाथ से चुनकर।
4.मिश्रण में से उपयोगी और अनुपयोगी पदार्थों को अलग करने की इन विधियों को विज्ञान में क्या कहते हैं?(समस्यात्मक)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, आज हम पदार्थों को अलग करने की विभिन्न विधियों यानी ‘पदार्थों का पृथक्करण’ का अध्ययन करेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
पृथक्करण की आवश्यकता एवं हस्त चयनविकासात्मक प्रश्न: हम पदार्थों को अलग क्यों करते हैं? (अशुद्धियां दूर करने के लिए)।
छात्राध्यापक कथन: हानिकारक या अनुपयोगी पदार्थों को अलग करने के लिए पृथक्करण किया जाता है। दालों या चावल से कंकड़, पत्थर हाथ से बीन कर निकाले जाते हैं, इस विधि को ‘हस्त चयन’ (Handpicking) कहते हैं।
छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे।हस्त चयन: हाथ से अशुद्धियां चुनना।
थ्रेशिंग और निष्पावनछात्राध्यापक कथन: सूखे पौधों (डंडियों) से अन्नकणों को अलग करने की प्रक्रिया को ‘थ्रेशिंग’ कहते हैं। पवन (हवा) के झोंकों द्वारा भारी और हल्के अवयवों (जैसे गेहूँ और भूसा) को अलग करने की विधि को ‘निष्पावन’ (Winnowing) कहते हैं।छात्र थ्रेशिंग और निष्पावन के बारे में समझेंगे।थ्रेशिंग: अन्न को डंडियों से अलग करना。
निष्पावन: हवा से भूसा अलग करना।
चालन (Sieving) और निस्यंदन (Filtration)प्रदर्शन: आटे को छलनी से छानना तथा पानी और रेत को फिल्टर पेपर से छानना।
छात्राध्यापक कथन: भिन्न आकार के कणों को छलनी द्वारा अलग करना चालन कहलाता है। द्रव और ठोस के मिश्रण से ठोस को फिल्टर (छन्नी) द्वारा अलग करना निस्यंदन (छानना) कहलाता है।
छात्र प्रयोग देखेंगे।चालन: छलनी से छानना।
निस्यंदन: फिल्टर से द्रव-ठोस अलग करना।

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. हस्त चयन विधि का उपयोग कहाँ किया जाता है?
  2. हवा की सहायता से अनाज और भूसे को अलग करने की विधि क्या कहलाती है?
  3. चायपत्ती को चाय से अलग करना कौनसी विधि है?

10. गृहकार्य (Homework):

चालन, निष्पावन और निस्यंदन विधियों को उदाहरण सहित परिभाषित कीजिए।

📌 नोट: यह B.Ed Science Lesson Plan दैनिक पाठ योजना पुस्तिका के लिए पूरी तरह से तैयार है।

B.Ed Science Lesson Plan 4: पाठ योजना क्रमांक – 4

दिनांक: ………………..
कक्षा: 6
कालांश: ………………..
योजना प्रकार: B.Ed Science Lesson Plan
विषय: विज्ञान
उपविषय: वनस्पति विज्ञान
प्रकरण: पौधों को जानिए (Getting to Know Plants)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में प्रकृति एवं वनस्पतियों के प्रति प्रेम उत्पन्न करना।
  2. विद्यार्थियों में पर्यावरण संरक्षण की भावना का विकास करना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी शाक, झाड़ी और वृक्ष की पहचान कर सकेंगे तथा पौधे के विभिन्न भागों को जान सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी जड़, तना और पत्ती के कार्यों को समझ सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी अपने आस-पास के पौधों का अवलोकन कर उन्हें वर्गीकृत कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी पौधे का नामांकित चित्र बनाने में कौशल प्राप्त करेंगे।

3. शिक्षण सहायक सामग्री:

एक छोटा उखड़ा हुआ पौधा (जड़ सहित), शाक, झाड़ी और वृक्ष को दर्शाने वाला चार्ट।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रदर्शन विधि, अवलोकन प्रविधि, व्याख्यान विधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी अपने आस-पास पाए जाने वाले विभिन्न पेड़-पौधों से परिचित हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँ
1.हमारे घर या स्कूल के बगीचे में क्या लगे होते हैं?पेड़-पौधे और फूल।
2.पौधे का वह भाग जो ज़मीन के अंदर होता है, क्या कहलाता है?जड़।
3.पौधे का वह भाग जो हरा होता है, क्या कहलाता है?पत्तियां।
4.पौधों के आकार और तने के आधार पर उन्हें कितने भागों में बांटा गया है?(समस्यात्मक)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, आज हम पौधों के विभिन्न प्रकारों और उनके भागों के कार्यों के बारे में ‘पौधों को जानिए’ पाठ के अंतर्गत पढ़ेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
शाक, झाड़ी और वृक्षछात्राध्यापक कथन: हरे एवं कोमल तने वाले छोटे पौधे ‘शाक’ (Herb) कहलाते हैं (जैसे- धनिया, टमाटर)। जिनमें शाखाएं तने के आधार के समीप से निकलती हैं और तना कठोर होता है, वे ‘झाड़ी’ (Shrub) हैं (जैसे- गुलाब, नींबू)। जो बहुत ऊँचे होते हैं और तना सुदृढ़ व गहरा होता है, वे ‘वृक्ष’ (Tree) कहलाते हैं (जैसे- आम, नीम)।छात्र उदाहरणों को समझेंगे और अपनी कॉपी में लिखेंगे।पौधों के प्रकार:
1. शाक (कोमल तना)
2. झाड़ी (आधार से शाखाएं)
3. वृक्ष (बड़ा एवं कठोर)
तना (Stem) और पत्ती (Leaf)प्रदर्शन: पौधे का तना और पत्ती दिखाना。
छात्राध्यापक कथन: तना पानी और खनिजों को जड़ों से पत्तियों तक पहुँचाता है। पत्ती भोजन बनाती है (प्रकाश संश्लेषण)। पत्ती का वह भाग जो तने से जुड़ा होता है, पर्णवृंत (Petiole) कहलाता है।
छात्र पौधे के भागों को ध्यान से देखेंगे।तना: जल का संवहन।
पत्ती: पर्णवृंत, भोजन बनाना।
जड़ (Root)छात्राध्यापक कथन: जड़ मिट्टी से जल और खनिज लवणों का अवशोषण करती है और पौधे को मिट्टी में जमाए रखती है। मुख्य रूप से जड़ें दो प्रकार की होती हैं: मूसला जड़ (Tap root) और झकड़ा/रेशेदार जड़ (Fibrous root)।छात्र सुनेंगे।जड़ के कार्य: जल अवशोषण, पौधे को स्थिर रखना।

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. शाक और झाड़ी में क्या अंतर है?
  2. पौधे में तने का मुख्य कार्य क्या है?
  3. गुलाब का पौधा किस श्रेणी में आता है? (शाक/झाड़ी/वृक्ष)

10. गृहकार्य (Homework):

एक पुष्पी पौधे का सुंदर चित्र बनाइए तथा उसके सभी भागों (जड़, तना, पत्ती, फूल) के नाम लिखिए।

📌 नोट: यह B.Ed Science Lesson Plan दैनिक पाठ योजना पुस्तिका के लिए पूरी तरह से तैयार है।

B.Ed Science Lesson Plan 5: पाठ योजना क्रमांक – 5

दिनांक: ………………..
कक्षा: 6
कालांश: ………………..
योजना प्रकार: B.Ed Science Lesson Plan
विषय: विज्ञान
उपविषय: जीव विज्ञान
प्रकरण: शरीर में गति (Body Movements)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में जीव विज्ञान के प्रति रुचि उत्पन्न करना।
  2. विद्यार्थियों को मानव शरीर की संरचना से परिचित कराना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी मानव शरीर की विभिन्न संधियों (Joints) के नाम जान सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी यह समझ सकेंगे कि हमारी हड्डियां कैसे जुड़ी होती हैं और गति कैसे होती है।
अनुप्रयोगविद्यार्थी अपने शरीर के अंगों को हिलाकर विभिन्न संधियों की कार्यप्रणाली को महसूस कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी कंदुक-खल्लिका संधि का मॉडल बनाने का कौशल विकसित कर सकेंगे।

3. शिक्षण सहायक सामग्री:

मानव कंकाल का चार्ट, गेंद और कटोरी (कंदुक-खल्लिका संधि समझाने हेतु)।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रदर्शन विधि, करके सीखना (गतिविधि), व्याख्यान विधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी यह जानते हैं कि हम अपने हाथ-पैर, गर्दन आदि को हिला-डुला सकते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँ
1.जब आप चलते हैं या खेलते हैं, तो शरीर के कौनसे अंग हिलते हैं?हाथ, पैर।
2.क्या हम अपने हाथ को कोहनी से मोड़ सकते हैं?हाँ।
3.क्या हम अपने हाथ को बीच में से कहीं से भी मोड़ सकते हैं?नहीं।
4.हाथ वहीं से क्यों मुड़ता है जहाँ जोड़ होता है? इन जोड़ों को विज्ञान में क्या कहते हैं?(समस्यात्मक)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, आज हम मानव शरीर में होने वाली गतियों और हड्डियों के जोड़ों (संधियों) के बारे में विस्तार से पढ़ेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
संधि (Joint) क्या है?छात्राध्यापक कथन: हमारे शरीर के विभिन्न अंग जहाँ एक-दूसरे से जुड़े होते हैं, उस स्थान को संधि (Joint) कहते हैं। जैसे- कोहनी, कंधा, गर्दन। संधियों के कारण ही हम अंगों को मोड़ पाते हैं।छात्र अपनी कोहनी मोड़कर देखेंगे।संधि (Joint): जहाँ हड्डियां जुड़ती हैं।
कंदुक-खल्लिका संधि (Ball and Socket Joint)प्रदर्शन: कटोरी में गेंद रखकर घुमाना。
छात्राध्यापक कथन: इस संधि में एक अस्थि का गेंद वाला गोल हिस्सा दूसरी अस्थि की कटोरी रूपी गुहिका में धँसा रहता है। यह सभी दिशाओं में गति प्रदान करता है। यह संधि हमारे कंधे (Shoulder) और कूल्हे (Hip) में पाई जाती है।
छात्र अपने कंधे को गोल घुमाकर अनुभव करेंगे।कंदुक-खल्लिका संधि: सभी दिशाओं में गति (कंधा, कूल्हा)।
हिंज संधि (Hinge Joint) और धुराग्र संधि (Pivot Joint)छात्राध्यापक कथन: हिंज संधि दरवाजे के कब्ज़े की तरह काम करती है, जो केवल एक ही दिशा में (आगे-पीछे) गति होने देती है। यह कोहनी और घुटने में होती है। धुराग्र संधि गर्दन को सिर से जोड़ती है, जिससे हम सिर को आगे-पीछे और दाएँ-बाएँ घुमा सकते हैं।छात्र गर्दन और कोहनी हिलाकर गति को समझेंगे।हिंज संधि: कोहनी, घुटना (एक दिशा)।
धुराग्र संधि: गर्दन (दाएँ-बाएँ गति)।

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. कंदुक-खल्लिका संधि शरीर में कहाँ पाई जाती है?
  2. कोहनी में कौनसी संधि होती है जो उसे केवल एक दिशा में मुड़ने देती है?
  3. हमारे शरीर को निश्चित आकार कौन प्रदान करता है? (कंकाल)

10. गृहकार्य (Homework):

विभिन्न प्रकार की संधियों (जोड़ों) के नाम लिखकर शरीर में उनके स्थान बताइए।

📌 नोट: यह B.Ed Science Lesson Plan दैनिक पाठ योजना पुस्तिका के लिए पूरी तरह से तैयार है।

B.Ed Science Lesson Plan 6: पाठ योजना क्रमांक – 6

दिनांक: ………………..
कक्षा: 6
कालांश: ………………..
योजना प्रकार: B.Ed Science Lesson Plan
विषय: विज्ञान
उपविषय: जीव विज्ञान / पर्यावरण
प्रकरण: सजीव विशेषताएँ एवं आवास
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में पर्यावरण और सजीवों के प्रति संवेदनशीलता का विकास करना।
  2. विद्यार्थियों में अन्वेषण एवं अवलोकन की प्रवृत्ति का विकास करना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी सजीवों के मुख्य लक्षणों (श्वसन, वृद्धि, प्रजनन) को जान सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी सजीवों के विभिन्न आवासों (स्थलीय, जलीय) और उनके अनुकूलन को समझ सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी अपने आस-पास के जंतुओं के आवास और उनके शारीरिक अनुकूलन का विश्लेषण कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी मछली और ऊँट के चित्र बनाकर उनके अनुकूलित अंगों को दर्शा सकेंगे।

3. शिक्षण सहायक सामग्री:

ऊँट, मछली और कैक्टस (नागफनी) के चित्र या चार्ट, चॉक, डस्टर।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

व्याख्यान विधि, चित्र प्रदर्शन, प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी गाय, कुत्ता, मछली आदि जंतुओं और उनके रहने के स्थानों के बारे में जानते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँ
1.मछली कहाँ रहती है?पानी में।
2.ऊँट कहाँ पाया जाता है?रेगिस्तान में।
3.यदि मछली को पानी से बाहर निकाल दें तो क्या होगा?वह मर जाएगी।
4.सजीव जिस परिवेश (माहौल) में रहते हैं, उसे क्या कहते हैं और वे उसमें कैसे जीवित रहते हैं?(समस्यात्मक)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, आज हम सजीवों की विशेषताओं, उनके रहने के स्थान (आवास) और उनके अनुकूलन के बारे में अध्ययन करेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
आवास (Habitat) और अनुकूलन (Adaptation)छात्राध्यापक कथन: किसी सजीव का वह स्थान जहाँ वह रहता है, उसका ‘आवास’ कहलाता है। जंतुओं या पौधों में कुछ विशिष्ट लक्षण होते हैं जो उन्हें उनके आवास में जीवित रहने में मदद करते हैं, इसे ‘अनुकूलन’ कहते हैं।छात्र आवास और अनुकूलन की परिभाषा सुनेंगे।आवास: रहने का स्थान।
अनुकूलन: उस स्थान के अनुसार ढलना।
मरुस्थलीय और जलीय अनुकूलनचित्र प्रदर्शन: ऊँट और मछली का चित्र。
छात्राध्यापक कथन: ऊँट के पैर लंबे होते हैं जो उसे रेत की गर्मी से बचाते हैं, वह बिना पानी पिए कई दिन रह सकता है। यह मरुस्थलीय अनुकूलन है। मछली का शरीर धारारेखीय होता है, वह गिल्स (क्लोम) द्वारा पानी में सांस लेती है। यह जलीय अनुकूलन है।
छात्र चित्रों को देखेंगे और समझेंगे।ऊँट: लंबे पैर, मरुस्थल का जहाज।
मछली: गिल्स, धारारेखीय शरीर।
सजीवों के लक्षणविकासात्मक प्रश्न: क्या पत्थर साँस लेता है? (नहीं)।
छात्राध्यापक कथन: सजीवों में कुछ विशेष लक्षण होते हैं: उन्हें भोजन की आवश्यकता होती है, वे श्वसन (साँस लेना) करते हैं, वे उद्दीपन के प्रति अनुक्रिया करते हैं, उनमें वृद्धि और प्रजनन होता है।
छात्र सजीवों के लक्षण अपनी कॉपी में लिखेंगे।सजीवों के लक्षण: भोजन, श्वसन, वृद्धि, प्रजनन।

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. मछली पानी में साँस किस अंग से लेती है?
  2. ऊँट को मरुस्थल का जहाज़ क्यों कहा जाता है?
  3. आवास किसे कहते हैं?
  4. सजीवों के कोई दो प्रमुख लक्षण बताइए।

10. गृहकार्य (Homework):

मरुस्थल में उगने वाले पौधों (जैसे कैक्टस) में पानी बचाने के लिए क्या-क्या अनुकूलन पाए जाते हैं? लिखिए।

📌 नोट: यह B.Ed Science Lesson Plan दैनिक पाठ योजना पुस्तिका के लिए पूरी तरह से तैयार है।

B.Ed Science Lesson Plan 7: पाठ योजना क्रमांक – 7

दिनांक: ………………..
कक्षा: 7
कालांश: ………………..
योजना प्रकार: B.Ed Science Lesson Plan
विषय: विज्ञान
उपविषय: वनस्पति विज्ञान
प्रकरण: पादपों में पोषण (Nutrition in Plants)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में विज्ञान विषय के प्रति रुचि उत्पन्न करना।
  2. विद्यार्थियों में प्रकृति और वनस्पतियों के प्रति वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी स्वपोषी और विषमपोषी पोषण का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया को समझ सकेंगे और समझा सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी पौधों के महत्व को समझकर उनका संरक्षण कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया का नामांकित चित्र बना सकेंगे।

