30+ D.El.Ed / BSTC EVS Lesson Plans (Class 1-5) PDF Download | पर्यावरण अध्ययन पाठ योजना

30+ D.El.Ed / BSTC EVS Lesson Plan PDF (Class 3-5)
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30+ D.El.Ed / BSTC EVS Lesson Plans (पर्यावरण अध्ययन पाठ योजना) Class 3-5

प्राथमिक कक्षा 3 से 5 के लिए 30+ D.El.Ed / BSTC EVS Lesson Plans PDF Download Free (पर्यावरण अध्ययन) एकदम मुफ्त। Activity-based teaching approach for Primary classes.

D.El.Ed / BSTC EVS Lesson Plans - Paryavaran Path Yojana DElEd

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📑 D.El.Ed Paryavaran Adhyayan Lesson Plan Navigation

🅰️ हमारा परिवेश और समाज (10 टॉपिक्स)

🅱️ प्रकृति, जीव-जंतु और वनस्पति (10 टॉपिक्स)

Ⓒ संसाधन और पर्यावरण संरक्षण (10 टॉपिक्स)

D.El.Ed Paryavaran Adhyayan Lesson Plan कैसे बनाएँ?

D.El.Ed (BTC) और BSTC की इंटर्नशिप डायरी के लिए paryavaran path yojana deled (Environmental Studies Lesson Plans) बनाना बहुत महत्वपूर्ण है। कक्षा 3, 4, और 5 के बच्चों के लिए deled evs lesson plan in hindi तैयार करते समय हमेशा ‘खेल विधि’ और ‘पूर्व ज्ञान’ का उपयोग करना चाहिए जिससे बच्चे आसानी से सीख सकें।

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D.El.Ed EVS Lesson Plan 1: पाठ योजना क्रमांक – 1

योजना प्रकार: D.El.Ed EVS Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 3
कालांश: ………………..
विषय: पर्यावरण अध्ययन (EVS)
उपविषय: पर्यावरण (Environment)
प्रकरण: हमारा परिवार और रिश्ते
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. छात्रों में पर्यावरण के प्रति रुचि जाग्रत करना।
  2. छात्रों को उनके सामाजिक परिवेश से परिचित कराना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘हमारा परिवार और रिश्ते’ पाठ में आए नवीन तथ्यों का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे। विद्यार्थी प्रकरण के महत्व को समझ सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘हमारा परिवार और रिश्ते’ पाठ के विषय को समझकर अपने शब्दों में व्यक्त कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी पाठ से प्राप्त ज्ञान और समझ का अपने व्यावहारिक जीवन में उपयोग कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी उचित हाव-भाव के साथ पर्यावरण से संबंधित गतिविधियों को करने का कौशल प्राप्त करेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी पर्यावरण अध्ययन की अन्य रोचक पुस्तकों/कहानियों को पढ़ने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में प्रकृति, जानवरों और अपने आस-पास के परिवेश के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

चौक, डस्टर, लपेट श्यामपट्ट, एकल और संयुक्त परिवार को दर्शाता हुआ चार्ट।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रश्नोत्तर प्रविधि, स्पष्टीकरण विधि, और प्रदर्शन/गतिविधि आधारित विधि।

5. पूर्व ज्ञान:

छात्र अपने माता-पिता, भाई-बहन और दादा-दादी के बारे में सामान्य जानकारी रखते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.बच्चों, आप सब किसके साथ घर में रहते हैं?माता, पिता और भाई-बहन के साथ।
2.माता, पिता और बच्चों से मिलकर क्या बनता है?परिवार बनता है।
3.बच्चों, क्या आपको इसके बारे में और कुछ पता है?छात्र अपने विचार रखते हैं।
4.क्या यह हमारे आस-पास के पर्यावरण का हिस्सा है?हाँ, बिल्कुल।
5.परिवार कितने प्रकार के होते हैं?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

बच्चों, आज हम पर्यावरण अध्ययन विषय के अंतर्गत ‘हमारा परिवार और रिश्ते’ नामक पाठ का विस्तार से अध्ययन करेंगे।

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
परिवार का अर्थछात्राध्यापक स्पष्ट करेंगे कि जिन लोगों के साथ हम रहते हैं, वे सब हमारा परिवार कहलाते हैं। परिवार हमारी पहली पाठशाला होती है।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे।परिवार = साथ रहने वाले सदस्य
एकल परिवार (Nuclear Family)वह परिवार जिसमें केवल माता-पिता और उनके बच्चे रहते हैं, उसे एकल परिवार कहते हैं।छात्र मुख्य बिंदुओं को अपनी कॉपी में लिखेंगे।एकल परिवार: माता-पिता + बच्चे
संयुक्त परिवार (Joint Family)वह परिवार जिसमें दादा-दादी, चाचा-चाची, माता-पिता और बच्चे एक साथ रहते हैं, उसे संयुक्त परिवार कहते हैं।छात्र चार्ट को ध्यानपूर्वक देखेंगे और समझेंगे।संयुक्त परिवार: दादा-दादी + माता-पिता + अन्य
परिवार का महत्वपरिवार में हमें प्यार, सुरक्षा और संस्कार मिलते हैं। परिवार के सदस्य एक-दूसरे की मदद करते हैं।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे।महत्व: प्यार, सुरक्षा, संस्कार

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. परिवार किसे कहते हैं?
  2. एकल और संयुक्त परिवार में क्या अंतर है?
  3. परिवार में कौन-कौन लोग रहते हैं?

10. गृहकार्य (Homework):

सभी छात्र अपने परिवार के सदस्यों के नाम और उनसे अपने रिश्ते लिखकर लाएंगे।

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D.El.Ed EVS Lesson Plan 2: पाठ योजना क्रमांक – 2

योजना प्रकार: D.El.Ed EVS Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 3
कालांश: ………………..
विषय: पर्यावरण अध्ययन (EVS)
उपविषय: पर्यावरण (Environment)
प्रकरण: हमारे मददगार (Our Helpers)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. छात्रों में सामाजिक चेतना विकसित करना।
  2. विभिन्न व्यवसायों के प्रति सम्मान की भावना जगाना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘हमारे मददगार (Our Helpers)’ पाठ में आए नवीन तथ्यों का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे। विद्यार्थी प्रकरण के महत्व को समझ सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘हमारे मददगार (Our Helpers)’ पाठ के विषय को समझकर अपने शब्दों में व्यक्त कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी पाठ से प्राप्त ज्ञान और समझ का अपने व्यावहारिक जीवन में उपयोग कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी उचित हाव-भाव के साथ पर्यावरण से संबंधित गतिविधियों को करने का कौशल प्राप्त करेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी पर्यावरण अध्ययन की अन्य रोचक पुस्तकों/कहानियों को पढ़ने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में प्रकृति, जानवरों और अपने आस-पास के परिवेश के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

चौक, डस्टर, विभिन्न मददगारों (डॉक्टर, पुलिस, किसान) के चित्र या फ़्लैश कार्ड्स।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रश्नोत्तर प्रविधि, स्पष्टीकरण विधि, और प्रदर्शन/गतिविधि आधारित विधि।

5. पूर्व ज्ञान:

छात्र अपने आस-पास के लोगों जैसे डॉक्टर, पुलिस और दुकानदार को पहचानते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.बीमार होने पर हम किसके पास जाते हैं?डॉक्टर के पास।
2.अनाज कौन उगाता है?किसान।
3.बच्चों, क्या आपको इसके बारे में और कुछ पता है?छात्र अपने विचार रखते हैं।
4.क्या यह हमारे आस-पास के पर्यावरण का हिस्सा है?हाँ, बिल्कुल।
5.डॉक्टर, किसान, डाकिया ये सब हमारे लिए क्या हैं?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

बच्चों, आज हम ‘हमारे मददगार’ (Our Helpers) के बारे में विस्तार से जानेंगे जो हमारे दैनिक जीवन में हमारी सहायता करते हैं।

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
डॉक्टर और नर्सछात्राध्यापक बताएंगे कि डॉक्टर हमारी बीमारियों का इलाज करते हैं और नर्स मरीज़ों की देखभाल करती हैं।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे।डॉक्टर: इलाज करना
किसानकिसान खेतों में दिन-रात मेहनत करके हमारे लिए अन्न, फल और सब्जियां उगाते हैं।छात्र चित्र देखेंगे।किसान: अन्नदाता
डाकिया और पुलिसडाकिया हमारे पत्र और पार्सल लाता है। पुलिस हमारी सुरक्षा करती है और अपराध रोकती है।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे।डाकिया: पत्र लाना
पुलिस: सुरक्षा
मददगारों का सम्मानहमें समाज के सभी मददगारों का सम्मान करना चाहिए क्योंकि इनके बिना हमारा जीवन बहुत कठिन हो जाएगा।छात्र अपनी कॉपी में लिखेंगे।हमें सबका सम्मान करना चाहिए।

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. बीमार होने पर आप किसके पास जाते हैं?
  2. हमारे लिए अन्न कौन उगाता है?
  3. डाकिया क्या काम करता है?

10. गृहकार्य (Homework):

अपने आस-पास दिखने वाले 5 मददगारों के नाम और उनके काम लिखकर लाओ।

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D.El.Ed EVS Lesson Plan 3: पाठ योजना क्रमांक – 3

योजना प्रकार: D.El.Ed EVS Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 3-5
कालांश: ………………..
विषय: पर्यावरण अध्ययन (EVS)
उपविषय: पर्यावरण (Environment)
प्रकरण: यातायात के साधन और सुरक्षा
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. छात्रों को यातायात के नियमों से अवगत कराना।
  2. परिवहन के विभिन्न साधनों के बारे में जानकारी देना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘यातायात के साधन और सुरक्षा’ पाठ में आए नवीन तथ्यों का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे। विद्यार्थी प्रकरण के महत्व को समझ सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘यातायात के साधन और सुरक्षा’ पाठ के विषय को समझकर अपने शब्दों में व्यक्त कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी पाठ से प्राप्त ज्ञान और समझ का अपने व्यावहारिक जीवन में उपयोग कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी उचित हाव-भाव के साथ पर्यावरण से संबंधित गतिविधियों को करने का कौशल प्राप्त करेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी पर्यावरण अध्ययन की अन्य रोचक पुस्तकों/कहानियों को पढ़ने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में प्रकृति, जानवरों और अपने आस-पास के परिवेश के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

यातायात के साधनों (ट्रेन, हवाई जहाज, नाव) का चार्ट, ट्रैफिक लाइट का मॉडल।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रश्नोत्तर प्रविधि, स्पष्टीकरण विधि, और प्रदर्शन/गतिविधि आधारित विधि।

5. पूर्व ज्ञान:

छात्र बस, साइकिल और ट्रेन आदि में बैठे हैं तथा उन्हें पहचानते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.आप स्कूल कैसे आते हैं?बस, साइकिल या पैदल।
2.लंबी दूरी तय करने के लिए हम किसमें बैठते हैं?ट्रेन या हवाई जहाज में।
3.बच्चों, क्या आपको इसके बारे में और कुछ पता है?छात्र अपने विचार रखते हैं।
4.क्या यह हमारे आस-पास के पर्यावरण का हिस्सा है?हाँ, बिल्कुल।
5.इन सभी वाहनों को क्या कहते हैं?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

बच्चों, आज हम ‘यातायात के साधन और सड़क सुरक्षा के नियम’ विषय पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
थल यातायात (Land Transport)सड़क और पटरी पर चलने वाले वाहन थल यातायात कहलाते हैं, जैसे— बस, कार, साइकिल, ट्रेन।छात्र उदाहरणों को समझेंगे।थल: बस, कार, ट्रेन
जल और वायु यातायातपानी में चलने वाले (नाव, जहाज) जल यातायात और हवा में उड़ने वाले (हवाई जहाज, हेलीकॉप्टर) वायु यातायात कहलाते हैं।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे।जल: नाव, जहाज
वायु: हवाई जहाज
सड़क सुरक्षा के नियमसड़क हमेशा बाईं ओर चलनी चाहिए। सड़क पार करते समय जेब्रा क्रॉसिंग (Zebra Crossing) का प्रयोग करना चाहिए।छात्र मुख्य नियमों को नोट करेंगे।नियम: बाईं ओर चलें, जेब्रा क्रॉसिंग
ट्रैफिक लाइट का अर्थलाल बत्ती का अर्थ है रुकना, पीली का अर्थ है तैयार होना और हरी का अर्थ है चलना।छात्र ट्रैफिक लाइट मॉडल देखेंगे।लाल: रुको, पीली: तैयार, हरी: चलो

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. यातायात के तीन मुख्य प्रकार कौन-से हैं?
  2. लाल बत्ती हमें क्या संकेत देती है?
  3. सड़क पार करने के लिए किसका प्रयोग करना चाहिए?

10. गृहकार्य (Homework):

विभिन्न यातायात के साधनों के चित्र अपनी कॉपी में चिपकाकर लाएं।

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D.El.Ed EVS Lesson Plan 4: पाठ योजना क्रमांक – 4

योजना प्रकार: D.El.Ed EVS Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 3-4
कालांश: ………………..
विषय: पर्यावरण अध्ययन (EVS)
उपविषय: पर्यावरण (Environment)
प्रकरण: हमारे घर (कच्चा/पक्का घर)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. छात्रों को आवास (Shelter) की आवश्यकता समझाना।
  2. विभिन्न प्रकार के घरों से परिचित कराना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘हमारे घर (कच्चा/पक्का घर)’ पाठ में आए नवीन तथ्यों का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे। विद्यार्थी प्रकरण के महत्व को समझ सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘हमारे घर (कच्चा/पक्का घर)’ पाठ के विषय को समझकर अपने शब्दों में व्यक्त कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी पाठ से प्राप्त ज्ञान और समझ का अपने व्यावहारिक जीवन में उपयोग कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी उचित हाव-भाव के साथ पर्यावरण से संबंधित गतिविधियों को करने का कौशल प्राप्त करेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी पर्यावरण अध्ययन की अन्य रोचक पुस्तकों/कहानियों को पढ़ने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में प्रकृति, जानवरों और अपने आस-पास के परिवेश के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

कच्चे घर, पक्के घर, इग्लू और टेंट के चित्र या फ्लैश कार्ड।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रश्नोत्तर प्रविधि, स्पष्टीकरण विधि, और प्रदर्शन/गतिविधि आधारित विधि।

5. पूर्व ज्ञान:

छात्र यह जानते हैं कि हम सभी अपने घरों में रहते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.बारिश और सर्दी से बचने के लिए हम कहाँ रहते हैं?अपने घर में।
2.गांवों में झोपड़ियां किस चीज़ की बनी होती हैं?मिट्टी और घास-फूस की।
3.बच्चों, क्या आपको इसके बारे में और कुछ पता है?छात्र अपने विचार रखते हैं।
4.क्या यह हमारे आस-पास के पर्यावरण का हिस्सा है?हाँ, बिल्कुल।
5.घर कितने प्रकार के होते हैं?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

बच्चों, आज हम पर्यावरण अध्ययन के अंतर्गत विभिन्न प्रकार के ‘घरों’ के बारे में विस्तार से पढ़ेंगे।

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
घर की आवश्यकताघर हमें सर्दी, गर्मी, बारिश और जंगली जानवरों से बचाता है। यह हमें सुरक्षा प्रदान करता है।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे।घर हमें मौसम और जानवरों से बचाता है।
कच्चा घर (Kutcha House)मिट्टी, बांस, और घास-फूस से बने घर कच्चे घर कहलाते हैं। ये ज्यादातर गांवों में पाए जाते हैं।छात्र चित्र देखेंगे।कच्चा घर: मिट्टी, घास-फूस
पक्का घर (Pucca House)ईंट, सीमेंट, लोहे और पत्थर से बने घर पक्के घर कहलाते हैं। ये बहुत मजबूत होते हैं (जैसे शहर के मकान)।छात्र अपनी कॉपी में लिखेंगे।पक्का घर: ईंट, सीमेंट, लोहा
विशेष घर (इग्लू और टेंट)बर्फ से बने घर को इग्लू कहते हैं। कैंपिंग के दौरान लोग कपड़े या प्लास्टिक से बने टेंट में रहते हैं।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे।इग्लू: बर्फ का घर
टेंट: कपड़े का घर

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. कच्चा घर किन चीज़ों से बनता है?
  2. बर्फ से बने घर को क्या कहते हैं?
  3. हमें घर की आवश्यकता क्यों होती है?

