B.Ed Maths Lesson Plans: B.Ed Internship गणित पाठ योजना कक्षा 6, 7, 8, 9, 10

B.Ed Maths Lesson Plan Download PDF (1-30 Activities)

कक्षा 6-8 के लिए 18 तथा कक्षा 9-10 के लिए 12 (कुल 30) सम्पूर्ण दैनिक पाठ योजनाएं (निर्मितवाद उपागम आधारित)

B.Ed Maths Lesson Plan

📝 B.Ed Maths Lesson Plans – प्रस्तावना व निर्देश

यह पेज बी.एड (B.Ed), डी.एल.एड (D.El.Ed), और बीटीसी (BTC) प्रशिक्षणार्थियों के लिए उच्च गुणवत्ता युक्त और पूर्णतः तैयार B.Ed Maths Lesson Plan (गणित पाठ योजना) का सबसे मुख्य संग्रह है। अध्यापन अभ्यास के दौरान एक बेहतरीन B.Ed Maths Lesson Plan तैयार करना अनिवार्य होता है, और हमारी यह मार्गदर्शिका इस कार्य को आपके लिए अत्यंत सरल बनाती है।

चाहे आपको अंकगणित (Arithmetic), बीजगणित (Algebra), ज्यामिति (Geometry), या क्षेत्रमिति (Mensuration) के प्रकरणों पर एक प्रभावशाली B.Ed Maths Lesson Plan तैयार करना हो, यहाँ दिए गए सभी 30 दैनिक पाठ योजनाएं आपको प्रस्तावना प्रश्न, शिक्षण सहायक सामग्री, सामान्य व विशिष्ट उद्देश्य, प्रस्तुतीकरण प्रारूप, श्यामपट्ट कार्य, और मूल्यांकन प्रश्नों की पूर्ण जानकारी प्रदान करते हैं।

📋 B.Ed गणित (Maths) पाठ योजना अनुक्रमणिका (Index)

नीचे सभी 30 पाठ योजनाओं की विस्तृत अनुक्रमणिका सूची दी गई है। किसी भी पाठ योजना का प्रकरण (Topic) देखने के लिए “विवरण देखें” बटन पर क्लिक करें।

योजना सं.कक्षाउपविषय (Sub)पाठ योजना प्रकरण (Topic)त्वरित लिंक
1Class 6अंकगणितअपनी संख्याओं की जानकारी (बड़ी संख्याएं) विवरण देखें
2Class 6अंकगणितपूर्ण संख्याएं (Whole Numbers) विवरण देखें
3Class 6अंकगणितगुणनखंड और गुणज (Factors & Multiples) विवरण देखें
4Class 6रेखागणित (Geometry)आधारभूत ज्यामितीय अवधारणाएं (बिंदु, रेखा, किरण) विवरण देखें
5Class 6रेखागणित (Geometry)प्रारंभिक आकारों को समझना (कोण और उनके प्रकार) विवरण देखें
6Class 6बीजगणित / संख्या पद्धतिपूर्णांक (Integers) विवरण देखें
7Class 7अंकगणितभिन्न (Fractions) विवरण देखें
8Class 7सांख्यिकी (Statistics)आंकड़ों का प्रबंधन (माध्य, माध्यक और बहुलक) विवरण देखें
9Class 7बीजगणित (Algebra)सरल समीकरण (Simple Equations) विवरण देखें
10Class 7रेखागणित (Geometry)रेखा एवं कोण (पूरक, संपूरक, आसन्न कोण) विवरण देखें
11Class 7रेखागणित (Geometry)त्रिभुज और उसके गुण (Triangle and properties) विवरण देखें
12Class 7अंकगणित (Commercial)राशियों की तुलना (अनुपात और प्रतिशत) विवरण देखें
13Class 7अंकगणितऐकिक नियम (Unitary Method) विवरण देखें
14Class 7क्षेत्रमिति (Mensuration)परिमाप और क्षेत्रफल (आयत और वर्ग) विवरण देखें
15Class 7बीजगणित (Algebra)बीजीय व्यंजक (Algebraic Expressions) विवरण देखें
16Class 7अंकगणित / बीजगणितघातांक और घात (Exponents and Powers) विवरण देखें
17Class 7ज्यामिति (Geometry)सममिति (Symmetry) विवरण देखें
18Class 8ज्यामिति (Geometry)ठोस आकारों का चित्रण (Solid Shapes) विवरण देखें
19Class 9संख्या पद्धतिसंख्या पद्धति (परिमेय और अपरिमेय संख्याएं) विवरण देखें
20Class 9बीजगणित (Algebra)बहुपद (Polynomials) विवरण देखें
21Class 9बीजगणित (Algebra)दो चरों वाले रैखिक समीकरण विवरण देखें
22Class 9ज्यामितिनिर्देशांक ज्यामिति (Coordinate Geometry) विवरण देखें
23Class 9ज्यामितियूक्लिड की ज्यामिति का परिचय विवरण देखें
24Class 9ज्यामितिरेखाएं और कोण (पूरक, संपूरक, और आसन्न कोण) विवरण देखें
25Class 9ज्यामितित्रिभुज (त्रिभुजों की सर्वांगसमता) विवरण देखें
26Class 9ज्यामितिचतुर्भुज (समांतर चतुर्भुज के गुण) विवरण देखें
27Class 9ज्यामितिवृत्त (Circles) – जीवा और चाप के गुण विवरण देखें
28Class 9क्षेत्रमिति (Mensuration)हीरोन का सूत्र (Heron’s Formula) विवरण देखें
29Class 10क्षेत्रमिति (Mensuration)पृष्ठीय क्षेत्रफल और आयतन (बेलन और शंकु) विवरण देखें
30Class 10सांख्यिकी व प्रायिकताप्रायिकता (Probability) – सैद्धांतिक दृष्टिकोण विवरण देखें

गतिविधि क्रमांक-11: 18 B.Ed Maths Lesson Plan (प्रथम ब्लॉक शिक्षण अभ्यास)

B.Ed Maths Lesson Plan (Plans 1 to 18) for Classes 6, 7 and 8

B.Ed Maths Lesson Plan 1: पाठ योजना क्रमांक – 1

दिनांक: ………………..
कक्षा: 6
कालांश: ………………..
योजना प्रकार: B.Ed Maths Lesson Plan
विषय: गणित
उपविषय: अंकगणित
प्रकरण: अपनी संख्याओं की जानकारी (बड़ी संख्याएं)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में गणित विषय के प्रति रुचि जाग्रत करना।
  2. विद्यार्थियों में तार्किक एवं विश्लेषणात्मक चिंतन का विकास करना।
  3. दैनिक जीवन में गणितीय गणनाओं की उपयोगिता को समझाना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय संख्यांकन पद्धति का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी बड़ी संख्याओं को शब्दों और अंकों में लिखने की प्रक्रिया को समझ सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी दैनिक जीवन की स्थितियों (जैसे जनसंख्या या पैसे की गणना) में बड़ी संख्याओं का प्रयोग कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी अल्पविराम (Comma) का सही प्रयोग करके बड़ी संख्याओं को आसानी से पढ़ सकेंगे।

3. शिक्षण सहायक सामग्री:

संख्या चार्ट (भारतीय व अंतर्राष्ट्रीय पद्धति), रंगीन चॉक, डस्टर, लपेट फलक, संकेतक।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

आगमन-निगमन विधि, प्रदर्शन विधि, प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी 1 से 10,000 तक की संख्याओं को पढ़ना, लिखना व गिनना जानते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँ
1.(पेंसिल दिखाते हुए) मेरे हाथ में कितनी पेंसिल हैं?एक पेंसिल।
2.एक पेन की कीमत 10 रुपये है, तो ऐसे ही 10 पेन की कीमत कितनी होगी?100 रुपये।
3.सबसे बड़ी 4 अंकों की संख्या क्या होती है?9999
4.9999 में 1 जोड़ने पर क्या प्राप्त होगा और उसे कैसे पढ़ेंगे?(समस्यात्मक)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, 9999 में 1 जोड़ने पर 10,000 (दस हज़ार) प्राप्त होता है। आज हम ‘अपनी संख्याओं की जानकारी’ पाठ के अंतर्गत 10,000 से भी बड़ी संख्याओं और उन्हें लिखने की भारतीय एवं अंतर्राष्ट्रीय पद्धति का अध्ययन करेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
लाख और करोड़ का परिचयविकासात्मक प्रश्न: 1. 10000 के बाद कौनसी संख्या आती है? (10001) 2. 5 अंकों की सबसे बड़ी संख्या क्या है? (99999)
छात्राध्यापक कथन: 99,999 में 1 जोड़ने पर हमें 1,00,000 (एक लाख) मिलता है, जो 6 अंकों की सबसे छोटी संख्या है। इसी तरह 10 लाख के बाद करोड़ आता है। 1 करोड़ = 100 लाख।
छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे तथा संख्या लिखेंगे।99999 + 1 = 1,00,000 (एक लाख)
1 करोड़ = 100 लाख।
भारतीय संख्यांकन पद्धतिछात्राध्यापक कथन: भारतीय पद्धति में हम इकाई, दहाई, सैकड़ा, हज़ार, लाख और करोड़ का उपयोग करते हैं। संख्याओं को आसानी से पढ़ने के लिए अल्पविराम (,) का प्रयोग होता है। पहला अल्पविराम दाईं ओर से तीन अंकों (सैकड़ा) के बाद, फिर हर दो अंकों के बाद आता है। उदाहरण: 5,08,01,592 (पांच करोड़ आठ लाख एक हज़ार पांच सौ बानवे)।छात्र अल्पविराम लगाना सीखेंगे।भारतीय पद्धति:
5,08,01,592
इकाई, दहाई, सैकड़ा, हज़ार, लाख, करोड़।
अंतर्राष्ट्रीय संख्यांकन पद्धतिछात्राध्यापक कथन: अंतर्राष्ट्रीय पद्धति में हम इकाई, दहाई, सैकड़ा, हज़ार और फिर सीधे ‘मिलियन’ का उपयोग करते हैं (लाख नहीं)। इसमें हर तीन अंकों के बाद अल्पविराम लगाया जाता है। 1 मिलियन = 10 लाख। उदाहरण: 50,801,592 (पचास मिलियन आठ सौ एक हज़ार पांच सौ बानवे)।छात्र भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय पद्धति में अंतर समझेंगे।अंतर्राष्ट्रीय पद्धति:
50,801,592
1 मिलियन = 10 लाख।

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. 1 लाख में कितने हज़ार होते हैं?
  2. भारतीय पद्धति में 87595762 में अल्पविराम (,) लगाकर लिखिए।
  3. 1 मिलियन भारतीय पद्धति में किसके बराबर होता है?

10. गृहकार्य (Homework):

संख्या 7452283 को भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय दोनों पद्धतियों में अल्पविराम लगाकर शब्दों में लिखिए।

📌 नोट: यह B.Ed Maths Lesson Plan दैनिक पाठ योजना पुस्तिका के लिए पूरी तरह से तैयार है।

B.Ed Maths Lesson Plan 2: पाठ योजना क्रमांक – 2

दिनांक: ………………..
कक्षा: 6
कालांश: ………………..
योजना प्रकार: B.Ed Maths Lesson Plan
विषय: गणित
उपविषय: अंकगणित
प्रकरण: पूर्ण संख्याएँ (Whole Numbers)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में संख्याओं की प्रकृति के प्रति तार्किक समझ विकसित करना।
  2. गणितीय समस्याओं को हल करने में गति और शुद्धता लाना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी प्राकृत संख्याओं (Natural) और पूर्ण संख्याओं (Whole) को परिभाषित कर सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी परवर्ती (Successor) और पूर्ववर्ती (Predecessor) संख्याओं में अंतर स्पष्ट कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी संख्या रेखा (Number Line) पर पूर्ण संख्याओं का योग एवं व्यवकलन कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी पूर्ण संख्याओं को संख्या रेखा पर निरूपित करने का कौशल प्राप्त करेंगे।

3. शिक्षण सहायक सामग्री:

संख्या रेखा को दर्शाता चार्ट, रंगीन चॉक, डस्टर।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

व्याख्यान-प्रदर्शन विधि, आगमन विधि, प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी गिनती (1, 2, 3…) और जोड़, बाकी के बारे में सामान्य जानकारी रखते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँ
1.जब हम कक्षा में बच्चों को गिनते हैं, तो कहाँ से शुरू करते हैं?1, 2, 3, 4… से।
2.गिनती की इन संख्याओं को गणित में क्या कहते हैं?प्राकृत संख्याएँ।
3.यदि आपके पास 2 चॉकलेट हैं और दोनों आप खा लें, तो कितनी बचेंगी?0 (शून्य)।
4.यदि प्राकृत संख्याओं (1, 2, 3…) में ‘0’ को भी मिला दिया जाए, तो उन्हें क्या कहेंगे?(समस्यात्मक)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, प्राकृत संख्याओं के समूह में 0 (शून्य) को शामिल करने पर वे ‘पूर्ण संख्याएँ’ बन जाती हैं। आज हम गणित में ‘पूर्ण संख्याएँ’ और उनके संख्या रेखा पर प्रदर्शन का अध्ययन करेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
पूर्ववर्ती व परवर्तीछात्राध्यापक कथन: किसी भी प्राकृत संख्या में 1 जोड़ने पर अगली संख्या मिलती है, उसे ‘परवर्ती’ (Successor) कहते हैं (जैसे 16 का परवर्ती 17)। किसी संख्या में से 1 घटाने पर ठीक पहले वाली संख्या मिलती है, उसे ‘पूर्ववर्ती’ (Predecessor) कहते हैं (जैसे 16 का पूर्ववर्ती 15)। 1 का कोई प्राकृत पूर्ववर्ती नहीं होता।छात्र परवर्ती और पूर्ववर्ती का अर्थ समझेंगे।परवर्ती (+1): 16 → 17
पूर्ववर्ती (-1): 16 → 15
पूर्ण संख्याएँ (Whole Numbers)छात्राध्यापक कथन: प्राकृत संख्याएँ 1, 2, 3, 4… से शुरू होती हैं। यदि हम प्राकृत संख्याओं के संग्रह में 0 को सम्मिलित कर लें, तो प्राप्त संग्रह ‘पूर्ण संख्याओं’ का संग्रह कहलाता है (0, 1, 2, 3…)। अतः सभी प्राकृत संख्याएँ पूर्ण संख्याएँ हैं, लेकिन 0 प्राकृत संख्या नहीं है।छात्र प्राकृत और पूर्ण संख्या में अंतर लिखेंगे।प्राकृत संख्या: 1, 2, 3…
पूर्ण संख्या: 0, 1, 2, 3…
सबसे छोटी पूर्ण संख्या = 0
संख्या रेखा (Number Line)प्रदर्शन: बोर्ड पर संख्या रेखा खींचना।
छात्राध्यापक कथन: एक सीधी रेखा खींचकर उस पर समान दूरी पर बिंदु लगाएँ और 0, 1, 2, 3… लिखें। इसे संख्या रेखा कहते हैं। दाईं ओर जाने पर संख्या बढ़ती है, और बाईं ओर जाने पर घटती है। जैसे 4 + 3 करना हो, तो 4 से शुरू करके दाईं ओर 3 कदम चलेंगे, तो 7 पर पहुँचेंगे।
छात्र संख्या रेखा बनाना सीखेंगे।[0]—[1]—[2]—[3]—[4]→
दाईं ओर = बढ़ना (+)
बाईं ओर = घटना (-)

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. सबसे छोटी पूर्ण संख्या कौनसी है?
  2. क्या सभी पूर्ण संख्याएँ प्राकृत संख्याएँ भी होती हैं?
  3. 99 का परवर्ती (Successor) और पूर्ववर्ती (Predecessor) बताइए।

10. गृहकार्य (Homework):

संख्या रेखा का प्रयोग करते हुए 3 + 4 और 6 – 2 का मान ज्ञात कीजिए।

📌 नोट: यह B.Ed Maths Lesson Plan दैनिक पाठ योजना पुस्तिका के लिए पूरी तरह से तैयार है।

B.Ed Maths Lesson Plan 3: पाठ योजना क्रमांक – 3

दिनांक: ………………..
कक्षा: 6
कालांश: ………………..
योजना प्रकार: B.Ed Maths Lesson Plan
विषय: गणित
उपविषय: अंकगणित
प्रकरण: गुणनखंड और गुणज (Factors and Multiples)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में गणितीय गणना की गति व सटीकता बढ़ाना।
  2. संख्याओं के आपसी संबंधों का तार्किक विश्लेषण करने की क्षमता का विकास करना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘गुणनखंड’ (Factor) और ‘गुणज’ (Multiple) की परिभाषाओं का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी अभाज्य (Prime) और भाज्य (Composite) संख्याओं के बीच अंतर समझ सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी दी गई किसी भी संख्या के सभी संभव गुणनखंड ज्ञात कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी गुणनखंड वृक्ष (Factor Tree) बनाने का कौशल प्राप्त करेंगे।

3. शिक्षण सहायक सामग्री:

विभिन्न संख्याओं के गुणनखंड दिखाने वाला चार्ट, चॉक, डस्टर।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

आगमन विधि (उदाहरण से नियम की ओर), व्याख्यान विधि, प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी पहाड़े (Tables) जानते हैं और गुणा तथा भाग की संक्रियाओं से भली-भाँति परिचित हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँ
1.2 को 3 से गुणा करने पर क्या आता है?6 (छह)।
2.संख्या 6 में किन-किन संख्याओं का पूरा-पूरा भाग जाता है?1, 2, 3 और 6 का।
3.3 के पहाड़े में आने वाली संख्याएँ (जैसे 3, 6, 9, 12) क्या कहलाती हैं?(संभावित उत्तर) पहाड़ा।
4.गणित की भाषा में पूरा-पूरा भाग देने वाली संख्याओं को क्या कहते हैं?(समस्यात्मक / गुणनखंड)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, आज हम गणित में ‘संख्याओं के साथ खेलना’ पाठ के अंतर्गत संख्याओं के गुणनखंड (Factors) और गुणज (Multiples) के बारे में विस्तार से जानेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
गुणनखंड (Factors)छात्राध्यापक कथन: किसी संख्या का गुणनखंड उसका एक पूरा-पूरा (Exact) विभाजक होता है। जैसे 12 में 1, 2, 3, 4, 6 और 12 का भाग जाता है, अतः ये सभी 12 के गुणनखंड हैं। 1 प्रत्येक संख्या का गुणनखंड होता है, और प्रत्येक संख्या स्वयं अपना एक गुणनखंड होती है। किसी संख्या के गुणनखंड सीमित (निश्चित) होते हैं।छात्र गुणनखंड की परिभाषा व उदाहरण समझेंगे।गुणनखंड: पूरा-पूरा भाग देने वाली संख्या।
12 के गुणनखंड: 1, 2, 3, 4, 6, 12।
गुणज (Multiples)छात्राध्यापक कथन: जब हम किसी संख्या को 1, 2, 3 आदि से गुणा करते हैं, तो जो परिणाम आते हैं, वे उस संख्या के ‘गुणज’ कहलाते हैं। (यानी पहाड़ा)। जैसे 5 के गुणज 5, 10, 15, 20… हैं। किसी संख्या के गुणजों की संख्या अनंत (असीमित) होती है।छात्र गुणज और गुणनखंड में अंतर समझेंगे।गुणज (पहाड़ा): 5, 10, 15, 20…
गुणज असीमित होते हैं।
अभाज्य व भाज्य संख्याएँछात्राध्यापक कथन: वे संख्याएँ जिनके केवल दो गुणनखंड होते हैं (1 और स्वयं वह संख्या), ‘अभाज्य संख्याएँ’ (Prime Numbers) कहलाती हैं। जैसे 2, 3, 5, 7, 11। वे संख्याएँ जिनके दो से अधिक गुणनखंड होते हैं, ‘भाज्य संख्याएँ’ (Composite) कहलाती हैं। जैसे 4, 6, 8, 9। ‘1’ न तो अभाज्य है और न ही भाज्य।छात्र अभाज्य और भाज्य संख्याओं को लिखेंगे।अभाज्य: केवल 2 गुणनखंड (जैसे 2, 3, 5)
भाज्य: 2 से अधिक गुणनखंड (जैसे 4, 6, 8)।
1: न भाज्य, न अभाज्य।

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. 15 के सभी गुणनखंड बताइए।
  2. 7 के प्रथम पाँच गुणज लिखिए।
  3. सबसे छोटी अभाज्य (Prime) संख्या कौनसी है?