3. शिक्षण सहायक सामग्री:

चॉक, डस्टर, लपेट फलक, प्रकाश संश्लेषण दर्शाता हुआ चार्ट, एक गमले में लगा पौधा।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

व्याख्यान-प्रदर्शन विधि, प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी यह जानते हैं कि सजीवों को जीवित रहने के लिए भोजन की आवश्यकता होती है और भोजन पौधों से प्राप्त होता है।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँ
1.हमें भूख लगने पर हम क्या करते हैं?हम भोजन खाते हैं।
2.मनुष्य और जंतु अपना भोजन कहाँ से प्राप्त करते हैं?पेड़-पौधों और अन्य जंतुओं से।
3.क्या पेड़-पौधे भी अपना भोजन दूसरों से मांगते हैं?नहीं।
4.पेड़-पौधे अपना भोजन स्वयं कैसे बनाते हैं?(समस्यात्मक)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, आज हम विज्ञान विषय के अंतर्गत ‘पादपों में पोषण’ और प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया का विस्तार से अध्ययन करेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
पोषण के प्रकारछात्राध्यापक कथन: सजीवों द्वारा भोजन ग्रहण करने और इसके उपयोग की विधि को पोषण कहते हैं। पोषण दो प्रकार का होता है: स्वपोषी (Autotrophic) – जो अपना भोजन स्वयं बनाते हैं जैसे हरे पौधे। विषमपोषी (Heterotrophic) – जो भोजन के लिए दूसरों पर निर्भर रहते हैं जैसे मनुष्य और जंतु।छात्र सुनेंगे व कॉपी में लिखेंगे।पोषण के प्रकार:
1. स्वपोषी (हरे पौधे)
2. विषमपोषी (जंतु)
प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis)विकासात्मक प्रश्न: पौधों का रसोईघर किसे कहते हैं? (पत्तियों को)।
छात्राध्यापक कथन: पत्तियों में एक हरा वर्णक होता है जिसे क्लोरोफिल कहते हैं। पौधे सूर्य के प्रकाश, क्लोरोफिल, कार्बन डाइऑक्साइड (हवा से) और जल (जड़ों से) की उपस्थिति में अपना भोजन (कार्बोहाइड्रेट) बनाते हैं। इस प्रक्रिया को प्रकाश संश्लेषण कहते हैं। इस प्रक्रिया में ऑक्सीजन गैस बाहर निकलती है।
छात्र चार्ट को देखेंगे और प्रक्रिया को समझेंगे।प्रकाश संश्लेषण के घटक:
CO2 + जल + सूर्य का प्रकाश + क्लोरोफिल = कार्बोहाइड्रेट + ऑक्सीजन
अन्य प्रकार का पोषणछात्राध्यापक कथन: कुछ पौधे हरे नहीं होते (क्लोरोफिल नहीं होता), वे परजीवी होते हैं (जैसे- अमरबेल)। कुछ पौधे कीटों को खाते हैं, उन्हें कीटभक्षी पौधे कहते हैं (जैसे- घटपर्णी / Pitcher plant)।छात्र अमरबेल व घटपर्णी के बारे में जानेंगे।परजीवी: अमरबेल
कीटभक्षी: घटपर्णी (Pitcher plant)

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. हरे पौधों को स्वपोषी क्यों कहा जाता है?
  2. प्रकाश संश्लेषण के लिए किन-किन चीजों की आवश्यकता होती है?
  3. पत्तियों का रंग हरा क्यों होता है?
  4. किसी एक कीटभक्षी पौधे का नाम बताइए।

10. गृहकार्य (Homework):

प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया का एक सुंदर नामांकित चित्र बनाइए तथा इसके समीकरण को लिखिए।

📌 नोट: यह B.Ed Science Lesson Plan दैनिक पाठ योजना पुस्तिका के लिए पूरी तरह से तैयार है।

B.Ed Science Lesson Plan 8: पाठ योजना क्रमांक – 8

दिनांक: ………………..
कक्षा: 7
कालांश: ………………..
योजना प्रकार: B.Ed Science Lesson Plan
विषय: विज्ञान
उपविषय: जीव विज्ञान
प्रकरण: प्राणियों में पोषण (Nutrition in Animals)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में जीव विज्ञान के प्रति रुचि जाग्रत करना।
  2. विद्यार्थियों को मानव शरीर की क्रियाविधि से अवगत कराना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी मानव पाचन तंत्र के विभिन्न अंगों के नाम जान सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी पाचन की प्रक्रिया और विभिन्न अंगों के कार्यों को समझ सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी भोजन को अच्छी तरह चबाकर खाने के महत्व को समझ सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी मानव पाचन तंत्र का चित्र बनाने में दक्षता प्राप्त करेंगे।

3. शिक्षण सहायक सामग्री:

मानव पाचन तंत्र (Human Digestive System) का बड़ा चार्ट, चॉक, डस्टर।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

व्याख्यान-प्रदर्शन विधि, प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी यह जानते हैं कि हम मुँह से भोजन ग्रहण करते हैं और भोजन हमारे पेट में जाता है।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँ
1.हम भोजन को चबाने के लिए किसका उपयोग करते हैं?दांतों का।
2.मुँह से चबाने के बाद भोजन कहाँ जाता है?पेट (आमाशय) में।
3.पेट में जाने के बाद भोजन का क्या होता है?भोजन पचता है।
4.भोजन पचने की इस पूरी प्रक्रिया को क्या कहते हैं और इसमें कौन-कौनसे अंग भाग लेते हैं?(समस्यात्मक)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, आज हम विज्ञान विषय में ‘प्राणियों में पोषण’ के अंतर्गत मानव पाचन तंत्र का अध्ययन करेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
पाचन तंत्र के मुख्य अंगछात्राध्यापक कथन: भोजन के जटिल पदार्थों का सरल पदार्थों में टूटना पाचन कहलाता है। मानव पाचन तंत्र में मुख्य रूप से मुखगुहिका, ग्रसिका (भोजन नली), आमाशय (पेट), क्षुद्रांत्र (छोटी आँत), बृहदांत्र (बड़ी आँत) और गुदा होते हैं।छात्र अंगों के नाम ध्यानपूर्वक सुनेंगे।पाचन तंत्र: मुखगुहिका -> ग्रसिका -> आमाशय -> छोटी आँत -> बड़ी आँत -> गुदा।
मुखगुहिका और आमाशयछात्राध्यापक कथन: मुख में दांत भोजन को चबाते हैं और लार ग्रंथियां लार मिलाती हैं जिससे भोजन मुलायम हो जाता है। ग्रसिका से होता हुआ भोजन आमाशय (Stomach) में पहुँचता है। आमाशय जठर रस (पाचक रस) और हाइड्रोक्लोरिक अम्ल निकालता है जो भोजन को पचाने और जीवाणुओं को मारने में मदद करता है।छात्र सुनेंगे।मुख: लार (भोजन को मुलायम करना)।
आमाशय: पाचक रस, अम्ल (जीवाणु नष्ट करना)।
छोटी आँत और बड़ी आँतछात्राध्यापक कथन: भोजन का मुख्य रूप से पूर्ण पाचन छोटी आँत (Small Intestine) में होता है और यहीं से पचे हुए भोजन का रक्त में अवशोषण होता है। इसके बाद बचा हुआ बिना पचा भोजन बड़ी आँत में जाता है जहाँ पानी का अवशोषण होता है और अपशिष्ट मल के रूप में शरीर से बाहर निकाल दिया जाता है।छात्र पाचन की पूरी प्रक्रिया को समझेंगे।छोटी आँत: पूर्ण पाचन व अवशोषण।
बड़ी आँत: जल अवशोषण।

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. पाचन किसे कहते हैं?
  2. भोजन का पूर्ण पाचन किस अंग में होता है?
  3. आमाशय से कौन-सा अम्ल स्रावित होता है?

10. गृहकार्य (Homework):

मानव पाचन तंत्र का नामांकित चित्र बनाइए तथा किन्हीं दो अंगों के कार्य लिखिए।

📌 नोट: यह B.Ed Science Lesson Plan दैनिक पाठ योजना पुस्तिका के लिए पूरी तरह से तैयार है।

B.Ed Science Lesson Plan 9: पाठ योजना क्रमांक – 9

दिनांक: ………………..
कक्षा: 7
कालांश: ………………..
योजना प्रकार: B.Ed Science Lesson Plan
विषय: विज्ञान
उपविषय: भौतिक विज्ञान
प्रकरण: ऊष्मा (Heat)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में भौतिक विज्ञान के प्रति रुचि जाग्रत करना।
  2. विद्यार्थियों में दैनिक जीवन की घटनाओं को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखने की क्षमता विकसित करना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी तापमापी (थर्मामीटर) के प्रकारों और ऊष्मा चालन की विधियों को जान सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ऊष्मा के सुचालक और कुचालक पदार्थों में अंतर कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी डॉक्टरी थर्मामीटर से शरीर का तापमान मापना सीख सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी थर्मामीटर को पढ़ने का कौशल प्राप्त करेंगे।

3. शिक्षण सहायक सामग्री:

डॉक्टरी थर्मामीटर, प्रयोगशाला थर्मामीटर, गर्म पानी का बीकर, लोहे और लकड़ी की छड़।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रदर्शन विधि, व्याख्यान विधि, प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी यह जानते हैं कि बर्फ ठंडी होती है और उबलता हुआ पानी गर्म होता है। उन्हें बुखार नापने की भी सामान्य जानकारी है।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँ
1.सर्दियों में हमें क्या लगती है?ठंड।
2.ठंड से बचने के लिए हम क्या पहनते हैं?स्वेटर (ऊनी कपड़े)।
3.गर्मियों में हमें धूप में खड़े रहने पर कैसा महसूस होता है?बहुत गर्मी (ऊष्मा) लगती है।
4.कोई वस्तु कितनी गर्म है या कितनी ठंडी, इसका पता हम कैसे लगाते हैं?(समस्यात्मक)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, आज हम विज्ञान विषय में ‘ऊष्मा’ पाठ के अंतर्गत तापमान मापने और ऊष्मा के स्थानांतरण का अध्ययन करेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
ताप (Temperature) व तापमापी (Thermometer)छात्राध्यापक कथन: किसी वस्तु की गर्माहट की विश्वसनीय माप उसके ‘ताप’ से की जाती है। ताप मापने के लिए उपयोग की जाने वाली युक्ति को तापमापी या थर्मामीटर कहते हैं। बुखार मापने के लिए ‘डॉक्टरी थर्मामीटर’ का प्रयोग करते हैं।छात्र थर्मामीटर को देखेंगे।ताप: वस्तु की गर्माहट की माप।
युक्ति: तापमापी (थर्मामीटर)।
डॉक्टरी थर्मामीटरछात्राध्यापक कथन: डॉक्टरी थर्मामीटर में 35°C से 42°C तक के चिह्न होते हैं। सामान्य मानव शरीर का तापमान 37°C होता है। इसके बल्ब में पारा (Mercury) भरा होता है जो ऊष्मा पाकर फैलता है।छात्र सामान्य तापमान नोट करेंगे।डॉक्टरी तापमापी: 35°C – 42°C.
मानव शरीर का सामान्य ताप = 37°C.
ऊष्मा का स्थानांतरण (सुचालक व कुचालक)प्रदर्शन: गर्म पानी के बीकर में लोहे और लकड़ी की छड़ रखना।
छात्राध्यापक कथन: ऊष्मा सदैव गर्म वस्तु से ठंडी वस्तु की ओर बहती है। जो पदार्थ अपने अंदर से ऊष्मा को आसानी से जाने देते हैं, वे ‘ऊष्मा के सुचालक’ (Conductor) कहलाते हैं (जैसे लोहा, एल्युमिनियम)। जो ऊष्मा को नहीं जाने देते, वे ‘ऊष्मा के कुचालक’ (Insulator) कहलाते हैं (जैसे लकड़ी, प्लास्टिक)।
छात्र प्रयोग देखकर सुचालक व कुचालक समझेंगे।सुचालक: लोहा, एल्युमिनियम।
कुचालक: लकड़ी, प्लास्टिक।

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. मानव शरीर का सामान्य तापमान कितना होता है?
  2. डॉक्टरी थर्मामीटर में कौनसी धातु भरी होती है?
  3. ऊष्मा के दो सुचालक और दो कुचालक पदार्थों के नाम बताइए।

10. गृहकार्य (Homework):

सर्दियों में एक मोटे कंबल की तुलना में दो पतले कंबलों को जोड़कर ओढ़ना अधिक गर्म क्यों रहता है? कारण स्पष्ट करें।

📌 नोट: यह B.Ed Science Lesson Plan दैनिक पाठ योजना पुस्तिका के लिए पूरी तरह से तैयार है।

B.Ed Science Lesson Plan 10: पाठ योजना क्रमांक – 10

दिनांक: ………………..
कक्षा: 7
कालांश: ………………..
योजना प्रकार: B.Ed Science Lesson Plan
विषय: विज्ञान
उपविषय: रसायन विज्ञान
प्रकरण: अम्ल, क्षारक और लवण (Acids, Bases and Salts)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में रसायन विज्ञान के प्रति रुचि उत्पन्न करना।
  2. विद्यार्थियों में प्रयोगात्मक परीक्षण कौशल का विकास करना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी अम्ल और क्षारक के सामान्य उदाहरणों को जान सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी अम्ल और क्षारक के बीच स्वाद और सूचक (Indicator) के आधार पर अंतर कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी लिटमस पत्र का प्रयोग करके पदार्थों की प्रकृति की पहचान कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी उदासीनीकरण की अभिक्रिया को समझकर उसका समीकरण लिख सकेंगे।

3. शिक्षण सहायक सामग्री:

नींबू का रस, साबुन का पानी, नीला और लाल लिटमस पत्र (Litmus Paper), हल्दी, चॉक, डस्टर।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रदर्शन विधि, प्रयोग प्रविधि, व्याख्यान विधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी नींबू, इमली, दही आदि के स्वाद से भलीभांति परिचित हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँ
1.चीनी खाने में कैसी लगती है?मीठी।
2.नींबू का रस या इमली खाने में कैसी लगती है?खट्टी।
3.यदि नहाते समय साबुन का झाग मुँह में चला जाए तो कैसा स्वाद आता है?कड़वा।
4.खट्टे पदार्थों को और कड़वे पदार्थों को विज्ञान की भाषा में क्या कहते हैं?(समस्यात्मक)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, आज हम विज्ञान विषय में ‘अम्ल, क्षारक और लवण’ के बारे में विस्तार से अध्ययन करेंगे और इनके परीक्षण करना सीखेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
अम्ल (Acids) और क्षारक (Bases)छात्राध्यापक कथन: दही, नींबू का रस, इमली आदि का स्वाद खट्टा होता है। ऐसे पदार्थों की रासायनिक प्रकृति ‘अम्लीय’ होती है। जो पदार्थ स्वाद में कड़वे होते हैं और छूने पर साबुन जैसे चिकने लगते हैं, वे ‘क्षारक’ (Bases) कहलाते हैं (जैसे खाने का सोडा, साबुन)।छात्र अम्ल और क्षारक की परिभाषा लिखेंगे।अम्ल: स्वाद खट्टा (नींबू)।
क्षारक: स्वाद कड़वा, चिकने (साबुन)।
सूचक (Indicators)प्रदर्शन: नींबू के रस में नीला लिटमस डालना और साबुन के पानी में लाल लिटमस डालना।
छात्राध्यापक कथन: कोई पदार्थ अम्लीय है या क्षारकीय, इसका पता लगाने के लिए कुछ विशेष पदार्थों का उपयोग किया जाता है जिन्हें सूचक कहते हैं। प्राकृतिक सूचक लिटमस है। अम्ल नीले लिटमस को लाल कर देते हैं, और क्षारक लाल लिटमस को नीला कर देते हैं। हल्दी भी एक प्राकृतिक सूचक है।
छात्र लिटमस पत्र का रंग बदलते हुए आश्चर्य से देखेंगे।सूचक (लिटमस):
अम्ल -> नीले को लाल करता है।
क्षारक -> लाल को नीला करता है।
उदासीनीकरण (Neutralization)छात्राध्यापक कथन: जब किसी अम्ल को किसी क्षारक में मिलाया जाता है तो वे एक-दूसरे के प्रभाव को नष्ट कर देते हैं। इस अभिक्रिया को उदासीनीकरण कहते हैं। इसमें एक नया पदार्थ बनता है जिसे ‘लवण’ (Salt) कहते हैं। साथ ही ऊष्मा भी निकलती है। (अम्ल + क्षारक = लवण + जल)छात्र उदासीनीकरण की अभिक्रिया को समझेंगे।अम्ल + क्षारक → लवण + जल (उदासीनीकरण)।

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. अम्ल और क्षारक के स्वाद में क्या अंतर है?
  2. अम्ल नीले लिटमस पत्र को किस रंग में बदल देता है?
  3. उदासीनीकरण अभिक्रिया में कौन-सा नया पदार्थ बनता है?