10. गृहकार्य (Homework):

अपने सपनों के घर का चित्र बनाकर उसमें रंग भरें।

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D.El.Ed EVS Lesson Plan 5: पाठ योजना क्रमांक – 5

योजना प्रकार: D.El.Ed EVS Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 3
कालांश: ………………..
विषय: पर्यावरण अध्ययन (EVS)
उपविषय: पर्यावरण (Environment)
प्रकरण: हमारे त्योहार और उत्सव
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. छात्रों में सांस्कृतिक चेतना और भाईचारे की भावना विकसित करना।
  2. भारत के विविध त्योहारों से परिचित कराना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘हमारे त्योहार और उत्सव’ पाठ में आए नवीन तथ्यों का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे। विद्यार्थी प्रकरण के महत्व को समझ सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘हमारे त्योहार और उत्सव’ पाठ के विषय को समझकर अपने शब्दों में व्यक्त कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी पाठ से प्राप्त ज्ञान और समझ का अपने व्यावहारिक जीवन में उपयोग कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी उचित हाव-भाव के साथ पर्यावरण से संबंधित गतिविधियों को करने का कौशल प्राप्त करेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी पर्यावरण अध्ययन की अन्य रोचक पुस्तकों/कहानियों को पढ़ने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में प्रकृति, जानवरों और अपने आस-पास के परिवेश के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

विभिन्न त्योहारों को दर्शाते हुए चित्र (जैसे दीवाली, होली, ईद, क्रिसमस)।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रश्नोत्तर प्रविधि, स्पष्टीकरण विधि, और प्रदर्शन/गतिविधि आधारित विधि।

5. पूर्व ज्ञान:

छात्र दीवाली, होली जैसे त्योहारों के बारे में सामान्य जानकारी रखते हैं और उन्हें मनाते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.हम रंग किस दिन खेलते हैं?होली के दिन।
2.हम पटाखे किस दिन जलाते हैं?दीवाली के दिन।
3.बच्चों, क्या आपको इसके बारे में और कुछ पता है?छात्र अपने विचार रखते हैं।
4.क्या यह हमारे आस-पास के पर्यावरण का हिस्सा है?हाँ, बिल्कुल।
5.दीवाली, होली, ईद आदि को क्या कहा जाता है?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

बच्चों, आज हम भारत में मनाये जाने वाले विभिन्न ‘त्योहारों और उत्सवों’ के बारे में पढ़ेंगे।

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
त्योहारों का महत्वत्योहार खुशियों का अवसर होते हैं। ये लोगों को एक-दूसरे के करीब लाते हैं और प्रेम बढ़ाते हैं।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे।त्योहार प्रेम और खुशी लाते हैं।
धार्मिक त्योहारदीवाली, होली, दशहरा, ईद, गुरुपर्व और क्रिसमस धार्मिक त्योहार हैं, जिन्हें विभिन्न धर्मों के लोग मनाते हैं।छात्र चार्ट पर त्योहारों के चित्र देखेंगे।धार्मिक: होली, दीवाली, ईद, क्रिसमस
राष्ट्रीय त्योहारस्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त), गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) और गांधी जयंती (2 अक्टूबर) राष्ट्रीय त्योहार हैं।छात्र महत्वपूर्ण तिथियों को नोट करेंगे।राष्ट्रीय: 15 अगस्त, 26 जनवरी, 2 अक्टूबर
कैसे मनाते हैं?त्योहारों पर लोग नए कपड़े पहनते हैं, मिठाइयां बांटते हैं और एक-दूसरे को बधाइयां देते हैं।छात्र अपने अनुभव साझा करेंगे।हम मिठाइयां बांटते हैं।

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. किन्हीं दो राष्ट्रीय त्योहारों के नाम बताइए?
  2. रंगों का त्योहार किसे कहा जाता है?
  3. क्रिसमस कब मनाया जाता है?

10. गृहकार्य (Homework):

अपने सबसे पसंदीदा त्योहार पर 5 पंक्तियाँ लिखकर लाएं।

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D.El.Ed EVS Lesson Plan 6: पाठ योजना क्रमांक – 6

योजना प्रकार: D.El.Ed EVS Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 3-4
कालांश: ………………..
विषय: पर्यावरण अध्ययन (EVS)
उपविषय: पर्यावरण (Environment)
प्रकरण: कपड़ों की कहानी
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. छात्रों को वस्त्रों की आवश्यकता से अवगत कराना।
  2. विभिन्न मौसमों के अनुसार कपड़ों के प्रकार समझाना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘कपड़ों की कहानी’ पाठ में आए नवीन तथ्यों का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे। विद्यार्थी प्रकरण के महत्व को समझ सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘कपड़ों की कहानी’ पाठ के विषय को समझकर अपने शब्दों में व्यक्त कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी पाठ से प्राप्त ज्ञान और समझ का अपने व्यावहारिक जीवन में उपयोग कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी उचित हाव-भाव के साथ पर्यावरण से संबंधित गतिविधियों को करने का कौशल प्राप्त करेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी पर्यावरण अध्ययन की अन्य रोचक पुस्तकों/कहानियों को पढ़ने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में प्रकृति, जानवरों और अपने आस-पास के परिवेश के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

सूती, ऊनी और रेशमी कपड़ों के छोटे टुकड़े, कपास के पौधे का चित्र।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रश्नोत्तर प्रविधि, स्पष्टीकरण विधि, और प्रदर्शन/गतिविधि आधारित विधि।

5. पूर्व ज्ञान:

छात्र अलग-अलग मौसमों में अलग-अलग प्रकार के कपड़े पहनते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.गर्मियों में हमें कैसा लगता है?बहुत गर्मी लगती है।
2.सर्दियों में हम कैसे कपड़े पहनते हैं?गर्म और मोटे कपड़े (स्वेटर)।
3.बच्चों, क्या आपको इसके बारे में और कुछ पता है?छात्र अपने विचार रखते हैं।
4.क्या यह हमारे आस-पास के पर्यावरण का हिस्सा है?हाँ, बिल्कुल।
5.विभिन्न मौसमों में कपड़ों का चुनाव कैसे करते हैं?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

बच्चों, आज हम ‘कपड़ों की कहानी’ और ऋतुओं के अनुसार कपड़ों के प्रकार के बारे में पढ़ेंगे।

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
कपड़ों की आवश्यकताकपड़े हमें सर्दी, गर्मी, बारिश और कीड़े-मकोड़ों से बचाते हैं। ये हमारे शरीर को ढकते हैं।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे।कपड़े हमें मौसम से बचाते हैं।
गर्मियों के कपड़ेगर्मियों में हम सूती (Cotton) कपड़े पहनते हैं क्योंकि वे पसीना सोखते हैं और हमें ठंडा रखते हैं। कपास पौधों से मिलती है।छात्र सूती कपड़े को छूकर देखेंगे।गर्मी: सूती कपड़े (कपास से)
सर्दियों के कपड़ेसर्दियों में हम ऊनी (Woolen) कपड़े पहनते हैं जो हमें गर्म रखते हैं। ऊन हमें भेड़ से प्राप्त होती है।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे।सर्दी: ऊनी कपड़े (भेड़ से)
बारिश के कपड़ेबारिश से बचने के लिए हम रेनकोट और छाते का उपयोग करते हैं जो वाटरप्रूफ (Waterproof) सामग्री से बने होते हैं।छात्र अपनी कॉपी में लिखेंगे।बारिश: रेनकोट, छाता

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. सर्दियों में हम किस प्रकार के कपड़े पहनते हैं?
  2. सूती कपड़े हमें किससे प्राप्त होते हैं?
  3. बारिश में हम किसका उपयोग करते हैं?

10. गृहकार्य (Homework):

अपने घर में मौजूद 5 अलग-अलग प्रकार के कपड़ों के नाम लिखकर लाएं।

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D.El.Ed EVS Lesson Plan 7: पाठ योजना क्रमांक – 7

योजना प्रकार: D.El.Ed EVS Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 4-5
कालांश: ………………..
विषय: पर्यावरण अध्ययन (EVS)
उपविषय: पर्यावरण (Environment)
प्रकरण: कचरा प्रबंधन
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. छात्रों में पर्यावरण स्वच्छता के प्रति जागरूकता पैदा करना।
  2. कचरा निस्तारण का सही तरीका सिखाना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘कचरा प्रबंधन’ पाठ में आए नवीन तथ्यों का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे। विद्यार्थी प्रकरण के महत्व को समझ सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘कचरा प्रबंधन’ पाठ के विषय को समझकर अपने शब्दों में व्यक्त कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी पाठ से प्राप्त ज्ञान और समझ का अपने व्यावहारिक जीवन में उपयोग कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी उचित हाव-भाव के साथ पर्यावरण से संबंधित गतिविधियों को करने का कौशल प्राप्त करेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी पर्यावरण अध्ययन की अन्य रोचक पुस्तकों/कहानियों को पढ़ने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में प्रकृति, जानवरों और अपने आस-पास के परिवेश के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

हरा और नीला डस्टबिन (या चित्र), गीले और सूखे कचरे के उदाहरण।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रश्नोत्तर प्रविधि, स्पष्टीकरण विधि, और प्रदर्शन/गतिविधि आधारित विधि।

5. पूर्व ज्ञान:

छात्र जानते हैं कि घर का कूड़ा डस्टबिन में डाला जाता है।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.घर की सफाई करने के बाद हम कूड़ा कहाँ डालते हैं?कूड़ेदान (Dustbin) में।
2.अगर हम कूड़ा सड़क पर फेंकेंगे तो क्या होगा?गंदगी फैलेगी और बीमारियां होंगी।
3.बच्चों, क्या आपको इसके बारे में और कुछ पता है?छात्र अपने विचार रखते हैं।
4.क्या यह हमारे आस-पास के पर्यावरण का हिस्सा है?हाँ, बिल्कुल।
5.कूड़े (कचरे) का सही प्रबंधन कैसे करना चाहिए?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

बच्चों, आज हम पर्यावरण को साफ रखने के लिए ‘कचरा प्रबंधन’ (Waste Management) के बारे में जानेंगे।

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
कचरे के प्रकारकचरा मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है: गीला कचरा (जैव-निम्नीकरणीय) और सूखा कचरा।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे।कचरा: गीला और सूखा
गीला कचरा (Wet Waste)सब्जियों के छिलके, बचा हुआ खाना, और पत्ते गीला कचरा कहलाते हैं। इन्हें हरे डस्टबिन में डाला जाता है, जिससे खाद (Compost) बनती है।छात्र हरे डस्टबिन का चित्र देखेंगे।गीला कचरा = हरा डस्टबिन (खाद)
सूखा कचरा (Dry Waste)कागज, प्लास्टिक, कांच और धातु सूखा कचरा है। इन्हें नीले डस्टबिन में डाला जाता है।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे।सूखा कचरा = नीला डस्टबिन
रिड्यूस, रीयूज, रीसाइकिल (3 R’s)हमें कचरा कम करना चाहिए, पुरानी चीज़ों का फिर से उपयोग करना चाहिए, और प्लास्टिक/कागज को रीसाइकिल करना चाहिए।छात्र 3 R’s का अर्थ अपनी कॉपी में लिखेंगे।3 R’s: Reduce, Reuse, Recycle

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. गीला कचरा किस रंग के कूड़ेदान में डालते हैं?
  2. सूखे कचरे के दो उदाहरण दीजिए।
  3. गीले कचरे से क्या बनाया जा सकता है?

10. गृहकार्य (Homework):

अपने घर में गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग करने का प्रयास करें।

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D.El.Ed EVS Lesson Plan 8: पाठ योजना क्रमांक – 8

योजना प्रकार: D.El.Ed EVS Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 3-4
कालांश: ………………..
विषय: पर्यावरण अध्ययन (EVS)
उपविषय: पर्यावरण (Environment)
प्रकरण: दिशाओं का ज्ञान और मानचित्र
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. छात्रों में भौगोलिक ज्ञान और दिशा ज्ञान विकसित करना।
  2. मानचित्र पढ़ने की प्रारंभिक समझ विकसित करना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘दिशाओं का ज्ञान और मानचित्र’ पाठ में आए नवीन तथ्यों का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे। विद्यार्थी प्रकरण के महत्व को समझ सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘दिशाओं का ज्ञान और मानचित्र’ पाठ के विषय को समझकर अपने शब्दों में व्यक्त कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी पाठ से प्राप्त ज्ञान और समझ का अपने व्यावहारिक जीवन में उपयोग कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी उचित हाव-भाव के साथ पर्यावरण से संबंधित गतिविधियों को करने का कौशल प्राप्त करेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी पर्यावरण अध्ययन की अन्य रोचक पुस्तकों/कहानियों को पढ़ने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में प्रकृति, जानवरों और अपने आस-पास के परिवेश के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

चौक, डस्टर, कंपास (Compass) का मॉडल, भारत का मानचित्र।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रश्नोत्तर प्रविधि, स्पष्टीकरण विधि, और प्रदर्शन/गतिविधि आधारित विधि।

5. पूर्व ज्ञान:

छात्र सूर्य के उगने और डूबने के बारे में जानते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.सुबह के समय सूरज किस तरफ से उगता है?पूरब (East) से।
2.शाम को सूरज कहाँ छिपता है?पश्चिम (West) में।
3.बच्चों, क्या आपको इसके बारे में और कुछ पता है?छात्र अपने विचार रखते हैं।
4.क्या यह हमारे आस-पास के पर्यावरण का हिस्सा है?हाँ, बिल्कुल।
5.कुल कितनी मुख्य दिशाएं होती हैं?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

बच्चों, आज हम मुख्य ‘दिशाओं और मानचित्र (Maps)’ के बारे में विस्तार से जानेंगे।

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
मुख्य दिशाएंमुख्य रूप से चार दिशाएं होती हैं: पूरब (East), पश्चिम (West), उत्तर (North), और दक्षिण (South)।छात्र दिशाओं के नाम दोहराएंगे।4 दिशाएं: पूरब, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण
दिशा कैसे पहचानें?सूरज पूरब में उगता है। यदि हम उगते सूरज की ओर मुंह करके खड़े हों, तो हमारे सामने पूरब, पीठ पीछे पश्चिम, बाएँ हाथ की ओर उत्तर और दाएँ हाथ की ओर दक्षिण होता है।छात्र खड़े होकर प्रैक्टिकल करेंगे।मुंह = पूरब, पीठ = पश्चिम
मानचित्र (Map)मानचित्र कागज पर बना हुआ किसी जगह का चित्र होता है, जो हमें उस जगह का रास्ता और दिशा बताता है।छात्र मानचित्र को ध्यान से देखेंगे।मानचित्र: कागज पर जगह का चित्र
मानचित्र में दिशाएंकिसी भी मानचित्र में ऊपर की ओर हमेशा उत्तर (North) दिशा और नीचे की ओर दक्षिण (South) दिशा होती है।छात्र अपनी कॉपी में लिखेंगे।मानचित्र में ऊपर = उत्तर

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. कुल कितनी मुख्य दिशाएं होती हैं?
  2. सूरज किस दिशा में छिपता है?
  3. मानचित्र में ऊपर की तरफ कौन-सी दिशा होती है?