10. गृहकार्य (Homework):

24 के सभी गुणनखंड लिखिए और बताइए कि 24 भाज्य संख्या है या अभाज्य?

📌 नोट: यह B.Ed Maths Lesson Plan दैनिक पाठ योजना पुस्तिका के लिए पूरी तरह से तैयार है।

B.Ed Maths Lesson Plan 4: पाठ योजना क्रमांक – 4

दिनांक: ………………..
कक्षा: 6
कालांश: ………………..
योजना प्रकार: B.Ed Maths Lesson Plan
विषय: गणित
उपविषय: रेखागणित (Geometry)
प्रकरण: आधारभूत ज्यामितीय अवधारणाएँ (बिंदु, रेखा, किरण)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में आकृतियों और आकारों के प्रति समझ विकसित करना।
  2. रेखागणित के अध्ययन में रुचि और कल्पना शक्ति का विकास करना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी बिंदु (Point), रेखा (Line) और किरण (Ray) की परिभाषाओं का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी रेखा और रेखाखंड (Line segment) के बीच अंतर को स्पष्ट कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी दैनिक जीवन में किरण के उदाहरण (जैसे सूर्य की किरण, टॉर्च) खोज सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी स्केल और पेंसिल की सहायता से रेखा और रेखाखंड का सही चित्र बना सकेंगे।

3. शिक्षण सहायक सामग्री:

ज्योमेट्री बॉक्स (स्केल, पेंसिल), टॉर्च, विभिन्न आकृतियों वाला चार्ट, डस्टर।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रदर्शन विधि, निगमन-आगमन विधि, प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी पेंसिल से सीधी लाइन खींचना जानते हैं और टॉर्च से निकलने वाली रोशनी से परिचित हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँ
1.पेंसिल की नोक से कागज़ पर एक निशान लगाने पर क्या बनता है?डॉट (.) या बिंदु।
2.स्केल रखकर दो बिंदुओं को मिलाने पर क्या बनता है?लाइन (रेखा)।
3.टॉर्च जलाने पर प्रकाश किस रूप में निकलता है?किरणों के रूप में।
4.गणित की भाषा में बिंदु, रेखा और किरण में क्या अंतर होता है?(समस्यात्मक)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, ज्यामिति (Geometry) का उद्भव भूमि मापने की आवश्यकता से हुआ। आज हम ‘आधारभूत ज्यामितीय अवधारणाओं’ के अंतर्गत बिंदु, रेखा, रेखाखंड और किरण का विस्तार से अध्ययन करेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
बिंदु (Point)छात्राध्यापक कथन: एक तीक्ष्ण (Sharp) पेंसिल के सिरे से कागज़ पर लगाया गया सूक्ष्म निशान ‘बिंदु’ कहलाता है। इसकी कोई लंबाई, चौड़ाई या मोटाई नहीं होती, यह केवल एक स्थिति (Location) को दर्शाता है। इसे अंग्रेज़ी के बड़े अक्षरों (A, B, C) से दर्शाते हैं।छात्र कॉपी में बिंदु बनाकर नाम लिखेंगे।बिंदु (. A): कोई लंबाई चौड़ाई नहीं, केवल स्थिति।
रेखाखंड और रेखा (Line)छात्राध्यापक कथन: किन्हीं दो बिंदुओं को मिलाने वाला सबसे छोटा सीधा रास्ता ‘रेखाखंड’ (Line segment) कहलाता है। इसके दो अंत बिंदु (End points) होते हैं, इसलिए इसे नापा जा सकता है। लेकिन जब एक रेखाखंड को दोनों दिशाओं में बिना किसी अंत के (अनंत तक) बढ़ाया जाता है, तो वह ‘रेखा’ (Line) बन जाती है। रेखा का कोई अंत बिंदु नहीं होता।छात्र रेखाखंड और रेखा के चित्र में अंतर समझेंगे।रेखाखंड (A—B): 2 अंत बिंदु (निश्चित लंबाई)।
रेखा (←A—B→): कोई अंत बिंदु नहीं (अनंत लंबाई)।
किरण (Ray) और प्रतिच्छेदी रेखाएंछात्राध्यापक कथन: ‘किरण’ रेखा का वह भाग है जिसका एक प्रारंभिक बिंदु होता है (जहाँ से वह निकलती है), लेकिन दूसरी दिशा में वह अनंत तक जाती है (जैसे सूर्य की किरण)। जब दो रेखाएं किसी एक बिंदु पर एक-दूसरे को काटती हैं, तो उन्हें ‘प्रतिच्छेदी रेखाएं’ (Intersecting lines) कहते हैं (जैसे ‘X’ का निशान)।छात्र किरण और प्रतिच्छेदी रेखाओं का चित्र बनाएंगे।किरण (.→): एक प्रारंभिक बिंदु।
प्रतिच्छेदी रेखाएं (X): एक बिंदु पर काटने वाली।

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. बिंदु (Point) से आप क्या समझते हैं?
  2. रेखा और रेखाखंड में मुख्य अंतर क्या है?
  3. किरण (Ray) का कोई एक वास्तविक उदाहरण दीजिए।

10. गृहकार्य (Homework):

स्केल की सहायता से एक रेखा, एक रेखाखंड (5 सेमी) और एक किरण का चित्र बनाइए तथा उनका नामकरण कीजिए।

📌 नोट: यह B.Ed Maths Lesson Plan दैनिक पाठ योजना पुस्तिका के लिए पूरी तरह से तैयार है।

B.Ed Maths Lesson Plan 5: पाठ योजना क्रमांक – 5

दिनांक: ………………..
कक्षा: 6
कालांश: ………………..
योजना प्रकार: B.Ed Maths Lesson Plan
विषय: गणित
उपविषय: रेखागणित (Geometry)
प्रकरण: प्रारंभिक आकारों को समझना (कोण और उनके प्रकार)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में मापन (Measurement) संबंधी तार्किक क्षमता का विकास करना।
  2. आकृतियों के कोणों को पहचानने की समझ विकसित करना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘कोण’ (Angle) की परिभाषा और उसे मापने की इकाई (डिग्री) का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी समकोण, न्यूनकोण और अधिककोण में अंतर स्पष्ट कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी घड़ी की सुइयों के बीच बनने वाले विभिन्न कोणों को पहचान सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी चाँदे (Protractor) की सहायता से कोण माप और बना सकेंगे।

3. शिक्षण सहायक सामग्री:

ज्योमेट्री बॉक्स (चाँदा / Protractor), एक दीवार घड़ी (Demonstration हेतु), चॉक, डस्टर।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रदर्शन विधि (चाँदा व घड़ी द्वारा), व्याख्यान विधि, प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी बिंदु, किरण और घड़ी का समय देखना भली-भाँति जानते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँ
1.घड़ी में समय बताने के लिए क्या होती हैं?सुइयां (घंटे, मिनट, सेकंड की)।
2.जब घड़ी में 3 बजते हैं, तो घंटे और मिनट की सुई के बीच कैसा आकार (झुकाव) बनता है?‘L’ जैसा आकार बनता है।
3.दो सुइयों (या किरणों) के बीच के इस झुकाव को गणित में क्या कहते हैं?कोण (Angle)।
4.कोण कितने प्रकार के होते हैं और इन्हें कैसे नापा जाता है?(समस्यात्मक)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, जब दो किरणें एक ही बिंदु से निकलती हैं, तो उनके बीच कोण बनता है। आज हम ‘प्रारंभिक आकारों को समझना’ पाठ के अंतर्गत कोणों के प्रकार और उन्हें मापने की विधि का अध्ययन करेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
कोण और उसका मापनछात्राध्यापक कथन: कोण को मापने के लिए हम चाँदे (Protractor) का उपयोग करते हैं। कोणों को ‘डिग्री’ (°) में मापा जाता है। एक पूरा चक्कर (जैसे घड़ी की सुई का) 360° का होता है। आधा चक्कर (सीधी रेखा) 180° का होता है, जिसे ‘ऋजु कोण’ (Straight Angle) कहते हैं।छात्र डिग्री और पूरे चक्कर का मान समझेंगे।कोण की इकाई: डिग्री (°)।
पूरा चक्कर = 360°
ऋजु कोण (सीधी रेखा) = 180°
समकोण (Right Angle)प्रदर्शन: घड़ी में 3 बजाकर दिखाना।
छात्राध्यापक कथन: जब घड़ी में 3 बजते हैं, तो सुइयां एक-चौथाई (1/4) चक्कर पूरा करती हैं। इस 90° के कोण को ‘समकोण’ कहते हैं। यह अंग्रेज़ी के ‘L’ अक्षर जैसा दिखता है। आपकी किताब या ब्लैकबोर्ड के कोने समकोण (90°) होते हैं।
छात्र समकोण को पहचानेंगे और 90° लिखेंगे।समकोण (Right Angle): 90° का कोण। (जैसे L आकार)
न्यूनकोण व अधिककोणछात्राध्यापक कथन: जो कोण समकोण (90°) से छोटे होते हैं, उन्हें ‘न्यूनकोण’ (Acute angle) कहते हैं (जैसे 30°, 60°, 45°)। और जो कोण समकोण (90°) से बड़े लेकिन ऋजु कोण (180°) से छोटे होते हैं, उन्हें ‘अधिककोण’ (Obtuse angle) कहते हैं (जैसे 120°, 150°)।छात्र न्यूनकोण और अधिककोण की परिभाषा समझेंगे।न्यूनकोण: 90° से कम।
अधिककोण: 90° से ज्यादा और 180° से कम।

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. समकोण (Right Angle) कितने डिग्री का होता है?
  2. 60° का कोण न्यूनकोण है या अधिककोण?
  3. ऋजु कोण (Straight Angle) का मान क्या होता है?

10. गृहकार्य (Homework):

चाँदे (Protractor) की सहायता से 45° (न्यूनकोण) और 130° (अधिककोण) के कोण अपनी अभ्यास पुस्तिका में बनाइए।

📌 नोट: यह B.Ed Maths Lesson Plan दैनिक पाठ योजना पुस्तिका के लिए पूरी तरह से तैयार है।

B.Ed Maths Lesson Plan 6: पाठ योजना क्रमांक – 6

दिनांक: ………………..
कक्षा: 6
कालांश: ………………..
योजना प्रकार: B.Ed Maths Lesson Plan
विषय: गणित
उपविषय: बीजगणित (Algebra) / संख्या पद्धति
प्रकरण: पूर्णांक (Integers)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में ऋणात्मक और धनात्मक संख्याओं की समझ पैदा करना।
  2. गणितीय समस्याओं में दिशा और विपरीत स्थितियों का विश्लेषण करने की क्षमता बढ़ाना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘पूर्णांक’ (Integers) की परिभाषा का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी धनात्मक (+) और ऋणात्मक (-) संख्याओं के बीच अंतर कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी दैनिक जीवन की विपरीत स्थितियों (जैसे लाभ-हानि, ऊपर-नीचे) को पूर्णांकों द्वारा दर्शा सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी संख्या रेखा पर पूर्णांकों को सही क्रम में निरूपित कर सकेंगे।

3. शिक्षण सहायक सामग्री:

पूर्णांकों को दर्शाती हुई एक बड़ी संख्या रेखा (चार्ट), थर्मामीटर का चित्र (तापमान दिखाने हेतु), चॉक।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

उदाहरण व प्रदर्शन विधि, आगमन विधि, प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी पूर्ण संख्याओं (0, 1, 2, 3…) और सामान्य जोड़-बाकी से भली-भाँति परिचित हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँ
1.यदि एक दुकानदार को 10 रुपये का फायदा (लाभ) होता है, तो वह उसे कैसे लिखेगा?+10 रुपये।
2.यदि उसे 5 रुपये का नुकसान (हानि) हो जाए, तो गणित में उसे कैसे दर्शाएंगे?-5 रुपये (माइनस 5)।
3.संख्याओं के आगे लगे ये ‘+’ और ‘-‘ के निशान क्या कहलाते हैं?धनात्मक और ऋणात्मक चिह्न।
4.0, धनात्मक और ऋणात्मक संख्याओं के पूरे संग्रह को क्या कहा जाता है?(समस्यात्मक / पूर्णांक)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, पूर्ण संख्याओं में ऋणात्मक संख्याओं को शामिल कर लेने पर वे ‘पूर्णांक’ बन जाती हैं। आज हम गणित में ‘पूर्णांक’ (Integers) और उन्हें संख्या रेखा पर प्रदर्शित करने का अध्ययन करेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
ऋणात्मक संख्याएँ और दैनिक उपयोगछात्राध्यापक कथन: दैनिक जीवन में जब हम शून्य से नीचे की बात करते हैं (जैसे बहुत ठंड में तापमान 0 से 5 डिग्री नीचे चला गया), तो हम उसे ऋणात्मक संख्या (-5) से दर्शाते हैं। लाभ को +, हानि को -; जमा करने को +, निकालने को -; समुद्र तल से ऊपर को +, और नीचे गहराई को – से लिखा जाता है।छात्र विपरीत स्थितियों के चिह्न समझेंगे।धनात्मक (+) : लाभ, ऊपर, जमा करना।
ऋणात्मक (-) : हानि, नीचे, तापमान गिरना।
पूर्णांकों का संग्रहछात्राध्यापक कथन: सभी पूर्ण संख्याओं (0, 1, 2…) और ऋणात्मक संख्याओं (-1, -2, -3…) के संग्रह को ‘पूर्णांक’ (Integers) कहते हैं। 1, 2, 3… धनात्मक पूर्णांक हैं और -1, -2, -3… ऋणात्मक पूर्णांक हैं। 0 (शून्य) न तो धनात्मक है और न ही ऋणात्मक।छात्र पूर्णांकों की परिभाषा अपनी कॉपी में लिखेंगे।पूर्णांक: …, -3, -2, -1, 0, 1, 2, 3, …
0 न धनात्मक है, न ऋणात्मक।
संख्या रेखा पर पूर्णांकप्रदर्शन: बोर्ड पर संख्या रेखा बनाकर समझाना।
छात्राध्यापक कथन: संख्या रेखा पर मध्य में 0 होता है। 0 के दाईं ओर धनात्मक पूर्णांक (+1, +2) और बाईं ओर ऋणात्मक पूर्णांक (-1, -2) होते हैं। संख्या रेखा पर दाईं ओर की संख्या हमेशा बड़ी होती है (जैसे 2 > 0, और 0 > -2)। अतः -5 से -2 बड़ा होता है।
छात्र संख्या रेखा पर पूर्णांक दर्शाना सीखेंगे।← -3 — -2 — -1 — 0 — 1 — 2 — 3 →
दाईं ओर संख्या बढ़ती है। ( -2 > -5 )

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. पूर्णांक (Integers) किसे कहते हैं?
  2. -8 और -2 में से कौन-सी संख्या बड़ी है?
  3. समुद्र तल से 100 मीटर नीचे की गहराई को किस चिह्न (पूर्णांक) के साथ लिखेंगे?

10. गृहकार्य (Homework):

एक संख्या रेखा खींचिए और उस पर निम्नलिखित पूर्णांकों को दर्शाइए: +4, -3, 0, -5, +2

📌 नोट: यह B.Ed Maths Lesson Plan दैनिक पाठ योजना पुस्तिका के लिए पूरी तरह से तैयार है।

B.Ed Maths Lesson Plan 7: पाठ योजना क्रमांक – 7

दिनांक: ………………..
कक्षा: 7
कालांश: ………………..
योजना प्रकार: B.Ed Maths Lesson Plan
विषय: गणित
उपविषय: अंकगणित
प्रकरण: भिन्न (Fractions)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में गणितीय गणना की गति व सटीकता बढ़ाना।
  2. दैनिक जीवन में हिस्सों या बंटवारे की गणितीय समझ विकसित करना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी भिन्न में अंश (Numerator) और हर (Denominator) की परिभाषा का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी उचित भिन्न, विषम भिन्न और मिश्रित भिन्न के बीच अंतर को स्पष्ट कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी दैनिक जीवन में बंटवारे (जैसे सेब को 4 भागों में बांटना) को भिन्न के रूप में लिख सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी चित्र देखकर उसके छायांकित भाग (Shaded part) की भिन्न लिख सकेंगे।

3. शिक्षण सहायक सामग्री:

एक सेब या रोटी (काटने के लिए), वृत्ताकार चार्ट (जिसके हिस्से किए गए हों), चॉक, डस्टर।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रदर्शन विधि, आगमन-निगमन विधि, प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी किसी वस्तु को आधा (1/2) या चौथाई करने का सामान्य अर्थ जानते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँ
1.(एक सेब दिखाते हुए) यह क्या है?एक सेब।
2.यदि इसे दो बराबर भागों में काट दिया जाए, तो एक भाग को क्या कहेंगे?आधा (Half)।
3.गणित की भाषा में ‘आधा’ को कैसे लिखा जाता है?1/2 के रूप में।
4.संख्या 1/2 जैसी संख्याओं को, जो किसी संपूर्ण के हिस्से को दर्शाती हैं, क्या कहते हैं?(समस्यात्मक / भिन्न)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, जो संख्या किसी संपूर्ण वस्तु या समूह के एक हिस्से को दर्शाती है, उसे भिन्न कहते हैं। आज हम गणित में ‘भिन्न’ (Fractions) और उसके प्रकारों का विस्तार से अध्ययन करेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
भिन्न का अर्थ (अंश व हर)छात्राध्यापक कथन: ‘भिन्न’ एक ऐसी संख्या है जो किसी संपूर्ण चीज़ का कोई भाग निरूपित करती है। भिन्न को p/q के रूप में लिखा जाता है। ऊपर वाली संख्या को अंश (Numerator) और नीचे वाली संख्या को हर (Denominator) कहते हैं। जैसे 3/4 में, 3 अंश है और 4 हर है। (हर बताता है कि कुल कितने बराबर भाग किए गए)।छात्र अंश और हर को पहचानेंगे और कॉपी में लिखेंगे।भिन्न = अंश / हर
3/4 → 3 (अंश), 4 (हर)।
उचित और विषम भिन्नछात्राध्यापक कथन: भिन्न मुख्य रूप से दो प्रकार की होती हैं: 1. उचित भिन्न (Proper Fraction) – जिसका अंश हर से छोटा होता है (जैसे 1/2, 3/4)। इसका मान हमेशा 1 से कम होता है। 2. विषम भिन्न (Improper) – जिसका अंश हर से बड़ा या बराबर होता है (जैसे 5/4, 7/3)। इसका मान 1 या 1 से अधिक होता है।छात्र उचित और विषम भिन्न के उदाहरण समझेंगे।उचित भिन्न: अंश < हर (3/4)
विषम भिन्न: अंश > हर (5/3)
मिश्रित भिन्नछात्राध्यापक कथन: यदि हमारे पास एक पूरी रोटी है और एक आधी रोटी है, तो उसे 1 और 1/2 लिखेंगे। इसे ‘मिश्रित भिन्न’ (Mixed Fraction) कहते हैं, जो एक पूर्ण और एक उचित भिन्न का संयोजन होता है (जैसे $1\frac{1}{2}$, $2\frac{3}{4}$)। हम विषम भिन्न को मिश्रित भिन्न में बदल सकते हैं (भाग देकर)।छात्र मिश्रित भिन्न का मतलब समझेंगे।मिश्रित भिन्न: पूर्ण + उचित भिन्न।
उदाहरण: $1\frac{1}{2}$