10. गृहकार्य (Homework):

कपड़े पर लगा हल्दी का दाग साबुन से धोने पर लाल क्यों हो जाता है? पाठ के आधार पर कारण स्पष्ट करें।

📌 नोट: यह B.Ed Science Lesson Plan दैनिक पाठ योजना पुस्तिका के लिए पूरी तरह से तैयार है।

B.Ed Science Lesson Plan 11: पाठ योजना क्रमांक – 11

दिनांक: ………………..
कक्षा: 7
कालांश: ………………..
योजना प्रकार: B.Ed Science Lesson Plan
विषय: विज्ञान
उपविषय: भौतिक/रसायन विज्ञान
प्रकरण: भौतिक एवं रासायनिक परिवर्तन
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में दैनिक जीवन के परिवर्तनों को समझने की वैज्ञानिक दृष्टि विकसित करना।
  2. विद्यार्थियों में प्रयोगात्मक निष्कर्ष निकालने की क्षमता का विकास करना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी भौतिक और रासायनिक परिवर्तन की परिभाषा जान सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी दोनों प्रकार के परिवर्तनों के बीच अंतर को स्पष्ट कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी अपने आस-पास होने वाले परिवर्तनों को भौतिक और रासायनिक परिवर्तनों में वर्गीकृत कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी जंग लगने की प्रक्रिया को समझकर उसे रोकने के उपाय बता सकेंगे।

3. शिक्षण सहायक सामग्री:

कागज़ का टुकड़ा, माचिस, मोमबत्ती, बर्फ, जंग लगी हुई लोहे की कील, चॉक।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रयोग-प्रदर्शन विधि, प्रश्नोत्तर प्रविधि, व्याख्यान विधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी यह जानते हैं कि बर्फ पिघलकर पानी बनती है और लकड़ी या कागज़ जलकर राख बन जाता है।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँ
1.यदि बर्फ को फ्रिज से बाहर रख दें तो क्या होगा?वह पानी (जल) बन जाएगी।
2.क्या हम इस पानी को वापस बर्फ बना सकते हैं?हाँ, वापस फ्रिज में रखकर।
3.यदि हम कागज़ के टुकड़े को जला दें तो क्या होगा?वह राख बन जाएगा।
4.क्या हम राख से वापस कागज़ बना सकते हैं?नहीं।
5.विज्ञान में इन परिवर्तनों (जिसमें वापस मूल पदार्थ प्राप्त हो या न हो) को क्या कहते हैं?(समस्यात्मक)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, आज हम विज्ञान में ‘भौतिक एवं रासायनिक परिवर्तन’ के बारे में अध्ययन करेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
भौतिक परिवर्तन (Physical Change)प्रदर्शन: कागज़ को फाड़ना और बर्फ का पिघलना दिखाना।
छात्राध्यापक कथन: वह परिवर्तन जिसमें किसी पदार्थ के भौतिक गुणों (आकार, साइज़, रंग या अवस्था) में परिवर्तन होता है, भौतिक परिवर्तन कहलाता है। इसमें कोई नया पदार्थ नहीं बनता। यह परिवर्तन सामान्यतः उत्क्रमणीय (Reversible) होता है। जैसे- पानी से बर्फ बनना, कागज़ फाड़ना।
छात्र प्रयोग देखेंगे और परिभाषा समझेंगे।भौतिक परिवर्तन: कोई नया पदार्थ नहीं बनता।
उदाहरण: बर्फ का पिघलना।
रासायनिक परिवर्तन (Chemical Change)प्रदर्शन: माचिस से कागज़ को जलाना।
छात्राध्यापक कथन: वह परिवर्तन जिसमें एक या एक से अधिक नए पदार्थ बनते हैं, रासायनिक परिवर्तन कहलाता है। इसे आसानी से वापस पहले की अवस्था में नहीं लाया जा सकता। जैसे- कागज़ का जलना, दूध से दही बनना, भोजन का पचना।
छात्र जलने की प्रक्रिया को देखेंगे।रासायनिक परिवर्तन: नया पदार्थ बनता है।
उदाहरण: कागज़ का जलना, दही जमना।
लोहे में जंग लगना (Rusting of Iron)छात्राध्यापक कथन: जब लोहे की वस्तु को नमी (जल) और ऑक्सीजन (हवा) में खुला छोड़ दिया जाता है, तो उस पर भूरे रंग की परत (जंग) जम जाती है। यह एक रासायनिक परिवर्तन है। जंग लगने से बचाने के लिए लोहे पर पेंट, ग्रीस या जिंक (यशद लेपन/Galvanization) की परत चढ़ाई जाती है।छात्र जंग लगी कील देखेंगे और बचाव के उपाय जानेंगे।जंग के लिए आवश्यक: हवा + नमी।
बचाव: पेंट, ग्रीस, गैल्वनीकरण।

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. भौतिक परिवर्तन और रासायनिक परिवर्तन में मुख्य अंतर क्या है?
  2. दूध से दही बनना कौन-सा परिवर्तन है?
  3. लोहे को जंग लगने से बचाने के दो उपाय बताइए।

10. गृहकार्य (Homework):

निम्नलिखित को भौतिक और रासायनिक परिवर्तन में वर्गीकृत कीजिए: 1. मोम का पिघलना 2. लकड़ी का कटना 3. प्रकाश संश्लेषण 4. लोहे पर जंग लगना।

📌 नोट: यह B.Ed Science Lesson Plan दैनिक पाठ योजना पुस्तिका के लिए पूरी तरह से तैयार है।

B.Ed Science Lesson Plan 12: पाठ योजना क्रमांक – 12

दिनांक: ………………..
कक्षा: 7
कालांश: ………………..
योजना प्रकार: B.Ed Science Lesson Plan
विषय: विज्ञान
उपविषय: जीव विज्ञान
प्रकरण: जीवों में श्वसन (Respiration in Organisms)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में जीव विज्ञान विषय के प्रति जिज्ञासा उत्पन्न करना।
  2. विद्यार्थियों को मानव शरीर की श्वसन क्रियाविधि से अवगत कराना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी श्वसन की परिभाषा और मानव श्वसन तंत्र के अंगों को जान सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी अंतःश्वसन (Inhalation) और उच्छ्वसन (Exhalation) के बीच अंतर समझ सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी व्यायाम के समय श्वसन दर बढ़ने के कारण को समझ सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी मानव श्वसन तंत्र का चित्र बना सकेंगे।

3. शिक्षण सहायक सामग्री:

मानव श्वसन तंत्र का चार्ट, चॉक, डस्टर, लपेट फलक।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

व्याख्यान-प्रदर्शन विधि, प्रश्नोत्तर प्रविधि, गतिविधि (सांस रोकना)।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी यह जानते हैं कि जीवित रहने के लिए हम नाक से हवा (सांस) अंदर लेते और बाहर छोड़ते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँ
1.यदि हम अपनी नाक और मुँह को कुछ सेकंड के लिए बंद कर लें तो कैसा महसूस होगा?घबराहट होगी, दम घुटेगा।
2.ऐसा क्यों होता है?क्योंकि हम साँस नहीं ले पाते।
3.साँस लेते समय हम हवा से कौनसी गैस अंदर लेते हैं?ऑक्सीजन।
4.ऑक्सीजन अंदर लेने और कार्बन डाइऑक्साइड बाहर छोड़ने की इस प्रक्रिया को विज्ञान में क्या कहते हैं?(समस्यात्मक)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, आज हम विज्ञान विषय में ‘जीवों में श्वसन’ और मानव श्वसन तंत्र के बारे में विस्तार से अध्ययन करेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
श्वसन और इसकी आवश्यकताछात्राध्यापक कथन: सभी जीवों को जीवित रहने और कार्य करने के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है। यह ऊर्जा भोजन के विखंडन से प्राप्त होती है। कोशिकाओं में ऑक्सीजन की उपस्थिति में भोजन (ग्लूकोज) का टूटना और ऊर्जा का मुक्त होना ‘कोशिकीय श्वसन’ कहलाता है।छात्र सुनेंगे और समझेंगे।श्वसन: भोजन से ऊर्जा प्राप्त करने की प्रक्रिया।
साँस लेना (Breathing)छात्राध्यापक कथन: साँस लेना श्वसन का ही एक भाग है। ऑक्सीजन युक्त वायु को शरीर के अंदर लेना ‘अंतःश्वसन’ (Inhalation) कहलाता है, और कार्बन डाइऑक्साइड युक्त वायु को बाहर निकालना ‘उच्छ्वसन’ (Exhalation) कहलाता है। एक मिनट में व्यक्ति जितनी बार साँस लेता है, वह उसकी ‘श्वसन दर’ (Breathing rate) है। विश्राम अवस्था में वयस्क मानव की श्वसन दर 15-18 प्रति मिनट होती है।छात्र अपनी श्वसन दर महसूस करेंगे।अंतःश्वसन: O2 अंदर।
उच्छ्वसन: CO2 बाहर।
श्वसन दर: 15-18 बार/मिनट।
मानव श्वसन तंत्रछात्राध्यापक कथन (चार्ट दिखाते हुए): हम अपनी नासा-गुहा (नाक) से वायु अंदर लेते हैं। यहाँ से वायु श्वास नली से होकर हमारे फेफड़ों (Lungs) में जाती है। फेफड़े वक्ष-गुहा (Chest cavity) में स्थित होते हैं। वक्ष-गुहा के नीचे एक बड़ी पेशीय परत होती है जिसे डायफ्राम (Diaphragm) कहते हैं, जो श्वसन में मदद करती है।छात्र चार्ट में अंगों को पहचानेंगे।अंग: नासा-गुहा -> श्वास नली -> फेफड़े।
डायफ्राम श्वसन में सहायक है।

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. अंतःश्वसन के दौरान हम कौनसी गैस अंदर लेते हैं?
  2. मानव श्वसन तंत्र के मुख्य अंग (हवा थैली) का क्या नाम है?
  3. दौड़ते या व्यायाम करते समय हमारी श्वसन दर क्यों बढ़ जाती है?

10. गृहकार्य (Homework):

मानव श्वसन तंत्र का स्वच्छ एवं नामांकित चित्र बनाइए।

📌 नोट: यह B.Ed Science Lesson Plan दैनिक पाठ योजना पुस्तिका के लिए पूरी तरह से तैयार है।

B.Ed Science Lesson Plan 13: पाठ योजना क्रमांक – 13

दिनांक: ………………..
कक्षा: 8
कालांश: ………………..
योजना प्रकार: B.Ed Science Lesson Plan
विषय: विज्ञान
उपविषय: कृषि विज्ञान
प्रकरण: फसल उत्पादन एवं प्रबंध (Crop Production and Management)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में कृषि विज्ञान के प्रति रुचि उत्पन्न करना।
  2. विद्यार्थियों को अन्न उत्पादन के महत्व और किसानों के परिश्रम से अवगत कराना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी फसल की परिभाषा और इसके प्रकारों (रबी, खरीफ) को जान सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी कृषि पद्धतियों के विभिन्न चरणों को क्रमानुसार समझ सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी बीज बोने से लेकर कटाई तक की प्रक्रिया का विश्लेषण कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी कृषि उपकरणों (जैसे हल, कल्टीवेटर) का चित्र बना सकेंगे।

3. शिक्षण सहायक सामग्री:

विभिन्न अनाजों (गेहूँ, चना, मक्का) के बीज, हल या कल्टीवेटर का चित्र, चॉक, डस्टर।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

व्याख्यान-प्रदर्शन विधि, प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी खेतों, किसानों और विभिन्न प्रकार के अनाजों के बारे में सामान्य जानकारी रखते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँ
1.हम भोजन में रोटी किस चीज़ से बनाते हैं?गेहूँ के आटे से।
2.गेहूँ कहाँ उगाया जाता है?खेतों में।
3.खेतों में अनाज कौन उगाता है?किसान।
4.जब एक ही प्रकार के पौधों को बड़े पैमाने पर उगाया जाता है, तो उसे क्या कहते हैं?(समस्यात्मक)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, आज हम विज्ञान विषय में ‘फसल उत्पादन एवं प्रबंध’ के बारे में अध्ययन करेंगे कि किसान खेत में फसल कैसे उगाते हैं।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
फसल और उसके प्रकारछात्राध्यापक कथन: जब एक ही किस्म के पौधे किसी स्थान पर बड़े पैमाने पर उगाए जाते हैं, तो उसे फसल (Crop) कहते हैं। ऋतुओं के आधार पर फसलें मुख्य रूप से दो प्रकार की होती हैं: 1. खरीफ फसल (वर्षा ऋतु में- जैसे धान, मक्का) 2. रबी फसल (शीत ऋतु में- जैसे गेहूँ, चना, सरसों)।छात्र फसल की परिभाषा व प्रकार लिखेंगे।फसल: बड़े पैमाने पर पौधे उगाना।
खरीफ: वर्षा ऋतु (धान)।
रबी: शीत ऋतु (गेहूँ, चना)।
कृषि पद्धतियाँ (चरण)छात्राध्यापक कथन: फसल उगाने के लिए किसान को कई कार्य करने पड़ते हैं जिन्हें कृषि पद्धतियाँ कहते हैं। इनका क्रम है: 1. मिट्टी तैयार करना (जुताई) 2. बुआई (बीज बोना) 3. खाद एवं उर्वरक देना 4. सिंचाई (पानी देना) 5. खरपतवार से सुरक्षा 6. कटाई 7. भंडारण।छात्र कृषि के चरणों को क्रमानुसार समझेंगे।कृषि के चरण: जुताई -> बुआई -> खाद -> सिंचाई -> कटाई -> भंडारण।
मिट्टी तैयार करना एवं उपकरणछात्राध्यापक कथन: फसल उगाने से पहले मिट्टी को उलटना-पलटना और पोला करना आवश्यक है। इसे जुताई कहते हैं। इससे जड़ें गहराई तक जाती हैं और साँस ले पाती हैं। जुताई के लिए हल, कुदाली और आधुनिक समय में ट्रैक्टर चालित कल्टीवेटर का उपयोग किया जाता है।छात्र उपकरणों के नाम जानेंगे।जुताई: मिट्टी को पोला करना।
उपकरण: हल, कल्टीवेटर।

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. रबी और खरीफ फसल का एक-एक उदाहरण दीजिए।
  2. जुताई किसे कहते हैं?
  3. बुआई से पहले किसान क्या कार्य करता है?