10. गृहकार्य (Homework):

कागज पर चारों दिशाओं का चित्र बनाकर लाएं।

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D.El.Ed EVS Lesson Plan 9: पाठ योजना क्रमांक – 9

योजना प्रकार: D.El.Ed EVS Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 3
कालांश: ………………..
विषय: पर्यावरण अध्ययन (EVS)
उपविषय: पर्यावरण (Environment)
प्रकरण: सड़क संकेत और ट्रैफिक लाइट
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. छात्रों को सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक करना।
  2. यातायात नियमों के पालन की आदत डालना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘सड़क संकेत और ट्रैफिक लाइट’ पाठ में आए नवीन तथ्यों का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे। विद्यार्थी प्रकरण के महत्व को समझ सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘सड़क संकेत और ट्रैफिक लाइट’ पाठ के विषय को समझकर अपने शब्दों में व्यक्त कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी पाठ से प्राप्त ज्ञान और समझ का अपने व्यावहारिक जीवन में उपयोग कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी उचित हाव-भाव के साथ पर्यावरण से संबंधित गतिविधियों को करने का कौशल प्राप्त करेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी पर्यावरण अध्ययन की अन्य रोचक पुस्तकों/कहानियों को पढ़ने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में प्रकृति, जानवरों और अपने आस-पास के परिवेश के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

ट्रैफिक लाइट का मॉडल, विभिन्न सड़क संकेतों (U-turn, No Parking) के चित्र।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रश्नोत्तर प्रविधि, स्पष्टीकरण विधि, और प्रदर्शन/गतिविधि आधारित विधि।

5. पूर्व ज्ञान:

छात्रों ने सड़क पर लाल-पीली बत्तियां और गाड़ियां देखी हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.सड़क पर बहुत सारी गाड़ियां हों तो उन्हें कौन कंट्रोल करता है?ट्रैफिक पुलिस या ट्रैफिक लाइट।
2.ट्रैफिक लाइट में कितने रंग होते हैं?तीन रंग।
3.बच्चों, क्या आपको इसके बारे में और कुछ पता है?छात्र अपने विचार रखते हैं।
4.क्या यह हमारे आस-पास के पर्यावरण का हिस्सा है?हाँ, बिल्कुल।
5.इन रंगों का क्या अर्थ होता है?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

बच्चों, आज हम सड़क पर सुरक्षित चलने के लिए ‘सड़क संकेत और ट्रैफिक लाइट’ के बारे में जानेंगे।

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
ट्रैफिक लाइट (Traffic Light)सड़क चौराहों पर दुर्घटना से बचने के लिए ट्रैफिक लाइट लगाई जाती है। इसमें लाल, पीला और हरा रंग होता है।छात्र मॉडल को देखेंगे।ट्रैफिक लाइट: लाल, पीली, हरी
रंगों का अर्थलाल बत्ती = रुको (Stop), पीली बत्ती = चलने के लिए तैयार हो जाओ (Ready), हरी बत्ती = चलो (Go)।छात्र अपनी कॉपी में रंगों का अर्थ लिखेंगे।लाल=रुको, पीली=तैयार, हरी=चलो
जेब्रा क्रॉसिंग (Zebra Crossing)सड़क पर बनी सफेद और काली पट्टियों को जेब्रा क्रॉसिंग कहते हैं। पैदल चलने वालों को हमेशा यहीं से सड़क पार करनी चाहिए।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे।पैदल सड़क पार = जेब्रा क्रॉसिंग
अन्य सड़क संकेतसड़क के किनारे बोर्ड लगे होते हैं जैसे- हॉर्न न बजाएं, U-टर्न मना है (No U-Turn)। हमें इनका पालन करना चाहिए।छात्र सड़क संकेतों के चित्र देखेंगे।संकेतों का पालन करें।

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. लाल बत्ती का क्या अर्थ है?
  2. पैदल यात्रियों को सड़क कहाँ से पार करनी चाहिए?
  3. हरी बत्ती जलने पर हमें क्या करना चाहिए?

10. गृहकार्य (Homework):

ट्रैफिक लाइट का सुंदर चित्र बनाकर उसमें सही रंग भरें।

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D.El.Ed EVS Lesson Plan 10: पाठ योजना क्रमांक – 10

योजना प्रकार: D.El.Ed EVS Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 3-5
कालांश: ………………..
विषय: पर्यावरण अध्ययन (EVS)
उपविषय: पर्यावरण (Environment)
प्रकरण: हमारे राष्ट्रीय प्रतीक
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. छात्रों में देशभक्ति और राष्ट्रीय गौरव की भावना जाग्रत करना।
  2. भारत के राष्ट्रीय प्रतीकों का ज्ञान देना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘हमारे राष्ट्रीय प्रतीक’ पाठ में आए नवीन तथ्यों का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे। विद्यार्थी प्रकरण के महत्व को समझ सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘हमारे राष्ट्रीय प्रतीक’ पाठ के विषय को समझकर अपने शब्दों में व्यक्त कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी पाठ से प्राप्त ज्ञान और समझ का अपने व्यावहारिक जीवन में उपयोग कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी उचित हाव-भाव के साथ पर्यावरण से संबंधित गतिविधियों को करने का कौशल प्राप्त करेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी पर्यावरण अध्ययन की अन्य रोचक पुस्तकों/कहानियों को पढ़ने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में प्रकृति, जानवरों और अपने आस-पास के परिवेश के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

राष्ट्रीय ध्वज, मोर, बाघ, कमल और अशोक चक्र के चित्र।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रश्नोत्तर प्रविधि, स्पष्टीकरण विधि, और प्रदर्शन/गतिविधि आधारित विधि।

5. पूर्व ज्ञान:

छात्र 15 अगस्त और 26 जनवरी पर झंडा फहराते हुए देखते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.हम 15 अगस्त को क्या फहराते हैं?झंडा फहराते हैं।
2.हमारे देश के झंडे का क्या नाम है?तिरंगा।
3.बच्चों, क्या आपको इसके बारे में और कुछ पता है?छात्र अपने विचार रखते हैं।
4.क्या यह हमारे आस-पास के पर्यावरण का हिस्सा है?हाँ, बिल्कुल।
5.हमारे देश का राष्ट्रीय पक्षी और पशु कौन-सा है?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

बच्चों, आज हम अपने देश भारत के ‘राष्ट्रीय प्रतीकों’ (National Symbols) के बारे में विस्तार से जानेंगे।

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
राष्ट्रीय ध्वज (National Flag)हमारे राष्ट्रीय ध्वज का नाम ‘तिरंगा’ है। इसमें तीन रंग होते हैं: केसरिया (सबसे ऊपर), सफेद (बीच में) और हरा (सबसे नीचे)।छात्र तिरंगे का चित्र देखेंगे।ध्वज: तिरंगा (केसरिया, सफेद, हरा)
अशोक चक्रसफेद पट्टी के बीच में नीले रंग का एक चक्र होता है, जिसे अशोक चक्र कहते हैं। इसमें 24 तीलियां (Spokes) होती हैं।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे।अशोक चक्र = 24 तीलियां (नीला रंग)
राष्ट्रीय पशु और पक्षीहमारा राष्ट्रीय पशु ‘बाघ’ (Tiger) है जो बहादुरी का प्रतीक है। हमारा राष्ट्रीय पक्षी ‘मोर’ (Peacock) है।छात्र बाघ और मोर का चित्र देखेंगे।राष्ट्रीय पशु: बाघ, राष्ट्रीय पक्षी: मोर
राष्ट्रीय फूल और गानहमारा राष्ट्रीय फूल ‘कमल’ (Lotus) है। हमारा राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ है, जिसे रवींद्रनाथ टैगोर ने लिखा था।छात्र अपनी कॉपी में लिखेंगे।राष्ट्रीय फूल: कमल, राष्ट्रगान: जन गण मन

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. हमारे राष्ट्रीय ध्वज में कितने रंग होते हैं?
  2. अशोक चक्र में कितनी तीलियां होती हैं?
  3. भारत का राष्ट्रीय फूल कौन-सा है?

10. गृहकार्य (Homework):

तिरंगे झंडे का चित्र बनाकर उसमें सही रंग भरें।

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D.El.Ed EVS Lesson Plan 11: पाठ योजना क्रमांक – 11

योजना प्रकार: D.El.Ed EVS Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 3-4
कालांश: ………………..
विषय: पर्यावरण अध्ययन (EVS)
उपविषय: पर्यावरण (Environment)
प्रकरण: हमारे आस-पास के पेड़-पौधे
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. छात्रों में प्रकृति और वनस्पतियों के प्रति प्रेम जाग्रत करना।
  2. पेड़-पौधों के महत्व को समझाना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘हमारे आस-पास के पेड़-पौधे’ पाठ में आए नवीन तथ्यों का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे। विद्यार्थी प्रकरण के महत्व को समझ सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘हमारे आस-पास के पेड़-पौधे’ पाठ के विषय को समझकर अपने शब्दों में व्यक्त कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी पाठ से प्राप्त ज्ञान और समझ का अपने व्यावहारिक जीवन में उपयोग कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी उचित हाव-भाव के साथ पर्यावरण से संबंधित गतिविधियों को करने का कौशल प्राप्त करेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी पर्यावरण अध्ययन की अन्य रोचक पुस्तकों/कहानियों को पढ़ने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में प्रकृति, जानवरों और अपने आस-पास के परिवेश के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

एक छोटा गमला (जिसमें पौधा हो), पौधे के विभिन्न भागों को दर्शाता हुआ रंगीन चार्ट।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रश्नोत्तर प्रविधि, स्पष्टीकरण विधि, और प्रदर्शन/गतिविधि आधारित विधि।

5. पूर्व ज्ञान:

छात्रों ने अपने आस-पास पेड़-पौधे और फूल-पत्तियां देखी हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.हमें शुद्ध हवा कहाँ से मिलती है?पेड़-पौधों से।
2.पेड़ पर हरे रंग का क्या लगा होता है?पत्तियां।
3.बच्चों, क्या आपको इसके बारे में और कुछ पता है?छात्र अपने विचार रखते हैं।
4.क्या यह हमारे आस-पास के पर्यावरण का हिस्सा है?हाँ, बिल्कुल।
5.पौधे के और कौन-कौन से भाग होते हैं?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

बच्चों, आज हम पर्यावरण अध्ययन के अंतर्गत ‘पौधे के विभिन्न भागों’ (Parts of a Plant) के बारे में विस्तार से जानेंगे।

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
पौधे के भागछात्राध्यापक बताएंगे कि पौधे के मुख्य 5 भाग होते हैं: जड़, तना, पत्ती, फूल और फल।छात्र पौधे के भागों को दोहराएंगे।भाग: जड़, तना, पत्ती, फूल, फल
जड़ और तना (Root and Stem)जड़ मिट्टी के नीचे होती है जो पौधे को पानी देती है। तना पौधे को सीधा खड़ा रखता है और जड़ों से पानी पत्तियों तक पहुंचाता है।छात्र चित्र में जड़ और तना देखेंगे।जड़: पानी चूसना
तना: सहारा देना
पत्ती (Leaf)पत्तियां हरे रंग की होती हैं। ये पौधे के लिए भोजन बनाती हैं, इसलिए इन्हें पौधे का ‘रसोईघर’ (Kitchen) कहा जाता है।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे।पत्ती: पौधे का रसोईघर (भोजन बनाना)
फूल और फल (Flower and Fruit)फूल पौधे का सबसे सुंदर भाग है, जो बाद में फल बन जाता है। फलों के अंदर बीज होते हैं जिनसे नया पौधा बनता है।छात्र अपनी कॉपी में लिखेंगे।फूल से फल बनता है।

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. पौधे के किन्हीं तीन भागों के नाम बताइए।
  2. पौधे का रसोईघर किसे कहा जाता है?
  3. पौधे को सीधा खड़ा रखने में कौन मदद करता है?

10. गृहकार्य (Homework):

एक पौधे का सुंदर चित्र बनाकर उसके सभी भागों के नाम लिखकर लाएं।

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D.El.Ed EVS Lesson Plan 12: पाठ योजना क्रमांक – 12

योजना प्रकार: D.El.Ed EVS Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 4
कालांश: ………………..
विषय: पर्यावरण अध्ययन (EVS)
उपविषय: पर्यावरण (Environment)
प्रकरण: जड़ी-बूटियाँ, झाड़ियाँ और वृक्ष
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. छात्रों को वनस्पतियों की विविधता से अवगत कराना।
  2. पौधों के वर्गीकरण की समझ विकसित करना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘जड़ी-बूटियाँ, झाड़ियाँ और वृक्ष’ पाठ में आए नवीन तथ्यों का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे। विद्यार्थी प्रकरण के महत्व को समझ सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘जड़ी-बूटियाँ, झाड़ियाँ और वृक्ष’ पाठ के विषय को समझकर अपने शब्दों में व्यक्त कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी पाठ से प्राप्त ज्ञान और समझ का अपने व्यावहारिक जीवन में उपयोग कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी उचित हाव-भाव के साथ पर्यावरण से संबंधित गतिविधियों को करने का कौशल प्राप्त करेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी पर्यावरण अध्ययन की अन्य रोचक पुस्तकों/कहानियों को पढ़ने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में प्रकृति, जानवरों और अपने आस-पास के परिवेश के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

तुलसी का पौधा, गुलाब की टहनी, और किसी बड़े पेड़ (आम/पीपल) का चित्र।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रश्नोत्तर प्रविधि, स्पष्टीकरण विधि, और प्रदर्शन/गतिविधि आधारित विधि।

5. पूर्व ज्ञान:

छात्रों ने छोटे और बड़े दोनों तरह के पेड़-पौधे देखे हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.क्या सभी पेड़-पौधे एक ही आकार के होते हैं?नहीं, कुछ छोटे और कुछ बहुत बड़े होते हैं।
2.आम का पौधा कैसा होता है?बहुत बड़ा पेड़ होता है।
3.बच्चों, क्या आपको इसके बारे में और कुछ पता है?छात्र अपने विचार रखते हैं।
4.क्या यह हमारे आस-पास के पर्यावरण का हिस्सा है?हाँ, बिल्कुल।
5.तुलसी या गुलाब के पौधे को क्या कहते हैं?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

बच्चों, आज हम आकार और तने की मोटाई के आधार पर पौधों के प्रकार— ‘जड़ी-बूटियाँ, झाड़ियाँ और वृक्ष’ के बारे में जानेंगे।

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
जड़ी-बूटियाँ (Herbs)ये बहुत छोटे पौधे होते हैं। इनका तना बहुत कोमल और हरा होता है। उदाहरण: धनिया, पुदीना, तुलसी, पालक।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे और उदाहरण लिखेंगे।Herbs (शाक): छोटा और हरा तना (तुलसी)
झाड़ियाँ (Shrubs)ये मध्यम आकार के पौधे होते हैं। इनका तना लकड़ी का और कठोर होता है। इनमें ज़मीन के पास से कई शाखाएं निकलती हैं। उदाहरण: गुलाब, गुड़हल, नींबू।छात्र गुलाब की टहनी को देखेंगे।Shrubs (झाड़ी): लकड़ी का तना, मध्यम आकार (गुलाब)
वृक्ष (Trees)ये बहुत बड़े और ऊंचे होते हैं। इनका तना बहुत मोटा, मजबूत और भूरे रंग का होता है, जिसे ‘ट्रंक’ कहते हैं। उदाहरण: आम, नीम, पीपल, बरगद।छात्र चित्र देखेंगे और समझेंगे।Trees (वृक्ष): बहुत बड़े, मोटा तना (आम)
लताएं (Climbers)कुछ पौधों का तना इतना कमज़ोर होता है कि वे सीधे खड़े नहीं हो सकते, उन्हें सहारे की ज़रूरत होती है। जैसे- मनी प्लांट, अंगूर की बेल।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे।लताएं: सहारे से चढ़ने वाले पौधे

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. जड़ी-बूटी और झाड़ी में क्या अंतर है?
  2. किन्हीं दो वृक्षों के नाम बताइए।
  3. गुलाब किस प्रकार का पौधा है?

10. गृहकार्य (Homework):

अपने घर के आस-पास दिखने वाले 5 पौधों के नाम लिखकर उन्हें जड़ी-बूटी, झाड़ी या वृक्ष में वर्गीकृत करें।

Part of our 180+ free D.El.Ed / BSTC EVS Lesson Plans collection.