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. भिन्न में अंश और हर किसे कहते हैं?
  2. भिन्न 7/9 उचित भिन्न है या विषम भिन्न?
  3. मिश्रित भिन्न (Mixed Fraction) का एक उदाहरण दीजिए।

10. गृहकार्य (Homework):

एक वृत्त बनाकर उसे 8 बराबर भागों में बाँटिए और उसके 3 भागों को छायांकित (Shade) करके उसकी भिन्न लिखिए।

📌 नोट: यह B.Ed Maths Lesson Plan दैनिक पाठ योजना पुस्तिका के लिए पूरी तरह से तैयार है।

B.Ed Maths Lesson Plan 8: पाठ योजना क्रमांक – 8

दिनांक: ………………..
कक्षा: 7
कालांश: ………………..
योजना प्रकार: B.Ed Maths Lesson Plan
विषय: गणित
उपविषय: सांख्यिकी (Statistics)
प्रकरण: आँकड़ों का प्रबंधन (माध्य, माध्यक और बहुलक)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में दैनिक जीवन के आँकड़ों (Data) को समझने की क्षमता विकसित करना।
  2. तार्किक चिंतन एवं विश्लेषणात्मक शक्ति का विकास करना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘माध्य’ (Mean), ‘माध्यक’ (Median) और ‘बहुलक’ (Mode) के सूत्रों का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी दिए गए आँकड़ों के समूह का केंद्रीय प्रवृत्ति (Central Tendency) अर्थ समझ सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी कक्षा के विद्यार्थियों के अंकों या वजन के आँकड़ों का माध्य निकाल सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी आँकड़ों को आरोही (बढ़ते) क्रम में व्यवस्थित करके आसानी से माध्यक ज्ञात कर सकेंगे।

3. शिक्षण सहायक सामग्री:

कक्षा के 5 बच्चों के प्राप्तांकों की सूची (चार्ट), चॉक, डस्टर।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

आगमन-निगमन विधि, उदाहरण विधि, प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी संख्याओं का जोड़ (Addition) और भाग (Division) करना भली-भाँति जानते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँ
1.शिक्षक टेस्ट लेने के बाद रजिस्टर में आपके क्या लिखते हैं?नंबर (प्राप्तांक)।
2.इन सभी छात्रों के नंबरों (20, 25, 22 आदि) को एक साथ इकट्ठा करने पर वे क्या कहलाते हैं?आँकड़े (Data) या सूचना।
3.यदि कक्षा के सभी बच्चों का ‘औसत’ (Average) अंक निकालना हो, तो कैसे निकालेंगे?सबको जोड़कर बच्चों की संख्या का भाग देकर।
4.गणित (सांख्यिकी) में इस औसत निकालने की प्रक्रिया और अन्य मानों को क्या कहते हैं?(समस्यात्मक)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, आज हम गणित में ‘आँकड़ों का प्रबंधन’ पाठ के अंतर्गत आँकड़ों के प्रतिनिधि मान- माध्य (Mean), माध्यक (Median) और बहुलक (Mode) ज्ञात करना सीखेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
अंकगणितीय माध्य (Mean)छात्राध्यापक कथन: सबसे अधिक उपयोग किया जाने वाला प्रतिनिधि मान ‘माध्य’ या औसत है। माध्य निकालने के लिए हम सभी प्रेक्षणों (आँकड़ों) का योग करते हैं और उसमें प्रेक्षणों की कुल संख्या का भाग देते हैं।
उदाहरण: 3, 5, 4 का माध्य = (3+5+4)/3 = 12/3 = 4।
छात्र माध्य का सूत्र अपनी कॉपी में लिखेंगे।माध्य (Mean) = प्रेक्षणों का योग / प्रेक्षणों की संख्या
बहुलक (Mode)छात्राध्यापक कथन: दिए गए आँकड़ों (Data) के समूह में जो प्रेक्षण (संख्या) सबसे अधिक बार आता है (जिसकी आवृत्ति सबसे ज्यादा होती है), उसे उस समूह का ‘बहुलक’ कहते हैं। उदाहरण: 1, 2, 2, 3, 4, 2, 5 में 2 सबसे ज्यादा बार (3 बार) आया है, इसलिए बहुलक 2 है।छात्र बहुलक को पहचानना सीखेंगे।बहुलक (Mode): सबसे अधिक बार आने वाला प्रेक्षण (संख्या)।
माध्यक (Median)छात्राध्यापक कथन: माध्यक वह मान है जो आँकड़ों को बिल्कुल बीचों-बीच (दो बराबर भागों में) बांटता है। इसे निकालने के लिए सबसे पहले आँकड़ों को आरोही (बढ़ते) या अवरोही (घटते) क्रम में जमाते हैं। फिर जो संख्या बिल्कुल बीच में आती है, वही माध्यक होता है। जैसे: 3, 5, 2, 8, 1 को जमाएंगे → 1, 2, 3, 5, 8। बीच की संख्या = 3।छात्र संख्याओं को क्रम में जमाकर बीच की संख्या खोजेंगे।माध्यक (Median): पहले क्रम में जमाएं (आरोही)।
फिर बिल्कुल बीच का मान निकालें।

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. माध्य (Mean) ज्ञात करने का सूत्र बताइए।
  2. आँकड़ों 2, 4, 4, 5, 4, 6 में बहुलक क्या है?
  3. माध्यक (Median) निकालने के लिए सबसे पहला काम क्या करते हैं?

10. गृहकार्य (Homework):

5 विद्यार्थियों की ऊँचाई (सेमी में) क्रमशः 140, 142, 145, 140, 148 है। इन आँकड़ों का माध्य और बहुलक ज्ञात कीजिए।

📌 नोट: यह B.Ed Maths Lesson Plan दैनिक पाठ योजना पुस्तिका के लिए पूरी तरह से तैयार है।

B.Ed Maths Lesson Plan 9: पाठ योजना क्रमांक – 9

दिनांक: ………………..
कक्षा: 7
कालांश: ………………..
योजना प्रकार: B.Ed Maths Lesson Plan
विषय: गणित
उपविषय: बीजगणित (Algebra)
प्रकरण: सरल समीकरण (Simple Equations)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में अमूर्त (Abstract) गणितीय चिंतन का विकास करना।
  2. दैनिक जीवन की समस्याओं को गणितीय भाषा में व्यक्त करने की क्षमता बढ़ाना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी चर (Variable), अचर (Constant) और समीकरण (Equation) की परिभाषाओं का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी बायां पक्ष (LHS) और दायां पक्ष (RHS) के बीच समानता (=) के चिह्न को समझ सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी कथन को पढ़कर उसे समीकरण के रूप में लिख सकेंगे (जैसे x में 5 जोड़ने पर 10 मिलता है)।
कौशलविद्यार्थी पक्षांतरण (Transposition) विधि से सरल समीकरणों को हल कर सकेंगे।

3. शिक्षण सहायक सामग्री:

तराजू का चित्र (समीकरण के संतुलन को दर्शाने हेतु), चॉक, डस्टर, लपेट फलक।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

आगमन विधि, प्रदर्शन (तराजू मॉडल), प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी अंग्रेज़ी की वर्णमाला (x, y, a, b) और सामान्य जोड़-बाकी, गुणा-भाग की संक्रियाओं को जानते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँ
1.(कोई बंद मुट्ठी दिखाते हुए) मेरी मुट्ठी में कितने पेन हैं, क्या आप बता सकते हैं?नहीं (अज्ञात है)।
2.गणित में इस अज्ञात मान को दर्शाने के लिए हम किसका उपयोग करते हैं?x, y, z या a, b, c का।
3.इन x, y, z को जिनका मान बदल सकता है, क्या कहते हैं?चर (Variables)।
4.जब किसी चर वाले व्यंजक के बीच में बराबर (=) का निशान लग जाए, तो उसे क्या कहते हैं?(समस्यात्मक / समीकरण)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, आज हम गणित (बीजगणित) में ‘सरल समीकरण’ पाठ के अंतर्गत समीकरण बनाने और उन्हें हल करने (चर का मान निकालने) का अध्ययन करेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
चर और समीकरण का अर्थछात्राध्यापक कथन: ‘चर’ (Variable) वह है जिसका मान स्थिर नहीं होता, यह बदल सकता है (x, y, z)। ‘समीकरण’ (Equation) एक शर्त है कि दोनों पक्षों (LHS और RHS) के व्यंजकों का मान बराबर (समान) होना चाहिए। इसके बीच में हमेशा समता (=) का चिह्न होता है। यह एक तराजू के समान है, जिसके दोनों पलड़े बराबर हैं।छात्र चर और समीकरण का अर्थ समझेंगे।चर (x, y): जिसका मान बदल सके।
समीकरण: x + 3 = 10
(LHS = RHS)
कथन से समीकरण बनानाछात्राध्यापक कथन: हम दैनिक भाषा को गणितीय भाषा (समीकरण) में बदल सकते हैं। उदाहरण: ‘x के तिगुने और 5 का योग 14 है।’ इसे हम लिखेंगे: 3x (x का तिगुना) + 5 = 14। इसी तरह, ‘m में से 2 घटाने पर 8 प्राप्त होता है’ को m – 2 = 8 लिखेंगे।छात्र कथन से समीकरण बनाना सीखेंगे।कथन: x में 4 जोड़ने पर 9 मिले।
समीकरण: x + 4 = 9
समीकरण हल करना (पक्षांतरण)छात्राध्यापक कथन: समीकरण हल करने का अर्थ है चर (x) का मान ज्ञात करना। इसके लिए हम संख्याओं को एक पक्ष से दूसरे पक्ष में ले जाते हैं, इसे ‘पक्षांतरण’ कहते हैं। पक्षांतरण करने पर चिह्न बदल जाते हैं: (+) का (-), (-) का (+), गुणा का भाग, और भाग का गुणा हो जाता है। उदाहरण: x + 4 = 9 → x = 9 – 4 → x = 5.छात्र पक्षांतरण के नियम लिखकर सवाल हल करेंगे।पक्षांतरण के नियम:
(+) → (-)
(-) → (+)
(×) → (÷)

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. समीकरण में बीच में कौन-सा चिह्न होना आवश्यक है?
  2. ‘y का 5 गुना 25 है’—इसे समीकरण के रूप में लिखिए।
  3. समीकरण x – 3 = 7 को हल करके x का मान बताइए।

10. गृहकार्य (Homework):

निम्नलिखित समीकरणों को हल कीजिए: (a) 2x + 5 = 15, (b) m/3 = 6.

📌 नोट: यह B.Ed Maths Lesson Plan दैनिक पाठ योजना पुस्तिका के लिए पूरी तरह से तैयार है।

B.Ed Maths Lesson Plan 10: पाठ योजना क्रमांक – 10

दिनांक: ………………..
कक्षा: 7
कालांश: ………………..
योजना प्रकार: B.Ed Maths Lesson Plan
विषय: गणित
उपविषय: रेखागणित (Geometry)
प्रकरण: रेखा एवं कोण (पूरक, संपूरक, आसन्न कोण)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में आकृतियों के मापन संबंधी तार्किक क्षमता का विकास करना।
  2. ज्यामितीय आकृतियों को पहचानने और उनके गुणों को समझने की क्षमता विकसित करना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी पूरक कोण (Complementary) और संपूरक कोण (Supplementary) की परिभाषाओं का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी आसन्न कोण (Adjacent angles) और शीर्षाभिमुख कोण (Vertically opposite) के बीच अंतर को समझ सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी एक कोण का मान दिया होने पर उसका पूरक या संपूरक कोण ज्ञात कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी ज्यामितीय आकृतियों में से शीर्षाभिमुख कोणों के युग्म (जोड़े) पहचान सकेंगे।

3. शिक्षण सहायक सामग्री:

कोणों के विभिन्न जोड़ों को दर्शाने वाला चार्ट, कैंची (शीर्षाभिमुख कोण समझाने हेतु), चॉक, डस्टर।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रदर्शन विधि, आगमन-निगमन विधि, प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी बिंदु, रेखा और कोणों के प्रकार (न्यूनकोण, समकोण 90°, ऋजु कोण 180°) से परिचित हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँ
1.एक समकोण (Right Angle) का मान कितने डिग्री होता है?90°
2.एक सीधी रेखा (ऋजु कोण) पर कितने डिग्री का कोण बनता है?180°
3.यदि दो कोणों को जोड़ने पर 90° आ जाए (जैसे 30° + 60°), तो गणित में ऐसे जोड़े को क्या कहते हैं?(समस्यात्मक / पूरक कोण)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, आज हम ज्यामिति में ‘रेखा एवं कोण’ पाठ के अंतर्गत कोणों के जोड़ों (युग्मों) जैसे- पूरक कोण, संपूरक कोण और शीर्षाभिमुख कोणों का अध्ययन करेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
पूरक और संपूरक कोणछात्राध्यापक कथन: जब दो कोणों के मापों का योग 90° होता है, तो वे एक-दूसरे के ‘पूरक कोण’ (Complementary) कहलाते हैं (जैसे 40° और 50°)। और जब दो कोणों का योग 180° होता है, तो उन्हें ‘संपूरक कोण’ (Supplementary) कहते हैं (जैसे 120° और 60°)।छात्र पूरक व संपूरक कोणों की परिभाषा और योग लिखेंगे।पूरक कोण: योग = 90°
संपूरक कोण: योग = 180°
आसन्न कोण और रैखिक युग्मछात्राध्यापक कथन: ऐसे दो कोण जिनका एक ही शीर्ष (Vertex) हो और उनकी एक भुजा उभयनिष्ठ (Common) हो, ‘आसन्न कोण’ (Adjacent angles) कहलाते हैं (जैसे कटी हुई पिज़्ज़ा की दो स्लाइस)। यदि दो आसन्न कोणों का योग 180° (सीधी रेखा) हो जाए, तो उन्हें ‘रैखिक युग्म’ (Linear Pair) कहते हैं।छात्र चित्र देखकर आसन्न कोण और रैखिक युग्म समझेंगे।आसन्न कोण: पड़ोसी कोण (उभयनिष्ठ भुजा)।
रैखिक युग्म: आसन्न कोण जिनका योग 180° हो।
शीर्षाभिमुख कोणप्रदर्शन: एक कैंची को खोलकर ‘X’ का आकार दिखाना।
छात्राध्यापक कथन: जब दो रेखाएं एक-दूसरे को ‘X’ के आकार में काटती हैं (प्रतिच्छेद करती हैं), तो आमने-सामने बनने वाले कोण ‘शीर्षाभिमुख कोण’ (Vertically opposite angles) कहलाते हैं। ये कोण हमेशा एक-दूसरे के बराबर (समान) होते हैं।
छात्र कैंची का उदाहरण देखकर आमने-सामने के कोणों को समझेंगे।शीर्षाभिमुख कोण: ‘X’ आकार में आमने-सामने के कोण। ये हमेशा बराबर होते हैं।

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. पूरक कोणों के जोड़े का योग कितना होता है?
  2. 50° के कोण का पूरक और संपूरक कोण बताइए।
  3. क्या शीर्षाभिमुख कोण हमेशा बराबर होते हैं?