10. गृहकार्य (Homework):

फसल उगाने के सभी चरणों (कृषि पद्धतियों) के नाम क्रम से लिखिए।

📌 नोट: यह B.Ed Science Lesson Plan दैनिक पाठ योजना पुस्तिका के लिए पूरी तरह से तैयार है।

B.Ed Science Lesson Plan 14: पाठ योजना क्रमांक – 14

दिनांक: ………………..
कक्षा: 8
कालांश: ………………..
योजना प्रकार: B.Ed Science Lesson Plan
विषय: विज्ञान
उपविषय: जीव विज्ञान (सूक्ष्मजैविकी)
प्रकरण: सूक्ष्मजीव : मित्र एवं शत्रु
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में जीव विज्ञान विषय के प्रति जिज्ञासा उत्पन्न करना।
  2. विद्यार्थियों में सूक्ष्म दुनिया को समझने का वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी सूक्ष्मजीवों की परिभाषा और उनके मुख्य वर्गों (जीवाणु, कवक, प्रोटोजोआ, शैवाल) को जान सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी लाभदायक (मित्र) और हानिकारक (शत्रु) सूक्ष्मजीवों के बीच अंतर समझ सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी सूक्ष्मजीवों से होने वाली बीमारियों से बचाव के तरीके अपने जीवन में अपना सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी सूक्ष्मदर्शी (Microscope) के उपयोग की विधि समझ सकेंगे।

3. शिक्षण सहायक सामग्री:

सूक्ष्मदर्शी (यदि उपलब्ध हो), सड़े हुए ब्रेड (कवक दिखाने हेतु), दही का थोड़ा अंश, सूक्ष्मजीवों का चार्ट।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रदर्शन विधि, व्याख्यान विधि, प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी यह जानते हैं कि दूध से दही जमता है और बासी भोजन पर फफूंद लग जाती है।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँ
1.रात को दूध में थोड़ा जामन (दही) मिलाने पर सुबह क्या होता है?दूध दही में बदल जाता है।
2.दूध को दही में कौन बदलता है?छोटे-छोटे कीटाणु या जीवाणु।
3.क्या हम इन जीवाणुओं को अपनी आँखों से सीधा देख सकते हैं?नहीं।
4.जिन जीवों को हम केवल आँखों से नहीं देख सकते, उन्हें विज्ञान में क्या कहते हैं?(समस्यात्मक)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, आज हम उन जीवों के बारे में पढ़ेंगे जिन्हें हम बिना यंत्र के नहीं देख सकते, यानी ‘सूक्ष्मजीव : मित्र एवं शत्रु’ के बारे में।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
सूक्ष्मजीव क्या हैं?छात्राध्यापक कथन: हमारे आस-पास ऐसे कई जीव हैं जिन्हें हम बिना आवर्धक लेंस या सूक्ष्मदर्शी के नहीं देख सकते, इन्हें ‘सूक्ष्मजीव’ (Microorganisms) कहते हैं। सूक्ष्मजीवों को मुख्य रूप से 4 वर्गों में बाँटा गया है: 1. जीवाणु (Bacteria) 2. कवक (Fungi) 3. प्रोटोजोआ 4. शैवाल। वायरस (विषाणु) भी सूक्ष्म होते हैं परंतु वे केवल सजीव कोशिका के अंदर ही वृद्धि करते हैं।छात्र सुनेंगे और सूक्ष्मजीवों के 4 वर्ग लिखेंगे।सूक्ष्मजीव: जिन्हें नग्न आँखों से नहीं देख सकते।
वर्ग: जीवाणु, कवक, प्रोटोजोआ, शैवाल।
मित्र सूक्ष्मजीव (लाभदायक)छात्राध्यापक कथन: कुछ सूक्ष्मजीव हमारे लिए बहुत लाभदायक होते हैं। जैसे- ‘लैक्टोबैसिलस’ नामक जीवाणु दूध को दही में बदलता है। ‘यीस्ट’ (कवक) का उपयोग ब्रेड और केक बनाने में किया जाता है। कुछ जीवाणु पर्यावरण को साफ रखने और औषधियां (एंटीबायोटिक्स) बनाने में मदद करते हैं।छात्र लाभदायक सूक्ष्मजीवों के नाम समझेंगे।मित्र: लैक्टोबैसिलस (दही), यीस्ट (ब्रेड), औषधियाँ।
शत्रु सूक्ष्मजीव (हानिकारक)छात्राध्यापक कथन: कुछ सूक्ष्मजीव मनुष्य, जंतुओं और पौधों में रोग उत्पन्न करते हैं। रोग उत्पन्न करने वाले सूक्ष्मजीवों को रोगाणु कहते हैं। जैसे- हैजा, टीबी जीवाणु से होते हैं; मलेरिया प्रोटोजोआ (प्लाज्मोडियम) से होता है; और जुकाम, कोरोना वायरस (विषाणु) से होता है।छात्र बीमारियों के कारण जानेंगे।शत्रु (रोगाणु): हैजा (जीवाणु), मलेरिया (प्रोटोजोआ)।

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. दूध को दही में बदलने वाले जीवाणु का क्या नाम है?
  2. ब्रेड या केक को फुलाने के लिए किसका उपयोग किया जाता है?
  3. सूक्ष्मजीवों को देखने के लिए किस यंत्र का प्रयोग किया जाता है?

10. गृहकार्य (Homework):

सूक्ष्मजीवों के लाभदायक (मित्र) और हानिकारक (शत्रु) प्रभावों का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।

📌 नोट: यह B.Ed Science Lesson Plan दैनिक पाठ योजना पुस्तिका के लिए पूरी तरह से तैयार है।

B.Ed Science Lesson Plan 15: पाठ योजना क्रमांक – 15

दिनांक: ………………..
कक्षा: 8
कालांश: ………………..
योजना प्रकार: B.Ed Science Lesson Plan
विषय: विज्ञान
उपविषय: रसायन / पर्यावरण विज्ञान
प्रकरण: कोयला और पेट्रोलियम (Coal and Petroleum)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में प्राकृतिक संसाधनों के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना।
  2. विद्यार्थियों में ऊर्जा संरक्षण की भावना का विकास करना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी प्राकृतिक और मानव निर्मित संसाधनों को जान सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी जीवाश्म ईंधन (कोयला, पेट्रोलियम) के निर्माण की प्रक्रिया को समझ सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी पेट्रोल-डीजल को बचाने के उपाय अपने दैनिक जीवन में अपना सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी पेट्रोलियम के विभिन्न उत्पादों की सूची (चार्ट) तैयार कर सकेंगे।

3. शिक्षण सहायक सामग्री:

कोयले का टुकड़ा, प्राकृतिक संसाधनों का चार्ट, पेट्रोलियम परिष्करण को दर्शाता हुआ चित्र।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

व्याख्यान विधि, चित्र-प्रदर्शन विधि, प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी मोटर साइकिल, कार आदि चलाने के लिए पेट्रोल/डीजल की आवश्यकता से परिचित हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँ
1.हम लंबी दूरी तय करने के लिए किस चीज़ का उपयोग करते हैं?मोटर साइकिल, कार, बस, ट्रेन आदि का।
2.कार या मोटर साइकिल चलाने के लिए इंजन में क्या डालते हैं?पेट्रोल या डीजल।
3.पेट्रोल और डीजल हमें कहाँ से प्राप्त होते हैं?ज़मीन के अंदर से (पेट्रोलियम से)।
4.पेट्रोलियम और कोयला ज़मीन के अंदर कैसे बनते हैं?(समस्यात्मक)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, आज हम विज्ञान विषय में ‘कोयला और पेट्रोलियम’ जैसे महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधनों के बारे में अध्ययन करेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
प्राकृतिक संसाधन एवं प्रकारछात्राध्यापक कथन: प्रकृति से प्राप्त होने वाले पदार्थों को प्राकृतिक संसाधन कहते हैं। ये दो प्रकार के होते हैं: 1. अक्षय (Inexhaustible) – जो कभी समाप्त नहीं होंगे, जैसे सूर्य का प्रकाश, वायु। 2. समाप्त होने वाले (Exhaustible) – जिनकी मात्रा सीमित है, जैसे वन, कोयला, पेट्रोलियम।छात्र संसाधनों के प्रकार सुनेंगे।प्राकृतिक संसाधन:
1. अक्षय (सूर्य का प्रकाश)
2. समाप्त होने वाले (कोयला)
जीवाश्म ईंधन व कोयला निर्माणछात्राध्यापक कथन: कोयला और पेट्रोलियम सजीवों के मृत अवशेषों (जीवाश्मों) से बनते हैं, इसलिए इन्हें ‘जीवाश्म ईंधन’ (Fossil Fuels) कहते हैं। लाखों वर्ष पूर्व घने वन भूकम्प या बाढ़ के कारण ज़मीन में दब गए। उच्च ताप और उच्च दाब के कारण वे धीरे-धीरे कोयले में बदल गए। इस प्रक्रिया को ‘कार्बनीकरण’ कहते हैं।छात्र कोयले के निर्माण को समझेंगे।जीवाश्म ईंधन: सजीवों के अवशेषों से।
निर्माण: उच्च ताप व उच्च दाब के कारण।
पेट्रोलियम का निर्माण व परिष्करणछात्राध्यापक कथन: समुद्र में रहने वाले जीव जब मरे तो उनके शरीर समुद्र के तल में दब गए। लाखों वर्षों में उच्च ताप व दाब ने उन्हें पेट्रोलियम में बदल दिया। पेट्रोलियम गहरे रंग का तैलीय द्रव है। कारखानों (रिफाइनरी) में इसे अलग-अलग किया जाता है, जिससे पेट्रोल, डीजल, केरोसिन (मिट्टी का तेल), मोम और एल.पी.जी. (LPG) प्राप्त होते हैं। इसे ‘परिष्करण’ (Refining) कहते हैं।छात्र पेट्रोलियम उत्पादों के नाम जानेंगे।पेट्रोलियम से प्राप्त: पेट्रोल, डीजल, केरोसिन, LPG, मोम।

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. कोयला और पेट्रोलियम को जीवाश्म ईंधन क्यों कहते हैं?
  2. किन्हीं दो ऐसे संसाधनों के नाम बताइए जो कभी समाप्त नहीं होंगे।
  3. पेट्रोलियम के परिष्करण से प्राप्त होने वाले किन्हीं तीन उत्पादों के नाम लिखिए।

10. गृहकार्य (Homework):

हमें पेट्रोल और डीजल जैसे ईंधनों को बचाने की आवश्यकता क्यों है? ईंधनों को बचाने के कोई दो उपाय लिखिए।

📌 नोट: यह B.Ed Science Lesson Plan दैनिक पाठ योजना पुस्तिका के लिए पूरी तरह से तैयार है।

B.Ed Science Lesson Plan 16: पाठ योजना क्रमांक – 16

दिनांक: ………………..
कक्षा: 8
कालांश: ………………..
योजना प्रकार: B.Ed Science Lesson Plan
विषय: विज्ञान
उपविषय: भौतिक/रसायन विज्ञान
प्रकरण: दहन और ज्वाला (Combustion and Flame)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में वैज्ञानिक प्रयोगों के प्रति रुचि उत्पन्न करना।
  2. विद्यार्थियों में दैनिक जीवन की घटनाओं का तार्किक विश्लेषण करने की क्षमता विकसित करना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी दहन की परिभाषा और इसके लिए आवश्यक परिस्थितियों को जान सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ज्वाला के विभिन्न क्षेत्रों (दीप्त, अदीप्त) को समझ सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी आग बुझाने के वैज्ञानिक सिद्धांतों (जैसे ऑक्सीजन की आपूर्ति रोकना) का प्रयोग कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी मोमबत्ती की ज्वाला का नामांकित चित्र बनाने में कौशल प्राप्त करेंगे।

3. शिक्षण सहायक सामग्री:

मोमबत्ती, माचिस, काँच का गिलास, कागज़, मोमबत्ती की ज्वाला का चार्ट।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रदर्शन विधि, व्याख्यान विधि, प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी आग जलने और उसे पानी या मिट्टी से बुझाने की सामान्य जानकारी रखते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँ
1.अँधेरा होने पर प्रकाश के लिए हम क्या-क्या जलाते हैं?बल्ब, मोमबत्ती, दीया आदि।
2.मोमबत्ती को जलाने पर उसमें से क्या निकलता है?प्रकाश और ऊष्मा।
3.जलती हुई मोमबत्ती को यदि गिलास से ढक दें, तो क्या होगा?मोमबत्ती बुझ जाएगी।
4.मोमबत्ती को जलने के लिए किस गैस की आवश्यकता होती है? विज्ञान में जलने को क्या कहते हैं?(समस्यात्मक)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, आज हम विज्ञान में किसी चीज़ के जलने की प्रक्रिया अर्थात् ‘दहन और ज्वाला’ का विस्तार से अध्ययन करेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
दहन (Combustion) और दहनशील पदार्थछात्राध्यापक कथन: वह रासायनिक प्रक्रम जिसमें पदार्थ ऑक्सीजन से अभिक्रिया कर ऊष्मा देता है, ‘दहन’ कहलाता है। जो पदार्थ जलते हैं उन्हें दाहा (Combustible) या ईंधन कहते हैं (जैसे- लकड़ी, कागज़, पेट्रोल)। जो नहीं जलते वे अदाहा कहलाते हैं (जैसे- पत्थर, काँच)। दहन के लिए ऑक्सीजन आवश्यक है।छात्र दहन की परिभाषा समझेंगे।दहन: ऑक्सीजन की उपस्थिति में जलना।
दहनशील: लकड़ी, कागज़।
ज्वलन ताप (Ignition Temperature)विकासात्मक प्रश्न: क्या कागज़ खुद-ब-खुद जलने लगता है? (नहीं)।
छात्राध्यापक कथन: वह न्यूनतम ताप जिस पर कोई पदार्थ जलने लगता है, उसका ‘ज्वलन ताप’ कहलाता है। माचिस की तीली का ज्वलन ताप कम होता है इसलिए वह रगड़ने से जल जाती है, जबकि लकड़ी का ज्वलन ताप अधिक होता है।
छात्र ज्वलन ताप की अवधारणा को समझेंगे।ज्वलन ताप: वह न्यूनतम ताप जिस पर पदार्थ जल उठे।
मोमबत्ती की ज्वालाप्रदर्शन: मोमबत्ती जलाकर उसकी लौ (ज्वाला) दिखाना।
छात्राध्यापक कथन: जो पदार्थ दहन के समय वाष्पित होते हैं, वे ज्वाला (Flame) का निर्माण करते हैं। मोमबत्ती की ज्वाला के 3 मुख्य क्षेत्र होते हैं: 1. सबसे बाहरी क्षेत्र (नीला) – पूर्ण दहन, सबसे गर्म भाग। 2. मध्य क्षेत्र (पीला) – आंशिक दहन, मध्यम गर्म। 3. सबसे आंतरिक क्षेत्र (काला) – बिना जला मोम, सबसे कम गर्म।
छात्र ज्वाला के रंगों को देखेंगे।ज्वाला के क्षेत्र:
1. बाहरी (नीला) = पूर्ण दहन, सबसे गर्म।
2. मध्य (पीला) = आंशिक दहन।

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. दहन के लिए कौनसी गैस अत्यंत आवश्यक है?
  2. मोमबत्ती की ज्वाला का कौन-सा भाग सबसे गर्म होता है?
  3. ज्वलन ताप किसे कहते हैं?

10. गृहकार्य (Homework):

मोमबत्ती की ज्वाला का नामांकित चित्र बनाइए तथा उसके विभिन्न क्षेत्रों को दर्शाइए। आग बुझाने वाले (Fire extinguisher) सिलेंडर में कौनसी गैस होती है?

📌 नोट: यह B.Ed Science Lesson Plan दैनिक पाठ योजना पुस्तिका के लिए पूरी तरह से तैयार है।

B.Ed Science Lesson Plan 17: पाठ योजना क्रमांक – 17

दिनांक: ………………..
कक्षा: 8
कालांश: ………………..
योजना प्रकार: B.Ed Science Lesson Plan
विषय: विज्ञान
उपविषय: भौतिक विज्ञान
प्रकरण: बल तथा दाब (Force and Pressure)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में भौतिक विज्ञान के प्रति रुचि उत्पन्न करना।
  2. विद्यार्थियों में तर्क-वितर्क और वैज्ञानिक चिंतन की क्षमता का विकास करना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी बल और दाब की परिभाषा और उनके मात्रकों को जान सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी बल के प्रभावों (गति, दिशा और आकार बदलना) को समझ सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी दैनिक जीवन में बल और दाब के उपयोग (जैसे चाकू का तेज़ होना) का विश्लेषण कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी बल के विभिन्न प्रकारों को चित्र या चार्ट द्वारा दर्शाने का कौशल प्राप्त करेंगे।

3. शिक्षण सहायक सामग्री:

एक रबर की गेंद, चुंबक, लोहे की कील, एक चौड़ा लकड़ी का गुटका और एक पतला पेन।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रयोग-प्रदर्शन विधि, व्याख्यान विधि, प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी धक्का देने, खींचने और किसी वस्तु को उठाने जैसी क्रियाओं से भलीभांति परिचित हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँ
1.यदि दरवाज़ा बंद है, तो उसे खोलने के लिए आप क्या करते हैं?दरवाज़े को धक्का देते हैं या खींचते हैं।
2.फुटबॉल को दूर भेजने के लिए खिलाड़ी क्या करता है?गेंद पर किक (ठोकर) मारता है।
3.धक्का देने, खींचने या ठोकर मारने की क्रियाओं में हम वस्तु पर क्या लगाते हैं?बल लगाते हैं।
4.विज्ञान में बल और दाब का क्या अर्थ है?(समस्यात्मक)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, आज हम विज्ञान विषय में ‘बल तथा दाब’ के बारे में अध्ययन करेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
बल (Force) की अवधारणाछात्राध्यापक कथन: विज्ञान में किसी वस्तु पर लगने वाले धक्के (अपकर्षण/Push) या खिंचाव (अभिकर्षण/Pull) को बल कहते हैं। बल के कारण ही वस्तुओं में गति आती है या वे रुकती हैं।छात्र बल की परिभाषा समझेंगे।बल: वस्तु पर धक्का या खिंचाव (Push or Pull)।
बल के प्रभाव और प्रकारप्रदर्शन: रबर की गेंद को दबाना और चुंबक से कील खींचना।
छात्राध्यापक कथन: बल किसी वस्तु की चाल बदल सकता है, उसकी दिशा बदल सकता है और वस्तु के आकार में परिवर्तन (जैसे गेंद दबना) कर सकता है। बल मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं: 1. संपर्क बल (पेशीय बल, घर्षण बल) – जहाँ संपर्क आवश्यक है। 2. असंपर्क बल (चुंबकीय बल, गुरुत्वाकर्षण बल) – जो बिना छुए काम करते हैं।
छात्र प्रयोग देखेंगे और बल के प्रकार समझेंगे।बल के प्रभाव: गति, दिशा, आकार बदलना।
प्रकार: 1. संपर्क बल 2. असंपर्क बल।
दाब (Pressure)छात्राध्यापक कथन: किसी पृष्ठ के एकांक क्षेत्रफल पर लगने वाले बल को दाब कहते हैं। (दाब = बल / क्षेत्रफल)। क्षेत्रफल जितना कम होगा, दाब उतना ही अधिक होगा। इसीलिए कील का सिरा नुकीला होता है ताकि कम बल लगाकर अधिक दाब उत्पन्न किया जा सके।छात्र सूत्र को कॉपी में लिखेंगे।दाब = बल / क्षेत्रफल।
क्षेत्रफल कम -> दाब अधिक।

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. बल किसे कहते हैं?
  2. चुंबकीय बल संपर्क बल है या असंपर्क बल?
  3. चाकू की धार तेज़ क्यों की जाती है?