D.El.Ed EVS Lesson Plan 13: पाठ योजना क्रमांक – 13

योजना प्रकार: D.El.Ed EVS Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 3-4
कालांश: ………………..
विषय: पर्यावरण अध्ययन (EVS)
उपविषय: पर्यावरण (Environment)
प्रकरण: पशु-पक्षियों के आवास और घोंसले
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. छात्रों में जीव-जंतुओं के प्रति दयाभाव और प्रेम विकसित करना।
  2. जंतुओं के रहन-सहन की जानकारी देना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘पशु-पक्षियों के आवास और घोंसले’ पाठ में आए नवीन तथ्यों का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे। विद्यार्थी प्रकरण के महत्व को समझ सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘पशु-पक्षियों के आवास और घोंसले’ पाठ के विषय को समझकर अपने शब्दों में व्यक्त कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी पाठ से प्राप्त ज्ञान और समझ का अपने व्यावहारिक जीवन में उपयोग कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी उचित हाव-भाव के साथ पर्यावरण से संबंधित गतिविधियों को करने का कौशल प्राप्त करेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी पर्यावरण अध्ययन की अन्य रोचक पुस्तकों/कहानियों को पढ़ने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में प्रकृति, जानवरों और अपने आस-पास के परिवेश के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

विभिन्न पक्षियों के घोंसलों और जानवरों के घरों (गुफा, अस्तबल, बिल) के चित्र।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रश्नोत्तर प्रविधि, स्पष्टीकरण विधि, और प्रदर्शन/गतिविधि आधारित विधि।

5. पूर्व ज्ञान:

छात्र जानते हैं कि मनुष्य घर में रहता है और कुत्ता डॉग-हाउस में रहता है।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.हम लोग सर्दी, गर्मी और बारिश से बचने के लिए कहाँ रहते हैं?अपने घर में।
2.शेर जंगल में कहाँ रहता है?गुफा (Den) में।
3.बच्चों, क्या आपको इसके बारे में और कुछ पता है?छात्र अपने विचार रखते हैं।
4.क्या यह हमारे आस-पास के पर्यावरण का हिस्सा है?हाँ, बिल्कुल।
5.पक्षी अंडे देने के लिए क्या बनाते हैं?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

बच्चों, आज हम विभिन्न ‘पशु-पक्षियों के आवासों’ (Homes of Animals) और पक्षियों के घोंसलों के बारे में पढ़ेंगे।

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
पशुओं के आवासहर जानवर का एक अलग घर होता है। जैसे— शेर गुफा (Den) में, खरगोश और चूहा बिल (Burrow) में, भालू मांद में रहता है।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे।शेर = गुफा, खरगोश = बिल
पालतू जानवरों के घरहम पालतू जानवरों के लिए घर बनाते हैं। गाय-भैंस छप्पर (Shed) में, घोड़ा अस्तबल (Stable) में, और कुत्ता केनेल (Kennel) में रहता है।छात्र अपनी कॉपी में लिखेंगे।गाय = छप्पर, घोड़ा = अस्तबल
पक्षियों के घोंसले (Nests)पक्षी अंडे देने और अपने बच्चों की सुरक्षा के लिए पेड़ों पर घोंसला बनाते हैं। वे इसके लिए तिनके, रुई, बाल, और पत्तियों का प्रयोग करते हैं।छात्र चित्र में विभिन्न घोंसले देखेंगे।पक्षी अंडे देने के लिए घोंसला बनाते हैं।
विशेष पक्षियों के घोंसलेबया (Weaver Bird) बहुत सुंदर लालटेन जैसा घोंसला बुनती है। दर्जिन चिड़िया (Tailor Bird) पत्तियों को सील कर अपना घोंसला बनाती है।छात्र आश्चर्यचकित होकर सुनेंगे।बया = लालटेन जैसा घोंसला
दर्जिन चिड़िया = पत्ती सील कर

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. घोड़ा कहाँ रहता है?
  2. दर्जिन चिड़िया अपना घोंसला कैसे बनाती है?
  3. शेर के घर को क्या कहते हैं?

10. गृहकार्य (Homework):

किन्हीं 5 जानवरों और उनके घरों के नाम लिखकर लाएं।

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D.El.Ed EVS Lesson Plan 14: पाठ योजना क्रमांक – 14

योजना प्रकार: D.El.Ed EVS Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 3-4
कालांश: ………………..
विषय: पर्यावरण अध्ययन (EVS)
उपविषय: पर्यावरण (Environment)
प्रकरण: सजीव और निर्जीव वस्तुएं (Living & Non-living)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. छात्रों को प्रकृति में उपस्थित वस्तुओं का अवलोकन करना सिखाना।
  2. वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास करना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘सजीव और निर्जीव वस्तुएं (Living & Non-living)’ पाठ में आए नवीन तथ्यों का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे। विद्यार्थी प्रकरण के महत्व को समझ सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘सजीव और निर्जीव वस्तुएं (Living & Non-living)’ पाठ के विषय को समझकर अपने शब्दों में व्यक्त कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी पाठ से प्राप्त ज्ञान और समझ का अपने व्यावहारिक जीवन में उपयोग कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी उचित हाव-भाव के साथ पर्यावरण से संबंधित गतिविधियों को करने का कौशल प्राप्त करेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी पर्यावरण अध्ययन की अन्य रोचक पुस्तकों/कहानियों को पढ़ने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में प्रकृति, जानवरों और अपने आस-पास के परिवेश के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

एक जीवित पौधा, एक पत्थर, खिलौना और चार्ट पेपर।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रश्नोत्तर प्रविधि, स्पष्टीकरण विधि, और प्रदर्शन/गतिविधि आधारित विधि।

5. पूर्व ज्ञान:

छात्र मनुष्य, कुत्ते, कुर्सी और मेज़ को पहचानते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.क्या कुर्सी या मेज़ अपने आप चलकर दूसरी जगह जा सकते हैं?नहीं।
2.क्या कुत्ता या बिल्ली अपने आप चल सकते हैं?हाँ।
3.बच्चों, क्या आपको इसके बारे में और कुछ पता है?छात्र अपने विचार रखते हैं।
4.क्या यह हमारे आस-पास के पर्यावरण का हिस्सा है?हाँ, बिल्कुल।
5.कुर्सी और कुत्ते में क्या मुख्य अंतर है?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

बच्चों, आज हम अपने आस-पास पाई जाने वाली ‘सजीव और निर्जीव वस्तुओं’ के बारे में वैज्ञानिक अध्ययन करेंगे।

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
सजीव वस्तुएं (Living Things)जिन चीज़ों में जान होती है, उन्हें सजीव कहते हैं। उदाहरण: इंसान, जानवर, पेड़-पौधे, कीड़े-मकोड़े।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे।सजीव: जिनमें जान होती है (पेड़, इंसान)
सजीवों के लक्षणसजीव वस्तुएं सांस लेती हैं, भोजन खाती हैं, पानी पीती हैं, बड़ी होती हैं (Growth) और महसूस करती हैं।छात्र सजीवों के लक्षण नोट करेंगे।लक्षण: सांस लेना, भोजन, वृद्धि
निर्जीव वस्तुएं (Non-living Things)जिन चीज़ों में जान नहीं होती, उन्हें निर्जीव कहते हैं। उदाहरण: कुर्सी, मेज़, पत्थर, किताब, मोबाइल।छात्र कक्षा में मौजूद निर्जीव वस्तुओं के नाम बताएंगे।निर्जीव: जिनमें जान नहीं होती (किताब, मेज़)
पेड़-पौधे सजीव क्यों हैं?पेड़-पौधे चल नहीं सकते, लेकिन वे छोटे से बड़े होते हैं (वृद्धि), सांस लेते हैं और भोजन बनाते हैं, इसलिए वे सजीव हैं।छात्र शंका का समाधान करेंगे और सुनेंगे।पेड़-पौधे भी सजीव हैं (वे बढ़ते हैं)।

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. सजीव वस्तुओं के दो लक्षण बताइए।
  2. क्या पेड़-पौधे सजीव हैं या निर्जीव? क्यों?
  3. कक्षा में मौजूद किन्हीं तीन निर्जीव वस्तुओं के नाम बताइए।

10. गृहकार्य (Homework):

अपने घर से 5 सजीव और 5 निर्जीव वस्तुओं के नाम एक सूची में लिखकर लाएं।

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D.El.Ed EVS Lesson Plan 15: पाठ योजना क्रमांक – 15

योजना प्रकार: D.El.Ed EVS Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 4
कालांश: ………………..
विषय: पर्यावरण अध्ययन (EVS)
उपविषय: पर्यावरण (Environment)
प्रकरण: जानवरों के कान और खाल (पैटर्न)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. छात्रों को जंतुओं की शारीरिक विशेषताओं से परिचित कराना।
  2. जंतुओं के अवलोकन (Observation) की क्षमता का विकास करना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘जानवरों के कान और खाल (पैटर्न)’ पाठ में आए नवीन तथ्यों का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे। विद्यार्थी प्रकरण के महत्व को समझ सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘जानवरों के कान और खाल (पैटर्न)’ पाठ के विषय को समझकर अपने शब्दों में व्यक्त कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी पाठ से प्राप्त ज्ञान और समझ का अपने व्यावहारिक जीवन में उपयोग कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी उचित हाव-भाव के साथ पर्यावरण से संबंधित गतिविधियों को करने का कौशल प्राप्त करेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी पर्यावरण अध्ययन की अन्य रोचक पुस्तकों/कहानियों को पढ़ने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में प्रकृति, जानवरों और अपने आस-पास के परिवेश के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

हाथी, ज़ेब्रा, चीता, छिपकली और मगरमच्छ के चित्र।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रश्नोत्तर प्रविधि, स्पष्टीकरण विधि, और प्रदर्शन/गतिविधि आधारित विधि।

5. पूर्व ज्ञान:

छात्रों ने विभिन्न जानवरों को टीवी या चिड़ियाघर में देखा है।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.हाथी के कान कैसे होते हैं?बहुत बड़े, पंखे जैसे।
2.क्या आपने कभी छिपकली या सांप के कान देखे हैं?नहीं, दिखाई नहीं देते।
3.बच्चों, क्या आपको इसके बारे में और कुछ पता है?छात्र अपने विचार रखते हैं।
4.क्या यह हमारे आस-पास के पर्यावरण का हिस्सा है?हाँ, बिल्कुल।
5.जिन जानवरों के कान बाहर दिखाई देते हैं, वे बच्चे देते हैं या अंडे?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

बच्चों, आज हम जानवरों की एक बहुत ही रोचक विशेषता— ‘उनके कान और त्वचा के पैटर्न’ के बारे में जानेंगे।

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
जानवरों के कानकुछ जानवरों के कान बाहर दिखाई देते हैं (जैसे- हाथी, कुत्ता, गाय)। कुछ के कान बाहर दिखाई नहीं देते, उनके सिर के दोनों ओर छोटे छेद होते हैं (जैसे- पक्षी, छिपकली, मगरमच्छ)।छात्र जानवरों के कानों की तुलना करेंगे।बाहरी कान: हाथी, गाय
छेद वाले कान: पक्षी, छिपकली
त्वचा पर बाल और पैटर्नजानवरों की त्वचा पर अलग-अलग डिज़ाइन (पैटर्न) होते हैं। यह पैटर्न उनके शरीर पर मौजूद बालों के कारण होता है। जैसे— ज़ेब्रा की धारियां, चीते के धब्बे।छात्र चित्र में पैटर्न देखेंगे।पैटर्न = शरीर के बालों के कारण
बच्चे देने वाले जानवरजिन जानवरों के कान बाहर दिखाई देते हैं और शरीर पर बाल होते हैं, वे ‘बच्चे’ देते हैं (जैसे— कुत्ता, गाय, मनुष्य)।छात्र नियम को ध्यानपूर्वक सुनेंगे।बाहरी कान + बाल = बच्चे देते हैं
अंडे देने वाले जानवरजिन जानवरों के कान बाहर दिखाई नहीं देते और शरीर पर बाल नहीं होते (पंख या शल्क होते हैं), वे ‘अंडे’ देते हैं (जैसे— सांप, छिपकली, पक्षी)।छात्र अपनी कॉपी में लिखेंगे।बाहरी कान नहीं + बाल नहीं = अंडे देते हैं

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. हाथी के कान कैसे होते हैं?
  2. जिन जानवरों के कान बाहर दिखाई नहीं देते, वे क्या देते हैं?
  3. ज़ेब्रा के शरीर पर पैटर्न किसके कारण होता है?

10. गृहकार्य (Homework):

5 बच्चे देने वाले और 5 अंडे देने वाले जानवरों के नाम लिखकर लाएं।

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D.El.Ed EVS Lesson Plan 16: पाठ योजना क्रमांक – 16

योजना प्रकार: D.El.Ed EVS Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 5
कालांश: ………………..
विषय: पर्यावरण अध्ययन (EVS)
उपविषय: पर्यावरण (Environment)
प्रकरण: चखने से पचाने तक (पाचन तंत्र)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. छात्रों को मानव शरीर की जैविक प्रक्रियाओं से अवगत कराना।
  2. स्वस्थ खान-पान के प्रति जागरूकता पैदा करना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘चखने से पचाने तक (पाचन तंत्र)’ पाठ में आए नवीन तथ्यों का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे। विद्यार्थी प्रकरण के महत्व को समझ सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘चखने से पचाने तक (पाचन तंत्र)’ पाठ के विषय को समझकर अपने शब्दों में व्यक्त कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी पाठ से प्राप्त ज्ञान और समझ का अपने व्यावहारिक जीवन में उपयोग कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी उचित हाव-भाव के साथ पर्यावरण से संबंधित गतिविधियों को करने का कौशल प्राप्त करेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी पर्यावरण अध्ययन की अन्य रोचक पुस्तकों/कहानियों को पढ़ने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में प्रकृति, जानवरों और अपने आस-पास के परिवेश के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

जीभ के स्वाद-क्षेत्रों का चार्ट, मानव पाचन तंत्र का मॉडल या चित्र।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रश्नोत्तर प्रविधि, स्पष्टीकरण विधि, और प्रदर्शन/गतिविधि आधारित विधि।

5. पूर्व ज्ञान:

छात्र जानते हैं कि भोजन मुंह से खाया जाता है और पेट में जाता है।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.हमें भोजन का स्वाद कैसे पता चलता है?जीभ (Tongue) से।
2.मुंह में भोजन को कौन चबाता है?दांत चबाते हैं।
3.बच्चों, क्या आपको इसके बारे में और कुछ पता है?छात्र अपने विचार रखते हैं।
4.क्या यह हमारे आस-पास के पर्यावरण का हिस्सा है?हाँ, बिल्कुल।
5.चबाने के बाद भोजन पेट में जाकर कैसे पचता है?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

बच्चों, आज हम अपने शरीर के अंदर होने वाली एक बहुत ही महत्वपूर्ण क्रिया— ‘भोजन चखने से लेकर पेट में पचने तक’ की यात्रा के बारे में पढ़ेंगे।

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
जीभ और स्वादहमारी जीभ पर स्वाद-कलिकाएं (Taste buds) होती हैं। जीभ का अगला हिस्सा मीठा, किनारे खट्टा व नमकीन, और पिछला हिस्सा कड़वा स्वाद बताता है।छात्र जीभ का चार्ट देखेंगे।स्वाद: मीठा (आगे), कड़वा (पीछे)
मुंह में पाचनजब हम भोजन चबाते हैं, तो मुंह में ‘लार’ (Saliva) बनती है। लार भोजन को मुलायम और मीठा बनाती है। पाचन की शुरुआत मुंह से ही हो जाती है।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे।पाचन की शुरुआत मुंह से (लार)
भोजन नली और आमाशयचबाया हुआ भोजन ‘भोजन नली’ (Food pipe) से होता हुआ आमाशय (Stomach) में पहुंचता है। पेट में पाचक रस भोजन को मथकर एक पेस्ट बना देते हैं।छात्र पाचन तंत्र के चित्र को समझेंगे।पेट के पाचक रस भोजन पचाते हैं
छोटी और बड़ी आंतपेट से भोजन छोटी आंत (Small Intestine) में जाता है, जहाँ पोषक तत्व खून में मिल जाते हैं। बचा हुआ अपशिष्ट बड़ी आंत से शरीर के बाहर निकल जाता है।छात्र प्रक्रिया को अपनी कॉपी में लिखेंगे।छोटी आंत: पोषक तत्व सोखना

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. जीभ का कौन-सा हिस्सा मीठा स्वाद बताता है?
  2. भोजन के पाचन की शुरुआत शरीर के किस अंग से होती है?
  3. लार (Saliva) का क्या काम है?