10. गृहकार्य (Homework):

चित्र बनाकर आसन्न कोण (Adjacent Angles) और रैखिक युग्म (Linear Pair) में अंतर स्पष्ट कीजिए।

📌 नोट: यह B.Ed Maths Lesson Plan दैनिक पाठ योजना पुस्तिका के लिए पूरी तरह से तैयार है।

B.Ed Maths Lesson Plan 11: पाठ योजना क्रमांक – 11

दिनांक: ………………..
कक्षा: 7
कालांश: ………………..
योजना प्रकार: B.Ed Maths Lesson Plan
विषय: गणित
उपविषय: रेखागणित (Geometry)
प्रकरण: त्रिभुज और उसके गुण (Triangle and its Properties)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में आकृतियों की संरचना और उनके गुणों का तार्किक विश्लेषण करने की क्षमता बढ़ाना।
  2. रेखागणित के सिद्धांतों को सिद्ध (प्रूव) करने में रुचि उत्पन्न करना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘त्रिभुज’ (Triangle) की परिभाषा और उसके प्रकारों का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी त्रिभुज की माध्यिका (Median) और शीर्षलंब (Altitude) के बीच अंतर स्पष्ट कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी त्रिभुज के कोण योग गुण (Angle Sum Property) का उपयोग करके अज्ञात कोण ज्ञात कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी स्केल और चाँदे की सहायता से त्रिभुज बनाकर उसके कोणों का योग 180° सिद्ध कर सकेंगे।

3. शिक्षण सहायक सामग्री:

त्रिभुज के प्रकारों का चार्ट, कागज़ का कटा हुआ त्रिभुज, ज्योमेट्री बॉक्स, चॉक, डस्टर।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रदर्शन व प्रयोग विधि (कागज़ मोड़ना), निगमन विधि, प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी तीन भुजाओं वाली बंद आकृति (त्रिभुज) और कोणों को मापना (डिग्री में) जानते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँ
1.तीन सरल रेखाखंडों से घिरी हुई बंद आकृति को क्या कहते हैं?त्रिभुज (Triangle)।
2.एक त्रिभुज में कितने शीर्ष और कितने कोण होते हैं?3 शीर्ष और 3 कोण।
3.यदि त्रिभुज के तीनों कोणों को चाँदे से नापकर जोड़ा जाए, तो उनका योग कितना आएगा?(संभावित उत्तर) 180°।
4.त्रिभुज के इस गुण (तीनों कोणों का योग 180°) के अलावा त्रिभुज के और क्या-क्या गुण होते हैं?(समस्यात्मक)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, आज हम रेखागणित में ‘त्रिभुज और उसके गुण’ पाठ के अंतर्गत त्रिभुज की माध्यिका, शीर्षलंब और उसके कोण योग गुण (Angle Sum Property) का विस्तार से अध्ययन करेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
माध्यिका और शीर्षलंबछात्राध्यापक कथन: त्रिभुज के किसी शीर्ष (कोने) को उसकी सामने वाली भुजा के बिल्कुल मध्य-बिंदु (बीच) से मिलाने वाला रेखाखंड ‘माध्यिका’ (Median) कहलाता है। एक त्रिभुज में 3 माध्यिकाएं हो सकती हैं। जबकि किसी शीर्ष से सामने वाली भुजा पर डाला गया लंब (90° का कोण बनाने वाली सीधी रेखा) ‘शीर्षलंब’ (Altitude / ऊँचाई) कहलाता है।छात्र माध्यिका और शीर्षलंब के चित्र बनाकर अंतर समझेंगे।माध्यिका: शीर्ष से मध्य-बिंदु तक।
शीर्षलंब: शीर्ष से 90° की सीधी लाइन (ऊँचाई)।
बाह्य कोण (Exterior Angle) गुणछात्राध्यापक कथन: यदि त्रिभुज की किसी एक भुजा को बाहर की ओर बढ़ाया जाए, तो जो कोण बाहर बनता है उसे बाह्य कोण कहते हैं। इसका एक नियम है- ‘किसी त्रिभुज का बाह्य कोण उसके दो अंतराभिमुख (सामने के दो अंदर वाले) कोणों के योग के बराबर होता है।’छात्र चित्र देखकर बाह्य कोण का नियम लिखेंगे।बाह्य कोण = दो अंतराभिमुख (सामने के) कोणों का योग।
कोण योग गुण (Angle Sum Property)प्रयोग: कागज़ के त्रिभुज के तीनों कोनों को फाड़कर एक सीधी रेखा (180°) पर रखकर दिखाना।
छात्राध्यापक कथन: एक त्रिभुज के तीनों अंतः कोणों की मापों का योग हमेशा 180° होता है। यदि दो कोण 60° और 50° (योग 110°) दिए हों, तो तीसरा कोण 180 – 110 = 70° होगा।
छात्र प्रयोग देखेंगे और कोण निकालना सीखेंगे।त्रिभुज के कोण योग गुण:
∠A + ∠B + ∠C = 180°

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. एक त्रिभुज में कितनी माध्यिकाएं (Medians) खींची जा सकती हैं?
  2. त्रिभुज के तीनों अंतः कोणों का योग कितना होता है?
  3. यदि त्रिभुज के दो कोण 40° और 80° हैं, तो तीसरे कोण का मान ज्ञात कीजिए।

10. गृहकार्य (Homework):

माध्यिका (Median) और शीर्षलंब (Altitude) की परिभाषा लिखते हुए चित्र बनाकर दोनों में अंतर स्पष्ट कीजिए।

📌 नोट: यह B.Ed Maths Lesson Plan दैनिक पाठ योजना पुस्तिका के लिए पूरी तरह से तैयार है।

B.Ed Maths Lesson Plan 12: पाठ योजना क्रमांक – 12

दिनांक: ………………..
कक्षा: 7
कालांश: ………………..
योजना प्रकार: B.Ed Maths Lesson Plan
विषय: गणित
उपविषय: अंकगणित (Commercial Math)
प्रकरण: राशियों की तुलना (अनुपात और प्रतिशत)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में दैनिक जीवन (जैसे बाजार, परीक्षाफल) में गणितीय अनुप्रयोग की समझ विकसित करना।
  2. व्यावसायिक गणित (Commercial Math) के प्रति रुचि जाग्रत करना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘अनुपात’ (Ratio) और ‘प्रतिशत’ (Percentage) के अर्थ व चिह्नों का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी भिन्न (Fraction) और प्रतिशत के आपसी संबंध को समझ सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी परीक्षा में आए अपने अंकों का प्रतिशत आसानी से निकाल सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी दो अलग-अलग इकाइयों वाली राशियों (जैसे मीटर और सेमी) को समान करके उनका अनुपात ज्ञात कर सकेंगे।

3. शिक्षण सहायक सामग्री:

शॉपिंग मॉल में लगे ‘50% छूट (Off)’ का एक विज्ञापन (पोस्टर), चॉक, डस्टर।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

आगमन विधि (उदाहरण से), व्याख्यान विधि, प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी भाग देना, भिन्न (Fractions) और सामान्य खरीददारी के बारे में जानकारी रखते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँ
1.यदि आपकी कक्षा में 20 लड़के और 10 लड़कियां हैं, तो लड़के लड़कियों से कितने गुना ज्यादा हैं?2 गुना (दोगुना)।
2.गणित में इस प्रकार भाग देकर तुलना करने को (2:1) क्या कहते हैं?अनुपात (Ratio)।
3.दुकानों पर कपड़ों पर जो ‘20% छूट’ लिखी होती है, उसमें % का निशान क्या कहलाता है?प्रतिशत।
4.अनुपात और प्रतिशत में क्या संबंध है और प्रतिशत कैसे निकालते हैं?(समस्यात्मक)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, आज हम गणित में ‘राशियों की तुलना’ पाठ के अंतर्गत अनुपात (Ratio) और प्रतिशत (Percentage) का अर्थ व उनके दैनिक उपयोग का अध्ययन करेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
अनुपात (Ratio)छात्राध्यापक कथन: हम अक्सर दो राशियों की तुलना भाग देकर करते हैं। इसे ‘अनुपात’ कहते हैं। इसका चिह्न (:) है। उदाहरण: 3 किलोमीटर का 300 मीटर से अनुपात। ध्यान रहे, अनुपात निकालने के लिए दोनों इकाइयां समान होनी चाहिए। 3 किमी = 3000 मीटर। अतः अनुपात = 3000 / 300 = 10:1 (दस अनुपात एक)।छात्र समान इकाई करके अनुपात निकालना सीखेंगे।अनुपात (:): भाग द्वारा तुलना।
इकाइयां समान होनी चाहिए। (किमी को मीटर में बदलें)।
प्रतिशत का अर्थ (Percentage)छात्राध्यापक कथन: ‘प्रतिशत’ शब्द का अर्थ है ‘प्रति सौ’ (Per hundred)। इसका चिह्न % है। जिस भिन्न का हर (Denominator) 100 होता है, उसका अंश ही प्रतिशत कहलाता है। जैसे 10/100 को हम 10% कहते हैं। यह तुलना करने का एक बहुत आसान तरीका है।छात्र प्रतिशत का ‘प्रति सौ’ अर्थ समझेंगे।प्रतिशत (%): प्रति सौ (100 में से)।
10/100 = 10%
भिन्न को प्रतिशत में बदलनाछात्राध्यापक कथन: किसी भी भिन्न को प्रतिशत में बदलने के लिए हम उसे 100 से गुणा करते हैं। जैसे: 1/2 भाग को प्रतिशत में बदलना हो, तो (1/2) × 100 = 50%। यदि आपके 500 में से 400 अंक आए हैं, तो प्रतिशत = (400/500) × 100 = 80%।छात्र भिन्न को 100 से गुणा करके % निकालेंगे।भिन्न से % बनाना:
भिन्न × 100
(3/4) × 100 = 75%

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. अनुपात निकालने के लिए राशियों की इकाइयां (Units) कैसी होनी चाहिए?
  2. ‘प्रतिशत’ शब्द का क्या अर्थ है?
  3. 3/4 को प्रतिशत में बदलिए।

10. गृहकार्य (Homework):

5 मीटर का 50 सेंटीमीटर से अनुपात ज्ञात कीजिए, और 2/5 को प्रतिशत में बदलिए।

📌 नोट: यह B.Ed Maths Lesson Plan दैनिक पाठ योजना पुस्तिका के लिए पूरी तरह से तैयार है।

B.Ed Maths Lesson Plan 13: पाठ योजना क्रमांक – 13

दिनांक: ………………..
कक्षा: 7
कालांश: ………………..
योजना प्रकार: B.Ed Maths Lesson Plan
विषय: गणित
उपविषय: अंकगणित
प्रकरण: एकिक नियम (Unitary Method)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में दैनिक जीवन की गणितीय समस्याओं को हल करने की क्षमता का विकास करना।
  2. गणित के प्रति रुचि और तार्किक सोच विकसित करना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘एकिक नियम’ का अर्थ और प्रक्रिया का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी एक इकाई का मान ज्ञात करके अनेक इकाइयों का मान ज्ञात करने की विधि को समझ सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी बाजार में वस्तुओं के मूल्य की गणना में एकिक नियम का उपयोग कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी तेजी से और सटीकता से गणना कर सकेंगे।

3. शिक्षण सहायक सामग्री:

कुछ पेन, कॉपियां, चॉक, डस्टर।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

आगमन विधि, उदाहरण विधि, प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी गुणा (Multiplication) और भाग (Division) की संक्रियाएं अच्छी तरह जानते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँ
1.यदि एक पेन 5 रुपये का आता है, तो 2 पेन कितने के आएंगे?10 रुपये के।
2.यह आपने कैसे पता किया?5 को 2 से गुणा करके (5 × 2 = 10)।
3.यदि 5 पेन 25 रुपये के आते हैं, तो 1 पेन कितने का आएगा?5 रुपये का (25 ÷ 5)।
4.पहले 1 वस्तु का मूल्य निकालकर फिर अनेक वस्तुओं का मूल्य निकालने की विधि को क्या कहते हैं?(समस्यात्मक)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, पहले एक इकाई (Unit) का मान निकालकर, फिर उसके आधार पर आवश्यक इकाइयों का मान निकालने की विधि को ‘एकिक नियम’ कहते हैं। आज हम एकिक नियम का विस्तार से अध्ययन करेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
एकिक नियम का अर्थछात्राध्यापक कथन: ‘एकिक’ शब्द ‘एक’ (Unit) से बना है। इस नियम में हम सबसे पहले दी गई जानकारी से 1 वस्तु या 1 इकाई का मान निकालते हैं (भाग देकर)। फिर उस 1 इकाई के मान का उपयोग करके जितनी वस्तुओं का मान पूछा गया है, उसे निकालते हैं (गुणा करके)।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे और नियम को समझेंगे।एकिक नियम: पहले 1 इकाई का मान ज्ञात करना, फिर वांछित इकाइयों का।
उदाहरण 1छात्राध्यापक कथन: यदि 6 किताबों का मूल्य 180 रुपये है, तो 4 किताबों का मूल्य क्या होगा?
हल:
6 किताबों का मूल्य = 180 रु.
1 किताब का मूल्य = 180/6 = 30 रु.
इसलिए 4 किताबों का मूल्य = 30 × 4 = 120 रु.
छात्र कॉपी में उदाहरण नोट करेंगे और समझेंगे।6 किताबें = 180
1 किताब = 180/6 = 30
4 किताबें = 30 × 4 = 120
अभ्यास प्रश्नछात्राध्यापक कथन: यदि एक कार 3 घंटे में 150 किमी चलती है, तो 5 घंटे में कितनी दूरी तय करेगी?छात्र हल करेंगे: 1 घंटे में 150/3 = 50 किमी। 5 घंटे में 50×5 = 250 किमी।3 घंटे = 150 किमी
1 घंटा = 50 किमी
5 घंटे = 250 किमी

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. एकिक नियम (Unitary Method) किसे कहते हैं?
  2. जब अनेक वस्तुओं का मूल्य दिया हो, तो 1 वस्तु का मूल्य निकालने के लिए कौनसी संक्रिया (जोड़, गुणा, भाग) करते हैं?
  3. यदि 8 पेनों का मूल्य 40 रुपये है, तो 1 पेन का मूल्य क्या होगा?

10. गृहकार्य (Homework):

यदि 10 किलोग्राम चीनी का मूल्य 450 रुपये है, तो 3 किलोग्राम चीनी का मूल्य ज्ञात कीजिए।

📌 नोट: यह B.Ed Maths Lesson Plan दैनिक पाठ योजना पुस्तिका के लिए पूरी तरह से तैयार है।

B.Ed Maths Lesson Plan 14: पाठ योजना क्रमांक – 14

दिनांक: ………………..
कक्षा: 7
कालांश: ………………..
योजना प्रकार: B.Ed Maths Lesson Plan
विषय: गणित
उपविषय: क्षेत्रमिति (Mensuration)
प्रकरण: परिमाप और क्षेत्रफल (आयत और वर्ग)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में आकृतियों के मापन की समझ विकसित करना।
  2. ज्यामितीय अवधारणाओं का व्यावहारिक जीवन में उपयोग करना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी आयत और वर्ग के परिमाप तथा क्षेत्रफल के सूत्रों का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी परिमाप (सीमा की लंबाई) और क्षेत्रफल (घिरी हुई जगह) में अंतर स्पष्ट कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी किसी खेत की बाड़ लगाने या कमरे में टाइल लगाने संबंधी प्रश्नों को हल कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी आकृतियों की भुजाएं नापकर उनका क्षेत्रफल व परिमाप सरलता से निकाल सकेंगे।

3. शिक्षण सहायक सामग्री:

स्केल, आयताकार और वर्गाकार गत्ते के टुकड़े, चार्ट, चॉक, डस्टर।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रदर्शन विधि, निगमन-आगमन विधि, प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी आयत (Rectangle) और वर्ग (Square) की आकृतियों को पहचानते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँ
1.(किताब दिखाते हुए) इस किताब का आकार कैसा है?आयताकार (Rectangle)।
2.यदि मुझे इस किताब के चारों ओर एक टेप लगानी हो, तो मुझे क्या मापना पड़ेगा?किताब की चारों भुजाओं की लंबाई (किनारे)।
3.चारों भुजाओं की कुल लंबाई को गणित में क्या कहते हैं?परिमाप (Perimeter)।
4.और किताब द्वारा घेरी गई जगह को क्या कहते हैं?(समस्यात्मक / क्षेत्रफल)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, किसी बंद आकृति की बाहरी सीमा की कुल लंबाई को परिमाप और उसके द्वारा घेरे गए स्थान को क्षेत्रफल कहते हैं। आज हम आयत और वर्ग के परिमाप व क्षेत्रफल का अध्ययन करेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
आयत का परिमाप व क्षेत्रफलछात्राध्यापक कथन: आयत में आमने-सामने की भुजाएं बराबर होती हैं (लंबाई l और चौड़ाई b)।
आयत का परिमाप = चारों भुजाओं का योग = 2 × (लंबाई + चौड़ाई)।
आयत का क्षेत्रफल = लंबाई × चौड़ाई (l × b)।
छात्र सूत्र कॉपी में लिखेंगे।आयत का परिमाप = 2(l + b)
आयत का क्षेत्रफल = l × b
वर्ग का परिमाप व क्षेत्रफलछात्राध्यापक कथन: वर्ग की चारों भुजाएं (a) बराबर होती हैं।
वर्ग का परिमाप = भुजा + भुजा + भुजा + भुजा = 4 × भुजा (4a)।
वर्ग का क्षेत्रफल = भुजा × भुजा ($a^2$)।
छात्र वर्ग के सूत्र समझेंगे और लिखेंगे।वर्ग का परिमाप = 4 × भुजा
वर्ग का क्षेत्रफल = भुजा × भुजा
उदाहरण से अभ्यासछात्राध्यापक कथन: एक आयत की लंबाई 5 सेमी और चौड़ाई 3 सेमी है। इसका परिमाप और क्षेत्रफल क्या होगा?छात्र हल करेंगे:
परिमाप = 2(5+3) = 16 सेमी
क्षेत्रफल = 5 × 3 = 15 वर्ग सेमी।
l=5, b=3
P = 2(5+3)=16
A = 5×3=15 sq.cm

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. परिमाप (Perimeter) से क्या तात्पर्य है?
  2. आयत के क्षेत्रफल का सूत्र बताइए।
  3. यदि एक वर्ग की भुजा 4 सेमी है, तो उसका परिमाप कितना होगा?

10. गृहकार्य (Homework):

एक वर्गाकार खेत की भुजा 10 मीटर है। उस खेत का क्षेत्रफल और परिमाप ज्ञात कीजिए।

📌 नोट: यह B.Ed Maths Lesson Plan दैनिक पाठ योजना पुस्तिका के लिए पूरी तरह से तैयार है।

B.Ed Maths Lesson Plan 15: पाठ योजना क्रमांक – 15

दिनांक: ………………..
कक्षा: 7
कालांश: ………………..
योजना प्रकार: B.Ed Maths Lesson Plan
विषय: गणित
उपविषय: बीजगणित (Algebra)
प्रकरण: बीजीय व्यंजक (Algebraic Expressions)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में अज्ञात राशियों को ज्ञात करने की क्षमता विकसित करना।
  2. बीजगणित के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण उत्पन्न करना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी चर (Variable) और अचर (Constant) राशियों की परिभाषा का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी बीजीय व्यंजक (Algebraic Expressions) के पदों (Terms) और गुणांकों (Coefficients) को समझ सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी कथन को बीजीय व्यंजक के रूप में लिख सकेंगे (जैसे “x के दुगुने में 3 जोड़ना”)।
कौशलविद्यार्थी समान (Like) और असमान (Unlike) पदों को पहचान सकेंगे।

3. शिक्षण सहायक सामग्री:

चर-अचर दर्शाने वाला चार्ट, चॉक, डस्टर।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

व्याख्यान-प्रदर्शन विधि, आगमन विधि, प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी संख्याओं के जोड़, घटाव, गुणा और भाग से भली-भाँति परिचित हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँ
1.गणित में 1, 2, 3, 4 आदि क्या हैं?संख्याएँ (Numbers)।
2.क्या 5 का मान कभी बदल सकता है?नहीं, 5 हमेशा 5 ही रहता है।
3.जिनका मान फिक्स रहता है, उन्हें अचर (Constant) कहते हैं। यदि कोई अज्ञात राशि हो जिसका मान बदल सकता हो, उसे अंग्रेजी के अक्षरों (x, y, z) से दर्शाते हैं। इन्हें क्या कहते हैं?चर (Variables)।
4.चर और अचर के मिलने से जो व्यंजक बनते हैं (जैसे 2x + 3), उन्हें क्या कहते हैं?(समस्यात्मक / बीजीय व्यंजक)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, जब चर और अचर राशियों को गणितीय संक्रियाओं (+, -, ×, ÷) द्वारा आपस में जोड़ा जाता है, तो बीजीय व्यंजक बनते हैं। आज हम बीजीय व्यंजकों का अध्ययन करेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
चर और अचरछात्राध्यापक कथन: ‘चर’ (Variable) वह राशि है जिसका मान बदल सकता है (जैसे x, y, a, b)। ‘अचर’ (Constant) वह राशि है जिसका मान स्थिर रहता है (जैसे 5, -7, 10)।छात्र चर और अचर के उदाहरण समझेंगे।चर: x, y, z, a, b
अचर: 2, 5, -3, 100
बीजीय व्यंजक और पदछात्राध्यापक कथन: चर और अचर के संयोजन से बीजीय व्यंजक बनते हैं। जैसे 4x + 5। इसमें ‘+’ या ‘-‘ के चिह्न व्यंजक को ‘पदों’ (Terms) में बांटते हैं। 4x + 5 में दो पद हैं: 4x और 5। 4x में, ‘4’ चर x का ‘गुणांक’ (Coefficient) है।छात्र पदों और गुणांकों को पहचानेंगे।व्यंजक: 4x + 5
पद: 4x, और 5
x का गुणांक = 4
समान और असमान पदछात्राध्यापक कथन: जिन पदों में चर (Variables) और उनकी घात बिल्कुल समान होती है, वे ‘समान पद’ (Like terms) कहलाते हैं (जैसे 3x और 7x)। केवल समान पदों को ही जोड़ा या घटाया जा सकता है। 3x और 5y ‘असमान पद’ (Unlike terms) हैं।छात्र समान पदों को पहचानना सीखेंगे।समान पद: 2x, -5x
असमान पद: 2x, 3y

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. चर (Variable) और अचर (Constant) में क्या अंतर है?
  2. व्यंजक 5y – 7 में y का गुणांक क्या है?
  3. क्या 4x और 8x समान पद (Like terms) हैं?