10. गृहकार्य (Homework):

स्कूल बैग की पट्टियां चौड़ी क्यों बनाई जाती हैं? दाब के सिद्धांत के आधार पर समझाइए।

📌 नोट: यह B.Ed Science Lesson Plan दैनिक पाठ योजना पुस्तिका के लिए पूरी तरह से तैयार है।

B.Ed Science Lesson Plan 18: पाठ योजना क्रमांक – 18

दिनांक: ………………..
कक्षा: 8
कालांश: ………………..
योजना प्रकार: B.Ed Science Lesson Plan
विषय: विज्ञान
उपविषय: भौतिक विज्ञान
प्रकरण: ध्वनि (Sound)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में भौतिक विज्ञान के प्रति जिज्ञासा उत्पन्न करना।
  2. विद्यार्थियों को दैनिक जीवन के अनुभवों को विज्ञान से जोड़ने की क्षमता प्रदान करना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ध्वनि की उत्पत्ति (कंपन द्वारा) को जान सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी यह समझ सकेंगे कि ध्वनि संचरण के लिए माध्यम की आवश्यकता होती है।
अनुप्रयोगविद्यार्थी आयाम और आवृत्ति के आधार पर प्रबल और मंद ध्वनि में अंतर कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी वाद्य यंत्रों में कंपन करने वाले भाग की पहचान कर सकेंगे।

3. शिक्षण सहायक सामग्री:

स्कूल की घंटी, रबर बैंड (छल्ला), थाली, चम्मच, चॉक, डस्टर।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रयोग-प्रदर्शन विधि, प्रश्नोत्तर प्रविधि, गतिविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी विभिन्न प्रकार की आवाज़ों (बोलना, हॉर्न, संगीत) से भलीभांति परिचित हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँ
1.स्कूल में कालांश (पिरियड) खत्म होने का पता कैसे चलता है?घंटी बजने से।
2.घंटी बजने पर हमें क्या सुनाई देती है?आवाज़ (ध्वनि)।
3.यदि हम बजती हुई घंटी को हाथ से कसकर पकड़ लें तो क्या होगा?आवाज़ बंद हो जाएगी।
4.घंटी पकड़ने पर आवाज़ क्यों बंद हो जाती है? ध्वनि कैसे उत्पन्न होती है?(समस्यात्मक)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, आज हम भौतिक विज्ञान में ‘ध्वनि’ के बारे में अध्ययन करेंगे कि यह कैसे उत्पन्न होती है और कैसे फैलती है।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
ध्वनि की उत्पत्ति (कंपन)प्रदर्शन: रबर बैंड को खींचकर छोड़ना और थाली पर चम्मच मारना।
छात्राध्यापक कथन: जब कोई वस्तु तेज़ी से आगे-पीछे गति करती है तो उसे कंपन (Vibration) कहते हैं। ध्वनि कंपायमान वस्तुओं द्वारा ही उत्पन्न होती है। जब हम बोलते हैं, तो हमारे गले में स्थित वाक्-तंतु (Vocal cords) कंपन करते हैं।
छात्र रबर बैंड में कंपन देखेंगे।ध्वनि: कंपायमान वस्तुओं से उत्पन्न।
मानव में: वाक्-तंतु का कंपन।
ध्वनि का संचरण (माध्यम)छात्राध्यापक कथन: ध्वनि को एक जगह से दूसरी जगह जाने के लिए किसी माध्यम (ठोस, द्रव या गैस) की आवश्यकता होती है। ध्वनि निर्वात (Vacuum) यानी जहाँ हवा नहीं है, वहाँ नहीं चल सकती। यही कारण है कि अंतरिक्ष में आवाज़ सुनाई नहीं देती। ध्वनि ठोस में सबसे तेज़ चलती है।छात्र सुनेंगे।ध्वनि संचरण के लिए माध्यम (ठोस/द्रव/गैस) आवश्यक है। निर्वात में ध्वनि नहीं चलती।
आयाम (Amplitude) और आवृत्ति (Frequency)छात्राध्यापक कथन: कंपन करने वाली वस्तु के अधिकतम विस्थापन को ‘आयाम’ कहते हैं। यदि आयाम अधिक है, तो ध्वनि तेज़ (प्रबल) होगी। एक सेकंड में होने वाले कंपनों की संख्या को ‘आवृत्ति’ कहते हैं, इसे हर्ट्ज़ (Hz) में मापते हैं। आवृत्ति अधिक होने पर ध्वनि पतली (तीक्ष्ण) होती है, जैसे सीटी या बच्चे की आवाज़।छात्र प्रबलता और तारत्व का अंतर समझेंगे।आयाम अधिक -> प्रबल (तेज़) ध्वनि।
आवृत्ति अधिक -> पतली/तीखी ध्वनि।

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. ध्वनि कैसे उत्पन्न होती है?
  2. क्या ध्वनि पानी (द्रव) के अंदर संचरण कर सकती है?
  3. आवृत्ति का मात्रक क्या है?

10. गृहकार्य (Homework):

अपने आस-पास पाए जाने वाले किन्हीं 5 वाद्य यंत्रों के नाम लिखिए तथा बताइए कि उनमें ध्वनि उत्पन्न करने वाला कंपायमान भाग कौन-सा है? (जैसे- ढोलक में तनी हुई झिल्ली)।

गतिविधि – 12 : द्वितीय शिक्षण विषय (विज्ञान)

कक्षा 9 एवं 10 के लिए (कुल 12 पाठ योजनाएं)

📌 नोट: यह B.Ed Science Lesson Plan दैनिक पाठ योजना पुस्तिका के लिए पूरी तरह से तैयार है।

गतिविधि क्रमांक-12: 12 B.Ed Science Lesson Plan (द्वितीय ब्लॉक शिक्षण अभ्यास)

B.Ed Science Lesson Plan (Plans 19 to 30) for Classes 9 and 10

B.Ed Science Lesson Plan 19: पाठ योजना क्रमांक – 19

दिनांक: ………………..
कक्षा: 9
कालांश: ………………..
योजना प्रकार: B.Ed Science Lesson Plan
विषय: विज्ञान
उपविषय: रसायन विज्ञान
प्रकरण: हमारे आस-पास के पदार्थ (Matter in Our Surroundings)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में विज्ञान के प्रति अन्वेषणात्मक दृष्टिकोण का विकास करना।
  2. पदार्थों की प्रकृति को समझने की क्षमता विकसित करना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी पदार्थ की परिभाषा और उसकी तीन अवस्थाओं (ठोस, द्रव, गैस) का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी पदार्थ की तीनों अवस्थाओं के गुणों की तुलना कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी तापमान बदलने पर पदार्थ की अवस्था परिवर्तन का दैनिक जीवन में उदाहरण दे सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी ठोस, द्रव और गैस के कणों की व्यवस्था का चित्र बना सकेंगे।

3. शिक्षण सहायक सामग्री:

बर्फ के टुकड़े, पानी, अगरबत्ती, चॉक, डस्टर, पदार्थ की अवस्थाओं के कणों का चार्ट।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रयोग-प्रदर्शन विधि, व्याख्यान विधि, प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी जल की तीनों अवस्थाओं (बर्फ, पानी, भाप) से सामान्य रूप से परिचित हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँ
1.प्यास लगने पर हम क्या पीते हैं?पानी (जल)।
2.पानी को फ्रिज (फ्रीजर) में रखने पर क्या होता है?वह बर्फ बन जाता है।
3.पानी को उबालने पर वह किसमें बदल जाता है?भाप (वाष्प) में।
4.बर्फ, पानी और भाप को विज्ञान की भाषा में क्या कहते हैं?पदार्थ की अवस्थाएं।
5.पदार्थ क्या है और इसके क्या गुण हैं?(समस्यात्मक)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, आज हम ‘हमारे आस-पास के पदार्थ’ और उनकी अवस्थाओं के बारे में विस्तार से अध्ययन करेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
पदार्थ की परिभाषा व स्वरूपछात्राध्यापक कथन: विश्व की प्रत्येक वस्तु जिस सामग्री से बनी है, उसे वैज्ञानिकों ने ‘पदार्थ’ (Matter) नाम दिया है। पदार्थ स्थान घेरता है (आयतन) और इसका द्रव्यमान होता है। पदार्थ बहुत छोटे-छोटे कणों से मिलकर बना होता है। ये कण निरंतर गतिशील रहते हैं।छात्र पदार्थ की परिभाषा सुनेंगे व समझेंगे।पदार्थ: जो स्थान घेरे और जिसका द्रव्यमान हो।
पदार्थ कणों से बना है।
पदार्थ की अवस्थाएं (ठोस, द्रव, गैस)छात्राध्यापक कथन: पदार्थ मुख्य रूप से तीन अवस्थाओं में पाया जाता है: ठोस, द्रव और गैस। 1. ठोस: निश्चित आकार और निश्चित आयतन (जैसे- चॉक, बर्फ)। 2. द्रव: अनिश्चित आकार लेकिन निश्चित आयतन (जैसे- पानी, तेल)। 3. गैस: अनिश्चित आकार और अनिश्चित आयतन (जैसे- हवा, ऑक्सीजन)।छात्र तीनों अवस्थाओं के गुण नोट करेंगे।अवस्थाएं:
ठोस (निश्चित आकार/आयतन)
द्रव (निश्चित आयतन)
गैस (अनिश्चित आकार/आयतन)
अवस्था परिवर्तनप्रदर्शन: बर्फ का पिघलना दिखाना।
छात्राध्यापक कथन: तापमान और दाब में परिवर्तन करके पदार्थ की अवस्था बदली जा सकती है। ठोस का द्रव में बदलना गलन (Melting) कहलाता है। द्रव का गैस में बदलना वाष्पीकरण (Evaporation) कहलाता है।
छात्र प्रयोग व प्रक्रिया को समझेंगे।ठोस → द्रव (गलन)
द्रव → गैस (वाष्पीकरण)

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. पदार्थ किसे कहते हैं?
  2. पदार्थ की उस अवस्था का नाम बताइए जिसका आकार और आयतन दोनों निश्चित होते हैं।
  3. गर्मियों में गीले कपड़े जल्दी क्यों सूख जाते हैं?

10. गृहकार्य (Homework):

ठोस, द्रव और गैस के कणों की व्यवस्था को दर्शाते हुए चित्र बनाइए और तीनों में अंतर स्पष्ट कीजिए।

📌 नोट: यह B.Ed Science Lesson Plan दैनिक पाठ योजना पुस्तिका के लिए पूरी तरह से तैयार है।

B.Ed Science Lesson Plan 20: पाठ योजना क्रमांक – 20

दिनांक: ………………..
कक्षा: 9
कालांश: ………………..
योजना प्रकार: B.Ed Science Lesson Plan
विषय: विज्ञान
उपविषय: रसायन विज्ञान
प्रकरण: क्या हमारे आस-पास के पदार्थ शुद्ध हैं?
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में प्रयोगात्मक और विश्लेषणात्मक क्षमता का विकास करना।
  2. शुद्ध और अशुद्ध पदार्थों के बीच वैज्ञानिक अंतर स्पष्ट करना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी शुद्ध पदार्थ और मिश्रण (Mixture) की परिभाषा जान सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी समांगी (Homogeneous) और विषमांगी (Heterogeneous) मिश्रण में अंतर कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी विलयन, निलंबन और कोलाइड के बीच अंतर को प्रयोग द्वारा पहचान सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी मिश्रण बनाने और छानने का कौशल प्राप्त करेंगे।

3. शिक्षण सहायक सामग्री:

पानी, नमक/चीनी, मिट्टी/रेत, दूध, काँच के तीन गिलास, टॉर्च।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रयोग-प्रदर्शन विधि, व्याख्यान विधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी शर्बत, मिट्टी का पानी और दूध जैसी वस्तुओं का उपयोग दैनिक जीवन में करते हैं और उनके बाहरी रूप से परिचित हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँ
1.बाज़ार से लाए गए दूध के पैकेट पर क्या लिखा होता है?शुद्ध दूध (Pure milk)।
2.क्या विज्ञान की दृष्टि से दूध एक शुद्ध पदार्थ है?(संभावित उत्तर) हाँ।
3.विज्ञान में ‘शुद्ध’ पदार्थ का क्या अर्थ होता है?(समस्यात्मक)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, आज हम जानेंगे कि विज्ञान में ‘शुद्ध पदार्थ’ क्या होते हैं और मिश्रण कितने प्रकार के होते हैं।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
शुद्ध पदार्थ व मिश्रणछात्राध्यापक कथन: आम व्यक्ति के लिए ‘शुद्ध’ का अर्थ मिलावट न होना है, परंतु वैज्ञानिकों के लिए सभी वस्तुएं विभिन्न पदार्थों का मिश्रण हैं। विज्ञान में ‘शुद्ध पदार्थ’ वह है जिसमें मौजूद सभी कण समान रासायनिक प्रकृति के हों (जैसे- लोहा, जल, नमक)। दूध जल, वसा और प्रोटीन का मिश्रण है, इसलिए विज्ञान की दृष्टि से यह शुद्ध नहीं है।छात्र वैज्ञानिक अर्थ को समझेंगे।शुद्ध पदार्थ: सभी कण समान प्रकृति के हों।
मिश्रण: दो या अधिक पदार्थों का मेल।
समांगी व विषमांगी मिश्रणप्रदर्शन: एक गिलास में नमक का पानी और दूसरे में रेत का पानी।
छात्राध्यापक कथन: नमक का पानी एक समांगी (Homogeneous) मिश्रण है क्योंकि इसमें नमक पूरी तरह घुल गया है और इसका संघटन समान है। इसे विलयन भी कहते हैं। रेत का पानी विषमांगी (Heterogeneous) मिश्रण है क्योंकि इसमें रेत अलग दिखाई देती है।
छात्र दोनों गिलासों का अवलोकन करेंगे।समांगी मिश्रण: समान संघटन (नमक+जल)।
विषमांगी मिश्रण: असमान संघटन (रेत+जल)।
विलयन, निलंबन और कोलाइडप्रदर्शन: गिलासों पर टॉर्च का प्रकाश डालना (टिंडल प्रभाव)।
छात्राध्यापक कथन: विलयन के कण बहुत छोटे होते हैं (प्रकाश नहीं फैलाते)। निलंबन (रेत+जल) के कण बड़े होते हैं, कुछ देर रखने पर नीचे बैठ जाते हैं। कोलाइड (जैसे दूध) के कण विलयन से बड़े और निलंबन से छोटे होते हैं, ये प्रकाश की किरण को फैलाते हैं (टिंडल प्रभाव)।
छात्र प्रकाश का मार्ग (टिंडल प्रभाव) देखेंगे।विलयन: कण बहुत छोटे।
निलंबन: कण बड़े, नीचे बैठते हैं।
कोलाइड: टिंडल प्रभाव (दूध)।

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. वैज्ञानिक भाषा में ‘शुद्ध पदार्थ’ का क्या अर्थ है?
  2. समांगी और विषमांगी मिश्रण में एक अंतर बताइए।
  3. टिंडल प्रभाव कौन प्रदर्शित करता है? (विलयन/कोलाइड)

10. गृहकार्य (Homework):

विलयन, निलंबन और कोलाइड में कणों के आकार और गुणों के आधार पर अंतर स्पष्ट कीजिए।

📌 नोट: यह B.Ed Science Lesson Plan दैनिक पाठ योजना पुस्तिका के लिए पूरी तरह से तैयार है।