10. गृहकार्य (Homework):

मानव पाचन तंत्र का सरल चित्र अपनी कॉपी में बनाकर लाएं।

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D.El.Ed EVS Lesson Plan 17: पाठ योजना क्रमांक – 17

योजना प्रकार: D.El.Ed EVS Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 5
कालांश: ………………..
विषय: पर्यावरण अध्ययन (EVS)
उपविषय: पर्यावरण (Environment)
प्रकरण: बीज, बीज, बीज (प्रजनन और प्रकीर्णन)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. छात्रों को कृषि और वनस्पतियों के विकास से जोड़ना।
  2. बीज से पौधे बनने की प्रक्रिया का ज्ञान देना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘बीज, बीज, बीज (प्रजनन और प्रकीर्णन)’ पाठ में आए नवीन तथ्यों का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे। विद्यार्थी प्रकरण के महत्व को समझ सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘बीज, बीज, बीज (प्रजनन और प्रकीर्णन)’ पाठ के विषय को समझकर अपने शब्दों में व्यक्त कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी पाठ से प्राप्त ज्ञान और समझ का अपने व्यावहारिक जीवन में उपयोग कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी उचित हाव-भाव के साथ पर्यावरण से संबंधित गतिविधियों को करने का कौशल प्राप्त करेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी पर्यावरण अध्ययन की अन्य रोचक पुस्तकों/कहानियों को पढ़ने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में प्रकृति, जानवरों और अपने आस-पास के परिवेश के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

चना या मूंग के अंकुरित बीज, रुई, पानी, और प्रकीर्णन दर्शाने वाला चार्ट।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रश्नोत्तर प्रविधि, स्पष्टीकरण विधि, और प्रदर्शन/गतिविधि आधारित विधि।

5. पूर्व ज्ञान:

छात्रों ने फलों के अंदर बीज देखे हैं (जैसे- सेब, पपीता, आम)।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.नया पौधा उगाने के लिए हम मिट्टी में क्या बोते हैं?बीज (Seed) बोते हैं।
2.क्या सभी बीज एक ही जगह गिरकर उगते हैं?नहीं, वे अलग-अलग जगह फैल जाते हैं।
3.बच्चों, क्या आपको इसके बारे में और कुछ पता है?छात्र अपने विचार रखते हैं।
4.क्या यह हमारे आस-पास के पर्यावरण का हिस्सा है?हाँ, बिल्कुल।
5.बीज एक जगह से दूसरी जगह कैसे पहुंचते हैं?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

बच्चों, आज हम बीजों के अंकुरण और बीजों के एक जगह से दूसरी जगह फैलने की प्रक्रिया (‘बीजों के प्रकीर्णन’) के बारे में जानेंगे।

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
बीज का अंकुरण (Germination)जब एक बीज को सही मात्रा में पानी, हवा और सूरज की गर्मी (तापमान) मिलती है, तो उसमें से एक छोटा पौधा निकलता है। इसे अंकुरण कहते हैं।छात्र अंकुरित मूंग/चने को देखेंगे।अंकुरण = पानी + हवा + गर्मी
हवा द्वारा प्रकीर्णनकुछ बीज बहुत हल्के और रोएंदार होते हैं (जैसे— मदार और कपास के बीज)। ये हवा में उड़कर दूर-दूर तक पहुंच जाते हैं।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे।हवा द्वारा: मदार, कपास
पानी और जानवरों द्वारा प्रकीर्णननारियल पानी में तैरकर दूसरी जगह पहुंचता है। गोखरू या कांटेदार बीज जानवरों के बालों में उलझकर दूर तक चले जाते हैं। पक्षी फल खाकर बीट के साथ बीज निकालते हैं।छात्र विभिन्न तरीकों को अपनी कॉपी में लिखेंगे।पानी द्वारा: नारियल
जानवरों द्वारा: गोखरू
फटने से प्रकीर्णनकुछ फल सूखकर ज़ोर से फटते हैं, जिससे उनके बीज दूर छिटक जाते हैं। जैसे— मटर, भिंडी और सोयाबीन की फलियां।छात्र आश्चर्यचकित होकर सुनेंगे।फटने से: मटर, सोयाबीन

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. बीज के अंकुरण के लिए कौन-सी तीन चीजें आवश्यक हैं?
  2. नारियल का बीज एक जगह से दूसरी जगह कैसे पहुंचता है?
  3. जानवरों के बालों में कैसे बीज चिपक जाते हैं?

10. गृहकार्य (Homework):

कुछ बीजों (चना, मूंग) को गीली रुई में रखकर उनके अंकुरण का घर पर अवलोकन करें।

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D.El.Ed EVS Lesson Plan 18: पाठ योजना क्रमांक – 18

योजना प्रकार: D.El.Ed EVS Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 5
कालांश: ………………..
विषय: पर्यावरण अध्ययन (EVS)
उपविषय: पर्यावरण (Environment)
प्रकरण: घटपर्णी पौधा (शिकारी पौधा)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. छात्रों में प्रकृति के प्रति वैज्ञानिक जिज्ञासा (Curiosity) पैदा करना।
  2. वनस्पतियों की विशेष अनुकूलन क्षमता से परिचित कराना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘घटपर्णी पौधा (शिकारी पौधा)’ पाठ में आए नवीन तथ्यों का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे। विद्यार्थी प्रकरण के महत्व को समझ सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘घटपर्णी पौधा (शिकारी पौधा)’ पाठ के विषय को समझकर अपने शब्दों में व्यक्त कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी पाठ से प्राप्त ज्ञान और समझ का अपने व्यावहारिक जीवन में उपयोग कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी उचित हाव-भाव के साथ पर्यावरण से संबंधित गतिविधियों को करने का कौशल प्राप्त करेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी पर्यावरण अध्ययन की अन्य रोचक पुस्तकों/कहानियों को पढ़ने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में प्रकृति, जानवरों और अपने आस-पास के परिवेश के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

घटपर्णी (Pitcher Plant) और वीनस फ्लाईट्रैप का रंगीन चित्र या वीडियो क्लिप।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रश्नोत्तर प्रविधि, स्पष्टीकरण विधि, और प्रदर्शन/गतिविधि आधारित विधि।

5. पूर्व ज्ञान:

छात्र जानते हैं कि जानवर दूसरे जीवों का शिकार करते हैं और पौधे मिट्टी से पानी लेते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.जानवरों का शिकार कौन करता है?शेर, चीता, मेंढक आदि।
2.क्या पौधे भी कीड़े-मकोड़ों का शिकार कर सकते हैं?शायद नहीं। (छात्र असमंजस में)
3.बच्चों, क्या आपको इसके बारे में और कुछ पता है?छात्र अपने विचार रखते हैं।
4.क्या यह हमारे आस-पास के पर्यावरण का हिस्सा है?हाँ, बिल्कुल।
5.कीड़े खाने वाले पौधों को क्या कहते हैं?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

बच्चों, आज हम कुछ ऐसे अजीब और अनोखे पौधों के बारे में जानेंगे जो कीड़े-मकोड़ों, चूहों और मेंढकों का शिकार करके उन्हें खा जाते हैं। इन्हें ‘शिकारी पौधे’ कहते हैं।

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
शिकारी पौधे (Insectivorous Plants)कुछ पौधे ऐसी मिट्टी में उगते हैं जहाँ नाइट्रोजन की कमी होती है। इस कमी को पूरा करने के लिए वे कीड़े-मकोड़ों का शिकार करते हैं।छात्र आश्चर्य से सुनेंगे।शिकारी पौधे = कीड़े खाने वाले (नाइट्रोजन के लिए)
घटपर्णी (Nepenthes/Pitcher Plant)घटपर्णी पौधे का आकार एक घड़े (Pitcher) जैसा होता है। इसके ऊपर एक पत्ती का ढक्कन लगा होता है। यह भारत के मेघालय, ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया में पाया जाता है।छात्र चित्र में घटपर्णी का घड़ा देखेंगे।घटपर्णी: घड़े के आकार का (मेघालय में)
शिकार का तरीकाघड़े के अंदर से एक खास मीठी खुशबू निकलती है जो कीड़ों को अपनी ओर खींचती है। कीड़ा जैसे ही घड़े के अंदर जाता है, वह फिसलकर फंस जाता है और ऊपर का ढक्कन बंद हो जाता है।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे।मीठी खुशबू से शिकार को फंसाना।
अन्य शिकारी पौधेवीनस फ्लाईट्रैप (Venus Flytrap) और सड्यू (Sundew) भी शिकारी पौधे हैं, जो कीड़ों को जकड़ कर खा जाते हैं।छात्र अन्य पौधों के नाम अपनी कॉपी में लिखेंगे।अन्य नाम: वीनस फ्लाईट्रैप

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. घटपर्णी पौधे का आकार कैसा होता है?
  2. भारत में घटपर्णी पौधा कहाँ पाया जाता है?
  3. शिकारी पौधे कीड़ों का शिकार क्यों करते हैं?

10. गृहकार्य (Homework):

घटपर्णी (Pitcher Plant) का सुंदर चित्र अपनी कॉपी में बनाकर लाएं।

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D.El.Ed EVS Lesson Plan 19: पाठ योजना क्रमांक – 19

योजना प्रकार: D.El.Ed EVS Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 4
कालांश: ………………..
विषय: पर्यावरण अध्ययन (EVS)
उपविषय: पर्यावरण (Environment)
प्रकरण: अनीता की मधुमक्खियाँ (मधुमक्खी पालन)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. छात्रों को कृषि आधारित कुटीर उद्योगों से परिचित कराना।
  2. मेहनत और स्वावलंबन (Self-reliance) की प्रेरणा देना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘अनीता की मधुमक्खियाँ (मधुमक्खी पालन)’ पाठ में आए नवीन तथ्यों का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे। विद्यार्थी प्रकरण के महत्व को समझ सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘अनीता की मधुमक्खियाँ (मधुमक्खी पालन)’ पाठ के विषय को समझकर अपने शब्दों में व्यक्त कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी पाठ से प्राप्त ज्ञान और समझ का अपने व्यावहारिक जीवन में उपयोग कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी उचित हाव-भाव के साथ पर्यावरण से संबंधित गतिविधियों को करने का कौशल प्राप्त करेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी पर्यावरण अध्ययन की अन्य रोचक पुस्तकों/कहानियों को पढ़ने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में प्रकृति, जानवरों और अपने आस-पास के परिवेश के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

मधुमक्खी के छत्ते का चित्र, शहद की एक छोटी बोतल, ‘अनीता’ की कहानी का चार्ट।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रश्नोत्तर प्रविधि, स्पष्टीकरण विधि, और प्रदर्शन/गतिविधि आधारित विधि।

5. पूर्व ज्ञान:

छात्रों ने मधुमक्खी, उसका छत्ता और शहद देखा है।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.फूलों का रस चूसकर शहद कौन बनाता है?मधुमक्खी।
2.शहद कहाँ इकट्ठा किया जाता है?मधुमक्खी के छत्ते (Hive) में।
3.बच्चों, क्या आपको इसके बारे में और कुछ पता है?छात्र अपने विचार रखते हैं।
4.क्या यह हमारे आस-पास के पर्यावरण का हिस्सा है?हाँ, बिल्कुल।
5.शहद प्राप्त करने के लिए मधुमक्खियों को पालने को क्या कहते हैं?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

बच्चों, आज हम बिहार की रहने वाली एक बहादुर लड़की ‘अनीता कुशवाहा’ की कहानी पढ़ेंगे और ‘मधुमक्खी पालन’ के बारे में जानेंगे।

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
अनीता की कहानीअनीता बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के बोचाहा गांव की रहने वाली है। उसने पढ़ाई के साथ-साथ मधुमक्खी पालन का काम शुरू किया और स्वावलंबी बनी।छात्र अनीता की संघर्ष की कहानी सुनेंगे।अनीता: बिहार (मुजफ्फरपुर)
मधुमक्खी पालन का सही समयअक्टूबर से दिसंबर का समय मधुमक्खियों के अंडे देने का समय होता है। इसलिए यही समय मधुमक्खी पालन शुरू करने के लिए सबसे अच्छा माना जाता है। लीची के फूल मधुमक्खियों को बहुत लुभाते हैं।छात्र महत्वपूर्ण बिंदुओं को नोट करेंगे।सही समय: अक्टूबर से दिसंबर
फूल: लीची
मधुमक्खियों के प्रकार और कार्यहर छत्ते में एक ‘रानी मक्खी’ होती है जो अंडे देती है। कुछ ‘नर मक्खी’ होते हैं। बाकी सभी ‘काम करने वाली मक्खियां’ (Worker bees) होती हैं, जो रस ढूंढती हैं और छत्ता बनाती हैं।छात्र छत्ते की व्यवस्था को समझेंगे।रानी मक्खी: अंडे देना
वर्कर मक्खी: रस लाना
मधुमक्खियों का नाच (Dance)जब किसी मक्खी को रस मिल जाता है, तो वह एक विशेष प्रकार का नाच करती है। इससे दूसरी मक्खियों को पता चल जाता है कि रस कहाँ है।छात्र आश्चर्य से सुनेंगे।रस मिलने पर विशेष नाच

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. मधुमक्खी पालन शुरू करने का सबसे अच्छा समय कौन-सा है?
  2. छत्ते में अंडे देने का काम कौन-सी मक्खी करती है?
  3. रस ढूंढने का काम कौन करता है?

10. गृहकार्य (Homework):

मधुमक्खी के छत्ते का चित्र बनाकर उसमें काम करने वाली मक्खियों के कार्य लिखिए।

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D.El.Ed EVS Lesson Plan 20: पाठ योजना क्रमांक – 20

योजना प्रकार: D.El.Ed EVS Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 4
कालांश: ………………..
विषय: पर्यावरण अध्ययन (EVS)
उपविषय: पर्यावरण (Environment)
प्रकरण: चलो चलें स्कूल (स्कूल जाने के साधन)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. छात्रों को भारत की भौगोलिक विविधता से अवगत कराना।
  2. शिक्षा के प्रति संघर्ष और लगन का महत्व समझाना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘चलो चलें स्कूल (स्कूल जाने के साधन)’ पाठ में आए नवीन तथ्यों का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे। विद्यार्थी प्रकरण के महत्व को समझ सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘चलो चलें स्कूल (स्कूल जाने के साधन)’ पाठ के विषय को समझकर अपने शब्दों में व्यक्त कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी पाठ से प्राप्त ज्ञान और समझ का अपने व्यावहारिक जीवन में उपयोग कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी उचित हाव-भाव के साथ पर्यावरण से संबंधित गतिविधियों को करने का कौशल प्राप्त करेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी पर्यावरण अध्ययन की अन्य रोचक पुस्तकों/कहानियों को पढ़ने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में प्रकृति, जानवरों और अपने आस-पास के परिवेश के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

भारत का मानचित्र, ट्रॉली (लद्दाख), वल्लम (केरल), और ऊंट-गाड़ी (राजस्थान) के चित्र।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रश्नोत्तर प्रविधि, स्पष्टीकरण विधि, और प्रदर्शन/गतिविधि आधारित विधि।

5. पूर्व ज्ञान:

छात्र अपने स्कूल बस, वैन, साइकिल या पैदल आते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.आप लोग अपने घर से स्कूल कैसे आते हैं?साइकिल, बस या पैदल।
2.क्या पहाड़ों या रेगिस्तान में भी बच्चे बस से स्कूल जा सकते हैं?नहीं, वहां बस नहीं चल सकती।
3.बच्चों, क्या आपको इसके बारे में और कुछ पता है?छात्र अपने विचार रखते हैं।
4.क्या यह हमारे आस-पास के पर्यावरण का हिस्सा है?हाँ, बिल्कुल।
5.पहाड़ी या बर्फ वाले इलाकों में बच्चे स्कूल कैसे पहुंचते हैं?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

बच्चों, आज हम जानेंगे कि भारत के अलग-अलग हिस्सों में भौगोलिक कठिनाइयों के बावजूद बच्चे किन साधनों का प्रयोग करके स्कूल पहुंचते हैं।

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
बांस और रस्सी का पुलअसम में बहुत बारिश होती है और पानी भर जाता है। इसलिए वहां के बच्चे बांस और रस्सी से बने अस्थाई पुल को पार करके स्कूल जाते हैं।छात्र असम की भौगोलिक स्थिति समझेंगे।असम: बांस और रस्सी का पुल
ट्रॉली और वल्लम (लकड़ी की नाव)लद्दाख में गहरी नदी पार करने के लिए लोहे की रस्सी पर लटकी लकड़ी की ‘ट्रॉली’ का प्रयोग होता है। केरल में बच्चे पानी पार करने के लिए लकड़ी की छोटी नाव, जिसे ‘वल्लम’ कहते हैं, का प्रयोग करते हैं।छात्र ट्रॉली और वल्लम के चित्र देखेंगे।लद्दाख: ट्रॉली
केरल: वल्लम (नाव)
रेगिस्तान और मैदानी इलाकेराजस्थान के रेतीले इलाकों में बच्चे ‘ऊंट-गाड़ी’ में बैठकर स्कूल जाते हैं। मैदानी इलाकों के गांव में बैलगाड़ी (Bullock cart) का प्रयोग किया जाता है।छात्र अपनी कॉपी में लिखेंगे।राजस्थान: ऊंट-गाड़ी
मैदान: बैलगाड़ी
बर्फ और पथरीले रास्तेउत्तर की पहाड़ियों में बच्चे बर्फ पर हाथ पकड़कर चलते हैं। उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में बच्चे उबड़-खाबड़ और पथरीले रास्तों को पार करके स्कूल जाते हैं।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे।उत्तराखंड: पथरीले रास्ते

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. केरल में बच्चे स्कूल जाने के लिए किस नाव का प्रयोग करते हैं?
  2. लद्दाख में नदी पार करने के लिए किसका प्रयोग होता है?
  3. ऊंट-गाड़ी का प्रयोग किस राज्य में किया जाता है?