10. गृहकार्य (Homework):

निम्नलिखित कथन को बीजीय व्यंजक के रूप में लिखिए: “y के तीन गुने में से 5 घटाना।”

📌 नोट: यह B.Ed Maths Lesson Plan दैनिक पाठ योजना पुस्तिका के लिए पूरी तरह से तैयार है।

B.Ed Maths Lesson Plan 16: पाठ योजना क्रमांक – 16

दिनांक: ………………..
कक्षा: 7
कालांश: ………………..
योजना प्रकार: B.Ed Maths Lesson Plan
विषय: गणित
उपविषय: अंकगणित / बीजगणित
प्रकरण: घातांक और घात (Exponents and Powers)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में बड़ी संख्याओं को संक्षिप्त रूप में लिखने की समझ विकसित करना।
  2. गणितीय गणनाओं को सरलीकृत करने की तार्किक क्षमता का विकास करना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी आधार (Base) और घातांक (Exponent) को परिभाषित कर सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी घातांक के नियमों (लॉ ऑफ़ एक्सपोनेंट्स) को समझ सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी बहुत बड़ी संख्याओं (जैसे पृथ्वी का द्रव्यमान) को मानक रूप (Standard form) में लिख सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी समान आधार वाली संख्याओं के गुणा और भाग में घातांकों के नियमों का उपयोग कर सकेंगे।

3. शिक्षण सहायक सामग्री:

घातांक के नियमों का चार्ट, चॉक, डस्टर।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

निगमन-आगमन विधि, प्रदर्शन विधि, प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी संख्याओं को बार-बार गुणा करना (जैसे 2 × 2 × 2) जानते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँ
1.2 को 2 से गुणा करें तो क्या आता है?4 (2 × 2 = 4)।
2.यदि हम 2 × 2 × 2 लिखें, तो क्या उत्तर आएगा?8
3.यदि हम 10 को 5 बार गुणा करें (10 × 10 × 10 × 10 × 10), तो यह बहुत लंबा हो जाता है। इसे छोटे रूप में कैसे लिखेंगे?$10^5$ (दस की घात पाँच)।
4.$10^5$ में 10 और 5 को गणित की भाषा में क्या कहते हैं?(समस्यात्मक)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, किसी संख्या को बार-बार गुणा करने को संक्षिप्त रूप में ‘घात’ (Power) के रूप में लिखा जाता है। आज हम ‘घातांक और घात’ और इसके नियमों का अध्ययन करेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
आधार और घातांकछात्राध्यापक कथन: $10^5$ में, 10 को ‘आधार’ (Base) और 5 को ‘घातांक’ (Exponent) कहते हैं। इसे पढ़ते हैं “10 की घात 5″। इसका अर्थ है 10 को 10 से 5 बार गुणा करना। इसी प्रकार, $2^3$ का अर्थ है $2 \times 2 \times 2 = 8$।छात्र आधार और घातांक को पहचानेंगे।$2^3$
2 = आधार (Base)
3 = घातांक (Exponent)
घातांक के नियम (गुणा और भाग)छात्राध्यापक कथन: जब आधार समान हो और संख्याओं का गुणा हो रहा हो, तो घातांक जुड़ जाते हैं। सूत्र: $a^m \times a^n = a^{m+n}$। (जैसे $2^3 \times 2^2 = 2^{3+2} = 2^5$)।
जब भाग हो रहा हो, तो घातांक घट जाते हैं। सूत्र: $a^m \div a^n = a^{m-n}$।
छात्र घातांक के नियमों को कॉपी में लिखेंगे।$a^m \times a^n = a^{m+n}$
$a^m \div a^n = a^{m-n}$
घात की घात और शून्य घातछात्राध्यापक कथन: यदि घात के ऊपर घात हो, तो वे गुणा हो जाती हैं: $(a^m)^n = a^{m \times n}$।
किसी भी संख्या (0 को छोड़कर) की घात यदि 0 हो, तो उसका मान हमेशा 1 होता है ($a^0 = 1$)। जैसे $100^0 = 1$।
छात्र नियमों को समझेंगे और याद करेंगे।$(a^m)^n = a^{mn}$
$a^0 = 1$

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. $5^4$ में आधार और घातांक बताइए।
  2. $x^3 \times x^4$ का मान क्या होगा?
  3. $99^0$ (99 की घात 0) का मान कितना होता है?

10. गृहकार्य (Homework):

घातांक के नियमों का उपयोग करते हुए सरल कीजिए: $3^5 \div 3^2$

📌 नोट: यह B.Ed Maths Lesson Plan दैनिक पाठ योजना पुस्तिका के लिए पूरी तरह से तैयार है।

B.Ed Maths Lesson Plan 17: पाठ योजना क्रमांक – 17

दिनांक: ………………..
कक्षा: 7
कालांश: ………………..
योजना प्रकार: B.Ed Maths Lesson Plan
विषय: गणित
उपविषय: ज्यामिति (Geometry)
प्रकरण: सममिति (Symmetry)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में आकृतियों के संतुलन और सुंदरता (Aesthetics) की समझ विकसित करना।
  2. ज्यामितीय प्रतिरूपों (Patterns) को पहचानने की क्षमता बढ़ाना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘सममिति’ (Symmetry) और ‘सममिति रेखा’ (Line of Symmetry) की परिभाषा का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी सममित और असममित आकृतियों में अंतर स्पष्ट कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी दैनिक जीवन में प्राकृतिक वस्तुओं (जैसे पत्ती, तितली) में सममिति खोज सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी दी गई आकृतियों (जैसे आयत, वृत्त) में सममिति रेखाएं खींच सकेंगे।

3. शिक्षण सहायक सामग्री:

कागज का टुकड़ा (मोड़कर काटने के लिए), तितली का चित्र, दर्पण (Mirror), चॉक, डस्टर।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

गतिविधि व प्रदर्शन विधि, प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी दर्पण (Mirror) में अपना प्रतिबिंब (Reflection) देखते हैं और बुनियादी आकृतियों को पहचानते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँ
1.जब आप आईने (दर्पण) के सामने खड़े होते हैं, तो आपको क्या दिखाई देता है?अपना प्रतिबिंब (समान आकार का)।
2.(तितली का चित्र दिखाते हुए) यदि हम इस तितली को बीच में से मोड़ें, तो क्या इसके दोनों पंख एक-दूसरे को पूरा ढक लेंगे?हाँ, ढक लेंगे।
3.यदि कोई आकृति बीच में से मोड़ने पर एक-दूसरे को पूरा ढक ले (बराबर हो), तो ऐसी आकृति को क्या कहते हैं?(समस्यात्मक / सममित)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, जब किसी आकृति को एक रेखा के अनुदिश मोड़ने पर उसके दोनों भाग एक-दूसरे को पूरी तरह से ढक लेते हैं, तो वह आकृति सममित (Symmetrical) कहलाती है। आज हम सममिति और सममिति रेखाओं का अध्ययन करेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
सममिति और सममिति रेखागतिविधि: एक कागज को बीच से मोड़कर एक आकृति काटना और खोलकर दिखाना।
छात्राध्यापक कथन: जिस रेखा पर मोड़ने से आकृति के दोनों भाग संपत्ति (Coincide) हो जाते हैं, उसे ‘सममिति रेखा’ (Line of Symmetry) कहते हैं। इसे ‘दर्पण रेखा’ भी कहा जाता है।
छात्र कागज की गतिविधि देखेंगे और सममिति समझेंगे।सममिति रेखा: वह रेखा जो आकृति को दो बराबर भागों में बांटती है।
विभिन्न आकृतियों में सममिति रेखाएंछात्राध्यापक कथन: अलग-अलग आकृतियों में सममिति रेखाओं की संख्या अलग होती है।
आयत (Rectangle): 2 सममिति रेखाएं (लंबाई व चौड़ाई के बीच से)।
वर्ग (Square): 4 सममिति रेखाएं।
वृत्त (Circle): अनंत (Infinite) सममिति रेखाएं (कोई भी व्यास)।
छात्र आकृतियों में रेखाएं बनाकर देखेंगे।आयत = 2 रेखाएं
वर्ग = 4 रेखाएं
वृत्त = अनंत (अनेक) रेखाएं
अंग्रेजी वर्णमाला में सममितिछात्राध्यापक कथन: अंग्रेजी के कई अक्षरों में सममिति होती है। जैसे ‘A’ और ‘M’ में ऊर्ध्वाधर (Vertical) सममिति रेखा होती है। ‘B’ और ‘C’ में क्षैतिज (Horizontal) सममिति रेखा होती है। ‘H’ और ‘O’ में दोनों (Vertical और Horizontal) होती हैं। ‘F’ या ‘G’ में कोई सममिति नहीं होती।छात्र अक्षरों में सममिति रेखा खींचकर जांचेंगे।A → ऊर्ध्वाधर (Vertical)
B → क्षैतिज (Horizontal)
H → दोनों।

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. सममिति रेखा (Line of Symmetry) किसे कहते हैं?
  2. एक आयत में कितनी सममिति रेखाएं होती हैं?
  3. अंग्रेजी के अक्षर ‘X’ में कितनी सममिति रेखाएं होती हैं?

10. गृहकार्य (Homework):

अंग्रेजी वर्णमाला के ऐसे 5 अक्षर लिखिए जिनमें केवल क्षैतिज (Horizontal) सममिति रेखा होती है।

📌 नोट: यह B.Ed Maths Lesson Plan दैनिक पाठ योजना पुस्तिका के लिए पूरी तरह से तैयार है।

B.Ed Maths Lesson Plan 18: पाठ योजना क्रमांक – 18

दिनांक: ………………..
कक्षा: 8
कालांश: ………………..
योजना प्रकार: B.Ed Maths Lesson Plan
विषय: गणित
उपविषय: ज्यामिति (Geometry)
प्रकरण: ठोस आकारों का चित्रण (Visualising Solid Shapes)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में त्रिविमीय (3D) आकृतियों की कल्पना (Visualization) करने की क्षमता विकसित करना।
  2. द्विविमीय (2D) और त्रिविमीय (3D) आकृतियों के बीच संबंध को समझने में सहायता करना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी फलक (Faces), किनारे (Edges) और शीर्ष (Vertices) को परिभाषित कर सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी 2D आकृतियों (जैसे वर्ग, आयत) और 3D आकृतियों (जैसे घन, घनाभ) के बीच अंतर स्पष्ट कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी दैनिक जीवन की वस्तुओं (जैसे पासा, आइसक्रीम कोन) को ज्यामितीय ठोस आकारों से जोड़ सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी ‘ऑयलर सूत्र’ (Euler’s Formula) का उपयोग करके फलकों, किनारों या शीर्षों की संख्या ज्ञात कर सकेंगे।

3. शिक्षण सहायक सामग्री:

एक पासा (घन), जूते का डिब्बा (घनाभ), एक शंकु (Cone), चॉक, डस्टर।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रदर्शन विधि, व्याख्यान विधि, प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी वर्ग, आयत और वृत्त जैसी समतल (Flat) आकृतियों को भली-भाँति पहचानते हैं.

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँ
1.ब्लैकबोर्ड पर बना वर्ग कैसी आकृति है (समतल या ठोस)?समतल आकृति (2D)।
2.जिस वस्तु में लंबाई और चौड़ाई के साथ-साथ ऊँचाई (या मोटाई) भी हो, उसे कैसी आकृति कहते हैं?ठोस आकृति (3D)।
3.लूडो के पासे (Dice) का आकार कैसा होता है?ठोस (घन आकार का)।
4.इन ठोस आकारों के फलक, किनारे और शीर्ष क्या होते हैं?(समस्यात्मक)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, जिन आकृतियों में लंबाई, चौड़ाई और ऊँचाई (3 विमाएं) होती हैं, उन्हें त्रिविमीय (3D) या ठोस आकार कहते हैं। आज हम ठोस आकारों का चित्रण और उनके फलक, किनारे तथा शीर्ष का अध्ययन करेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
2D और 3D आकृतियांछात्राध्यापक कथन: समतल आकृतियां जिनमें 2 विमाएं (लंबाई, चौड़ाई) होती हैं, 2D कहलाती हैं (जैसे वर्ग, आयत, वृत्त)। ठोस आकृतियां जिनमें 3 विमाएं (लंबाई, चौड़ाई, ऊँचाई) होती हैं, 3D कहलाती हैं (जैसे घन/Cube, घनाभ/Cuboid, बेलन/Cylinder, शंकु/Cone, गोला/Sphere)।छात्र 2D और 3D आकृतियों के उदाहरण समझेंगे।2D: वर्ग, आयत, वृत्त
3D: घन, घनाभ, बेलन, गोला
फलक, किनारे और शीर्ष (F, E, V)प्रदर्शन: पासा (घन) दिखाकर समझाना।
छात्राध्यापक कथन: किसी ठोस का समतल पृष्ठ ‘फलक’ (Face – F) कहलाता है। जहाँ दो फलक मिलते हैं, वह रेखा ‘किनारा’ (Edge – E) कहलाती है। और जहाँ किनारे मिलते हैं (कोने), उसे ‘शीर्ष’ (Vertex – V) कहते हैं। एक घन (Cube) में 6 फलक, 12 किनारे और 8 शीर्ष होते हैं।
छात्र पासे को देखकर फलक और किनारे गिनेंगे।फलक (F) = सपाट सतह
किनारा (E) = लाइनें
शीर्ष (V) = कोने (Corners)
ऑयलर सूत्र (Euler’s Formula)छात्राध्यापक कथन: किसी भी बहुफलक (Polyhedron) के लिए एक नियम लागू होता है, जिसे ऑयलर का सूत्र कहते हैं। सूत्र है: F + V – E = 2 (फलक + शीर्ष – किनारे = 2)।
घन के लिए जांचें: F=6, V=8, E=12. (6 + 8) – 12 = 14 – 12 = 2। (सिद्ध हुआ)।
छात्र सूत्र को अपनी अभ्यास पुस्तिका में लिखेंगे।ऑयलर सूत्र:
F + V – E = 2

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. त्रिविमीय (3D) आकृतियों के कोई दो उदाहरण दीजिए।
  2. एक घनाभ (Cuboid) में कितने फलक और कितने शीर्ष होते हैं?
  3. ऑयलर का सूत्र (Euler’s Formula) क्या है?

10. गृहकार्य (Homework):

एक बहुफलक के 5 फलक और 6 शीर्ष हैं। ऑयलर के सूत्र का प्रयोग करके इसके किनारों (Edges) की संख्या ज्ञात कीजिए।

गतिविधि क्रमांक-12: द्वितीय ब्लॉक शिक्षण अभ्यास

कक्षा 9-10 के लिए 12 पाठ योजनाएं (Lesson Plans 19 to 30)

📌 नोट: यह B.Ed Maths Lesson Plan दैनिक पाठ योजना पुस्तिका के लिए पूरी तरह से तैयार है।

गतिविधि क्रमांक-12: 12 B.Ed Maths Lesson Plan (द्वितीय ब्लॉक शिक्षण अभ्यास)

B.Ed Maths Lesson Plan (Plans 19 to 30) for Classes 9 and 10

B.Ed Maths Lesson Plan 19: पाठ योजना क्रमांक – 19

दिनांक: ………………..
कक्षा: 9
कालांश: ………………..
योजना प्रकार: B.Ed Maths Lesson Plan
विषय: गणित
उपविषय: संख्या पद्धति
प्रकरण: संख्या पद्धति (परिमेय और अपरिमेय संख्याएं)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में संख्याओं के विभिन्न प्रकारों के प्रति समझ विकसित करना।
  2. अमूर्त गणितीय अवधारणाओं को तार्किक रूप से समझने की क्षमता का विकास करना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी परिमेय (Rational) और अपरिमेय (Irrational) संख्याओं की परिभाषा का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी परिमेय और अपरिमेय संख्याओं के बीच अंतर स्पष्ट कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी दी गई संख्याओं को परिमेय और अपरिमेय में वर्गीकृत कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी किन्हीं दो परिमेय संख्याओं के बीच अन्य परिमेय संख्याएं निकाल सकेंगे।

3. शिक्षण सहायक सामग्री:

संख्याओं का वर्गीकरण चार्ट (प्राकृत, पूर्ण, पूर्णांक, परिमेय), चॉक, डस्टर।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

व्याख्यान-प्रदर्शन विधि, आगमन-निगमन विधि, प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी प्राकृत संख्याओं, पूर्ण संख्याओं और पूर्णांकों (Integers) के बारे में भली-भाँति जानते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँ
1.गिनती की संख्याएं (1, 2, 3…) क्या कहलाती हैं?प्राकृत संख्याएं (Natural Numbers)।
2.यदि प्राकृत संख्याओं में 0 को शामिल कर लें, तो वे क्या बन जाती हैं?पूर्ण संख्याएं (Whole Numbers)।
3.ऋणात्मक संख्याओं को भी शामिल करने पर क्या बनते हैं?पूर्णांक (Integers)।
4.संख्याएं जैसे 1/2, 3/4 या √2 को क्या कहा जाता है?(समस्यात्मक)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, जिन संख्याओं को हम बटे (Fraction) के रूप में लिख सकते हैं और जिन्हें नहीं लिख सकते, वे संख्या पद्धति का अहम हिस्सा हैं। आज हम परिमेय और अपरिमेय संख्याओं का विस्तार से अध्ययन करेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
परिमेय संख्याएं (Rational Numbers)छात्राध्यापक कथन: वे संख्याएं जिन्हें p/q के रूप में लिखा जा सकता है (जहाँ p और q पूर्णांक हैं तथा q ≠ 0), परिमेय संख्याएं कहलाती हैं। जैसे: 1/2, -3/4, 5 (क्योंकि 5 को 5/1 लिख सकते हैं)। 0 भी एक परिमेय संख्या है (0/1)।छात्र परिमेय संख्या की परिभाषा और उदाहरण लिखेंगे।परिमेय: p/q के रूप में।
q शून्य नहीं होना चाहिए (q ≠ 0)।
अपरिमेय संख्याएं (Irrational Numbers)छात्राध्यापक कथन: वे संख्याएं जिन्हें p/q के रूप में नहीं लिखा जा सकता, अपरिमेय संख्याएं कहलाती हैं। इनका दशमलव प्रसार असांत अनावर्ती (Non-terminating non-repeating) होता है। जैसे: √2, √3, π (पाई)। √4 एक परिमेय है (क्योंकि √4 = 2)।छात्र अपरिमेय संख्याओं के उदाहरण समझेंगे।अपरिमेय: √2, √3, π आदि।
(p/q के रूप में नहीं लिख सकते)
वास्तविक संख्याएं (Real Numbers)छात्राध्यापक कथन: सभी परिमेय संख्याओं और सभी अपरिमेय संख्याओं के संग्रह को मिलाकर ‘वास्तविक संख्याएं’ (Real Numbers) कहते हैं। इसे R से दर्शाया जाता है। संख्या रेखा का प्रत्येक बिंदु एक अद्वितीय वास्तविक संख्या को निरूपित करता है।छात्र वास्तविक संख्याओं का अर्थ समझेंगे।वास्तविक संख्याएं (R) = परिमेय + अपरिमेय।

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. परिमेय संख्याएं किसे कहते हैं?
  2. क्या शून्य (0) एक परिमेय संख्या है? कारण सहित बताइए।
  3. √9 एक परिमेय संख्या है या अपरिमेय संख्या?