B.Ed Science Lesson Plan 21: पाठ योजना क्रमांक – 21

दिनांक: ………………..
कक्षा: 9
कालांश: ………………..
योजना प्रकार: B.Ed Science Lesson Plan
विषय: विज्ञान
उपविषय: रसायन विज्ञान
प्रकरण: परमाणु एवं अणु (Atoms and Molecules)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में रसायन विज्ञान के मूल सिद्धांतों को समझने की क्षमता विकसित करना।
  2. वैज्ञानिक दृष्टिकोण और तार्किक चिंतन को बढ़ावा देना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी महर्षि कणाद और डाल्टन के परमाणु सिद्धांत का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी परमाणु और अणु के बीच अंतर को स्पष्ट कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी विभिन्न तत्वों के रासायनिक प्रतीकों का उपयोग कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी सरल यौगिकों के रासायनिक सूत्र बनाने का कौशल प्राप्त करेंगे।

3. शिक्षण सहायक सामग्री:

तत्वों के प्रतीकों का चार्ट, चॉक, डस्टर, लपेट फलक।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

व्याख्यान विधि, प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी पदार्थ और उसकी अवस्थाओं के बारे में जानते हैं कि पदार्थ छोटे कणों से बना है।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँ
1.यदि हम चॉक के टुकड़े को तोड़ते जाएँ तो क्या होगा?छोटे-छोटे टुकड़े प्राप्त होंगे।
2.अंत में हमें क्या मिलेगा?चॉक का चूर्ण (पाउडर)।
3.यदि इस चूर्ण के कण को भी तोड़ने का प्रयास करें तो क्या वह टूटेगा?(संभावित उत्तर) नहीं।
4.पदार्थ के इस सबसे छोटे, अविभाज्य कण को विज्ञान में क्या कहते हैं?(समस्यात्मक)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, आज हम पदार्थ के सबसे छोटे कण ‘परमाणु एवं अणु’ के बारे में विस्तार से अध्ययन करेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
परमाणु (Atom) क्या है?छात्राध्यापक कथन: भारतीय दार्शनिक महर्षि कणाद ने बताया था कि पदार्थ को विभाजित करते जाने पर अंत में एक ऐसा कण मिलेगा जिसे और विभाजित नहीं किया जा सकेगा। इसे उन्होंने ‘परमाणु’ कहा। जॉन डाल्टन ने भी बताया कि सभी द्रव्य सूक्ष्म कणों से बने हैं जिन्हें परमाणु कहते हैं। परमाणु किसी तत्व की सबसे छोटी इकाई है।छात्र परमाणु की अवधारणा को समझेंगे और लिखेंगे।परमाणु (Atom): पदार्थ का सूक्ष्मतम अविभाज्य कण।
खोज: डाल्टन।
तत्वों के प्रतीकछात्राध्यापक कथन: वैज्ञानिकों (बर्जिलियस) ने तत्वों को दर्शाने के लिए उनके नाम के अंग्रेजी या लैटिन शब्दों के पहले एक या दो अक्षरों का उपयोग किया। जैसे- हाइड्रोजन को H, ऑक्सीजन को O, और सोडियम को Na (लैटिन नाम Natrium से) लिखा जाता है।छात्र प्रतीकों को चार्ट में देखेंगे और याद करेंगे।प्रतीक:
हाइड्रोजन – H
ऑक्सीजन – O
सोडियम – Na
अणु (Molecule)छात्राध्यापक कथन: जब दो या दो से अधिक परमाणु रासायनिक बंध द्वारा आपस में जुड़ते हैं, तो ‘अणु’ बनता है। यह स्वतंत्र अवस्था में रह सकता है। उदाहरण के लिए, ऑक्सीजन के 2 परमाणु जुड़कर ऑक्सीजन गैस का अणु (O2) बनाते हैं। जल का अणु (H2O) दो हाइड्रोजन और एक ऑक्सीजन परमाणु से बनता है।छात्र परमाणु और अणु में अंतर समझेंगे।अणु (Molecule): 2 या अधिक परमाणुओं का समूह।
उदाहरण: O2, H2O.

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. पदार्थ के सबसे छोटे अविभाज्य कण को क्या कहते हैं?
  2. सोडियम का रासायनिक प्रतीक क्या है?
  3. जल (H2O) के एक अणु में हाइड्रोजन के कितने परमाणु होते हैं?

10. गृहकार्य (Homework):

डाल्टन के परमाणु सिद्धांत के मुख्य बिंदु लिखिए तथा किन्हीं 5 तत्वों के नाम और उनके प्रतीक लिखिए।

📌 नोट: यह B.Ed Science Lesson Plan दैनिक पाठ योजना पुस्तिका के लिए पूरी तरह से तैयार है।

B.Ed Science Lesson Plan 22: पाठ योजना क्रमांक – 22

दिनांक: ………………..
कक्षा: 9
कालांश: ………………..
योजना प्रकार: B.Ed Science Lesson Plan
विषय: विज्ञान
उपविषय: जीव विज्ञान
प्रकरण: जीवन की मौलिक इकाई (The Fundamental Unit of Life)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में सजीवों की सूक्ष्म संरचना को जानने की उत्सुकता पैदा करना।
  2. जीव विज्ञान में प्रायोगिक कौशल का विकास करना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी कोशिका (Cell) की परिभाषा और इसकी खोज करने वाले वैज्ञानिक का नाम जान सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी जंतु कोशिका और पादप कोशिका के मुख्य अंगों के कार्यों को समझ सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी कोशिका को सजीवों की संरचनात्मक इकाई के रूप में परिभाषित कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी पादप कोशिका का नामांकित चित्र बनाने में दक्षता प्राप्त करेंगे।

3. शिक्षण सहायक सामग्री:

जंतु और पादप कोशिका का रंगीन चार्ट, प्याज़ की झिल्ली की स्लाइड, सूक्ष्मदर्शी (यदि उपलब्ध हो)।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

व्याख्यान-प्रदर्शन विधि, चित्र प्रदर्शन, प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी यह जानते हैं कि मकान ईंटों से मिलकर बनता है, उसी प्रकार हमारा शरीर भी छोटी-छोटी इकाइयों से बना है।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँ
1.एक दीवार या मकान किससे मिलकर बना होता है?ईंटों से।
2.इसी प्रकार सभी सजीवों (मनुष्य, पेड़-पौधों) का शरीर किससे मिलकर बना होता है?छोटी-छोटी इकाइयों से।
3.सजीवों के शरीर की इस सबसे छोटी इकाई को विज्ञान में क्या कहते हैं?(समस्यात्मक)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, आज हम सजीवों की संरचनात्मक और क्रियात्मक इकाई अर्थात् ‘कोशिका’ के बारे में अध्ययन करेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
कोशिका क्या है? (खोज)छात्राध्यापक कथन: सजीवों की मूलभूत संरचनात्मक एवं क्रियात्मक इकाई को ‘कोशिका’ (Cell) कहते हैं। इसकी खोज सर्वप्रथम रॉबर्ट हुक ने 1665 में कॉर्क की पतली काट में की थी। कुछ जीव एक ही कोशिका से बने होते हैं (एककोशिकीय- जैसे अमीबा), जबकि मनुष्य बहुकोशिकीय जीव है।छात्र वैज्ञानिक का नाम और खोज का वर्ष लिखेंगे।कोशिका (Cell): जीवन की मौलिक इकाई।
खोज: रॉबर्ट हुक (1665)।
कोशिका की संरचनाचार्ट प्रदर्शन: कोशिका का चार्ट दिखाना।
छात्राध्यापक कथन: प्रत्येक कोशिका में मुख्य रूप से 3 भाग होते हैं: 1. प्लैज़्मा झिल्ली (सबसे बाहरी आवरण) 2. केंद्रक (कोशिका का नियंत्रण केंद्र) 3. कोशिकाद्रव्य (झिल्ली और केंद्रक के बीच का तरल पदार्थ, जिसमें कोशिकांग होते हैं)।
छात्र चार्ट में तीनों भागों को पहचानेंगे।कोशिका के भाग:
1. प्लैज़्मा झिल्ली
2. केंद्रक (Nucleus)
3. कोशिकाद्रव्य
कोशिकांग (Cell Organelles)छात्राध्यापक कथन: कोशिकाद्रव्य में कई छोटे अंग होते हैं जिन्हें कोशिकांग कहते हैं। ‘माइटोकॉन्ड्रिया’ को कोशिका का बिजलीघर (Powerhouse) कहा जाता है क्योंकि यह ऊर्जा उत्पन्न करता है। पौधों की कोशिका में ‘क्लोरोप्लास्ट’ होता है जो प्रकाश संश्लेषण में मदद करता है। पादप कोशिका के बाहर एक कठोर ‘कोशिका भित्ति’ (Cell wall) भी होती है जो जंतु कोशिका में नहीं होती।छात्र माइटोकॉन्ड्रिया के कार्य को ध्यान से सुनेंगे।माइटोकॉन्ड्रिया: बिजलीघर।
पादप कोशिका में कोशिका भित्ति पाई जाती है।

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. कोशिका की खोज किसने की थी?
  2. कोशिका का ‘बिजलीघर’ किसे कहा जाता है?
  3. जंतु कोशिका और पादप कोशिका में एक मुख्य अंतर बताइए।

10. गृहकार्य (Homework):

एक पादप कोशिका का स्वच्छ एवं नामांकित चित्र बनाइए तथा इसके किन्हीं तीन अंगों के कार्य लिखिए।

📌 नोट: यह B.Ed Science Lesson Plan दैनिक पाठ योजना पुस्तिका के लिए पूरी तरह से तैयार है।

B.Ed Science Lesson Plan 23: पाठ योजना क्रमांक – 23

दिनांक: ………………..
कक्षा: 9
कालांश: ………………..
योजना प्रकार: B.Ed Science Lesson Plan
विषय: विज्ञान
उपविषय: जीव विज्ञान
प्रकरण: ऊतक (Tissues)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में जीव विज्ञान विषय के प्रति अभिरुचि जाग्रत करना।
  2. विद्यार्थियों को सजीवों के शरीर के संगठन स्तर (Level of organization) को समझाना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ऊतक की परिभाषा और इसके प्रकारों (पादप व जंतु ऊतक) का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी जाइलम और फ्लोएम ऊतकों के कार्यों को समझ सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी शरीर में पेशियों के कार्य को ऊतक के कार्य से जोड़ सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी जंतु ऊतकों के विभिन्न प्रकारों का चार्ट बना सकेंगे।

3. शिक्षण सहायक सामग्री:

पादप और जंतु ऊतकों का वर्गीकरण चार्ट, चॉक, डस्टर।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

व्याख्यान विधि, चार्ट-प्रदर्शन विधि, प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी यह जानते हैं कि सजीवों का शरीर कोशिकाओं (Cells) से मिलकर बना होता है।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँ
1.सजीवों के शरीर की सबसे छोटी इकाई क्या है?कोशिका।
2.क्या मनुष्य के शरीर में केवल एक कोशिका होती है?नहीं, बहुत सारी (बहुकोशिकीय)।
3.जब बहुत सारी एक समान कोशिकाएं मिलकर किसी एक कार्य को करती हैं, तो उस समूह को क्या कहते हैं?(समस्यात्मक)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, आज हम विज्ञान में कोशिकाओं के समूह अर्थात् ‘ऊतक’ के बारे में अध्ययन करेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
ऊतक क्या है?छात्राध्यापक कथन: समान संरचना वाली कोशिकाओं का वह समूह जो एक साथ मिलकर एक विशिष्ट कार्य को संपन्न करता है, ‘ऊतक’ (Tissue) कहलाता है। जैसे- रक्त (Blood) एक तरल संयोजी ऊतक है। जंतु और पादप अलग-अलग प्रकार के होते हैं, इसलिए उनके ऊतक भी अलग-अलग होते हैं।छात्र ऊतक की परिभाषा को लिखेंगे।ऊतक (Tissue): एक समान कोशिकाओं का समूह।
रक्त एक ऊतक है।
पादप ऊतक (Plant Tissues)छात्राध्यापक कथन: पौधे स्थिर होते हैं, उन्हें सहारा देने वाले ऊतकों की अधिक आवश्यकता होती है। इनमें मुख्य रूप से संवहन ऊतक पाए जाते हैं: 1. ‘जाइलम’ (Xylem) – जो जड़ों से जल और खनिजों को पत्तियों तक पहुँचाता है। 2. ‘फ्लोएम’ (Phloem) – जो पत्तियों में बने भोजन को पौधे के अन्य भागों तक पहुँचाता है।छात्र जाइलम और फ्लोएम के कार्य समझेंगे।पादप ऊतक:
जाइलम = जल का संवहन।
फ्लोएम = भोजन का संवहन।
जंतु ऊतक (Animal Tissues)छात्राध्यापक कथन: जंतु गति करते हैं, इसलिए उनके अधिकांश ऊतक जीवित होते हैं। मुख्य जंतु ऊतक हैं: एपिथीलियमी (त्वचा), पेशीय ऊतक (गति के लिए), संयोजी ऊतक (रक्त और हड्डियां) तथा तंत्रिका ऊतक (मस्तिष्क, जो संदेश पहुँचाने का कार्य करता है)।छात्र जंतु ऊतकों के प्रकार सुनेंगे।जंतु ऊतक: पेशीय ऊतक (गति), तंत्रिका ऊतक (संदेश)।

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. ऊतक किसे कहते हैं?
  2. पौधों में जल का संवहन किस ऊतक द्वारा होता है?
  3. मनुष्य के मस्तिष्क में कौन-सा ऊतक पाया जाता है?

10. गृहकार्य (Homework):

जाइलम और फ्लोएम ऊतक में क्या अंतर है? स्पष्ट कीजिए।

📌 नोट: यह B.Ed Science Lesson Plan दैनिक पाठ योजना पुस्तिका के लिए पूरी तरह से तैयार है।

B.Ed Science Lesson Plan 24: पाठ योजना क्रमांक – 24

दिनांक: ………………..
कक्षा: 9
कालांश: ………………..
योजना प्रकार: B.Ed Science Lesson Plan
विषय: विज्ञान
उपविषय: भौतिक विज्ञान
प्रकरण: गति (Motion)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में भौतिक विज्ञान के प्रति गणितीय व तार्किक दृष्टिकोण विकसित करना।
  2. दैनिक जीवन में होने वाली गतियों का वैज्ञानिक विश्लेषण करने की क्षमता का विकास करना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी गति, दूरी और विस्थापन की परिभाषाओं को जान सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी चाल (Speed) और वेग (Velocity) के बीच अंतर को स्पष्ट कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी चाल के सूत्र (दूरी/समय) का उपयोग करके सरल संख्यात्मक प्रश्न हल कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी दूरी-समय ग्राफ (Distance-Time Graph) खींच सकेंगे।

3. शिक्षण सहायक सामग्री:

एक खिलौना कार, मीटर स्केल, स्टॉपवॉच, दूरी-समय ग्राफ का चार्ट, चॉक, डस्टर।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रदर्शन विधि, निगमन विधि (संख्यात्मक प्रश्नों हेतु), प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी धीमी और तेज़ चलने वाली वस्तुओं के बारे में सामान्य जानकारी रखते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँ
1.एक खंभा और सड़क पर चलती हुई कार में क्या अंतर है?खंभा रुका हुआ है, कार चल रही है।
2.जो वस्तु समय के साथ अपनी जगह (स्थिति) बदलती है, उसे विज्ञान में क्या कहते हैं?गतिशील वस्तु।
3.साइकिल और मोटर साइकिल में कौन तेज़ चलता है?मोटर साइकिल।
4.कोई वस्तु कितनी तेज़ या कितनी धीमी चल रही है, इसका पता हम कैसे लगाते हैं?(समस्यात्मक)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, आज हम विज्ञान में ‘गति’ पाठ के अंतर्गत दूरी, विस्थापन, चाल और वेग के बारे में अध्ययन करेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
गति, दूरी और विस्थापनछात्राध्यापक कथन: यदि किसी वस्तु की स्थिति समय के साथ बदल रही है, तो वह गति में है। किसी वस्तु द्वारा तय किए गए पथ की कुल लंबाई को ‘दूरी’ (Distance) कहते हैं। वस्तु की प्रारंभिक और अंतिम स्थिति के बीच की न्यूनतम (सीधी) दूरी को ‘विस्थापन’ (Displacement) कहते हैं। दूरी कभी शून्य नहीं हो सकती, परंतु विस्थापन शून्य हो सकता है (जैसे गोल चक्कर लगाकर वापस उसी स्थान पर आना)।छात्र दूरी और विस्थापन का अंतर समझेंगे।दूरी: कुल पथ की लंबाई।
विस्थापन: प्रारंभिक व अंतिम बिंदु की न्यूनतम दूरी।
चाल (Speed) और वेग (Velocity)छात्राध्यापक कथन: एकांक समय में तय की गई दूरी को चाल कहते हैं। चाल = दूरी / समय। इसका मात्रक मीटर/सेकंड (m/s) होता है। यदि चाल के साथ दिशा भी निश्चित हो (या एकांक समय में विस्थापन), तो उसे वेग (Velocity) कहते हैं। वेग को बदलने की दर को ‘त्वरण’ (Acceleration) कहा जाता है।छात्र चाल का सूत्र अपनी कॉपी में लिखेंगे।चाल = दूरी / समय (m/s)
वेग = चाल + निश्चित दिशा।
संख्यात्मक प्रश्नछात्राध्यापक क्रिया: श्यामपट्ट पर प्रश्न: “एक कार 100 किलोमीटर की दूरी 2 घंटे में तय करती है, तो उसकी चाल क्या होगी?” (हल: चाल = 100/2 = 50 किमी/घंटा)।छात्र प्रश्न को हल करेंगे और उत्तर देंगे।हल: चाल = दूरी/समय = 100/2 = 50 km/h.