10. गृहकार्य (Homework):

अपने राज्य के मानचित्र में उन रास्तों को दर्शाएं जिनसे आप स्कूल जाते हैं।

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D.El.Ed EVS Lesson Plan 21: पाठ योजना क्रमांक – 21

योजना प्रकार: D.El.Ed EVS Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 3
कालांश: ………………..
विषय: पर्यावरण अध्ययन (EVS)
उपविषय: पर्यावरण (Environment)
प्रकरण: जल के स्रोत और उपयोग
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. छात्रों को प्राकृतिक संसाधनों के महत्व से अवगत कराना।
  2. जल संरक्षण की आदत डालना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘जल के स्रोत और उपयोग’ पाठ में आए नवीन तथ्यों का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे। विद्यार्थी प्रकरण के महत्व को समझ सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘जल के स्रोत और उपयोग’ पाठ के विषय को समझकर अपने शब्दों में व्यक्त कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी पाठ से प्राप्त ज्ञान और समझ का अपने व्यावहारिक जीवन में उपयोग कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी उचित हाव-भाव के साथ पर्यावरण से संबंधित गतिविधियों को करने का कौशल प्राप्त करेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी पर्यावरण अध्ययन की अन्य रोचक पुस्तकों/कहानियों को पढ़ने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में प्रकृति, जानवरों और अपने आस-पास के परिवेश के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

कुआं, नदी, तालाब, बारिश और हैंडपंप को दर्शाता हुआ रंगीन चार्ट।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रश्नोत्तर प्रविधि, स्पष्टीकरण विधि, और प्रदर्शन/गतिविधि आधारित विधि।

5. पूर्व ज्ञान:

छात्र रोज़ पानी पीते हैं और नहाने के लिए पानी का उपयोग करते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.प्यास लगने पर हम क्या पीते हैं?पानी पीते हैं।
2.नहाने और कपड़े धोने के लिए किसकी ज़रूरत होती है?पानी की।
3.बच्चों, क्या आपको इसके बारे में और कुछ पता है?छात्र अपने विचार रखते हैं।
4.क्या यह हमारे आस-पास के पर्यावरण का हिस्सा है?हाँ, बिल्कुल।
5.हमें पानी कहाँ-कहाँ से मिलता है?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

बच्चों, आज हम जानेंगे कि हमारे जीवन के लिए सबसे ज़रूरी ‘पानी के स्रोत’ (Sources of Water) क्या हैं और इसके क्या उपयोग हैं।

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
पानी का सबसे बड़ा स्रोतपृथ्वी पर पानी का सबसे बड़ा और प्राकृतिक स्रोत ‘बारिश’ (Rain) है। बारिश का पानी ही नदियों, तालाबों और जमीन के अंदर जाता है।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे।मुख्य स्रोत: बारिश (Rain)
पानी के अन्य स्रोतबारिश के अलावा हमें नदियां, तालाब, झील, कुआं और हैंडपंप से भी पानी मिलता है।छात्र चार्ट पर जल स्रोतों को देखेंगे।अन्य स्रोत: कुआं, नदी, हैंडपंप
पानी के उपयोगपानी का उपयोग पीने, नहाने, कपड़े धोने, खाना पकाने, पौधों को सींचने और आग बुझाने में किया जाता है। जानवरों को भी पानी की आवश्यकता होती है।छात्र अपनी कॉपी में लिखेंगे।उपयोग: पीना, नहाना, सिंचाई
जल प्रदूषण और बचावहमें नदियों और तालाबों में कूड़ा या जानवरों को नहीं धोना चाहिए, इससे पानी गंदा (प्रदूषित) हो जाता है।छात्र सहमत होते हुए सिर हिलाएंगे।पानी को साफ रखें।

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. पानी का सबसे बड़ा प्राकृतिक स्रोत कौन-सा है?
  2. कुआं और हैंडपंप के अलावा पानी के दो स्रोत बताइए।
  3. पानी के किन्हीं तीन उपयोगों के नाम लिखिए।

10. गृहकार्य (Homework):

अपने घर में पानी के 5 उपयोगों की सूची बनाकर लाएं।

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D.El.Ed EVS Lesson Plan 22: पाठ योजना क्रमांक – 22

योजना प्रकार: D.El.Ed EVS Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 4-5
कालांश: ………………..
विषय: पर्यावरण अध्ययन (EVS)
उपविषय: पर्यावरण (Environment)
प्रकरण: जल ही जीवन है (जल संरक्षण व बावड़ियाँ)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. छात्रों में जल संकट के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना।
  2. पारंपरिक जल संरक्षण विधियों का ज्ञान देना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘जल ही जीवन है (जल संरक्षण व बावड़ियाँ)’ पाठ में आए नवीन तथ्यों का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे। विद्यार्थी प्रकरण के महत्व को समझ सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘जल ही जीवन है (जल संरक्षण व बावड़ियाँ)’ पाठ के विषय को समझकर अपने शब्दों में व्यक्त कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी पाठ से प्राप्त ज्ञान और समझ का अपने व्यावहारिक जीवन में उपयोग कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी उचित हाव-भाव के साथ पर्यावरण से संबंधित गतिविधियों को करने का कौशल प्राप्त करेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी पर्यावरण अध्ययन की अन्य रोचक पुस्तकों/कहानियों को पढ़ने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में प्रकृति, जानवरों और अपने आस-पास के परिवेश के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

सीढ़ीदार कुएं (बावड़ी) का चित्र, वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting) का मॉडल।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रश्नोत्तर प्रविधि, स्पष्टीकरण विधि, और प्रदर्शन/गतिविधि आधारित विधि।

5. पूर्व ज्ञान:

छात्र जानते हैं कि गर्मियों में कुएं और नदियां सूख जाती हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.गर्मियों में कुछ जगहों पर पानी की कमी क्यों हो जाती है?नदी और तालाब सूखने के कारण।
2.पुराने ज़माने में लोग पानी कहाँ से लाते थे?कुएं और नदियों से।
3.बच्चों, क्या आपको इसके बारे में और कुछ पता है?छात्र अपने विचार रखते हैं।
4.क्या यह हमारे आस-पास के पर्यावरण का हिस्सा है?हाँ, बिल्कुल।
5.क्या आपने कभी सीढ़ियों वाला कुआं (बावड़ी) देखा है?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

बच्चों, आज हम पुराने समय की ‘बावड़ियों’ और आज के समय में ‘जल संरक्षण’ (पानी बचाने) के उपायों के बारे में पढ़ेंगे।

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
बावड़ी (Stepwell) क्या है?पुराने समय में राजस्थान और गुजरात जैसे सूखे इलाकों में पानी को स्टोर करने के लिए सीढ़ीदार कुएं बनाए जाते थे, जिन्हें बावड़ी कहते हैं। इसमें लोग सीढ़ियों से नीचे जाकर पानी लाते थे।छात्र चित्र में बावड़ी की सीढ़ियां देखेंगे।बावड़ी: सीढ़ीदार कुआं (पुराना तरीका)
जल संकट का कारणआजकल बारिश कम होने और हैंडपंप/बोरवेल से बहुत ज़्यादा पानी निकालने के कारण ज़मीन के अंदर का पानी सूखता जा रहा है।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे।कारण: बोरवेल से ज़्यादा पानी निकालना
वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting)बारिश के पानी को बर्बाद होने से बचाने के लिए छतों के पानी को पाइप के जरिए ज़मीन के नीचे टैंक (टांका) में इकट्ठा किया जाता है।छात्र मॉडल देखकर समझेंगे।Rainwater Harvesting: छत का पानी टैंक में
पानी बचाने के तरीकेब्रश करते समय नल बंद रखना, नहाने के लिए बाल्टी का उपयोग करना, और रिसते हुए नल को ठीक कराना पानी बचाने के अच्छे तरीके हैं।छात्र अपनी कॉपी में लिखेंगे।बचाव: नल बंद रखें, बाल्टी से नहाएं

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. बावड़ी किसे कहते हैं?
  2. ज़मीन के अंदर पानी कम क्यों हो रहा है?
  3. वर्षा जल संचयन क्या है?

10. गृहकार्य (Homework):

पानी बचाने के 5 आसान तरीके लिखकर लाएं।

Part of our 180+ free D.El.Ed / BSTC EVS Lesson Plans collection.

D.El.Ed EVS Lesson Plan 23: पाठ योजना क्रमांक – 23

योजना प्रकार: D.El.Ed EVS Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 5
कालांश: ………………..
विषय: पर्यावरण अध्ययन (EVS)
उपविषय: पर्यावरण (Environment)
प्रकरण: पानी के प्रयोग (क्या डूबेगा, क्या तैरेगा)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. छात्रों में वैज्ञानिक प्रयोग करने की रुचि जाग्रत करना।
  2. कारण और प्रभाव (Cause and Effect) समझने की क्षमता बढ़ाना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘पानी के प्रयोग (क्या डूबेगा, क्या तैरेगा)’ पाठ में आए नवीन तथ्यों का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे। विद्यार्थी प्रकरण के महत्व को समझ सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘पानी के प्रयोग (क्या डूबेगा, क्या तैरेगा)’ पाठ के विषय को समझकर अपने शब्दों में व्यक्त कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी पाठ से प्राप्त ज्ञान और समझ का अपने व्यावहारिक जीवन में उपयोग कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी उचित हाव-भाव के साथ पर्यावरण से संबंधित गतिविधियों को करने का कौशल प्राप्त करेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी पर्यावरण अध्ययन की अन्य रोचक पुस्तकों/कहानियों को पढ़ने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में प्रकृति, जानवरों और अपने आस-पास के परिवेश के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

कांच का गिलास, पानी, पत्थर, लकड़ी का टुकड़ा, नींबू, नमक और सुई।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रश्नोत्तर प्रविधि, स्पष्टीकरण विधि, और प्रदर्शन/गतिविधि आधारित विधि।

5. पूर्व ज्ञान:

छात्रों ने तालाब या बाल्टी में चीज़ों को डूबते और तैरते हुए देखा है।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.जब हम पानी में पत्थर डालते हैं, तो क्या होता है?पत्थर डूब जाता है।
2.अगर हम पानी में कागज़ की नाव डालें, तो क्या होगा?नाव पानी पर तैरेगी।
3.बच्चों, क्या आपको इसके बारे में और कुछ पता है?छात्र अपने विचार रखते हैं।
4.क्या यह हमारे आस-पास के पर्यावरण का हिस्सा है?हाँ, बिल्कुल।
5.कुछ चीज़ें पानी में क्यों डूब जाती हैं और कुछ क्यों तैरती हैं?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

बच्चों, आज हम पानी के साथ कुछ मज़ेदार ‘प्रयोग’ करेंगे और जानेंगे कि कौन-सी चीज़ें डूबती हैं और कौन-सी तैरती हैं।

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
प्रयोग 1: हल्का और भारीछात्राध्यापक पानी के गिलास में पत्थर और लकड़ी का टुकड़ा डालेंगे। पत्थर (भारी) डूब जाएगा, और लकड़ी (हल्की) तैरती रहेगी। सुई भी भारी होने के कारण डूब जाएगी।छात्र प्रयोग को ध्यान से देखेंगे।पत्थर, सुई = डूबते हैं
लकड़ी = तैरती है
तैरने का कारणजो चीज़ें पानी से हल्की होती हैं, वे तैरती हैं। जो चीज़ें पानी से भारी होती हैं, वे डूब जाती हैं। खाली कटोरी तैरेगी, लेकिन भर जाने पर डूब जाएगी।छात्र निष्कर्ष को कॉपी में लिखेंगे।कारण: भारी डूबता है, हल्का तैरता है
प्रयोग 2: नमक का जादूसादे पानी में नींबू डालने पर वह डूब जाता है। लेकिन जब हम उसी पानी में बहुत सारा नमक घोल देते हैं, तो पानी गाढ़ा (भारी) हो जाता है और नींबू तैरने लगता है।छात्र नमक वाले प्रयोग को देखेंगे।नमक वाले पानी में नींबू तैरता है
मृत सागर (Dead Sea)दुनिया में ‘मृत सागर’ नाम का एक ऐसा समुद्र है जिसका पानी इतना खारा (नमकीन) है कि उसमें कोई भी इंसान डूबता नहीं है, बल्कि ऊपर तैरता रहता है।छात्र आश्चर्य से सुनेंगे।मृत सागर: सबसे खारा पानी (कोई डूबता नहीं)

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. पानी में लकड़ी तैरती है या डूबती है?
  2. सादे पानी में नींबू क्यों डूब जाता है?
  3. मृत सागर में लोग क्यों नहीं डूबते?

10. गृहकार्य (Homework):

अपने घर में एक बाल्टी पानी लेकर 5 अलग-अलग वस्तुओं के साथ यह प्रयोग करें और सूची बनाएं कि क्या डूबा और क्या तैरा।

Part of our 180+ free D.El.Ed / BSTC EVS Lesson Plans collection.

D.El.Ed EVS Lesson Plan 24: पाठ योजना क्रमांक – 24

योजना प्रकार: D.El.Ed EVS Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 5
कालांश: ………………..
विषय: पर्यावरण अध्ययन (EVS)
उपविषय: पर्यावरण (Environment)
प्रकरण: मच्छरों की दावत (मलेरिया और रोग)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. छात्रों को स्वास्थ्य और स्वच्छता के प्रति जागरूक करना।
  2. जलजनित और मच्छर-जनित रोगों का ज्ञान देना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘मच्छरों की दावत (मलेरिया और रोग)’ पाठ में आए नवीन तथ्यों का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे। विद्यार्थी प्रकरण के महत्व को समझ सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘मच्छरों की दावत (मलेरिया और रोग)’ पाठ के विषय को समझकर अपने शब्दों में व्यक्त कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी पाठ से प्राप्त ज्ञान और समझ का अपने व्यावहारिक जीवन में उपयोग कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी उचित हाव-भाव के साथ पर्यावरण से संबंधित गतिविधियों को करने का कौशल प्राप्त करेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी पर्यावरण अध्ययन की अन्य रोचक पुस्तकों/कहानियों को पढ़ने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में प्रकृति, जानवरों और अपने आस-पास के परिवेश के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

मादा एनाफिलीज मच्छर का चित्र, माइक्रोस्कोप का चित्र, मलेरिया की दवा (कुनैन) का नाम बताने वाला फ्लैश कार्ड।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रश्नोत्तर प्रविधि, स्पष्टीकरण विधि, और प्रदर्शन/गतिविधि आधारित विधि।

5. पूर्व ज्ञान:

छात्र जानते हैं कि मच्छरों के काटने से खुजली होती है और वे बीमारी फैलाते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.बारिश के मौसम में हमारे आस-पास सबसे ज़्यादा क्या दिखाई देते हैं?मक्खी और मच्छर।
2.मच्छरों के काटने से कौन-सी बीमारी होती है?डेंगू या मलेरिया।
3.बच्चों, क्या आपको इसके बारे में और कुछ पता है?छात्र अपने विचार रखते हैं।
4.क्या यह हमारे आस-पास के पर्यावरण का हिस्सा है?हाँ, बिल्कुल।
5.मलेरिया किस मच्छर के काटने से फैलता है?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

बच्चों, आज हम मच्छरों से फैलने वाली बीमारी ‘मलेरिया’ और इससे बचने के उपायों के बारे में पढ़ेंगे।

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
मलेरिया कैसे फैलता है?मलेरिया ‘मादा एनाफिलीज’ (Female Anopheles) नाम के मच्छर के काटने से फैलता है। ये मच्छर गंदे और जमे हुए पानी में पैदा होते हैं।छात्र मच्छर का नाम कॉपी में लिखेंगे।मलेरिया = मादा एनाफिलीज मच्छर
मलेरिया के लक्षणजब किसी को मलेरिया होता है, तो उसे बहुत ज़ोर से ठंड (कपकपी) लगती है और तेज़ बुखार आता है। खून की जांच (Blood test) से इसका पता चलता है।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे।लक्षण: ठंड लगकर तेज़ बुखार
मलेरिया की दवापुराने ज़माने में और आज भी मलेरिया की दवा ‘सिनकोना’ (Cinchona) नामक पेड़ की छाल से बनाई जाती है, जिसे कुनैन कहते हैं।छात्र दवा का नाम सुनेंगे।दवा: सिनकोना पेड़ की छाल (कुनैन)
मच्छरों से बचावघर के आस-पास पानी जमा न होने दें। कूलर और टायरों का पानी साफ़ करें। सोते समय मच्छरदानी (Mosquito net) का प्रयोग करें और जमे पानी में मिट्टी का तेल डालें।छात्र बचाव के तरीके लिखेंगे।बचाव: पानी जमा न होने दें, मच्छरदानी

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. मलेरिया किस मच्छर के काटने से होता है?
  2. मलेरिया होने पर शरीर में क्या लक्षण दिखाई देते हैं?
  3. मलेरिया की दवा किस पेड़ की छाल से बनती है?