10. गृहकार्य (Homework):

निम्नलिखित संख्याओं को परिमेय और अपरिमेय में वर्गीकृत कीजिए: √5, 2/7, π, 0, √16.

📌 नोट: यह B.Ed Maths Lesson Plan दैनिक पाठ योजना पुस्तिका के लिए पूरी तरह से तैयार है।

B.Ed Maths Lesson Plan 20: पाठ योजना क्रमांक – 20

दिनांक: ………………..
कक्षा: 9
कालांश: ………………..
योजना प्रकार: B.Ed Maths Lesson Plan
विषय: गणित
उपविषय: बीजगणित (Algebra)
प्रकरण: बहुपद (Polynomials)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में बीजगणितीय व्यंजकों को विश्लेषित करने की क्षमता का विकास करना।
  2. गणितीय समीकरणों और उनके उपयोग के प्रति रुचि उत्पन्न करना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी बहुपद (Polynomial) की परिभाषा और उसकी घात (Degree) का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी रैखिक (Linear), द्विघाती (Quadratic) और त्रिघाती (Cubic) बहुपदों में अंतर स्पष्ट कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी दिए गए बीजीय व्यंजकों में से बहुपद की पहचान कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी बहुपद के शून्यक (Zeroes) ज्ञात कर सकेंगे।

3. शिक्षण सहायक सामग्री:

विभिन्न प्रकार के बहुपदों के उदाहरणों का चार्ट, चॉक, डस्टर।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

निगमन विधि, व्याख्यान विधि, प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी चर, अचर, बीजीय व्यंजक और घात के बारे में जानते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँ
1.2x + 3 क्या है?एक बीजीय व्यंजक।
2.इसमें ‘x’ क्या है और ‘3’ क्या है?‘x’ चर है और ‘3’ अचर है।
3.व्यंजक $x^2 + 5x + 6$ में x की सबसे बड़ी घात (Power) क्या है?2 (दो)।
4.ऐसे बीजीय व्यंजकों को, जिनमें चर की घात एक पूर्ण संख्या (Whole number) हो, विशेष रूप से क्या कहा जाता है?(समस्यात्मक / बहुपद)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, ऐसे बीजीय व्यंजक जिनमें चर की सभी घातें पूर्ण संख्याएं होती हैं, बहुपद (Polynomials) कहलाते हैं। आज हम बहुपद और उसके प्रकारों का विस्तार से अध्ययन करेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
बहुपद की परिभाषा और घातछात्राध्यापक कथन: बहुपद वह बीजीय व्यंजक है जिसमें चर की घात धनात्मक पूर्णांक (0, 1, 2…) होती है। (जैसे x + 1/x बहुपद नहीं है, क्योंकि इसमें x की घात -1 है)। किसी बहुपद में चर की सबसे बड़ी घात वाले पद के घातांक को उस ‘बहुपद की घात’ (Degree) कहा जाता है।छात्र बहुपद की शर्त समझेंगे और डिग्री पहचानेंगे।चर की घात पूर्ण संख्या होनी चाहिए।
घात (Degree) = सबसे बड़ी घात।
बहुपदों के प्रकार (घात के आधार पर)छात्राध्यापक कथन:
1 घात वाले बहुपद को रैखिक (Linear) बहुपद कहते हैं (जैसे 2x + 3)।
2 घात वाले बहुपद को द्विघाती (Quadratic) कहते हैं (जैसे $y^2 + 2y + 1$)।
3 घात वाले बहुपद को त्रिघाती (Cubic) कहते हैं (जैसे $x^3 – x$)।
छात्र बहुपदों के प्रकारों को कॉपी में लिखेंगे।रैखिक (घात 1) → ax + b
द्विघाती (घात 2) → $ax^2+bx+c$
बहुपद के शून्यक (Zeroes)छात्राध्यापक कथन: चर का वह मान जिसे बहुपद में रखने पर पूरे बहुपद का मान शून्य (0) हो जाए, उसे बहुपद का शून्यक कहते हैं। उदाहरण: P(x) = x – 2 का शून्यक ज्ञात करने के लिए, x – 2 = 0 रखें, तो x = 2 मिलेगा। अतः 2 इस बहुपद का शून्यक है।छात्र शून्यक निकालने की विधि समझेंगे।शून्यक: चर का वह मान जो बहुपद को 0 कर दे।
x-2 = 0 ⇒ x=2

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. बहुपद (Polynomial) की घात (Degree) से क्या तात्पर्य है?
  2. $x^3 + 4x^2 – 5x + 2$ किस प्रकार का बहुपद है?
  3. रैखिक बहुपद $2x – 4$ का शून्यक क्या होगा?

10. गृहकार्य (Homework):

बहुपद $p(x) = x^2 – 2x$ के लिए $p(0)$ और $p(2)$ का मान ज्ञात कीजिए और बताइए कि क्या 0 और 2 इस बहुपद के शून्यक हैं?

📌 नोट: यह B.Ed Maths Lesson Plan दैनिक पाठ योजना पुस्तिका के लिए पूरी तरह से तैयार है।

B.Ed Maths Lesson Plan 21: पाठ योजना क्रमांक – 21

दिनांक: ………………..
कक्षा: 9
कालांश: ………………..
योजना प्रकार: B.Ed Maths Lesson Plan
विषय: गणित
उपविषय: बीजगणित (Algebra)
प्रकरण: दो चरों वाले रैखिक समीकरण
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में दैनिक जीवन की समस्याओं को समीकरण के रूप में ढालने की क्षमता विकसित करना।
  2. ग्राफ (आलेख) द्वारा समस्याओं के हल को समझने की रुचि उत्पन्न करना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘दो चरों वाले रैखिक समीकरण’ के मानक रूप (ax+by+c=0) का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी रैखिक समीकरण के हलों (Solutions) की अनंत संख्या को समझ सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी शाब्दिक समस्याओं (Word problems) को दो चरों वाले समीकरण के रूप में लिख सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी समीकरण के विभिन्न हल निकाल सकेंगे।

3. शिक्षण सहायक सामग्री:

समीकरणों के उदाहरण का चार्ट, ग्राफ पेपर (Demonstration), चॉक, डस्टर।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

निगमन-आगमन विधि, व्याख्यान विधि, प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी एक चर वाले रैखिक समीकरण (जैसे 2x + 5 = 0) को हल करना जानते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँ
1.समीकरण x + 5 = 10 में कितने चर (Variables) हैं?एक चर (x)।
2.इसका हल (x का मान) क्या होगा?x = 5.
3.यदि मैं कहूँ कि दो संख्याओं का योग 20 है, तो इसे गणित में कैसे लिखेंगे?x + y = 20.
4.समीकरण x + y = 20 में कितने चर हैं और इसे क्या कहते हैं?(समस्यात्मक / दो चर वाले रैखिक समीकरण)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, जब किसी समीकरण में दो चर (जैसे x और y) होते हैं और उनकी घात 1 होती है, तो उसे ‘दो चरों वाले रैखिक समीकरण’ कहते हैं। आज हम इस प्रकार के समीकरणों का विस्तार से अध्ययन करेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
मानक रूप (Standard Form)छात्राध्यापक कथन: किसी भी दो चरों वाले रैखिक समीकरण को ax + by + c = 0 के रूप में लिखा जा सकता है। जहाँ a, b और c वास्तविक संख्याएं हैं और a तथा b दोनों शून्य नहीं हैं। (जैसे 2x + 3y = 5 को 2x + 3y – 5 = 0 के रूप में लिखना)।छात्र मानक रूप का सूत्र कॉपी में नोट करेंगे।मानक रूप: ax + by + c = 0
जहाँ a, b ≠ 0
समीकरण के हल (Solutions)छात्राध्यापक कथन: एक चर वाले समीकरण का केवल एक अद्वितीय (Unique) हल होता है। लेकिन दो चरों वाले रैखिक समीकरण के अनंत अनेक (Infinitely many) हल होते हैं। क्योंकि x के प्रत्येक मान के लिए y का एक संगत मान प्राप्त होता है।छात्र हलों की संख्या (अनंत) को समझेंगे।दो चर वाले रैखिक समीकरण के अपरिमित रूप से अनेक हल होते हैं।
हल ज्ञात करनाछात्राध्यापक कथन: समीकरण x + 2y = 6 के हल निकालने के लिए, यदि हम x = 0 रखें, तो 2y = 6 (y=3)। अतः एक हल (0, 3) है। यदि y = 0 रखें, तो x = 6। अतः दूसरा हल (6, 0) है।छात्र x का मान रखकर y का मान निकालना सीखेंगे।x + 2y = 6
x=0 ⇒ y=3 (0,3)
y=0 ⇒ x=6 (6,0)

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. दो चरों वाले रैखिक समीकरण का मानक रूप क्या होता है?
  2. दो चरों वाले रैखिक समीकरण के कितने हल होते हैं?
  3. समीकरण x – y = 4 को ax + by + c = 0 के रूप में व्यक्त कीजिए।

10. गृहकार्य (Homework):

समीकरण 2x + y = 7 के कोई दो हल (Solutions) ज्ञात कीजिए。

📌 नोट: यह B.Ed Maths Lesson Plan दैनिक पाठ योजना पुस्तिका के लिए पूरी तरह से तैयार है।

B.Ed Maths Lesson Plan 22: पाठ योजना क्रमांक – 22

दिनांक: ………………..
कक्षा: 9
कालांश: ………………..
योजना प्रकार: B.Ed Maths Lesson Plan
विषय: गणित
उपविषय: ज्यामिति
प्रकरण: निर्देशांक ज्यामिति (Coordinate Geometry)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में तल पर बिंदुओं की स्थिति निर्धारित करने की तार्किक क्षमता का विकास करना।
  2. रेखागणित और बीजगणित के बीच संबंध स्थापित करना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘कार्तीय तल’ (Cartesian Plane) और अक्षों (Axes) को परिभाषित कर सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी भुज (Abscissa) और कोटि (Ordinate) के अर्थ को समझ सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी किसी दिए गए बिंदु के निर्देशांक (Coordinates) ज्ञात कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी ग्राफ पेपर पर दिए गए निर्देशांकों की सहायता से बिंदुओं को सही स्थान पर आलेखित (Plot) कर सकेंगे।

3. शिक्षण सहायक सामग्री:

ग्राफ पेपर का बड़ा चार्ट, कार्तीय तल का मॉडल, चॉक (विभिन्न रंगों के), डस्टर।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रदर्शन विधि, व्याख्यान विधि, प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी संख्या रेखा (Number Line) पर धनात्मक और ऋणात्मक संख्याओं को दर्शाना जानते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँ
1.यदि मुझे इस कक्षा में आपका स्थान बताना हो, तो मैं कैसे बताऊँगा?पंक्ति (Row) और स्तंभ (Column) की संख्या से।
2.संख्या रेखा पर 0 के दाईं ओर कैसी संख्याएं होती हैं?धनात्मक (Positive) संख्याएं।
3.यदि हम दो संख्या रेखाओं को (एक आड़ी और एक खड़ी) एक-दूसरे के लंबवत रख दें, तो वे एक तल को कितने भागों में बांटेंगी?चार भागों में।
4.इन दोनों रेखाओं से बने तल (Plane) को और उस पर बिंदुओं की स्थिति बताने की पद्धति को क्या कहते हैं?(समस्यात्मक / कार्तीय पद्धति)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, एक तल में किसी बिंदु की सही स्थिति निर्धारित करने के लिए दो लंबवत रेखाओं की आवश्यकता होती है। इस पद्धति को ‘निर्देशांक ज्यामिति’ (Coordinate Geometry) कहते हैं, जिसका आज हम विस्तार से अध्ययन करेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
कार्तीय तल और अक्षछात्राध्यापक कथन: तल को क्षैतिज रेखा (X-अक्ष) और ऊर्ध्वाधर रेखा (Y-अक्ष) द्वारा 4 भागों में बांटा जाता है। इन भागों को ‘चतुर्थांश’ (Quadrants) कहते हैं। जहाँ दोनों अक्ष एक-दूसरे को काटते हैं, उसे ‘मूल बिंदु’ (Origin) कहते हैं। इसके निर्देशांक (0,0) होते हैं।छात्र कार्तीय तल का चित्र अपनी कॉपी में बनाएंगे।X-अक्ष (क्षैतिज)
Y-अक्ष (ऊर्ध्वाधर)
मूल बिंदु = (0,0)
बिंदु के निर्देशांक (Coordinates)छात्राध्यापक कथन: किसी बिंदु की स्थिति को (x, y) के रूप में लिखा जाता है। ‘x’ को भुज (Abscissa) कहते हैं (Y-अक्ष से दूरी)। ‘y’ को कोटि (Ordinate) कहते हैं (X-अक्ष से दूरी)। उदाहरण के लिए, बिंदु (3, 4) में भुज 3 और कोटि 4 है।छात्र भुज और कोटि का अर्थ समझेंगे।(x, y) → (भुज, कोटि)
(3, 4) में भुज=3, कोटि=4
बिंदुओं का आलेखन (Plotting)प्रदर्शन: ग्राफ पर बिंदु (-2, 3) दर्शाना।
छात्राध्यापक कथन: (-2, 3) के लिए हम मूल बिंदु से X-अक्ष पर बाईं ओर 2 कदम (-2) चलेंगे, और फिर वहाँ से Y-अक्ष के समानांतर ऊपर की ओर 3 कदम (+3) चलेंगे। यह बिंदु द्वितीय चतुर्थांश में होगा।
छात्र ग्राफ पेपर पर बिंदु आलेखित करना सीखेंगे।I चतुर्थांश: (+, +)
II चतुर्थांश: (-, +)
III: (-, -), IV: (+, -)

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. X-अक्ष और Y-अक्ष के प्रतिच्छेद बिंदु को क्या कहते हैं?
  2. बिंदु (5, -7) में कोटि (Ordinate) का मान क्या है?
  3. बिंदु (-4, -3) किस चतुर्थांश (Quadrant) में स्थित होगा?

10. गृहकार्य (Homework):

एक ग्राफ पेपर पर कार्तीय तल बनाइए और उस पर निम्नलिखित बिंदुओं को दर्शाइए: A(2, 5), B(-3, 4), C(0, -2)।

📌 नोट: यह B.Ed Maths Lesson Plan दैनिक पाठ योजना पुस्तिका के लिए पूरी तरह से तैयार है।

B.Ed Maths Lesson Plan 23: पाठ योजना क्रमांक – 23

दिनांक: ………………..
कक्षा: 9
कालांश: ………………..
योजना प्रकार: B.Ed Maths Lesson Plan
विषय: गणित
उपविषय: ज्यामिति
प्रकरण: यूक्लिड की ज्यामिति का परिचय
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में ज्यामिति के ऐतिहासिक विकास और आधारभूत ढांचे की समझ उत्पन्न करना।
  2. गणित में तर्क (Logic) और प्रमाण (Proof) के महत्व को स्पष्ट करना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी यूक्लिड की परिभाषाओं, अभिगृहीतों (Axioms) और अभिधारणाओं (Postulates) का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘अभिगृहीत’ और ‘अभिधारणा’ के बीच के अंतर को स्पष्ट कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी यह सिद्ध करने के लिए तर्क का उपयोग कर सकेंगे कि “दो भिन्न रेखाओं में एक से अधिक बिंदु उभयनिष्ठ नहीं हो सकते।”
कौशलविद्यार्थी ज्यामितीय कथनों को तार्किक ढंग से प्रस्तुत करने का कौशल विकसित करेंगे।

3. शिक्षण सहायक सामग्री:

यूक्लिड की अभिधारणाओं का चार्ट, ज्यामितीय आकृतियां (बिंदु, रेखा, पृष्ठ) दर्शाने वाले मॉडल, चॉक, डस्टर।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

व्याख्यान विधि, निगमन विधि, प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी बिंदु, रेखा, और समतल जैसी सामान्य ज्यामितीय आकृतियों को जानते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँ
1.गणित की वह शाखा जिसमें हम आकृतियों, आकारों और उनके गुणों का अध्ययन करते हैं, क्या कहलाती है?ज्यामिति (Geometry)।
2.‘ज्यामिति’ (Geometry) शब्द किन दो शब्दों से मिलकर बना है?जिओ (पृथ्वी) + मेट्रिन (मापना)।
3.प्राचीन काल में किस गणितज्ञ ने ज्यामिति के ज्ञान को एक व्यवस्थित रूप में (एलिमेंट्स नामक पुस्तक में) संकलित किया था?यूक्लिड (Euclid) ने।
4.यूक्लिड ने ज्यामिति के क्या-क्या मूल नियम या अभिधारणाएं दी थीं?(समस्यात्मक)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, यूक्लिड ने ज्यामिति को एक तार्किक आधार प्रदान किया। आज हम ‘यूक्लिड की ज्यामिति का परिचय’ पाठ के अंतर्गत उनके द्वारा दी गई परिभाषाओं, अभिगृहीतों और अभिधारणाओं का विस्तार से अध्ययन करेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
यूक्लिड की परिभाषाएंछात्राध्यापक कथन: यूक्लिड ने कुछ बुनियादी पदों को परिभाषित किया। जैसे: “एक बिंदु वह है जिसका कोई भाग नहीं होता।” “एक रेखा चौड़ाई रहित लंबाई होती है।” यद्यपि आधुनिक गणित में बिंदु और रेखा को ‘अपरिभाषित पद’ (Undefined terms) माना जाता है, फिर भी यूक्लिड की समझ महत्वपूर्ण थी।छात्र यूक्लिड की परिभाषाओं को सुनेंगे और समझेंगे।बिंदु: जिसका कोई भाग (dimension) न हो।
रेखा: चौड़ाई रहित लंबाई।
अभिगृहीत (Axioms)छात्राध्यापक कथन: वे कल्पनाएं जिन्हें बिना प्रमाण के सत्य मान लिया जाता है और जिनका उपयोग पूरी गणित में होता है, ‘अभिगृहीत’ कहलाते हैं। उदाहरण: (1) वे वस्तुएं जो एक ही वस्तु के बराबर हों, एक-दूसरे के बराबर होती हैं (यदि A=C, B=C, तो A=B)। (2) पूर्ण अपने भाग से बड़ा होता है।छात्र अभिगृहीतों को नोट करेंगे और उनके अर्थ को समझेंगे।अभिगृहीत: सर्वमान्य सत्य (पूरी गणित में लागू)।
पूर्ण > भाग।
अभिधारणाएं (Postulates)छात्राध्यापक कथन: वे कल्पनाएं जो केवल ‘ज्यामिति’ से संबंधित हैं, उन्हें ‘अभिधारणाएं’ कहते हैं। यूक्लिड की 5 अभिधारणाएं हैं। अभिधारणा 1: “एक बिंदु से एक अन्य बिंदु तक एक सीधी रेखा खींची जा सकती है।” इसका मतलब है कि दो भिन्न बिंदुओं से होकर केवल एक ही अद्वितीय (Unique) रेखा खींची जा सकती है।छात्र अभिधारणाओं का अर्थ और पहली अभिधारणा समझेंगे।अभिधारणाएं: केवल ज्यामिति के सत्य।
दो बिंदुओं से केवल 1 रेखा गुजर सकती है।

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. अभिगृहीत (Axiom) और अभिधारणा (Postulate) में क्या मुख्य अंतर है?
  2. यूक्लिड के अनुसार “पूर्ण” और उसके “भाग” में क्या संबंध होता है?
  3. दो भिन्न बिंदुओं से होकर अधिकतम कितनी सीधी रेखाएं खींची जा सकती हैं?