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. दूरी और विस्थापन में क्या अंतर है?
  2. चाल का सूत्र क्या होता है?
  3. चाल का एस.आई. (S.I.) मात्रक क्या है?

10. गृहकार्य (Homework):

एक ट्रेन 200 किलोमीटर की दूरी 4 घंटे में तय करती है। ट्रेन की चाल ज्ञात कीजिए।

📌 नोट: यह B.Ed Science Lesson Plan दैनिक पाठ योजना पुस्तिका के लिए पूरी तरह से तैयार है।

B.Ed Science Lesson Plan 25: पाठ योजना क्रमांक – 25

दिनांक: ………………..
कक्षा: 10
कालांश: ………………..
योजना प्रकार: B.Ed Science Lesson Plan
विषय: विज्ञान
उपविषय: रसायन विज्ञान
प्रकरण: रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में रासायनिक परिवर्तनों को समझने की वैज्ञानिक दृष्टि विकसित करना।
  2. प्रायोगिक और विश्लेषणात्मक क्षमता का विकास करना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी रासायनिक अभिक्रिया और रासायनिक समीकरण की परिभाषा जान सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी अभिकारक (Reactants) और उत्पाद (Products) के बीच अंतर स्पष्ट कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी शब्द समीकरण को रासायनिक सूत्रों के रूप में लिख सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी सरल रासायनिक समीकरणों को संतुलित करने का कौशल प्राप्त करेंगे।

3. शिक्षण सहायक सामग्री:

मैग्नीशियम रिबन, रेगमाल (सैंडपेपर), बर्नर (स्पिरिट लैंप), चिमटा, वॉच ग्लास, चॉक।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रयोग-प्रदर्शन विधि, व्याख्यान विधि, प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी भौतिक और रासायनिक परिवर्तनों (जैसे दूध से दही बनना) के बारे में पूर्व ज्ञान रखते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँ
1.लोहे को नमी में खुला छोड़ने पर क्या होता है?उस पर जंग लग जाती है।
2.दूध में जामन डालने पर क्या बनता है?दही।
3.जंग लगना या दही बनना किस प्रकार का परिवर्तन है?रासायनिक परिवर्तन।
4.जब कोई रासायनिक परिवर्तन होता है, तो उसे विज्ञान में क्या कहते हैं और उसे कैसे लिखते हैं?(समस्यात्मक)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, आज हम ‘रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण’ के बारे में विस्तार से अध्ययन करेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
रासायनिक अभिक्रियाप्रदर्शन: मैग्नीशियम रिबन को रेगमाल से साफ करके जलाना।
छात्राध्यापक कथन: जब मैग्नीशियम ऑक्सीजन में जलता है, तो वह चमकदार श्वेत लौ के साथ जलकर सफेद चूर्ण (मैग्नीशियम ऑक्साइड) बनाता है। जब भी कोई रासायनिक परिवर्तन होता है, हम कहते हैं कि ‘रासायनिक अभिक्रिया’ हुई है। इसमें रंग, अवस्था, या तापमान में परिवर्तन हो सकता है या गैस निकल सकती है।
छात्र प्रयोग को ध्यानपूर्वक देखेंगे।रासायनिक अभिक्रिया: नए पदार्थ (उत्पाद) का बनना।
पहचान: रंग, अवस्था या ताप में परिवर्तन।
रासायनिक समीकरणछात्राध्यापक कथन: अभिक्रिया को शब्दों में लिखना ‘शब्द समीकरण’ कहलाता है (मैग्नीशियम + ऑक्सीजन → मैग्नीशियम ऑक्साइड)। जो पदार्थ अभिक्रिया में भाग लेते हैं उन्हें ‘अभिकारक’ (Reactants) कहते हैं, और जो नया पदार्थ बनता है उसे ‘उत्पाद’ (Products) कहते हैं। इसे सूत्रों से लिखना ‘रासायनिक समीकरण’ है: Mg + O2 → MgO.छात्र अभिकारक और उत्पाद को समझेंगे।अभिकारक → उत्पाद
Mg + O2 → MgO
समीकरण को संतुलित करनाछात्राध्यापक कथन: द्रव्यमान संरक्षण के नियम के अनुसार, किसी भी रासायनिक अभिक्रिया में द्रव्यमान का न तो निर्माण होता है और न ही विनाश। इसलिए, तीर के दोनों ओर (अभिकारक और उत्पाद में) तत्वों के परमाणुओं की संख्या समान होनी चाहिए। इसे संतुलित समीकरण कहते हैं: 2Mg + O2 → 2MgO.छात्र समीकरण को संतुलित करना सीखेंगे।संतुलित समीकरण: दोनों ओर परमाणुओं की संख्या समान।
2Mg + O2 → 2MgO

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. रासायनिक अभिक्रिया में भाग लेने वाले पदार्थों को क्या कहते हैं?
  2. मैग्नीशियम रिबन को जलाने से पहले रेगमाल से क्यों रगड़ा जाता है? (ऑक्सीजन की परत हटाने के लिए)
  3. रासायनिक समीकरणों को संतुलित करना क्यों आवश्यक है?

10. गृहकार्य (Homework):

निम्नलिखित शब्द समीकरण को रासायनिक समीकरण में लिखकर संतुलित कीजिए: हाइड्रोजन + क्लोरीन → हाइड्रोजन क्लोराइड।

📌 नोट: यह B.Ed Science Lesson Plan दैनिक पाठ योजना पुस्तिका के लिए पूरी तरह से तैयार है।

B.Ed Science Lesson Plan 26: पाठ योजना क्रमांक – 26

दिनांक: ………………..
कक्षा: 10
कालांश: ………………..
योजना प्रकार: B.Ed Science Lesson Plan
विषय: विज्ञान
उपविषय: रसायन विज्ञान
प्रकरण: धातु एवं अधातु (Metals and Non-metals)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में रसायन विज्ञान के प्रति रुचि उत्पन्न करना।
  2. तत्वों के भौतिक और रासायनिक गुणों का तुलनात्मक अध्ययन करने की क्षमता विकसित करना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी धातु और अधातु के उदाहरणों (लोहा, तांबा, ऑक्सीजन) का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी धातु और अधातु के भौतिक गुणों (आघातवर्ध्यता, तन्यता, चालकता) में अंतर स्पष्ट कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी दैनिक जीवन में धातुओं के उपयोग का कारण बता सकेंगे (जैसे तार तांबे के क्यों होते हैं)।
कौशलविद्यार्थी धातुओं के गुणों को दर्शाने वाली सारणी बना सकेंगे।

3. शिक्षण सहायक सामग्री:

लोहे की कील, तांबे का तार, कोयला (कार्बन), हथौड़ा, बैटरी और बल्ब (परिपथ), चॉक।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रयोग-प्रदर्शन विधि, व्याख्यान विधि, प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी लोहा, सोना, चांदी और तांबे जैसी धातुओं के सामान्य उपयोग से परिचित हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँ
1.महिलाएं आभूषण (गहने) किस चीज़ के पहनती हैं?सोने या चांदी के।
2.हमारे घरों में बिजली के तार किसके बने होते हैं?तांबे (कॉपर) या एल्युमिनियम के।
3.लोहा, तांबा, सोना आदि क्या कहलाते हैं?धातु (Metals)।
4.धातुओं के क्या-क्या गुण होते हैं और ये अधातु (जैसे कोयला) से कैसे अलग हैं?(समस्यात्मक)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, आज हम विज्ञान में ‘धातु एवं अधातु’ के भौतिक और रासायनिक गुणों का विस्तार से अध्ययन करेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
आघातवर्ध्यता (Malleability) और तन्यता (Ductility)प्रदर्शन: लोहे की कील और कोयले पर हथौड़े से वार करना।
छात्राध्यापक कथन: लोहे की कील चपटी हो जाती है लेकिन कोयला टूट जाता है। धातुओं को पीटकर पतली चादर बनाया जा सकता है, इस गुण को ‘आघातवर्ध्यता’ कहते हैं। धातुओं को खींचकर पतले तार बनाए जा सकते हैं, इसे ‘तन्यता’ कहते हैं (जैसे तांबे का तार)। सोना सबसे अधिक तन्य धातु है। अधातुएं (जैसे कोयला, सल्फर) भंगुर होती हैं, टूट जाती हैं।
छात्र प्रयोग देखकर गुणों को समझेंगे।धातुओं के गुण:
आघातवर्ध्यता: पीटकर चादर बनाना।
तन्यता: तार खींचना।
विद्युत और ऊष्मा की चालकताप्रदर्शन: तांबे के तार को बैटरी व बल्ब से जोड़कर दिखाना।
छात्राध्यापक कथन: धातुएं ऊष्मा और विद्युत की सुचालक होती हैं। इसलिए बिजली के तार तांबे के और खाना पकाने के बर्तन एल्युमिनियम या लोहे के होते हैं। अधातुएं कुचालक होती हैं (ग्रेफाइट को छोड़कर, जो विद्युत का सुचालक है)।
छात्र विद्युत परिपथ में बल्ब को जलते हुए देखेंगे।धातु: विद्युत व ऊष्मा की सुचालक।
अधातु: कुचालक (अपवाद- ग्रेफाइट)।
ध्वानिक (Sonorous) और चमकछात्राध्यापक कथन: धातुएं किसी कठोर सतह से टकराने पर आवाज़ उत्पन्न करती हैं (जैसे स्कूल की घंटी), इसे ‘ध्वानिक’ कहते हैं। धातुओं की अपनी एक चमक (Metallic lustre) होती है। कमरे के ताप पर पारा (Mercury) को छोड़कर सभी धातुएं ठोस होती हैं, पारा द्रव है।छात्र ध्वानिक का अर्थ समझेंगे।ध्वानिक: टकराने पर आवाज़।
धातु चमक: सोने, चांदी की चमक।

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. धातुओं को पीटकर चादर बनाने के गुण को क्या कहते हैं?
  2. कमरे के तापमान पर द्रव अवस्था में पाई जाने वाली धातु का नाम बताइए।
  3. विद्युत की सुचालक किसी एक अधातु का नाम बताइए।

10. गृहकार्य (Homework):

धातु और अधातु में उनके भौतिक गुणों के आधार पर कोई 4 अंतर सारणी बनाकर लिखिए।

📌 नोट: यह B.Ed Science Lesson Plan दैनिक पाठ योजना पुस्तिका के लिए पूरी तरह से तैयार है।

B.Ed Science Lesson Plan 27: पाठ योजना क्रमांक – 27

दिनांक: ………………..
कक्षा: 10
कालांश: ………………..
योजना प्रकार: B.Ed Science Lesson Plan
विषय: विज्ञान
उपविषय: जीव विज्ञान
प्रकरण: जैव प्रक्रम (Life Processes) – पोषण
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में जीव विज्ञान के प्रति रुचि जाग्रत करना।
  2. विद्यार्थियों को सजीवों के शरीर में होने वाली आवश्यक प्रक्रियाओं का ज्ञान देना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘जैव प्रक्रम’ की परिभाषा और इसके मुख्य प्रकारों (पोषण, श्वसन, वहन, उत्सर्जन) को जान सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी स्वपोषी पोषण और विषमपोषी पोषण में अंतर स्पष्ट कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया में कच्ची सामग्री (जल, CO2) की आवश्यकता को समझ सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी पत्ती की अनुप्रस्थ काट (रंध्र) का चित्र बना सकेंगे।

3. शिक्षण सहायक सामग्री:

पत्ती की आंतरिक संरचना और रंध्र (Stomata) का चार्ट, चॉक, डस्टर।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

व्याख्यान विधि, चार्ट-प्रदर्शन विधि, प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी यह जानते हैं कि सजीवों को जीवित रहने के लिए भोजन, साँस लेने और उत्सर्जन की आवश्यकता होती है।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँ
1.एक सजीव और निर्जीव वस्तु में क्या अंतर है?सजीव साँस लेते हैं, वृद्धि करते हैं, निर्जीव नहीं।
2.शरीर की वृद्धि और ऊर्जा के लिए सजीव क्या करते हैं?भोजन ग्रहण करते हैं।
3.शरीर के अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने को क्या कहते हैं?उत्सर्जन।
4.सजीवों को जीवित रखने वाली इन सभी प्रक्रियाओं को सम्मिलित रूप से क्या कहते हैं?(समस्यात्मक)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, आज हम सजीवों को जीवित रखने वाली प्रक्रियाओं ‘जैव प्रक्रम’ और उनमें से मुख्य प्रक्रम ‘पोषण’ के बारे में अध्ययन करेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
जैव प्रक्रम (Life Processes)छात्राध्यापक कथन: वे सभी प्रक्रम (प्रक्रियाएं) जो सम्मिलित रूप से सजीवों के अनुरक्षण (Maintenance) का कार्य करते हैं, जैव प्रक्रम कहलाते हैं। शरीर को जीवित रखने, मरम्मत करने और ऊर्जा के लिए ये आवश्यक हैं। मुख्य जैव प्रक्रम हैं: पोषण (भोजन लेना), श्वसन (ऊर्जा बनाना), वहन (पदार्थों का परिवहन) और उत्सर्जन (गंदगी बाहर निकालना)।छात्र जैव प्रक्रमों के नाम अपनी कॉपी में लिखेंगे।जैव प्रक्रम: पोषण, श्वसन, वहन, उत्सर्जन।
कार्य: सजीवों का अनुरक्षण।
पोषण एवं उसके प्रकारछात्राध्यापक कथन: ऊर्जा के स्रोत (भोजन) को शरीर के अंदर लेने की प्रक्रिया को पोषण कहते हैं। 1. स्वपोषी पोषण: हरे पौधे प्रकाश संश्लेषण द्वारा अकार्बनिक पदार्थों (CO2 व जल) से अपना भोजन स्वयं बनाते हैं। 2. विषमपोषी पोषण: जीव अपने भोजन के लिए प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से पौधों पर निर्भर करते हैं (जैसे- मनुष्य, जानवर, अमीबा)।छात्र स्वपोषी और विषमपोषी का अर्थ समझेंगे।पोषण:
1. स्वपोषी (हरे पौधे)
2. विषमपोषी (जंतु, मानव)
रंध्र (Stomata) की भूमिकाचार्ट प्रदर्शन: पत्ती के रंध्र (Stomata) का चित्र दिखाना।
छात्राध्यापक कथन: पौधों में प्रकाश संश्लेषण के लिए कार्बन डाइऑक्साइड गैस पत्तियों की सतह पर मौजूद छोटे छिद्रों (रंध्रों) के माध्यम से अंदर जाती है। रंध्रों का खुलना और बंद होना द्वार कोशिकाओं (Guard cells) का कार्य है। रंध्रों से जल वाष्प के रूप में भी बाहर निकलता है (वाष्पोत्सर्जन)।
छात्र चार्ट में रंध्र और द्वार कोशिकाएं देखेंगे।रंध्र (Stomata): गैसों का आदान-प्रदान (CO2 अंदर, O2 बाहर)।
नियंत्रण: द्वार कोशिकाएं।

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. जैव प्रक्रम किसे कहते हैं?
  2. हरे पौधों में किस प्रकार का पोषण पाया जाता है?
  3. पत्तियों में गैसों का आदान-प्रदान किन छिद्रों के द्वारा होता है?