10. गृहकार्य (Homework):

मच्छरों से फैलने वाली 3 बीमारियों के नाम और उनसे बचने के 3 उपाय लिखकर लाएं।

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D.El.Ed EVS Lesson Plan 25: पाठ योजना क्रमांक – 25

योजना प्रकार: D.El.Ed EVS Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 5
कालांश: ………………..
विषय: पर्यावरण अध्ययन (EVS)
उपविषय: पर्यावरण (Environment)
प्रकरण: खत्म हो जाए तो… (पेट्रोलियम और ईंधन)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. छात्रों को अनवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों की सीमितता का ज्ञान देना।
  2. ईंधन संरक्षण के प्रति ज़िम्मेदारी की भावना जगाना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘खत्म हो जाए तो… (पेट्रोलियम और ईंधन)’ पाठ में आए नवीन तथ्यों का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे। विद्यार्थी प्रकरण के महत्व को समझ सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘खत्म हो जाए तो… (पेट्रोलियम और ईंधन)’ पाठ के विषय को समझकर अपने शब्दों में व्यक्त कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी पाठ से प्राप्त ज्ञान और समझ का अपने व्यावहारिक जीवन में उपयोग कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी उचित हाव-भाव के साथ पर्यावरण से संबंधित गतिविधियों को करने का कौशल प्राप्त करेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी पर्यावरण अध्ययन की अन्य रोचक पुस्तकों/कहानियों को पढ़ने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में प्रकृति, जानवरों और अपने आस-पास के परिवेश के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

पेट्रोल पंप का चित्र, विभिन्न ईंधनों (कोयला, एलपीजी सिलेंडर, सीएनजी) के चित्र।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रश्नोत्तर प्रविधि, स्पष्टीकरण विधि, और प्रदर्शन/गतिविधि आधारित विधि।

5. पूर्व ज्ञान:

छात्रों ने मोटरसाइकिल या कार में पेट्रोल भरवाते हुए देखा है।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.स्कूटर और कार को चलाने के लिए किसकी ज़रूरत होती है?पेट्रोल या डीज़ल की।
2.रसोई में खाना पकाने के लिए किस गैस का प्रयोग होता है?एलपीजी (LPG) गैस का।
3.बच्चों, क्या आपको इसके बारे में और कुछ पता है?छात्र अपने विचार रखते हैं।
4.क्या यह हमारे आस-पास के पर्यावरण का हिस्सा है?हाँ, बिल्कुल।
5.अगर ज़मीन से पेट्रोल निकलना बंद हो जाए, तो क्या होगा?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

बच्चों, आज हम सोचेंगे कि ‘अगर ईंधन खत्म हो जाए तो क्या होगा?’ और पेट्रोलियम (Petroleum) को कैसे बचाया जा सकता है।

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
पेट्रोलियम कैसे बनता है?ज़मीन के बहुत नीचे, लाखों साल पहले दबे हुए पेड़-पौधों और जानवरों के गलने-सड़ने से पेट्रोलियम (कच्चा तेल) बनता है। इसे बनने में लाखों साल लगते हैं।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे।निर्माण: लाखों सालों में (ज़मीन के नीचे)
कच्चे तेल (Petroleum) से क्या मिलता है?इस काले और गाढ़े तेल को रिफाइनरी में साफ़ करके पेट्रोल, डीज़ल, केरोसिन (मिट्टी का तेल), LPG, इंजन ऑयल और वैक्स (Wax) प्राप्त किया जाता है।छात्र चित्र देखेंगे और नाम लिखेंगे।उत्पाद: पेट्रोल, डीज़ल, LPG, मिट्टी का तेल
ईंधन खत्म होने का खतराईंधन बहुत तेज़ी से इस्तेमाल हो रहा है। चूंकि इसे बनने में लाखों साल लगते हैं, इसलिए अगर हम इसे नहीं बचाएंगे, तो यह बहुत जल्दी खत्म हो जाएगा।छात्र गंभीरता से सुनेंगे।ईंधन बहुत सीमित है।
ईंधन कैसे बचाएं?ट्रैफिक लाइट पर गाड़ी का इंजन बंद कर दें। निजी कार के बजाय बस या ट्रेन (सार्वजनिक परिवहन) का उपयोग करें। सौर ऊर्जा (Solar energy) का ज़्यादा प्रयोग करें।छात्र अपनी कॉपी में लिखेंगे।बचाव: लाइट पर इंजन बंद, बस का प्रयोग

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. पेट्रोल और डीज़ल हमें कहाँ से प्राप्त होते हैं?
  2. कच्चे तेल से मिलने वाली किन्हीं तीन चीज़ों के नाम बताइए।
  3. ईंधन बचाने का एक आसान तरीका बताइए।

10. गृहकार्य (Homework):

अपने आस-पास उपयोग होने वाले किन्हीं 5 ईंधनों के नाम और उनका उपयोग लिखकर लाएं।

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D.El.Ed EVS Lesson Plan 26: पाठ योजना क्रमांक – 26

योजना प्रकार: D.El.Ed EVS Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 5
कालांश: ………………..
विषय: पर्यावरण अध्ययन (EVS)
उपविषय: पर्यावरण (Environment)
प्रकरण: पहाड़ों पर चढ़े (बछेंद्री पाल और पर्वतारोहण)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. छात्रों में साहस, नेतृत्व क्षमता और टीम भावना विकसित करना।
  2. भारत के गौरवशाली व्यक्तित्वों से परिचित कराना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘पहाड़ों पर चढ़े (बछेंद्री पाल और पर्वतारोहण)’ पाठ में आए नवीन तथ्यों का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे। विद्यार्थी प्रकरण के महत्व को समझ सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘पहाड़ों पर चढ़े (बछेंद्री पाल और पर्वतारोहण)’ पाठ के विषय को समझकर अपने शब्दों में व्यक्त कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी पाठ से प्राप्त ज्ञान और समझ का अपने व्यावहारिक जीवन में उपयोग कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी उचित हाव-भाव के साथ पर्यावरण से संबंधित गतिविधियों को करने का कौशल प्राप्त करेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी पर्यावरण अध्ययन की अन्य रोचक पुस्तकों/कहानियों को पढ़ने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में प्रकृति, जानवरों और अपने आस-पास के परिवेश के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

माउंट एवरेस्ट का चित्र, बछेंद्री पाल का चित्र, पर्वतारोहियों के उपकरण (रस्सी, स्लीपिंग बैग, ऑक्सीजन सिलेंडर) के चित्र।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रश्नोत्तर प्रविधि, स्पष्टीकरण विधि, और प्रदर्शन/गतिविधि आधारित विधि।

5. पूर्व ज्ञान:

छात्रों ने पहाड़ों के चित्र देखे हैं और ट्रैकिंग के बारे में सुना है।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.दुनिया का सबसे ऊंचा पहाड़ कौन-सा है?माउंट एवरेस्ट।
2.पहाड़ों पर चढ़ने वालों को क्या कहते हैं?पर्वतारोही (Mountaineers)।
3.बच्चों, क्या आपको इसके बारे में और कुछ पता है?छात्र अपने विचार रखते हैं।
4.क्या यह हमारे आस-पास के पर्यावरण का हिस्सा है?हाँ, बिल्कुल।
5.क्या आप जानते हैं माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने वाली पहली भारतीय महिला कौन थी?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

बच्चों, आज हम पहाड़ों पर चढ़ने के रोमांचक अनुभव और माउंट एवरेस्ट पर फतह हासिल करने वाली पहली भारतीय महिला ‘बछेंद्री पाल’ के बारे में पढ़ेंगे।

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
पर्वतारोहण (Mountaineering) क्या है?बर्फ से ढके ऊंचे पहाड़ों पर चढ़ना बहुत मुश्किल और जोखिम भरा होता है, इसे पर्वतारोहण कहते हैं। इसके लिए खास ट्रेनिंग और उपकरणों (रस्सी, ऑक्सीजन) की ज़रूरत होती है।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे।पर्वतारोहण: ऊंचे पहाड़ों पर चढ़ना
बछेंद्री पाल की कहानीबछेंद्री पाल उत्तराखंड की रहने वाली हैं। 23 मई 1984 को दोपहर 1:07 बजे उन्होंने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट (8848 मीटर) पर कदम रखा।छात्र गर्व महसूस करेंगे और सुनेंगे।बछेंद्री पाल: पहली भारतीय महिला (एवरेस्ट)
माउंट एवरेस्ट के बारे मेंमाउंट एवरेस्ट की ऊंचाई 8848 मीटर है। इसे नेपाल में ‘सागरमाथा’ (Sagarmatha) कहा जाता है।छात्र ऊंचाई नोट करेंगे।एवरेस्ट (8848m), नेपाल में सागरमाथा
टीम भावना (Teamwork)पहाड़ों पर चढ़ते समय ग्रुप लीडर की बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी होती है। वह कमज़ोर सदस्यों को आगे रखता है और सबका सामान उठाने में मदद करता है।छात्र लीडर के गुणों को लिखेंगे।लीडर: सबकी मदद करना, पीछे चलना

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने वाली पहली भारतीय महिला कौन थीं?
  2. पर्वतारोहियों को ऑक्सीजन सिलेंडर क्यों ले जाना पड़ता है?
  3. नेपाल में माउंट एवरेस्ट को किस नाम से जाना जाता है?

10. गृहकार्य (Homework):

एक ग्रुप लीडर में कौन-कौन से गुण होने चाहिए? 5 बिंदु लिखकर लाएं।

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D.El.Ed EVS Lesson Plan 27: पाठ योजना क्रमांक – 27

योजना प्रकार: D.El.Ed EVS Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 5
कालांश: ………………..
विषय: पर्यावरण अध्ययन (EVS)
उपविषय: पर्यावरण (Environment)
प्रकरण: आसमान में (सुनीता विलियम्स और अंतरिक्ष)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. छात्रों में ब्रह्मांड और अंतरिक्ष विज्ञान (Space Science) के प्रति रुचि उत्पन्न करना।
  2. गुरुत्वाकर्षण बल (Gravity) का प्रारंभिक ज्ञान देना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘आसमान में (सुनीता विलियम्स और अंतरिक्ष)’ पाठ में आए नवीन तथ्यों का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे। विद्यार्थी प्रकरण के महत्व को समझ सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘आसमान में (सुनीता विलियम्स और अंतरिक्ष)’ पाठ के विषय को समझकर अपने शब्दों में व्यक्त कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी पाठ से प्राप्त ज्ञान और समझ का अपने व्यावहारिक जीवन में उपयोग कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी उचित हाव-भाव के साथ पर्यावरण से संबंधित गतिविधियों को करने का कौशल प्राप्त करेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी पर्यावरण अध्ययन की अन्य रोचक पुस्तकों/कहानियों को पढ़ने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में प्रकृति, जानवरों और अपने आस-पास के परिवेश के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

सुनीता विलियम्स का चित्र, अंतरिक्ष यान (Spacecraft) और पृथ्वी (Globe) का मॉडल।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रश्नोत्तर प्रविधि, स्पष्टीकरण विधि, और प्रदर्शन/गतिविधि आधारित विधि।

5. पूर्व ज्ञान:

छात्रों ने आसमान में चाँद, तारे और सूरज देखे हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.जब हम कोई गेंद ऊपर उछालते हैं, तो क्या होता है?वह नीचे आ जाती है।
2.गेंद नीचे क्यों आती है?पृथ्वी के खिंचाव (गुरुत्वाकर्षण) के कारण।
3.बच्चों, क्या आपको इसके बारे में और कुछ पता है?छात्र अपने विचार रखते हैं।
4.क्या यह हमारे आस-पास के पर्यावरण का हिस्सा है?हाँ, बिल्कुल।
5.क्या अंतरिक्ष में भी चीज़ें नीचे गिरती हैं?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

बच्चों, आज हम अंतरिक्ष में जाने वाली मशहूर अंतरिक्ष यात्री ‘सुनीता विलियम्स’ और अंतरिक्ष (Space) के अनोखे रहस्यों के बारे में जानेंगे।

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
सुनीता विलियम्ससुनीता विलियम्स भारतीय मूल की एक अंतरिक्ष यात्री हैं, जिन्होंने अंतरिक्ष में सबसे लंबे समय तक रहने का रिकॉर्ड बनाया था। वे स्पेसशिप (Spacecraft) में बैठकर पृथ्वी से बहुत दूर गई थीं।छात्र सुनीता विलियम्स का चित्र देखेंगे।सुनीता विलियम्स: अंतरिक्ष यात्री
अंतरिक्ष में जीवन (Zero Gravity)अंतरिक्ष में पृथ्वी जैसा खिंचाव (Gravity) नहीं होता। वहाँ लोग चल नहीं सकते, वे हवा में तैरते रहते हैं। पानी भी बूंदों (Blobs) के रूप में हवा में तैरता है।छात्र आश्चर्यचकित होकर सुनेंगे।अंतरिक्ष में कोई गुरुत्वाकर्षण नहीं (सब तैरता है)
बाल हमेशा खड़े रहनागुरुत्वाकर्षण न होने के कारण अंतरिक्ष यान में अंतरिक्ष यात्रियों के बाल हमेशा ऊपर की तरफ खड़े रहते हैं। वहाँ कंघी करने की ज़रूरत नहीं होती।छात्र हंसेंगे और कारण लिखेंगे।बाल हवा में खड़े रहते हैं
पृथ्वी का आकारअंतरिक्ष से देखने पर हमारी पृथ्वी बहुत सुंदर और एकदम गोल (गेंद जैसी) दिखाई देती है, जिसमें सिर्फ नीले (समुद्र) और हरे (ज़मीन) हिस्से नज़र आते हैं।छात्र ग्लोब देखेंगे।पृथ्वी अंतरिक्ष से नीली और गोल दिखती है।

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. अंतरिक्ष में पानी कैसे पीना पड़ता है?
  2. अंतरिक्ष में बाल हमेशा खड़े क्यों रहते हैं?
  3. अंतरिक्ष से हमारी पृथ्वी किस रंग की दिखाई देती है और क्यों?

10. गृहकार्य (Homework):

अंतरिक्ष यान (Spacecraft) और पृथ्वी का चित्र बनाकर लाएं।

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D.El.Ed EVS Lesson Plan 28: पाठ योजना क्रमांक – 28

योजना प्रकार: D.El.Ed EVS Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 5
कालांश: ………………..
विषय: पर्यावरण अध्ययन (EVS)
उपविषय: पर्यावरण (Environment)
प्रकरण: जब धरती काँपी (भूकंप)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. छात्रों को प्राकृतिक आपदाओं (Natural Disasters) के प्रति जागरूक करना।
  2. आपदा के समय बचाव के उपाय सिखाना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘जब धरती काँपी (भूकंप)’ पाठ में आए नवीन तथ्यों का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे। विद्यार्थी प्रकरण के महत्व को समझ सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘जब धरती काँपी (भूकंप)’ पाठ के विषय को समझकर अपने शब्दों में व्यक्त कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी पाठ से प्राप्त ज्ञान और समझ का अपने व्यावहारिक जीवन में उपयोग कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी उचित हाव-भाव के साथ पर्यावरण से संबंधित गतिविधियों को करने का कौशल प्राप्त करेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी पर्यावरण अध्ययन की अन्य रोचक पुस्तकों/कहानियों को पढ़ने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में प्रकृति, जानवरों और अपने आस-पास के परिवेश के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

भूकंप से हुए नुकसान का चित्र, मेज़ (बचाव का डेमो देने के लिए)।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रश्नोत्तर प्रविधि, स्पष्टीकरण विधि, और प्रदर्शन/गतिविधि आधारित विधि।

5. पूर्व ज्ञान:

छात्र जानते हैं कि आंधी-तूफान जैसी घटनाएं नुकसान पहुंचाती हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.जब बहुत तेज़ हवा चलती है, तो क्या होता है?पेड़ गिर जाते हैं और टीन उड़ जाते हैं।
2.जब ज़मीन अचानक तेज़ी से हिलने लगे, तो उसे क्या कहते हैं?भूकंप (Earthquake)।
3.बच्चों, क्या आपको इसके बारे में और कुछ पता है?छात्र अपने विचार रखते हैं।
4.क्या यह हमारे आस-पास के पर्यावरण का हिस्सा है?हाँ, बिल्कुल।
5.भूकंप आने पर हमें अपनी जान कैसे बचानी चाहिए?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

बच्चों, आज हम एक भयानक प्राकृतिक आपदा ‘भूकंप’ (Earthquake) और उससे बचने के तरीकों (Safety Rules) के बारे में विस्तार से पढ़ेंगे।

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
भूकंप क्या है?पृथ्वी के अंदर की चट्टानों के खिसकने से ज़मीन अचानक तेज़ी से कांपने (हिलने) लगती है। इसे भूकंप कहते हैं।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे।भूकंप: ज़मीन का कांपना
कच्छ (गुजरात) का भूकंप26 जनवरी 2001 को गुजरात के भुज और कच्छ इलाके में बहुत भयंकर भूकंप आया था, जिसमें कई इमारतें गिर गईं और हज़ारों लोगों की जान चली गई थी।छात्र घटना को सुनेंगे।26 जनवरी 2001: गुजरात में भूकंप
भूकंप आने पर बचाव (नियम 1)भूकंप आते ही सबसे पहले घर से बाहर किसी खुले मैदान में भाग जाना चाहिए, जहाँ आस-पास ऊंची इमारतें या पेड़ न हों।छात्र अपनी कॉपी में नियम लिखेंगे।नियम 1: खुले मैदान में भागो
भूकंप आने पर बचाव (नियम 2)अगर बाहर भागना मुमकिन न हो, तो किसी मजबूत मेज़ (Table) या पलंग के नीचे छिप जाएं और उसे कसकर पकड़ लें ताकि सिर पर कुछ न गिरे।छात्र मेज़ के नीचे छिपने का डेमो देखेंगे।नियम 2: मजबूत मेज़ के नीचे छिपो

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. भूकंप किसे कहते हैं?
  2. गुजरात के कच्छ में भयानक भूकंप कब आया था?
  3. भूकंप आने पर अगर आप घर में फंस जाएं, तो क्या करेंगे?