10. गृहकार्य (Homework):

यूक्लिड की किन्हीं तीन अभिगृहीतों (Axioms) को अपनी अभ्यास पुस्तिका में लिखिए और उन्हें उदाहरण सहित समझाइए।

📌 नोट: यह B.Ed Maths Lesson Plan दैनिक पाठ योजना पुस्तिका के लिए पूरी तरह से तैयार है।

B.Ed Maths Lesson Plan 24: पाठ योजना क्रमांक – 24

दिनांक: ………………..
कक्षा: 9
कालांश: ………………..
योजना प्रकार: B.Ed Maths Lesson Plan
विषय: गणित
उपविषय: ज्यामिति
प्रकरण: रेखाएं और कोण (पूरक, संपूरक, और आसन्न कोण)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में ज्यामितीय आकृतियों के मध्य संबंधों को पहचानने की क्षमता विकसित करना।
  2. गणितीय तर्क और समस्याओं को हल करने का कौशल बढ़ाना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी पूरक (Complementary) और संपूरक (Supplementary) कोणों की परिभाषा का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी आसन्न कोणों (Adjacent Angles) और रैखिक युग्म (Linear Pair) में अंतर स्पष्ट कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी एक कोण का मान दिए होने पर उसके पूरक या संपूरक कोण का मान ज्ञात कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी शीर्षाभिमुख कोणों (Vertically Opposite Angles) के समान होने के गुण का उपयोग करके अज्ञात कोण ज्ञात कर सकेंगे।

3. शिक्षण सहायक सामग्री:

कोणों के विभिन्न युग्मों को दर्शाने वाला चार्ट, चाँदा (Protractor), कैंची (शीर्षाभिमुख कोण समझाने हेतु), चॉक, डस्टर।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रदर्शन विधि, निगमन विधि, प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी कोण क्या है और समकोण (90°), ऋजु कोण (180°) के बारे में सामान्य जानकारी रखते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँ
1.एक समकोण (Right Angle) कितने डिग्री का होता है?90° का।
2.एक सीधी रेखा पर बनने वाला कोण (ऋजु कोण) कितने डिग्री का होता है?180° का।
3.यदि दो कोणों को जोड़ने पर उनका योग 90° हो जाए, तो उन दोनों कोणों को आपस में क्या कहा जाता है?(समस्यात्मक)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, जब दो कोणों का योग 90° या 180° होता है, तो उन्हें विशेष नाम दिए जाते हैं। आज हम ‘रेखाएं और कोण’ पाठ के अंतर्गत कोणों के युग्मों—पूरक, संपूरक, आसन्न और शीर्षाभिमुख कोणों का अध्ययन करेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
पूरक और संपूरक कोणछात्राध्यापक कथन: यदि दो कोणों का योग 90° हो, तो वे एक-दूसरे के ‘पूरक कोण’ (Complementary) कहलाते हैं (जैसे 30° और 60°)। यदि दो कोणों का योग 180° हो, तो वे एक-दूसरे के ‘संपूरक कोण’ (Supplementary) कहलाते हैं (जैसे 100° और 80°)।छात्र पूरक और संपूरक के उदाहरण समझेंगे और लिखेंगे।पूरक कोणों का योग = 90°
संपूरक कोणों का योग = 180°
आसन्न कोण और रैखिक युग्मछात्राध्यापक कथन: दो कोण ‘आसन्न’ (Adjacent) कहलाते हैं यदि उनका शीर्ष उभयनिष्ठ (Common) हो, एक भुजा उभयनिष्ठ हो, और अन्य भुजाएं विपरीत ओर हों। यदि दो आसन्न कोणों का योग 180° हो (अर्थात वे एक सीधी रेखा बनाते हों), तो उन्हें ‘रैखिक युग्म’ (Linear Pair) कहते हैं।छात्र चित्र के माध्यम से आसन्न कोणों को समझेंगे।रैखिक युग्म: ऐसे आसन्न कोण जिनका योग 180° हो। (सीधी रेखा पर)
शीर्षाभिमुख कोण (Vertically Opposite)प्रदर्शन: कैंची को खोलकर दो प्रतिच्छेदी रेखाएं बनाना।
छात्राध्यापक कथन: जब दो रेखाएं एक-दूसरे को काटती हैं, तो आमने-सामने बनने वाले कोण ‘शीर्षाभिमुख कोण’ कहलाते हैं। ये कोण हमेशा आपस में बराबर होते हैं (जैसे कैंची के आमने-सामने के कोण)।
छात्र कैंची के उदाहरण से शीर्षाभिमुख कोण समझेंगे।शीर्षाभिमुख कोण = आमने-सामने के कोण (हमेशा बराबर)।

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. 40° के कोण का पूरक कोण (Complementary angle) क्या होगा?
  2. 110° के कोण का संपूरक कोण (Supplementary angle) क्या होगा?
  3. रैखिक युग्म (Linear Pair) के कोणों का योग कितना होता है?

10. गृहकार्य (Homework):

यदि दो पूरक कोण आपस में बराबर हैं, तो प्रत्येक कोण का मान ज्ञात कीजिए।

📌 नोट: यह B.Ed Maths Lesson Plan दैनिक पाठ योजना पुस्तिका के लिए पूरी तरह से तैयार है।

B.Ed Maths Lesson Plan 25: पाठ योजना क्रमांक – 25

दिनांक: ………………..
कक्षा: 9
कालांश: ………………..
योजना प्रकार: B.Ed Maths Lesson Plan
विषय: गणित
उपविषय: ज्यामिति
प्रकरण: त्रिभुज (त्रिभुजों की सर्वांगसमता)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में ज्यामितीय आकृतियों की तुलना करने की तार्किक क्षमता विकसित करना।
  2. प्रमाण (Proofs) को व्यवस्थित रूप से लिखने का कौशल बढ़ाना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘सर्वांगसमता’ (Congruence) के अर्थ का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी त्रिभुजों की सर्वांगसमता की कसौटियों (SAS, SSS, ASA, RHS) को समझ सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी दिए गए दो त्रिभुजों की भुजाओं और कोणों के आधार पर सर्वांगसमता सिद्ध कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी CPCT (सर्वांगसम त्रिभुजों के संगत भाग) का उपयोग करके अन्य भुजाओं/कोणों को बराबर सिद्ध कर सकेंगे।

3. शिक्षण सहायक सामग्री:

समान आकार और आकृति के दो त्रिभुजाकार गत्ते, ₹1 के दो समान सिक्के (सर्वांगसमता समझाने हेतु), चॉक, डस्टर।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रदर्शन विधि, विश्लेषणात्मक-संश्लेषणात्मक विधि, प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी त्रिभुज के अंगों (3 भुजाएं, 3 कोण) और उनके सामान्य गुणों से परिचित हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँ
1.(₹1 के दो समान सिक्के दिखाते हुए) यदि मैं एक सिक्के को दूसरे के ऊपर रखूँ, तो क्या होगा?वे एक-दूसरे को पूरी तरह ढक लेंगे।
2.जो वस्तुएं एक-दूसरे को पूरी तरह ढक लेती हैं, उनके आकार और माप कैसे होते हैं?बिल्कुल समान (बराबर)।
3.गणित की भाषा में, वे आकृतियां जिनके आकार (Shape) और माप (Size) दोनों समान हों, क्या कहलाती हैं?(समस्यात्मक / सर्वांगसम)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, ऐसी आकृतियां जो हर प्रकार से समान हों, उन्हें सर्वांगसम (Congruent) कहते हैं। आज हम ‘त्रिभुजों की सर्वांगसमता’ और इसकी विभिन्न कसौटियों (नियमों) का विस्तार से अध्ययन करेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
सर्वांगसमता का अर्थ और CPCTछात्राध्यापक कथन: सर्वांगसम (Congruent) का अर्थ है “सभी अंग समान”। यदि ΔABC और ΔDEF सर्वांगसम हैं (इसे ≅ चिह्न से लिखते हैं), तो उन्हें एक-दूसरे पर रखने पर वे ढक लेंगे। सर्वांगसम त्रिभुजों के संगत भाग (Corresponding Parts) हमेशा बराबर होते हैं। इसे संक्षिप्त में CPCT (Corresponding Parts of Congruent Triangles) कहते हैं।छात्र सर्वांगसमता का अर्थ और CPCT का पूरा नाम लिखेंगे।सर्वांगसम = आकार (Shape) + माप (Size) समान।
चिह्न: ≅
CPCT: संगत भाग बराबर।
सर्वांगसमता की कसौटियां (SAS और ASA)छात्राध्यापक कथन: हमें त्रिभुज के सभी 6 अंग (3 भुजाएं, 3 कोण) नापने की जरूरत नहीं है। कुछ नियम हैं:
1. SAS (भुजा-कोण-भुजा): यदि दो भुजाएं और उनके बीच का कोण बराबर हो।
2. ASA (कोण-भुजा-कोण): यदि दो कोण और उनके बीच की भुजा बराबर हो।
छात्र नियमों को समझेंगे और कॉपी में उतारेंगे।SAS: Side-Angle-Side (भुजा-कोण-भुजा)
ASA: Angle-Side-Angle
SSS और RHS नियमछात्राध्यापक कथन:
3. SSS (भुजा-भुजा-भुजा): यदि तीनों भुजाएं बराबर हों।
4. RHS (समकोण-कर्ण-भुजा): समकोण त्रिभुजों में, यदि कर्ण (Hypotenuse) और कोई एक भुजा बराबर हो।
छात्र SSS और RHS नियम को समझेंगे।SSS: तीनों भुजाएं बराबर।
RHS: Right angle – Hypotenuse – Side

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. सर्वांगसम (Congruent) आकृतियां किसे कहते हैं?
  2. SAS सर्वांगसमता नियम का पूरा नाम (हिन्दी या अंग्रेजी में) क्या है?
  3. CPCT का क्या अर्थ होता है?

10. गृहकार्य (Homework):

यदि ΔABC ≅ ΔPQR है, तो CPCT के आधार पर बताइए कि भुजा AB किसके बराबर होगी और कोण C किसके बराबर होगा?

📌 नोट: यह B.Ed Maths Lesson Plan दैनिक पाठ योजना पुस्तिका के लिए पूरी तरह से तैयार है।

B.Ed Maths Lesson Plan 26: पाठ योजना क्रमांक – 26

दिनांक: ………………..
कक्षा: 9
कालांश: ………………..
योजना प्रकार: B.Ed Maths Lesson Plan
विषय: गणित
उपविषय: ज्यामिति
प्रकरण: चतुर्भुज (समांतर चतुर्भुज के गुण)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में चार भुजाओं वाली आकृतियों (बहुभुजों) के गुणों को समझने की तार्किक क्षमता विकसित करना।
  2. ज्यामितीय सिद्धान्तों को सिद्ध (Prove) करने की कुशलता का विकास करना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी चतुर्भुज और समांतर चतुर्भुज (Parallelogram) की परिभाषा का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी समांतर चतुर्भुज के गुणों (सम्मुख भुजाएं बराबर, सम्मुख कोण बराबर) को समझ सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी चतुर्भुज के कोण योग गुण (Angle sum property) का उपयोग करके अज्ञात कोण ज्ञात कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी सिद्ध कर सकेंगे कि समांतर चतुर्भुज का विकर्ण उसे दो सर्वांगसम त्रिभुजों में बांटता है।

3. शिक्षण सहायक सामग्री:

विभिन्न प्रकार के चतुर्भुजों (आयत, वर्ग, समचतुर्भुज, समांतर चतुर्भुज) का चार्ट, चॉक, डस्टर।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

निगमन-आगमन विधि, प्रदर्शन विधि, प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी रेखाओं (समांतर रेखाएं) और त्रिभुजों की सर्वांगसमता के बारे में भली-भाँति जानते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँ
1.तीन रेखाखंडों से घिरी बंद आकृति को क्या कहते हैं?त्रिभुज।
2.चार रेखाखंडों से घिरी बंद आकृति को क्या कहते हैं?चतुर्भुज (Quadrilateral)।
3.चतुर्भुज के चारों अंतःकोणों का योग कितना होता है?360°
4.उस चतुर्भुज को क्या कहते हैं जिसकी सम्मुख (आमने-सामने की) भुजाएं समांतर (Parallel) हों?(समस्यात्मक / समांतर चतुर्भुज)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, वह चतुर्भुज जिसकी सम्मुख भुजाओं के दोनों युग्म समांतर हों, समांतर चतुर्भुज (Parallelogram) कहलाता है। आज हम समांतर चतुर्भुज और उसके महत्वपूर्ण गुणों (Theorems) का अध्ययन करेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
चतुर्भुज का कोण योग गुणछात्राध्यापक कथन: किसी भी चतुर्भुज के चारों अंतःकोणों का योग 360° होता है। यदि हम चतुर्भुज में एक विकर्ण (Diagonal) खींच दें, तो वह दो त्रिभुजों में बंट जाता है। चूंकि एक त्रिभुज के कोणों का योग 180° होता है, तो दो त्रिभुजों का योग 180° + 180° = 360° होगा।छात्र कोण योग गुण को समझेंगे और सिद्ध करने का तरीका जानेंगे।चतुर्भुज के 4 कोणों का योग = 360°
(∠A + ∠B + ∠C + ∠D = 360°)
समांतर चतुर्भुज के गुणछात्राध्यापक कथन: समांतर चतुर्भुज के मुख्य गुण:
1. सम्मुख भुजाएं (Opposite sides) बराबर होती हैं。
2. सम्मुख कोण (Opposite angles) बराबर होते हैं。
3. आसन्न कोणों (Adjacent angles) का योग 180° (संपूरक) होता है।
छात्र समांतर चतुर्भुज के गुणों को अपनी कॉपी में नोट करेंगे।समांतर चतुर्भुज के गुण:
1. सम्मुख भुजाएं बराबर।
2. सम्मुख कोण बराबर।
विकर्णों का गुणछात्राध्यापक कथन: समांतर चतुर्भुज के विकर्ण एक-दूसरे को ‘समद्विभाजित’ (Bisect) करते हैं। इसका अर्थ है कि वे जहाँ काटते हैं, वहाँ से वे दो बराबर हिस्सों में बंट जाते हैं। साथ ही, कोई भी एक विकर्ण समांतर चतुर्भुज को दो सर्वांगसम त्रिभुजों में बांटता है।छात्र विकर्णों के गुण को चित्र के माध्यम से समझेंगे।विकर्ण (Diagonals) एक-दूसरे को समद्विभाजित करते हैं (Bisect each other)।

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. किसी चतुर्भुज के चारों अंतःकोणों का योग कितना होता है?
  2. समांतर चतुर्भुज के सम्मुख कोण कैसे होते हैं (बराबर या असमान)?
  3. क्या समांतर चतुर्भुज के विकर्ण एक-दूसरे को समद्विभाजित (Bisect) करते हैं?

10. गृहकार्य (Homework):

एक समांतर चतुर्भुज का एक कोण 70° है। उसके अन्य सभी तीन कोणों का मान ज्ञात कीजिए।

📌 नोट: यह B.Ed Maths Lesson Plan दैनिक पाठ योजना पुस्तिका के लिए पूरी तरह से तैयार है।

B.Ed Maths Lesson Plan 27: पाठ योजना क्रमांक – 27

दिनांक: ………………..
कक्षा: 9
कालांश: ………………..
योजना प्रकार: B.Ed Maths Lesson Plan
विषय: गणित
उपविषय: ज्यामिति
प्रकरण: वृत्त (Circles) – जीवा और चाप के गुण
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में वक्रीय आकृतियों (Curved figures) के ज्यामितीय गुणों को समझने की क्षमता विकसित करना।
  2. दैनिक जीवन में वृत्ताकार वस्तुओं के प्रति गणितीय दृष्टिकोण उत्पन्न करना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी वृत्त की त्रिज्या, जीवा (Chord), चाप (Arc) और वृत्तखंड (Segment) की परिभाषा का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी वृत्त के केंद्र से जीवा पर डाले गए लंब के प्रभाव (समद्विभाजन) को समझ सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी पाइथागोरस प्रमेय का उपयोग करके वृत्त की जीवा की लंबाई या केंद्र से दूरी ज्ञात कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी परकार (Compass) की सहायता से वृत्त और उसकी जीवाओं का सटीक आरेखण कर सकेंगे।

3. शिक्षण सहायक सामग्री:

परकार (Compass), स्केल, वृत्ताकार चूड़ी या छल्ला, वृत्त के भागों का चार्ट, चॉक, डस्टर।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रदर्शन विधि, निगमन विधि, प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी वृत्त, केंद्र (Center), त्रिज्या (Radius) और व्यास (Diameter) की सामान्य जानकारी रखते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँ
1.साइकिल के पहिए या चूड़ी का आकार कैसा होता है?वृत्ताकार (गोल)।
2.वृत्त के केंद्र से परिधि तक की दूरी को क्या कहते हैं?त्रिज्या (Radius)।
3.यदि हम परिधि पर स्थित किन्हीं दो बिंदुओं को एक रेखा से मिला दें, तो उस रेखा को क्या कहते हैं?जीवा (Chord)।
4.वृत्त के केंद्र से जीवा पर लंब (Perpendicular) डालने पर क्या होता है?(समस्यात्मक)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, वृत्त की जीवा और उसके चाप से संबंधित कई महत्वपूर्ण प्रमेय (Theorems) होते हैं। आज हम वृत्त के इन्ही गुणों—विशेषकर केंद्र से जीवा पर डाले गए लंब के गुण का अध्ययन करेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
जीवा और चापछात्राध्यापक कथन: परिधि के किन्हीं दो बिंदुओं को मिलाने वाला रेखाखंड ‘जीवा’ (Chord) कहलाता है। वृत्त की सबसे बड़ी जीवा उसका ‘व्यास’ (Diameter) होता है। परिधि का एक टुकड़ा ‘चाप’ (Arc) कहलाता है। जीवा द्वारा वृत्त को दो भागों में बांटा जाता है, जिन्हें वृत्तखंड (Segment – दीर्घ और लघु) कहते हैं।छात्र वृत्त बनाकर जीवा और चाप को दर्शाएंगे।जीवा (Chord): परिधि के 2 बिंदुओं को मिलाने वाली रेखा।
सबसे बड़ी जीवा = व्यास।
केंद्र से जीवा पर लंब (प्रमेय)छात्राध्यापक कथन: एक बहुत महत्वपूर्ण प्रमेय है: “एक वृत्त के केंद्र से एक जीवा पर डाला गया लंब, जीवा को समद्विभाजित करता है (दो बराबर भागों में बांटता है)।” यदि AB एक जीवा है, और केंद्र O से लंब OM डाला जाए, तो AM = MB होगा। इसका विलोम भी सत्य है (मध्य बिंदु को मिलाने वाली रेखा केंद्र से लंब होती है)।छात्र प्रमेय को समझेंगे और चित्र बनाएंगे।प्रमेय: केंद्र से जीवा पर डाला गया लंब, जीवा को समद्विभाजित (Bisect) करता है।
उदाहरण (पाइथागोरस का उपयोग)छात्राध्यापक कथन: मान लीजिए वृत्त की त्रिज्या 5 सेमी है और जीवा की लंबाई 8 सेमी है। केंद्र से जीवा की दूरी क्या होगी? चूँकि लंब जीवा को आधा करता है (8/2 = 4)। अब समकोण त्रिभुज में पाइथागोरस प्रमेय लगाएंगे: $5^2 = 4^2 + \text{लंब}^2$ ⇒ $25 – 16 = 9$ ⇒ लंब = 3 सेमी।छात्र उदाहरण को कॉपी में हल करेंगे।कर्ण = 5 (त्रिज्या)
आधार = 4 (जीवा का आधा)
लंब = √(25 – 16) = 3 सेमी।

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. वृत्त की सबसे बड़ी जीवा (Longest chord) को क्या कहते हैं?
  2. वृत्त के केंद्र से जीवा पर डाला गया लंब जीवा को क्या करता है?
  3. लघु वृत्तखंड और दीर्घ वृत्तखंड में क्या अंतर है?