10. गृहकार्य (Homework):

खुले एवं बंद रंध्र छिद्र (Stomata) का नामांकित चित्र बनाइए तथा इसके मुख्य कार्य लिखिए।

📌 नोट: यह B.Ed Science Lesson Plan दैनिक पाठ योजना पुस्तिका के लिए पूरी तरह से तैयार है।

B.Ed Science Lesson Plan 28: पाठ योजना क्रमांक – 28

दिनांक: ………………..
कक्षा: 10
कालांश: ………………..
योजना प्रकार: B.Ed Science Lesson Plan
विषय: विज्ञान
उपविषय: जीव विज्ञान
प्रकरण: नियंत्रण एवं समन्वय (Control and Coordination)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में मानव शरीर की जटिल प्रणालियों को समझने की रुचि जाग्रत करना।
  2. सजीवों की प्रतिक्रियाओं (Responses) के प्रति वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी तंत्रिका कोशिका (Neuron) और मानव मस्तिष्क के मुख्य भागों के नाम जान सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी प्रतिवर्ती क्रिया (Reflex Action) की प्रक्रिया को समझ सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी अचानक गर्म वस्तु छूने पर हाथ हटाने की क्रिया को प्रतिवर्ती चाप से जोड़ सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी तंत्रिका कोशिका (न्यूरॉन) का नामांकित चित्र बना सकेंगे।

3. शिक्षण सहायक सामग्री:

तंत्रिका कोशिका (Neuron) का चार्ट, प्रतिवर्ती चाप (Reflex Arc) को दर्शाने वाला चित्र, चॉक।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

व्याख्यान विधि, चार्ट-प्रदर्शन विधि, प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी यह जानते हैं कि गर्म चीज़ छूने पर हम तुरंत हाथ हटा लेते हैं, और हम अपने मस्तिष्क (दिमाग) से सोचते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँ
1.अचानक आपके पैर में कांटा चुभ जाए तो आप क्या करते हैं?हम तुरंत पैर ऊपर उठा लेते हैं।
2.यह कार्य हम सोचकर करते हैं या अचानक हो जाता है?अचानक हो जाता है।
3.शरीर को यह संदेश कौन पहुँचाता है कि पैर में दर्द हुआ है?नसें (तंत्रिकाएं)।
4.इन तंत्रिकाओं और मस्तिष्क द्वारा शरीर पर नियंत्रण रखने की इस पूरी प्रणाली को क्या कहते हैं?(समस्यात्मक)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, आज हम शरीर के महत्वपूर्ण तंत्र ‘नियंत्रण एवं समन्वय’ और तंत्रिका कोशिका के बारे में अध्ययन करेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
तंत्रिका तंत्र और न्यूरॉनचार्ट प्रदर्शन: तंत्रिका कोशिका (Neuron) का चित्र。
छात्राध्यापक कथन: जंतुओं में नियंत्रण एवं समन्वय का कार्य तंत्रिका तंत्र (Nervous system) और पेशी ऊतक करते हैं। तंत्रिका तंत्र की सबसे छोटी इकाई ‘न्यूरॉन’ है। न्यूरॉन में मुख्य भाग होते हैं: द्रुमिका (Dendrite), कोशिकाकाय (Cell body) और तंत्रिकाक्ष (Axon)। द्रुमिका सूचनाएँ प्राप्त करती है और एक्सॉन उन्हें आगे भेजता है।
छात्र न्यूरॉन के भागों को चित्र में पहचानेंगे।तंत्रिका तंत्र की इकाई: न्यूरॉन (Neuron)।
भाग: द्रुमिका, कोशिकाकाय, तंत्रिकाक्ष।
प्रतिवर्ती क्रिया (Reflex Action)छात्राध्यापक कथन: जब हम किसी गर्म वस्तु को छूते हैं तो तुरंत हाथ हटा लेते हैं। पर्यावरण में किसी घटना के प्रति अचानक की गई अनैच्छिक अनुक्रिया ‘प्रतिवर्ती क्रिया’ कहलाती है। इसमें सोचने का समय नहीं होता। इसका नियंत्रण मस्तिष्क नहीं, बल्कि ‘मेरुरज्जु’ (Spinal cord) करती है। संदेश का यह रास्ता ‘प्रतिवर्ती चाप’ कहलाता है।छात्र प्रतिवर्ती क्रिया को उदाहरण सहित समझेंगे।प्रतिवर्ती क्रिया: अचानक अनुक्रिया (हाथ हटाना)।
नियंत्रण: मेरुरज्जु (Spinal cord)।
मानव मस्तिष्क (Human Brain)छात्राध्यापक कथन: जो क्रियाएं हम सोच-समझकर करते हैं (जैसे लिखना, बोलना), उनका नियंत्रण मस्तिष्क करता है। मस्तिष्क के तीन मुख्य भाग हैं: 1. अग्रमस्तिष्क (सोचने-समझने का मुख्य भाग), 2. मध्यमस्तिष्क, और 3. पश्चमस्तिष्क (शरीर का संतुलन बनाना, जैसे सीधी रेखा में चलना)।छात्र मस्तिष्क के कार्यों को सुनेंगे।मस्तिष्क के कार्य:
अग्र: सोचना।
पश्च: शरीर का संतुलन।

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. तंत्रिका तंत्र की मूलभूत इकाई को क्या कहते हैं?
  2. अचानक गर्म वस्तु छूने पर हाथ हटाना कौन-सी क्रिया है?
  3. प्रतिवर्ती क्रियाओं का नियंत्रण शरीर के किस अंग द्वारा होता है?

10. गृहकार्य (Homework):

तंत्रिका कोशिका (न्यूरॉन) का स्वच्छ एवं नामांकित चित्र बनाइए तथा इसके विभिन्न भागों के नाम लिखिए।

📌 नोट: यह B.Ed Science Lesson Plan दैनिक पाठ योजना पुस्तिका के लिए पूरी तरह से तैयार है।

B.Ed Science Lesson Plan 29: पाठ योजना क्रमांक – 29

दिनांक: ………………..
कक्षा: 10
कालांश: ………………..
योजना प्रकार: B.Ed Science Lesson Plan
विषय: विज्ञान
उपविषय: भौतिक विज्ञान
प्रकरण: प्रकाश – परावर्तन तथा अपवर्तन
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में भौतिक विज्ञान के प्रति प्रायोगिक दृष्टिकोण विकसित करना।
  2. प्रकाशीय घटनाओं (Optical phenomena) को समझने की क्षमता का विकास करना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी प्रकाश के परावर्तन (Reflection) के नियमों का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी समतल दर्पण और गोलीय दर्पण (अवतल, उत्तल) में अंतर स्पष्ट कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी वाहनों के साइड मिरर (पश्च-दृश्य दर्पण) में उत्तल दर्पण के उपयोग का कारण बता सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी प्रकाश के परावर्तन का किरण आरेख (Ray diagram) बना सकेंगे।

3. शिक्षण सहायक सामग्री:

समतल दर्पण (छोटा शीशा), टॉर्च, लेज़र लाइट (यदि हो), चम्मच (गोलीय दर्पण समझाने हेतु), चॉक।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रदर्शन विधि, व्याख्यान विधि, प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी रोज़ाना अपना चेहरा आईने (दर्पण) में देखते हैं और जानते हैं कि उसमें उनका प्रतिबिंब बनता है।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँ
1.अँधेरे कमरे में वस्तुएं देखने के लिए हम क्या करते हैं?लाइट या टॉर्च जलाते हैं (प्रकाश करते हैं)।
2.हम अपना चेहरा किस चीज़ में देखते हैं?आईने (दर्पण) में।
3.दर्पण में हमें अपना चेहरा क्यों दिखाई देता है? प्रकाश का क्या होता है?प्रकाश टकराकर वापस आता है।
4.प्रकाश के किसी चमकदार सतह से टकराकर लौटने की घटना को विज्ञान में क्या कहते हैं?(समस्यात्मक)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, आज हम ‘प्रकाश’ पाठ के अंतर्गत प्रकाश के ‘परावर्तन’ और दर्पणों के प्रकारों का अध्ययन करेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
प्रकाश का परावर्तन (Reflection)प्रदर्शन: टॉर्च/लेज़र की रोशनी दर्पण पर डालना और उसे दीवार पर मोड़ना।
छात्राध्यापक कथन: जब प्रकाश की किरण किसी पॉलिशदार या चमकदार सतह (जैसे दर्पण) पर गिरती है, तो सतह उसे वापस उसी माध्यम में भेज देती है। इसे प्रकाश का परावर्तन कहते हैं। परावर्तन के नियम: 1. आपतन कोण (Angle of incidence) सदैव परावर्तन कोण (Angle of reflection) के बराबर होता है। 2. आपतित किरण, परावर्तित किरण और अभिलंब तीनों एक ही तल में होते हैं।
छात्र परावर्तन के नियम कॉपी में लिखेंगे।परावर्तन: प्रकाश का सतह से टकराकर लौटना।
नियम: आपतन कोण = परावर्तन कोण (∠i = ∠r)।
गोलीय दर्पण (Spherical Mirrors)प्रदर्शन: चमकदार स्टील का चम्मच दिखाना।
छात्राध्यापक कथन: जिन दर्पणों का परावर्तक पृष्ठ गोल (वक्रित) होता है, वे गोलीय दर्पण कहलाते हैं। यदि पृष्ठ अंदर की ओर धंसा हुआ हो (चम्मच का अंदर का भाग), तो उसे ‘अवतल दर्पण’ (Concave) कहते हैं। यदि पृष्ठ बाहर की ओर उभरा हुआ हो (चम्मच का पीछे का भाग), तो उसे ‘उत्तल दर्पण’ (Convex) कहते हैं।
छात्र चम्मच को देखकर अवतल और उत्तल को समझेंगे।गोलीय दर्पण:
अवतल: अंदर की ओर वक्रित।
उत्तल: बाहर की ओर उभरा हुआ।
दर्पणों के उपयोगछात्राध्यापक कथन: अवतल दर्पण का उपयोग टॉर्च, सर्चलाइट, वाहनों की हेडलाइट और डेंटिस्ट (दांतों का बड़ा प्रतिबिंब देखने के लिए) करते हैं। उत्तल दर्पण का उपयोग वाहनों में साइड मिरर (पीछे का ट्रैफिक देखने के लिए) किया जाता है क्योंकि यह हमेशा सीधा और छोटा प्रतिबिंब बनाता है, जिससे बड़ा क्षेत्र दिखाई देता है।छात्र उपयोगों को नोट करेंगे।अवतल के उपयोग: टॉर्च, डेंटिस्ट।
उत्तल के उपयोग: वाहनों के साइड मिरर (विस्तृत दृश्य)।

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. परावर्तन का पहला नियम क्या है?
  2. वाहनों में पीछे का दृश्य देखने के लिए (Side mirror) किस दर्पण का उपयोग होता है?
  3. दंत चिकित्सक (Dentist) मरीजों के दांत देखने के लिए किस दर्पण का उपयोग करते हैं?

10. गृहकार्य (Homework):

प्रकाश के परावर्तन का किरण आरेख बनाइए जिसमें आपतित किरण, परावर्तित किरण, अभिलंब, आपतन कोण और परावर्तन कोण स्पष्ट रूप से दर्शाए गए हों।

📌 नोट: यह B.Ed Science Lesson Plan दैनिक पाठ योजना पुस्तिका के लिए पूरी तरह से तैयार है।

B.Ed Science Lesson Plan 30: पाठ योजना क्रमांक – 30

दिनांक: ………………..
कक्षा: 10
कालांश: ………………..
योजना प्रकार: B.Ed Science Lesson Plan
विषय: विज्ञान
उपविषय: भौतिक विज्ञान
प्रकरण: विद्युत (Electricity)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में भौतिक विज्ञान और प्रौद्योगिकी के प्रति रुचि उत्पन्न करना।
  2. दैनिक जीवन में विद्युत के उपयोग और सुरक्षा नियमों के प्रति जागरूक करना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी विद्युत धारा, विभवांतर और प्रतिरोध की परिभाषा व उनके मात्रकों को जान सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ओम के नियम (Ohm’s Law) को समझकर उसे स्पष्ट कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी विद्युत परिपथ आरेख (Circuit diagram) के प्रतीकों का सही उपयोग कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी एक सरल विद्युत परिपथ का आरेख बनाने का कौशल प्राप्त करेंगे।

3. शिक्षण सहायक सामग्री:

सेल (बैटरी), तार, एक छोटा बल्ब, स्विच (कुंजी), परिपथ आरेख के प्रतीकों का चार्ट।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रदर्शन विधि, निगमन विधि, प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी घरों में बिजली से चलने वाले उपकरणों (पंखे, बल्ब) और बैटरी के उपयोग से परिचित हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँ
1.गर्मी लगने पर हम कमरे में क्या चलाते हैं?पंखा या कूलर।
2.पंखा, टीवी, बल्ब आदि किससे चलते हैं?बिजली (विद्युत) से।
3.तारों में ऐसा क्या बहता है जिससे बल्ब जल जाता है?विद्युत धारा (Current)।
4.विद्युत धारा किसे कहते हैं और ओम का नियम क्या है?(समस्यात्मक)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, आज हम विज्ञान में ‘विद्युत’ पाठ के अंतर्गत विद्युत धारा, परिपथ और ओम के नियम के बारे में अध्ययन करेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
विद्युत धारा (Electric Current)छात्राध्यापक कथन: चालक (जैसे तांबे के तार) में विद्युत आवेशों (इलेक्ट्रॉनों) के प्रवाह की दर को ‘विद्युत धारा’ कहते हैं। इसे ‘I’ से प्रदर्शित करते हैं। इसका S.I. मात्रक ‘ऐम्पियर’ (Ampere) है। विद्युत धारा को मापने वाले यंत्र को अमीटर (Ammeter) कहते हैं, जिसे परिपथ में श्रेणीक्रम में जोड़ा जाता है।छात्र विद्युत धारा की परिभाषा और मात्रक लिखेंगे।विद्युत धारा (I): आवेश प्रवाह की दर।
मात्रक: ऐम्पियर (A)।
यंत्र: अमीटर।
विद्युत परिपथ (Electric Circuit)प्रदर्शन: बैटरी, तार, स्विच और बल्ब को जोड़कर परिपथ बनाना और बल्ब जलाना।
छात्राध्यापक कथन: विद्युत धारा के सतत तथा बंद पथ को विद्युत परिपथ कहते हैं। यदि स्विच बंद (Off) है या तार टूट गया है, तो परिपथ ‘खुला’ कहलाता है और धारा नहीं बहती। परिपथ आरेख बनाते समय सेल, बल्ब, स्विच, अमीटर के विशेष प्रतीकों का उपयोग किया जाता है।
छात्र परिपथ को देखेंगे और प्रतीकों को चार्ट में समझेंगे।परिपथ: धारा का सतत बंद पथ।
विद्युत धारा बैटरी के धनात्मक से ऋणात्मक टर्मिनल की ओर बहती है।
ओम का नियम (Ohm’s Law) व प्रतिरोधछात्राध्यापक कथन: जर्मन वैज्ञानिक जॉर्ज साइमन ओम ने बताया कि अचर ताप पर, चालक के सिरों का विभवांतर (V), उसमें प्रवाहित धारा (I) के समानुपाती होता है। (V ∝ I या V = IR)। यहाँ ‘R’ एक नियतांक है जिसे ‘प्रतिरोध’ (Resistance) कहते हैं। प्रतिरोध धारा के प्रवाह का विरोध करता है। इसका मात्रक ओम (Ω) है।छात्र ओम के नियम का सूत्र (V=IR) समझेंगे।ओम का नियम: V = IR.
प्रतिरोध (R): धारा का विरोध।
मात्रक: ओम (Ω)।

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. विद्युत धारा का S.I. मात्रक क्या है?
  2. विद्युत धारा को किस यंत्र द्वारा मापा जाता है?
  3. प्रतिरोध किसे कहते हैं और इसका मात्रक क्या है?

10. गृहकार्य (Homework):

ओम का नियम क्या है? इसका गणितीय सूत्र लिखिए। एक विद्युत परिपथ का आरेख बनाइए जिसमें एक सेल, एक बल्ब, एक अमीटर और एक प्लग कुंजी हो।

📌 नोट: यह B.Ed Science Lesson Plan दैनिक पाठ योजना पुस्तिका के लिए पूरी तरह से तैयार है।

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📝 सारांश: B.Ed Science Lesson Plan का महत्व

एक उत्कृष्ट B.Ed Science Lesson Plan न केवल शिक्षण को सुनियोजित बनाता है बल्कि कक्षा में विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने का सबसे प्रभावी साधन है। जीव विज्ञान, रसायन विज्ञान और भौतिक विज्ञान के विभिन्न प्रकरणों पर आधारित यह विस्तृत B.Ed Science Lesson Plan अनुक्रमणिका हमारे भावी शिक्षकों को बिना किसी संकोच के कक्षा संचालन करने में अत्यंत सहायता प्रदान करेगी।