10. गृहकार्य (Homework):

भूकंप के अलावा किन्हीं दो अन्य प्राकृतिक आपदाओं (बाढ़, तूफान आदि) के नाम और चित्र अपनी कॉपी में लगाएं।

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D.El.Ed EVS Lesson Plan 29: पाठ योजना क्रमांक – 29

योजना प्रकार: D.El.Ed EVS Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 5
कालांश: ………………..
विषय: पर्यावरण अध्ययन (EVS)
उपविषय: पर्यावरण (Environment)
प्रकरण: बूँद-बूँद दरिया-दरिया (घड़सीसर तालाब)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. छात्रों को भारतीय इतिहास की जल संरक्षण प्रणाली से जोड़ना।
  2. सामुदायिक कार्यों (Community work) का महत्व समझाना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘बूँद-बूँद दरिया-दरिया (घड़सीसर तालाब)’ पाठ में आए नवीन तथ्यों का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे। विद्यार्थी प्रकरण के महत्व को समझ सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘बूँद-बूँद दरिया-दरिया (घड़सीसर तालाब)’ पाठ के विषय को समझकर अपने शब्दों में व्यक्त कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी पाठ से प्राप्त ज्ञान और समझ का अपने व्यावहारिक जीवन में उपयोग कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी उचित हाव-भाव के साथ पर्यावरण से संबंधित गतिविधियों को करने का कौशल प्राप्त करेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी पर्यावरण अध्ययन की अन्य रोचक पुस्तकों/कहानियों को पढ़ने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में प्रकृति, जानवरों और अपने आस-पास के परिवेश के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

घड़सीसर तालाब और उसके घाटों का चित्र, राजस्थान के नक्शे में जैसलमेर।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रश्नोत्तर प्रविधि, स्पष्टीकरण विधि, और प्रदर्शन/गतिविधि आधारित विधि।

5. पूर्व ज्ञान:

छात्रों ने अपने गांव या शहर में तालाब (Pond) देखे हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.राजस्थान में कैसा मौसम होता है?बहुत गर्मी और सूखा।
2.क्या राजस्थान में ज़्यादा बारिश होती है?नहीं, बहुत कम बारिश होती है।
3.बच्चों, क्या आपको इसके बारे में और कुछ पता है?छात्र अपने विचार रखते हैं।
4.क्या यह हमारे आस-पास के पर्यावरण का हिस्सा है?हाँ, बिल्कुल।
5.वहाँ के राजा-महाराजा पानी की कमी को पूरा करने के लिए क्या बनाते थे?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

बच्चों, आज हम राजस्थान के जैसलमेर में राजा घड़सी द्वारा बनाए गए एक अनोखे तालाब ‘घड़सीसर’ की कहानी पढ़ेंगे और पुराने समय के जल संरक्षण को समझेंगे।

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
घड़सीसर तालाब‘सर’ का मतलब होता है तालाब। जैसलमेर (राजस्थान) के राजा घड़सी ने लगभग 650 साल पहले लोगों के साथ मिलकर एक बहुत बड़ा तालाब बनवाया था, जिसे घड़सीसर कहते हैं।छात्र चित्र में घड़सीसर देखेंगे।घड़सीसर: जैसलमेर के राजा घड़सी ने बनाया।
तालाब की बनावटइस तालाब के चारों ओर पक्के घाट, सजे हुए बरामदे, कमरे और बड़े हॉल बनाए गए थे। यहाँ लोग त्योहार मनाने और गाना-बजाना करने आते थे।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे।सुंदर पक्के घाट और कमरे।
आपस में जुड़े हुए 9 तालाबयह तालाब इतना बड़ा था और इस तरह ढलान पर बना था कि जब एक तालाब भर जाता, तो पानी बहकर नीचे बने दूसरे तालाब में चला जाता था। इस तरह कुल 9 तालाब आपस में जुड़े थे।छात्र इंजीनियरिंग कौशल पर आश्चर्य करेंगे।9 तालाब ढलान पर जुड़े थे।
अल-बिरूनी (Al-Biruni)उज़बेकिस्तान से आए एक यात्री ‘अल-बिरूनी’ ने भारत के तालाबों और उन्हें बनाने वाले लोगों की बहुत तारीफ की थी। उसने लिखा कि भारतीय लोग तालाब बनाने में माहिर हैं।छात्र यात्री का नाम अपनी कॉपी में लिखेंगे।अल-बिरूनी (उज़बेकिस्तान का यात्री)

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. घड़सीसर तालाब किस राजा ने बनवाया था?
  2. यह तालाब भारत के किस राज्य और शहर में है?
  3. अल-बिरूनी कौन था और वह कहाँ से आया था?

10. गृहकार्य (Homework):

अपने आस-पास मौजूद किसी पुराने तालाब या बावड़ी का नाम और उसके बारे में 3 लाइनें लिखकर लाएं।

Part of our 180+ free D.El.Ed / BSTC EVS Lesson Plans collection.

D.El.Ed EVS Lesson Plan 30: पाठ योजना क्रमांक – 30

योजना प्रकार: D.El.Ed EVS Lesson Plan
दिनांक: ………………..
कक्षा: 5
कालांश: ………………..
विषय: पर्यावरण अध्ययन (EVS)
उपविषय: पर्यावरण (Environment)
प्रकरण: किसका जंगल? (तोरांग और सूर्यमणि)
समय: 35-40 मिनट

1. सामान्य उद्देश्य:

  1. छात्रों में आदिवासी समाज और जंगलों के प्रति संवेदनशीलता विकसित करना।
  2. वन संरक्षण (Forest Conservation) के महत्व को समझाना।

2. विशिष्ट उद्देश्य एवं अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन:

विशिष्ट उद्देश्यआपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
ज्ञानात्मकविद्यार्थी ‘किसका जंगल? (तोरांग और सूर्यमणि)’ पाठ में आए नवीन तथ्यों का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे। विद्यार्थी प्रकरण के महत्व को समझ सकेंगे।
अवबोधविद्यार्थी ‘किसका जंगल? (तोरांग और सूर्यमणि)’ पाठ के विषय को समझकर अपने शब्दों में व्यक्त कर सकेंगे।
अनुप्रयोगविद्यार्थी पाठ से प्राप्त ज्ञान और समझ का अपने व्यावहारिक जीवन में उपयोग कर सकेंगे।
कौशलविद्यार्थी उचित हाव-भाव के साथ पर्यावरण से संबंधित गतिविधियों को करने का कौशल प्राप्त करेंगे।
अभिरुचिविद्यार्थी पर्यावरण अध्ययन की अन्य रोचक पुस्तकों/कहानियों को पढ़ने में रुचि लेंगे।
अभिवृत्तिविद्यार्थियों में प्रकृति, जानवरों और अपने आस-पास के परिवेश के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होगा।

3. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM):

घने जंगल का चित्र, आदिवासी लोगों की जीवनशैली का चित्र, भारत का राजनीतिक मानचित्र (झारखंड दिखाने के लिए)।

4. शिक्षण विधि/प्रविधि:

प्रश्नोत्तर प्रविधि, स्पष्टीकरण विधि, और प्रदर्शन/गतिविधि आधारित विधि।

5. पूर्व ज्ञान:

छात्र जानते हैं कि जंगलों में बहुत सारे पेड़ और जंगली जानवर होते हैं।

6. प्रस्तावना प्रश्न:

क्र.सं.छात्राध्यापक क्रियाएँ (Teacher Activity)छात्र क्रियाएँ (Student Activity)
1.जंगलों से हमें क्या-क्या मिलता है?लकड़ी, फल, जड़ी-बूटियां और ताज़ी हवा।
2.जो लोग हमेशा जंगलों में रहते हैं, उन्हें क्या कहते हैं?आदिवासी (Tribals)।
3.बच्चों, क्या आपको इसके बारे में और कुछ पता है?छात्र अपने विचार रखते हैं।
4.क्या यह हमारे आस-पास के पर्यावरण का हिस्सा है?हाँ, बिल्कुल।
5.अगर हम सारे जंगल काट देंगे, तो आदिवासियों का क्या होगा?(समस्यात्मक / निरुत्तर)

7. उद्देश्य कथन:

बच्चों, आज हम झारखंड की रहने वाली ‘सूर्यमणि’ नाम की एक साहसी आदिवासी लड़की और जंगल बचाने की उसकी कहानी (‘किसका जंगल?’) पढ़ेंगे।

8. प्रस्तुतीकरण:

शिक्षण बिंदुछात्राध्यापक क्रियाएँछात्र क्रियाएँश्यामपट्ट सार
सूर्यमणि और जंगलसूर्यमणि झारखंड की एक आदिवासी लड़की है। वह मानती है कि जंगल आदिवासियों का ‘सांझा बैंक’ (Common Bank) है। आदिवासी लोग अपनी ज़रूरत की हर चीज़ जंगल से लेते हैं, लेकिन जंगल को नुकसान नहीं पहुंचाते।छात्र ध्यानपूर्वक सुनेंगे।जंगल आदिवासियों का सांझा बैंक है।
कुड़ुक भाषा और तोरांगझारखंड के आदिवासी ‘कुड़ुक’ भाषा बोलते हैं। कुड़ुक भाषा में जंगल को ‘तोरांग’ (Torang) कहा जाता है।छात्र तोरांग का अर्थ अपनी कॉपी में लिखेंगे।कुड़ुक भाषा: तोरांग = जंगल
सूर्यमणि का काम (केंद्र)सूर्यमणि ने अपनी संस्कृति और जड़ी-बूटियों के ज्ञान को बचाने के लिए एक केंद्र खोला, जिसका नाम ‘तोरांग’ रखा। वह बच्चों को जंगल के महत्व के बारे में सिखाती है।छात्र सूर्यमणि के काम की प्रशंसा करेंगे।सूर्यमणि का केंद्र: तोरांग
जंगल अधिकार कानून 2007यह कानून उन आदिवासियों को जंगल की ज़मीन पर अधिकार देता है, जो कम से कम 25 सालों से जंगल में रह रहे हैं। उन्हें वहां से हटाया नहीं जा सकता।छात्र कानून का वर्ष नोट करेंगे।जंगल अधिकार कानून 2007 (25 साल)

9. पुनरावृत्ति / मूल्यांकन प्रश्न:

  1. कुड़ुक भाषा में जंगल को क्या कहा जाता है?
  2. सूर्यमणि किस राज्य की रहने वाली है?
  3. जंगल अधिकार कानून 2007 क्या है?

10. गृहकार्य (Homework):

पेड़ और जंगल बचाने के लिए आप क्या-क्या कर सकते हैं? अपने विचार 5 वाक्यों में लिखिए।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. D.El.Ed / BSTC के लिए EVS (पर्यावरण अध्ययन) लेसन प्लान कैसे बनाएं?

Ans: D.El.Ed/BSTC के लिए EVS पाठ योजना बनाते समय ‘हर्बर्ट की पंचपदीय प्रणाली’ (Herbartian Approach) का पालन करें। इसमें प्रस्तावना प्रश्न, उद्देश्य कथन, प्रस्तुतीकरण, पुनरावृत्ति और गृहकार्य शामिल होते हैं। EVS में सबसे महत्वपूर्ण भाग ‘गतिविधि’ (Activity) और ‘प्रयोग’ (Experiments) होता है।

Q2. क्या ये EVS लेसन प्लान्स (कक्षा 3 से 5) NCERT पाठ्यक्रम पर आधारित हैं?

Ans: जी हाँ, हमारे द्वारा उपलब्ध कराए गए सभी 30 EVS लेसन प्लान्स पूरी तरह से नवीनतम NCERT (आस-पास / Looking Around) और SCERT (RBSE, UPBTC) पाठ्यक्रम पर आधारित हैं। इन्हें DIET के मानकों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।

Q3. EVS लेसन प्लान में प्रस्तावना प्रश्न (Introductory Questions) कैसे होने चाहिए?

Ans: EVS में प्रस्तावना प्रश्न हमेशा बच्चों के दैनिक जीवन और उनके ‘पूर्व ज्ञान’ (Previous Knowledge) से जुड़े होने चाहिए। अंतिम प्रश्न हमेशा समस्यात्मक (Problematic) होना चाहिए, जो सीधे आज के प्रकरण (Topic) से जुड़ता हो।

Q4. मैं कक्षा 1 और 2 के EVS लेसन प्लान्स कहाँ से प्राप्त कर सकता हूँ?

Ans: NCERT पाठ्यक्रम के अनुसार कक्षा 1 और 2 में पर्यावरण अध्ययन (EVS) की कोई अलग किताब नहीं होती है। बच्चों को EVS का ज्ञान भाषा (हिंदी/अंग्रेजी) और गणित के माध्यम से ही दिया जाता है। इसलिए EVS के लेसन प्लान्स कक्षा 3 से शुरू होते हैं।

Q5. How many EVS lesson plans are required for the D.El.Ed internship?

Ans: Usually, during the D.El.Ed / BSTC school internship, a student-teacher has to prepare 10 to 15 daily lesson plans specifically for Environmental Studies (EVS), along with other subjects like Hindi, Maths, and English.

Q6. Are these EVS lesson plans suitable for UP BTC and Haryana JBT?

Ans: Yes, absolutely! These Class 3 to 5 EVS lesson plans are based on the common primary syllabus and the Herbartian approach, making them 100% suitable for UP BTC, Haryana JBT, Rajasthan BSTC, and all other state D.El.Ed courses.

Q7. Where can I find D.El.Ed / BSTC EVS Lesson Plans PDF Download Free?

Ans: You can get the D.El.Ed / BSTC EVS Lesson Plans PDF Download Free directly from our website. We have provided dedicated PDF download buttons in every lesson plan section above.

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अपनी इंटर्नशिप डायरी को बेहतरीन बनाने के लिए, आप हमारे प्लेटफॉर्म पर अन्य इंटर्नशिप फाइल्स (जैसे Micro Teaching, Observation, Action Research) भी प्राप्त कर सकते हैं। अपने EVS लेसन प्लान्स को अधिक प्रामाणिक बनाने के लिए आप RBSE (राजस्थान BSTC), UP DElEd/BTC (उत्तर प्रदेश), SCERT Haryana (JBT), SCERT Delhi (DIET), HPBOSE (हिमाचल प्रदेश), MPBSE / RSK (मध्य प्रदेश) और NCERT की आधिकारिक पर्यावरण अध्ययन (आस-पास) की पाठ्यपुस्तकों का संदर्भ ले सकते हैं। इसके अलावा शिक्षण के मानकों को समझने के लिए आप NCTE (राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद) के दिशा-निर्देशों का अध्ययन भी कर सकते हैं।

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