10. गृहकार्य (Homework):

एक वृत्त की त्रिज्या 10 सेमी है। यदि वृत्त के केंद्र से एक जीवा की दूरी 6 सेमी है, तो जीवा की कुल लंबाई ज्ञात कीजिए।

📌 नोट: यह B.Ed Maths Lesson Plan दैनिक पाठ योजना पुस्तिका के लिए पूरी तरह से तैयार है।

B.Ed Maths Lesson Plan 28: पाठ योजना क्रमांक – 28

दिनांक: ………………..
कक्षा: 9
कालांश: ………………..
योजना प्रकार: B.Ed Maths Lesson Plan
विषय: गणित
उपविषय: क्षेत्रमिति (Mensuration)
प्रकरण: हीरोन का सूत्र (Heron’s Formula)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में आकृतियों के क्षेत्रफल ज्ञात करने की तार्किक क्षमता का विकास करना।
  2. दैनिक जीवन में भूमि/खेत के क्षेत्रफल मापने में गणित के उपयोग को समझना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘हीरोन के सूत्र’ और अर्धपरिमाप (s) के सूत्र का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी यह समझ सकेंगे कि हीरोन का सूत्र विषमबाहु (Scalene) त्रिभुज के क्षेत्रफल के लिए विशेष रूप से उपयोगी है जहाँ ऊँचाई नहीं दी गई हो।
अनुप्रयोगविद्यार्थी त्रिभुजाकार खेत या पार्क का क्षेत्रफल ज्ञात करने के लिए इस सूत्र का उपयोग कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी सूत्र में मान रखकर वर्गमूल (Square root) निकालने की गणना तेजी से कर सकेंगे।

3. शिक्षण सहायक सामग्री:

विभिन्न प्रकार के त्रिभुजों का चार्ट, हीरोन के सूत्र का फ्लैशकार्ड, चॉक, डस्टर।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

निगमन-आगमन विधि, व्याख्यान-प्रदर्शन विधि, प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी त्रिभुज का सामान्य क्षेत्रफल सूत्र ($1/2 \times \text{आधार} \times \text{ऊँचाई}$) और वर्गमूल निकालना जानते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँ
1.यदि किसी त्रिभुज का आधार और ऊँचाई (लंब) दिए हों, तो क्षेत्रफल का सूत्र क्या होता है?$1/2 \times \text{आधार} \times \text{ऊँचाई}$
2.यदि ऊँचाई न दी गई हो और केवल तीनों भुजाओं की लंबाइयाँ दी गई हों (जैसे 5, 6, 7), तो क्या हम यह सूत्र लगा सकते हैं?नहीं।
3.तीनों भुजाओं का योग क्या कहलाता है?परिमाप (Perimeter)।
4.जब केवल तीनों भुजाएं दी गई हों, तो त्रिभुज का क्षेत्रफल ज्ञात करने के लिए किस सूत्र का प्रयोग करते हैं?(समस्यात्मक)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, जब किसी त्रिभुज की केवल तीन भुजाएं दी गई हों और ऊँचाई ज्ञात न हो, तो क्षेत्रफल निकालने के लिए एक विशेष सूत्र का प्रयोग किया जाता है, जिसे अलेक्जेंड्रिया के गणितज्ञ हीरोन ने दिया था। आज हम ‘हीरोन का सूत्र’ का अध्ययन करेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
अर्धपरिमाप (Semi-perimeter)छात्राध्यापक कथन: हीरोन का सूत्र लगाने से पहले हमें त्रिभुज का अर्धपरिमाप (Semi-perimeter), जिसे ‘s’ से दर्शाते हैं, निकालना होता है। यदि त्रिभुज की भुजाएं a, b और c हैं, तो परिमाप = a+b+c होगा। अतः अर्धपरिमाप (s) = $(a + b + c) / 2$ होता है।छात्र अर्धपरिमाप का सूत्र लिखेंगे और समझेंगे।अर्धपरिमाप (s) = $\frac{a + b + c}{2}$
हीरोन का सूत्र (Heron’s Formula)छात्राध्यापक कथन: त्रिभुज के क्षेत्रफल का हीरोन का सूत्र है: Area = $\sqrt{s(s – a)(s – b)(s – c)}$ । इस सूत्र के जनक हीरोन (Heron) थे। यह सूत्र विशेष रूप से विषमबाहु (Scalene) त्रिभुज के लिए बहुत उपयोगी है, जहाँ लंब ज्ञात करना कठिन होता है।छात्र हीरोन के सूत्र को जोर से दोहराएंगे और कॉपी में लिखेंगे।हीरोन का सूत्र:
क्षेत्रफल = $\sqrt{s(s – a)(s – b)(s – c)}$
सूत्र का अनुप्रयोग (उदाहरण)छात्राध्यापक कथन: यदि भुजाएं a=3, b=4, c=5 हैं।
s = (3+4+5)/2 = 6.
क्षेत्रफल = $\sqrt{6 \times (6-3) \times (6-4) \times (6-5)}$
= $\sqrt{6 \times 3 \times 2 \times 1} = \sqrt{36} = 6$ वर्ग इकाई।
छात्र गणना में सहयोग करेंगे और वर्गमूल निकालेंगे।s=6
A = $\sqrt{6 \times 3 \times 2 \times 1}$
A = $\sqrt{36}$ = 6 sq.units

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. हीरोन के सूत्र में ‘s’ का क्या अर्थ है?
  2. अर्धपरिमाप (s) ज्ञात करने का सूत्र क्या है?
  3. हीरोन का सूत्र क्या है?

10. गृहकार्य (Homework):

एक त्रिभुजाकार पार्क की भुजाएं 13 मी, 14 मी और 15 मी हैं। हीरोन के सूत्र का उपयोग करके इस पार्क का क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए।

📌 नोट: यह B.Ed Maths Lesson Plan दैनिक पाठ योजना पुस्तिका के लिए पूरी तरह से तैयार है।

B.Ed Maths Lesson Plan 29: पाठ योजना क्रमांक – 29

दिनांक: ………………..
कक्षा: 10
कालांश: ………………..
योजना प्रकार: B.Ed Maths Lesson Plan
विषय: गणित
उपविषय: क्षेत्रमिति (Mensuration)
प्रकरण: पृष्ठीय क्षेत्रफल और आयतन (बेलन और शंकु)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में त्रिविमीय (3D) आकृतियों के मापन की समझ विकसित करना।
  2. दैनिक जीवन में बर्तनों की धारिता (Capacity) ज्ञात करने में गणितीय उपयोग समझाना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी बेलन (Cylinder) और शंकु (Cone) के पृष्ठीय क्षेत्रफल और आयतन के सूत्रों का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल (Curved Surface Area) और संपूर्ण पृष्ठीय क्षेत्रफल (Total Surface Area) में अंतर कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी किसी गिलास (बेलन) या आइसक्रीम कोन में आने वाले पानी/पदार्थ की मात्रा (आयतन) ज्ञात कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी सूत्रों में मान रखकर सटीक गणना कर सकेंगे।

3. शिक्षण सहायक सामग्री:

एक बेलनाकार डिब्बा (Cylinder), एक जोकर की टोपी या शंकु (Cone), चार्ट, चॉक, डस्टर।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रदर्शन विधि, निगमन विधि, प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी वृत्त का क्षेत्रफल ($\pi r^2$) और वृत्त की परिधि ($2\pi r$) के बारे में जानते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँ
1.(पाइप या डिब्बा दिखाते हुए) इस डिब्बे का आकार कैसा है?बेलनाकार (Cylinder)।
2.इस डिब्बे को रंगने के लिए जो जगह चाहिए उसे क्या कहेंगे?पृष्ठीय क्षेत्रफल।
3.इस डिब्बे के अंदर कितना पानी आ सकता है, यह क्या कहलाता है?आयतन (Volume) या धारिता।
4.बेलन और शंकु के पृष्ठीय क्षेत्रफल व आयतन ज्ञात करने के क्या सूत्र होते हैं?(समस्यात्मक)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, त्रिविमीय (3D) आकृतियों की बाहरी सतह को पृष्ठीय क्षेत्रफल और उनके द्वारा घेरे गए स्थान को आयतन कहते हैं। आज हम बेलन और शंकु के पृष्ठीय क्षेत्रफल और आयतन के सूत्रों का अध्ययन करेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
लंब वृत्तीय बेलन (Cylinder)छात्राध्यापक कथन: बेलन के आधार की त्रिज्या (r) और ऊँचाई (h) होती है। इसका वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल (गोल भाग) = $2\pi rh$ होता है। यदि इसके दोनों सिरे (ढक्कन) भी शामिल करें, तो कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल = $2\pi r(r + h)$ होता है। बेलन का आयतन (अंदर की जगह) = $\pi r^2 h$ होता है।छात्र बेलन के सूत्रों को समझेंगे और लिखेंगे।बेलन (Cylinder):
CSA = $2\pi rh$
TSA = $2\pi r(r + h)$
Volume = $\pi r^2 h$
लंब वृत्तीय शंकु (Cone)छात्राध्यापक कथन: शंकु में त्रिज्या (r), सीधी ऊँचाई (h) और तिर्यक ऊँचाई (Slant height ‘l’) होती है। $l = \sqrt{r^2 + h^2}$ होता है। शंकु का वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल = $\pi rl$ होता है। कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल = $\pi r(r + l)$ होता है।छात्र शंकु की तिर्यक ऊँचाई और क्षेत्रफल का सूत्र समझेंगे।शंकु (Cone):
CSA = $\pi rl$
TSA = $\pi r(r + l)$
शंकु का आयतनछात्राध्यापक कथन: यदि समान त्रिज्या और ऊँचाई का एक बेलन और एक शंकु लिया जाए, तो बेलन को पूरा भरने के लिए शंकु से 3 बार पानी डालना पड़ता है। अर्थात् शंकु का आयतन बेलन के आयतन का एक-तिहाई (1/3) होता है। शंकु का आयतन = $1/3 \pi r^2 h$।छात्र आयतन के संबंध को समझेंगे।शंकु का आयतन = $\frac{1}{3} \pi r^2 h$ (बेलन का एक-तिहाई)

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. बेलन के वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल (CSA) का सूत्र क्या है?
  2. शंकु की तिर्यक ऊँचाई (l) निकालने का सूत्र बताइए।
  3. यदि बेलन का आयतन 300 घन सेमी है, तो समान आधार और ऊँचाई वाले शंकु का आयतन क्या होगा?

10. गृहकार्य (Homework):

एक लंब वृत्तीय शंकु की आधार त्रिज्या 7 सेमी और तिर्यक ऊँचाई 10 सेमी है। इसका वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए। ($\pi = 22/7$)

📌 नोट: यह B.Ed Maths Lesson Plan दैनिक पाठ योजना पुस्तिका के लिए पूरी तरह से तैयार है।

B.Ed Maths Lesson Plan 30: पाठ योजना क्रमांक – 30

दिनांक: ………………..
कक्षा: 10
कालांश: ………………..
योजना प्रकार: B.Ed Maths Lesson Plan
विषय: गणित
उपविषय: सांख्यिकी व प्रायिकता
प्रकरण: प्रायिकता (Probability) – एक सैद्धांतिक दृष्टिकोण
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. विद्यार्थियों में अनिश्चितता (Uncertainty) को गणितीय रूप से मापने की समझ विकसित करना।
  2. तार्किक और विश्लेषणात्मक चिंतन का विकास करना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘प्रायिकता’ (Probability) की सैद्धांतिक परिभाषा और सूत्र का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी यह समझ सकेंगे कि किसी घटना की प्रायिकता हमेशा 0 और 1 के बीच होती है।
अनुप्रयोगविद्यार्थी सिक्के को उछालने, पासे को फेंकने या ताश की गड्डी से पत्ते निकालने संबंधी घटनाओं की प्रायिकता ज्ञात कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी अनुकूल परिणामों (Favorable outcomes) और कुल परिणामों की गिनती सटीकता से कर सकेंगे।

3. शिक्षण सहायक सामग्री:

एक सिक्का (Coin), एक पासा (Dice), ताश के पत्तों की गड्डी (Deck of cards), चॉक, डस्टर।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

गतिविधि आधारित विधि, प्रदर्शन विधि, प्रश्नोत्तर प्रविधि।

5. पूर्व ज्ञान:

विद्यार्थी सिक्के के दो पहलुओं (Head और Tail) तथा पासे के 6 अंकों (1 से 6) से भली-भाँति परिचित हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँ
1.आज बारिश होगी या नहीं, इस बारे में हम क्या कह सकते हैं?शायद बारिश हो (पक्का नहीं पता)।
2.क्रिकेट मैच शुरू होने से पहले अंपायर क्या उछालते हैं?सिक्का (Toss)।
3.सिक्का उछालने पर क्या-क्या आ सकता है?चित (Head) या पट (Tail)।
4.किसी घटना (जैसे Head आने) के घटित होने की संभावना को गणित में कैसे मापा जाता है?(समस्यात्मक / प्रायिकता द्वारा)

7. उद्देश्य कथन:

“बच्चों, किसी घटना के होने या न होने की संभावना (Chance) के संख्यात्मक माप को प्रायिकता (Probability) कहते हैं। आज हम प्रायिकता का सैद्धांतिक दृष्टिकोण से अध्ययन करेंगे।”

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
प्रायिकता का सूत्रछात्राध्यापक कथन: किसी घटना ‘E’ के घटने की सैद्धांतिक प्रायिकता P(E) = (E के अनुकूल परिणामों की संख्या) / (प्रयोग के कुल संभव परिणामों की संख्या) होती है। प्रायिकता का मान कभी भी 0 से कम (ऋणात्मक) और 1 से अधिक नहीं हो सकता। ($0 \le P(E) \le 1$)छात्र प्रायिकता का सूत्र और शर्त लिखेंगे।P(E) = अनुकूल परिणाम / कुल संभव परिणाम
$0 \le P(E) \le 1$
निश्चित और असंभव घटनाछात्राध्यापक कथन: जो घटना निश्चित रूप से घटेगी (जैसे कल सूरज पूर्व से उगेगा), उसकी प्रायिकता 1 होती है। जो घटना कभी नहीं घट सकती (जैसे पासा फेंकने पर 7 आना), उसकी प्रायिकता 0 होती है। इसे ‘असंभव घटना’ कहते हैं। घटना E के होने और न होने ($\bar{E}$) की प्रायिकताओं का योग 1 होता है ($P(E) + P(\bar{E}) = 1$)।छात्र निश्चित और असंभव घटना की प्रायिकता समझेंगे।निश्चित घटना की प्रायिकता = 1
असंभव घटना की प्रायिकता = 0
$P(E) + P(\bar{E}) = 1$
सिक्के और पासे के उदाहरणगतिविधि/कथन: एक सिक्का उछालने पर कुल परिणाम = 2 (H, T)। चित (Head) आने के अनुकूल परिणाम = 1। इसलिए P(Head) = 1/2। इसी तरह एक पासा फेंकने पर कुल परिणाम = 6 (1,2,3,4,5,6)। एक सम संख्या (2,4,6) आने के अनुकूल परिणाम = 3। तो P(सम संख्या) = 3/6 = 1/2।छात्र सिक्का और पासा के उदाहरण हल करना सीखेंगे।सिक्के में P(Head) = 1/2
पासे में P(सम अंक) = 3/6 = 1/2

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. किसी असंभव घटना (Impossible event) की प्रायिकता क्या होती है?
  2. प्रायिकता का अधिकतम मान कितना हो सकता है?
  3. एक पासा फेंकने पर अंक 5 आने की प्रायिकता क्या होगी?

10. गृहकार्य (Homework):

एक थैले में 3 लाल और 5 काली गेंदें हैं। इस थैले में से यादृच्छया (बिना देखे) एक गेंद निकाली जाती है। प्रायिकता ज्ञात कीजिए कि निकाली गई गेंद लाल है।

📌 नोट: यह B.Ed Maths Lesson Plan दैनिक पाठ योजना पुस्तिका के लिए पूरी तरह से तैयार है।

✨ B.Ed Trainee Useful Tools & Apps ✨

📝 सारांश: B.Ed Maths Lesson Plan का महत्व

एक उत्कृष्ट B.Ed Maths Lesson Plan न केवल शिक्षण को सुनियोजित बनाता है बल्कि कक्षा में विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने का सबसे प्रभावी साधन है। अंकगणित, बीजगणित, ज्यामिति और क्षेत्रमिति के विभिन्न प्रकरणों पर आधारित यह विस्तृत B.Ed Maths Lesson Plan अनुक्रमणिका हमारे भावी शिक्षकों को बिना किसी संकोच के कक्षा संचालन करने में अत्यंत सहायता प्रदान करेगी।